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पत्रकार के सवाल पूछे जाने पर भड़के राहुल गाँधी, फिर करदी पिटाई

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इनी दिनों कांग्रेस पार्टी के लीडर राहुल गाँधी यूपी के रायबरेली में भारत जोड़ो यात्रा निकल रहे है | इस यात्रा के दौरान राहुल गाँधी एक पत्रकार के दुवारा पूछे गए सवालों पर भड़क उठे | और उन्होंने उसकी जाति, नाम और मालिक तक का नाम पूछ लिया | इसके बाद कांग्रेस पार्टी के समर्थकों ने उस पत्रकार को पकड़ किया और उसके साथ मारपीट करने लगे | अब इस अभद्रता का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है |

दरअसल, राहुल गाँधी की न्याय यात्रा के दौरान सुपर मार्केट में नुक्कड़ सभा चल रही थी | इसी दौरान एक पत्रकार ने राहुल गाँधी से सवाल पूछा| सवाल का जवाब देने की बजाये राहुल गाँधी उस पत्रकार पर भड़क गए और उसे जलील करने लगे | इसके बाद कांग्रेस पार्टी के समर्थको ने उस पत्रकार को घेर लिया और मरने पीटने लगे | हालांकि कार्यकर्ताओं को उकसाने के बाद राहुल गांधी यह भी कहते नजर आए कि उसे मत मारो.
इसयात्रा का वीडियो भी सामने आया है जिसमे साफ देखा जा सकता है की एक पत्रकार को भीड़ ने घेर रखा है | दूसरी तरफ राहुल गाँधी उस पत्रकार से उसकी जाति, उसका नाम और मीडिया हाउस का नाम पूछते नजर आ रहे हैं. राहुल गांधी पूछ रहे हैं, ” किस मीडिया के हैं आप? नाम क्य़ा है आपका? आप शिव प्रसाद जी हैं. आपके मालिक का क्या नाम है? क्या नाम है? नाम बताओ. नाम बताओ… ओए मारो मत यार. मारो मत उसको. नाम बताओ उसका. वो ओबीसी है, नहीं. वो दलित है नहीं. वो आदिवासी है, नहीं. अरबपति है वो.” इस वीडियो के वायरल होने के बाद विपक्ष पार्टयों ने निशाना साधन भी शुरू कर दिए है |

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वेनेजुएला में दो भीषण भूकंपों ने मचाई तबाही, आपातकाल घोषित

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वेनेजुएला में प्रकृति ने भारी तबाही मचाई है। देश कुछ ही सेकंड के अंतराल में आए दो शक्तिशाली भूकंपों से हिल उठा। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के अनुसार पहला भूकंप 7.2 तीव्रता का था, जिसके करीब 40 सेकंड बाद 7.5 तीव्रता का एक और अधिक शक्तिशाली भूकंप आया। दोनों भूकंपों का केंद्र मोरोन क्षेत्र के पास था और इनके झटके उत्तरी वेनेजुएला के बड़े हिस्से में महसूस किए गए।

राजधानी कराकस समेत कई शहरों में बहुमंजिला इमारतें ढह गईं, जबकि सड़कों और बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है। बचाव दल मलबे में फंसे लोगों को निकालने के लिए लगातार राहत एवं बचाव कार्य में जुटे हुए हैं। शुरुआती जानकारी के मुताबिक कम से कम 32 लोगों की मौत हो चुकी है और 700 से अधिक लोग घायल हुए हैं। हालांकि मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कार्यकारी राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने देश में आपातकाल की घोषणा कर दी है। स्कूलों और गैर-जरूरी गतिविधियों को अगले आदेश तक स्थगित कर दिया गया है, जबकि स्वास्थ्य और राहत एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।

कराकस के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को भी भारी नुकसान पहुंचा है, जिसके चलते उसे अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। देश के कई हिस्सों में बिजली, पानी और संचार सेवाएं प्रभावित हुई हैं। भूकंपों के बाद करीब 20 आफ्टरशॉक भी दर्ज किए गए हैं, जिससे लोगों में दहशत का माहौल बना हुआ है।

भूकंप के बाद प्यूर्टो रिको और वर्जिन द्वीप समूह के लिए सुनामी की चेतावनी जारी की गई थी, लेकिन बाद में इसे वापस ले लिया गया।

इस तबाही पर दुनिया भर के नेताओं ने दुख व्यक्त किया है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वेनेजुएला के लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि भारत इस कठिन समय में वेनेजुएला के साथ खड़ा है और हर संभव सहायता प्रदान करने के लिए तैयार है।

वहीं USGS ने चेतावनी दी है कि यह एक व्यापक आपदा साबित हो सकती है। एजेंसी के शुरुआती आकलन के अनुसार जान-माल का नुकसान काफी बड़ा हो सकता है और वास्तविक स्थिति राहत एवं बचाव कार्य पूरा होने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी।

इस बीच एशिया के देश जापान में भी एक तेज भूकंप महसूस किया गया है, जिसके बाद दुनिया भर के भूकंप वैज्ञानिक प्रशांत और कैरेबियाई क्षेत्रों की भूकंपीय गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं।

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अमेरिका-ईरान समझौते की उम्मीदों से कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट, पेट्रोल-डीजल भी हो सकता है सस्ता!

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अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से गिरावट दर्ज की जा रही है। अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते तथा होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए तेल आपूर्ति सामान्य होने की उम्मीदों ने वैश्विक तेल बाजार को राहत दी है। इसके साथ ही भारत में भी लोगों की नजरें पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर टिकी हुई हैं।

हाल ही में पश्चिम एशिया में तनाव और युद्ध जैसे हालात के कारण कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हुई थी। इसके चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल देखने को मिला और इसका असर भारत समेत कई देशों के ईंधन बाजार पर भी पड़ा।

अब हालात बदलते नजर आ रहे हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत आगे बढ़ने तथा होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए तेल परिवहन सामान्य होने की संभावनाओं के चलते कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई है। वैश्विक बाजार में WTI कच्चा तेल घटकर 80.47 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है, जबकि ब्रेंट क्रूड करीब 4 प्रतिशत गिरकर 83.28 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है। वहीं इंडियन बास्केट में भी कच्चे तेल की कीमत लगभग 93.19 डॉलर प्रति बैरल दर्ज की गई है।

हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें केवल कच्चे तेल की कीमतों पर निर्भर नहीं करतीं। इनमें केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा लगाए जाने वाले टैक्स, रिफाइनिंग लागत, परिवहन खर्च और तेल कंपनियों का मार्जिन भी शामिल होता है।

यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक निचले स्तर पर बनी रहती हैं और तेल कंपनियों को लागत में स्थायी राहत मिलती है, तो देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कमी देखने को मिल सकती है।

ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों के अनुसार यदि ब्रेंट क्रूड की कीमत मौजूदा स्तर से नीचे बनी रहती है, तो आने वाले हफ्तों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 1 से 3 रुपये प्रति लीटर तक की कटौती संभव है। हालांकि इस संबंध में अंतिम फैसला तेल विपणन कंपनियों और सरकार की कर नीति पर निर्भर करेगा।

पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कमी का सीधा लाभ आम लोगों को मिल सकता है। इससे परिवहन लागत कम होगी, महंगाई पर दबाव घटेगा और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों में भी स्थिरता आ सकती है। इसके अलावा हवाई किराए, लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक उत्पादन की लागत में भी कमी आ सकती है, जिससे देश की अर्थव्यवस्था को बड़ा फायदा मिल सकता है।

अब यह देखना दिलचस्प होगा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई यह नरमी भारतीय उपभोक्ताओं को कब और कितनी राहत दिला पाती है।

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अकाली दल को बड़ा झटका! मनप्रीत इयाली ‘वारिस पंजाब दे’ में हुए शामिल

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पंजाब की राजनीति में एक अहम घटनाक्रम सामने आया है। दाखा से शिरोमणि अकाली दल के विधायक मनप्रीत सिंह इयाली मंगलवार को औपचारिक रूप से ‘वारिस पंजाब दे’ संगठन में शामिल हो गए। उनके इस फैसले को पंजाब की पंथक राजनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।

संगठन में शामिल होने के बाद मनप्रीत सिंह इयाली ने कहा कि उन्होंने बिना किसी शर्त और पद की अपेक्षा के इस मंच का साथ चुना है। उनका उद्देश्य पंजाब की पंथक और क्षेत्रीय ताकतों को एकजुट करना तथा राज्य से जुड़े अहम मुद्दों को मजबूती से उठाना है।

इयाली ने स्पष्ट किया कि वह फिलहाल विधायक पद से इस्तीफा नहीं देंगे। उन्होंने कहा कि कानूनी और तकनीकी रूप से वह अभी भी शिरोमणि अकाली दल के विधायक हैं। उन्होंने बताया कि ‘वारिस पंजाब दे’ फिलहाल एक सामाजिक और संगठनात्मक मंच है, न कि चुनाव आयोग में पंजीकृत राजनीतिक दल, इसलिए विधायक पद छोड़ने का कोई सवाल नहीं उठता।

उन्होंने कहा कि पंजाब के कई महत्वपूर्ण मुद्दे लंबे समय से लंबित हैं, जिनमें राज्य के पानी का मुद्दा, पंजाबी भाषी क्षेत्रों का मामला, चंडीगढ़ पर पंजाब का अधिकार और अन्य क्षेत्रीय हित शामिल हैं। इन मुद्दों को नई ऊर्जा और मजबूती के साथ उठाया जाएगा।

मनप्रीत इयाली ने कहा कि पंजाब, पंजाबी पहचान और पंथक विचारधारा को मजबूत करने के लिए समान सोच रखने वाली सभी ताकतों को एक मंच पर आने की जरूरत है। उनके इस कदम के बाद पंजाब की राजनीति में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं और आने वाले समय में इसके राजनीतिक असर देखने को मिल सकते हैं।

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