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नेपाल-तिब्बत सीमा पर भीषण बाढ़, 1100 से ज्यादा लोग लापता; लैंडस्लाइड ने मचाई भारी तबाही

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नेपाल-तिब्बत सीमा पर अचानक आई भीषण बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी है। इस प्राकृतिक आपदा में कई लोगों की मौत की खबर है, जबकि 1100 से ज्यादा लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। तेज पानी और मलबे के बहाव ने कई इलाकों में जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है।

बाढ़ का पानी करीब 30 फीट तक ऊपर पहुंच गया, जिसकी चपेट में कई घर, वाहन और अन्य संपत्तियां आ गईं। तेज बहाव के कारण 19 पुलों, करीब 40 किलोमीटर सड़कों और 13 हाइड्रोपावर परियोजनाओं को नुकसान पहुंचने की जानकारी है। कई जगहों पर सड़कें टूट जाने और रास्ते बंद होने से राहत एवं बचाव कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं।

शुरुआत में इस घटना को भूकंप से जोड़कर देखा जा रहा था, लेकिन अमेरिकी जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) की जानकारी के मुताबिक इससे पहले कोई बड़ा भूकंप नहीं आया था। बताया जा रहा है कि चीन की ओर ल्हेंदे नदी में पहाड़ का एक बड़ा हिस्सा अचानक खिसककर नीचे गिरा, जिससे शक्तिशाली लैंडस्लाइड हुई।

यह लैंडस्लाइड इतनी बड़ी थी कि इससे करीब 5.2 तीव्रता के भूकंप जैसा झटका महसूस किया गया। इसके बाद भारी मात्रा में पानी और मलबा भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों में पहुंच गया। अचानक पानी का स्तर बढ़ने से आसपास के क्षेत्रों में बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए।

पानी का बहाव इतना तेज था कि मलबे के साथ कई लोग और सामान करीब 150 किलोमीटर दूर चितवन तक बह गए। यहां से अब तक 33 शव बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई है। वहीं, राहत और बचाव टीमें लगातार मलबे में फंसे और लापता लोगों की तलाश में जुटी हुई हैं।

इस आपदा की चपेट में कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जा रहे कई श्रद्धालुओं के भी आने की खबर है। लापता लोगों में विदेशी नागरिकों के साथ भारतीय और NRI नागरिक भी शामिल बताए जा रहे हैं। हालांकि, खराब मौसम और कई जगहों पर रास्ते टूट जाने के कारण राहत कार्यों में मुश्किलें आ रही हैं।

फिलहाल बचाव दल प्रभावित इलाकों में लोगों की तलाश कर रहे हैं और नुकसान का आकलन किया जा रहा है। USGS की जानकारी के बाद यह बात सामने आई है कि तबाही की शुरुआत किसी बड़े भूकंप से नहीं, बल्कि पहाड़ के बड़े हिस्से के खिसकने से हुई लैंडस्लाइड से हुई थी।

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‘अमेरिका जितना टैरिफ लगाएगा, कनाडा भी उतना ही जवाब देगा’, अमेरिका के साथ टैरिफ जंग पर बोले कनाडा PM मार्क कार्नी

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अमेरिका और कनाडा के बीच बढ़ता टैरिफ विवाद अब और भी गंभीर होता नजर आ रहा है। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने अमेरिकी टैरिफ को कनाडा पर हमला करार देते हुए कहा है कि उनका देश दबाव में ऐसा कोई समझौता स्वीकार नहीं करेगा, जिससे कनाडा के हितों को नुकसान पहुंचे।

मार्क कार्नी ने कहा कि अमेरिका ने ट्रेड बातचीत के आखिरी चरण में ऐसी शर्तें रखीं, जिन्हें कनाडा के लिए स्वीकार करना संभव नहीं था। उन्होंने कहा कि अब कनाडा दूसरे देशों के साथ अपने व्यापारिक संबंध मजबूत करेगा और अमेरिका पर अपनी निर्भरता कम करने की कोशिश करेगा।

दरअसल, अमेरिका और कनाडा के अधिकारियों के बीच वॉशिंगटन डीसी में तीन दिनों तक ट्रेड डील को लेकर बातचीत चली, लेकिन कोई समझौता नहीं हो सका। इसके बाद अमेरिका ने कनाडा से आने वाले करीब 20 अरब डॉलर के सामान पर 50 फीसदी टैरिफ लगा दिया।

इसके जवाब में कनाडा ने भी अमेरिकी सामान पर जवाबी टैरिफ लगाने का ऐलान किया है, जो 8 सितंबर से लागू होने की बात कही गई है। कार्नी ने स्पष्ट किया कि अमेरिका जितना टैरिफ लगाएगा, कनाडा भी उसी तरह जवाब देगा।

कार्नी के मुताबिक, पिछले कुछ हफ्तों में दोनों देशों के बीच बातचीत में अच्छी प्रगति हुई थी, लेकिन आखिरी समय में अमेरिका की ओर से डील की शर्तें बदलने के कारण समझौता नहीं हो सका।

वहीं, अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव यानी USTR ने कहा कि कनाडा ने अमेरिका के साथ साझेदारी का एक बड़ा मौका गंवा दिया है। USTR के मुताबिक, कनाडा की नई मांगों और पहले किए गए वादों से पीछे हटने की वजह से डील फाइनल नहीं हो सकी।

USTR ने यह भी कहा कि अगर समझौता हो जाता तो एयरोस्पेस सप्लाई चेन, खनिजों पर सहयोग और गलत ट्रेड प्रैक्टिस से निपटने जैसे कई अहम मुद्दों पर दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ सकता था।

अब टैरिफ की इस जंग में दोनों देश अपने-अपने रुख पर कायम हैं। आने वाले दिनों में यह व्यापारिक तनाव और बढ़ता है या बातचीत के जरिए कोई रास्ता निकलता है, इस पर सभी की नजर रहेगी।

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