Connect with us

Punjab

Punjab: सुखबीर बादल को फिर मिला अकाली दल का नेतृत्व, सज़ा के दौरान चली थी गो//ली।

Published

on

Punjab से एक बड़ी खबर सामने आई है अमृतसर स्थित श्री हरमंदिर साहिब परिसर के तेजा सिंह समुद्री हॉल में आयोजित पार्टी की बैठक में सुखबीर सिंह बादल को सर्वसम्मति से एक बार फिर शिरोमणि अकाली दल का अध्यक्ष चुना गया। पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष बलविंदर सिंह भूंदड़ ने बैठक के दौरान उनके नाम का प्रस्ताव रखा, जिसे सभी सदस्यों ने समर्थन दिया।

इस चुनाव में किसी भी अन्य सदस्य ने अध्यक्ष पद के लिए नामांकन नहीं किया, जिससे सुखबीर बादल का चयन बिना विरोध के संभव हो सका। बैठक के दौरान चुनाव अधिकारी गुलजार सिंह रणिके ने औपचारिक रूप से उनके नाम की घोषणा की और उन्हें अध्यक्ष पद पर नियुक्त किया गया।

प्रधान चुने जाने के बाद सुखबीर बादल मीडिया के सामने आए। इस दौरान उन्होंने कहा,

विरोधी पार्टियों ने क्षेत्रीय पार्टियों को नुकसान पहुंचाने के लिए तख्तों के जत्थेदारों को अपने पक्ष में कर लिया था और बागी गुट के नेता सत्ता के लालच में हैं।

बादल ने करीब 5 महीने पहले SAD प्रमुख के पद से इस्तीफा दिया था, क्योंकि उन्हें तनखैया घोषित किया गया था। इस दौरान गोल्डन टेंपल में सजा भुगतते हुए उन पर गोली भी चलाने की कोशिश की गई थी, लेकिन वह बच गए थे।

सबसे बड़ी चुनौती: धार्मिक विवाद और सियासी उथल-पुथल के बीच वापसी

सुखबीर बादल ने 16 नवंबर 2024 को पार्टी अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। तब उन्हें अकाल तख्त द्वारा ‘तनखैया’ (धार्मिक दोषी) घोषित किया गया था। 2 दिसंबर 2025 को अकाल तख्त जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह ने सुखबीर समेत पूरी मौजूदा पार्टी नेतृत्व को “पार्टी चलाने के अयोग्य” बताया था।

इसके बाद, शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) ने ज्ञानी रघबीर सिंह को उनके पद से हटा दिया और उनकी जगह जत्थेदार कुलदीप सिंह गड़गज को नियुक्त किया।

SAD प्रवक्ता दलजीत सिंह चीमा पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि पार्टी नेतृत्व पहले ही अकाल तख्त के निर्देशानुसार धार्मिक दंड भुगत चुका है। जब कोई धार्मिक सजा भुगत लेता है, तो वह पवित्र हो जाता है और पुरानी बातों को समाप्त माना जाता है।

अकाली दल के सीनियर नेताओं का मानना है कि अकाल तख्त का निर्देश अब भी प्रभावी है। अकाल तख्त ने स्पष्ट रूप से कहा था कि पार्टी को नया नेता चुनना चाहिए, क्योंकि मौजूदा नेतृत्व अयोग्य है।

समर्थकों का सुखबीर पर भरोसा

सुखबीर के समर्थकों का मानना है कि उन्होंने पार्टी को कई जीत दिलाई और जब मुश्किल दौर आया, तो कुछ नेताओं ने उनका साथ छोड़कर स्वार्थ दिखाया। एक अन्य वरिष्ठ नेता ने सुखबीर के साहस और प्रतिबद्धता को याद करते हुए कहा, “उन्होंने पंथ के सामने पेश होकर तनखा भुगती। गोल्डन टेंपल के बाहर धार्मिक सज़ा के दौरान उन पर जानलेवा हमला भी हुआ, लेकिन वे डटे रहे।”

सुखबीर बादल पहली बार दिसंबर 2008 में पार्टी अध्यक्ष बने थे, जब उनके पिता प्रकाश सिंह बादल पंजाब के मुख्यमंत्री थे। उन्हें पार्टी में ‘कॉर्पोरेट शैली’ की राजनीति लाने वाला भविष्य का नेता कहा गया था, लेकिन 2017 के विधानसभा चुनावों से लगातार हार के बाद पार्टी में असंतोष बढ़ता गया।

2007 से 2017 तक पंजाब की सत्ता में रही अकाली दल 2022 के विधानसभा चुनाव में महज तीन विधायकों तक सिमट गई और 2024 के लोकसभा चुनाव में केवल एक सांसद जीत पाया।

अकाली दल के सामने दो चुनौतियां

शनिवार का चुनाव पंथक राजनीति के लिए एक नए अध्याय की शुरुआत माना जा रहा है, लेकिन अब अकाली दल के सामने कांग्रेस, आम आदमी पार्टी (AAP) और भाजपा के अलावा दो बड़ी चुनौतियां खड़ी हैं।

खडूर साहिब से सांसद और खालिस्तान समर्थक अमृतपाल सिंह पहले ही नया अकाली दल वारिस पंजाब दे के नाम से बना चुके हैं।
अकाली दल के बागी नेता, जिन्होंने पहले अकाल दल रिफॉर्म कमेटी बनाई थी, उनकी अगली रणनीति को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। सूत्रों का मानना है कि वे या तो खुद को असल अकाली बताकर नेतृत्व का दावा कर सकते हैं या कोई नया राजनीतिक दल बना सकते हैं।

अकाली दल का 105 साल का इतिहास

शिरोमणि अकाली दल अपना 105 साल का इतिहास अपने में संजोए बैठा है। इसकी स्थापना 14 दिसंबर 1920 को गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के सहयोग से हुई थी, जिसका उद्देश्य सिख समुदाय की धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक आवाज बनना था।

1925 में गुरुद्वारा एक्ट लागू होने के बाद अकाली दल ने आजादी की लड़ाई में सक्रिय भाग लिया। “मैं मरां ते पंथ जिवे” की विचारधारा से प्रेरित होकर शुरुआती दौर में राजनीति से दूर रहा। 1937 के प्रोविंशियल चुनावों में 10 सीटें जीतकर दल ने राजनीतिक क्षेत्र में कदम रखा।

देश के विभाजन के समय अकाली दल ने पुरजोर विरोध किया। फिरोजपुर और जीरा को पाकिस्तान में मिलाए जाने की खबर पर मास्टर तारा सिंह ने दिल्ली पहुंचकर वायसराय से यह निर्णय रुकवाया। संघर्षशील जीवन के बाद उनके पास मात्र 36 रुपए थे।

प्रमुख प्रधान और वर्तमान नेतृत्व

1921 में सरमुख सिंह झबाल पहले प्रधान बने। इसके बाद बाबा खड़क सिंह, मास्टर तारा सिंह, संत फतेह सिंह, हरचंद सिंह लोंगोवाल, प्रकाश सिंह बादल समेत कुल 20 प्रधान हुए। सुखबीर सिंह बादल अंतिम चुने गए प्रधान हैं। सबसे लंबे समय तक बादल परिवार के पास अकाली दल की कमान रही है।

प्रकाश सिंह बादल शिरोमणि अकाली दल के प्रधान वर्ष 1996 से लेकर 2008 तक रहे। उन्होंने लगभग 12 वर्षों तक पार्टी की कमान संभाली। इस दौरान उन्होंने संगठन को मजबूती दी, पार्टी का मुख्यालय अमृतसर से चंडीगढ़ स्थानांतरित किया, और भारतीय जनता पार्टी के साथ गठबंधन कर अकाली-भाजपा की साझा सरकारें बनाईं। 2008 में उन्होंने अपना पद सुखबीर बादल को सौंप दिया।

पार्टी में टूट-फूट लेकिन अस्तित्व बरकरार

समय-समय पर दल में मतभेद हुए। 1960 के दशक में मास्टर तारा सिंह और संत फतेह सिंह तक भी पार्टी से अलग हुए। आज भी अलग-अलग नामों से अकाली दल मौजूद हैं, लेकिन सबसे प्रभावी इकाई शिअद (बादल) है।

Continue Reading
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Punjab

पंजाब को जल्द मिलेगा स्थायी DGP, 14 IPS अधिकारियों का पैनल तैयार; UPSC को भेजने की तैयारी में मान सरकार

Published

on

राज्य सरकार ने स्थायी डीजीपी की नियुक्ति को लेकर प्रक्रिया तेज कर दी है। जल्द ही 14 वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के नामों का पैनल संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) को भेजने की तैयारी की जा रही है।

यूपीएससी इस पैनल में से तीन अधिकारियों को शार्टलिस्ट करेगा, जिनमें से एक को राज्य का नियमित डीजीपी नियुक्त किया जाएगा। मुख्यमंत्री भगवंत मान की मंजूरी के बाद यह प्रस्ताव तैयार किया गया है और इसे जल्द यूपीएससी को भेजा जाएगा। जानकारी के मुताबिक, यह पैनल 1992, 1993 और 1994 बैच के आईपीएस अधिकारियों से तैयार किया गया है, जो डीजीपी पद के लिए पात्र हैं।

इन अधिकारियों के नाम शामिल

1992 बैच के अधिकारियों में कार्यवाहक डीजीपी गौरव यादव, पंजाब पुलिस हाउसिंग कॉरपोरेशन के स्पेशल डीजीपी शरद सत्य चौहान, एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स के स्पेशल डीजीपी कुलदीप सिंह और हरप्रीत सिंह सिद्धू (पोस्टिंग का इंतजार) शामिल हैं।

1993 बैच से कम्युनिटी अफेयर्स डिवीजन व महिला मामलों की स्पेशल डीजीपी गुरप्रीत कौर देओ, पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन के स्पेशल डीजीपी डॉ. जितेंद्र कुमार जैन और रेलवे के स्पेशल डीजीपी शशि प्रभा द्विवेदी का नाम पैनल में है।

वहीं, 1994 बैच के अधिकारियों में स्पेशल डीजीपी (मुख्यालय) सुधांशु शेखर श्रीवास्तव, विजिलेंस ब्यूरो के स्पेशल डीजीपी-कम-चीफ डायरेक्टर प्रवीण कुमार सिन्हा, ट्रैफिक व रोड सेफ्टी के स्पेशल डीजीपी अमनदीप सिंह राय, साइबर क्राइम के स्पेशल डीजीपी वरुण नेराजा, महाराजा रणजीत सिंह पंजाब पुलिस अकादमी, फिल्लौर की डायरेक्टर अनीता पुंज, मानवाधिकार के स्पेशल डीजीपी नरेश कुमार और टेक्निकल सर्विसेज के स्पेशल डीजीपी राम सिंह शामिल हैं।

दो साल का होगा कार्यकाल

पैनल में से चुने जाने वाले डीजीपी को कम से कम दो साल का कार्यकाल मिलेगा, भले ही उनकी सेवानिवृत्ति की तारीख कुछ भी हो। यह प्रावधान सुप्रीम कोर्ट के 2006 के निर्देशों और बाद में तय यूपीएससी गाइडलाइंस के तहत लागू होता है। पंजाब में जुलाई 2022 से कार्यवाहक डीजीपी की व्यवस्था जारी है। आम आदमी पार्टी सरकार ने गौरव यादव को यह जिम्मेदारी सौंपी थी और वे तब से लगातार इस पद पर कार्यरत हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने 5 फरवरी को इस मुद्दे पर सख्ती दिखाते हुए राज्यों को नियमित डीजीपी नियुक्त करने की प्रक्रिया अपनाने को कहा था और यूपीएससी को कार्रवाई के निर्देश दिए थे। प्रक्रिया में देरी पर सवाल सरकार को 10 दिन के भीतर प्रस्ताव भेजने को कहा गया था, लेकिन इसमें देरी हुई।

राज्य ने 2023 में पारित पंजाब पुलिस संशोधन विधेयक का हवाला देते हुए अपनी प्रक्रिया अपनाने की कोशिश की थी। हालांकि 12 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को खारिज कर दिया और स्पष्ट किया कि डीजीपी की नियुक्ति यूपीएससी की प्रक्रिया से ही होगी।

यूपीएससी की भूमिका अहम

यूपीएससी की एंपैनलमेंट कमेटी में चेयरमैन या सदस्य, केंद्रीय गृह सचिव का प्रतिनिधि और केंद्रीय पुलिस संगठन का प्रमुख शामिल होता है। यही कमेटी राज्य द्वारा भेजे गए नामों में से तीन अधिकारियों को चुनती है।

अब सभी की नजरें यूपीएससी पर टिकी हैं, जो इस पैनल से तीन नाम तय करेगी। इसके बाद पंजाब सरकार अंतिम फैसला लेकर राज्य को नया नियमित डीजीपी देगी।

Continue Reading

Punjab

CM मान की गारंटी पूरी: ‘मां-बेटी सम्मान योजना’ का नोटिफिकेशन जारी, अप्रैल से लागू

Published

on

पंजाब सरकार ने ‘मुख्यमंत्री मां-बेटी सम्मान योजना’ के लिए आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। वित्त मंत्री Harpal Singh Cheema ने International Women’s Day के अवसर पर बजट पेश करते हुए इस योजना का ऐलान किया था। नोटिफिकेशन के अनुसार, यह योजना 2 अप्रैल से प्रभावी मानी जाएगी और सेवा केंद्रों पर इसका रजिस्ट्रेशन पूरी तरह मुफ्त होगा।

मुख्यमंत्री Bhagwant Mann ने कहा कि यह ‘आप’ सरकार की गारंटी थी, जिसे अब पूरा कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि 18 वर्ष से अधिक आयु की सभी महिलाएं (सरकारी कर्मचारी, पूर्व विधायक, सांसद और पेंशनर को छोड़कर) इस योजना का लाभ उठा सकेंगी।

इस योजना के तहत सामान्य वर्ग की महिलाओं को प्रति माह ₹1,100 और अनुसूचित जाति (SC) वर्ग की महिलाओं को ₹1,500 की आर्थिक सहायता दी जाएगी।

यह एक डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) योजना है, जिसके तहत राशि सीधे महिलाओं के बैंक खातों में भेजी जाएगी। मुख्यमंत्री ने उन महिलाओं से अपील की है जिनके पास बैंक खाता नहीं है, वे जल्द से जल्द खाता खुलवाएं। उन्होंने दावा किया कि राज्य की लगभग 97% महिलाएं (करीब 1.10 करोड़) इस योजना के दायरे में आएंगी।

इस योजना का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाना है, ताकि वे अपनी छोटी-छोटी जरूरतों के लिए किसी पर निर्भर न रहें।

जरूरी दस्तावेज:

  • पंजाब के पते वाला आधार कार्ड
  • बैंक खाता पासबुक
  • SC वर्ग की महिलाओं के लिए जाति प्रमाण पत्र
  • पंजाब वोटर आईडी कार्ड

योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जिला स्तर पर डिप्टी कमिश्नरों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। ग्रामीण और दूर-दराज क्षेत्रों में महिलाओं की सहायता के लिए विशेष सुविधा कर्मी और मोबिलाइज़र नियुक्त किए जाएंगे, जो बैंक खाता खुलवाने और आधार लिंक कराने में मदद करेंगे।

पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सरकार ने सख्त नियम भी लागू किए हैं। लाभार्थी की मृत्यु होने पर सहायता राशि तुरंत बंद कर दी जाएगी, हालांकि अंतिम संस्कार के लिए दिए गए अग्रिम भुगतान की वसूली नहीं की जाएगी। साथ ही, धोखाधड़ी रोकने के लिए मोबाइल ऐप और डैशबोर्ड के जरिए डेटा की निगरानी की जाएगी।

Continue Reading

National

भगवंत मान सरकार ने रिकॉर्ड कायम किया, पंजाब के इतिहास में पहली बार सिर्फ 4 सालों में 65,264 सरकारी नौकरियां दी गईं

Published

on

आम आदमी पार्टी (आप) सरकार की ‘शानदार चार साल भगवंत मान दे नाल’ श्रृंखला के तहत पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने मुख्य क्षेत्रों में आप सरकार की कारगुजारी पर प्रकाश डालते हुये अपनी सरकार का रिपोर्ट कार्ड पेश करते हुए इसे पारदर्शी, जवाबदेह और जन-केंद्रित शासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण बदलाव बताया।

सरकारी क्षेत्र में रोजगार और प्रशासन में नया मानदंड स्थापित करते हुए भगवंत मान सरकार ने पिछली सरकारों की कमियों को दूर करते हुए युवाओं को आयु सीमा में 5 साल की छूट दी और केवल चार वर्षों में रिकॉर्ड 65,264 सरकारी नौकरियां प्रदान कीं, जो पंजाब के इतिहास में दी गई अब तक की सबसे अधिक नौकरियां हैं।

शिक्षा, पुलिस, बिजली, स्वास्थ्य और स्थानीय निकायों सहित प्रमुख क्षेत्रों में पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया के जरिए सरकार ने पक्षपात की पुरानी परंपराओं से दूरी बनाई है और अब आम नागरिकों को बिना रिश्वत या सिफारिश के नौकरियां दी जा रही हैं।

इसके साथ ही सेवा केंद्रों में हर महीने 30 लाख लोगों की पहुंच और 8.20 करोड़ से अधिक सेवाओं की डिजिटल डिलीवरी के माध्यम से ‘डिजिटल पंजाब’ की दिशा में तेजी से प्रगति हो रही है, जो पारदर्शी प्रशासन, कौशल विकास और प्रणालीगत सुधारों को दर्शाती है जिसका मकसद पंजाब के भविष्य को नई दिशा देना है।

विभिन्न विभागों के रिपोर्ट कार्ड पेश करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाब एक नए डिजिटल हब के रूप में उभर रहा है, जिसने अपने कामकाज में पारदर्शिता लाते हुए युवाओं के लिए सरकारी नौकरियों और अवसरों के नए रास्ते खोले हैं।

मुख्यमंत्री ने बताया कि पंजाब के इतिहास में पहली बार चार सालों में 65,264 सरकारी नौकरियां प्रदान की गई हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग में 16,308 नौकरियां, पंजाब पुलिस में 12,966 नौकरियां, बिजली विभाग में 8,765 नौकरियां, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण और मेडिकल शिक्षा में 16,320 तथा स्थानीय निकाय विभाग में 5,771 लोगों को नौकरियां दी गई हैं।

उन्होंने आगे कहा कि इससे राज्य में युवाओं की विदेशों की ओर पलायन की प्रवृत्ति पर रोक लगी है और पंजाब के हर गांव, कस्बे और शहर के युवाओं को इन नौकरियों का लाभ हुआ है।

भर्ती में पारदर्शिता पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि सभी नौकरियां बिना किसी रिश्वत या पक्षपात के केवल मेरिट और योग्यता के आधार पर दी गई हैं। कोई पेपर लीक नहीं हुआ और न ही किसी भर्ती को अदालत में चुनौती दी गई है।

उन्होंने आगे कहा कि कई उम्मीदवारों को तो अलग-अलग विभागों में कई-कई बार नौकरियां भी मिली हैं और इनमें से अधिकांश युवा ये नौकरियां लेने के लिए विदेशों से लौटकर वापस आए हैं।

उन्होंने कहा कि पहले अदालतों में चुनौती के चलते भर्ती प्रक्रियाओं में देरी होना आम बात थी, जिसके चलते अक्सर कई उम्मीदवारों की उम्र निर्धारित सीमा को पार कर जाती थी। अब युवा आईईएलटीएस सेंटर्स में जाने की बजाय सरकारी नौकरियों की तैयारी को प्राथमिकता दे रहे हैं।

मौजूदा गवर्नेंस मॉडल की पिछली सरकारों से तुलना करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पिछली सरकारों ने आम लोगों के बजाय अपने ही परिवारों का पक्ष लिया, लेकिन राज्य की सरकार ने सबकी भलाई के लिए काम किया है, जिसके चलते प्राइवेट कंपनियों में भी सात लाख के करीब युवाओं को नौकरियां मिली हैं।

उन्होंने आगे कहा कि हुनर विकास मिशन शुरू किया गया है, जिसके तहत अमृतसर, बठिंडा, होशियारपुर, जालंधर और लुधियाना में पांच बहु-हुनर विकास केंद्र स्थापित किए गए हैं। इन केंद्रों में अब तक 1.25 लाख युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया है, जिनमें से 73,250 को रोजगार भी मिल गया है।

उन्होंने बताया कि माइक्रोसॉफ्ट और आईबीएम जैसी कंपनियों के साथ एआई, साइबर सिक्योरिटी और क्लाउड टेक्नोलॉजी में प्रशिक्षण के लिए एमओयू साइन किए गए हैं।

रोजगार पहलों का विवरण देते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि 1,799 स्वरोजगार कैंपों ने 1,99,000 युवाओं को व्यवसाय शुरू करने के लिए ऋण हासिल करने में मदद की और 6,724 प्लेसमेंट कैंपों तथा नौकरी मेलों ने लाखों युवाओं को रोजगार हासिल करने में मदद की।

उन्होंने आगे कहा कि 11 प्रशिक्षण केंद्रों का आधुनिकीकरण करने के साथ-साथ तीन नए कैंप स्थापित किए गए हैं और 36,342 युवाओं को फौज, जल सेना, वायु सेना और अर्धसैनिक बलों में भर्ती के लिए प्रशिक्षण दिया गया है, जिनमें से 5,509 भर्ती हो चुके हैं।

रक्षा प्रशिक्षण संस्थानों के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि महाराजा रणजीत सिंह आर्म्ड फोर्सेज़ प्रिपरेटरी इंस्टीट्यूट ने 218 लड़कों को प्रशिक्षण दिया है, जिनमें से 106 एनडीए और अन्य अकादमियों के लिए चयनित हुए हैं तथा 85 कमीशंड अधिकारी बन चुके हैं। वहीं माई भागो आर्म्ड फोर्सेज़ प्रिपरेटरी इंस्टीट्यूट ने 199 लड़कियों को प्रशिक्षण दिया है, जिनमें से 24 कमीशंड अधिकारी बन चुकी हैं। उन्होंने कहा कि होशियारपुर में जल्द ही एक नया इंस्टीट्यूट शुरू किया जाएगा।

डिजिटल गवर्नेंस पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाब डिजिटल पंजाब बनने की ओर कदम बढ़ा रहा है क्योंकि 544 सेवा केंद्र 465 से अधिक सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि लगभग 30 लाख लोग इन केंद्रों से हर महीने सेवाएं ले रहे हैं, यानी रोजाना एक लाख लोग सेवाओं का लाभ प्राप्त कर रहे हैं और अब तक 8,20 करोड़ डिजिटल सेवाएं प्रदान की जा चुकी हैं।

उन्होंने आगे कहा कि जन्म, मृत्यु और विवाह जैसे प्रमाण-पत्र एसएमएस और व्हाट्सएप के माध्यम से भेजे जा रहे हैं तथा एक करोड़ से अधिक प्रमाण-पत्र डिजिटल रूप में भेजे गए हैं। उन्होंने कहा कि सेवाओं की बकाया दर में भारी कमी आई है, जो 14 प्रतिशत से घटकर सिर्फ 0.52 प्रतिशत रह गई है।

नागरिक-केंद्रित पहलकमियों को उजागर करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि ‘भगवंत मान सरकार तुम्हारे द्वार’ स्कीम दिसंबर 2023 में लुधियाना से शुरू की गई थी, जिसके तहत नागरिक 1076 हेल्पलाइन के माध्यम से घर बैठे 437 सेवाएं प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने आगे कहा कि यह स्कीम खास तौर पर बुजुर्गों और दफ्तरों में जाकर अपना काम करवाने में असमर्थ लोगों के लिए अधिक मददगार साबित हो रही है तथा अब तक 2.66 लाख लोग इसका लाभ ले चुके हैं।

आपदा राहत सुधारों के बारे में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाब ने देश में अपनी तरह की पहली डिजिटल बाढ़ मुआवजा प्रणाली पेश की है। उन्होंने आगे कहा कि 3,700 गांवों में डिजिटल तरीके से मुआवजे का वितरण किया गया है, जिसने पूरी पारदर्शिता के साथ सही लोगों तक राहत पहुंचाने को सुनिश्चित किया है।

जमीन सुधारों के बारे में बात करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि ‘ईजी रजिस्ट्री’ ने तहसील दफ्तरों से भ्रष्टाचार को खत्म कर दिया है और जुलाई 2025 से अब तक छह लाख से अधिक दस्तावेज रजिस्टर किए गए हैं। उन्होंने आगे कहा कि बिचौलिया प्रणाली को खत्म कर दिया गया है और रजिस्ट्रेशन अब एक क्लिक से ऑनलाइन करवाई जा सकती है।

उन्होंने आगे कहा कि सब-रजिस्ट्रार 48 घंटों के अंदर-अंदर आपत्ति उठा सकते हैं और उच्च अधिकारी इसकी समीक्षा कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि लोग जिले के किसी भी सब-रजिस्ट्रार दफ्तर से अपनी संपत्ति रजिस्टर करवा सकते हैं और व्हाट्सएप के माध्यम से रीयल-टाइम अपडेट्स प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने आगे कहा कि रिश्वतखोरी के लिए शिकायत दर्ज करवाने का ऑप्शन और ‘ड्राफ्ट माई डीड’ विशेषता भी प्रदान की गई है।

ट्रांसपोर्ट सुधारों को उजागर करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाब में पहली बार फेसलेस आरटीओ सेवाएं पेश की गई हैं, जो एक बड़ी डिजिटल तब्दीली को दर्शाती हैं। उन्होंने आगे कहा कि अब आरटीओ दफ्तरों में जाने की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि लाइसेंस और आरसी समेत 56 सेवाएं पूरी तरह फेसलेस कर दी गई हैं, जो हेल्पलाइन 1076 और सेवा केंद्रों के माध्यम से उपलब्ध हैं, जिससे अब तक 25,236 लोगों को लाभ मिला है।

सरकार के भ्रष्टाचार विरोधी रुख को दोहराते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि राज्य सरकार ने भ्रष्टाचार के विरुद्ध ‘कतई ना बर्दाश्त’ नीति अपनाई है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में 23 मार्च, 2022 को भ्रष्टाचार विरोधी एक्शन लाइन भी शुरू की गई थी।

उन्होंने आगे कहा कि इस हेल्पलाइन पर 12,218 शिकायतें प्राप्त हुई हैं, जिनमें से 10,820 संबंधित विभागों को और 1,398 विजीलेंस ब्यूरो को भेजी गई हैं। उन्होंने आगे कहा कि सही मामलों में कार्रवाई करते हुए 275 एफआईआर दर्ज की गई हैं और 341 मुलजिमों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें 16 गजेटेड अधिकारी, 161 सरकारी कर्मचारी, 88 पुलिस कर्मचारी और 77 आम व्यक्ति शामिल हैं। उन्होंने आगे कहा कि विजीलेंस ब्यूरो ने 487 छापेमारी करते हुए 1,215 मुलजिमों के विरुद्ध 534 केस दर्ज किए हैं।

इस संबंध में अधिक जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने बताया कि 112 गजेटेड अफसरों, 162 सरकारी मुलाजिमों और 83 निजी व्यक्तियों समेत 357 व्यक्तियों के खिलाफ जांच चल रही है। उन्होंने आगे कहा कि 143 केसों में दोषियों को सजा सुनाई गई है और कई मुलाजिमों को नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह सिर्फ चार साल का रिपोर्ट कार्ड है और आने वाले समय में भी ऐसे लोग भलाई प्रयास जारी रहेंगे।

एक सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि देश की हालत इस हद तक अजीबोगरीब बन गई है और देश में जो भी बुरा हुआ है, उसके लिए नेहरू को, दिल्ली के लिए अरविंद केजरीवाल को और पंजाब व चंडीगढ़ के लिए मुझे जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। उन्होंने आगे कहा कि भाजपा सब कुछ सियासी विरोधियों के नाम पर थोपकर अपनी जिम्मेदारी से भाग रही है, जबकि 15 लाख रुपये के वादे से लेकर एमएसपी तक कुछ भी नहीं दिया गया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भाजपा शब्दों की खेल और कठपुतलियों की तरह विरोधियों को निशाना बनाकर अपनी जिम्मेदारी से भाग नहीं सकती।

किसान भलाई के बारे में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि सरकार किसानों की जमीनों के नीचे हाई टेंशन तारें डालने की संभावना की पड़ताल कर रही है। उन्होंने आगे कहा कि यह प्रभावशाली योजना किसानों को लाभ पहुंचाने और फसलों के जोखिम को कम करने के लिए जल्द ही लागू की जाएगी। उन्होंने आगे कहा कि यह प्रोजेक्ट मेरे पैतृक गांव से शुरू होगा जहां 2,000 एकड़ में 413 ट्यूबवेल मोटरें और 1,100 बिजली के खंभे मौजूद हैं, जिन्हें जमीनदोज करने का काम जल्द ही शुरू हो जाएगा।

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि ‘जगत ज्योत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सतिकार एक्ट, 2008’ में संशोधन के लिए बैसाखी के मौके पर विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया गया है। उन्होंने आगे कहा कि इस एक्ट के तहत बेअदबी की कोशिश करने वाले किसी भी व्यक्ति को न्यूनतम 10 साल से लेकर उम्र कैद तक की सख्त सजा का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित संशोधनों के बारे में संत समाज और कानूनी विशेषज्ञों से सलाह-मशविरा चल रहा है।

– मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने पंजाब में गेहूं की निर्विघ्न खरीद का भरोसा दिया, आढ़तियों की चिंताओं को केंद्र के पास बार-बार उठाया

आढ़तियों की चिंताओं को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि आढ़तियों को हरियाणा में कारोबार करने की पूरी छूट है और वे यह भी बताना चाहते हैं कि उनके मुद्दे सिर्फ केंद्र द्वारा ही हल किए जा सकते हैं। उन्होंने आगे कहा कि मैंने उनकी जायज मांगों को भारत सरकार के सामने कई बार उठाया है लेकिन केंद्र की ओर से इस पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। उन्होंने दोहराया कि राज्य सरकार गेहूं की निर्विघ्न और मुश्किल रहित खरीद को सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह वचनबद्ध है तथा सारे प्रबंध पहले ही कर लिए गए हैं।

इस मौके पर कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा और अन्य मौजूद थे।

Continue Reading

Trending