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देश में शादी से पहले लड़कों का डोप और medical test होगा जरूरी! जानें- क्यों शुरु हुई ये चर्चा?

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आम आदमी पार्टी के सांसद मालविंदर सिंह कांग ने देश की बेटियों और बहनों की सुरक्षा से संबंधित एक बेहद गंभीर और संवेदनशील मुद्दा उठाया। उन्होंने समाज में तलाक और घरेलू हिंसा के बढ़ते मामलों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए केंद्र सरकार से विवाह संबंधी कानूनों में कड़े सुधार लाने का आग्रह किया।

संसद को संबोधित करते हुए मालविंदर सिंह कांग ने कहा कि हमारे देश में विवाह टूटने और परिवार बिखरने की प्रवृत्ति लगातार बढ़ रही है। उन्होंने आगे कहा कि यह समस्या केवल पंजाब तक ही सीमित नहीं है, बल्कि पूरे देश के परिवारों को प्रभावित कर रही है।

समाज में व्याप्त दोहरे मापदंडों पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि शादी से पहले हम लड़की की शिक्षा, चरित्र और पारिवारिक पृष्ठभूमि की बारीकी से जांच करते हैं, लेकिन लड़के के मामले में हम आंखें मूंद लेते हैं। शादी के बाद पुरुषों में सामने आने वाले मादक पदार्थों का सेवन, गंभीर बीमारियां और आपराधिक प्रवृत्ति जैसी समस्याएं अनगिनत जिंदगियों को बर्बाद कर रही हैं।

कांग ने भारत सरकार और सभी राज्य सरकारों से इस दिशा में तत्काल और कड़े कदम उठाने की अपील की। ​​उन्होंने मांग की कि विवाह प्रमाण पत्र जारी करने से पहले दूल्हे का ‘डोप टेस्ट’ अनिवार्य किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि शादी से पहले दूल्हे के लिए ‘मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट’ कानूनी रूप से अनिवार्य किया जाए।

कांग ने कहा कि यह छोटा सा सुधार हमारे देश की महिलाओं के लिए एक बड़ा सुरक्षा कवच साबित हो सकता है।

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पीएम की सलाह आर्थिक इमरजेंसी की आहट?- केजरीवाल

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आम आदमी पार्टी ने प्रधानमंत्री की ओर से देशवासियों को पेट्रोल, डीजल, खाद्य तेल का कम इस्तेमाल करने और सोने समेत अन्य कीमतीे चीजें खरीदने में कटौती करने की सलाह देने पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी ने सवाल किया है कि कहीं देश भारी आर्थिक संकट में तो नहीं फंस गया है। ‘‘आप’’ के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा कि पीएम ने देश के सभी नागरिकों को खाने-पीने, घूमने- फिरने और विदेश यात्राओं में कटौती करने की सलाह दी है। साथ ही, सोना और अन्य कीमती चीज़ें खरीदने में भी कटौती करने की सलाह दी है। उन्होंने पूछा है कि क्या यह देश में आर्थिक इमरजेंसी की आहट है? क्या देश भारी आर्थिक संकट में फंस गया है? ऐसा तो देश में पहले कभी नहीं हुआ। प्रधानमंत्री को देश के सामने सच्चाई रखनी चाहिए। आखिर देश की असली आर्थिक हालत क्या है?

उधर, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने भी स्वदेशी अपनाने और विदेशी चीजें कम से कम खरीदने की सलाह पर प्रधामंत्री पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री शब्दों के उस्ताद हैं, लेकिन उनको देश के सामने सच बोलना चाहिए। यह सर्वविदित है कि मौजूदा समय में भारत की डोर व्हाइट हाउस के हाथों में है, क्योंकि हर फैसला व्हाइट हाउस की सहमति से ही लिया जा रहा है। भारत-पाकिस्तान युद्ध जैसे मुद्दों में भी सीज फायर की घोषणा अमेरिकी अधिकारियों की ओर से की गई थी, जो देश की संप्रभुता पर एक गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।

सीएम भगवंत सिंह मान ने कहा कि भले ही देश के शासक विश्व गुरु होने का दावा करते हैं, लेकिन हकीकत यह है कि वे विश्व चेला बनने की ओर बढ़ रहे हैं क्योंकि व्हाइट हाउस के आदेशों का आंख मूंदकर पालन किया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने मेक इन इंडिया को लेकर बड़े-बड़े दावे किए थे, लेकिन रक्षा क्षेत्र तक में एफडीआई जैसे उनके कदमों ने देश को बर्बाद कर दिया है। भगवंत मान ने आगाह किया कि प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौता भारतीय कृषि को और अधिक नुकसान पहुंचा सकता है।

देश के युवाओं को पेपर लीक के खिलाफ निर्णायक लड़ाई छेड़नी होगी- केजरीवाल

अरविंद केजरीवाल ने नीट परीक्षा का पेपर लीक होने पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि हर साल 7 करोड़ युवा इंजीनियरिंग, मेडिकल कॉलेजों में दाखिले और सरकारी नौकरियों के लिए परीक्षाएँ देते हैं। लेकिन राजनीतिक संरक्षण में चल रहे पेपर लीक गिरोह इन युवाओं का भरोसा और हौसला तोड़ रहे हैं। पेपर लीक में शामिल माफिया और उन्हें संरक्षण देने वाले नेता देश के दुश्मन हैं। ये लोग देश की नींव को खोखला कर रहे हैं। सरकारें इस अपराध की साझेदार बन चुकी हैं। इसके खिलाफ युवाओं को देशभर में एक निर्णायक लड़ाई छेड़नी होगी।

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‘एक साल तक सोना न खरीदें’ PM मोदी की बड़ी अपील

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हाल ही में हैदराबाद में एक रैली के दौरान देशवासियों से एक साल तक गैर-जरूरी सोने की खरीद से बचने की अपील किए जाने के बाद देशभर की ज्वेलरी इंडस्ट्री में चर्चा और चिंता का माहौल बन गया है। PM मोदी ने देश की आर्थिक स्थिति, विदेशी मुद्रा भंडार पर बढ़ते दबाव और वैश्विक संकटों को ध्यान में रखते हुए लोगों से सोने की खरीद कम करने और “मेड इन इंडिया” उत्पादों को प्राथमिकता देने की अपील की थी।

इस बयान के बाद दिल्ली और देशभर के व्यापारियों एवं उद्यमियों के संगठन ‘चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री’ (CTI) ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। CTI के चेयरमैन बृजेश गोयल ने कहा कि प्रधानमंत्री की अपील के बाद ज्वेलरी और सोने के कारोबार से जुड़े सैकड़ों व्यापारियों ने चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि इस तरह की अपीलों से ग्राहकों में असमंजस और डर का माहौल बन सकता है, जिसका सीधा असर सोने की बिक्री पर पड़ सकता है।

CTI के अनुसार चीन के बाद भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोना उपभोक्ता देश है। मौजूदा आंकड़ों के मुताबिक भारत में हर साल करीब 700 से 800 टन सोने की खपत होती है। यदि लोग प्रधानमंत्री की अपील को बड़े स्तर पर मानते हैं तो देश में सोने की मांग 800 टन से घटकर लगभग 500 टन तक आ सकती है। व्यापारियों का मानना है कि इससे ज्वेलरी बाजार में बड़ी मंदी आ सकती है।

ज्वेलर्स ने खास तौर पर चिंता जताई है कि यह अपील ऐसे समय पर आई है जब देश में शादी-विवाह का सीजन चरम पर है। भारत में शादी समारोहों के दौरान सोने की खरीद को पारंपरिक और सांस्कृतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में यदि ग्राहक सोने की खरीद से पीछे हटते हैं तो इसका बड़ा असर छोटे ज्वेलर्स से लेकर बड़ी ज्वेलरी कंपनियों तक सभी पर पड़ सकता है।

CTI ने यह भी कहा कि इस अपील का असर सिर्फ बाजार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि शेयर बाजार में सूचीबद्ध बड़ी ज्वेलरी कंपनियों के शेयरों पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। निवेशकों की चिंता के कारण ज्वेलरी सेक्टर के स्टॉक्स में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

व्यापारिक संगठनों का कहना है कि ज्वेलरी इंडस्ट्री देश की अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा है, जिससे लाखों लोगों की रोजी-रोटी जुड़ी हुई है। इसलिए उद्योग को मजबूत बनाए रखने के लिए संतुलित नीतियां और स्पष्ट संदेश बेहद जरूरी हैं। अब ज्वेलरी कारोबार से जुड़े व्यापारी नई रणनीतियों और ग्राहकों को आकर्षित करने के नए तरीकों पर काम करने की तैयारी कर रहे हैं।

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एनर्जी लॉकडाउन : पश्चिम एशिया संकट के बीच PM मोदी की अपील, कारपूलिंग और वर्क फ्रॉम होम अपनाने को कहा

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पश्चिम एशिया में बने तनावपूर्ण हालातों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से ईंधन बचत और आर्थिक संतुलन बनाए रखने के लिए “कोविड काल जैसी सावधानियां” अपनाने की अपील की है। हैदराबाद में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने लोगों से कारपूलिंग, वर्क फ्रॉम होम और वर्चुअल मीटिंग्स को बढ़ावा देने की बात कही।

प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया भर में जारी संघर्ष और सप्लाई चेन में आ रही बाधाओं के कारण महंगाई और आर्थिक दबाव बढ़ रहा है। उनके मुताबिक देश के हर नागरिक की जिम्मेदारी है कि वह ईंधन की खपत कम करके और संसाधनों का समझदारी से इस्तेमाल करके देश की मदद करे।

उन्होंने लोगों से जहां संभव हो मेट्रो और सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करने की अपील की। यदि निजी वाहन का उपयोग जरूरी हो तो कारपूलिंग को प्राथमिकता देने की बात भी कही गई। इसके अलावा रेल मार्ग के जरिए माल ढुलाई बढ़ाने और इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल को प्रोत्साहित करने की भी अपील की गई।

नरेंद्र मोदी ने कहा कि कोविड के दौरान अपनाए गए कई तरीके आज भी देशहित में फायदेमंद साबित हो सकते हैं। उनके मुताबिक वर्क फ्रॉम होम, ऑनलाइन कॉन्फ्रेंस और वर्चुअल मीटिंग्स के जरिए ईंधन की खपत कम की जा सकती है, जिससे आर्थिक दबाव घटाने में मदद मिलेगी।

प्रधानमंत्री ने विदेश यात्राओं से बचने की सलाह भी दी। उन्होंने कहा कि गैर-जरूरी विदेश दौरे, विदेशी छुट्टियां और विदेशों में होने वाले कार्यक्रमों को कम किया जाना चाहिए ताकि देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव न बढ़े। उन्होंने लोगों से देश के भीतर ही पर्यटन और कार्यक्रमों को प्राथमिकता देने की अपील की।

इसके साथ ही उन्होंने एक साल तक गैर-जरूरी सोने की खरीद से बचने की भी बात कही। प्रधानमंत्री ने लोगों से “मेड इन इंडिया” और स्थानीय स्तर पर बने उत्पादों का ज्यादा इस्तेमाल करने को कहा। उन्होंने रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले जूते, बैग और अन्य सामान देश में बने उत्पादों में से खरीदने की अपील की।

खाने वाले तेल की खपत कम करने पर भी प्रधानमंत्री ने जोर दिया। उन्होंने कहा कि इससे न सिर्फ देश की आर्थिक स्थिति को फायदा होगा, बल्कि लोगों की व्यक्तिगत सेहत पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा। किसानों को संबोधित करते हुए उन्होंने रासायनिक खादों का इस्तेमाल 50 फीसदी कम करने और प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ने की अपील की।

दूसरी ओर कांग्रेस ने प्रधानमंत्री के इस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस नेता के.सी. वेणुगोपाल ने ईंधन बचत और राशनिंग जैसी अपीलों को “लापरवाह” बताया। उनका कहना है कि चुनावों और राजनीतिक फायदे को प्राथमिकता देने के कारण देश आर्थिक चुनौतियों की ओर बढ़ रहा है।

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