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लिवासा अस्पताल द्वारा लुधियाना में 360 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा: संजीव अरोड़ा

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राज्य के मजबूत मेडिकल बुनियादी ढांचे और तृतीयक स्तर के अस्पतालों की बढ़ती संख्या के कारण पंजाब उत्तरी भारत में एक प्रमुख स्वास्थ्य सेवा केंद्र के रूप में उभर रहा है। कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा ने आज घोषणा की कि लिवासा अस्पताल द्वारा 360 करोड़ रुपये के निवेश से लुधियाना में एक नया मल्टी-स्पेशलिटी अस्पताल स्थापित किया जाएगा। यह पंजाब की स्वास्थ्य सेवा क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।

उन्होंने बताया कि लिवासा अस्पताल द्वारा लुधियाना में 368 बेडों वाला मल्टी-स्पेशलिटी तृतीयक देखभाल अस्पताल बनाने के लिए प्राइमवॉक इन्फ्रा प्राइवेट लिमिटेड के साथ दीर्घकालिक समझौता किया गया है।

यह अस्पताल राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित शेरपुर चौक के पास बनाया जा रहा है, ताकि लुधियाना और आसपास के जिलों के मरीजों की आसान पहुंच सुनिश्चित की जा सके। यह अस्पताल फिलहाल निर्माणाधीन है और अगले 18 महीनों में चरणबद्ध तरीके से चालू हो जाएगा।

परियोजना के पैमाने के बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि इस अस्पताल का निर्मित क्षेत्र 2.3 लाख वर्ग फुट से अधिक होगा और इसे 9,500 से अधिक वर्ग गज फ्रीहोल्ड जमीन पर विकसित किया जाएगा। लिवासा समूह इस परियोजना में लगभग 235 करोड़ रुपये का निवेश कर रहा है और भूमि मालिकों के योगदान सहित कुल निवेश 360 करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगा। इस परियोजना को पीरामल समूह और बेन कैपिटल की स्पेशल सिचुएशन टीम के संयुक्त उद्यम इंडिया रिसर्जेंस फंड (प्दकपंत्थ्) का समर्थन प्राप्त है।

कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा ने कहा कि यह निवेश पंजाब के स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र और आर्थिक क्षमता में निवेशकों के मजबूत संस्थागत विश्वास को दर्शाता है।

लिवासा अस्पताल पहले से ही पंजाब में मोहाली (फ्लैगशिप सेंटर), अमृतसर, एसबीएस नगर (नवांशहर), होशियारपुर और खन्ना में अस्पतालों के साथ एक मजबूत क्षेत्रीय नेटवर्क संचालित कर रहा है। इस नए प्रोजेक्ट के साथ लिवासा का लक्ष्य पंजाब में अपनी कुल क्षमता को 2,000 बेडों तक बढ़ाना है, जिससे राज्य के उन्नत स्वास्थ्य सेवा ढांचे को और मजबूती मिलेगी।

लिवासा अस्पताल के सीईओ अनुराग यादव ने बताया कि हम 38 से अधिक मेडिकल स्पेशलिटी, 800 से अधिक बेड, 250 से अधिक वरिष्ठ सलाहकार, 280 आईसीयू बेड, 20 आधुनिक ऑपरेशन थिएटर और 6 एडवांस कैथ लैब के साथ तकनीक-आधारित तृतीय और चतुर्थ स्तर की स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने आगे बताया कि हमारी विशेष सेवाओं में कार्डियोलॉजी और कार्डियक सर्जरी, ऑन्कोलॉजी और एडवांस कैंसर केयर, न्यूरोलॉजी और न्यूरोसर्जरी, रोबोटिक ऑर्थाेपेडिक सर्जरी और जॉइंट रिप्लेसमेंट, गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी और लिवर केयर, किडनी ट्रांसप्लांट और नेफ्रोलॉजी तथा 24×7 गंभीर और आपातकालीन देखभाल शामिल हैं।

संजीव अरोड़ा ने कहा कि यह निवेश बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करेगा, जिससे लोगों को अपने घर के नजदीक उन्नत तृतीयक चिकित्सा सेवाएं मिल सकेंगी और उन्हें इलाज के लिए दिल्ली या अन्य महानगरों में जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।

उन्होंने कहा कि इससे पंजाब के युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। इस अस्पताल के माध्यम से स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में सैकड़ों कुशल और अर्ध-कुशल नौकरियां उपलब्ध होंगी।

मंत्री ने कहा कि हमारी सरकार पंजाब को एक मेडिकल हब के रूप में विकसित करने पर विशेष ध्यान दे रही है और इस परियोजना के माध्यम से पंजाब उत्तरी भारत में उन्नत स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्रीय केंद्र के रूप में उभरेगा।

पंजाब सरकार आधुनिक मेडिकल बुनियादी ढांचे, उन्नत तकनीक और उच्च गुणवत्ता वाली क्लिनिकल सेवाओं में निवेश को प्रोत्साहित करके एक मजबूत स्वास्थ्य सेवा इकोसिस्टम बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। इस प्रकार की परियोजनाएं जहां लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करती हैं, वहीं राज्य के निवेश इकोसिस्टम को भी मजबूत बनाती हैं।

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1 मई से पंजाब में कम होंगे बिजली कट, मंत्री संजीव अरोड़ा का बड़ा ऐलान

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पंजाब में बढ़ती गर्मी और लगातार लग रहे बिजली कटों के बीच राहत भरी खबर सामने आई है। राज्य के बिजली मंत्री Sanjeev Arora ने बड़ा बयान देते हुए कहा है कि 1 मई से पूरे राज्य में बिजली सप्लाई काफी हद तक सामान्य हो जाएगी और कटौती में भारी कमी आएगी।

मंत्री ने बताया कि इस साल गर्मी समय से पहले और अधिक तीव्र होने के कारण अप्रैल महीने में ही बिजली की मांग अचानक बढ़ गई। इसी वजह से कुछ इलाकों में बिजली कट लगाने पड़े। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह समस्या सिर्फ पंजाब तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे उत्तर भारत में इस तरह का दबाव देखा जा रहा है।

संजेव अरोड़ा ने कहा कि मौजूदा हालात को देखते हुए विभाग ने ग्रिड अपग्रेडेशन और मेंटेनेंस से जुड़े कई काम फिलहाल रोक दिए हैं, ताकि लोगों को बिना रुकावट बिजली सप्लाई दी जा सके। इसके अलावा कुछ स्थानों पर गेहूं की फसल को आग से बचाने के लिए सुरक्षा के तौर पर अस्थायी कट भी लगाए गए।

उन्होंने बताया कि पंजाब में बिजली ढांचे को मजबूत बनाने के लिए करीब 6000 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। यह काम 15 मई तक पूरा करने का लक्ष्य था, लेकिन फिलहाल प्राथमिकता लगातार बिजली आपूर्ति बनाए रखने को दी जा रही है।

मंत्री ने भरोसा दिलाया कि 1 मई से बिजली की कमी में बड़ी गिरावट आएगी और लोगों को लगातार सप्लाई देने की पूरी कोशिश की जाएगी। साथ ही उन्होंने लोगों से अपील की कि वे बिजली का संयम से इस्तेमाल करें और इस दौरान सरकार का सहयोग करें, ताकि स्थिति जल्द सामान्य हो सके।

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Arvind Kejriwal का बड़ा ऐलान: जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की अदालत में नहीं होंगे पेश

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आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री Arvind Kejriwal ने दिल्ली हाई कोर्ट की जस्टिस Swarna Kanta Sharma को एक महत्वपूर्ण पत्र लिखकर बड़ा फैसला लिया है। अपने पत्र में केजरीवाल ने स्पष्ट किया कि वह अब न तो व्यक्तिगत रूप से और न ही अपने वकील के माध्यम से उनकी अदालत में पेश होंगे।

केजरीवाल ने पत्र में लिखा कि उन्हें इस अदालत से न्याय मिलने की उम्मीद नहीं रही। उन्होंने कहा कि यह निर्णय उन्होंने अपनी अंतरात्मा की आवाज पर लिया है और अब वह Mahatma Gandhi के सत्याग्रह के रास्ते पर चलने का फैसला कर रहे हैं। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के किसी भी फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का अधिकार सुरक्षित रखते हैं।

गौरतलब है कि दिल्ली हाई कोर्ट ने हाल ही में कथित शराब घोटाले से जुड़े मामले में केजरीवाल की जज बदलने की मांग को खारिज कर दिया था। केजरीवाल का आरोप था कि केस की सुनवाई कर रही जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा द्वारा पक्षपात किया जा रहा है और इसलिए मामले को किसी अन्य बेंच को सौंपा जाना चाहिए।

हालांकि, अदालत ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया और याचिका को खारिज कर दिया। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश की टिप्पणी के बाद यह फैसला लिया गया।

याचिका खारिज होने के बाद केजरीवाल द्वारा लिया गया यह कदम अब राजनीतिक और कानूनी हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। अब यह देखना अहम होगा कि आगे इस मामले में क्या कानूनी मोड़ आता है और क्या केजरीवाल इस मुद्दे को सुप्रीम कोर्ट तक ले जाते हैं।

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Bhagwant Mann सरकार की ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ के तहत गंभीर हालत में जन्मी नवजात बच्ची के स्वस्थ होने से डॉक्टरों की चिंता उम्मीद में बदली

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नवजात की पहली किलकारी राहत लेकर आनी चाहिए, लेकिन कई बार यह सन्नाटा भी लेकर आती है। बठिंडा जिले के रामपुरा फूल स्थित अग्रवाल अस्पताल में एक बच्ची का जन्म हुआ, लेकिन उसके जीवन की जंग अभी शुरू ही हुई थी।

सिर्फ 33 सप्ताह में जन्मी रेशम सिंह और गुरमेल कौर की बेटी समय से पहले बेहद नाजुक हालत में इस दुनिया में आई। उसका वजन केवल 1.926 किलोग्राम था, जो सामान्य पूर्णकालिक जन्म वजन (लगभग 2.5 से 4 किलोग्राम) से काफी कम है। जन्म के पहले ही पल से उसे सांस लेने में कठिनाई हो रही थी। बिना चिकित्सकीय सहायता के सांस लेना संभव नहीं था। ऐसे हालात में समय गंवाने की कोई गुंजाइश नहीं थी।

डॉ. सुरिंदर अग्रवाल (एमडी पीडियाट्रिक्स), जिनके पास 24 वर्षों का अनुभव है, ने अपनी टीम के साथ तुरंत उपचार शुरू किया। बच्ची को एनआईसीयू में भर्ती किया गया, जहां मशीनें वह काम कर रही थीं, जो उसके अविकसित फेफड़े नहीं कर पा रहे थे। मॉनिटर पर हर धड़कन और हर सांस पर नजर रखी जा रही थी—हर पल अनिश्चितता और हर पल महत्वपूर्ण था।

इसके बाद 17 दिनों तक लगातार देखभाल और सही उपचार जारी रहा। नवजात को 10 दिनों तक कंटीन्यूअस पॉजिटिव एयरवे प्रेशर (CPAP) सहायता दी गई, इसके बाद 4 दिनों तक ऑक्सीजन सपोर्ट दिया गया। इस दौरान बच्ची को पीलिया हो गया, जिसका इलाज फोटोथेरेपी से किया गया। सीमित कंगारू मदर केयर के जरिए सावधानीपूर्वक पोषण दिया गया, ताकि उसकी नाजुक स्थिति प्रभावित हुए बिना उसे गर्माहट और स्थिरता मिल सके।

डॉ. अग्रवाल ने कहा, “एनआईसीयू में सुधार अचानक नहीं आता, यह धीरे-धीरे स्थिर संकेतों के साथ आता है।” धीरे-धीरे सुधार दिखना शुरू हुआ।

सांस सामान्य होने लगी। प्रतिक्रियाएं बेहतर हुईं। जो नाजुक शरीर पहले संघर्ष कर रहा था, वह दिन-ब-दिन मजबूत होने लगा। डॉ. अग्रवाल ने कहा, “कई बार बच्चे को बचाना सिर्फ इलाज पर नहीं, बल्कि सही समय पर निर्भर करता है। थोड़ी-सी देरी भी सब कुछ बदल सकती है।”

इस मामले में कोई देरी नहीं हुई। मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना के तहत परिवार को कैशलेस इलाज मिला, जिससे डॉक्टर बिना किसी आर्थिक चिंता के पूरी तरह उपचार पर ध्यान केंद्रित कर सके।

17 दिनों के इलाज के बाद बच्ची को स्थिर हालत में छुट्टी दे दी गई। अब उसका वजन 2.106 किलोग्राम है। हालांकि वह अभी भी नाजुक है, लेकिन पहले से काफी स्वस्थ है। नवजात अपने माता-पिता की गोद में जीवित, स्थिर और स्वस्थ हालत में अस्पताल से बाहर आई।

एक अन्य मामले में, होशियारपुर के मनिंदर सिंह ने अपना अनुभव साझा किया। उनकी बेटी गुरकीरत कौर, जिसका जन्म इसी वर्ष 14 अप्रैल को हुआ था, को भी जन्म के बाद नवजात देखभाल की जरूरत पड़ी। उन्होंने कहा, “अस्पताल में उसका अच्छा इलाज हुआ और पूरा खर्च मुख्यमंत्री स्वास्थ्य कार्ड के तहत कवर हो गया।”

रजिस्ट्रेशन उसी दिन पूरा हो गया और अब परिवार को हर साल 10 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य कवर मिल रहा है।

मनिंदर सिंह ने धन्यवाद देते हुए कहा, “इसलिए ‘मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना’ बहुत महत्वपूर्ण है। जो व्यक्ति अपनी रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने के लिए संघर्ष करता है, वह भी अपने बच्चे के लिए बेहतर इलाज ले सकता है। यह बहुत बड़ी बात है।”

पंजाब के एनआईसीयू में अभी भी खामोशी होती है, लेकिन अब वह डर नहीं, बल्कि उम्मीद से भरी होती है।

यह उम्मीद बिल्कुल शांत और स्थिर होती है, जिसमें मॉनिटर हर दिन और मजबूत होती किसी नन्हे दिल की धड़कन दिखाता है, और कई बार यही खामोशी और स्थिरता सब कुछ बदलने के लिए काफी होती है।

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