Lifestyle
Parents अपने बच्चों के Role Model बनकर उन्हें बनाएं Confident
हर Parents अपने बच्चों को एक अच्छा जीवन देना चाहते है और हर बच्चे के लिए उसका बचपन खास होता है। ऐसे में माता-पिता की ये एक जिम्मेदारी हो जाती है कैसे वो अपने बच्चे का पालन-पोषण सही माहौल में और बेहतर ढंग से करें। पेरेंट्स हमेशा इस जिम्मेदारी को लेकर सतर्क रहते हैं और अपने बच्चों को सही मार्ग पर ले जाने के लिए प्रयासरत रहते हैं। बच्चों के पालन-पोषण में उचित माहौल का विशेष महत्व होता है। एक पॉजिटिव और स्नेहभरा माहौल उन्हें सही राह पर चलने में मदद करता है, जबकि नकारात्मकता और तनाव उनके विकास को रोक सकते हैं।
Parents ही अपने बच्चों के पहले गुरु होते हैं और बच्चे के व्यक्तित्व को आकार देने में उनका बहुत बड़ा योगदान और जिम्मेदारी होती है। अपने मम्मी-पापा को देखकर ही बच्चे भी सोसाइटी में लोगों से मिलना जुलना शुरू करते है। उनको देखकर ही बच्चे अपने जीवन में सोशल, कॉन्फिडेंट और प्रैक्टिकल होना सिखते है। लेकिन आजकल की बिजी और कामकाजी लाइफस्टाइल में पेरेंट्स बच्चों के लिए समय कम निकाल पाते है जिसका नाकारात्मक प्रभाव अब बच्चों पर पड़ रहा है, इससे बच्चे कम सोशल और उनके कॉन्फिडेंस में कमी हो रही है। ऐसे में बच्चे लोगों से बातचीत करने में कतराने लगे है या फिर किसी से बात करने में डरते है।
बच्चों में किस तरह बढ़ाएं कॉन्फिडेंस
जब बच्चों को मां-बाप भरपूर प्यार, अंटेशन और केयर मिलती है तो बच्चों में अपने आप ही कॉन्फिडेंस पैदा होने लगता है वो खुद को सुरक्षित महसूस करता है और लोगों से बातचीत करने में भी उसे किसी तरह का डर नहीं होता है और बच्चा मानसिक रूप से स्वस्थ और मजबूत बनता है।
बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए इन टिप्स को फॉलो करेंगे तो फायदा होगा:
बच्चों की प्रशंसा करें: अपने बच्चे को छोटी छोटी कामयाबी पर उनकी प्रशंसा करें, चाहे वह किसी छोटी सी चीज़ में हो।
बच्चों को सपोर्ट करें: उनकी अच्छी बातों का लोगों के सामने समर्थन करें और उन्हें सपोर्ट दें जब वे कुछ नया सीख रहे हों।
उन्हें उनकी गलतियों का महत्व समझाएं: अपने बच्चों को बताएं कि गलतियां करना गलत चीज नहीं है, और वो अपनी गलतियों को दोहराएं नही बल्कि उनसे कुछ सीखा जा सकता है।
लाइफ में रहें पॉजिटिव रहें: पेरेंट्स सदैव अपने बच्चों को सकारात्मक रहने के लिए प्रेरित करें। लाइफ
में अपने निर्णयों को लेने का और स्वतंत्रता से सोचने का मौका दें। उन्हें सफलता की कहानियां सुनाएं और उन्हें आदर्श लोगों के बारे में बताएं।
संवेदनशीलता दिखाएं: उनकी भावनाओं को समझें और संवेदनशीलता दिखाएं। इससे उनका आत्मविश्वास मजबूत होता है और वे अपने सपनों को पूरा करने के लिए प्रेरित होते हैं।
बच्चों की तुलना करने से बचें: बार-बार अपने बच्चे की तुलना किसी से न करें, कोशिश करें की इससे बचें। क्योंकि हर बच्चा अपने आप में अलग है और हर बच्चे में अपनी एक अलग खासियत है। अपने बच्चे की तुलना अगर किसी और से करेंगे तो इससे बच्चे में कॉन्फिडेंस कम होगा और वो अपनी कोई भी बात आपसे शेयर करने में बचेगा।
आत्मविश्वास ही है सफलता की महत्वपूर्ण कुंजी
माता-पिता का ये महत्वपूर्ण कर्तव्य है कि वे अपने बच्चों में बचपन से ही आत्मविश्वास के बीज बोएं। आत्मविश्वास, सफलता की एक महत्वपूर्ण कुंजी होती है, और बच्चों में खुद की क्षमताओं और प्रतिबद्धता पर विश्वास करने में मदद करता है। एक शोध दिखाता है कि बच्चों में आत्मविश्वास के बीज बहुत कम उम्र से ही उगने लगते हैं। पांच साल की उम्र तक के बच्चों में नेगेटिव या पॉजिटिव होने के बीज पड़ चुके होते हैं।
इससे स्पष्ट है कि बच्चों को सही मार्गदर्शन और समर्थन की आवश्यकता है ताकि वे अपने कॉन्फिडेंस को विकसित कर सकें। माता-पिता को अपने बच्चों को उनकी क्षमताओं को समझाने, प्रोत्साहित करने, और उन्हें उनकी सफलता की दिशा में मार्गदर्शन करने के लिए समय और ध्यान देने की जरूरत है। बच्चों के आत्मविश्वास को बढ़ाने के लिए, उन्हें समझा जाना बहुत जरूरी है। पॉजिटिव बातें और प्रोत्साहन उनके सामर्थ्य को और भी मजबूत बनाते हैं।
हर माता-पिता को अपने बच्चों की रोल मॉडल बनना चाहिए
हर बच्चा अपने मम्मी-पापा से ही सब कुछ सीखता है। बच्चे के अंदर कॉन्फिडेंस बढ़ाना या कोई भी नई बात सिखाने के लिए आप ही जिम्मेदार है और आप ही उसके पहले शिक्षक हैं। हमेशा अपने बच्चे के रोल मॉडल बनकर उसके सामने आइए, बच्चों को ये लगना चाहिए की उसके पेरेंट्स से बेस्ट कोई नहीं। बच्चें को ये सिखाना चाहिए की कॉन्फिडेंस से भरा व्यक्ति हमेशा पॉजिटिव होता है और उसे सभी लोग पसंद करते है। लेकिन, आप उसके आसपास नेगेटिव भाव लेकर जाएंगे तो वो भी नेगेटिव हो जाएगा और आपकी नेगेटिविटी का बच्चे पर बुरा प्रभाव पड़ेगा।
बच्चों का सही दिशा में विकास हमारे समाज के भविष्य का निर्माण करता है। स्कूलों में सकारात्मक और सहानुभूति से भरा माहौल भी हमारे बच्चों को अपने आत्मविश्वास को बढ़ाने और अपनी क्षमताओं को विकसित करने में मदद करता है। इस प्रकार, हम न केवल उनकी शैक्षिक विकास में सहायक होते हैं, बल्कि उनके सामाजिक और मानसिक विकास में भी साथ देते हैं।
Lifestyle
आम जनता को बड़ा झटका: घरेलू LPG सिलेंडर की कीमतों में भारी बढ़ोतरी
बढ़ती महंगाई के बीच आम लोगों को एक और झटका लगा है। घरेलू रसोई गैस यानी Liquefied Petroleum Gas (LPG) के दामों में 60 रुपये की बढ़ोतरी कर दी गई है। 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत अब बढ़कर 913 रुपये हो गई है। इससे पहले राजधानी दिल्ली में यह सिलेंडर 853 रुपये में मिल रहा था। नई कीमतें 7 मार्च से लागू कर दी गई हैं। रसोई गैस की कीमतों में हुई इस बढ़ोतरी से आम जनता के घरेलू बजट पर सीधा असर पड़ने की संभावना है।
आम परिवारों की जेब पर बढ़ेगा बोझ
रसोई गैस हर घर की बुनियादी जरूरत बन चुकी है। ऐसे में कीमतों में 60 रुपये की बढ़ोतरी से लाखों परिवारों के मासिक खर्च में इजाफा होना तय है। खासतौर पर मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए यह बढ़ोतरी चिंता का कारण बन सकती है। घरेलू रसोई गैस का इस्तेमाल देश के अधिकांश घरों में खाना बनाने के लिए किया जाता है। पिछले कुछ वर्षों में सरकार की उज्ज्वला योजना के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में भी गैस कनेक्शन की संख्या तेजी से बढ़ी है। ऐसे में कीमतों में बढ़ोतरी का असर ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों में महसूस किया जाएगा।
अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का असर
विशेषज्ञों का मानना है कि एलपीजी की कीमतें काफी हद तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा कीमतों पर निर्भर करती हैं। हाल के समय में वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संसाधनों की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है।विशेष रूप से Iran से जुड़े क्षेत्रीय तनाव और युद्ध जैसी परिस्थितियों का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ा है। इससे कच्चे तेल और गैस की कीमतों में अस्थिरता बढ़ी है, जिसका असर घरेलू बाजारों पर भी पड़ता है। ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और गैस की कीमतें बढ़ती हैं, तो इसका प्रभाव एलपीजी के दामों पर भी दिखाई देता है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार से तय होते हैं दाम
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। एलपीजी भी काफी मात्रा में विदेशों से आयात की जाती है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में होने वाले बदलाव का सीधा असर देश के घरेलू बाजार पर पड़ता है। तेल विपणन कंपनियां वैश्विक कीमतों, मुद्रा विनिमय दर और परिवहन लागत को ध्यान में रखते हुए समय-समय पर रसोई गैस की कीमतों में बदलाव करती हैं।
लखनऊ समेत उत्तर प्रदेश में LPG गैस सिलेंडर की ताज़ा कीमत
ताज़ा जानकारी के अनुसार घरेलू LPG (14.2 किलोग्राम) गैस सिलेंडर की कीमतों में हाल ही में बढ़ोतरी की गई है। देशभर में लगभग ₹60 की बढ़ोतरी के बाद कीमतें बढ़ गई हैं।
- लखनऊ (Lucknow) में LPG सिलेंडर की कीमत
- घरेलू LPG (14.2 kg): लगभग ₹980 के आसपास (पहले लगभग ₹890.50)
- कमर्शियल LPG (19 kg): लगभग ₹1900 – ₹2000 के बीच (डीलर और टैक्स के अनुसार अलग हो सकती है)
पहले भी बढ़ चुकी हैं कीमतें
पिछले कुछ वर्षों में एलपीजी की कीमतों में कई बार बदलाव देखने को मिला है। कभी कीमतों में बढ़ोतरी हुई है तो कभी राहत भी दी गई है। हालांकि, हाल के समय में गैस सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी ने आम जनता की चिंता बढ़ा दी है। कई उपभोक्ताओं का कहना है कि लगातार बढ़ती महंगाई के बीच रसोई गैस के दाम बढ़ना उनके बजट को प्रभावित कर रहा है।
| शहर | गैस सिलेंडर कीमत (लगभग) |
| लखनऊ | ₹940 – ₹980 |
| वाराणसी | ₹960 के आसपास |
| कानपुर | ₹940 – ₹950 |
| नोएडा / गाजियाबाद | ₹910 – ₹930 |
| प्रयागराज | ₹940 के आसपास |
उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों पर असर
देश में Pradhan Mantri Ujjwala Yojana के तहत करोड़ों गरीब परिवारों को मुफ्त गैस कनेक्शन दिए गए हैं। इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देना और महिलाओं को धुएं से होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं से बचाना था।
हालांकि गैस सिलेंडर की कीमत बढ़ने से इन लाभार्थियों के लिए सिलेंडर भरवाना मुश्किल हो सकता है। कई सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि गरीब परिवारों को गैस पर अतिरिक्त सब्सिडी दी जाए ताकि वे इस सुविधा का लाभ लगातार उठा सकें।
महंगाई पर बढ़ी चिंता
रसोई गैस के दाम बढ़ने से महंगाई को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। पहले से ही खाद्य पदार्थों, ईंधन और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि देखी जा रही है। ऐसे में गैस सिलेंडर की कीमत बढ़ना लोगों के घरेलू खर्च को और बढ़ा सकता है। आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि घरेलू गैस की कीमतों में बढ़ोतरी का असर अप्रत्यक्ष रूप से अन्य वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है, क्योंकि कई छोटे व्यवसाय और खाद्य प्रतिष्ठान भी एलपीजी का उपयोग करते हैं।
सरकार की नीति और सब्सिडी पर नजर
एलपीजी की कीमतों को लेकर सरकार की सब्सिडी नीति भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। समय-समय पर सरकार सब्सिडी के जरिए उपभोक्ताओं को राहत देने की कोशिश करती रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा कीमतों में लगातार बढ़ोतरी होती है, तो सरकार को उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए नई नीतियों पर विचार करना पड़ सकता है।
आम लोगों की प्रतिक्रिया
कीमतों में बढ़ोतरी की खबर सामने आते ही आम लोगों में चिंता देखने को मिल रही है। कई लोगों का कहना है कि पहले से ही रोजमर्रा की चीजों के दाम बढ़े हुए हैं और अब रसोई गैस महंगी होने से घरेलू खर्च और बढ़ जाएगा। कुछ उपभोक्ताओं ने उम्मीद जताई है कि सरकार आने वाले समय में गैस सिलेंडर की कीमतों में राहत देने के लिए कोई कदम उठा सकती है।
आगे कीमतों में बदलाव संभव
ऊर्जा बाजार के विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति के आधार पर एलपीजी की कीमतों में फिर बदलाव संभव है। यदि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल और गैस की कीमतें कम होती हैं तो उपभोक्ताओं को राहत मिल सकती है, लेकिन यदि कीमतों में बढ़ोतरी जारी रहती है तो घरेलू गैस सिलेंडर और महंगा भी हो सकता है।
Lifestyle
चांदी 2 दिन में ₹26 हजार सस्ती हुई:₹2.64 लाख किलो पर आई, 10 ग्राम सोना ₹7 हजार गिरकर ₹1.62 लाख का हुआ
सोने और चांदी के दामों में आज यानी 5 मार्च को लगातार दूसरे दिन गिरावट है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 2 हजार रुपए घटकर ₹1.60 लाख पर आ गया है। इससे पहले इसकी कीमत 1.62 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम थी। सोना 2 दिन में 7 हजार रुपए सस्ता हुआ है।
वहीं, एक किलो चांदी 7 हजार रुपए गिरकर ₹2.64 लाख पर आ गई है। इससे पहले इसकी कीमत ₹2.71 लाख रुपए प्रति किलो थी। ये दो दिन में 26 हजार रुपए सस्ती हुई है। सोना चांदी के दाम में ये गिरावट प्रॉफिट बुकिंग की वजह से आई है।
सोना इस साल ₹26 हजार और चांदी ₹27 हजार महंगी
इस साल सोने-चांदी की कीमत में तेजी देखने को मिली है। बीते साल के आखिर में सोना 1.33 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम पर था, जो अब 1.60 लाख रुपए पर है। यानी इसकी कीमत इस साल अब तक 27 हजार बढ़ चुकी है। वहीं चांदी भी इस दौरान 24 हजार रुपए महंगी हुई है।
इस साल अब तक सोने-चांदी की चाल
| तारीख | सोना | चांदी |
| 31 दिसंबर 2025 | ₹1,33,195 | ₹2,30,420 |
| 20 जनवरी 2026 | ₹1,47,409 | ₹3,09,345 |
| 10 फरवरी 2026 | ₹1,56,255 | ₹2,59,100 |
| 28 फरवरी 2026 | ₹1,59,097 | ₹2,66,700 |
| 5 मार्च 2026 | ₹1,60,586 | ₹2,64,212 |
अमेरिका-ईरान तनाव पर निर्भर रहेगा बाजार
जानकारों का मानना है कि सोने-चांदी की अगली चाल इन दो बातों पर निर्भर करेगी:
- मिडल ईस्ट संकट: अगर ईरान और अमेरिका के बीच तनाव और बढ़ता है या कच्चे तेल की कीमतें फिर से उछलती हैं, तो सोने-चांदी में दोबारा तेजी आ सकती है।
- अमेरिकी डेटा: अगर अमेरिका के आर्थिक आंकड़े उम्मीद से बेहतर आते हैं, तो डॉलर मजबूत होगा और इससे सोने की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।
ज्वेलर्स से सोना खरीदते समय इन 2 बातों का रखें ध्यान
1. सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें: हमेशा ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) का हॉलमार्क लगा हुआ सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें। ये नंबर अल्फान्यूमेरिक यानी कुछ इस तरह से हो सकता है- AZ4524। हॉलमार्किंग से पता चलता है कि सोना कितने कैरेट का है।
2. कीमत क्रॉस चेक करें: सोने का सही वजन और खरीदने के दिन उसकी कीमत कई सोर्सेज (जैसे इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन की वेबसाइट) से क्रॉस चेक करें। सोने का भाव 24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट के हिसाब से अलग-अलग होता है।
Blog
आज से बिना सिम नहीं चलेगा WhatsApp , सरकार ने लागू किया नया नियम
SIM Binding Rules: आज एक मार्च से केंद्र सरकार का सिम बाइंडिंग नियम लागू हो गया है और WhatsApp और टेलीग्राम, सिग्नल जैसे मैसेजिंग ऐप इसी मोबाइल नंबर से चल पाएंगे जिसका सिम फोन में एक्टिव हो। इसका मतलब है कि जिस नंबर से व्हाट्सऐप अकाउंट बनाया है, वहीं सिम आपके फोन में होना जरूरी है। अगर आपने सिम निकाला है, बंद किया है या किसी और हैंडसैट में डाला है तो आपका व्हाट्सऐप काम करना बंद कर देगा। इसके पीछे सरकार का लक्ष्य है कि साइबर फ्रॉड रोका जा सके और डिजिटल धोखाधड़ी से यूजर्स को बचाया जा सके। ध्यान रहे कि सिम इनएक्टिव या बंद रहने पर व्हाट्सऐप काम नहीं करेगा और हर व्हाट्सऐप, टेलीग्राम अकाउंट उसी कंडीशन में काम करेंगे जब उनसे कनेक्टेड नंबर वाला सिम उस फोन में पड़ा होगा जिससे ये अकाउंट यूज किए जा रहे हैं।
दूरसंचार मंत्रालय ने 28 नवंबर को दिया था 90 दिनों का समय- कल खत्म हुई मियाद
दूरसंचार मंत्रालय ने 28 नवंबर को सिम बाइंडिग नियमों का ऐलान किया था और इन्हें लागू करने के लिए इन सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म कंपनियों को 90 दिनों का समय दिया था जो समयसीमा कल 28 फरवरी को खत्म हो गई है। व्हाट्सऐप ने अभी इसको लेकर कोई ऑफिशियल ऐलान नहीं किया है लेकिन इसी हफ्ते में व्हाट्सऐप ने ऐलान किया था कि भारत के सिम बाइडिंग नियमों के साथ उसने टेस्टिंग शुरू कर दी है।
डेस्कटॉप लॉगिन पर क्या होगा असर
वेब और डेस्कटॉप लॉगिन पर हर 6 घंटे में आपका अकाउंट लॉग-आउट हो जाएगा और इसे क्यूआर कोड से दोबारा लॉगिन करना होगा।
आप पर क्या होगा असर
सरकार की कोशिश है कि इस कदम की मदद से साइबर ठगों, साइबर क्रिमिनल्स और डिजिटल अरेस्ट करने वालों पर लगाम लगाई जा सके। ये कदम आम लोगों की भलाई के लिए ही है और इससे उन्हें कोई नुक्सान नहीं होगा। केवल कुछ बातों का ध्यान रखना होगा. जैसे कि एक्टिव सिम अगर फोन में नहीं है तो आपके फोन में व्हा्टसऐप, टेलीग्राम नहीं चल पाएंगे। सिम निकालकर दूसरे फोन में डालने पर व्हा्टसऐप रुक जाएगा। अगर आप सिम निकालते हैं तो व्हाट्सऐप टेंपरेरी इनएक्टिव हो सकता है और आपको दोबारा अपने हैंडसेट में सिम डालकर लॉगिन प्रॉसिस करना पड़ेगा।
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