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अक्तूबर से Punjab की मंडियों को बंद करने का किया गया ऐलान, जाने क्यों किया

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फेडरेशन ऑफ आढ़तिया एसोसिएशन के प्रभारी विजय कालरा ने तलवंडी भाई में रिचमंड विला रिसोर्ट नामक स्थान पर ‘आढ़तिया चेतना सम्मेलन-पंजाब 2024’ नामक एक बड़ी बैठक आयोजित करने में मदद की। इस बैठक में उन्होंने घोषणा की कि 1 अक्टूबर से Punjab में मंडियां बंद रहेंगी। कई किसानों, आढ़तियों (फसल खरीदने और बेचने वाले लोग) और मजदूरों ने महत्वपूर्ण मुद्दों पर बात की, जैसे कि 2.5 प्रतिशत कमीशन को नियमित करना, फसलों की लोडिंग के लिए भुगतान बढ़ाना और अदानी साइलो नामक स्थान पर अभी भी संग्रहीत गेहूं का पैसा वापस दिलाना।

यह कार्यक्रम तलवंडी भाई आढ़तिया एसोसिएशन के नेता गुरजंट सिंह ढिल्लों कलियांवाला के सहयोग से आयोजित किया गया था। जिला अध्यक्ष अमृत लाल छाबड़ा ने शिरोमणि कमेटी के सदस्य सतपाल सिंह तलवंडी और रशपाल सिंह संधू करमूवाला के साथ मिलकर महत्वपूर्ण मेहमानों और स्थानीय व्यापारियों का धन्यवाद किया। इस दौरान राजेवाल यूनियन के बलवीर सिंह राजेवाल और कादियां यूनियन के हरमीत सिंह कादियां जैसे कुछ किसान नेताओं ने व्यापारियों के प्रति अपना समर्थन जताया और जरूरत पड़ने पर उनकी मदद करने का वादा किया।

फरमान सिंह संधू ने बताया कि उनके भाई सांसद सतनाम सिंह संधू किसानों और व्यापारियों की समस्याओं को केंद्र सरकार के समक्ष रखेंगे। इस मौके पर विभिन्न क्षेत्रों से कई जिला नेता भी मौजूद थे, जिनमें मानसा से मनीष बॉबी दानेवालिया, संगरूर से जगतार सिंह समरा और लुधियाना, फरीदकोट और अमृतसर जैसे स्थानों से कई अन्य शामिल थे। विजय कालरा ने घोषणा की कि 1 अक्टूबर से सभी अनाज मंडियां बंद रहेंगी। उन्होंने कहा कि वे केंद्र सरकार से बात नहीं करेंगे और पंजाब सरकार किसी भी मुद्दे को संभालेगी।

उन्होंने यह भी बताया कि इस साल किसी भी बिचौलिए को किसानों से सीधे चावल तोलकर खरीदने की इजाजत नहीं दी जाएगी। अगर कोई ऐसा करने की कोशिश करता है तो उसे रोक दिया जाएगा। उनकी बातों का कई महत्वपूर्ण लोगों ने समर्थन किया, जिनमें पूर्व नेता और विभिन्न संघों के सदस्य शामिल थे।

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मुफ्त बिजली, सड़कें और स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार! 4 वर्षों में Bhagwant Mann सरकार ने बदली पंजाब की तस्वीर, लाभान्वित हुए लोग

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 पंजाब में जनहित को प्राथमिकता देते हुए मान सरकार सुविधाओं का विस्तार लगातार कर रही है। सीएम भगवंत मान को पंजाब की सत्ता में आए 4 वर्ष पूरे हो चुके हैं।

इन चार वर्षों में सरकार की ओर से पंजाबकी जनता तक सीधा लाभ पहुंचाने की कोशिश हुई है।

बात चाहें मुफ्त बिजली की हो या सड़क निर्माण, शिक्षा व स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार आदि से जुड़ी। सीएम भगवंत मान की सरकार हर मोर्चे पर खरी उतरी है। शासन स्तर से ऐसी नीतियां बनाई गई हैं जो सीधे तौर पर जनता को लाभान्वित करते हुए पंजाब की तस्वीर बदलने का काम करें।

पिछले 4 वर्षों में Bhagwant Mann सरकार ने बदली पंजाब की तस्वीर!

मान सरकार ने पिछले चार वर्षों में पंजाब की तस्वीर बदलने का काम किया है। इस क्रम में अब पंजाब के मंत्री लोगों से संवाद कर रहे हैं।

इस मुहिम को निरंतरता प्रदान करते हुए कैबिनेट मंत्रियों ने लेहरागागा निर्वाचन क्षेत्र के कई इलाकों का दौरा किया। इस दौरान लोगों से संवाद कर भगवंत मान सरकार द्वारा पिछले चार वर्षों में जनता के हर वर्ग के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी दी गई।

कैबिनेट मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने बताया कि कैसे सरकार द्वारा अनुसूचित जाति के छात्रों को छात्रवृत्ति, दलित समुदाय की ऋण माफी, शिक्षा, बिजली, नशा विरोधी अभियान और औद्योगिक निवेश आदि कर पंजाब की तस्वीर बदली जा रही है।

मुफ्त बिजली के साथ सड़क निर्माण और स्वास्थ्य सुविधाओं का हुआ विस्तार!

पंजाब के आम लोगों तक सरकारी योजनाओं की पहुंच सुनिश्चित की गई है। पिछले चार वर्षों में सीएम भगवंत मान के प्रयासों से घरेलू बिजली बिल शून्य हुआ है। ग्रामीण इलाकों से लेकर शहरों तक नई सड़कों का जाल बिछा है। इससे कनेक्टिविटी को गति मिली है और अवसरों के द्वार खुले हैं। इससे इतर मान सरकार ने मुख्यमंत्री सेहय योजना लागू कर स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार किया है।

आम आदमी क्लीनिक भी पंजाब की जनता तक स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच आसान कर रहे हैं। शिक्षा के क्षेत्र में भी शासन स्तर से कई पहल की गई है। ये सारे प्रयास दर्शाते हैं कि कैसे भगवंत मान सरकार ने लोगों को लाभान्वित करने की दिशा में काम किया है।

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नशे से नौकरी तक का सफर: Punjab में ‘युद्ध नशेयां विरुद्ध’ अभियान से बदल रही जिंदगियां

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Punjab News: पंजाब में नशों के खिलाफ चल रही जंग के चलते स्पष्ट बदलाव सामने आ रहे हैं, क्योंकि भगवंत मान सरकार के ‘युद्ध नशेयां विरुद्ध’ अभियान के तहत सिर्फ कानून लागू करने तक सीमित न रहकर पुनर्वास और पुनः एकीकरण पर भी ध्यान केंद्रित किया जा रहा है. जिलों में नशे की दलदल में फंसे लोग अब स्थिर जीवन की ओर लौट रहे हैं और नशे से उबरने में रोजगार अहम भूमिका निभा रहा है.

अभिषेक कुमार (नाम बदला गया) उन लोगों में से एक हैं जिसने इस बदलाव को खुद अनुभव किया है. कुछ साल पहले नशे ने उसकी जिंदगी को इस कदर तबाह कर दिया था कि रोजमर्रा के काम भी मुश्किल हो गए थे और उसके परिवार को डर था कि वह नशे की भेंट चढ़ जाएंगा. आज, वह एक स्थिर नौकरी कर रहा हैं और अपने परिवार के साथ फिर से जुड़ गया है. उसने कहा, “नौकरी दोबारा मिलने से सब कुछ बदल गया. इसने मुझे सही रास्ता अपनाने का कारण दिया.”

नशे से उबरने का संघर्ष और रोजगार की नई शुरुआत

वह नशे से अचानक नहीं उभरा. उसके परिवार के निरंतर प्रोत्साहन, व्यवस्थित चिकित्सीय इलाज, परामर्श, और ‘युद्ध नशेयां विरुद्ध’’ अभियान से जुड़ी पहलों के तहत मिले पुनर्वास के बाद रोजगार सहायता की बदौलत अभिषेक स्थिरता और आत्मविश्वास दोनों वापस हासिल कर सका.

नवदीप कुमार (बदला हुआ नाम) के लिए उसके जीवन का निर्णायक मोड़ उसके घर से ही शुरू हुआ. लगातार झगड़ों और भावनात्मक दूरी ने उसे उस नुकसान का एहसास कराया जो नशे की वजह से हुआ था. उसने कहा, “मेरी मां मुझे सही रास्ते पर वापस लेकर आयी है.”

इलाज पूरा करने के बाद, नवदीप को रोजगार सहायता मिली और अब वह निजी क्षेत्र में काम कर रहा है. वह दोबारा रोजगार मिलने को उस पल के रूप में बताता है जिसने उनके जीवन में अनुशासन लाया और उसे अपना मकसद फिर से तय करने में मदद की.

समर्थन और पुनर्वास से नई शुरुआत

गुरजिंदर सिंह (बदला हुआ नाम) की कहानी रिकवरी के एक और पहलू को दर्शाती है. नशे ने न केवल उसके स्वास्थ्य को प्रभावित किया, बल्कि उसके परिवार में उसकी आर्थिक स्थिरता और भरोसेयोग्यता को भी खत्म कर दिया था. पुनर्वास सेवाओं और उसके माता-पिता के निरंतर समर्थन से, वह धीरे-धीरे रिकवरी की ओर बढ़ा. आज, वह फिर से नौकरी कर रहा है और उनकी सेहत में सुधार हुआ है तथा पारिवारिक संबंध भी बेहतर हुए हैं.

नशा पीड़ितों का रिकवरी की ओर यह सफर ‘आप’ सरकार द्वारा अपनाई गई व्यापक रणनीति को दर्शाता है, जिसके तहत नशों के खिलाफ जंग केवल तस्करों के खिलाफ कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि नशे की दलदल में फंसे लोगों को सामाजिक और आर्थिक मुख्यधारा में वापस लाया जाए.

इस अभियान से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि पुनर्वास, परामर्श और संरचित सहायता प्रणालियों को रोजगार के अवसरों से जोड़ा जा रहा है, क्योंकि यह माना गया है कि आर्थिक स्थिरता के बिना रिकवरी अधूरी रहती है.

स्थिर नौकरी से नशा मुक्त जीवन संभव

सभी मामलों में यह देखा गया है कि रोजगार केवल रिकवरी के बाद का एक कदम नहीं है, बल्कि यह नशा-मुक्त जीवन को सुनिश्चित करने की नींव है. एक स्थिर नौकरी वित्तीय स्वतंत्रता देती है, सम्मान को बहाल करती है और व्यक्तियों को अपने परिवारों और समुदायों से फिर से जुड़ने में सक्षम बनाती है. अभिषेक ने कहा, “कभी भी नशों का सेवन न करें. यह नुकसानदेय लग सकता है, लेकिन यह सब कुछ बर्बाद कर सकता है.”

जैसे-जैसे ‘युद्ध नशेयां विरुद्ध’ अभियान का विस्तार हो रहा है, नशा पीड़ितों की ये कहानियां व्यापक बदलाव को दर्शाती हैं, जहां नशे से रिकवरी को अब अंतिम लक्ष्य नहीं, बल्कि एक स्थिर और सम्मानजनक जीवन की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है.

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पंजाब सरकार की मुख्यमंत्री सेहत योजना ने बचाई 37 वर्षीय महिला की जिंदगी, मुफ्त में हुई 4 लाख की सर्जरी

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Punjab Mukhyamantri Sehat Yojana:  पंजाब में मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत अब तक के सबसे बड़े दावों में शामिल एक मामले में ₹4 लाख की जीवनरक्षक सर्जरी पूरी तरह कैशलेस की गई. यह भगवंत मान सरकार के उस स्वास्थ्य मॉडल की मज़बूती को दर्शाता है, जो स्थानीय स्तर पर तेज़, प्रभावी और भरोसेमंद तरीके से काम कर रहा है.  

लाभार्थी सुखपाल कौर आयु (37 वर्ष), निवासी चंडीगढ़, गंभीर एओर्टिक डिसेक्शन, एक जानलेवा हृदय एवं रक्तवाहिका संबंधी बीमारी के कारण पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़ में भर्ती कराया गया. इस स्थिति में तुरंत सर्जरी आवश्यक थी. इलाज, अस्पताल में दाखिला और विशेष देखभाल का अनुमानित खर्च लगभग ₹4 लाख था, जिसे इतनी कम अवधि में जुटाना परिवार के लिए बेहद कठिन हो जाता.

समय पर इलाज से बची महिला की जान 

अस्पताल में सेहत कार्ड प्रमाणित होते ही बिना किसी देरी के इलाज शुरू कर दिया गया. पूरी सर्जरी, योजना के तहत, प्रति परिवार ₹10 लाख तक की कवरेज में कैशलेस तरीके से पूरी की गई.

परिवार के एक सदस्य ने बताया, “सब कुछ बहुत तेज़ी से हुआ. डॉक्टरों ने बताया कि स्थिति गंभीर है और तुरंत सर्जरी ज़रूरी है. इतनी बड़ी रकम तुरंत जुटा पाना संभव नहीं था. सेहत कार्ड के कारण इलाज बिना किसी देरी के शुरू हो सका.”

डॉक्टरों ने बताई बीमारी की गंभीरता 

मामले के चिकित्सकीय पहलू पर प्रकाश डालते हुए पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़ के डॉ. सचिन महाजन ने कहा, “एओर्टिक डिसेक्शन एक अत्यंत गंभीर स्थिति है, जिसमें तुरंत सर्जरी ज़रूरी होती है. ऐसे मामलों में थोड़ी सी भी देरी जोखिम को काफी बढ़ा सकती है.

मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत सेहत कार्ड प्रमाणित होते ही हम बिना किसी वित्तीय मंजूरी का इंतज़ार किए इलाज शुरू कर सकते हैं, जिससे उच्च जोखिम वाले हृदय रोगियों को समय पर और निरंतर उपचार मिल पाता है.”

सरकार ने बताया योजना का असर 

सरकार की नीति को रेखांकित करते हुए पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा, “सुखपाल कौर जैसे गंभीर मामले में एक अनमोल जीवन को बचा पाना बेहद संतोषजनक है.

मुख्यमंत्री भगवंत मान जी के नेतृत्व में मुख्यमंत्री सेहत योजना स्थानीय स्तर पर वास्तविक बदलाव ला रही है, जहां परिवार बिना आर्थिक दबाव के तुरंत इलाज प्राप्त कर पा रहे हैं.”

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