Punjab
पंजाब सरकार ने करोड़ों रुपये के बकाया की वसूली के लिए वैट और जीएसटी डिफॉल्टरों की संपत्तियों की नीलामी शुरू की: हरपाल सिंह चीमा
पंजाब के वित्त, योजना, कर एवं आबकारी मंत्री एडवोकेट हरपाल सिंह चीमा ने आज यहां घोषणा की कि राज्य सरकार ने लंबे समय से वैट और जीएसटी की चोरी करने वालों की संपत्तियों की सार्वजनिक नीलामी आधिकारिक रूप से शुरू कर कर डिफॉल्टरों के खिलाफ अपनी वसूली मुहिम को तेज कर दिया है। उन्होंने कहा, “राज्य के लंबे समय से बकाया राजस्व की वसूली के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए आबकारी एवं कर विभाग ने संपत्तियों की तीन बड़ी नीलामियां सफलतापूर्वक संपन्न की हैं। इनके माध्यम से उन कारोबारियों और व्यक्तियों से बड़ी राशि की वसूली की गई है, जिन्होंने बार-बार अवसर दिए जाने और कानूनी नोटिस जारी होने के बावजूद जानबूझकर अपनी कर देनदारियों का भुगतान नहीं किया।”
इस प्रवर्तन अभियान की प्रारंभिक सफलताओं की जानकारी देते हुए मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने बताया कि पहली बड़ी नीलामी मोहाली में डिफॉल्टर फर्म मैसर्स सुमित इंजीनियरिंग के विरुद्ध की गई, जहां 19 जून 2026 को संपत्ति 13.22 करोड़ रुपये में बेची गई। उन्होंने आगे बताया कि शाहकोट, जालंधर स्थित मैसर्स एम.आर. राइस मिल्स की संपत्ति की नीलामी भी सफल रही, जिससे कुल 1.11 करोड़ रुपये प्राप्त हुए।
वित्त मंत्री ने कहा, “सफल बोलीदाताओं द्वारा आज 3.58 करोड़ रुपये की राशि सीधे सरकारी खजाने में जमा करा दी गई है, जबकि शेष राशि नियमों के अनुसार आगामी सप्ताह में कानूनी रूप से वसूल कर जमा कराई जाएगी।”
उन्होंने कहा कि मोहाली और जालंधर में हुई ये प्रारंभिक सफल नीलामियां बिना किसी भय या पक्षपात के कर कानूनों को लागू करने की राज्य सरकार की दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि संपत्तियों की जब्ती और नीलामी सहित ये सख्त वसूली कार्रवाइयां पंजाब सरकार की पूर्व घोषित नीति का ही विस्तार हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि ये कार्रवाई विशेष रूप से उन पुराने कर डिफॉल्टरों के खिलाफ की जा रही है जिन्होंने राज्य की एकमुश्त निपटान (ओटीएस) योजना के अंतर्गत उपलब्ध कराई गई बड़ी राहत का लाभ नहीं उठाया।
कर चोरी के मामलों पर सरकार के कड़े रुख को दोहराते हुए वित्त मंत्री चीमा ने कहा, “मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार का मुख्य उद्देश्य जनता के वैध धन की वसूली करना है, केवल दंडात्मक कार्रवाई करना नहीं।”
करदाताओं को स्वेच्छा से अनुपालन करने का अवसर देने और व्यापारियों को पुराने विवादों के समाधान का एक अंतिम मौका प्रदान करने के उद्देश्य से उन्होंने घोषणा की कि पंजाब सरकार ने एकमुश्त निपटान (ओटीएस) योजना की अवधि 31 जुलाई 2026 तक बढ़ा दी है। उन्होंने कहा कि यह योजना बकाया वैट देनदारियों वाले करदाताओं को अपने बकाये का शीघ्र निपटान करने के लिए एक पारदर्शी और अत्यंत लाभकारी व्यवस्था प्रदान करती है, जिससे वे न्यायिक कार्यवाही, लंबित विवादों और सरकारी प्रवर्तन कार्रवाई से बच सकते हैं।
शेष कर बकायेदारों को अंतिम चेतावनी देते हुए आबकारी एवं कर मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि सरकारी कर मांगों की अनदेखी करने और यह मानकर चलने का दौर कि सरकारी बकाया वसूल नहीं किया जाएगा, अब समाप्त हो चुका है। उन्होंने खुलासा किया कि आबकारी एवं कर विभाग ने आदतन और पुराने डिफॉल्टरों की अनेक संपत्तियों की पहचान कर ली है तथा आने वाले सप्ताहों और महीनों में विभिन्न जिलों में लगभग 20 अन्य संपत्तियों की नीलामी निर्धारित की जा चुकी है।
उन्होंने कहा, “आबकारी एवं कर विभाग सार्वजनिक राजस्व की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि पंजाब के हजारों ईमानदार और कानून का पालन करने वाले करदाताओं को कुछ जानबूझकर डिफॉल्टर बने लोगों के कारण वित्तीय या प्रतिस्पर्धात्मक नुकसान न उठाना पड़े।”
वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने चेतावनी दी कि जो करदाता अपने कानूनी दायित्वों की लगातार अनदेखी कर रहे हैं, उन्हें तत्काल और गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। उन्होंने कहा कि कर विभाग पंजाब के प्रत्येक रुपये की सुरक्षा के लिए बैंक खातों को अटैच करने, संपत्तियां जब्त करने तथा चल एवं अचल दोनों प्रकार की संपत्तियों की सार्वजनिक नीलामी सहित सभी उपलब्ध कानूनी उपायों का उपयोग कर रहा है।
Punjab
PSPCL में 2,437 युवाओं को मिलेगी नियुक्ति, पंजाबी भाषा परीक्षा पास करना होगा अनिवार्य: हरपाल चीमा
पंजाब के वित्त मंत्री Harpal Singh Cheema ने बताया कि युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए पंजाब सरकार ने एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। उन्होंने कहा कि पहले आईटीआई पास युवाओं के लिए 2,600 पद आरक्षित किए गए थे, जिनके लिए कंप्यूटर आधारित परीक्षा भी आयोजित की गई थी।
चीमा ने जानकारी दी कि इस भर्ती प्रक्रिया के तहत 2,437 युवाओं का चयन किया गया था। इन सभी उम्मीदवारों ने Punjab State Power Corporation Limited (PSPCL) में छह महीने की अप्रेंटिसशिप ट्रेनिंग सफलतापूर्वक पूरी कर ली है। अब सरकार ने इन युवाओं को सीधे सहायक लाइनमैन (ALM) के पद पर नियुक्त करने का निर्णय लिया है।
उन्होंने कहा कि Bhagwant Mann के नेतृत्व में पंजाब सरकार का उद्देश्य राज्य के अधिक से अधिक युवाओं को सरकारी विभागों में रोजगार उपलब्ध कराना है। इसी सोच के तहत इन युवाओं की नियुक्ति के लिए कानूनी राय भी ली गई है और सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी कर ली गई हैं।
वित्त मंत्री ने कहा कि गर्मी के मौसम और आगामी मानसून सीजन के दौरान बिजली विभाग में मानव संसाधन की बढ़ती आवश्यकता को देखते हुए इन युवाओं को जल्द से जल्द ड्यूटी पर तैनात किया जाएगा। इस संबंध में प्रस्ताव को भी मंजूरी के लिए प्रस्तुत किया जा रहा है।
हरपाल चीमा ने स्पष्ट किया कि नियुक्ति से पहले सभी चयनित उम्मीदवारों को पंजाबी भाषा की एक बुनियादी योग्यता परीक्षा पास करनी होगी। पंजाबी परीक्षा में सफल होने के बाद उन्हें तत्काल प्रभाव से सहायक लाइनमैन (ALM) के रूप में नियुक्त कर दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि यह फैसला पंजाब के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करने के साथ-साथ बिजली सेवाओं को और अधिक मजबूत एवं प्रभावी बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
National
NEET परीक्षा से पहले अरविंद केजरीवाल ने बढ़ाया छात्रों का हौसला, कहा- शांत दिमाग से दें परीक्षा
NEET परीक्षा से ठीक पहले आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री Arvind Kejriwal ने सोशल मीडिया के माध्यम से छात्रों के लिए एक विशेष वीडियो संदेश जारी किया। अपने संदेश में उन्होंने परीक्षा देने जा रहे लाखों विद्यार्थियों का उत्साह बढ़ाया और उन्हें तनावमुक्त होकर आत्मविश्वास के साथ परीक्षा देने की सलाह दी।
केजरीवाल ने कहा कि वह जानते हैं कि छात्रों ने पिछले कुछ समय में काफी चुनौतियों और मानसिक दबाव का सामना किया है। उन्होंने कहा कि एक ही महीने में दो बार परीक्षा देना आसान नहीं होता और इससे विद्यार्थियों के साथ-साथ उनके परिवारों पर भी अतिरिक्त दबाव पड़ा है।
उन्होंने छात्रों से अपील की कि अब वे पिछली सभी चिंताओं और परिस्थितियों को पीछे छोड़कर केवल अपनी परीक्षा पर ध्यान केंद्रित करें। उन्होंने कहा, “अब कुछ ही घंटे बचे हैं। पूरी एकाग्रता और शांत मन से परीक्षा दें। अपनी तैयारी पर भरोसा रखें और बिना किसी तनाव के परीक्षा केंद्र जाएं।”
अरविंद केजरीवाल ने छात्रों की मेहनत पर विश्वास जताते हुए कहा कि उन्हें पूरा भरोसा है कि सभी विद्यार्थी शानदार प्रदर्शन करेंगे। उन्होंने कहा, “मुझे यकीन है कि आप सभी अच्छा प्रदर्शन करेंगे, NEET में सफलता हासिल करेंगे और भविष्य में देश के योग्य डॉक्टर बनेंगे।”
अपने संदेश के अंत में उन्होंने सभी परीक्षार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए ‘ऑल द बेस्ट’ कहा और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
Education
भगवंत मान सरकार के ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ अभियान के तहत नशे से उबर रहे युवाओं को नई ज़िंदगी देने में अहम भूमिका निभा रहे हैं पुस्तकालय
पंजाब में नशे के ख़िलाफ़ चल रही लड़ाई में पुस्तकालय एक नए लेकिन बेहद प्रभावशाली हथियार बनकर उभर रहे हैं। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ अभियान के तहत सरकारी नशा मुक्ति एवं पुनर्वास (रिहैबिलिटेशन) केंद्रों में स्थापित पुस्तकालय नशे से उबर रहे लोगों को नशे की तलब से निपटने, मानसिक स्वास्थ्य बेहतर बनाने और रिकवरी के दौरान सकारात्मक दिनचर्या विकसित करने में मदद कर रहे हैं। इन पुस्तकालयों की स्थापना, नवीनीकरण और रखरखाव पंजाब के ‘लीडरशिप इन मेंटल हेल्थ प्रोग्राम’ के माध्यम से किया गया है। यह एक फ़ेलोशिप कार्यक्रम है, जो युवाओं को राज्य के नशा विरोधी अभियान से जोड़ता है। अब तक फ़ेलोज़ ने 10 ज़िलों के सरकारी केंद्रों में पुस्तकालय पहलों का समर्थन किया है और वर्ष के अंत तक 80 प्रतिशत से अधिक नशा मुक्ति एवं रिहैबिलिटेशन सेंटरों तक इस पहल का विस्तार करने की योजना है।
धार्मिक ग्रंथों, सिख इतिहास, साहित्य, कविता, जीवनी, पंजाबी संस्कृति और मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित पुस्तकों से सुसज्जित ये पुस्तकालय मरीज़ों को वह क्षमता वापस पाने में मदद कर रहे हैं, जिसे नशे की लत अक्सर छीन लेती है—ध्यान केंद्रित करने और आत्मचिंतन करने की क्षमता।
बठिंडा स्थित सरकारी नशा मुक्ति एवं रिहैबिलिटेशन सेंटर में किताबें अब उपचार प्रक्रिया का अहम हिस्सा बन चुकी हैं। मरीज़ अपने खाली समय में पढ़ने में रुचि ले रहे हैं और अक्सर एक-दूसरे से उन कहानियों पर चर्चा करते हैं, जिनमें उन्हें अपने जीवन की झलक दिखाई देती है।
बठिंडा स्थित पंजाब सरकार के नशा-मुक्ति केंद्र में कार्यरत काउंसलर सोमा ने बताया, “पहले यहाँ कोई पुस्तकालय नहीं था। यहाँ के डॉक्टर साहब ने पहल करके इसे शुरू किया। जब मरीज़ पढ़ना शुरू करते हैं तो उनका ध्यान दूसरी ओर लग जाता है। वे किताबों में इतने रम जाते हैं कि नशे की तलब कम होने लगती है। कहानियाँ, कविता और आत्मकथाएँ विशेष रूप से लोकप्रिय हैं।” उन्होंने कहा कि पढ़ना नियमित काउंसलिंग सत्रों का एक महत्त्वपूर्ण पूरक बन गया है।
उन्होंने कहा, “किताबें मरीज़ों को अपने जीवन और भविष्य के बारे में अलग ढंग से सोचने के लिए प्रेरित करती हैं। वे अधिक शांत होते हैं और रिकवरी पर चर्चा में सक्रिय रूप से भाग लेने लगते हैं। पढ़ने से उनके जीवन में सकारात्मकता लौटती है।”
पुस्तकालयों का प्रभाव केवल बठिंडा तक सीमित नहीं है। अन्य रिहैबिलिटेशन सेंटरों में भी काउंसलरों ने देखा है कि मरीज़ पढ़ने की आदत के माध्यम से स्वस्थ दिनचर्या विकसित कर रहे हैं।
होशियारपुर स्थित पंजाब सरकार के नशा मुक्ति केंद्र में क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट संदीप कुमारी ने बताया कि उन्होंने स्वयं किताबों के माध्यम से कई लोगों के जीवन में बदलाव देखा है। उन्होंने कहा, “हमने वर्ष 2016 में अपने घरों से किताबें लाकर पुस्तकालय की शुरुआत की थी। वर्षों तक नशे के कारण संवेदनहीन हो चुके मरीज़ धीरे-धीरे पुस्तकालय आने लगे। अधिकांश प्रेरणादायक किताबें पढ़ते थे, जिनसे उन्हें उबरने और दोबारा ध्यान केंद्रित करने में मदद मिली। इसी दौरान हमें पता चला कि कई लोगों को यह बुनियादी जानकारी भी नहीं थी कि नशे के लिए इस्तेमाल की जाने वाली सुइयों से एचआईवी/एड्स फैल सकता है। हमारे पुस्तकालय में जीवनियाँ, धार्मिक पुस्तकें और नशा विरोधी साहित्य बेहद लोकप्रिय हैं। हालाँकि सबसे अधिक पढ़ी जाने वाली पुस्तक डॉ. नरेंद्र सिंह कपूर की ‘डूंघियां सिखरां’ है।”
सिख धर्म, सिख इतिहास, अध्यात्म और महान व्यक्तियों की जीवनियों से संबंधित पुस्तकें सबसे अधिक पसंद की जाती हैं। काउंसलरों का कहना है कि कई मरीज़ संघर्ष और कठिन दौर के बाद सफलता हासिल करने वाले लोगों की कहानियों की ओर विशेष रूप से आकर्षित होते हैं। ऐसी कहानियाँ उन्हें अपने जीवन से जुड़ी हुई महसूस होती हैं । केंद्र में उपचाराधीन एक मरीज़ ने बताया कि पढ़ना उसके लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया है।
नथाना गाँव के परमिंदर सिंह (बदला हुआ नाम), जो वर्तमान में बठिंडा केंद्र में उपचाराधीन हैं, ने कहा, “मुझे सिख इतिहास और आत्मकथाएँ पढ़ना पसंद है। जब आप उन लोगों के बारे में पढ़ते हैं जिन्होंने कठिनाइयों का सामना किया और फिर भी जीवन में सफलता हासिल की, तो उससे हौसला मिलता है। मैंने हाल ही में उस्ताद नुसरत फ़तेह अली ख़ान के बारे में पढ़ा, जो मुझे बहुत प्रेरणादायक लगा।”
मलेरकोटला के अब्बासपुरा निवासी बलदेव सिंह ने कहा कि पुस्तकालय ने उन्हें अपनी एक पुरानी आदत से दोबारा जोड़ दिया है। उन्होंने कहा, “मुझे विशेष रूप से डॉ. सतनाम सिंह संधू की किताबें पढ़ना पसंद है। पढ़ने से मेरा मन व्यस्त रहता है और मैं अपने लक्ष्य पर केंद्रित रह पाता हूँ।”
काउंसलरों का कहना है कि ऐसे अनुभव अब लगातार देखने को मिल रहे हैं। जो मरीज़ शुरुआत में पढ़ने में रुचि नहीं दिखाते, वे धीरे-धीरे इसकी आदत विकसित कर लेते हैं। वे पहले छोटी और सरल किताबों से शुरुआत करते हैं और बाद में एक-दूसरे से किताबों का आदान-प्रदान करते हैं, पढ़ी हुई सामग्री पर चर्चा करते हैं तथा धर्म, इतिहास, कविता और अन्य विषयों में घंटों तक डूबे रहते हैं।
एक पन्ना पलटने की इस सरल प्रक्रिया के साथ, मुख्यमंत्री मान के ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ अभियान के तहत नशे से जूझ रहे अनेक लोग अपने जीवन का नया अध्याय भी शुरू कर रहे हैं।
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