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Punjab: सुखबीर बादल को फिर मिला अकाली दल का नेतृत्व, सज़ा के दौरान चली थी गो//ली।
Punjab से एक बड़ी खबर सामने आई है अमृतसर स्थित श्री हरमंदिर साहिब परिसर के तेजा सिंह समुद्री हॉल में आयोजित पार्टी की बैठक में सुखबीर सिंह बादल को सर्वसम्मति से एक बार फिर शिरोमणि अकाली दल का अध्यक्ष चुना गया। पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष बलविंदर सिंह भूंदड़ ने बैठक के दौरान उनके नाम का प्रस्ताव रखा, जिसे सभी सदस्यों ने समर्थन दिया।
इस चुनाव में किसी भी अन्य सदस्य ने अध्यक्ष पद के लिए नामांकन नहीं किया, जिससे सुखबीर बादल का चयन बिना विरोध के संभव हो सका। बैठक के दौरान चुनाव अधिकारी गुलजार सिंह रणिके ने औपचारिक रूप से उनके नाम की घोषणा की और उन्हें अध्यक्ष पद पर नियुक्त किया गया।
प्रधान चुने जाने के बाद सुखबीर बादल मीडिया के सामने आए। इस दौरान उन्होंने कहा,
विरोधी पार्टियों ने क्षेत्रीय पार्टियों को नुकसान पहुंचाने के लिए तख्तों के जत्थेदारों को अपने पक्ष में कर लिया था और बागी गुट के नेता सत्ता के लालच में हैं।
बादल ने करीब 5 महीने पहले SAD प्रमुख के पद से इस्तीफा दिया था, क्योंकि उन्हें तनखैया घोषित किया गया था। इस दौरान गोल्डन टेंपल में सजा भुगतते हुए उन पर गोली भी चलाने की कोशिश की गई थी, लेकिन वह बच गए थे।
सबसे बड़ी चुनौती: धार्मिक विवाद और सियासी उथल-पुथल के बीच वापसी
सुखबीर बादल ने 16 नवंबर 2024 को पार्टी अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। तब उन्हें अकाल तख्त द्वारा ‘तनखैया’ (धार्मिक दोषी) घोषित किया गया था। 2 दिसंबर 2025 को अकाल तख्त जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह ने सुखबीर समेत पूरी मौजूदा पार्टी नेतृत्व को “पार्टी चलाने के अयोग्य” बताया था।
इसके बाद, शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) ने ज्ञानी रघबीर सिंह को उनके पद से हटा दिया और उनकी जगह जत्थेदार कुलदीप सिंह गड़गज को नियुक्त किया।
SAD प्रवक्ता दलजीत सिंह चीमा पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि पार्टी नेतृत्व पहले ही अकाल तख्त के निर्देशानुसार धार्मिक दंड भुगत चुका है। जब कोई धार्मिक सजा भुगत लेता है, तो वह पवित्र हो जाता है और पुरानी बातों को समाप्त माना जाता है।

अकाली दल के सीनियर नेताओं का मानना है कि अकाल तख्त का निर्देश अब भी प्रभावी है। अकाल तख्त ने स्पष्ट रूप से कहा था कि पार्टी को नया नेता चुनना चाहिए, क्योंकि मौजूदा नेतृत्व अयोग्य है।
समर्थकों का सुखबीर पर भरोसा
सुखबीर के समर्थकों का मानना है कि उन्होंने पार्टी को कई जीत दिलाई और जब मुश्किल दौर आया, तो कुछ नेताओं ने उनका साथ छोड़कर स्वार्थ दिखाया। एक अन्य वरिष्ठ नेता ने सुखबीर के साहस और प्रतिबद्धता को याद करते हुए कहा, “उन्होंने पंथ के सामने पेश होकर तनखा भुगती। गोल्डन टेंपल के बाहर धार्मिक सज़ा के दौरान उन पर जानलेवा हमला भी हुआ, लेकिन वे डटे रहे।”
सुखबीर बादल पहली बार दिसंबर 2008 में पार्टी अध्यक्ष बने थे, जब उनके पिता प्रकाश सिंह बादल पंजाब के मुख्यमंत्री थे। उन्हें पार्टी में ‘कॉर्पोरेट शैली’ की राजनीति लाने वाला भविष्य का नेता कहा गया था, लेकिन 2017 के विधानसभा चुनावों से लगातार हार के बाद पार्टी में असंतोष बढ़ता गया।
2007 से 2017 तक पंजाब की सत्ता में रही अकाली दल 2022 के विधानसभा चुनाव में महज तीन विधायकों तक सिमट गई और 2024 के लोकसभा चुनाव में केवल एक सांसद जीत पाया।
अकाली दल के सामने दो चुनौतियां
शनिवार का चुनाव पंथक राजनीति के लिए एक नए अध्याय की शुरुआत माना जा रहा है, लेकिन अब अकाली दल के सामने कांग्रेस, आम आदमी पार्टी (AAP) और भाजपा के अलावा दो बड़ी चुनौतियां खड़ी हैं।
खडूर साहिब से सांसद और खालिस्तान समर्थक अमृतपाल सिंह पहले ही नया अकाली दल वारिस पंजाब दे के नाम से बना चुके हैं।
अकाली दल के बागी नेता, जिन्होंने पहले अकाल दल रिफॉर्म कमेटी बनाई थी, उनकी अगली रणनीति को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। सूत्रों का मानना है कि वे या तो खुद को असल अकाली बताकर नेतृत्व का दावा कर सकते हैं या कोई नया राजनीतिक दल बना सकते हैं।
अकाली दल का 105 साल का इतिहास
शिरोमणि अकाली दल अपना 105 साल का इतिहास अपने में संजोए बैठा है। इसकी स्थापना 14 दिसंबर 1920 को गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के सहयोग से हुई थी, जिसका उद्देश्य सिख समुदाय की धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक आवाज बनना था।
1925 में गुरुद्वारा एक्ट लागू होने के बाद अकाली दल ने आजादी की लड़ाई में सक्रिय भाग लिया। “मैं मरां ते पंथ जिवे” की विचारधारा से प्रेरित होकर शुरुआती दौर में राजनीति से दूर रहा। 1937 के प्रोविंशियल चुनावों में 10 सीटें जीतकर दल ने राजनीतिक क्षेत्र में कदम रखा।
देश के विभाजन के समय अकाली दल ने पुरजोर विरोध किया। फिरोजपुर और जीरा को पाकिस्तान में मिलाए जाने की खबर पर मास्टर तारा सिंह ने दिल्ली पहुंचकर वायसराय से यह निर्णय रुकवाया। संघर्षशील जीवन के बाद उनके पास मात्र 36 रुपए थे।
प्रमुख प्रधान और वर्तमान नेतृत्व
1921 में सरमुख सिंह झबाल पहले प्रधान बने। इसके बाद बाबा खड़क सिंह, मास्टर तारा सिंह, संत फतेह सिंह, हरचंद सिंह लोंगोवाल, प्रकाश सिंह बादल समेत कुल 20 प्रधान हुए। सुखबीर सिंह बादल अंतिम चुने गए प्रधान हैं। सबसे लंबे समय तक बादल परिवार के पास अकाली दल की कमान रही है।
प्रकाश सिंह बादल शिरोमणि अकाली दल के प्रधान वर्ष 1996 से लेकर 2008 तक रहे। उन्होंने लगभग 12 वर्षों तक पार्टी की कमान संभाली। इस दौरान उन्होंने संगठन को मजबूती दी, पार्टी का मुख्यालय अमृतसर से चंडीगढ़ स्थानांतरित किया, और भारतीय जनता पार्टी के साथ गठबंधन कर अकाली-भाजपा की साझा सरकारें बनाईं। 2008 में उन्होंने अपना पद सुखबीर बादल को सौंप दिया।
पार्टी में टूट-फूट लेकिन अस्तित्व बरकरार
समय-समय पर दल में मतभेद हुए। 1960 के दशक में मास्टर तारा सिंह और संत फतेह सिंह तक भी पार्टी से अलग हुए। आज भी अलग-अलग नामों से अकाली दल मौजूद हैं, लेकिन सबसे प्रभावी इकाई शिअद (बादल) है।
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ED पार्टी के पदाधिकारी पंजाब में नशा बेचते पकड़े गए, क्या ईडी पार्टी से नशे के तार जुड़े हैं?- केजरीवाल
पंजाब में नशे के खिलाफ भगवंत मान सरकार की ओर से चलाई जा रही मुहिम में ईडी पार्टी (भाजपा) के पदाधिकारी को नशा बेचते पकड़े जाने के बाद राजनीति गर्मा गई है। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल समेत कई वरिष्ठ नेताओं ने ईडी पार्टी पर तीखा हमला बोला है। अरविंद केजरीवाल ने एक्स पर कहा कि ईडी पार्टी के पदाधिकारी ख़ुद पंजाब में नशा बेचते पकड़े गए। क्या ईडी पार्टी के साथ नशे के तार जुड़े हैं?
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि आज पंजाब में 70 फीसद ड्रग्स गुजरात के रास्ते आ रही हैं। ईडी पार्टी की गठबंधन की सरकार में पंजाब के घर-घर में चिट्टा पहुंचाया गया। बाकायदा सरकारी संरक्षण में सरकारी गाड़ियों में चिट्टा घर-घर बांटा जाता था। ईडी पार्टी और चिट्टा पार्टी पंजाब की जवानी बर्बाद करने की ज़िम्मेदार हैं। भगवंत मान ने चिट्टे पर वार करके पंजाब की जवानी को फिर से एक सुनहरे भविष्य की उम्मीद दी है।
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा ने कहा कि भगवंत मान सरकार ने नशे के नेटवर्क को इतना तहस-नहस कर दिया है कि ईडी पार्टी वाले अब खुद सप्लाई के लिए मैदान में उतर गए हैं। भगवंत मान जी, रगड़ दो जो भी नशे का कारोबार पंजाब में करे। पंजाब की आने वाली पीढ़ियों को इन ईडी पार्टी वाले नशा कारोबारियों से बचा लो, बस।
उधर, ‘‘आप’’ के वरिष्ठ नेता और कोंडली से विधायक कुलदीप कुमार ने भी भाजपा पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि ईडी पार्टी विदेशी से नशा मांगती है, अदानी के पोर्ट पर उतरवाती है, फिर देश के कोने-कोने में भिजवाती है और फिर ईडी पार्टी के कार्यकर्ता इसे बेचते है। पंजाब में भगवंत मान की सरकार इनके नशे के धंधे बंद कर रही है। इसलिए चिट्टा पार्टी और ईडी पार्टी परेशान है।
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अकाली दल और बादल परिवार ने अपनी खत्म हो रही प्रासंगिकता बचाने के लिए श्री अकाल तख्त साहिब को राजनीतिक अखाड़ा बना लिया है: बलतेज पन्नू
आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब के स्टेट मीडिया इंचार्ज बलतेज पन्नू ने तीखा हमला करते हुए कहा कि राजनीति के इतिहास में यह पहली बार है कि श्री अकाल तख्त जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज साहिब किसी खास राजनीतिक पार्टी के पक्ष में खड़े होकर खुलेआम राजनीति कर रहे हैं।
सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मीडिया से बात करते हुए बलतेज पन्नू ने कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब पूरी दुनिया में सिखों की सर्वोच्च और सबसे पवित्र जगह है, न कि सुखबीर सिंह बादल या अकाली दल की निजी जागीर। उन्होंने कहा कि जत्थेदार साहिब को सुखबीर बादल के कहने पर आधी रात को जत्थेदार बनाया गया, बिना किसी सिख पंथ या संगठन की राय लिए, ऐसी जगह पर जहां गुरु ग्रंथ साहिब का प्रकाश भी नहीं हुआ था।
ऐसे में बादल परिवार के प्रति उनकी वफादारी और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के प्रधान हरजिंदर सिंह धामी का खुद को सुखबीर बादल का सिपाही कहना, इन महान सिख संस्थाओं के राजनीतिकरण का जीता-जागता सबूत है।
बलतेज पन्नू ने जत्थेदार द्वारा जारी कथित फोरेंसिक रिपोर्ट पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि इस रिपोर्ट में कहीं भी यह नहीं लिखा है कि वीडियो में दिख रहा व्यक्ति कौन है। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि अगर हम आपकी रिपोर्ट मान भी लें कि वीडियो (एआई) से नहीं बनाई गई, तो जत्थेदार साहिब हमें बताएं कि उस वीडियो में दिख रहे व्यक्ति की हाइट क्या है? जिस मुख्यमंत्री भगवंत मान पर आप उंगली उठा रहे हैं, क्या उनकी हाइट वीडियो में दिख रहे व्यक्ति की हाइट से मेल खाती है? वह कौन सा होटल का कमरा है जहां गुरु साहिब की तस्वीरें दिखाई गई हैं, जैसा कि दावा किया जा रहा है? रिपोर्ट यह बताने में पूरी तरह नाकाम है कि वीडियो में असल में कौन है। पन्नू ने चेतावनी दी कि आने वाले दिनों में आम आदमी पार्टी इस पूरे मामले को जनता के सामने दूध का दूध और पानी का पानी करके रहेगी।
अकाली दल के इतिहास को काले पन्नों से भरा बताते हुए पन्नू ने कहा कि साल 2015 में बुर्ज जवाहर सिंह वाला से गुरु ग्रंथ साहिब की पवित्र किताब चोरी हुई, सिखों को गाली-गलौज वाले पोस्टर लगाकर चुनौती दी गई और अक्टूबर महीने में गुरु साहिब के अंगों को कूड़े के ढेर में लुढ़का दिया गया।
उस समय पंथक मुखौटा पहनकर बार-बार सरकार बनाते बनाने वाले सुखबीर बादल और उनके लोग, सोते रहे। उन्होंने जस्टिस जोरा सिंह कमीशन की रिपोर्ट को दबाया, गवाहों को पुलिस की नौकरी देकर मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की और जस्टिस रणजीत सिंह कमीशन की रिपोर्ट को विधानसभा के बाहर एक-दो रुपये में बेच दिया। कोटकपूरा और बहबल कलां गोलीकांड के सबूत मिटाने की हर मुमकिन कोशिश की गई, जिसकी वजह से आज सुखबीर बादल, सुमेध सैनी और उमरानंगल जैसे लोग बेल पर कोर्ट के बाहर घूम रहे हैं। उन्हें डर है कि बहबल कलां की जांच भी जल्द ही उनके गले की फांस बनने वाली है।
पन्नू ने कहा कि साल 2022 में जब पंजाब के लोगों ने आम आदमी पार्टी को भारी बहुमत दिया और भगवंत मान की सरकार बनाई, तो इन पुराने नेताओं के पैरों तले से ज़मीन खिसक गई। पहले तो उन्होंने झूठा प्रचार किया कि यह सरकार 3 महीने या एक साल नहीं चलेगी। जब सरकार ने बहुत अच्छा काम करना शुरू किया और मुख्यमंत्री मान हेल्थ चेक-अप के लिए अस्पताल गए, तो उनकी घबराहट इतनी बढ़ गई कि बिक्रम सिंह मजीठिया ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री की बेटी का वीडियो दिखाया और गंदी राजनीति की। लेकिन पंजाब के लोगों पर इसका कोई असर नहीं हुआ।
पन्नू ने पंजाब सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा कि आज साढ़े चार साल होने जा रहे हैं और राज्य में सरकार के खिलाफ कोई ‘एंटी-इनकंबेंसी’ नहीं है। मुख्यमंत्री मान के नेतृत्व में आम आदमी पार्टी ने जालंधर लोकसभा उपचुनाव, गिद्दड़बाहा, डेरा बाबा नानक, तरनतारन उपचुनाव समेत नगर निगम, नगर परिषद और सरपंच चुनावों में ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। यह जीत लाठी या पुलिस के बल पर नहीं, बल्कि विकास के बल पर 2017 तक चले उनके गुंडा राज को खत्म करके मिली है। मान सरकार ने नहरी पानी की पहुंच 21% से बढ़ाकर 80% की, किसानों को दिन में बिजली दी, लोगों को 600 यूनिट मुफ्त बिजली दी, सड़कों पर रोड सेफ्टी फोर्स तैनात की और जनता को 10 लाख रुपये के मुफ्त कैशलेस इलाज के साथ हेल्थ इंश्योरेंस कार्ड दिया।
बलतेज पन्नू ने कहा कि अकाली दल के लिए सबसे बड़ी समस्या यह है कि जिस मान सरकार को वे हमेशा बदनाम करते थे, उसी मान सरकार ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी रोकने के लिए ‘सत्कार एक्ट’ में ऐतिहासिक बदलाव करके सख्त कानून लागू किया है। अब बेअदबी करने वाले को सजा भुगतनी पड़ेगी।
यह एक्ट भी पास हो गया और गवर्नर के साइन के बाद लागू हो गया। बादल परिवार, जो खुद को पंथ का ठेकेदार मानता था और जिसने 2007 से 2017 के बीच पंजाब की पूरी पीढ़ी को नशे की आग में झोंक दिया, आज गुरु नानक देव जी की धरती पर बने इस सख्त कानून को पचा नहीं पा रहा है। इसी घबराहट में उन्होंने अब अपनी राजनीति का आखिरी कार्ड खेल दिया है, बदकिस्मती से उन्होंने श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार को भी मोहरे के तौर पर मैदान में उतार दिया है, लेकिन पंजाब के समझदार लोग उनके इन मंसूबों को कभी कामयाब नहीं होने देंगे।
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CM भगवंत सिंह मान द्वारा यू.पी.एस.सी.- 2025 पास करने वाले उम्मीदवारों का सम्मान; कहा, पंजाब के आम परिवारों के बच्चे लगातार राज्य का मान बढ़ा रहे हैं
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज यू.पी.एस.सी. (यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन)-2025 की प्रतिष्ठित परीक्षा पास करने वाले उम्मीदवारों का सम्मान किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि यह महत्वपूर्ण सफलता पंजाब की शिक्षा व्यवस्था की बढ़ती गुणवत्ता और राज्य के युवाओं की अथाह संभावनाओं को दर्शाती है।
भविष्य के अधिकारियों से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि यह देखकर बहुत खुशी होती है कि आम परिवारों के युवा कड़ी मेहनत, प्रतिभा और दृढ़ इरादे के साथ देश के सबसे महत्वपूर्ण पदों को प्राप्त कर रहे हैं।
प्रतियोगी परीक्षाओं में लड़कियों के शानदार प्रदर्शन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि ये उपलब्धियाँ महिला सशक्तिकरण का प्रत्यक्ष प्रमाण हैं और यह भी साबित करती हैं कि बराबर अवसर बेटियों को हर क्षेत्र में उत्कृष्टता प्राप्त करने योग्य बनाते हैं।
शैक्षणिक सुधारों के प्रति पंजाब सरकार की प्रतिबद्धता की पुष्टि करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि सरकार हर विद्यार्थी के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बराबर अवसर सुनिश्चित करने के लिए लगातार काम कर रही है। राज्य सरकार का सपना पंजाब के और युवाओं को लोक सेवा के उच्च और प्रतिष्ठित पदों पर पहुँचते देखना है।
इस मुलाकात के कुछ अंश साझा करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “आज, मुझे उन होशियार उम्मीदवारों का विशेष रूप से सम्मान करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ जिन्होंने प्रतिष्ठित यू.पी.एस.सी.-2025 परीक्षा पास करके पंजाब का मान बढ़ाया है। इन युवाओं से मेरी सार्थक बातचीत हुई। उनकी कड़ी मेहनत, समर्पण और लगन अन्य युवाओं के लिए भी प्रेरणा का एक बड़ा स्रोत है। मुझे पूरा विश्वास है कि ये आने वाले वर्षों में ईमानदारी, प्रतिबद्धता और समर्पित भावना के साथ देश और पंजाब की सेवा करेंगे। हमारा सपना है कि और युवाओं को उच्च और प्रतिष्ठित पदों पर देखना है और ‘आप’ सरकार इस सपने को साकार करने की दिशा में लगातार काम कर रही है।”
पंजाब से यू.पी.एस.सी. परीक्षा-2025 पास करने वाले नए चुने गए आईएएस अधिकारियों से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पंजाब के युवा अपनी शानदार उपलब्धियों के माध्यम से राज्य का मान बढ़ा रहे हैं। इन अधिकारियों ने प्रतिष्ठित यू.पी.एस.सी. परीक्षा पास की है और न केवल पंजाब बल्कि अपने माता-पिता का भी मान बढ़ाया है। इन युवाओं की सफलता हमारे विद्यार्थियों की अथाह क्षमता और शिक्षा क्षेत्र में हो रहे सकारात्मक बदलाव को दर्शाती है।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह न तो पहली ऐसी उपलब्धि है और न ही आखिरी होगी। उन्होंने विश्वास जताया कि ये अधिकारी आने वाले वर्षों में नए मील के पत्थर स्थापित करते रहेंगे और पंजाब का नाम रोशन करेंगे। उन्होंने आगे कहा, “आम परिवारों के बच्चे साबित कर रहे हैं कि समर्पण, लगन और सही मार्गदर्शन के साथ किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। उनकी सफलता पूरे राज्य के लिए बहुत गर्व और संतोष की बात है। राज्य के इन बेटों और बेटियों ने अपनी योग्यता साबित की है और यह दिखाया है कि हर घर में सक्षम युवा हैं।”
विद्यार्थिनियों के शानदार प्रदर्शन को उजागर करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बेटियाँ शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं के हर क्षेत्र में शानदार प्रदर्शन कर रही हैं और समाज के लिए तेजी से रोल मॉडल के रूप में उभर रही हैं। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “लड़कियों ने पंजाब के हर क्षेत्र में लगातार बेहतरीन प्रदर्शन करके अपनी योग्यताओं को साबित किया है। ये बेटियाँ असाधारण प्रतिभा और दृढ़ता का प्रदर्शन कर रही हैं। इनकी उपलब्धियाँ शक्तिशाली संदेश देती हैं कि बराबर अवसर और उत्साह के साथ लड़कियाँ अपनी इच्छा के अनुसार परिणाम हासिल कर सकती हैं।”

विद्यार्थिनियों की सफलता को पूरे राज्य के लिए बेहद गर्व और संतोष वाली बात बताते हुए मुख्यमंत्री ने इसे महिला सशक्तिकरण का स्पष्ट प्रतीक बताया। शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए पंजाब सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में से एक है।
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “हम बेहतर बुनियादी ढाँचे, शिक्षा की आधुनिक विधियों और विद्यार्थियों के लिए अनुकूल शिक्षण वातावरण प्रदान करके सरकारी स्कूलों को बेहतर बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं। प्रत्येक बच्चा आर्थिक कठिनाइयों की परवाह किए बिना गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार रखता है और हमारी सरकार हर बच्चे तक यह अवसर पहुँचाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब सरकार शिक्षा क्षेत्र को और अधिक मजबूत करने के लिए ठोस प्रयास कर रही है ताकि सामान्य परिवारों के बच्चों को भी अन्य बच्चों की तरह ऊँचाइयों को छूने के बेहतर अवसर मिल सकें। उन्होंने कहा, “शिक्षा आने वाली पीढ़ियों को सशक्त बनाने और समृद्ध पंजाब के निर्माण का सबसे महत्वपूर्ण माध्यम है। पंजाब सरकार शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने तथा यह सुनिश्चित करने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी कि प्रत्येक बच्चे को सफल होने का समान अवसर मिले।”
अभिभावकों से अपने बच्चों पर विश्वास करने और उनके सपनों को साकार करने में सहयोग देने की अपील करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्येक बच्चे में विशिष्ट प्रतिभाएँ और क्षमताएँ होती हैं, जिन्हें अपेक्षाओं के बोझ तले दबाने के बजाय निखारने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा, “माता-पिता को अपने बच्चों की क्षमताओं को पहचानना चाहिए और उन्हें प्रोत्साहित करना चाहिए। उन्हें ऐसे करियर चुनने के लिए मजबूर नहीं करना चाहिए जिनमें उनकी रुचि न हो। जब बच्चों को अपने परिवारों से विश्वास और समर्थन मिलता है, तो वे बेहतर प्रदर्शन करते हैं और अपनी पूरी क्षमता के साथ मेहनत करते हैं।”
शैक्षिक सुधारों और विद्यार्थियों के कल्याण से संबंधित पहलों के प्रति पंजाब सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ऐसा वातावरण तैयार करने के लिए दृढ़ संकल्पित है, जहाँ प्रत्येक बच्चा अपनी पूर्ण क्षमता को पहचान सके।
सभी नव-नियुक्त अधिकारियों को बधाई देते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने उन्हें भविष्य के लिए शुभकामनाएँ दीं और आशा व्यक्त की कि वे कड़ी मेहनत करते रहेंगे, समाज में सार्थक योगदान देंगे तथा पंजाब की प्रगति और विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगे। उन्होंने कहा, “पंजाब का भविष्य उज्ज्वल है क्योंकि इन युवा अधिकारियों की उपलब्धियाँ हमारे लोगों की प्रतिभा, दृढ़ता और आकांक्षाओं को दर्शाती हैं। मैं सभी को जीवन में और अधिक ऊँचाइयाँ प्राप्त करने की शुभकामनाएँ देता हूँ तथा उन्हें बड़े सपने देखने और उन्हें साकार करने के लिए कठोर परिश्रम करने का आह्वान करता हूँ।”
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को यह सलाह भी दी कि वे अपनी सफलता के बावजूद विनम्र बने रहें और नई ऊँचाइयों को प्राप्त करने के लिए निरंतर मेहनत करते रहें। उन्होंने कहा, “अपनी उपलब्धियों पर अहंकार न करें। जमीन से जुड़े रहें, विनम्र रहें और मेहनत करते रहें। इस मंच का उपयोग केवल सफल अधिकारी बनने के लिए ही नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक योगदान देने वाले अच्छे इंसान बनने के लिए भी करें।”
मुख्यमंत्री ने आशा व्यक्त की कि नव-नियुक्त अधिकारी अपने पदों का उपयोग जनसेवा के लिए करेंगे। उन्होंने कहा कि उन्हें सार्वजनिक सेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए। अंत में उन्होंने कहा, “अपनी कलम का उपयोग समाज के जरूरतमंद और पिछड़े वर्गों की सहायता के लिए करें। लोगों के अधिकतम कल्याण को सुनिश्चित करें ताकि समाज के प्रत्येक वर्ग को आपके कार्यों का लाभ मिल सके। यही मानवता की सच्ची सेवा है और प्रत्येक अधिकारी को इसे प्राप्त करने में सार्थक भूमिका निभानी चाहिए।”
इस अवसर पर मुख्य सचिव के. ए. पी. सिन्हा तथा अनेक अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे।
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