Connect with us

Punjab

पंजाब सरकार का ऐतिहासिक फैसला: 35 साल बाद जालंधर निगम को 1196 सफाईकर्मियों की मंजूरी

Published

on

पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार ने जालंधर नगर निगम के लिए एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए 1196 सफाईकर्मियों की भर्ती को मंजूरी दे दी है। यह अनुमोदन 35 वर्षों के लंबे इंतज़ार के बाद मिला है, जो शहर की स्वच्छता व्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार की यह पहल जनता केंद्रित शासन का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जो लोगों की मूलभूत समस्याओं के समाधान के लिए प्रतिबद्ध है।

दशकों से सफाईकर्मियों की कमी से जूझ रहे नगर निगम को अब पर्याप्त जनशक्ति मिलेगी

इस ऐतिहासिक निर्णय से जालंधर शहर की स्वच्छता प्रबंधन व्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव आने की उम्मीद है। दशकों से सफाईकर्मियों की कमी से जूझ रहे नगर निगम को अब पर्याप्त जनशक्ति मिलेगी, जिससे शहर के हर कोने में स्वच्छता सुनिश्चित की जा सकेगी। पंजाब सरकार का यह कदम न केवल शहर की साफ-सफाई में सुधार लाएगा, बल्कि स्थानीय युवाओं को रोज़गार के अवसर भी प्रदान करेगा। मुख्यमंत्री भगवंत मान की दूरदर्शी सोच और निरंतर समर्थन के परिणामस्वरूप यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया जा सका है।

पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार ने सत्ता में आने के बाद से ही जनता की समस्याओं को प्राथमिकता देने का संकल्प लिया था। जालंधर निगम के लिए सफाईकर्मियों की मंजूरी इसी दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम है। सरकार ने हमेशा जनहित के मुद्दों को सर्वोपरि रखा है और जन-केंद्रित दृष्टिकोण को जमीनी स्तर पर लागू करने के लिए ठोस प्रयास किए हैं। यह निर्णय इस बात का प्रमाण है कि पंजाब सरकार अपने वादों को पूरा करने में विश्वास रखती है।

1196 सफाईकर्मियों की नियुक्ति से शहर के सभी वार्डों में नियमित सफाई सुनिश्चित हो सकेगी

जालंधर शहर के निवासियों के लिए यह एक बड़ी राहत की खबर है, जो लंबे समय से स्वच्छता व्यवस्था में सुधार की मांग कर रहे थे। 1196 सफाईकर्मियों की नियुक्ति से शहर के सभी वार्डों में नियमित सफाई सुनिश्चित हो सकेगी। इससे कचरा प्रबंधन, गली-मोहल्लों की सफाई, और सार्वजनिक स्थानों की स्वच्छता में उल्लेखनीय सुधार होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से जालंधर एक स्वच्छ और स्वस्थ शहर के रूप में विकसित होगा, जिससे नागरिकों के जीवन स्तर में भी सुधार आएगा।

पंजाब सरकार के इस निर्णय से न केवल स्वच्छता व्यवस्था मजबूत होगी, बल्कि स्थानीय बेरोजगार युवाओं को रोजगार के नए अवसर भी प्राप्त होंगे। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कई मौकों पर कहा है कि सरकार का उद्देश्य हर नागरिक को बेहतर जीवन स्तर प्रदान करना है। सफाईकर्मियों की भर्ती से सैकड़ों परिवारों को आर्थिक सुरक्षा मिलेगी और उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आएगा। यह पहल सामाजिक न्याय और समावेशी विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

यह निर्णय लंबे समय से लंबित मुद्दे का समाधान है और इससे शहर की छवि में सुधार होगा

स्थानीय निवासियों ने पंजाब सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है और मुख्यमंत्री भगवंत मान की सराहना की है। नागरिकों का मानना है कि यह निर्णय लंबे समय से लंबित मुद्दे का समाधान है और इससे शहर की छवि में सुधार होगा। सोशल मीडिया पर भी लोगों ने इस पहल की प्रशंसा करते हुए कहा है कि आम आदमी पार्टी की सरकार वास्तव में जनता के लिए काम कर रही है। जनता की प्रतिक्रिया से स्पष्ट है कि यह फैसला जमीनी जरूरतों को ध्यान में रखकर लिया गया है।

आम आदमी पार्टी की सरकार ने पंजाब में शिक्षा, स्वास्थ्य, और बुनियादी ढांचे के विकास के साथ-साथ नगरीय सेवाओं में भी सुधार के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। जालंधर निगम के लिए सफाईकर्मियों की मंजूरी इसी शृंखला की एक महत्वपूर्ण कड़ी है। सरकार का उद्देश्य प्रदेश के हर शहर और गांव को स्वच्छ, सुरक्षित और विकसित बनाना है। इस दिशा में किए जा रहे प्रयासों से पंजाब का समग्र विकास सुनिश्चित हो रहा है और जनता को सरकार की नीतियों का सीधा लाभ मिल रहा है।

जालंधर में सफाईकर्मियों की संख्या बढ़ने से बीमारियों की रोकथाम में मदद मिलेगी और शहर का वातावरण स्वच्छ रहेगा

विशेषज्ञों का मानना है कि स्वच्छता केवल एक नगरीय सेवा नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण से भी जुड़ी है। जालंधर में सफाईकर्मियों की संख्या बढ़ने से बीमारियों की रोकथाम में मदद मिलेगी और शहर का वातावरण स्वच्छ रहेगा। पंजाब सरकार की यह पहल स्वच्छ भारत मिशन के उद्देश्यों के अनुरूप है और यह दर्शाती है कि राज्य सरकार केंद्र सरकार की योजनाओं को जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है।

पंजाब सरकार का यह ऐतिहासिक निर्णय न केवल जालंधर के लिए, बल्कि पूरे प्रदेश के लिए एक मिसाल है। मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में सरकार ने यह साबित कर दिया है कि जनता की समस्याओं के समाधान के लिए दीर्घकालिक और साहसिक निर्णय लेने में वह पीछे नहीं हटती। 35 वर्षों के इंतज़ार के बाद मिली यह मंजूरी जालंधर के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ेगी और शहर को एक स्वच्छ, सुंदर और जीवंत नगर के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। यह निर्णय आम आदमी पार्टी की जन-केंद्रित शासन व्यवस्था का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।

Continue Reading
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Punjab

आर्मी पब्लिक स्कूलों में पंजाबी की पढ़ाई जारी रहेगी, संस्कृत लागू करने का फैसला वापस

Published

on

आर्मी पब्लिक स्कूलों में पंजाबी भाषा की पढ़ाई पहले की तरह जारी रहेगी। आर्मी वेलफेयर एजुकेशन सोसाइटी (AWES), जालंधर ने अपने उस पहले के फैसले को वापस ले लिया है, जिसमें स्कूलों में संस्कृत को अनिवार्य रूप से लागू करने की बात कही गई थी। अब छठी से आठवीं कक्षा तक के विद्यार्थी पहले की तरह अपनी मातृभाषा पंजाबी की पढ़ाई जारी रख सकेंगे।

इस फैसले का स्वागत करते हुए पंजाब चेतना मंच के अध्यक्ष डॉ. लखविंदर सिंह जौहल, महासचिव सतनाम सिंह मानक और संगठन सचिव प्रिंसिपल गुरमीत सिंह पलाही ने कहा कि नए नियमों के तहत छठी से आठवीं कक्षा के विद्यार्थियों को पंजाबी या संस्कृत में से किसी एक भाषा का चयन करने की स्वतंत्रता होगी। इसके साथ ही वे अंग्रेजी और हिंदी से जुड़े निर्धारित विषयों का भी चयन कर सकेंगे। उन्होंने बताया कि नौवीं कक्षा में अंग्रेजी, हिंदी और संस्कृत के विकल्प उपलब्ध रहेंगे, जबकि दसवीं कक्षा की व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

डॉ. जौहल ने पंजाबी भाषा को बचाने के लिए चलाए गए अभियान का समर्थन करने वाले सामाजिक संगठनों, बुद्धिजीवियों, विद्यार्थियों और अभिभावकों का धन्यवाद किया। उन्होंने भारत सरकार के राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व अध्यक्ष तरलोचन सिंह और राज्यसभा सदस्य संत बलबीर सिंह सीचेवाल का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए कहा कि केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को लिखे गए उनके पत्र ने इस मामले के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

इसके अलावा पंजाबी भाषा से जुड़े विभिन्न संगठनों और सामाजिक संस्थाओं ने भी लगातार इस मुद्दे को उठाया। कानूनी और सामाजिक स्तर पर किए गए प्रयासों के साथ-साथ केंद्रीय पंजाबी लेखक संघ के नेतृत्व में चंडीगढ़ में प्रदर्शन भी किए गए। पंजाब चेतना मंच ने पंजाब के मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री को भी पत्र लिखकर स्कूलों में पंजाबी भाषा को बनाए रखने की मांग की थी। अब इस फैसले को पंजाबी भाषा के संरक्षण और उसके अधिकारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

Continue Reading

Punjab

श्री गुरु हरिकृष्ण साहिब जी के प्रकाश पर्व पर श्री हरिमंदिर साहिब में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब

Published

on

श्री गुरु हरिकृष्ण साहिब जी के पावन प्रकाश पर्व के अवसर पर सचखंड श्री हरिमंदिर साहिब में श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत वातावरण देखने को मिल रहा है। पंजाब ही नहीं, बल्कि देश के विभिन्न राज्यों और विदेशों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु माथा टेकने के लिए पहुंच रहे हैं। श्रद्धालुओं ने पवित्र सरोवर में स्नान कर गुरबाणी कीर्तन का आनंद लिया और गुरु घर का आशीर्वाद प्राप्त किया।

श्री हरिमंदिर साहिब के मैनेजर गुरिंदर सिंह देवीदासपुरा ने समस्त संगत को प्रकाश पर्व की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि श्री गुरु हरिकृष्ण साहिब जी ने बहुत कम आयु में ही मानवता की सेवा, दया, विनम्रता और परोपकार का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि गुरु साहिब की शिक्षाएं आज भी पूरी मानवता को सेवा, प्रेम और करुणा का संदेश देती हैं। उन्होंने संगत से गुरु साहिब के उपदेशों को अपने जीवन में अपनाने और जरूरतमंदों की सेवा के लिए सदैव आगे आने की अपील की।

प्रकाश पर्व के विशेष अवसर पर रात्रि के समय सचखंड श्री हरिमंदिर साहिब में विशेष रोशनी और आतिशबाजी का आयोजन किया जाएगा। रोशनी से जगमगाता श्री हरिमंदिर साहिब श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगा और इस पावन पर्व की रौनक को और भी भव्य बना देगा।

Continue Reading

Punjab

नीति आयोग की रैंकिंग में पंजाब ने केरल को पछाड़ा; शिक्षा मंत्री ने विधानसभा में चार सालों का रिपोर्ट कार्ड पेश किया

Published

on

प्रदेश में शिक्षा में ऐतिहासिक बदलाव का दावा करते हुए पंजाब के शिक्षा मंत्री स. हरजोत सिंह बैंस ने आज कहा कि पंजाब ने केरल को पछाड़कर ‘नीति आयोग स्कूल एजुकेशन क्वालिटी इंडेक्स 2026’ में शीर्ष स्थान हासिल किया है। जहां वर्ष 2022 में 8,000 स्कूलों में चारदीवारी नहीं थी और लगभग 4 लाख विद्यार्थी ताटों (चटाइयों) पर बैठकर पढ़ने को मजबूर थे, वहीं आज पंजाब के सरकारी स्कूलों के 882 विद्यार्थियों ने नीट परीक्षा पास की है और पंजाब पहली से 12वीं कक्षा तक ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ को मुख्य विषय के रूप में शुरू करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। यह वह बदलाव है जिसका वादा आप की अगुवाई वाली पंजाब सरकार ने किया था।

विधायक प्रो. जसवंत सिंह गज्जनमाजरा द्वारा लाए गए शिक्षा संबंधी प्रस्ताव पर बहस में भाग लेते हुए, स्कूल शिक्षा मंत्री स. हरजोत सिंह बैंस ने जुलाई 2022 में पदभार संभालने के समय स्कूलों की खराब स्थिति को याद करवाया।

बुनियादी ढांचे के प्रारंभिक सर्वेक्षण के नतीजों के बारे में बताते हुए स. बैंस ने कहा कि 8,000 से अधिक स्कूलों में चारदीवारी नहीं थी, 3,200 में उपयोग योग्य बाथरूम नहीं थे और लगभग 4 लाख बच्चे जमीन पर बैठने को मजबूर थे। पाठ्यपुस्तकें अक्टूबर-नवंबर में स्कूलों तक पहुंचती थीं, जिससे शैक्षणिक सत्र के कई महीने बर्बाद हो जाते थे।

किसी भी सरकारी शिक्षक से इसकी पुष्टि करने की चुनौती देते हुए उन्होंने आगे कहा, “अब वही पाठ्यपुस्तकें 15 फरवरी तक जिला मुख्यालयों तक पहुंच जाती हैं और 31 मार्च तक वितरित कर दी जाती हैं।”

अपने शासन मॉडल के बारे में बताते हुए स. बैंस ने कहा कि उन्होंने पंजाब के हर जिले के 2,000 से अधिक सरकारी स्कूलों का निजी तौर पर दौरा किया है, जिनमें सीमावर्ती स्कूल, जीरो-लाइन से सटे गांव और दूर-दराज के क्षेत्र शामिल हैं।

उन्होंने सदन को बताया कि सरकार का प्रमुख ‘मिशन समरथ’ भारत के सबसे बड़े बुनियादी शिक्षा कार्यक्रमों में से एक के रूप में उभरा है। इसके लेवल बेस्ड टीचिंग मॉडल के तहत, हर बच्चे को अच्छी तरह पढ़ना, लिखना और गणित सिखाना सुनिश्चित करने के लिए विद्यार्थियों को ग्रेड के बजाय उनकी सीखने की क्षमता के अनुसार समूहों में बांटा जाता है।

स. हरजोत बैंस ने कहा, “जब मैंने सितंबर-अक्टूबर 2022 में स्कूलों का दौरा किया, तो मैंने 8वीं कक्षा के ऐसे विद्यार्थी भी देखे जो सामान्य वाक्य भी नहीं लिख सकते थे। कुछ विद्यार्थी सामान्य जोड़ और घटाव नहीं कर सकते थे। हमने इन विद्यार्थियों की पहचान की और इन्हें तीसरी कक्षा के सिलेबस के स्तर से पढ़ाया। आज वे बहुत सुधार कर रहे हैं।” उन्होंने आगे बताया कि इस कार्यक्रम के तहत अब सालाना लगभग 12 लाख विद्यार्थियों और 70,000 से अधिक शिक्षकों को कवर किया जाता है।

सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों के प्रदर्शन में हुए सुधार के बारे में स. हरजोत बैंस ने सदन को बताया कि पंजाब के सरकारी स्कूलों से नीट-यू.जी. परीक्षा पास करने वालों की संख्या वर्ष 2021 में मात्र 80 से बढ़कर वर्ष 2026 में 882 हो गई है। उन्होंने कहा कि ये नतीजे ‘पंजाब अकादमिक कोचिंग फॉर एक्सीलेंस’ (पेस) पहल का स्पष्ट परिणाम हैं।

उन्होंने आगे कहा, “पंजाब सरकार की शिक्षा क्रांति ने विद्यार्थियों के लिए उम्मीद की नई किरण जगाई है।” स. बैंस ने आगे कहा कि मजीठा में सरकारी स्कूलों के छह विद्यार्थियों और दीनानगर में 17 विद्यार्थियों ने नीट परीक्षा पास की है। ये कोई प्राइवेट कोचिंग के आंकड़े नहीं, बल्कि हमारे सरकारी स्कूलों की महत्वपूर्ण उपलब्धियां हैं।

उन्होंने एक साधारण परिवार से संबंधित लड़की हरनूरप्रीत कौर का विशेष जिक्र किया, जिसने अपनी श्रेणी में ऑल इंडिया रैंक 3140 हासिल की, जो आज के सरकारी स्कूलों की काबिलियत को दर्शाता है।

विपक्ष पर निशाना साधते हुए उन्होंने पलटवार किया, “अगर आप चाहते हैं तो मुझे व्यक्तिगत तौर पर निशाना बनाएं। सरकारी स्कूलों को क्यों निशाना बना रहे हो? कुछ नकारात्मक सोच वाले लोगों द्वारा गढ़े गए झूठे प्रचार ने लोगों को पहले ही सरकारी स्कूलों से दूर कर दिया है।”

सरकारी स्कूलों में घटती दाखिला दर से संबंधित सवालों का जवाब देते हुए स. बैंस ने कहा कि यह रुझान सिर्फ पंजाब तक ही सीमित नहीं था, बल्कि कोविड के बाद देश भर में देखा गया है।

उन्होंने आगे कहा, “ऑल इंडिया आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों के दाखिले की संख्या 1.76 करोड़ तक घटी है। कोविड के दौरान, सरकारी स्कूलों में दाखिला वास्तव में बढ़ा था। परंतु उसके बाद, हर जगह यह संख्या घटी है।”

उदाहरण देते हुए स. बैंस ने कहा कि बिहार में 2.49 करोड़ विद्यार्थी थे, जो पहले घटकर 2.13 करोड़ रह गए और इस साल यह और घटकर 1.95 करोड़ रहने का अनुमान है। इसी तरह उत्तर प्रदेश में, यह संख्या पहले 4.44 करोड़ से घटकर 4.16 करोड़ हो गई है, जो इस साल 4.1 करोड़ रहने का अनुमान है। इसके अलावा महाराष्ट्र में यह संख्या 2.32 करोड़ से घटकर 2.13 करोड़ रह गई।

स. बैंस ने कहा, “उन्होंने भारत सरकार की 2023 में शुरू की गई अपार आई.डी. पहल का भी हवाला दिया। ‘अब हर विद्यार्थी के पास एक अनोखी आई.डी. है। पहले एक बच्चा छह स्कूलों में दाखिल होता था परंतु किसी में भी नहीं पढ़ रहा था। इसी कारण अब ये आंकड़े सही हो रहे हैं।’”

शिक्षा मंत्री ने विस्तार से बताया कि 19,125 सरकारी स्कूलों में 2,638 करोड़ रुपये के बुनियादी ढांचे के काम किए गए हैं। इस साल विश्व बैंक से और सुधारों के लिए 1,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त मंजूरी ली गई है।

स. हरजोत बैंस ने कई ‘स्कूल ऑफ एमिनेंस’ की सूची दी, जिनका पूरी तरह कायाकल्प किया गया है। उन्होंने लुधियाना के शहीद सुखदेव थापर के नाम पर बने स्कूल ऑफ एमिनेंस का हवाला दिया, जिसके बारे में उन्होंने कहा कि कभी इसे पूरी तरह उपेक्षित कर दिया गया था। उन्होंने कहा, “आज इस स्कूल को विश्व स्तरीय बनाने के लिए 18 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इस साल स्कूल के 17 विद्यार्थी नीट परीक्षा भी पास कर चुके हैं।”

उन्होंने आगे कहा कि भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार सरकारी स्कूलों को आखिरी विकल्प से पहली पसंद में बदल रही है। हम यहीं नहीं रुक रहे। हम हर साल और ऊंचे लक्ष्य निर्धारित कर रहे हैं।

स. बैंस ने कहा, “शिक्षकों को अब सरकारी स्कूल चलाने के लिए फंड मांगने की जरूरत नहीं। हमने स्कूलों के लिए आवश्यक फंड मुहैया करवाए हैं, पिछली सरकारों की तरह नहीं जब शिक्षकों को फंड मांगने जाना पड़ता था। अपमान का दौर अब खत्म हो गया है।”

Continue Reading

Trending