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बॉर्डर जिलों अजनाला, पठानकोट, गुरदासपुर और अमृतसर में आई बाढ़ के पक्के हल के लिए धालीवाल ने उप राज्यपाल को सौंपा ज्ञापन

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आम आदमी पार्टी (आप) के अजनाला से विधायक कुलदीप सिंह धालीवाल ने गुरुवार को जम्मू-कश्मीर के उप राज्यपाल मनोज सिन्हा से मुलाकात की और पंजाब के बॉर्डर वाले जिलों पठानकोट, गुरदासपुर और अमृतसर, खासकर अजनाला सब-डिवीजन में मॉनसून के दौरान आने वाली भयंकर बाढ़ की समस्या के पक्के समाधान के लिए एक ज्ञापन सौंपा। मीटिंग के दौरान विधायक धालीवाल ने उज नदी पर एक डैम बनाने की ज़ोरदार मांग की, जिससे नदी में पानी का बहाव कंट्रोल होगा और पंजाब को बार-बार आने वाली बाढ़ की तबाही से बचाया जा सकेगा।

उप राज्यपाल से मुलाकात के बाद मीडिया से बात करते हुए विधायक कुलदीप सिंह धालीवाल ने कहा कि उज नदी के निचले इलाकों में होने की वजह से, अजनाला और उसके आस-पास के इलाकों में मॉनसून के दिनों में अचानक पानी का लेवल बढ़ने और भारी बारिश की वजह से बहुत तबाही होती है।

साल 1988 के बाद 2023, 2025 और इस साल 2026 में आई बुरी बाढ़ का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि बाढ़ का पानी खेती की ज़मीन को डुबो देता है, फ़सलों को बर्बाद कर देता है और सड़कों, स्कूलों, अस्पतालों और दूसरे इंफ्रास्ट्रक्चर को गंभीर नुकसान पहुंचाता है। इसके अलावा, बॉर्डर पर तैनात बीएसएफ और सेना के जवानों का संपर्क मार्ग टूट जाता है, जो नेशनल सिक्योरिटी के नज़रिए से भी चिंता का विषय है।

उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि राज्य सरकार हर साल इमरजेंसी बाढ़ राहत, बांधों को मज़बूत करने और ड्रेनेज सिस्टम को बेहतर बनाने पर भारी पैसा खर्च करती है, लेकिन ये उपाय सिर्फ़ कुछ समय के लिए होते हैं। इस गंभीर समस्या का पक्का हल तभी मुमकिन है जब उज नदी पर डैम बनाया जाए और पानी का सही प्रबंधन किया जाए।

विधायक धालीवाल ने उप राज्यपाल मनोज सिन्हा से अपील की कि वे इस बहुत ज़रूरी मुद्दे को प्रधानमंत्री और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री के सामने उठाएं। उन्होंने मांग की कि डैम को टेक्निकली सही जगह पर बनाने के लिए एक डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) और फ़िज़िबिलिटी स्टडी तैयार की जाए। उन्होंने कहा कि यह प्रोजेक्ट न केवल बाढ़ को कंट्रोल करेगा और मॉनसून के ज़्यादा पानी को स्टोर करेगा, बल्कि हाइड्रोइलेक्ट्रिसिटी जेनरेशन, टूरिज्म और लोकल इकॉनमी को भी बढ़ावा देगा।

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युद्ध नशेआं विरुद्ध’ अभियान के तहत पंजाब के स्कूल पूरे साल नशा विरोधी जागरूकता गतिविधियों का नेतृत्व करेंगे

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भगवंत मान सरकार के नशे के ख़िलाफ़ अभियान ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ के तहत, पंजाब भर के स्कूलों को छात्रों में नशे के दुरुपयोग के ज़ोख़िमों और दुष्परिणामों के बारे में जागरूकता पैदा करने तथा स्वस्थ और नशा-मुक्त जीवनशैली को बढ़ावा देने के लिए, योजनाबद्ध ढंग से गतिविधियों की एक व्यवस्थित श्रृंखला आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं।

स्टेट कौंसिल ऑफ़ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (SCERT) द्वारा जारी गतिविधि कैलेंडर के अनुसार, स्कूल पूरे शैक्षणिक वर्ष के दौरान छात्रों, शिक्षकों और स्कूल समुदाय के अन्य सदस्यों को शामिल करते हुए विभिन्न गतिविधियाँ आयोजित करेंगे। अगस्त महीने में छात्र नशा विरोधी संदेशों वाले पोस्टर बनाएँगे।

सितंबर महीना विशेष रूप से अभिभावकों को नशा विरोधी अभियान से जोड़ने के लिए समर्पित होगा। स्कूलों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अभिभावक-शिक्षक बैठकों (PTMs) के माध्यम से अभिभावकों को नशीले पदार्थों से जुड़े ज़ोख़िमों तथा नशे की समस्या के शुरुआती संकेतों की पहचान और समय पर हस्तक्षेप के महत्त्व के बारे में जागरूक करें।

अक्तूबर में कविता लेखन और क्विज़ प्रतियोगिताएँ आयोजित की जाएँगी। नवंबर से फरवरी तक, नशा विरोधी जागरूकता कार्यशालाएँ आयोजित करने के अलावा, स्थानीय समुदाय के सदस्यों को अपने अनुभव साझा करने के लिए आमंत्रित किया जाएगा। प्रातःकालीन सभाओं में नशा विरोधी शपथ दिलाई जाएगी और छात्रों के साथ संवादात्मक सत्र आयोजित किए जाएँगे, ताकि उन्हें नशे के ज़ोख़िमों और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के तरीकों के बारे में जागरूक किया जा सके।

स्कूलों को ड्रग-फ्री क्लब स्थापित करने के भी निर्देश दिए गए हैं, जिनमें शिक्षकों, प्रधानाचार्यों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों को सदस्य बनाया जाएगा। उन्हें रचनात्मक और संवादात्मक माध्यमों से जागरूकता गतिविधियाँ आयोजित करने के लिए भी कहा गया है, ताकि छात्र केवल पारंपरिक भाषणों तक सीमित रहने के बजाय इस मुद्दे से सक्रिय रूप से जुड़ सकें। स्वस्थ जीवनशैली और सोच-समझकर निर्णय लेने पर केंद्रित गतिविधियाँ इस कार्यक्रम का महत्त्वपूर्ण हिस्सा होंगी।

इस अभियान का एक अन्य प्रमुख उद्देश्य ऐसे शिक्षकों की पहचान करना है, जो छात्रों में नशे से जुड़ी समस्याओं से निपटने के तरीके को समझते हों। 21,000 से अधिक शिक्षकों को छात्रों में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं और नशे के सेवन के शुरुआती संकेतों की पहचान करने तथा समय रहते हस्तक्षेप करने के लिए आवश्यक क्षमता और व्यावहारिक कौशल से लैस किया जा रहा है।

इसके अलावा, स्कूल छात्रों को नशीले पदार्थों के सेवन के ज़ोख़िमों और दुष्परिणामों के बारे में शिक्षित करने के लिए वीडियो आधारित नशा विरोधी पाठ्यक्रम (एंटी ड्रग करिकुलम) का इस्तेमाल करेंगे। जागरूकता गतिविधियों के साथ-साथ स्कूलों को गुमनाम सूचना पेटियाँ लगाने के लिए भी प्रोत्साहित किया गया है, ताकि छात्र नशीले पदार्थों के संभावित सेवन या इससे जुड़े अन्य मामलों की सूचना दे सकें।

इस संबंध में, शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने कहा, “नशे के ख़िलाफ़ लड़ाई कक्षाओं से शुरू होनी चाहिए। शिक्षा और रोकथाम नशे के ख़िलाफ़ इस निर्णायक लड़ाई में हमारे सबसे शक्तिशाली हथियार हैं। जागरूकता, मूल्यों और अनुशासन के माध्यम से युवा मन की रक्षा करना ही पंजाब में नशे की समस्या को समाप्त करने का एकमात्र स्थायी रास्ता है।”

निर्देशों के तहत, स्कूलों से यह भी सुनिश्चित करने को कहा गया है कि स्कूल परिसर के आसपास 500 मीटर का क्षेत्र नशा-मुक्त हो और वे समय-समय पर इसके अनुपालन की रिपोर्ट दें। गतिविधियों की निगरानी के लिए एक तंत्र भी अनिवार्य किया गया है। इसके तहत स्कूल प्रमुखों और मेंटर्स को गतिविधियों की समीक्षा करने तथा तस्वीरों सहित उनका रिकॉर्ड बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।

सालभर चलने वाला यह कैलेंडर पंजाब के व्यापक ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ अभियान का हिस्सा है और इसका उद्देश्य छात्रों की भागीदारी, शिक्षकों की क्षमता निर्माण, शैक्षिक सामग्री और सामुदायिक सहभागिता को एक साथ जोड़कर स्कूलों में नशे की रोकथाम के लिए एक सतत व्यवस्था तैयार करना है।

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पंजाब बंद के बीच BJP कार्यालय को धमकी, सुरक्षा एजेंसियों ने शुरू की जांच

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चंडीगढ़ स्थित भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कार्यालय को आज एक धमकी भरा ई-मेल मिलने के बाद सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मच गया। ई-मेल के जरिए 21 अगस्त को होने वाले पंजाब बंद के दौरान खुले रहने वाले शहरों में बम धमाके करने की धमकी दी गई है।

धमकी भरा ई-मेल मिलते ही सुरक्षा एजेंसियां हरकत में आ गईं और मामले की जांच शुरू कर दी गई। एहतियात के तौर पर बम स्क्वॉड की टीमें भी मौके पर पहुंचीं और पूरे परिसर की जांच की गई। सुरक्षा एजेंसियां ई-मेल की जांच के साथ-साथ उसके स्रोत का पता लगाने में जुटी हुई हैं।

जानकारी के मुताबिक, ई-मेल में ‘21 अगस्त पंजाब बंद’ और ‘31 अगस्त स्कूल बंद’ जैसे संदेश लिखे गए हैं। साथ ही धमकी दी गई है कि जिन शहरों में पंजाब बंद नहीं होगा, वहां बम धमाके किए जाएंगे। इस धमकी के सामने आने के बाद संबंधित इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था को और कड़ा कर दिया गया है।

बताया जा रहा है कि ई-मेल में पंजाब के डीजीपी के नाम का भी जिक्र किया गया है। फिलहाल जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि धमकी भरा ई-मेल किसने भेजा, इसका स्रोत कहां है और क्या इसके पीछे कोई वास्तविक साजिश है।

पंजाब बंद के बीच सामने आई इस धमकी को सुरक्षा एजेंसियां गंभीरता से ले रही हैं। पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों की टीमें ई-मेल से जुड़ी हर जानकारी की जांच कर रही हैं। साथ ही संवेदनशील स्थानों पर निगरानी बढ़ा दी गई है, ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके।

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मोहाली में बड़ा हादसा, अस्पताल निर्माण के दौरान मिट्टी की ढांग गिरी, 2 मजदूरों की मौत

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मोहाली के एयरपोर्ट रोड पर बीती रात एक दर्दनाक हादसा हो गया। यहां निर्माणाधीन अस्पताल की इमारत में काम चल रहा था, इसी दौरान अचानक मिट्टी की बड़ी ढांग खिसककर नीचे आ गिरी। हादसा इतना गंभीर था कि मलबे के नीचे दबने से 2 मजदूरों की मौत हो गई, जबकि 2 अन्य मजदूरों के घायल होने की जानकारी सामने आई है।

जानकारी के मुताबिक, हादसे के समय निर्माण स्थल पर करीब 7 से 8 मजदूर काम कर रहे थे। सभी मजदूर अपने-अपने काम में लगे हुए थे। इसी दौरान अचानक मिट्टी खिसकने लगी और देखते ही देखते बड़ी मात्रा में मिट्टी और मलबा नीचे आ गिरा। इसकी चपेट में दो मजदूर आ गए और दोनों मलबे के नीचे दब गए।

हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। आसपास मौजूद लोगों और अन्य मजदूरों ने तुरंत बचाव अभियान शुरू किया। काफी मशक्कत के बाद दोनों मजदूरों को मलबे से बाहर निकाला गया और इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। हालांकि, डॉक्टरों ने जांच के बाद दोनों को मृत घोषित कर दिया। हादसे में घायल हुए दो अन्य मजदूरों को भी अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका इलाज जारी है।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीमें भी मौके पर पहुंच गईं। अधिकारियों की निगरानी में राहत और बचाव कार्य चलाया गया। घटनास्थल पर सुरक्षा व्यवस्था को भी देखा गया और निर्माण कार्य से जुड़े लोगों से जानकारी जुटाई गई।

फिलहाल प्रशासन की ओर से हादसे के कारणों की जांच की जा रही है। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि निर्माण कार्य के दौरान मिट्टी की ढांग अचानक क्यों गिरी और क्या मौके पर सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा था। हादसे के बाद निर्माण स्थल की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

प्रशासन की जांच के बाद ही हादसे की सही वजह और जिम्मेदारी को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल पुलिस और संबंधित विभाग पूरे मामले की जांच में जुटे हुए हैं।

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