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हरियाणा NCR में डीजल-पेट्रोल कॉमर्शियल वाहनों पर लगेगी रोक:1 जनवरी से लागू होंगे नियम; मोटर कैब- डिलीवरी वाहन CNG/EV में बदलने जरूरी

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राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के अंतर्गत आने वाले हरियाणा के जिलों में सरकार कॉमर्शियल वर्क के लिए चल रहे पेट्रोल और डीजल के वाहनों पर रोक लगाने की तैयारी में है। संबंधित कंपनियों और ट्रांसपोर्टरों को हिदायत दी गई है कि 1 जनवरी 2026 से वे अपने बेड़े में केवल सीएनजी, इलेक्ट्रिक या हाइब्रिड ऑटो रिक्शा को ही शामिल करें। सरकार ने इसको लेकर प्रभावित लोगों से एक सप्ताह में सुझाव भी मांगे हैं।

जानकारी के अनुसार, फरीदाबाद, गुरुग्राम, झज्जर और सोनीपत जिलों में डीजल-पेट्रोल से चलने वाले व्यवसायिक वाहनों को लेकर बड़ा निर्णय लिया गया है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के निर्देश संख्या 94 के तहत अब मोटर कैब, टैक्सी, डिलीवरी सर्विस प्रोवाइडर और ई-कॉमर्स कंपनियों के वाहनों को चरणबद्ध तरीके से केवल सीएनजी, इलेक्ट्रिक या हाइब्रिड ऑटो रिक्शा में परिवर्तित करना अनिवार्य होगा।

इसके बाद किसी भी डिलीवरी कंपनी को पेट्रोल-डीजल वाली बाइक, स्कूटर, ऑटो या छोटे चारपहिया वाहन (LCV/LGV) इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं होगी। CAQM के इस निर्देश का सीधा प्रभाव स्विगी, जोमैटो, ब्लिंकिट, अमेज़न, फ्लिपकार्ट जैसी प्रमुख कंपनियों और हजारों डिलीवरी पार्टनर्स पर पड़ेगा। उन्हें जल्द ही अपनी संपूर्ण डिलीवरी फ्लीट को CNG या इलेक्ट्रिक वाहन (EV) में बदलना होगा।

जानिए क्या हैं नए नियम?

हरियाणा परिवहन आयुक्त कार्यालय द्वारा जारी सार्वजनिक सूचना के अनुसार, 1 जनवरी 2026 से निम्नलिखित बदलाव प्रभावी होंगे:

  • डिलीवरी और एग्रीगेटर्स: सभी मोटर व्हीकल एग्रीगेटर्स, ई-कॉमर्स कंपनियां और डिलीवरी सर्विस प्रोवाइडर्स अब अपने बेड़े में केवल CNG या इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर (ऑटो-रिक्शा) ही शामिल कर पाएंगे।
  • पेट्रोल-डीजल पर रोक: पारंपरिक ईंधन (पेट्रोल/डीजल) से चलने वाले किसी भी नए दोपहिया वाहन और चार पहिया LGV (N1 श्रेणी – 3.5 टन तक) को बेड़े में शामिल करने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है।
  • नियमों में संशोधन: इस बदलाव को लागू करने के लिए हरियाणा मोटर वाहन नियम, 1993 के नियम 86-A में संशोधन किया गया है।

जनता से मांगे गए सुझाव

सरकार ने इस संबंध में एक ड्राफ्ट नोटिफिकेशन (संख्या 13/9/2016-67 (1) दिनांक 11.12.2025) जारी किया है।

  • यदि किसी व्यक्ति को इन नए नियमों से कोई आपत्ति है या कोई सुझाव देना चाहता है, तो वे राजपत्र (Gazette) में प्रकाशन की तिथि से सात दिनों के भीतर अपनी राय दर्ज करा सकते हैं।
  • प्राप्त आपत्तियों और सुझावों पर हरियाणा सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव (परिवहन विभाग) द्वारा विचार किया जाएगा।
सोनीपत में डीजल ऑटो चालकों की मीटिंग लेते हुए आरटीओ सुभाष चन्द्र।

सोनीपत में डीजल ऑटो चालकों की मीटिंग लेते हुए आरटीओ सुभाष चन्द्र।

सोनीपत में नहीं चलेंगे डीजल वाले ऑटो रिक्शा

सोनीपत के जिला परिवहन अधिकारी एवं सचिव, प्रादेशिक परिवहन प्राधिकरण सुभाष चन्द्र ने बताया कि वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के उद्देश्य से सोनीपत जिले में डीजल ऑटो को श्रेणीबद्ध तरीके से बाहर किया जाएगा। इस संबंध में डीजल ऑटो मालिकों के साथ बैठक हो चुकी है।

सभी ऑटो चालकों को अवगत कराया गया कि जिले में 31 दिसंबर 2025 तक डीजल ऑटो को श्रेणीबद्ध तरीके से हटाया जाएगा और 1 जनवरी 2026 से किसी भी डीजल ऑटो के संचालन की अनुमति नहीं दी जाएगी। यह निर्णय कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) के निर्देश संख्या 70 के तहत लिया गया है, जिसका उद्देश्य एनसीआर (NCR) क्षेत्र में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करना है।

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हरियाणा CM नायब सैनी का दावा: बंगाल में भाजपा का एकतरफा माहौल, पंजाब में भी खिलेगा कमल

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भाजपा के प्रमुख स्टार प्रचारकों में शामिल हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का मानना है कि बंगाल चुनाव में पार्टी के पक्ष में एकतरफा माहौल है। दीदी जा रही हैं। जनता ने कमल खिलाने का मन बना लिया है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में किए जा रहे विकास कार्यों की चर्चा बंगाल में हर तरफ हो रही है। केंद सरकार की कल्याणकारी नीतियों को लोग पसंद कर रहे हैं। बंगाल के बाद पंजाब का नंबर है। वहां के लोगों ने भी कमल खिलाने का मन बना लिया है।

पहली बार गुरुग्राम में हुई कैबिनेट बैठक

बुधवार को हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक की अध्यक्षता करने के लिए साइबर सिटी पहुंचे मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने राजनीतिक विषयों पर किए गए सवालों के जवाब में कहा कि बंगाल का माहौल पूरी तरह बदला हुआ है। वहां की सरकार को लोगों ने पूरी तरह उखाड़ फेंकने का मन बना रखा है। जहां तक पंजाब का सवाल है तो वहां के काफी लोग उनसे मिलने आते रहते हैं।

कुछ दिन पहले भी काफी लोग मिलने पहुंचे थे। सभी वहां की सरकार से परेशान हैं। सभी चाहते हैं कि जल्द से जल्द पंजाब में कमल खिले। नारी शक्ति वंदन अधिनियम का विरोध कर विपक्ष ने देश की आधी आबादी को नाराज कर दिया है। कई देशों की जितनी आबादी नहीं है, उससे अधिक महिलाएं अपने देश में है।

इसके बाद भी उन्हें उनके अधिकारों से वंचित करने का प्रयास विपक्ष ने किया है। चुनावों में देश की जनता जवाब देगी। बंगाल या पंजाब ही नहीं बल्कि जहां पर भी चुनाव होंगे वहां महिलाएं विपक्ष को माफ नहीं करेंगी।

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जालंधर में विपक्ष पर गरजे पूर्व CM खट्टर: महिला आरक्षण विधेयक पर बोले- कांग्रेस को भुगतना पड़ेगा परिणाम

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जालंधर में केंद्रीय मंत्री और हरियाणा के पूर्व सीएम मनोहर लाल खट्टर और केंद्रीय मंत्री बेबी मोर्या ने प्रैस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। खट्टर ने कहा कि लोकसभा में महिलाओं के साथ और देश की आधी आबादी के साथ अन्याय हो रहा था। कांग्रेस सरकार ने कभी इसके बारे में नहीं सोचा।

जब कभी भी भारतीय जनता ने इस क्षेत्र में काम करना चाहता तब-तब कांग्रेस सरकार सहित अन्य पार्टियों ने अड़चन डाली। 1971-74 तक महिलाओं को आरक्षण देने के लिए काम शुरू किया गया लेकिन विपक्ष ने कोई न कोई अड़चन डाल दी। इसके बाद 1979 में पहली बार पंचायत में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्ति हुई। कुछ पंचायतों ने इसे 50 प्रतिशत तक भागीदारी दी।

2023 में नहीं लाया जा सका बिल

2023 में 128वें संशोधन के रूप में पीएम मोदी के नेतृत्व में महिला आरक्षण बिल को लाया गया। लेकिन कुछ कमियों के कारण नहीं लाया जा सका। अब फिर से मोदी सरकार ने 2029 से पहले महिला आरक्षण को लागू करने की पहल की। हमने इसका प्रारूप तैयार किया। अब फिर से विपक्ष घिनौना खेल खेल रहा है। कांग्रेस ने इस बिल पर सरकार का साथ नहीं दिया।

आरक्षण को राजनीतिक एंगल नहीं दिया जाना चाहिए

खट्टर ने कहा कि कांग्रेस को इस अपराध का परिणाम भुगतना पड़ेगा। चुनाव परिणाम के रूप में महिलाओं का गुस्सा दिखेगा। पीएम ने कहा है कि इस आरक्षण को राजनीतिक एंगल नहीं दिया जाना चाहिए। प्रधानमंत्री ने कहा कि मुझे तो इसका श्रेय भी नहीं चाहिए। अगर इसका श्रेय कोई भी लेना चाहता है तो ले ले। खट्टर ने कहा कि महिलाओं को जो राजनीति में 33 फीसदी आरक्षण मिलना था वो कांग्रेस के चलने नहीं मिल पाया है। अब ये गैर राजनीतिक मुद्दे की तरह आगे बढ़ेगा। खट्टर ने कहा कि चैन्नई के अंदर को एक विधायक ने इस विधेयक की प्रतियां तक जलाईं। तमिलनाड़ू में इसका विरोध किया।

बेबी रानी मोर्या बोलीं- महिलाएं अपमान नहीं सहतीं, वो बदला जरूर लेंगी

आगरा की पहली मेयर, पूर्व राज्यापाल और नेशनल वूमेन कमीशन चेयपर्सन रह चुकीं बेबी रानी मौर्या ने कहा कि जब ये बिल संसद में पेश हुआ। जब इस पर वोटिंग होनी थी तो विरोधी पार्टियों ने मिलकर देश की आधी आबादी के अधियनियम को गिरा दिया। ये महिलाओं को बड़ा अपमान है। महिलाएं सब सह लेती हैं लेकिन अपना अपमान नहीं सहती। महिलाएं इस अपमान का बदला आने वाले चुनाव में लेंगी।

परिवारवादी पार्टियों ने किया बिल का विरोध

पीएम मोदी ने महिलाओं के लिए शुरू से काम किया है। उज्ज्वला का सिलेंडर दिया, शौचालय दिया ताकि महिलाओं की जिंदगी आसान हो सके। महिला वंदन बिल भी इसी कड़ी का हिस्सा है। मैं आपको बताना चाहती हूं कि जब पंचायती राज में महिलाएं इतना अच्छा काम कर रही हैं। अगर ये राष्ट्रीय राजनीति में आ जातीं तो कितना अच्छा होता। मोर्या ने कहा कि सभी परिवारवारवादी पार्टियों ने इस विधेयक का विरोध किया है।

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हरियाणा सरकार का बड़ा ऐलान, क्लास-IV कर्मचारियों को मिलेगा 27 हजार का ब्याजमुक्त एडवांस, 7 मई तक करें आवेदन

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हरियाणा सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान गेहूं खरीदने के लिए नियमित क्लास-IV राज्य सरकारी कर्मचारियों (स्थायी और अस्थायी दोनों) को ₹27,000 का ब्याज-मुक्त अग्रिम (advance) देने का फैसला किया है. यह सुविधा विशेष रूप से उन कर्मचारियों के लिए उपलब्ध होगी जो अपने या अपने परिवार के उपभोग के लिए गेहूं खरीद रहे हैं.

मुख्य सचिव कार्यालय द्वारा जारी आदेश


मुख्य सचिव कार्यालय द्वारा जारी आदेशों के अनुसार, इच्छुक स्थायी/अस्थायी क्लास-IV कर्मचारी निर्धारित आवेदन पत्र भरकर 7 मई, 2026 (गुरुवार) तक लेखा और विभाजन शाखा (Accounts and Partition Branch) में जमा कर सकते हैं. आवेदन केवल शाम 4:00 बजे से शाम 5:00 बजे के बीच स्वीकार किए जाएंगे. उसके बाद कोई भी आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा. आवेदन पत्र मुख्य सचिवालय की वेबसाइट www.csharyana.gov.in से डाउनलोड किया जा सकता है.

क्या हैं मुख्य शर्तें?


अग्रिम की पूरी राशि वित्तीय वर्ष 2026-27 (31 मार्च, 2027) के अंत से पहले किस्तों में वसूल कर ली जाएगी.अस्थायी कर्मचारियों को यह अग्रिम केवल एक स्थायी कर्मचारी की जमानत (surety) देने पर ही दिया जाएगा. जिन मामलों में पति और पत्नी दोनों सरकारी सेवा में कार्यरत हैं, उनमें से केवल एक ही इस लाभ को प्राप्त करने के लिए पात्र होगा.जो कर्मचारी वर्तमान में प्रतिनियुक्ति (deputation) पर हैं, साथ ही वर्क-चार्ज, आकस्मिक, दैनिक-मजदूरी और संविदा कर्मचारी, वे इस सुविधा के लिए पात्र नहीं होंगे. अग्रिम राशि प्राप्त होने के एक महीने के भीतर, कर्मचारी को एक प्रमाण पत्र जमा करना होगा जिसमें यह पुष्टि हो कि राशि का उपयोग केवल गेहूं खरीदने के लिए किया गया है.

सरकार ने अधिकारियों को जारी किए निर्देश


यह व्यवस्था वित्त विभाग के आदेश संख्या 46/1/2011-WM(6)/1557-1562 (दिनांक 16 अप्रैल, 2026) के तहत स्थापित की गई है.वसूली की प्रक्रिया मई 2026 के वेतन (जिसका भुगतान जून में होगा) के साथ शुरू होगी.सरकार ने सभी विभागाध्यक्षों, मंडल आयुक्तों, उपायुक्तों और आहरण एवं संवितरण अधिकारियों (Drawing and Disbursing Officers) को निर्देश जारी किए हैं, जिसमें चेतावनी दी गई है कि किसी भी ऐसे संबंधित अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की जाएगी जो किसी अपात्र कर्मचारी को अग्रिम स्वीकृत करता है. खर्च से संबंधित विवरण 31 मई, 2026 तक वित्त विभाग को जमा किए जाने चाहिए.

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