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NEET की तैयारी कर रही छात्रा की मौत, परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

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हरियाणा के Hisar जिले के बरवाला क्षेत्र स्थित गांव ढाणी खान बहादुर से एक दुखद मामला सामने आया है। 19 वर्षीय छात्रा सिमरन की मौत हो गई। वह डॉक्टर बनने का सपना लेकर NEET परीक्षा की तैयारी कर रही थी।

घटना के बाद पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम करवाया और बाद में परिजनों को सौंप दिया। अंतिम संस्कार के बाद परिवार गहरे सदमे में है, जबकि पूरे गांव में शोक का माहौल है।

परिजनों और ग्रामीणों के अनुसार सिमरन पढ़ाई में बेहद होनहार थी और बचपन से ही डॉक्टर बनना चाहती थी। उसने गांव के सरकारी स्कूल से पढ़ाई की और दसवीं व बारहवीं की परीक्षाओं में अच्छे अंक प्राप्त किए थे। वह कृषि क्षेत्र की पढ़ाई के लिए प्रवेश परीक्षा भी पास कर चुकी थी, लेकिन उसका लक्ष्य एमबीबीएस कर डॉक्टर बनना था।

अपने सपने को पूरा करने के लिए वह राजस्थान के Sikar में रहकर NEET की तैयारी कर रही थी। उसने पहले भी परीक्षा दी थी, लेकिन अपेक्षित सफलता नहीं मिलने के बाद दोबारा तैयारी कर रही थी।

पुलिस मामले की जांच कर रही है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार छात्रा की मौत जहरीले पदार्थ के सेवन से हुई है। अधिकारियों का कहना है कि मामले के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और जांच पूरी होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

सिमरन के पिता महावीर ने बताया कि बेटी का सपना डॉक्टर बनकर परिवार और समाज का नाम रोशन करना था। उन्होंने कहा कि बच्चों की शिक्षा के लिए परिवार लगातार मेहनत कर रहा था और उनकी बेटी पढ़ाई को लेकर गंभीर थी।

यह घटना प्रतियोगी परीक्षाओं के दबाव, विद्यार्थियों की मानसिक भलाई और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर एक बार फिर चर्चा का विषय बन गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि छात्रों को पढ़ाई के साथ-साथ भावनात्मक और मानसिक सहयोग मिलना भी उतना ही जरूरी है, ताकि वे कठिन परिस्थितियों और तनाव का बेहतर तरीके से सामना कर सकें।

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Punjab के ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ की नई पहचान: रोज़गार, सम्मान और उम्मीद की कहानियाँ

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पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में चल रहा ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ अभियान अब रोज़गार के अवसरों के ज़रिए नशा पीड़ितों के जीवन में आई रिकवरी और नई उम्मीद की प्रेरक कहानियों से पहचाना जा रहा है। जो लोग कभी नशे की गिरफ़्त से बाहर निकलने के लिए संघर्ष कर रहे थे, वे आज होटलों, रेस्तरां, शॉपिंग मॉल्स, डी-मार्ट, ब्लिंकिट जैसी संस्थाओं में काम कर रहे हैं या स्वरोज़गार के माध्यम से अपने जीवन को फिर से पटरी पर ला रहे हैं।

मार्च 2025 में राज्य में शुरू हुए ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ अभियान के बाद से पंजाब के विभिन्न नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्रों में उपचार पूरा कर चुके अनेक लोगों को रोज़गार मिला है। यह इस बात का प्रमाण है कि आजीविका के अवसर रिकवरी और नशामुक्त जीवन की दिशा में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

इन्हीं में से एक हैं दलजिंदर सिंह (बदला हुआ नाम), जिन्होंने फ़रवरी 2026 में डी-मार्ट में नौकरी शुरू की। उन्होंने रोज़गार की ज़िम्मेदारियों को सकारात्मक ढंग से अपनाया है और धीरे-धीरे अपना जीवन दोबारा सँवार रहे हैं। दलजिंदर कहते हैं, “नौकरी मिलने से मुझे हर सुबह उठने की एक वजह मिली। इससे मेरा आत्मविश्वास बढ़ा। अब ज़िंदगी अच्छी लगती है… यहाँ तक कि सुबह की एक कप चाय भी चेहरे पर मुस्कान ले आती है।”

प्रवीण ढल्ल, जो कि किराना, फल , सब्ज़ियों और अन्य दैनिक आवश्यक वस्तुओं की डिलीवरी सेवा में कार्यरत हैं,कहते हैं, “रिहैबिलिटेशन से मुझे जीवित रहने में मदद मिली, लेकिन नौकरी ने मुझे दोबारा जीना सिखाया। जब मैंने कमाना शुरू किया, तो मैंने ख़ुद को केवल एक नशा छोड़ने की कोशिश कर रहे व्यक्ति के रूप में नहीं, बल्कि एक ज़िम्मेदार और भविष्य के बारे में सोचने वाले इंसान के रूप में देखना शुरू किया। इसी भावना ने मुझे नशे से दूर रहने की ताकत दी।”

‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ केवल पुनर्वास तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके बाद भी लोगों का साथ निभा रहा है। इसका एक उदाहरण जालंधर नशा मुक्ति केंद्र में देखने को मिलता है, जहाँ मुख्यधारा में लौट चुके पूर्व नशा पीड़ितों की नियमित रूप से निगरानी की जाती है ताकि उनकी प्रगति का आकलन किया जा सके और पुनः नशे की ओर लौटने के किसी भी संकेत का समय रहते पता लगाया जा सके।

फॉलो-अप के दौरान यह पाया गया कि कई स्वस्थ हो चुके लोग रोज़गार से जुड़ चुके हैं, जो उनके पारिवारिक और आर्थिक जीवन में दोबारा शामिल होने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है। जैसे-जैसे अधिक लाभार्थी उपचार केंद्रों से निकलकर रोज़गार और स्वरोज़गार की ओर बढ़ रहे हैं, मुख्यमंत्री भगवंत मान के ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ अभियान का प्रभाव अब केवल गिरफ़्तारियों और नशीले पदार्थों की बरामदगी से नहीं, बल्कि बहाल हुई ज़िंदगियों और रोज़गार के नए अवसरों से भी मापा जा रहा है।

नशा पीड़ितों को इस दलदल से बाहर निकालने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले काउंसलरों का मानना है कि उपचार से रोज़गार तक का सफ़र सफल पुनर्वास के सबसे मज़बूत संकेतकों में से एक है।

अमृतसर मेडिकल कॉलेज स्थित स्वामी विवेकानंद नशा मुक्ति केंद्र की काउंसलर भावना शर्मा ने कहा, “रिकवरी केवल नशा छोड़ देने का नाम नहीं है। हम मरीज़ों को अपनी भावनाएँ व्यक्त करने, जीवन को फिर से व्यवस्थित करने और भविष्य के लक्ष्य तय करने के लिए प्रेरित करते हैं। जब उन्हें रोज़गार और स्थिर जीवन की दिशा दिखाई देने लगती है, तो वे नशामुक्त रहने के प्रति और अधिक प्रतिबद्ध हो जाते हैं।”

‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ के तहत जालंधर नशा मुक्ति केंद्र के नोडल मनोचिकित्सक डॉ. अभय राज सिंह ने कहा, “ऐसी सफलता की कहानियाँ यह दर्शाती हैं कि नशा मुक्ति उपचार को पुनर्वास और रोज़गार सहायता से जोड़ना कितना महत्त्वपूर्ण है। काम पर लौटने वाला प्रत्येक स्वस्थ व्यक्ति केवल अपनी व्यक्तिगत जीत का ही नहीं, बल्कि वह एक मज़बूत परिवार और अधिक सुरक्षित समाज का प्रतीक होता है।”

जैसे-जैसे अधिक लाभार्थी उपचार केंद्रों से निकलकर रोज़गार और स्वरोज़गार की ओर बढ़ रहे हैं, अभियान का प्रभाव अब केवल गिरफ़्तारियों और बरामदगियों से नहीं, बल्कि नई ज़िंदगी पाने वाले लोगों, रोज़गार के नए अवसरों और संवरते भविष्य से भी मापा जा रहा है|

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Punjab सरकार द्वारा कामकाजी महिलाओं के लिए राज्य में पांच वर्किंग वूमेन हॉस्टल निर्माणाधीन : डॉ. बलजीत कौर

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मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार द्वारा अपने घरों से दूर विभिन्न शहरों में कार्यरत महिलाओं को सुरक्षित, सुविधाजनक एवं किफायती आवास उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास विभाग, पंजाब की ओर से मोहाली, जालंधर तथा अमृतसर में पांच वर्किंग वूमेन हॉस्टलों का निर्माण कराया जा रहा है। यह जानकारी पंजाब की सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने आज मोहाली के सेक्टर-66 में विधायक कुलवंत सिंह की उपस्थिति में सात मंजिला वर्किंग वूमेन हॉस्टल के निर्माण कार्य का शुभारंभ करते हुए दी।

डॉ. बलजीत कौर ने बताया कि इस परियोजना पर लगभग 70 करोड़ रुपये की लागत आएगी तथा इसका निर्माण कार्य लोक निर्माण विभाग द्वारा युद्ध स्तर पर कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह पंजाब का सबसे बड़ा सरकारी क्षेत्र का वर्किंग वूमेन हॉस्टल होगा, जहां 484 महिलाओं को अत्याधुनिक एवं सुरक्षित आवासीय सुविधाएं उपलब्ध होंगी। हॉस्टल में सिंगल, डबल तथा डॉर्मिटरी कमरे उपलब्ध होंगे। इसके अतिरिक्त, कामकाजी महिलाओं के साथ रहने वाले बच्चों के लिए क्रेच सुविधा तथा मनोरंजन हेतु इनडोर खेलों की व्यवस्था भी की जाएगी।

मंत्री ने बताया कि यह मोहाली में निर्मित होने वाला तीसरा वर्किंग वूमेन हॉस्टल है। इससे पहले निफ्ट मोहाली फेज-1 में 25.26 करोड़ रुपये की लागत से 150 महिलाओं की क्षमता वाला हॉस्टल निर्माणाधीन है। इसी प्रकार सेक्टर-79, मोहाली में 100 महिलाओं की क्षमता वाले एक अन्य वर्किंग वूमेन हॉस्टल का निर्माण भी तेजी से किया जा रहा है, जिस पर 12.57 करोड़ रुपये की लागत आएगी। उन्होंने आगे बताया कि मोहाली में बन रहे इन तीन हॉस्टलों के अतिरिक्त विभाग द्वारा गांधी विनिता आश्रम, जालंधर में 100 महिलाओं की क्षमता वाला 10.11 करोड़ रुपये की लागत का हॉस्टल तथा अमृतसर में 150 महिलाओं की क्षमता वाला 27.34 करोड़ रुपये की लागत का वर्किंग वूमेन हॉस्टल भी निर्माणाधीन है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सभी परियोजनाएं निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरी कर ली जाएंगी।

डॉ. बलजीत कौर ने कहा कि इन हॉस्टलों में रहने वाली महिलाओं को अत्यंत रियायती एवं नाममात्र किराए पर आवास उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे बाहर कार्यरत महिलाओं को बड़ी राहत मिलेगी। उन्होंने बताया कि बठिंडा में भी रेड क्रॉस भवन में किराये के आधार पर 100 महिलाओं की क्षमता वाला एक वर्किंग वूमेन हॉस्टल संचालित किया जा रहा है। मीडिया के एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि राज्य के किसी भी शहर में यदि कामकाजी महिलाओं के लिए हॉस्टल की मांग आती है, तो विभाग आवश्यकतानुसार किराये पर भवन लेकर भी ऐसी सुविधा उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने कहा कि विभाग का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि रोजगार के लिए अपने घरों से दूर रहने वाली महिलाओं को आवास और सुरक्षा संबंधी किसी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े। इस अवसर पर विधायक कुलवंत सिंह ने मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान तथा कैबिनेट मंत्री डॉ. बलजीत कौर का धन्यवाद करते हुए कहा कि मोहाली जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहर में दूर-दराज क्षेत्रों से आने वाली कामकाजी महिलाओं के लिए ऐसे हॉस्टल राज्य सरकार की महिला सुरक्षा एवं सशक्तिकरण के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक हैं।

इस अवसर पर सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास विभाग की निदेशक डॉ. शेना अग्रवाल, विशेष सचिव केशव हिंगोनिया, अतिरिक्त उपायुक्त (विकास) सोनम चौधरी, जिला कार्यक्रम अधिकारी निखिल अरोड़ा तथा लोक निर्माण विभाग के प्रांतीय मंडल के कार्यकारी अभियंता रणजीत सिंह सिद्धू सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

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अकालियों को ख्याली दुनिया से बाहर आ जाना चाहिए; सत्ता में वापसी की बजाय, अब उनकी जेल जाने की बारी आ गई है: CM भगवंत सिंह मान

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पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने शिरोमणि अकाली दल और कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि पंजाब पर बारी-बारी से राज करने वाली राजनीतिक पार्टियों का दौर अब खत्म हो चुका है और सूबे के भरोसे को ठेस पहुंचाने वालों को जवाबदेह बनाया जाएगा। फगवाड़ा में ‘लोक मिलनी’ के दौरान भारी जनसमूह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जहां आम आदमी पार्टी (आप) का ‘झाड़ू’ पंजाब की राजनीतिक व्यवस्था की सफाई कर रहा है, वहीं एक ही सिक्के के दो पहलू—अकाली और कांग्रेस—दशकों तक अपने निजी हितों की पूर्ति करने के बाद अब अपनी राजनीतिक अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं।

अकाली नेतृत्व द्वारा लोगों को गुमराह करने और उनकी विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि जिन्होंने श्री अकाल तख्त साहिब के समक्ष झूठ बोला, वे किसी के वफादार नहीं हो सकते। उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस अपनी आंतरिक लड़ाई के कारण आखिरी दम पर है, जबकि ‘आप’ सरकार के जन-पक्षीय शासन के तहत पंजाब शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली और कल्याण के क्षेत्रों में अभूतपूर्व प्रगति देख रहा है।

लोक मिलनी को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “वे दिन गए जब ये पार्टियाँ ‘उत्तर काटो मैं चढ़ा’ की खेल खेलती थीं और सत्ता में अपनी बारी का इंतजार करती थीं। असल में इन पार्टियों ने सत्ता में रहते हुए एक-दूसरे के हितों की रक्षा की, जिसके कारण इनके कुकर्म कभी सामने नहीं आए। पर अब लोगों ने आम आदमी पार्टी को चुना है और इस पार्टी का चुनाव चिह्न ‘झाड़ू’ सूबे की राजनीतिक व्यवस्था को साफ कर रहा है। वह दिन दूर नहीं, जब अकाली अपने पापों के कारण जेल की सलाखों के पीछे होंगे।”

मुख्यमंत्री ने कहा, “अकाली और कांग्रेस एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। उन्हें लोगों की कोई परवाह नहीं, बल्कि सिर्फ अपने निजी हितों की चिंता है। उन्होंने खुद कई स्थानों पर बेअदबी की घटनाओं को अंजाम दिया और श्री अकाल तख्त साहिब के समक्ष झूठ बोला और बाद में इसे माना भी। उन्होंने आतंकवाद के दौरान नौजवानों को मरवाया और दोषी पुलिस अधिकारियों को तरक्कियाँ तक दीं। उन्होंने खुद को ‘फख्र-ए-कौम’ की उपाधि से नवाजा, जबकि उन्होंने 1978 की घटना के दोषियों को सुरक्षित बाहर निकालने में मदद की थी।”

अकाली नेतृत्व पर बरसते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “सुखबीर बादल जमीनी हकीकतों से अनजान हैं क्योंकि उन्होंने सारी उम्र ऐशो-आराम और सुख-सुविधाओं वाले सुरक्षित माहौल में गुजारी है। सुखबीर सिंह बादल कॉन्वेंट से पढ़े राजनीतिक नेता हैं, जो सूबे की बुनियादी भौगोलिक स्थिति से भी वाकिफ नहीं हैं, पर पंजाब में राजनीतिक सत्ता हासिल करना चाहते हैं। पूर्व उप-मुख्यमंत्री सूबे की मुख्य फसलों में भी फर्क नहीं कर सकते क्योंकि उन्हें बुनियादी मुद्दों के बारे में बहुत कम समझ है।”

बेअदबी के मुद्दे का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “जब भी श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी की घटनाएँ हुईं, करोड़ों लोगों की मानसिकता को गहरी ठेस पहुँची। परमात्मा ने मुझे कानूनी विशेषज्ञों के साथ विस्तृत विचार-विमर्श के बाद यह बिल लाने की ताकत बख्शी है। सूबा सरकार ने इस बिल को बड़ी सावधानी से तैयार किया है ताकि भविष्य में कोई भी संशोधन या कमी इसे कमजोर न कर सके।”

मुख्यमंत्री ने आगे कहा, “यह बिल समाज विरोधी तत्वों को भविष्य में ऐसा कोई भी पाप करने से रोकने के लिए एक निवारक उपाय के रूप में काम करेगा और कोई भी कभी ऐसा घिनौना अपराध करने की जुर्रत नहीं कर सकेगा। अकाली अपने सत्ता के दिनों के दौरान कभी भी ऐसा कानून बनाने के लिए सुहृद नहीं थे। सच्चाई यह है कि उनके इरादे शुरू से ही गलत रहे हैं। अकालियों ने अपने राजनीतिक हितों के लिए बेअदबी की घटनाएँ होने दीं। उन्होंने श्री अकाल तख्त साहिब के आगे अपनी गलतियाँ भी मानीं पर बाद में लोगों के सामने सरेआम इससे मुकर गए। जो लोग तख्त साहिब के आगे झूठ बोल सकते हैं वे कभी भी किसी के वफादार नहीं हो सकते। लोगों को ऐसे नेताओं से सावधान रहना चाहिए जो किसी के भी वफादार नहीं हैं और सिर्फ सूबे को लूटने के लिए सत्ता हथियाना चाहते हैं।”

मुख्यमंत्री ने कहा, “अकालियों ने अपने निजी हितों के लिए धर्म का दुरुपयोग किया। जथेदार अकालियों की जेबों से निकलते हैं, जिसके कारण वे राजनीति में भी सक्रिय रहते हैं। इन लोगों का कोई एजेंडा नहीं है, बल्कि इनका एकमात्र उद्देश्य मुझे किसी भी तरह से बदनाम करना है। लोग इन नेताओं के दोगले चरित्र से अच्छी तरह वाकिफ हैं, जो कभी भी इनकी नाटकीय चालों से प्रभावित नहीं होंगे।”

कांग्रेस पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “कांग्रेस पार्टी सत्ता से पूरी तरह बाहर होने के कगार पर है, जो जल्द ही खत्म हो जाएगी क्योंकि इस पार्टी के पास लोगों और सूबे के लिए कोई दृष्टिकोण नहीं है। इनका एकमात्र उद्देश्य सत्ता संभालकर पंजाब के खजाने को लूटना है पर इनके सपने कभी पूरे नहीं होंगे। कांग्रेस पार्टी गुटबाजी का शिकार है जो अपने कलेश के कारण जल्द ही ढह-ढेरी हो जाएगी। यह कितनी अफसोस की बात है कि सत्ता के लिए झगड़ने वाले इन नेताओं को एकजुट करने की कोशिश कर रहे शीर्ष कांग्रेसी नेता इनके नामों का सही उच्चारण तक नहीं जानते।”

पंजाब के भविष्य को सही दिशा देने में शासन की भूमिका पर बात करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “किसी भी सरकार का काम बच्चों के सपनों को पंख देना होता है ताकि वे जीवन में सफलता की नई कहानी लिख सकें। मेरे द्वारा हस्ताक्षरित की जाने वाली हर फाइल आम आदमी और राज्य के हित के लिए होती है। युवाओं को बिना भ्रष्टाचार या सिफारिश के 67,000 से अधिक सरकारी नौकरियां दी गई हैं। सरकार का हर फैसला राज्य की प्रगति और इसके लोगों की खुशहाली की ओर केंद्रित है।

शिक्षा क्षेत्र में आई क्रांति को उजागर करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के लिए राज्य भर में स्कूल ऑफ एमिनेंस स्थापित किए गए हैं। इन स्कूलों में स्मार्ट कक्षाएं, पूरी तरह सुसज्जित प्रयोगशालाएं और वैज्ञानिक शिक्षा के लिए खेल मैदान हैं। अध्यापकों की विशेषज्ञता को निखारने के लिए विशेष कार्यक्रम शुरू किया गया है, जिसके तहत अध्यापकों और प्रिंसिपलों को प्रशिक्षण के लिए विदेश भेजा जा रहा है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वे आधुनिक शिक्षा पद्धतियों से भली-भांति परिचित होकर राज्य के विद्यार्थियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भविष्य की प्रतिस्पर्धाओं के लिए तैयार कर सकें। यह बहुत गर्व और संतोष की बात है कि पंजाब ने भारत सरकार द्वारा कराए गए राष्ट्रीय उपलब्धि सर्वेक्षण में केरल को भी पीछे छोड़कर पहला स्थान प्राप्त किया है।

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि विद्यार्थियों को सशस्त्र बलों की परीक्षा, नीट, जेईई, क्लैट और एनआईएफटी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए विशेष कोचिंग दी जा रही है। यह बहुत गर्व और संतोष की बात है कि स्कूल ऑफ एमिनेंस और अन्य सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों ने जेईई मेन्स, जेईई एडवांस्ड और नीट परीक्षाओं के लिए क्वालीफाई किया है। पंजाब सभी नागरिकों को मुफ्त स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने वाला पहला राज्य बन गया है और लगभग 1,000 आम आदमी क्लीनिक प्रतिदिन मुफ्त उपचार प्रदान कर रहे हैं।

अपनी सरकार द्वारा बिजली क्षेत्र में किए गए सुधारों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “2022 में ‘आप’ सरकार के सत्ता संभालने के बाद राज्य के लगभग 90 प्रतिशत घरों को मुफ्त बिजली मिल रही है। पंजाब के इतिहास में पहली बार धान के सीजन के दौरान दिन के समय भी कृषि मोटरों के लिए आठ घंटे से अधिक निर्बाध बिजली आपूर्ति की जा रही है। ‘आप’ सरकार ने किसानों की सुविधा के लिए राज्य भर में 14,000 किलोमीटर पाइपलाइनें बिछाई हैं और खालों का निर्माण किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों की सिंचाई आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए इन पाइपलाइनों और नहरों के माध्यम से 21,000 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। राज्य सरकार द्वारा छोड़ा गया यह पानी दो भाखड़ा नहरों द्वारा आपूर्ति किए जाने वाले पानी के बराबर है। इस पहल से पंजाब भर के किसानों को बहुत लाभ होगा। नहरों और नदियों में रिचार्ज पॉइंट बनाए गए हैं ताकि भूजल स्तर में सुधार हो सके और कई क्षेत्रों में जल स्तर पहले ही दो से चार मीटर तक बढ़ गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘आप’ सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि विकास का लाभ राज्य के हर गांव, किसान और घर तक पहुंचे।

‘आप’ सरकार के जन-केंद्रित शासन मॉडल का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “करदाताओं का पैसा लोगों की भलाई पर पूरी समझदारी से खर्च किया जा रहा है और यह स्कूलों, अस्पतालों और सड़कों के विकास के माध्यम से उनके पास वापस आ रहा है। राज्य सरकार अब लोगों के लिए काम कर रही है और टोल प्लाजा बंद कर दिए गए हैं, जिससे प्रतिदिन 70 लाख रुपये की बचत हो रही है। ‘आप’ सरकार समाज के हर वर्ग की भलाई के लिए ईमानदारी से प्रयास कर रही है और इस नेक कार्य के लिए कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी जा रही है।”

मांवां-धियां सत्कार योजना का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “आप सरकार ने मुख्यमंत्री मांवां-धियां सत्कार योजना शुरू की है, जिसके तहत 18 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं को प्रति माह 1,000 रुपये मिलेंगे, जबकि अनुसूचित जाति की महिलाओं को प्रति माह 1,500 रुपये की वित्तीय सहायता मिलेगी। आम लोगों, विशेषकर गरीबों के लिए 1,000 से 1,500 रुपये एक महत्वपूर्ण राशि है। यह राशि माताओं और बेटियों के सम्मान का प्रतीक है और इस योजना के कारण महिलाओं के चेहरों पर आई मुस्कान मुझे बहुत संतोष देती है।”

मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “लोगों को व्यापक स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए ‘आप’ सरकार ने मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना शुरू की है, जो देश की अपनी तरह की पहली योजना है। इसके तहत पंजाब के प्रत्येक निवासी परिवार को 10 लाख रुपये तक का कैशलेस चिकित्सा उपचार प्रदान किया जाता है। यह बहुत गर्व और संतोष की बात है कि पंजाब ऐसी व्यापक स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान करने वाला पहला भारतीय राज्य है, जिसने गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करते हुए जनता पर वित्तीय बोझ को काफी हद तक कम करने में सफलता प्राप्त की है।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आगे कहा, “इस ऐतिहासिक कदम का उद्देश्य राज्य के सभी परिवारों को व्यापक स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना है। लोगों ने इस योजना के तहत अब तक 650 करोड़ रुपये से अधिक का मुफ्त इलाज प्राप्त किया है।” मुख्यमंत्री ने कहा, “आज पंजाब हर क्षेत्र में तेजी से प्रगति कर रहा है क्योंकि राज्य सरकार ने पंजाब के सर्वांगीण विकास के लिए हर संभव कदम उठाया है। ‘आप’ सरकार ने स्वास्थ्य, शिक्षा, बिजली और अन्य क्षेत्रों में अभिनव पहलें की हैं। 49,000 किलोमीटर से अधिक ग्रामीण सड़कों के निर्माण का कार्य पूरी गति से चल रहा है और जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “सरकार ने पंजाब में 19 टोल प्लाजा बंद कर दिए हैं, जिससे टोल शुल्क के रूप में आम लोगों की जेबों से प्रतिदिन 70 लाख रुपये की बचत हो रही है। ‘आप’ सरकार ने अब तक राज्य के लोगों से किया गया हर वादा पूरा किया है और पंजाब ऐसा करने वाला पहला राज्य है। राज्य सरकार का एकमात्र एजेंडा राज्य की प्रगति और लोगों की खुशहाली सुनिश्चित करना है।” इस दौरान मुख्यमंत्री ने फगवाड़ा विधानसभा क्षेत्र के विकास के लिए 18 करोड़ रुपये से अधिक की ग्रांट की घोषणा भी की। मुख्यमंत्री ने कहा, “हलके के विकास के लिए कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी जाएगी।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने डिप्टी कमिश्नर को यह भी निर्देश दिए कि एडीसी फगवाड़ा को अधिक शक्तियां दी जाएं ताकि क्षेत्र के लोगों को छोटे-मोटे कार्यों के लिए कपूरथला न जाना पड़े। लोक मिलनी कार्यक्रम के वास्तविक उद्देश्य के बारे में बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “लोक मिलनियां राजनीति से जुड़ा कार्यक्रम नहीं है। राज्य सरकार का एकमात्र उद्देश्य विकास और खुशहाली लाना है। लोक मिलनियां सरकार और जनता के बीच एक पुल के रूप में कार्य करती हैं। ‘आप’ सरकार लोगों के कल्याण के लिए अथक मेहनत कर रही है और राज्य में पहले ही कई महत्वपूर्ण पहलें की जा चुकी हैं।”

इस अवसर पर लोकसभा सदस्य डॉ. राज कुमार चब्बेवाल तथा कई अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे।

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