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Jalandhar : 22 साल के युवक का खौफनाक कदम, ऐसे लगाया मौत को गले
जालंधर : संतोषी नगर इलाके में 22 साल के एक युवक ने अपने घर में ही छत से लगे हुए पंखे से फंदा लगाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। इसकी सूचना मिलते ही थाना रामा मंडी (सूर्या एन्क्लेव) के ए.एस.आई. रूप लाल मौके पर पहुंचे और युवक के पंखे से लटक रहे शव को नीचे उतारा गया। जांच अधिकारी ने बताया कि मृतक युवक की पहचान आकाश पुत्र हरि निवासी संतोषी नगर के रूप में हुई है। आकाश इलाके में ही सलून का काम करता था। पुलिस ने कहा है कि अभी उसके परिवारक मैंबरों के बयान नहीं हुए हैं। आकाश का शव सिविल अस्पताल भेज दिया गया है। रविवार को सुबह बनती कानूनी का कार्रवाई करते हुए खुदकुशी करने वाले युवक का पोस्टमार्टम करवा कर शव परिजनों को सौंप दिया जाएगा। ए.एस.आई. रूप लाल ने कहा कि खुदकुशी का कारण भी अभी पता नहीं चला है।
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सीमा रेखा के भीतर रहने वाले परिवारों को बड़ी राहत, ‘मेरा घर मेरे नाम’ योजना के तहत मिला मालिकाना हक
पंजाब सरकार की ‘स्वामित्व योजना’ और ‘मेरा घर मेरे नाम’ अभियान के तहत लाल रेखा (लाल लकीर) के भीतर रहने वाले परिवारों को बड़ी राहत मिली है। वर्षों से अपने घरों में रहने के बावजूद कानूनी मालिकाना हक से वंचित परिवारों को अब संपत्ति के स्वामित्व के दस्तावेज सौंपे जा रहे हैं।
इसी कड़ी में भोआ विधानसभा क्षेत्र के खोजकी चक गांव में एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया, जहां पांच गांवों के 218 लाभार्थी परिवारों को उनके घरों के मालिकाना हक के रजिस्टर सौंपे गए। अपने नाम पर संपत्ति का कानूनी अधिकार मिलने से लाभार्थियों के चेहरों पर खुशी साफ दिखाई दी।
इस मौके पर पंजाब के कैबिनेट मंत्री लाल चंद कटारुचक ने कहा कि यह सिर्फ दस्तावेजों का वितरण नहीं, बल्कि एक ऐतिहासिक कदम है, जो वर्षों से अपने घरों में रह रहे लोगों के सपनों को कानूनी पहचान देता है।
उन्होंने कहा कि कई परिवार पीढ़ियों से इन घरों में रह रहे थे, लेकिन उनके नाम पर मालिकाना हक नहीं था। अब सरकार ने उन्हें कानूनी स्वामित्व प्रदान कर इस लंबे समय से चली आ रही समस्या का स्थायी समाधान किया है।
कैबिनेट मंत्री ने लोगों और पंचायत प्रतिनिधियों से अपील की कि जब भी राजस्व विभाग की टीमें सर्वेक्षण के लिए गांवों में पहुंचें, तो उन्हें पूरा सहयोग दें। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य है कि कोई भी पात्र परिवार इस योजना के लाभ से वंचित न रहे और भविष्य में अधिक से अधिक लोगों को इसका लाभ मिले।
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CM भगवंत मान का बड़ा ऐलान, श्री अकाल तख्त साहिब के समक्ष पेश होंगे AAP के मंत्री और विधायक
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल की मौजूदगी में बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि 29 जून को आम आदमी पार्टी के सभी मंत्री और विधायक श्री अकाल तख्त साहिब के समक्ष पेश होंगे और वहां से दिए जाने वाले हर निर्देश और फैसले का पूरा सम्मान करेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आम आदमी पार्टी श्री अकाल तख्त साहिब की सर्वोच्चता में पूर्ण विश्वास रखती है और जो भी निर्णय लिया जाएगा, उसे श्रद्धा और सम्मान के साथ स्वीकार किया जाएगा। गौरतलब है कि श्री अकाल तख्त साहिब की ओर से पार्टी के मंत्रियों और विधायकों को तलब किया गया था, जिसके बाद यह फैसला लिया गया है।
श्री अकाल तख्त साहिब में रखेंगे अपना पक्ष
भगवंत मान ने बताया कि सभी मंत्री और विधायक निर्धारित समय पर एक साथ श्री अकाल तख्त साहिब पहुंचेंगे और अपना पक्ष लिखित रूप में प्रस्तुत करेंगे। पेशी के बाद वे मीडिया के सामने भी अपनी बात रखेंगे।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि उन्हें व्यक्तिगत रूप से तलब नहीं किया गया है। इसलिए जिन मंत्रियों और विधायकों को बुलाया गया है, वही पार्टी और सरकार का पक्ष रखेंगे।
मंत्रियों से मांगा गया लिखित स्पष्टीकरण
मुख्यमंत्री ने बताया कि श्री अकाल तख्त साहिब की ओर से कुछ मंत्रियों से लिखित स्पष्टीकरण भी मांगा गया है। सभी संबंधित मंत्री निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार अपना जवाब लिखित रूप में सौंपेंगे।
उन्होंने यह भी बताया कि पंजाब विधानसभा के अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवां भी मंत्रियों और विधायकों के साथ मौजूद रहेंगे।
भगवंत मान ने कहा कि सोमवार को सभी विधायकों को बुलाया गया है और सभी तय समय पर श्री अकाल तख्त साहिब में उपस्थित होंगे। इस संबंध में उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर जानकारी दी, जिसमें अरविंद केजरीवाल भी मौजूद रहे।
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अंतरराष्ट्रीय नशा निषेध दिवस पर UNODC और पंजाब जेल विभाग ने नशा, HIV और जेलों में कैदियों के स्वास्थ्य पर किया विचार-विमर्श
जेलों में बंद कैदियों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं और पुनर्वास सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से पंजाब सरकार ने शुक्रवार को लुधियाना में ‘नशा, एचआईवी और जेलों में कैदियों का स्वास्थ्य’ विषय पर एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की। यह कार्यक्रम यूनाइटेड नेशंस ऑफिस ऑन ड्रग्स एंड क्राइम (यूएनओडीसी) द्वारा पंजाब जेल विभाग तथा गैर-सरकारी संस्था ‘टर्न योर कंसर्न इंटू एक्शन’ (टीवाईसीआईए) के सहयोग से अंतरराष्ट्रीय नशा निषेध एवं अवैध तस्करी विरोधी दिवस के अवसर पर आयोजित किया गया।
एक दिवसीय बैठक में राज्य सरकार, जेल विभाग तथा पंजाब सहित देशभर के स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने भाग लिया। इस दौरान जेलों में कैदियों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं और पुनर्वास सुविधाओं को और सुदृढ़ बनाने पर विस्तार से चर्चा की गई।
उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में चल रहे ‘युद्ध नशों विरुद्ध’ अभियान के अंतर्गत नशामुक्ति एवं मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के प्रयासों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि नशे की समस्या से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए सभी संबंधित पक्षों के बीच समन्वय अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने कहा, “हमारे प्रमुख कदमों में से एक नशे की लत को अपराध की श्रेणी से अलग मानना है। मरीज और तस्कर में स्पष्ट अंतर है। पिछले एक वर्ष और तीन महीनों में 10,000 से अधिक नशा पीड़ितों, जिन्हें अन्यथा जेल में होना पड़ता, को नशामुक्ति केंद्रों में भर्ती कराया गया है। हमने 25,000 कैदियों की हेपेटाइटिस, एचआईवी तथा नशे से संबंधित जांच भी करवाई है। हमारा मानना है कि जेलें केवल सुधार गृह नहीं, बल्कि उपचार, पुनर्वास और स्वस्थ जीवन की ओर वापसी के केंद्र भी होनी चाहिए। पंजाब की जेलों में पहले से ही ओओएटी क्लीनिकों का नेटवर्क कार्यरत है, जो कैदियों को नशे से उबरने में सहायता प्रदान कर रहा है। इसके अतिरिक्त कौशल विकास के लिए आईटीआई पाठ्यक्रम, मनोचिकित्सक और काउंसलर भी उपलब्ध हैं।”
राज्यभर के जेल अधिकारियों को संबोधित करते हुए जेल मंत्री डॉ. रवजोत सिंह ने कहा, “नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) अधिनियम के तहत दोषसिद्धि के मामलों में पंजाब देश में अग्रणी है। इसी प्रकार सुधारात्मक न्याय के क्षेत्र में भी हमें उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए। मान सरकार के लिए समाज से नशे का खात्मा करना और प्रत्येक नशा पीड़ित तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना समान रूप से महत्वपूर्ण है।”
कार्यक्रम की शुरुआत जेलों में उभरती स्वास्थ्य चुनौतियों पर चर्चा से हुई, जिसके बाद आईजी जेल एवं आईएएस अधिकारी मुहम्मद तैयब ने विशेष प्रस्तुति दी। कार्यक्रम के दौरान जेलों की विभिन्न समस्याओं और उनके समाधान पर कई सत्र आयोजित किए गए, जिनमें नशा एवं संक्रामक रोगों की रोकथाम, महिलाओं के लिए विशेष स्वास्थ्य सेवाएं, दिव्यांगता, नशा तथा जेलों में कैदियों के जीवन जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई।
यूएनओडीसी के विशेषज्ञों ने जेल स्वास्थ्य और पुनर्वास से जुड़े अंतरराष्ट्रीय मानकों तथा वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं की जानकारी साझा की। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच प्रत्येक व्यक्ति का मूल अधिकार है तथा जेल में रहने के दौरान और रिहाई के बाद भी कैदियों को उपचार एवं मनोसामाजिक सहायता निरंतर उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
इस अवसर पर दक्षिण एशिया के लिए यूएनओडीसी क्षेत्रीय कार्यालय की आपराधिक न्याय विशेषज्ञ सीमा जोशी ने कहा, “इस वर्ष की थीम ‘वर्ल्ड ड्रग प्रॉब्लम: पर्सिस्टिंग इश्यूज़, न्यू चैलेंजेज़, इनोवेटिव रिस्पॉन्सेज़’ हमें याद दिलाती है कि चुनौतियां बदल रही हैं, इसलिए हमारे समाधान भी समय के साथ विकसित होने चाहिए। आज का दिन केवल नशे के प्रभाव को स्वीकार करने का नहीं, बल्कि समाधान, साझेदारी और आशा को प्रोत्साहित करने का भी है। जेलों में कैदियों के स्वास्थ्य, नशा उपचार और एचआईवी सेवाओं को मजबूत करना इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, जो लोगों के पुनर्वास और समाज में सम्मानजनक पुनर्स्थापन के साथ-साथ सुरक्षित और स्वस्थ समाज के निर्माण में योगदान देता है।”
बैठक के दौरान विशेषज्ञों ने स्क्रीनिंग प्रणाली, नशा छोड़ने के दौरान उपचार, ओपिओइड आधारित उपचार, मानसिक एवं सामाजिक सहयोग तथा उपचार की निरंतरता जैसे विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया। जागरूकता और साझेदारी को बढ़ावा देने के लिए नशा और एचआईवी पर आधारित शैक्षणिक उपकरण भी प्रस्तुत किए गए।
बैठक में महिलाओं के प्रजनन स्वास्थ्य, मानसिक स्वास्थ्य सहायता तथा नशे से प्रभावित महिलाओं को जेल में रहने के दौरान और रिहाई के बाद भी निरंतर उपचार एवं देखभाल उपलब्ध कराने पर विशेष चर्चा की गई।
अंत में सभी विभागों ने मिलकर कार्य करने तथा जेलों में नशे की समस्या से निपटने के लिए मानवाधिकार आधारित, समावेशी और समन्वित दृष्टिकोण अपनाने का संकल्प लिया।
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