Connect with us

National

अगर आप भी खराब गुणवत्ता वाले Helmet का इस्तमाल करते हो तो सावधान हो जाएं, सरकार ने किया बड़ा ऐलान

Published

on

केंद्र सरकार देशभर में कम गुणवत्ता वाले बाइक Helmet के खिलाफ कार्रवाई करने की योजना बना रही है। सड़क दुर्घटनाओं में मौतों और चोटों का एक बड़ा कारण खराब गुणवत्ता वाले हेलमेट हैं। सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक, केंद्र सरकार ने इस संबंध में राज्यों को पत्र भी भेजा है. राज्यों को लिखे पत्र में केंद्रीय उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने जिला मजिस्ट्रेटों को बिना आईएसआई पंजीकरण के हेलमेट बेचने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। केंद्र सरकार ने अपने पत्र में कहा, ऐसा देखा गया है कि हेलमेट बिना BIS सर्टिफिकेट के सड़क किनारे बेचे जाते हैं. यह सड़क दुर्घटनाओं में मौत का एक बड़ा कारण है।

पत्र में कहा गया है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले बी.आई.एस. बिना लाइसेंस और फर्जी आईएसआई मार्क वाले हेलमेट निर्माताओं और विक्रेताओं के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जानी चाहिए। सभी जिलाधिकारियों को निजी तौर पर कम गुणवत्ता वाले हेलमेट बनाने और बेचने वालों के खिलाफ अभियान चलाने का निर्देश दिया गया है। भारत में बने औद्योगिक उत्पादों को ISI मार्क दिया जाता है। यह इंगित करता है कि एक उत्पाद भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) द्वारा विकसित भारतीय मानकों के अनुरूप है।

भारत में सरकार ने दोपहिया वाहनों में हेलमेट पहनना अनिवार्य कर दिया है। दोपहिया वाहन पर दो व्यक्तियों को बैठने की अनुमति है और दोनों को हेलमेट पहनना होगा। इतना ही नहीं बाइक खरीदने पर वाहन कंपनियों की ओर से हेलमेट भी दिया जाता है।

भारत में दुनिया में सबसे ज्यादा दोपहिया वाहन हैं। केंद्रीय परिवहन मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, 2022 में देश में 63115 सड़क हादसों में 25228 लोगों की मौत हो गई। इनमें से ज्यादातर दुर्घटनाएं दोपहिया वाहनों के कारण हुईं, इससे पहले 2021 में 52416 दुर्घटनाएं हुईं और 22786 लोगों की मौत हो गई। 2023 की तुलना में 2024 में सड़क दुर्घटनाओं में 20.4% की वृद्धि और मृत्यु में 10.7% की वृद्धि हुई।

Continue Reading
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

National

संगीत जगत को बड़ा झटका: दिग्गज गायिका आशा भोसले का 92 साल की उम्र में निधन

Published

on

भारतीय संगीत जगत से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। मशहूर और दिग्गज गायिका आशा भोसले का 92 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उन्होंने मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में अंतिम सांस ली, जहां उन्हें 11 अप्रैल को तबीयत बिगड़ने के बाद भर्ती कराया गया था।

डॉक्टरों के अनुसार, उन्हें छाती में संक्रमण और अत्यधिक कमजोरी की शिकायत थी, जिसके बाद उनकी हालत गंभीर हो गई और अंततः मल्टी-ऑर्गन फेलियर के कारण उनका निधन हो गया।

उनके बेटे आनंद भोसले ने इस दुखद खबर की पुष्टि की। परिवार के अनुसार, उनका अंतिम संस्कार मुंबई के शिवाजी पार्क में सोमवार शाम 4 बजे किया जाएगा, जबकि सुबह से उनके अंतिम दर्शन के लिए पार्थिव शरीर को रखा जाएगा।

आशा भोसले ने अपने करियर की शुरुआत 1940 के दशक में की थी और करीब सात दशकों तक भारतीय संगीत जगत पर राज किया। उन्होंने 20 से अधिक भाषाओं में हजारों गाने गाए और अपनी बहुमुखी आवाज़ से हर पीढ़ी को प्रभावित किया।

उनके नाम हजारों गानों का रिकॉर्ड है और उन्हें दादासाहेब फाल्के पुरस्कार सहित कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिले।

उनके निधन से पूरे देश में शोक की लहर है। प्रधानमंत्री से लेकर फिल्म और संगीत जगत की कई हस्तियों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी और उनके योगदान को “एक युग का अंत” बताया।

आशा भोसले की आवाज़, उनकी विरासत और उनके गीत हमेशा संगीत प्रेमियों के दिलों में जीवित रहेंगे।

Continue Reading

National

Punjab कैबिनेट ने सत्कार संशोधन विधेयक को मंजूरी दी, बेअदबी पर सख्त सजा का प्रावधान, गांवों और खेलों पर बड़े फैसले

Published

on

पंजाब कैबिनेट ने ‘श्री जगतगुरु ग्रंथ साहिब जी सत्कार (संशोधन) विधेयक’ 2026 को मंजूरी दे दी है, जिसे 13 अप्रैल को बुलाए जा रहे विधानसभा के विशेष सत्र में पेश किया जाएगा। ्वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने बताया कि इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य धार्मिक ग्रंथों के सम्मान को सुनिश्चित करना और बेअदबी जैसे संवेदनशील मामलों में कड़ी कानूनी कार्रवाई को लागू करना है।

नए संशोधन के तहत सजा के प्रावधानों को काफी सख्त किया गया है। अब ऐसे मामलों में कम से कम 10 साल की सजा और अधिकतम उम्रकैद (लाइफ इम्प्रिजनमेंट) का प्रावधान रखा गया है। इसके साथ ही आर्थिक दंड को भी बढ़ाया गया है, जिसमें न्यूनतम 5 लाख रुपये और अधिकतम 25 लाख रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकेगा।

कैबिनेट ने यह भी तय किया है कि इन मामलों की जांच को और मजबूत और पारदर्शी बनाने के लिए डीएसपी (डिप्टी सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस) स्तर के अधिकारी से कम रैंक का कोई भी अधिकारी जांच नहीं करेगा। साथ ही आरोपित द्वारा मानसिक अस्थिरता का हवाला देकर बचने की कोशिशों को भी सख्ती से परखा जाएगा। इसके अलावा, कानून में परिभाषाओं को स्पष्ट किया गया है, ताकि किसी भी प्रकार की कानूनी अस्पष्टता न रहे।

गांवों के विकास को लेकर फैसला

इसके बाद कैबिनेट ने गांवों के विकास को लेकर भी बड़ा फैसला लिया। राज्य के 11,500 से अधिक गांवों में करीब 3 लाख स्ट्रीट लाइटें लगाने की योजना को मंजूरी दी गई है। इस योजना के तहत औसतन हर गांव में कम से कम 27 स्ट्रीट लाइटें लगाई जाएंगी।

इस प्रोजेक्ट में खर्च की हिस्सेदारी को भी बदला गया है। पहले जहां 70 प्रतिशत खर्च ग्राम पंचायतों द्वारा और 30 प्रतिशत सरकार द्वारा वहन किया जाता था, अब इसे उलट कर 70 प्रतिशत खर्च पंजाब सरकार और 30 प्रतिशत ग्राम पंचायतें वहन करेंगी।

इस योजना पर करीब 380 करोड़ रुपये राज्य सरकार और लगभग 170 करोड़ रुपये पंचायतों द्वारा खर्च किए जाएंगे। सरकार का मानना है कि इससे गांवों में रोशनी बढ़ेगी, सुरक्षा बेहतर होगी और छोटे-मोटे अपराधों पर भी अंकुश लगेगा।

खेलों के क्षेत्र में अहम निर्णय

खेलों के क्षेत्र में भी कैबिनेट ने अहम निर्णय लिया है। पंजाब को पहली बार एशियन हॉकी चैंपियनशिप की मेजबानी का मौका मिलेगा। इसके लिए हॉकी इंडिया के साथ करीब 11 करोड़ रुपये का एग्रीमेंट किया जाएगा, जबकि पूरे आयोजन के लिए लगभग 35.40 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है।

यह प्रतिष्ठित टूर्नामेंट जालंधर के प्रमुख हॉकी मैदानों में आयोजित किया जाएगा, जहां भारत सहित एशिया की शीर्ष टीमें भाग लेंगी। सरकार का मानना है कि इससे पंजाब की खेल विरासत को नई पहचान मिलेगी और युवाओं को हॉकी की ओर प्रेरणा मिलेगी।

कुल मिलाकर, कैबिनेट के ये फैसले कानून व्यवस्था को मजबूत करने, ग्रामीण बुनियादी ढांचे को सुधारने और खेलों को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं।

Continue Reading

National

पंजाब सरकार के फसल अवशेष प्रबंधन प्रयासों को मिली बड़ी सफलता: पराली जलाने की घटनाओं में 94 प्रतिशत कमी पर मिला राष्ट्रीय स्तर का पुरस्कार

Published

on

पंजाब ने पर्यावरण के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। राज्य को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान दिया गया है। यह सम्मान पराली प्रबंधन में सुधार के लिए मिला है। सरकार ने इसे ऐतिहासिक कदम बताया है। Gurmeet Singh Khudian ने इसकी जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि पूरे राज्य के लिए गर्व की बात है।

क्या पराली जलाने की घटनाएं घटीं?

राज्य में पराली जलाने के मामलों में तेज गिरावट दर्ज की गई है। आंकड़ों के अनुसार इसमें लगभग 94 प्रतिशत कमी आई है। पहले यह समस्या बहुत बड़ी थी। हर साल हजारों घटनाएं सामने आती थीं। अब यह संख्या काफी कम हो गई है। यह बदलाव साफ तौर पर दिखाई दे रहा है। इसे बड़ी सफलता माना जा रहा है।

क्या किसानों ने बदली अपनी सोच?

इस बदलाव में किसानों की भूमिका सबसे अहम रही है। उन्होंने पराली जलाने की पुरानी आदत छोड़ी है। अब मशीनों का इस्तेमाल बढ़ाया गया है। इससे खेती का तरीका बदल रहा है। किसानों ने जिम्मेदारी दिखाई है। यह सोच में बड़ा बदलाव है। इसी वजह से यह सफलता संभव हो पाई है।

क्या सरकार ने दिया मजबूत साथ?

राज्य सरकार ने भी इस दिशा में लगातार काम किया है। Bhagwant Mann की अगुवाई में योजनाएं बनाई गईं। किसानों को आर्थिक सहायता दी गई। मशीनों पर भारी सब्सिडी दी गई। इससे किसानों को विकल्प मिला। यह कदम असरदार साबित हुआ। सरकार और किसान दोनों साथ आए।

क्या मशीनों का इस्तेमाल बढ़ा तेजी से?

फसली अवशेष प्रबंधन के लिए मशीनों की संख्या बढ़ी है। राज्य ने इसके लिए बड़ा बजट तय किया है। सैकड़ों करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। हजारों मशीनें खरीदी जा चुकी हैं। इससे खेतों में पराली प्रबंधन आसान हुआ है। किसान अब तकनीक का उपयोग कर रहे हैं। यह बदलाव लंबे समय तक असर डालेगा।

क्या पर्यावरण पर पड़ा सकारात्मक असर?


पराली जलाने में कमी से पर्यावरण को फायदा हुआ है। हवा की गुणवत्ता में सुधार आया है। मिट्टी की सेहत भी बेहतर हुई है। प्रदूषण का स्तर घटा है। लोगों को राहत मिली है। यह बदलाव केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है। इसका असर जमीन पर दिख रहा है।

Continue Reading

Trending