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Importance of the ‘Generation Gap’ Between Generations Changing Over Time
“Generation Gap – आजकल ये शब्द हर पीढ़ी की जुबान पर है और ट्रेंड में भी है। यह शब्द न केवल एक अंतर को दर्शाता है, बल्कि हमारे समाज में विविधता की भी प्रतीक है।
जनरेशन गैप का मतलब है, हर एक पीढ़ी के बीच में विचारों, सोच, व्यवहारों, और आदतों में अंतर। एक पीढ़ी के लोग अपने समय में बड़े हुए हैं, उनकी सोच और आदतें उस समय के आधार पर बनी होती हैं, जबकि दूसरी पीढ़ी के लोग नए तकनीकी उत्पादों, विचारों और समाजिक परिवर्तनों के साथ पले हैं।
उदाहरण के रूप में, हमारे माता-पिता को फीचर फोन्स की ज़रूरत नहीं थी, लेकिन हमें अब स्मार्टफोन की आवश्यकता होती है। यह सिर्फ एक तकनीकी उदाहरण नहीं है, बल्कि यह दिखाता है कि हर पीढ़ी के लोगों के जीवनशैली और आदतें कैसे बदल रही हैं।
जनरेशन गैप के अंतर को समझना और समाज में समाहित होना महत्वपूर्ण है। यह हमें विविधता को समझने और समाज को समृद्ध बनाने में मदद करता है। हमें यह समझना चाहिए कि जो अंतर हम देख रहे हैं, वह सिर्फ भिन्नता है, न कि अच्छाई या बुराई। हर पीढ़ी ने समाज में एक मूल्यवान योगदान दिया है, और हमें इसे सम्मान और समझ के साथ स्वीकार करना चाहिए।
जनरेशन गैप शब्द विकसित कैसे हुआ?
जनरेशन गैप की विकास की प्रक्रिया में कई कारक शामिल हैं। देखा जाए तो, यह शब्द उस समय के सामाजिक परिवेश और सांस्कृतिक परिवर्तन का परिणाम है जब नई पीढ़ियों ने परंपरागत मान्यताओं और सिद्धांतों पर प्रश्न उठाने शुरू किए।
जनरेशन गैप का पहला उल्लेख 1960 के दशक में हुआ था, जब युवा पीढ़ी और उनके माता-पिता के विचार में अंतर पाया गया। इसके बाद, हर जनरेशनों को विशिष्ट करने के लिए विभिन्न शब्दों का उपयोग किया जाना शुरू हुआ, जैसे ‘बूमर’ और ‘जनरेशन एक्स’।
इसके बाद, 1981 से 1996 के बीच जन्में लोगों को ‘मिलेनियल्स’ कहा गया। यह वह पीढ़ी है, जिसने अपने जीवन में सबसे ज्यादा बदलावों को देखा और सीखा है। तकनीकी और सामाजिक बदलावों के साथ जीवन को बदलते देखा है।
जनरेशन गैप से व्यवसायों पर क्या प्रभाव पड़ रहा है?
Generation Gap का व्यावसायिक संगठनों पर गहरा प्रभाव पड़ रहा है। अलग-अलग पीढ़ियों के बीच आर्थिक, सामाजिक, और तकनीकी मतभेद हो रहे हैं, जिसके कारण व्यवसायों को नए तरीके से सोचने और काम करने की आवश्यकता है।
21वीं सदी के नवाचार और 20वीं सदी की परंपरागत सोच के बीच एक अंतर बन गया है, जिससे व्यवसायिक उद्यमों को अपनी रणनीति को समझने की जरूरत है।
मिलेनियल्स और जेन-जेक्स को व्यापारिक दृष्टिकोण में शामिल करने के लिए, उन्हें सामाजिक मीडिया, डिजिटल मार्केटिंग, और उनके आवश्यकताओं के आधार पर उत्पादों और सेवाओं को अपडेट करने की जरूरत है।
वर्तमान में सभी पीढ़ियो को छ: समूहों में बांटा गया है:
सबसे अधिक पुरानी पीढ़ी (Greatest Generation): यह वह पीढ़ी है जो World War II के दौरान और उसके बाद जन्मी थी। इस पीढ़ी के लोग अद्भुत संघर्षशीलता, साहस, और समर्पण के प्रतीक हैं। उन्होंने अपने दौर में विश्व के सबसे बड़े और महत्वपूर्ण इतिहास के घटनाक्रमों को देखा। वे समर्पित थे और समाज के लिए काम करने के लिए तैयार थे। इन्होंने अपने परिवार और समाज को विकसित करने के लिए कठिनाईयों का सामना किया।
शांत पीढ़ी (Silent Generation): 1928 से 1945 तक के बीच जन्मे ये लोग नियमों का पालन करने और लोगों का सम्मान करने में विश्वास रखते थे। इस पीढ़ी के लोग विश्व युद्ध और आर्थिक मंदी के दौर से गुजरे हैं। इस पीढ़ी के अधिकांश लोगों को आधुनिक उपकरण और तकनीक रोमांचक नहीं लगती क्योंकि वे पारंपरिक जीवन शैली जीते आए हैं।
बेबी बूमर्स (Baby boomers): 1946 से 1964 तक के बीच जन्मी इस पीढ़ी के लोगों में नौकरी और करियर का महत्वपूर्ण स्थान था, और उन्होंने अपने जीवन में उन्नति के लिए कड़ी मेहनत की। इस पीढ़ी के लोग सामाजिक और राजनीतिक बदलावों के लिए जाने जाते है।
जनरेशन एक्स (Generation X): 1965 से 1980 तक के बीच जन्मी इस पीढ़ी के लोग ने अक्सर तकनीकी उन्नति के साथ-साथ सामाजिक परिवर्तनों का सामना किया है, यह पर्सनल और केबल टेलीविजन के साथ बड़ी होने वाली पहली पीढ़ी थी, इस प्रकार यह तकनीक प्रेमी बन गई।
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मिलेनियल्स (Millennials): 1981 से 1996 तक के बीच जन्मी ये पीढ़ी इंटरनेट और सोशल मीडिया के विकास के साथ बड़े हुई। ये पीढ़ी डिजिटल टेक्नॉलजी को अपनाने वाली पहली पीढ़ी थी। मिलेनियल्स को टेक्नॉलजी का उपयोग करने का पहला अनुभव मिला, जबकि पिछली पीढ़ी के लोग, यानी पुरानी पीढ़ी, को इसमें कठिनाई होती है।
जनरेशन जेड (Generation Z): 1997 और 2012 के बीच जन्मी इस पीढ़ी के लोग तकनीकी उन्नति के दौर में बड़े हो रहे हैं और सोशल मीडिया और इंटरनेट से प्रभावित है। ये लोग सामाजिक सद्भावना, समानता, और स्वतंत्रता की महत्वाकांक्षा रखते हैं। वे सामाजिक और तकनीकी उपायों का सही उपयोग करके समाज में परिवर्तन लाना चाहते है।
अगर हम सभी पीढ़ियों को देखें, तो प्रत्येक पीढ़ी ने अपने समय में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। बाद में आने वाली पीढ़ियों ने भी अपने समय में तकनीकी और सामाजिक परिवर्तनों में अपना योगदान दिया। सम्ग्र रूप में, हर पीढ़ी की विशेषताएं और महत्व हैं, और समाज में समर्थन, सहयोग, और समझौते के माध्यम से हम सभी एक-दूसरे का सम्मान कर सकते हैं और साथ में आगे बढ़ सकते हैं ताकि आने वाले समय को एक नया आकार दे सकें।
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अब 10 मिनट में डिलीवरी बंद, सरकार ने टाइम लिमिट की शर्त हटाई
10-मिनट डिलीवरी के दावे पर केंद्र सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। गिग वर्कर्स की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए सरकार ने क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स को डिलीवरी के लिए तय की गई सख्त टाइम लिमिट हटाने की सलाह दी है।
केंद्रीय श्रम मंत्री ने की बड़ी बैठक
जानकारी के मुताबिक, केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मांडविया ने मंगलवार को ब्लिंकिट, जेप्टो, स्विगी और जोमैटो के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की। इस दौरान उन्होंने गिग वर्कर्स की सड़क सुरक्षा और काम के दबाव का हवाला देते हुए 10-मिनट जैसी सख्त डिलीवरी समयसीमा को हटाने की सलाह दी।
विज्ञापनों से हटेगा 10-मिनट डिलीवरी क्लेम
बैठक के बाद कंपनियों ने सरकार को भरोसा दिलाया कि वे डिलीवरी टाइम लिमिट को अपने विज्ञापनों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से हटा देंगी। सरकार का मानना है कि तय समय में डिलीवरी का दबाव वर्कर्स को जोखिम भरे तरीके से काम करने के लिए मजबूर करता है।
ब्लिंकिट ने उठाया तुरंत कदम
केंद्रीय मंत्री की सलाह के बाद ब्लिंकिट ने तत्काल प्रभाव से अपने ब्रांड प्लेटफॉर्म से 10-मिनट डिलीवरी का दावा हटा दिया है। इसका मतलब है कि अब कंपनी डिलीवरी के लिए किसी तय समयसीमा को फिक्स नहीं करेगी।
कोरोना के बाद तेजी से बढ़ा क्विक कॉमर्स
कोरोना महामारी के बाद 10-मिनट डिलीवरी यानी क्विक कॉमर्स का चलन तेजी से बढ़ा है। इस मॉडल के तहत प्लेटफॉर्म शहरों के अलग-अलग इलाकों में डार्क स्टोर्स बनाकर राइडर्स के जरिए कुछ ही मिनटों में डिलीवरी करते हैं। फिलहाल इस सेक्टर में ब्लिंकिट, जेप्टो, बिगबास्केट, फ्लिपकार्ट और स्विगी जैसे बड़े प्लेयर्स सक्रिय हैं।
पारंपरिक कॉमर्स से अलग है क्विक कॉमर्स
क्विक कॉमर्स पारंपरिक कॉमर्स से काफी अलग है। जहां पारंपरिक कॉमर्स में उत्पादों की डिलीवरी में कई दिन लग जाते हैं, वहीं क्विक कॉमर्स में यही काम कुछ मिनटों में पूरा करने का दावा किया जाता है।
वर्किंग कंडीशंस को लेकर पहले भी हुआ था विरोध
हाल ही में नए साल के मौके पर क्विक कॉमर्स डिलीवरी पार्टनर्स ने कठिन कामकाजी परिस्थितियों, कम वेतन और प्रतिकूल माहौल को लेकर हड़ताल भी की थी। इन घटनाओं के बाद गिग वर्कर्स की सुरक्षा और अधिकारों को लेकर बहस और तेज हो गई है।
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पहली बार चांदी 2 लाख पार, एक साल में भाव दोगुने, सोना भी रिकॉर्ड स्तर पर
चांदी आज यानी 17 दिसंबर को पहली बार 2 लाख रुपए प्रति किलो के पार निकल गई है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार एक किलो चांदी की कीमत 8,775 रुपए बढ़कर 2,00,750 रुपए पर पहुंच गई है। इससे पहले ये 1,91,977 रुपए पर थी।
18 मार्च को चांदी पहली बार 1 लाख रुपए पर पहुंची थी। यानी चांदी को 1 लाख से 2 लाख रुपए प्रति किलो तक पहुंचने में सिर्फ 9 महीने का समय लगा। जबकि इसे 50 हजार से 1 लाख रुपए तक पहुंचने में 14 साल लगे थे। मौजूदा कीमत के साथ चांदी अब ऑल-टाइम हाई पर है
चांदी में तेजी के 4 बड़े कारण
- इंडस्ट्रियल डिमांड – सोलर, इलेक्ट्रॉनिक्स और EV में भारी इस्तेमाल, चांदी अब सिर्फ ज्वेलरी नहीं, जरूरी कच्चा माल बन गई है।
- ट्रंप का टैरिफ डर – अमेरिकी कंपनियां चांदी का भारी स्टॉक जमा कर रही हैं, ग्लोबल सप्लाई में कमी से कीमतें ऊपर चढ़ीं।
- मैन्युफैक्चरर होड़ में – प्रोडक्शन रुकने के डर से सभी पहले से खरीद रहे हैं, इसी वजह से आने वाले महीनों में भी तेजी बनी रहेगी।
- चांदी में निवेश बढ़ रहा: निवेशक सिल्वर ETF के जरिए चांदी में निवेश कर रहे हैं। इससे चांदी की डिमांड बढ़ रही है।
सोना 936 रुपए बढ़कर 1.32 लाख रुपए पहुंचा
आज 24 कैरेट शुद्धता वाला सोना भी 936 रुपए बढ़कर 1,32,713 रुपए प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया है। इससे पहले ये कल यानी, 16 दिसंबर को 1,31,777 रुपए पर था। वहीं सोने ने 15 दिसंबर को 1,33,442 रुपए प्रति 10 ग्राम का ऑल टाइम हाई बनाया था।
इस साल सोना ₹56,551 और चांदी ₹1,14,733 महंगी हुई
- इस साल अब तक सोने की कीमत 56,551 रुपए बढ़ी है। 31 दिसंबर 2024 को 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 76,162 रुपए का था, जो अब 1,32,713 रुपए हो गया है।
- चांदी का भाव भी इस दौरान 1,14,733 रुपए बढ़ गया है। 31 दिसंबर 2024 को एक किलो चांदी की कीमत 86,017 रुपए थी, जो अब 2,00,750 रुपए प्रति किलो हो गई है।
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सोना ₹1.33 लाख के रिकॉर्ड स्तर पर: सोना ₹1.33 लाख के ऑलटाइम हाई पर, चांदी ₹2,958 गिरी
सोने-चांदी की कीमत रुकने का नाम ही नहीं ले रही है. सोना अपने ऑल टाइम हाई की सीमा को पार करते हुए नया रिकॉर्ड बना चुका है. चांदी की कीमत अपने पहली बार 2 लाख रुपये के आंकड़े को पार कर गई है. सोने-चांदी की इस ब्रेक फेल कीमत ने जहां खरीदारों की चिंता बढ़ा दी है, वहीं एक्सपर्ट को इसे खतरे की घंटी मान रहे हैं.
सोना के दाम में आज यानी 15 दिसंबर को ऑल टाइम हाई पर पहुंच गए हैं। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, 10 ग्राम सोने की कीमत 732 रुपए बढ़कर 1,33,442 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गई है। इससे पहले ये 1,32,710 रुपए पर था।
वहीं, चांदी के दाम में आज गिरावट है। 2,958 रुपए गिरकर 1,92,222 रुपए किलो हो गई है। इससे पहले ये 1,95,180 रुपए पर थी। ये इसका ऑल टाइम हाई भी है।
अलग-अलग शहरों में रेट्स अलग क्यों होते हैं?
IBJA की सोने की कीमतों में 3% GST, मेकिंग चार्ज, ज्वेलर्स मार्जिन शामिल नहीं होता। इसलिए शहरों के रेट्स इससे अलग होते हैं। इन रेट्स का इस्तेमाल RBI सोवरेन गोल्ड बॉन्ड के रेट तय करने के लिए करता है। कई बैंक गोल्ड लोन के रेट तय करने के लिए इसे इस्तेमाल करते हैं।
इस साल सोना ₹57,280 और चांदी ₹1,06,205 महंगी हुई
- इस साल अब तक सोने की कीमत 57,280 रुपए बढ़ी है। 31 दिसंबर 2024 को 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 76,162 रुपए का था, जो अब 1,33,442 रुपए हो गया है।
- चांदी का भाव भी इस दौरान 1,06,205 रुपए बढ़ गया है। 31 दिसंबर 2024 को एक किलो चांदी की कीमत 86,017 रुपए थी, जो अब 1,92,222 रुपए प्रति किलो हो गई है।
गोल्ड में तेजी के 2 प्रमुख कारण
- जियोपॉलिटिकल – रूस-यूक्रेन जंग और दुनिया में तनाव बढ़ने से निवेशक सोने को सबसे सुरक्षित निवेश मानकर खरीद रहे हैं।
- रिजर्व बैंक – चीन जैसे देश अपने रिजर्व बैंक में सोना भर रहे हैं, ये सालभर में 900 टन से ज्यादा खरीदारी कर रहे हैं, इसलिए दाम ऊपर जा रहे हैं।
सोना खरीदते समय इन 2 बातों का रखें ध्यान
1. सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें: हमेशा ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) का हॉलमार्क लगा हुआ सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें। ये नंबर अल्फान्यूमेरिक यानी कुछ इस तरह से हो सकता है- AZ4524। हॉलमार्किंग से पता चलता है कि सोना कितने कैरेट का है।
2. कीमत क्रॉस चेक करें: सोने का सही वजन और खरीदने के दिन उसकी कीमत कई सोर्सेज (जैसे इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन की वेबसाइट) से क्रॉस चेक करें। सोने का भाव 24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट के हिसाब से अलग-अलग होता है।
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