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अन्य के खिलाफ आरोप तय करने पर सुनवाई फिर शुरू ,Sukhbir

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कोटकपूरा गोलीबारी मामले में पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री Sukhbir सिंह बादल, पूर्व डीजीपी सुमेध सैनी और कई अन्य पुलिस अधिकारियों के खिलाफ आरोप तय करने को लेकर यहां की एक अदालत ने सोमवार को सुनवाई फिर से शुरू की।आठ महीने के अंतराल के बाद सुनवाई फिर से शुरू हुई। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश दिनेश कुमार वाधवा ने अगली सुनवाई 24 फरवरी के लिए तय की।

यह घटना अक्टूबर 2015 में हुई थी, जब पुलिस ने शिअद-भाजपा शासन के दौरान फरीदकोट के बरगाड़ी और बुर्ज जवाहर सिंह वाला गांवों में दो गुरुद्वारों में एक धार्मिक ग्रंथ के कथित अपमान के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे लोगों पर गोलियां चलाई थीं।यह गोलीबारी फरीदकोट के बहबल कलां में हुई थी , जहां पुलिस कार्रवाई में दो प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई थी।

Sukhbir- जो उस समय राज्य के उपमुख्यमंत्री थे – सैनी और अन्य पर भारतीय दंड संहिता की धारा 307 (हत्या का प्रयास) सहित विभिन्न प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया था।

सितंबर 2023 में एक विशेष जांच दल (एसआईटी) ने Sukhbir और पंजाब के पूर्व सीएम प्रकाश सिंह बादल को मामले में आरोपी बनाया था और दावा किया था कि उन्होंने पुलिस को विरोध को दबाने के लिए बल प्रयोग करने का निर्देश दिया था।जबकि दोनों मामले फरीदकोट की अदालतों में लंबित थे, जुलाई 2024 में, पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के आदेश के बाद बहबल कलां मामले को चंडीगढ़ की अदालत में स्थानांतरित कर दिया गया था।

हाईकोर्ट का यह आदेश पूर्व एसएसपी और आरोपी चरणजीत शर्मा द्वारा सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए मामले को पंजाब से बाहर स्थानांतरित करने की याचिका के बाद आया है। उन्होंने कोटकपूरा मामले को भी स्थानांतरित करने की मांग की थी।

अगस्त 2022 के अपने आदेश में, उच्च न्यायालय ने कहा था कि दोनों मामलों को एक साथ आगे बढ़ाया जाना चाहिए। हालाँकि, कोटकपूरा मामले के स्थानांतरण पर स्पष्ट निर्देश के अभाव में, फ़रीदकोट अदालत ने पिछले हफ़्ते फ़ैसला सुनाया कि कार्यवाही को अब और स्थगित नहीं रखा जा सकता, जिसके कारण सोमवार को इसे फिर से शुरू किया गया।

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’चिट्टा’ के खिलाफ चॉक: पंजाब की कक्षाएँ ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ का अग्रिम मोर्चा बनीं

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गर्मी की एक महीने की छुट्टी के बाद जैसे ही पंजाब के स्कूल फिर से खुल रहे हैं, हज़ारों शिक्षक राज्य को नशामुक्त बनाने के अभियान में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

अब यह लड़ाई पुलिस थानों और नशा मुक्ति केंद्रों से आगे बढ़कर स्कूलों और कक्षाओं तक पहुँच गई है। मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाले ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ अभियान के तहत प्रशिक्षित शिक्षक, जागरूक प्रधानाचार्य और सुरक्षित स्कूल वातावरण के माध्यम से हर बच्चे के चारों ओर सुरक्षा कवच बनाया जा रहा है। बच्चों को नशे के खतरों की जानकारी देने के साथ-साथ मानसिक तनाव से निपटने के कौशल और सुरक्षित, गुप्त रूप से शिकायत करने के विकल्प भी दिए जा रहे हैं।

इस व्यवस्था को मज़बूत करने के लिए पंजाब सरकार उन लोगों में निवेश कर रही है जो रोज़ाना किशोरों के संपर्क में रहते हैं। टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज़ के विशेषज्ञों के सहयोग से नौ जिलों (विशेषकर सीमावर्ती जिलों) के 1,400 से अधिक स्कूल प्रमुखों को प्रशिक्षित किया गया है ताकि वे नशे के शुरुआती संकेत पहचान सकें, सहानुभूति के साथ प्रतिक्रिया दें और मानसिक स्वास्थ्य को सार्वजनिक स्वास्थ्य दृष्टिकोण से समझकर संभाल सकें।

इसके अलावा, अमृतसर में कक्षा 9 से 12 तक के 3,000 से अधिक शिक्षकों के लिए कैपेसिटी बिल्डिंग वर्कशॉप आयोजित की गई हैं। इस ट्रेनिंग के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। ट्रेनिंग के बाद 75% शिक्षकों ने बताया कि उन्हें स्वस्थ स्कूल वातावरण बनाने की प्रेरणा मिली , जबकि 85% ने माना कि किशोरों में नशे का संबंध तनाव, साथियों के दबाव और भावनात्मक चुनौतियों से जुड़ा है।अब इस कार्यक्रम का विस्तार पूरे राज्य के सभी जिलों में किया जा रहा है।

स्कूल स्टाफ की जागरूकता के साथ-साथ सरकार किशोरों में तनाव और भावनात्मक असंतुलन जैसी मूल समस्याओं को भी संबोधित कर रही है। राज्य भर के सरकारी स्कूलों में शुरू किया गया ‘माइंडफुलनेस प्रोग्राम’ कक्षा 6 से 12 तक के छात्रों के लिए रोज़ सुबह 30 मिनट का सत्र देता है, जिसमें साँस लेने के अभ्यास, मेडिटेशन , सकारात्मक विचार और आभार अभ्यास शामिल हैं, ताकि ध्यान, भावनात्मक मज़बूती और मानसिक स्वास्थ्य बेहतर हो सके।

मोहाली के लगभग 210 सरकारी स्कूलों में पायलट रूप से लागू इस कार्यक्रम में 83% छात्रों ने बताया कि वे कठिन परिस्थितियों को अब बेहतर तरीके से संभाल पा रहे हैं और तनाव कम महसूस करते हैं।

इस पहल के महत्त्व पर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा, “नशे से बचाए गए हर बच्चे को एक सुरक्षित परिवार और मज़बूत भविष्य मिलता है। स्कूलों को ऐसा स्थान बनाकर जहाँ बच्चे आत्मविश्वास, लचीलापन और जीवन कौशल विकसित करें, सरकार एक स्वस्थ समाज की नींव रख रही है। हमारा उद्देश्य केवल नशे के खतरों से चेतावनी देना नहीं है, बल्कि बच्चों को सही निर्णय लेने के लिए ज्ञान, शक्ति और समझ प्रदान करना है।”

पंजाब ने अपनी रोकथाम रणनीति को और मज़बूत करते हुए सम्पूर्ण राज्य में कक्षा 9 से 12 के छात्रों के लिए भारत का पहला एविडेंस -आधारित एंटी-ड्रग पाठ्यक्रम शुरू किया। पिछले साल अगस्त में शुरू किए गए इस कार्यक्रम में 3,658 स्कूलों के लगभग 8 लाख छात्र शामिल हैं और इसे 6,500 से अधिक प्रशिक्षित शिक्षक पढ़ा रहे हैं।

जे-पैल साउथ एशिया (J-PAL South Asia) और व्यवहार वैज्ञानिकों के सहयोग से विकसित यह पाठ्यक्रम पारंपरिक जागरूकता अभियानों से आगे बढ़कर छात्रों को नशा, साथियों का दबाव, निर्णय लेने की क्षमता और नशे से इनकार करने के व्यावहारिक कौशल सिखाता है।

अमृतसर के एक सरकारी स्कूल की शिक्षिका बलविंदर कौर, जो राज्य के नशा-विरोधी अभियान के तहत किशोर बच्चों का मार्गदर्शन कर रही हैं, ने कहा, “बच्चों से हमें उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिल रही है। वे कक्षा और स्कूल स्तर पर चर्चाओं में सक्रिय रूप से भाग लेते हैं। इससे हमें भरोसा मिलता है कि आने वाले समय में टीनेजर और एडोलेसेंटस नशे की समस्या से दूर रहेंगे।”

छात्रों के लिए सुरक्षित मदद प्रणाली के तहत नशे से जुड़ी चिंताओं की जानकारी देने के लिए गुमनाम शिकायत पेटियाँ लगाई गई हैं, ताकि छात्र बिना डर और पहचान उजागर हुए गोपनीय रूप से रिपोर्ट कर सकें।

पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने कहा कि यह पहल सरकार की युवा पीढ़ी को सुरक्षित बनाने की प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं। उन्होंने कहा, “शिक्षकों ने हमेशा समाज में बदलाव लाने में अहम भूमिका निभाई है और मुख्यमंत्री के नेतृत्व में नशे के ख़िलाफ़ चलाए जा रहे अभियान के सकारात्मक नतीजे सामने आ रहे हैं। यह एक सामूहिक प्रयास है, जिसमें शिक्षक और मेंटर सबसे महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।”

पंजाब पहले ही राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा में अग्रणी राज्य बन चुका है, नेशनल अचीवमेंट सर्वे (राष्ट्रीय उपलब्धि सर्वेक्षण) और नीति आयोग की स्कूल एजुकेशन सिस्टम रिपोर्ट 2026 में शीर्ष स्थान प्राप्त कर चुका है। अब राज्य नशे के ख़िलाफ़ लड़ाई में भी नई मिसाल पेश कर रहा है। यह दिखा रहा है कि नशे पर रोक सिर्फ कानून लागू करने से नहीं, बल्कि जागरूकता, संवेदनशीलता, वैज्ञानिक सोच और समय रहते रोकथाम से भी लगाई जा सकती है। शिक्षकों, स्कूल प्रमुखों और कक्षाओं को इस अभियान का केंद्र बनाकर पंजाब ऐसा मॉडल तैयार कर रहा है, जिसका उद्देश्य बच्चों को नशे की गिरफ़्त में आने से पहले ही सुरक्षित रखना है।

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वित्त मंत्री ने राज्य के स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने के लिए मल्टीपरपज़ हेल्थ वर्कर (महिला) के 619 रिक्त पद भरने की घोषणा की

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पंजाब के वित्त मंत्री एडवोकेट हरपाल सिंह चीमा ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अंतर्गत 619 मल्टीपरपज़ हेल्थ वर्कर (महिला) के पदों पर भर्ती तथा उद्योग विभाग के महत्वपूर्ण प्रशासनिक एवं फील्ड पदों के रणनीतिक पुनर्जीवन संबंधी व्यापक प्रशासनिक प्रस्तावों को औपचारिक स्वीकृति प्रदान कर दी है। इस निर्णय का उद्देश्य जनसेवाओं को अधिक प्रभावी बनाना तथा संस्थागत रोजगार के नए अवसर सृजित करना है।

यहां जारी एक प्रेस बयान में दोनों प्रशासनिक स्वीकृतियों का विस्तृत विवरण साझा करते हुए वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि इन कदमों का उद्देश्य पूरे पंजाब में जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना तथा औद्योगिक प्रशासन को अधिक सक्षम बनाना है। उन्होंने कहा कि सरकार सख्त वित्तीय अनुशासन बनाए रखते हुए यह सुनिश्चित करेगी कि आम जनता से सीधे जुड़े आवश्यक विभागों में कर्मचारियों की कोई कमी न रहे।

राज्य के स्वास्थ्य क्षेत्र में इस बड़े भर्ती अभियान की जानकारी देते हुए वित्त मंत्री ने बताया कि नए स्वीकृत ढांचे के अंतर्गत मल्टीपरपज़ हेल्थ वर्कर (महिला) ग्रुप-सी के 619 रिक्त पद भरे जाएंगे। उन्होंने कहा कि इन 619 पदों में प्रत्यक्ष भर्ती तथा पदोन्नति (प्रमोशन) कोटे का संतुलित और रणनीतिक समावेश किया गया है।

वित्त मंत्री के अनुसार, कुल 220 पद ऐसे हैं जो एक वर्ष से कम समय से रिक्त हैं, जबकि 346 पद पदोन्नति कोटे के लिए आरक्षित किए गए हैं, ताकि प्रशिक्षित दाई (ट्रेंड दाई) कैडर के पात्र कर्मचारियों को मल्टीपरपज़ हेल्थ वर्कर (महिला) के रूप में पदोन्नत किया जा सके।

उन्होंने आगे बताया कि प्रत्यक्ष भर्ती के 53 पद, जो एक वर्ष से अधिक समय से रिक्त थे और वित्त विभाग के 6 जून 2019 के दिशा-निर्देशों के अनुसार समाप्त कर दिए गए थे, उन्हें मंत्रिमंडल की आवश्यक स्वीकृति प्राप्त कर औपचारिक तौर पर पुनः बहाल किया जाएगा।

वित्त मंत्री चीमा ने कहा, “इस पहल के तहत स्वास्थ्य कर्मियों की नियुक्ति ‘पंजाब स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तकनीकी (ग्रुप-सी) सेवा (प्रथम संशोधन) नियम, 2025’ के अनुसार लेवल-3 के 21,700 से 69,100 रुपये के वेतनमान में की जाएगी। भर्ती प्रक्रिया को शीघ्र पूरा करने के लिए राज्य सरकार ने इन 619 पदों को पंजाब अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड के अधिकार क्षेत्र से बाहर रखने का निर्णय लिया है। इसके स्थान पर पूरी भर्ती प्रक्रिया बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज़, फरीदकोट के माध्यम से संचालित की जाएगी। इस संबंध में 3 दिसंबर 2025 को अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड द्वारा औपचारिक सहमति और स्वीकृति पहले ही प्रदान की जा चुकी है।”

उन्होंने कहा कि इन पदों को भरने से परिवीक्षा अवधि (प्रोबेशन पीरियड) के दौरान राज्य सरकार पर लगभग 16.12 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वार्षिक वित्तीय भार आएगा।

उद्योग क्षेत्र में प्रशासनिक सुधारों का उल्लेख करते हुए वित्त मंत्री एडवोकेट हरपाल सिंह चीमा ने बताया कि कार्यकुशलता बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण प्रत्यक्ष भर्ती कैडरों को पुनर्जीवित करने संबंधी उद्योग विभाग के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2020 में हुए पुनर्गठन के दौरान उद्योग विभाग ने अपनी कुल 1,728 स्वीकृत पदों में से 721 पद समर्पित (सरेंडर) कर दिए थे, जिससे विभाग की संगठनात्मक क्षमता में लगभग 42 प्रतिशत की कमी आ गई थी और ग्रुप-ए, ग्रुप-बी तथा ग्रुप-सी में केवल 825 स्वीकृत पद ही शेष रह गए थे।

वित्त मंत्री ने कहा कि यदि कर्मचारियों की संख्या में और कटौती होती है तो इससे विभाग के कार्यों तथा जमीनी स्तर पर सेवाओं की आपूर्ति पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। इसलिए उद्योग विभाग को वर्तमान वित्तीय वर्ष के दौरान अधिकतम 97 पदों के लिए भर्ती विज्ञापन जारी करने की अनुमति दी गई है।

इसके साथ ही उन्होंने उद्योग विभाग को निर्देश दिए कि वह तत्काल एक व्यापक एवं आधुनिक पुनर्गठन समीक्षा तैयार करे, जिसमें विभाग की वर्तमान प्रशासनिक जिम्मेदारियों और कार्यों का वास्तविक आकलन प्रस्तुत किया जाए। इसके बाद इस समीक्षा को दीर्घकालिक योजना के लिए वित्त विभाग को औपचारिक प्रस्ताव के रूप में भेजा जाएगा।

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CM भगवंत सिंह मान की अगुवाई में पंजाब कैबिनेट द्वारा ‘एस.आई.आर.’ को सुगम बनाने के लिए प्रमुख नागरिक सेवाओं की सरकारी फीस माफ

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मतदाता सूचियों के चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एस.आई.आर.) की प्रक्रिया को और अधिक सुगम बनाने तथा नागरिकों को बिना किसी वित्तीय बोझ के आवश्यक दस्तावेज प्राप्त कराने को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की अध्यक्षता में पंजाब कैबिनेट ने 1 जुलाई से 30 सितंबर, 2026 तक कई प्रमुख नागरिक सेवाओं के लिए सरकारी फीस और सुविधा शुल्क माफ करने को मंजूरी दे दी है।

इस संबंध में निर्णय मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट बैठक के दौरान लिया गया।

एस.आई.आर. के दौरान प्रमुख नागरिक सेवाओं के लिए सरकारी फीस माफ

इस संबंध में जानकारी साझा करते हुए मुख्यमंत्री कार्यालय ने बताया कि कैबिनेट ने मतदाता सूचियों के चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एस.आई.आर.) की सुविधा के लिए तीन महीनों की अवधि हेतु कई प्रमुख नागरिक सेवाओं की सरकारी फीस और फैसिलिटेशन चार्जेज़ माफ करने को मंजूरी दे दी है।

इसके तहत जिन आवश्यक नागरिक सेवाओं में छूट दी जाएगी, उनमें जाति प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, जन्म प्रमाण पत्र, दसवीं और बारहवीं कक्षा के डुप्लीकेट प्रमाण पत्र जारी करना आदि सेवाएं शामिल हैं। यह लाभ 1 जुलाई से 30 सितंबर, 2026 तक सेवा केंद्रों, घर के नजदीक उपलब्ध सेवाओं तथा ऑनलाइन नागरिक सेवाएं पोर्टल के माध्यम से प्रदान की जाने वाली सेवाओं पर उपलब्ध होगा।

संबंधित प्रशासनिक विभागों को इस निर्णय को लागू करने के लिए सभी आवश्यक सूचनाएं, निर्देश तथा संचालन संबंधी दिशा-निर्देश जारी करने के लिए अधिकृत किया गया है। सुशासन एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग को अन्य संबंधित विभागों के साथ मिलकर इस प्रस्ताव को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए आवश्यक सभी कार्रवाई करने हेतु भी अधिकृत किया गया है।

इन तीन महीनों के दौरान सरकारी फीस और सुविधा शुल्क में दी जाने वाली छूट का पूरा खर्च पंजाब सरकार द्वारा वहन किया जाएगा।

इस दौरान कैबिनेट मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि निर्वाचन आयोग द्वारा कराए जा रहे मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण के परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में नागरिकों को संबंधित अधिकारियों के समक्ष जमा कराने के लिए निवास प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, जन्म प्रमाण पत्र तथा शैक्षणिक प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेजों की आवश्यकता है। उन्होंने कहा, “भगवंत मान सरकार ने 1 जुलाई से 30 सितंबर, 2026 तक इन सेवाओं के लिए सरकारी फीस और सुविधा शुल्क माफ करने का निर्णय लिया है। यह फैसला इसलिए लिया गया है ताकि एस.आई.आर. प्रक्रिया के दौरान आवश्यक दस्तावेज प्राप्त करते समय किसी भी नागरिक पर कोई वित्तीय बोझ न पड़े।”

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