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पिछले महीने जालंधर में माँ बेटी की गोलीमारने वाले गैंगस्टरों को पुलिस ने पकड़ा

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पिछले महीने जालंधर में मां-बेटी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी और सबूत मिटाने के लिए शवों पर पेट्रोल छिड़ककर आग लगा दी गई थी. पंजाब पुलिस ने अब इस हत्याकांड को सुलझा लिया है.

यह जानकारी पंजाब के डीजीपी गौरव यादव ने ट्वीट के जरिए दी है. पंजाब पुलिस की काउंटर-इंटेलिजेंस टीम ने पिछले महीने जालंधर में मां-बेटी की हत्या के मामले में मुख्य आरोपी को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है. गिरफ्तार गैंगस्टर का नाम करनजीत सिंह जस्सा हापोवाल है, जो विदेश में रहने वाले गैंगस्टर सोनू खत्री के निर्देश पर वारदातों को अंजाम देता था. जस्सा के खिलाफ फिलहाल पंजाब के अलग-अलग पुलिस स्टेशनों में 6 मामले दर्ज हैं।

पंजाब के डीजीपी गौरव यादव द्वारा साझा की गई जानकारी के मुताबिक, जालंधर पुलिस ने जस्सा के पास से दो पिस्तौल और 8 जिंदा कारतूस बरामद किए हैं. जालंधर के अमर नगर में रंजीत कौर और उनकी बेटी प्रीति की गैंगस्टर जस्सा और उसके साथी ने गोली मारकर हत्या कर दी, इतना ही नहीं सबूत मिटाने के लिए शवों को पेट्रोल छिड़क कर जला दिया.

17 अक्टूबर को जालंधर के अमन एन्क्लेव के पास गांव भोजोवाल में मां-बेटी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। क्षेत्रवासियों ने बताया कि सुबह 10 बजे उन्हें सूचना मिली कि कुछ अज्ञात युवक मोटरसाइकिल पर सवार होकर आये हैं. उन्होंने घर में घुसकर वहां रह रही मां-बेटी को गोली मारकर जला दिया और मौके से फरार हो गए। थाने के आलाधिकारी मौके पर पहुंचे और मामले की जांच शुरू कर दी.

मामले की जांच करने मौके पर पहुंचे डीएसपी विजय कंवरपाल ने बताया कि गुरदास सिंह अपनी बेटी और पत्नी के साथ अमन एन्क्लेव में रहते थे। गुरदास सिंह के दामाद जसप्रीत सिंह जो अमेरिका में रहते हैं. उसने ही कुछ लोगों को सुपारी देकर अपनी पत्नी और सास की हत्या कराई थी।

डीएसपी ने बताया कि हमलावरों ने अपना चेहरा रूमाल से ढक रखा था. गुरप्रीत का अपने पति से किसी बात को लेकर विवाद चल रहा था और उसी ने इस घटना को अंजाम दिया.

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मान सरकार की ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ ने गर्मी से बढ़ते स्वास्थ्य संकट के बीच पंजाबी परिवारों को दी राहत

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पंजाब भीषण गर्मी और गैस्ट्रोएंटेराइटिस तथा डिहाइड्रेशन के बढ़ते मामलों की मार झेल रहा है, ऐसे में भगवंत मान सरकार की ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ हज़ारों परिवारों के लिए मज़बूत सहारा बनकर उभरी है।

तेज़ गर्मी का असर अब केवल खेतों और सड़कों तक सीमित नहीं है, बल्कि अस्पतालों के वार्डों तक पहुँच गया है, जहाँ डिहाइड्रेशन और पेट संक्रमण के कारण बड़ी संख्या में मरीज़ इलाज के लिए पहुँच रहे हैं। हालाँकि, बढ़ती बीमारी के बीच पूरे राज्य में कई परिवारों को मुख्यमंत्री सेहत योजना के माध्यम से कैशलेस इलाज से राहत मिल रही है।

जनवरी से अप्रैल तक मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत 3,279 गंभीर मामलों में कैशलेस उपचार प्रदान किया गया, जिसमें केवल गैस्ट्रो और पेट संबंधी बीमारियों पर ₹73.42 लाख ख़र्च किए गए।

सरकारी और सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में पेट संक्रमण, उल्टी, कमज़ोरी और गंभीर डिहाइड्रेशन से पीड़ित मरीज़ों की संख्या लगातार बढ़ रही है। योजना के उपचार रिकॉर्ड के अनुसार अप्रैल महीने में ही 1,400 से अधिक मरीज़ों ने डिहाइड्रेशन से जुड़ी गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्याओं का इलाज करवाया।

इन मामलों में मॉडरेट डिहाइड्रेशन के साथ तीव्र गैस्ट्रोएंटेराइटिस के मरीज़ सबसे अधिक रहे, जिनकी संख्या 1,050 से अधिक रही। लगभग 115 मरीज़ गंभीर डिहाइड्रेशन से पीड़ित थे, जबकि 250 से अधिक मरीज़ों को बार-बार उल्टी के कारण शरीर में द्रव की कमी और अत्यधिक थकान के चलते अस्पताल में भर्ती करना पड़ा।

गुरु गोबिंद सिंह मेडिकल कॉलेज, फरीदकोट के बाल रोग विभाग के प्रोफ़ेसर एवं प्रमुख डॉ. शशि कांत धीर के अनुसार अत्यधिक गर्मी पेट संक्रमण के मामलों में वृद्धि कर रही है। उन्होंने कहा,“तेज़ गर्मी में भोजन जल्दी ख़राब हो जाता है और दूषित पानी तथा अस्वच्छ खानपान बीमारियों के खतरे को बढ़ाते हैं।” उन्होंने आगे कहा,”मरीज़ अक्सर दस्त, पेट दर्द, उल्टी, चक्कर और बुखार जैसी शिकायतें लेकर अस्पताल पहुँचते हैं। गंभीर स्थिति में देरी से इलाज मिलने पर रक्तचाप गिरने, किडनी संबंधी जटिलताओं और इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन से मानसिक भ्रम जैसी समस्याएँ भी हो सकती हैं।”

जहाँ बुजुर्गों में इस मौसम में रिकवरी धीमी होती है और जल धारण क्षमता भी कम होती है। वहीं डॉ. शशि कांत धीर ने चेतावनी देते हुए कहा,” बच्चे भी तेज़ी से डिहाइड्रेशन का शिकार हो जाते हैं। बच्चों में उल्टी और दस्त के कारण तरल पदार्थ तेज़ी से कम हो जाता है।”

आंकड़ों के अनुसार इस गर्मी के स्वास्थ्य संकट का सबसे अधिक प्रभाव वरिष्ठ नागरिकों पर पड़ा है।

अप्रैल में 1,290 से अधिक बुजुर्गों ने इस योजना के तहत इलाज करवाया, जबकि लगभग 120 बच्चे उपचार प्राप्त कर चुके हैं।

होशियारपुर जिला सबसे अधिक प्रभावित रहा, जहाँ केवल मॉडरेट डिहाइड्रेशन के साथ तीव्र गैस्ट्रोएंटेराइटिस से पीड़ित 250 से अधिक बुज़ुर्ग मरीज़ों का इलाज किया गया। जालंधर में भी इसी श्रेणी के तहत 100 से अधिक मामले दर्ज हुए। पटियाला, लुधियाना, रूपनगर, बरनाला, संगरूर, बठिंडा और शहीद भगत सिंह नगर में भी समान प्रवृत्ति देखी गई।

वहीं श्री मुक्तसर साहिब, पठानकोट, फतेहगढ़ साहिब और गुरदासपुर जिलों में उल्टी और डिहाइड्रेशन के कई मामले सामने आए, जिनमें कई मरीज़ों को तुरंत अस्पताल में भर्ती करना पड़ा।

हालाँकि,असंख्य परिवारों के लिए सबसे बड़ी राहत केवल इलाज ही नहीं बल्कि आर्थिक बोझ से मुक्ति भी रही है। मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत पात्र नागरिकों को बिना किसी ख़र्च के जाँच, दवाइयाँ, आईवी फ्लूड, हाइड्रेशन थेरेपी और अस्पताल में इलाज उपलब्ध करवाया जा रहा है।

अधिकारियों के अनुसार, सेहत कार्ड ने लोगों को अधिक ख़र्च के डर से इलाज में देरी करने के बजाय समय पर चिकित्सा सहायता लेने के लिए प्रोत्साहित किया है। यह विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमज़ोर परिवारों के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण साबित हुआ है, जिनमें से कई परिवार पहले स्थिति गंभीर होने तक अस्पताल जाने में देरी करते थे।

डॉ. शशि कांत धीर ने सलाह दी कि ,” बच्चों के माता-पिता को गर्मियों के दौरान अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए, जैसे कि बच्चों को पर्याप्त पानी देना, हल्के सूती कपड़े पहनाना, दोपहर की तेज़ धूप से बचाना और घर का बना ताज़ा भोजन देना।” उन्होंने यह भी आग्रह किया कि यदि बच्चों में बुखार, उल्टी, सुस्ती या डिहाइड्रेशन जैसे लक्षण दिखाई दें तो माता-पिता तुरंत चिकित्सा सहायता लें।

इस समय जब राज्य में मौसमी बीमारियों का प्रकोप बढ़ रहा है, ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ केवल एक कल्याणकारी योजना नहीं रह गई है। भीषण गर्मी से जूझ रहे कई पंजाबी परिवारों के लिए यह समय पर इलाज और स्वास्थ्य सेवा की एक महत्त्वपूर्ण गारंटी बन गई है, जिससे उपचार के दौरान आर्थिक बोझ का डर नहीं रहता।

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‘AAP’ ने पंजाबी गायक दिलजीत दोसांझ के मैनेजर के घर पर हुए हमले की निंदा की, भाजपा को ठहराया जिम्मेदार

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आम आदमी पार्टी ने मशहूर पंजाबी कलाकार दिलजीत दोसांझ के मैनेजर पर हुए कायराना हमले की कड़े शब्दों में निंदा की है। ‘आप’ ने कहा कि यह हमला सिर्फ एक व्यक्ति पर नहीं, बल्कि पंजाब के सम्मान और लोकतांत्रिक मूल्यों पर हमला है।

कैबिनेट मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि कुछ ही दिन पहले भाजपा ने दिलजीत दोसांझ को अपनी पार्टी में शामिल होने का न्योता दिया था, जिसे उन्होंने सिरे से नकार दिया। इस इनकार के ठीक दो दिन बाद उनके मैनेजर के घर पर हमला होना और लॉरेंस बिश्नोई द्वारा इसकी जिम्मेदारी लेना महज संयोग नहीं है। इससे साफ जाहिर होता है कि भाजपा अब गैंगस्टरों का इस्तेमाल करके देश के बड़े सेलिब्रिटीज और कारोबारियों को डरा-धमका रही है।

चीमा ने कहा कि जिस लॉरेंस बिश्नोई ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है, वह गुजरात की साबरमती जेल में बंद है, जहां भाजपा की सरकार है। उन्होंने कहा कि यह बेहद शर्मनाक है कि हाई-सिक्योरिटी जेल में बैठकर गैंगस्टर वारदातों को अंजाम दे रहे हैं। क्या यह बिना सरकारी संरक्षण के संभव है? भाजपा गैंगस्टरों की मदद से दूसरे राज्यों की शांति भंग करने की साजिश रच रही है, जिसे तुरंत रोका जाना चाहिए।

मंत्री ने आगे कहा कि इस घटना के बाद भाजपा की ‘पंजाब-विरोधी’ मानसिकता पूरी तरह बेनकाब हो गई है। भाजपा पंजाब के उन कलाकारों और हस्तियों को निशाना बना रही है जो उनके आगे झुकने को तैयार नहीं हैं। जिस तरह से सेलिब्रिटीज पर हमले हो रहे हैं, उससे साफ है कि भाजपा देश के लोकतंत्र और सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा बनती जा रही है। चीमा ने केंद्र सरकार और गुजरात प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि जेलों से चल रहे इस खूनी खेल को तुरंत बंद किया जाए।

वहीं, कैबिनेट मंत्री डॉ. बलबीर ने भी इस हमले की निंदा की। उन्होंने अपने X (ट्विटर) अकाउंट पर लिखा, “पहले भाजपा ने पंजाब के सबसे बड़े कलाकार को अपनी राजनीति के लिए इस्तेमाल करने की कोशिश की। जब उन्होंने इनकार कर दिया, तो अचानक बिश्नोई गैंग ने उनके मैनेजर के घर पर हमला कर दिया। वही भाजपा सरकार गुजरात में लॉरेंस बिश्नोई को पूरी तरह सुरक्षा दे रही है। पंजाब बहुत कुछ देख चुका है। भाजपा का पंजाब-विरोधी चेहरा अब पूरी तरह बेनकाब हो चुका है।”

मंत्री बलजीत कौर ने लिखा, “टाइमलाइन सबके सामने है। भाजपा ने दिलजीत को अपने साथ जोड़ने की कोशिश की। दिलजीत ने साफ इनकार कर दिया। कुछ दिनों बाद दिलजीत के मैनेजर के घर के बाहर गोलियां चलती हैं और लॉरेंस गैंग इसकी जिम्मेदारी लेता है। दूसरी तरफ भाजपा सरकार लॉरेंस बिश्नोई को गुजरात में बचाए बैठी है और उससे पूछताछ तक नहीं होने दे रही। पंजाबियों को डराने के लिए गैंगस्टरों का इस्तेमाल किया जा रहा है। भाजपा की यह पंजाब-विरोधी सोच सबके सामने बेनकाब हो चुकी है।”

मंत्री रवजोत सिंह, हरभजन सिंह ईटीओ, हरदीप सिंह मुंडियां, लाल चंद कटारूचक, गुरमीत सिंह खुड्डियां और राज्य मीडिया इंचार्ज बलतेज पन्नू ने भी अपने सोशल मीडिया हैंडल्स पर इस हमले की निंदा की है।

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‘AAP’ मंत्री संजीव अरोड़ा की ED द्वारा गिरफ्तारी राजनीति से प्रेरित, भाजपा सांसदों की तरह सुरक्षा की मांग

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आम आदमी पार्टी (आप) के मंत्री संजीव अरोड़ा ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा मनी लॉन्ड्रिंग मामले में की गई अपनी गिरफ्तारी को पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में चुनौती दी है। उन्होंने पंजाब में भाजपा और ‘आप’ के बीच चल रही राजनीतिक लड़ाई के बीच इस पूरी कार्रवाई को “राजनीतिक बदले की भावना” से की गई कार्रवाई करार दिया है।

यह मामला चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस संजीव बेरी की डिवीजन बेंच के सामने संजीव अरोड़ा की उस याचिका पर सुनवाई के दौरान आया, जिसमें उन्होंने अपनी गिरफ्तारी और गुरुग्राम की अदालत द्वारा सुनाए गए रिमांड के आदेशों को चुनौती दी थी। संजीव अरोड़ा की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता पुनीत बाली ने दलील दी कि ईडी की कार्रवाई एक बड़ी राजनीतिक साजिश का हिस्सा है और उन्होंने हाई कोर्ट द्वारा हाल ही में भाजपा सांसदों को दी गई राहत जैसी समान सुरक्षा की मांग की।

इस मामले को “राजनीतिक बदले की एक हैरान करने वाली मिसाल” बताते हुए संजीव अरोड़ा के वकील ने अदालत से कहा कि यह राजनीतिक उत्पीड़न का मामला है। उन्होंने कहा कि मैं आपके सामने हाल ही में पारित दो ऐसे आदेश दिखाना चाहता हूं, जहां राजनीतिक बदले की भावना से बचाव के लिए सुरक्षा दी गई थी और मैं समानता के अधिकार की मांग करता हूं।

सांसद संदीप पाठक और राजिंदर गुप्ता, जो बाद में अन्य सांसदों सहित भाजपा में शामिल हो गए थे, से जुड़ी हालिया कार्रवाई का हवाला देते हुए संजीव अरोड़ा के वकील ने दलील दी कि अदालत ने उन्हें जबरन कार्रवाई और सुरक्षा खतरों से बचाने के लिए दखल दिया था। उन्होंने बेंच के सामने कहा कि पंजाब राजनीतिक बदले की लड़ाई का गवाह बन रहा है। आपने दूसरी तरफ के दो लोगों को सुरक्षा दी थी, मैं सिर्फ दूसरी तरफ हूं। इसके बाद अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 14 मई के लिए तय कर दी।

संजीव अरोड़ा को ईडी ने 9 मई को ‘हैंपटन स्काई रियल्टी लिमिटेड’ से जुड़े आरोपों के संबंध में गिरफ्तार किया था, जहां उन्होंने पहले चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर के रूप में काम किया था। ईडी ने कंपनी पर फेमा (FEMA) नियमों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है और दावा किया है कि बिना माल की वास्तविक आवाजाही के निर्यात दिखाया गया था।

हालांकि, वरिष्ठ अधिवक्ता पुनीत बाली ने इन आरोपों का जोरदार खंडन करते हुए दलील दी कि हर लेनदेन उचित बैंकिंग चैनलों और चेक भुगतान के जरिए किया गया था, जबकि निर्यात कस्टम क्लीयरेंस के साथ किया गया था। पुनीत बाली ने अदालत में कहा कि संजीव अरोड़ा को सिर्फ इसलिए कैसे फंसाया जा सकता है कि किसी विक्रेता का जीएसटी नंबर सक्रिय नहीं था, जबकि उन लोगों के खिलाफ कोई कार्रवाई तक नहीं हुई।

ईडी की कार्रवाई की कानूनी वैधता पर सवाल उठाते हुए बाली ने दलील दी कि प्रवर्तन मामले की सूचना रिपोर्ट (ECIR) खुद टिकाऊ नहीं है, क्योंकि यह पूरी तरह भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत गुरुग्राम पुलिस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर पर आधारित है।

उन्होंने आगे बताया कि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद पुलिस एफआईआई अपलोड करने और आरोपी को उसकी प्रति देने में नाकाम रही। संजीव अरोड़ा के वकील ने कहा कि एफआईआई रात 1:50 बजे बिना किसी प्रारंभिक जांच के दर्ज की गई थी और यह बेहद कड़ी कार्रवाई है। उन्होंने कहा कि एफआईआर दर्ज होती है और उसकी प्रति तक नहीं दी जाती, जबकि उनके पास पुलिस पोर्टल के स्क्रीनशॉट हैं जो दिखाते हैं कि यह ब्लॉक था।

उन्होंने आगे दलील दी कि ईडी ने किसी भी ठोस पुलिस जांच का इंतजार किए बिना मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून (PMLA) के तहत कार्रवाई शुरू कर दी और कहा कि यह पूरी तरह गैरकानूनी और राजनीतिक बदले की भावना से की गई कार्रवाई है।

हाल ही में भाजपा में शामिल हुए सांसद अशोक मित्तल से तुलना करते हुए बाली ने ईडी द्वारा चुनिंदा लोगों को निशाना बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने दलील दी कि दो फेमा (FEMA) छापे मारे गए थे, जिनमें से एक अशोक मित्तल के खिलाफ था। उन्होंने पार्टी छोड़ी और सत्तारूढ़ पार्टी में शामिल हो गए और कोई गिरफ्तारी नहीं हुई। यह एक पूरी तरह राजनीतिक साजिश है।

संजीव अरोड़ा ने अपनी गिरफ्तारी की प्रक्रिया की कानूनी वैधता को भी चुनौती दी और अदालत को बताया कि उन्हें सुबह 7 बजे गिरफ्तार किया गया था, जबकि गिरफ्तारी के आधार शाम 4 बजे बताए गए। उनके वकील ने कहा कि रिमांड का आदेश उनकी किसी भी अपील पर विचार किए बिना यांत्रिक रूप से पारित किया गया और जहां शिकायतकर्ता और सरकारी वकील दोनों ईडी ही हैं, यह कानूनी रूप से गैरकानूनी है।

दोपहर 1 बजे तक दलीलें सुनने के बाद बेंच ने मामले की अगली सुनवाई 14 मई तक स्थगित कर दी।

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