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Meta का बड़ा फैसला! Facebook-Instagram पर Teen Users के लिए नए नियम

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सोशल मीडिया कंपनी Meta ने Facebook और Instagram पर नाबालिगों की सुरक्षा को लेकर अमेरिका के कई राज्यों के साथ एक बड़ा समझौता किया है। इस समझौते के तहत कंपनी को करीब 18 अरब डॉलर तक का भुगतान करना पड़ सकता है। यह मामला बच्चों और किशोरों के सोशल मीडिया इस्तेमाल से जुड़े आरोपों को लेकर चल रहे विवाद से संबंधित है।

Meta पर आरोप लगाए गए थे कि Facebook और Instagram को इस तरह डिजाइन किया गया कि बच्चे और किशोर इन प्लेटफॉर्म्स पर लंबे समय तक जुड़े रहें। कंपनी पर 13 साल से कम उम्र के बच्चों का डेटा बिना माता-पिता की अनुमति के इकट्ठा करने के आरोप भी लगे थे। हालांकि, Meta ने किसी भी तरह की गलती या गलत काम को स्वीकार नहीं किया है।

समझौते के बाद अमेरिका के संबंधित राज्यों और क्षेत्रों में Facebook और Instagram इस्तेमाल करने वाले 18 साल से कम उम्र के यूजर्स के लिए कई नए नियम लागू किए जाएंगे। इसके तहत नाबालिगों के लिए सोशल मीडिया इस्तेमाल की रोजाना दो घंटे की सीमा तय की जाएगी। इस सीमा को माता-पिता की अनुमति के बिना बदला नहीं जा सकेगा।

इसके अलावा रात 12 बजे से सुबह 6 बजे तक नाबालिग यूजर्स की Facebook और Instagram तक पहुंच बंद रहेगी। स्कूल के समय के दौरान नोटिफिकेशन पर भी प्रतिबंध लगाए जाएंगे, ताकि पढ़ाई के दौरान सोशल मीडिया का इस्तेमाल कम किया जा सके।

Meta को यूजर्स की उम्र की पुष्टि करने के लिए ज्यादा सख्त व्यवस्था भी लागू करनी होगी। इसका उद्देश्य 13 साल से कम उम्र के बच्चों को इन प्लेटफॉर्म्स से दूर रखना है। साथ ही माता-पिता को अपने बच्चों की सोशल मीडिया गतिविधियों पर नजर रखने के लिए अतिरिक्त Parental Control Tools भी उपलब्ध कराए जाएंगे।

इस समझौते की शर्तों का पालन हो रहा है या नहीं, इसकी निगरानी एक स्वतंत्र ऑडिटर द्वारा की जाएगी। वहीं, समझौते से जुड़ी भुगतान राशि करीब 10 वर्षों में किस्तों के रूप में दी जा सकती है।

हालांकि, सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ये नए नियम अमेरिका के संबंधित राज्यों और क्षेत्रों में रहने वाले नाबालिग यूजर्स पर लागू होंगे। इसलिए इन्हें भारत में तुरंत लागू होने वाले नियम नहीं माना जा सकता।

बच्चों और किशोरों की सोशल मीडिया सुरक्षा को लेकर यह समझौता काफी अहम माना जा रहा है। Meta ने अन्य बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स, जैसे TikTok और YouTube, से भी युवाओं की ऑनलाइन सुरक्षा के लिए इसी तरह के कदम उठाने की अपील की है।

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नेपाल-तिब्बत सीमा पर भीषण बाढ़, 1100 से ज्यादा लोग लापता; लैंडस्लाइड ने मचाई भारी तबाही

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नेपाल-तिब्बत सीमा पर अचानक आई भीषण बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी है। इस प्राकृतिक आपदा में कई लोगों की मौत की खबर है, जबकि 1100 से ज्यादा लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। तेज पानी और मलबे के बहाव ने कई इलाकों में जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है।

बाढ़ का पानी करीब 30 फीट तक ऊपर पहुंच गया, जिसकी चपेट में कई घर, वाहन और अन्य संपत्तियां आ गईं। तेज बहाव के कारण 19 पुलों, करीब 40 किलोमीटर सड़कों और 13 हाइड्रोपावर परियोजनाओं को नुकसान पहुंचने की जानकारी है। कई जगहों पर सड़कें टूट जाने और रास्ते बंद होने से राहत एवं बचाव कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं।

शुरुआत में इस घटना को भूकंप से जोड़कर देखा जा रहा था, लेकिन अमेरिकी जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) की जानकारी के मुताबिक इससे पहले कोई बड़ा भूकंप नहीं आया था। बताया जा रहा है कि चीन की ओर ल्हेंदे नदी में पहाड़ का एक बड़ा हिस्सा अचानक खिसककर नीचे गिरा, जिससे शक्तिशाली लैंडस्लाइड हुई।

यह लैंडस्लाइड इतनी बड़ी थी कि इससे करीब 5.2 तीव्रता के भूकंप जैसा झटका महसूस किया गया। इसके बाद भारी मात्रा में पानी और मलबा भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों में पहुंच गया। अचानक पानी का स्तर बढ़ने से आसपास के क्षेत्रों में बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए।

पानी का बहाव इतना तेज था कि मलबे के साथ कई लोग और सामान करीब 150 किलोमीटर दूर चितवन तक बह गए। यहां से अब तक 33 शव बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई है। वहीं, राहत और बचाव टीमें लगातार मलबे में फंसे और लापता लोगों की तलाश में जुटी हुई हैं।

इस आपदा की चपेट में कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जा रहे कई श्रद्धालुओं के भी आने की खबर है। लापता लोगों में विदेशी नागरिकों के साथ भारतीय और NRI नागरिक भी शामिल बताए जा रहे हैं। हालांकि, खराब मौसम और कई जगहों पर रास्ते टूट जाने के कारण राहत कार्यों में मुश्किलें आ रही हैं।

फिलहाल बचाव दल प्रभावित इलाकों में लोगों की तलाश कर रहे हैं और नुकसान का आकलन किया जा रहा है। USGS की जानकारी के बाद यह बात सामने आई है कि तबाही की शुरुआत किसी बड़े भूकंप से नहीं, बल्कि पहाड़ के बड़े हिस्से के खिसकने से हुई लैंडस्लाइड से हुई थी।

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शिमला समेत कई जिलों में भूकंप के झटके, लोगों में दहशत का माहौल

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हिमाचल प्रदेश में आज सुबह भूकंप के झटकों से लोगों में दहशत फैल गई। सुबह करीब 5 बजकर 46 मिनट पर भूकंप के झटके महसूस किए गए। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के अनुसार, भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 4.0 मापी गई। भूकंप का केंद्र जमीन की सतह से करीब 10 किलोमीटर नीचे था और यह शिमला से लगभग 66 किलोमीटर पूर्व-दक्षिण दिशा में स्थित बताया गया है।

भूकंप के झटके करीब 3 सेकंड तक महसूस किए गए। अचानक धरती हिलने से कई लोग घबरा गए और अपने घरों से बाहर निकलकर सुरक्षित जगहों की ओर चले गए। हालांकि कुछ समय बाद स्थिति सामान्य होने पर लोग वापस अपने घरों में लौट आए।

शिमला के अलावा सोलन, सिरमौर, बिलासपुर और मंडी के कई इलाकों में भी भूकंप के झटके महसूस किए जाने की जानकारी सामने आई है। राहत की बात यह है कि फिलहाल भूकंप के कारण किसी भी तरह के जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं मिली है।

हिमाचल प्रदेश पहले से ही भूकंप के लिहाज से संवेदनशील राज्यों में शामिल है। राज्य के कई हिस्से भूकंपीय जोन-4 और जोन-5 में आते हैं। इनमें जोन-5 को सबसे ज्यादा भूकंप संभावित क्षेत्र माना जाता है। ऐसे में यहां भूकंप के झटकों को लेकर प्रशासन और लोगों को हमेशा सतर्क रहने की जरूरत रहती है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, कम तीव्रता वाले भूकंपों से आमतौर पर बड़ा नुकसान नहीं होता, लेकिन ज्यादा तीव्रता वाले भूकंप गंभीर स्थिति पैदा कर सकते हैं। इसलिए भूकंप के दौरान घबराने के बजाय सुरक्षित स्थान पर जाना, लिफ्ट का इस्तेमाल न करना और खुले स्थान में रहना जरूरी है। फिलहाल प्रशासन और संबंधित एजेंसियां स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।

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गोवा-यूपी में भाजपा को हराएं, तभी E-20 वापस लेगी मोदी सरकार- केजरीवाल

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आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने मंगलवार को गोवा के मिरामार में ई-20 के खिलाफ टाउनहॉल कर मोदी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार इतनी आसानी से ई-20 वापस नहीं लेने वाली। इसके लिए भाजपा को गोवा और उत्तर प्रदेश में हराना होगा। क्योंकि इन्हें अहंकार हो गया है कि जनता कहां जाएगी, जीतना तो भाजपा को ही है। इनका यही अहंकार तोड़ना होगा। अगर इन दोनों राज्यों में भाजपा हार गई तो मोदी सरकार 5 दिन के अंदर ई-20 वापस ले लेगी। उन्होंने कहा कि भारत में 80 फीसद वाहन ई-20 के इस्तेमाल योग्य नहीं हैं। फिर भी सरकार जबरदस्ती इसे थोप रही है। भाजपा के लोग अनपढ़ हैं। ये न कोई स्टडी कराते हैं और ना ही किसी स्टडी को मानते हैं। जैसे ही ई-20 का मुद्दा शांत होगा, ये लोग ई-30 लाएंगे और डीजल में भी इथेनॉल मिलाएंगे।

गोवा आयोजित टाउनहाल में ई-20 को लेकर लोगों के अनुभवों को सुनने के उपरांत अरविंद केजरीवाल ने कहा कि ई-20 से लगभग सभी गाड़ियों की माइलेज 30 से 40 फीसद कम हो गई है और 60 से 70 फीसद गाड़ियों के इंजन व फ्यूल ट्रांसमिशन सिस्टम खराब हो रहे हैं। यह समस्या केवल गोवा की नहीं है, बल्कि पूरे देश में लोग इसके खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। लेकिन पता नहीं किन कारणों से प्रधानमंत्री देश के लोगों की बात नहीं सुन रहे हैं।

अरविंद केजरीवाल ने बताया कि ई20 पेट्रोल से गोवा सबसे ज्यादा प्रभावित है, क्योंकि यहां दोपहिया और चारपहिया वाहनों का घनत्व पूरे देश में सबसे ज्यादा है। गोवा में 87 फीसद परिवारों के पास दोपहिया और 47 फीसद परिवारों के पास चारपहिया वाहन हैं, जो राष्ट्रीय औसत से कहीं अधिक है। कुछ लोगों को गलतफहमी है कि गोवा में ई20 लागू नहीं हुआ है। असल में 1 अप्रैल 2026 से पूरे देश के हर पेट्रोल पंप पर केवल ई20 पेट्रोल ही मिल रहा है और शुद्ध पेट्रोल उपलब्ध नहीं है। गोवा के पेट्रोल पंपों पर लोग जो पेट्रोल भरवा रहे हैं, वह ई20 ही है, इसी वजह से गाड़ियों की माइलेज कम हो रही है।

अरविंद केजरीवाल ने बताया कि हमने दिल्ली में भी एक नेशनल टाउन हॉल किया था, जिसे देश भर में एक साथ 7 लाख लोगों ने लाइव देखा था। दुनिया में शायद ऐसा पहली बार हुआ कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों ने एक साथ कोई वर्चुअल रैली लाइव देखी हो। उसी दिन हमने तय किया था कि हम पूरे देश में ऐसे ही टाउन हॉल करेंगे। अब अलग-अलग राज्यों में ये कार्यक्रम हो रहे हैं।

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि मैंने 29 ऑटो मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों को चिट्ठी लिखकर पूछा था कि क्या 2023 से पहले बनी उनकी कारों, स्कूटरों और मोटरसाइकिलों में ई20 का सुरक्षित इस्तेमाल किया जा सकता है? किसी कंपनी ने जवाब नहीं दिया। बाद में फोन करने पर नौ कंपनियों के अधिकारियों ने नाम न बताने की शर्त पर खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि ई20 बहुत खतरनाक फ्यूल है और 2023 से पहले बने पेट्रोल बेस्ड वाहनों में इसका इस्तेमाल बहुत खतरनाक होगा। कंपनियों के अधिकारियों ने कहा कि वे खुलकर यह बात नहीं बोल सकते क्योंकि उन पर केंद्र की मोदी सरकार का भारी दबाव है। यदि वे ई20 के खिलाफ बोलते हैं, तो उन पर ईडी, सीबीआई और इनकम टैक्स की रेड हो जाएगी और उनके प्लांट बंद कर दिए जाएंगे।

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि देश की ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों की सोसाइटी सियाम की मीटिंग में सभी कंपनियों ने ई20 को बंद करने की मांग उठाई थी। सियाम ने एक रिसर्च बेस्ड रिपोर्ट तैयार की, जिसमें ई20 को बहुत खतरनाक बताया गया था। 28 जुलाई को यह रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपी गई और इसे बंद करने का अनुरोध किया गया। जब यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर सार्वजनिक हो गई, तो सरकार ने दबाव डालकर एक हफ्ते के भीतर सियाम से वह रिपोर्ट वापस करवा ली। सियाम ने बयान दिया कि शायद उनसे कोई गलती हो गई थी। इतने बड़े संगठन की रिपोर्ट में गलती कैसे हो सकती है? जाहिर है कि ईडी और सीबीआई की धमकी देकर और दबाव डालकर वैज्ञानिक व थर्ड पार्टी रिपोर्ट वापस करवाई जा रही हैं।

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि 25 लाख टन चीनी के बराबर गन्ने को इथेनॉल बनाने के लिए डाइवर्ट कर दिया गया, जिससे देश में चीनी की भारी कमी हो गई। पिछले एक महीने में चीनी के दाम 30 रुपए प्रति किलो बढ़ गए हैं। 30 जुलाई को जो चीनी 45 रुपए किलो थी, वह आज बाजार में 75 रुपए किलो है। एक तरफ बेवकूफ और अनपढ़ सरकार ने गन्ने को इथेनॉल के लिए डाइवर्ट कर पेट्रोल में मिलावट की, जिससे लोग ई20 से परेशान हैं। दूसरी तरफ चीनी भी महंगी कर दी, जिससे लोग और परेशान हैं। सरकार का दावा था कि पेट्रोल में 20 फीसद इथेनॉल मिलाने से कच्चे तेल का आयात 20 फीसद कम होगा और विदेशी मुद्रा बचेगी। लेकिन चीनी की कमी के कारण अब देश चीनी का आयात कर रहा है। ऐसे में जो विदेशी मुद्रा बची थी, वह चीनी के आयात में खर्च हो गई।

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि ऐसी बेवकूफ सरकार मैंने अपनी जिंदगी में नहीं देखी। जब सरकार फैसले लेती है, तो विशेषज्ञों से चर्चा करती है। क्या किसी विशेषज्ञ ने यह नहीं बताया कि इतना गन्ना डाइवर्ट करने से चीनी की कमी हो जाएगी या ये लोग किसी की सुनते ही नहीं हैं? नितिन गडकरी कहते थे कि इथेनॉल मिक्स करने से पेट्रोल 15 रुपए लीटर मिलेगा, लेकिन वह सस्ता नहीं हुआ। सरकार के सभी दावे खोखले साबित हुए और देश को कोई फायदा नहीं हुआ। कुछ लोगों का मानना है कि डोनाल्ड ट्रंप, मोदी जी पर दबाव डाल रहे हैं। अमेरिका के पास इथेनॉल सरप्लस है और सरकार द्वारा पैदा की गई इस कृत्रिम कमी के बाद अब अमेरिका से इथेनॉल आयात किया जाएगा, ताकि ई20 को बढ़ाकर ई30 और ई40 किया जा सके।

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि देश में 80 फीसद वाहन ई20 के लायक नहीं हैं, फिर भी इसे जबरदस्ती थोपा जा रहा है। सरकार कह रही है कि वह ई30 का ट्रायल और रिसर्च कर रही है, लेकिन भाजपा वाले कोई स्टडी नहीं करते। ये अनपढ़ लोग हैं, इन्हें स्टडी करनी ही नहीं आती। ये लोग बस माहौल देख रहे हैं। जैसे ही ई20 का मामला शांत होगा, वे ई30, ई40 और ई85 तक ले आएंगे। इसलिए लोग अभी बाजार से नई गाड़ी न खरीदें, क्योंकि सरकार साल भर में ई20 गाड़ियों में ई30 और ई40 पेट्रोल थोप देगी, जिससे गाड़ियां खराब हो जाएंगी। सरकार ने डीजल और सीएनजी में भी मिलावट करने की घोषणा कर दी है।

अरविंद केजरीवाल ने अन्य देशों के उदाहरण देते हुए बताया कि जिन देशों ने इथेनॉल लागू किया, उन्होंने लंबा समय लिया। जापान में अभी ई3 लागू है और वह ई20 तक 2040 में पहुंचेगा। अमेरिका दुनिया में सबसे ज्यादा इथेनॉल बनाता है, फिर भी वहां ई10 लागू है। ब्राजील में 1931 में ई5 आया था और 55 साल बाद 1985 में ई20 आया। इथेनॉल बेस्ड फ्यूल लागू करने से पहले भारी तैयारी की जरूरत होती है। ऑयल टैंकर, पेट्रोल पंप के स्टोरेज टैंक और गाड़ियों के इंजन बदलने पड़ते हैं। नई गाड़ियों को ई20 के अनुकूल बनाना पड़ता है, जिसमें 15-20 साल का समय लगता है, लेकिन मोदी जी ने यह सब 3 साल में कर दिया।

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि जो कोई भी ई20 के खिलाफ आवाज उठाता है, ये लोग उसे एंटी- नेशनल बोल देते हैं। एक आम आदमी अपनी हैसियत से बढ़कर लोन लेकर या अपनी बचत लगाकर गाड़ी खरीदता है। 10,000 किमी की गारंटी के भीतर ही नई गाड़ियां खराब हो रही हैं। जब किसी की गाड़ी खराब होती है, तो उसे भारी आर्थिक और मानसिक परेशानी उठानी पड़ती है।

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि भाजपा वालों को अहंकार है कि वे जो मर्जी कर लें, जीतना तो उन्हें ही है। जनता तो उन्हें ही वोट देगी। इन्हें यह अहंकार है कि जनता तो इनके पास ही आएगी। लेकिन अगर इस बार विधानसभा चुनाव में गोवा और उत्तर प्रदेश में भाजपा हार जाए, तो 10 मार्च को नतीजे आने के बाद 15 मार्च तक ई20 वापस हो जाएगा। गोवा में 87 फीसद लोगों के पास दोपहिया और 47 फीसद लोगों के पास चारपहिया वाहन हैं, जो ई20 से परेशान हैं। अगर सब मिलकर एक बार ठान लें कि इस बार भाजपा को वोट नहीं देना है, तो मुझे लगता है 5 दिन के अंदर अगर ई20 वापस नहीं हो जाए, तो मैं अपनी राजनीति छोड़ दूंगा। इस बार गोवा के अंदर सभी लोग भाजपा को हरा के दिखा दें। देखना, 5 दिन के अंदर ई20 वापस हो जाएगा।

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