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Punjab: 52 ब//मों के दावे पर घिरे प्रताप सिंह बाजवा, पुलिस ने की पूछताछ, CM मान ने उठाया सवाल – “सूचना कहां से मिली” ?

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Punjab विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा द्वारा राज्य में 52 बम आने की जानकारी दिए जाने के बाद मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। सीएम मान ने सवाल किया है कि जब न तो राज्य की इंटेलिजेंस एजेंसियों को और न ही केंद्र सरकार को इस तरह की कोई सूचना है, तो फिर बाजवा को यह जानकारी कहां से प्राप्त हुई ?

प्रताप सिंह बाजवा के इस दावे के बाद Punjab पुलिस की एक टीम उनसे विस्तृत जानकारी लेने उनके आवास पर पहुंची। बाजवा ने भी इस बात की पुष्टि की है और कहा है कि “मैंने जो कुछ बताना था, वो मैंने बता दिया है।”

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है – “आपके पास यह जानकारी कहां से आई? क्या आप पंजाब में भय का माहौल
बनाने की कोशिश कर रहे हैं?”

पाकिस्तान से क्या है बाजवा का कनेक्शन ?

Punjab के सीएम भगवंत मान ने कहा, “अगर विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने पंजाब में बम होने की जानकारी दी है तो उनका पाकिस्तान से क्या कनेक्शन है? वहां के आतंकवादी सीधे उन्हें फोन करके क्यों बता रहे हैं कि उन्होंने कितने बम भेजे हैं? “

CM का सवाल- क्या एलओपी बम फटने का इंतजार कर रहे थे?

सीएम के मुताबिक, “यह जानकारी न तो इंटेलिजेंस के पास है और न ही केंद्र सरकार की तरफ से आई है, लेकिन अगर विपक्ष के इतने बड़े नेता के पास यह जानकारी आई है तो उनकी जिम्मेदारी थी कि वे Punjab पुलिस को बताते कि यहां बम हैं. क्या वे बम फटने और लोगों के मरने का इंतजार कर रहे थे. ताकि उनकी राजनीति चलती रहे? और अगर यह झूठ है तो क्या वे ऐसी बातें करके Punjab में आतंक फैलाना चाहते हैं?”

मेरा काम लोगों को सचेत करना है- प्रताप सिंह बाजवा

सीएम भगवंत मान की ओर से पूछे गए सवालों पर रविवार (13 अप्रैल) को नेता विपक्ष ने पलटवार किया है. उन्होंने बम की सूचना को लेकर पूछे गए सवालों के जवाब में लीडर ऑफ अपोजिशन प्रताप सिंह बाजवा ने कहा कि मेरा काम सरकार को सचेत करना है, जो मैंने किया. पंजाब के बॉर्डर एरिया में बम आये थे और मैंने इसकी सूचना दी. LOP प्रताप सिंह बाजवा ने कहा कि मनोरंजन कालिया के घर पर भी हमला हुआ था. हमारे सोर्स ये कह रहे थे कि Punjab में हमने लगातार काम किया है.

‘Punjab में आए कई बम’

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रताप सिंह बाजवा ने आगे कहा, “मैंने एक टीवी चैनल को बयान दिया है कि मेरे सूत्रों ने मुझे चेतावनी दी है कि पंजाब में कई बम आए हैं. 18 बम फट चुके हैं. 30 से 32 बम इस्तेमाल किए जाने हैं. मेरे सूत्रों ने मुझे बताया कि मैं एक महत्वपूर्ण पद पर हूं, इसलिए मुझे सचेत रहना चाहिए.”

लोगों की जान बचाना मेरा काम- LOP

उन्होंने कहा, “मैंने काउंटर इंटेलिजेंस के साथ पूरा सहयोग किया है. आगे भी पूरा सहयोग करूंगा. हमारा काम लोगों को बचाना है. Punjab सरकार की मदद करना है. मैंने टीम (काउंटर इंटेलिजेंस) को बता दिया है कि मैं अपने सूत्रों का खुलासा नहीं करने जा रहा हूं. मैं उन्हें (काउंटर इंटेलिजेंस के एआईजी) जो कुछ भी बता सकता था, बता दिया है.”

ये सब AAP का नाटक

प्रताप सिंह बाजवा के मुताबिक इंटेलिजेंस टीम से पहले मीडिया वाले हमारे यहां पहुंच चुके थे, इसलिए यह सब आम आदमी पार्टी का नाटक है. आप सरकार बैकफुट पर है.”

उन्होंने कहा कि सुबह पंजाब पुलिस वाले घर आये थे. उन्होंने मेरा बयान लिया है. इस मामले में सीएम भगवंत मान का बेतुका बयान हमने देखा है. Punjab के हालत एक बार फिर खराब हो रहे हैं. Punjab में राकेट से हमला होने लगे हैं.. हम अपनी सोर्स को नहीं बता सकते हैं. हर रोज राकेट लांचर और आरडीएक्स मिल रहा है. Punjab में मान सरकार पूरी तरह से फेल हो गई है.

बता दें कि Punjab में नेता विपक्ष प्रताप सिंह बाजवा द्वारा दिए गए बयान कि पंजाब में 50 बॉम्ब आए हैं जिनमे से 32 अभी भी चलने हैं. इस पर प्रदेश में राजनीति तेज हो गई है. आज पंजाब पुलिस की एक टीम बाजवा के चंडीगढ़ सेक्टर 8 स्थित घर पर इस बारे में जांच पड़ताल करने पहुंची है.

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आप सांसद मालविंदर कंग ने पंजाब यूनिवर्सिटी में पंजाबी साइनबोर्ड फिर से लगाने के फैसले का किया स्वागत

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आम आदमी पार्टी (आप) के सांसद मालविंदर सिंह कंग ने पंजाब यूनिवर्सिटी के अपने कैंपस में पंजाबी साइनबोर्ड और नेमप्लेट फिर से लगाने के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने इसे पंजाब की भाषाई और सांस्कृतिक विरासत को बचाने की दिशा में एक ज़रूरी कदम बताया।

कंग ने पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ में साइनबोर्ड और नेमप्लेट से पंजाबी (गुरुमुखी) हटाने पर कड़ा एतराज़ जताया था। उन्होंने इस कदम को पंजाब के इतिहास, संस्कृति और पहचान को दिखाने वाली भाषा का अपमान बताया।

इस मामले को भारत के माननीय उपराष्ट्रपति और पंजाब यूनिवर्सिटी के चांसलर, सीपी राधाकृष्णन के सामने उठाते हुए, कंग ने उनसे तुरंत दखल देने की मांग की ताकि पंजाबी को उसकी सही जगह और सम्मान मिले, खासकर एक ऐसे संस्थान में जो पंजाब के नाम और विरासत को बनाए रखता है।

इस बारे में जानकारी सांझा करते हुए, कंग ने कहा कि उन्हें पंजाब यूनिवर्सिटी के वाइस-चांसलर से एक ऑफिशियल लेटर मिला है, जिसमें कन्फर्म किया गया है कि पंजाबी साइनबोर्ड लगाने का प्रोसेस शुरू हो चुका है। लेटर के मुताबिक, यूनिवर्सिटी ने पंजाबी साइनबोर्ड के लिए ऑर्डर दे दिया है और उन्हें लगाने का काम जल्द से जल्द पूरा कर लिया जाएगा।

इस फैसले का स्वागत करते हुए, कंग ने कहा कि इससे एक मजबूत संदेस जाता है कि पंजाब के वजूद और पंजाबी भाषा की इज्ज़त को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। उन्होंने आगे कहा कि पंजाबी सिर्फ एक भाषा नहीं है, बल्कि पंजाब की रिच कल्चरल विरासत और सामूहिक पहचान की निशानी है, जिसका हर लेवल पर सम्मान किया जाना चाहिए और उसे बढ़ावा दिया जाना चाहिए।

कंग ने इस मामले पर तुरंत ध्यान देने के लिए भारत के माननीय उपराष्ट्रपति और पंजाब यूनिवर्सिटी के चांसलर, श्री सी. पी. राधाकृष्णन का धन्यवाद किया। उन्होंने यूनिवर्सिटी प्रशासन की भी तारीफ़ की कि उन्होंने सुधार के कदम उठाए और पंजाब के लोगों की चिंताओं पर पॉज़िटिव जवाब दिया।

आप सांसद ने कहा कि पंजाब से जुड़े हर संस्थान में पंजाबी के सम्मान, अहमियत और हक की हमेशा रक्षा होनी चाहिए।

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मोहाली को मिला नया मेयर, विधायक कुलवंत सिंह के बेटे सरबजीत समाना ने संभाली कमान

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मोहाली नगर निगम को नया मेयर मिल गया है। मंगलवार को हुए मेयर चुनाव में आम आदमी पार्टी के नेता और विधायक कुलवंत सिंह के पुत्र सरबजीत सिंह समाना को मेयर चुना गया। वहीं आर.पी. शर्मा को सीनियर डिप्टी मेयर और हरपाल चन्नी को डिप्टी मेयर की जिम्मेदारी सौंपी गई।

चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद पंजाब आम आदमी पार्टी के अध्यक्ष अमन अरोड़ा, विधायक कुलवंत सिंह और पार्टी नेता डॉ. सन्नी आहलूवालिया ने सरबजीत समाना को बधाई दी और उनके सफल कार्यकाल की शुभकामनाएं दीं।

मेयर पद को लेकर पिछले कई दिनों से राजनीतिक चर्चाएं चल रही थीं। शुरुआत में डॉ. सन्नी आहलूवालिया को इस पद का मजबूत दावेदार माना जा रहा था। संगठन में उनकी मजबूत पकड़ और पार्टी नेतृत्व से करीबी संबंधों के चलते उनका नाम चर्चा में था, लेकिन अंतिम समय में राजनीतिक समीकरण बदले और सरबजीत समाना को उम्मीदवार बनाया गया।

बताया जा रहा है कि चुनाव से पहले विधायक कुलवंत सिंह ने पार्टी पार्षदों के साथ लगातार बैठकें कीं। नगर निगम चुनाव जीतने वाले कई पार्षद उनके करीबी सहयोगी माने जाते हैं, जिससे मेयर पद की दौड़ में उनके बेटे का पलड़ा भारी रहा।

पार्टी में एकजुटता बनाए रखने और किसी भी तरह के विवाद से बचने के लिए पंजाब आप अध्यक्ष अमन अरोड़ा खुद नगर निगम कार्यालय पहुंचे और उनकी मौजूदगी में पूरी चुनाव प्रक्रिया संपन्न हुई।

दूसरी ओर, मेयर चुनाव से पहले कांग्रेस ने चुनाव प्रक्रिया का बहिष्कार कर दिया, जबकि शिरोमणि अकाली दल के पार्षद बैठक के दौरान वॉकआउट कर गए। इसके चलते चुनावी माहौल काफी गर्म रहा।

चुनाव प्रक्रिया को शांतिपूर्ण और पारदर्शी ढंग से संपन्न कराने के लिए विशेष सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। गोपनीयता बनाए रखने के लिए सभी पार्षदों के मोबाइल फोन नगर निगम कार्यालय के बाहर जमा कराए गए और रिकॉर्ड दर्ज होने के बाद ही उन्हें बैठक कक्ष में प्रवेश दिया गया।

सरबजीत सिंह समाना के मेयर बनने के साथ ही मोहाली नगर निगम में आम आदमी पार्टी की पकड़ और मजबूत हो गई है। अब शहर के विकास कार्यों और नगर निगम की आगामी योजनाओं पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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अकाली दल को बड़ा झटका! मनप्रीत इयाली ‘वारिस पंजाब दे’ में हुए शामिल

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पंजाब की राजनीति में एक अहम घटनाक्रम सामने आया है। दाखा से शिरोमणि अकाली दल के विधायक मनप्रीत सिंह इयाली मंगलवार को औपचारिक रूप से ‘वारिस पंजाब दे’ संगठन में शामिल हो गए। उनके इस फैसले को पंजाब की पंथक राजनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।

संगठन में शामिल होने के बाद मनप्रीत सिंह इयाली ने कहा कि उन्होंने बिना किसी शर्त और पद की अपेक्षा के इस मंच का साथ चुना है। उनका उद्देश्य पंजाब की पंथक और क्षेत्रीय ताकतों को एकजुट करना तथा राज्य से जुड़े अहम मुद्दों को मजबूती से उठाना है।

इयाली ने स्पष्ट किया कि वह फिलहाल विधायक पद से इस्तीफा नहीं देंगे। उन्होंने कहा कि कानूनी और तकनीकी रूप से वह अभी भी शिरोमणि अकाली दल के विधायक हैं। उन्होंने बताया कि ‘वारिस पंजाब दे’ फिलहाल एक सामाजिक और संगठनात्मक मंच है, न कि चुनाव आयोग में पंजीकृत राजनीतिक दल, इसलिए विधायक पद छोड़ने का कोई सवाल नहीं उठता।

उन्होंने कहा कि पंजाब के कई महत्वपूर्ण मुद्दे लंबे समय से लंबित हैं, जिनमें राज्य के पानी का मुद्दा, पंजाबी भाषी क्षेत्रों का मामला, चंडीगढ़ पर पंजाब का अधिकार और अन्य क्षेत्रीय हित शामिल हैं। इन मुद्दों को नई ऊर्जा और मजबूती के साथ उठाया जाएगा।

मनप्रीत इयाली ने कहा कि पंजाब, पंजाबी पहचान और पंथक विचारधारा को मजबूत करने के लिए समान सोच रखने वाली सभी ताकतों को एक मंच पर आने की जरूरत है। उनके इस कदम के बाद पंजाब की राजनीति में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं और आने वाले समय में इसके राजनीतिक असर देखने को मिल सकते हैं।

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