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पंजाब के परिवहन क्षेत्र के विकास को और तेज किया, मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने PRTC फ्लीट में 250 नई बसों को दिखाई हरी झंडी

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पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने  पटियाला में 250 नई पी.आर.टी.सी. बसों को हरी झंडी दिखाकर इसे सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने, रोजगार सृजन और पूरे पंजाब में विकास की गति तेज करने की दिशा में एक बड़ा कदम बताया। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने बुनियादी ढांचे के विस्तार और लोक-केंद्रित शासन की अपनी सरकार की दोहरी पहुंच को उजागर किया।

बस फ्लीट में वृद्धि के विवरण साझा करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि आज पटियाला में 250 नई बसों को हरी झंडी दिखाकर पी.आर.टी.सी. फ्लीट में शामिल किया गया। यह सिर्फ परिवहन सुविधाओं में सुधार नहीं, बल्कि लोगों को बेहतर, सुरक्षित और अधिक आरामदायक यात्रा प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे सार्वजनिक परिवहन मजबूत होगा और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। आने वाले दिनों में 300 से अधिक अन्य बसें पी.आर.टी.सी. फ्लीट में शामिल की जाएंगी। सरकार सार्वजनिक सुविधा के विस्तार और पंजाब को तरक्की के रास्ते पर आगे बढ़ाने के लिए लगातार प्रयासरत है।

विस्तार के पैमाने की बात करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि यह बहुत गर्व और संतुष्टि की बात है कि मई 2026 के अंत तक पी.आर.टी.सी. के बेड़े में 254 साधारण और 100 मिनी बसें शामिल की जाएंगी। उन्होंने यह भी कहा कि 309 अन्य बसों के लिए टेंडर पहले ही जारी किए जा चुके हैं, जिससे राज्य के परिवहन नेटवर्क को बड़ी मजबूती मिलेगी।

रोजगार की संभावनाओं के बारे में बोलते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, ‘‘इससे 681 व्यक्तियों के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने का रास्ता भी प्रशस्त होगा।‘‘ उन्होंने कहा, ‘‘2024 के दौरान पी.आर.टी.सी. के बेड़े में लगभग 110 बसें शामिल की गईं, जिससे 165 व्यक्तियों को रोजगार मिला था।‘‘ उन्होंने आगे कहा, ‘‘309 अन्य बसों को शामिल करने के लिए भी टेंडर जारी कर दिया गया है, जिससे 928 व्यक्तियों को रोजगार मिलेगा।‘‘

निगम की सुधरी वित्तीय स्थिति का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, ‘‘पी.आर.टी.सी. ने कुल राजस्व में 53 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है, जो वित्तीय वर्ष 2021-22 में 607.09 करोड़ रुपये के मुकाबले 2024-25 में बढ़कर 927.83 करोड़ रुपये हो गया है।‘‘ उन्होंने आगे कहा, ‘‘चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 में, पी.आर.टी.सी. के कुल राजस्व के 950 करोड़ रुपये पार करने की उम्मीद है, जो लगभग 57 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है।‘‘

‘आप‘ सरकार की कल्याण के प्रति प्रतिबद्धता दोहराते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, ‘‘2022 से, पी.आर.टी.सी. ने 1574 करोड़ रुपये की लागत से पंजाब की 34.63 करोड़ महिला यात्रियों को मुफ्त यात्रा की सुविधा प्रदान की है।‘‘ उन्होंने आगे कहा, ‘‘मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना के तहत, पी.आर.टी.सी. ने 2.21 करोड़ की मुफ्त एच.वी.ए.सी. बस यात्रा की सुविधा प्रदान की, जिससे 9,529 यात्रियों को पंजाब के भीतर और बाहर धार्मिक स्थानों के दर्शन करने का सौभाग्य मिला।‘‘

परिवहन के विस्तार को व्यापक विकास से जोड़ते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, ‘‘बस बेड़े के विस्तार से, शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों के लोग सुरक्षित और आरामदायक यात्रा कर सकेंगे।‘‘ उन्होंने आगे कहा कि पंजाब तेजी से विकास के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है और सरकार दशकों के अंतराल को पूरा करने के प्रयासों में और तेजी ला रही है।

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, ‘‘हमारी सरकार पंजाब को ‘रंगला पंजाब‘ बनाकर इसकी पुरानी शान बहाल करने के लिए बहुआयामी विकास कर रही है।‘‘

क्षेत्र में विकास कार्यों का विवरण देते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, ‘‘पंजाब की कमान संभालने के बाद हमारी सरकार ने पटियाला ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र में विभिन्न विभागों के विकास कार्यों पर लगभग 400 करोड़ रुपये खर्च किए हैं, जिससे इसकी समग्र सूरत ही बदल गई है।‘‘ उन्होंने आगे कहा कि वर्ष 2022 से बुनियादी ढांचे और सार्वजनिक सेवाओं को मजबूत करने के लिए करोड़ों रुपये का निवेश निरंतर किया गया है।

कृषि के बारे में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, ‘‘कृषि क्षेत्र को फिर से लाभदायक बनाने के लिए हमारी सरकार ने कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के माध्यम से विभिन्न पहलों पर 60 करोड़ रुपये खर्च किए हैं।‘‘

स्वास्थ्य सेवा में सुधारों को उजागर करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, ‘‘पिछले चार वर्षों में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के माध्यम से तीन परियोजनाओं पर 7.91 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं, जबकि इस समय स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार पर अतिरिक्त 14.54 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं।‘‘

शिक्षा के बारे में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, ‘‘पंजाब के बच्चों को विश्व स्तरीय स्कूली शिक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से, सरकार ने वर्ष 2022 और वर्ष 2026 के बीच स्कूल शिक्षा विभाग के माध्यम से आठ परियोजनाओं पर 825.22 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। इसके अलावा इस समय 80.92 करोड़ रुपये की कई अन्य परियोजनाएँ चल रही हैं।‘‘

बुनियादी ढांचे पर ध्यान केंद्रित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, ‘‘लोक निर्माण विभाग के माध्यम से 17 कार्यों पर 6.71 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं, जबकि 21.02 करोड़ रुपये की लागत से 11 अन्य कार्य चल रहे हैं। इसके अलावा 21 अन्य परियोजनाओं पर 23.03 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।‘‘

ग्रामीण बुनियादी ढांचे के बारे में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने जोर देकर कहा, ‘‘पंजाब मंडी बोर्ड के माध्यम से आठ कार्यों पर 12.98 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं, जिनमें मरम्मत, नया निर्माण और मंडी बुनियादी ढांचे का विस्तार शामिल है। इसके अतिरिक्त कार्य प्रगति पर हैं।‘‘

बाढ़ रोकथाम के उपायों पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, ‘‘वर्ष 2022 से नदियों की सफाई और बाढ़ नियंत्रण कार्यों पर 1.27 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं और कई अन्य परियोजनाएँ चल रही हैं।‘‘

शहरी और सीवरेज बुनियादी ढांचे के बारे में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, ‘‘सीवरेज बोर्ड के माध्यम से दो कार्यों पर 1.34 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं, जबकि बुनियादी ढांचे को और मजबूत करने के लिए 366 करोड़ रुपये की दो बड़ी परियोजनाएँ प्रगति पर हैं।‘‘

शहरी विकास के बारे में विस्तार से बताते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आगे कहा, ‘‘पिछले चार वर्षों में नगर निगम के माध्यम से वार्डों में 114 कार्यों पर 42.16 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। इसके अलावा कई परियोजनाएँ चल रही हैं और कई प्रगति पर हैं।‘‘

जल संरक्षण के बारे में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, ‘‘भूमि संरक्षण विभाग के माध्यम से भूमिगत पाइपलाइनों और जल संरक्षण कार्यों पर 1.24 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। इसके साथ ही चल रही और नई परियोजनाओं से इसे और मजबूती मिलेगी।‘‘

उन्होंने ग्रामीण विकास, पटियाला विकास प्राधिकरण, पंजाब राज्य बिजली निगम लिमिटेड, पंचायती राज, और जल आपूर्ति एवं स्वच्छता सहित विभागों में निवेश को उजागर किया। उन्होंने कहा कि बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और जीवन की गुणवत्ता में सुधार के लिए व्यापक स्तर पर काम चल रहे हैं।

लोगों से समर्थन की मांग करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने जोर देकर कहा, ‘‘इन विकास कार्यों को उसी गति से जारी रखने के लिए हमें आप सभी के समर्थन और सहयोग की आवश्यकता है।‘‘ उन्होंने आगे कहा, ‘‘मुझे विश्वास है कि जिस प्रकार आपने पिछले चुनावों में हमारी पार्टी को दिल से समर्थन दिया था, उसी प्रकार 2027 के चुनावों में भी देंगे।‘‘

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अमृतसर में पुलिस-बदमाश मुठभेड़, गोली लगने के बाद 2 आरोपी गिरफ्तार

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पंजाब सरकार ने निजी स्कूलों द्वारा की जा रही मनमानी फीस वृद्धि पर रोक लगाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में एक महत्वपूर्ण अध्यादेश को मंजूरी दी गई, जिसके तहत अब राज्य के निजी स्कूल हर साल 5 प्रतिशत से अधिक फीस नहीं बढ़ा सकेंगे।

कैबिनेट बैठक के बाद वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने बताया कि सरकार का उद्देश्य अभिभावकों को अनावश्यक आर्थिक बोझ से राहत देना और शिक्षा क्षेत्र में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि नए नियमों के लागू होने के बाद फीस वृद्धि को नियंत्रित किया जाएगा और निजी स्कूलों की मनमानी पर अंकुश लगेगा।

शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने कहा कि सरकार अभिभावकों के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने जानकारी दी कि जिन निजी स्कूलों ने पिछले तीन वर्षों के दौरान 15 प्रतिशत से अधिक फीस बढ़ाई है, उनसे वसूली गई अतिरिक्त राशि अभिभावकों को वापस करवाई जाएगी।

सरकार ने नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का भी प्रावधान किया है। नए नियमों के तहत प्राथमिक स्कूलों पर 50 हजार रुपये तक, हाई स्कूलों पर 2 लाख रुपये तक और वरिष्ठ माध्यमिक स्कूलों पर 5 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा।

पंजाब सरकार का कहना है कि यह फैसला लाखों अभिभावकों को राहत देने वाला साबित होगा। साथ ही शिक्षा क्षेत्र में जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ेगी तथा शिक्षा को व्यवसाय बनाने की प्रवृत्ति पर भी रोक लगेगी।

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बादल परिवार के काले कारनामे एक-एक करके जनता के सामने लाए जाएंगे और उन्हें उनके पापों की मिसाली सजा मिलेगी : CM भगवंत सिंह मान

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पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज कहा कि पंजाब के लोग यह नहीं भूले हैं कि किस तरह बादल परिवार और अकाली नेतृत्व ने बार-बार प्रदेश के हितों से समझौता किया, तीन काले कृषि कानूनों का समर्थन किया, राजनीतिक लाभ के लिए धर्म का दुरुपयोग किया और पंजाब में नशे के कलंक को पनपने दिया। फरीदकोट के गांव पंजगराईं कलां में ‘लोक मिलनी’ कार्यक्रम के दौरान लोगों से रूबरू होते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पिछली सरकारों ने जहां पंजाब को नशे, बेरोजगारी और पतन की ओर धकेला, वहीं ‘आप’ सरकार नशा तस्करों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, पारदर्शी सरकारी भर्ती, शिक्षा में ऐतिहासिक सुधार, सभी के लिए स्वास्थ्य सुविधाएं और महिलाओं के हित वाली कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से प्रदेश की तस्वीर बदल रही है।

मुख्यमंत्री ने दावा किया कि पंजाब और इसके लोगों के साथ विश्वासघात करने वालों का हर करतूत जनता के सामने लाया जाएगा, जबकि मौजूदा सरकार एक स्वस्थ, शिक्षित और समृद्ध पंजाब के निर्माण की दिशा में पूरी तरह से केंद्रित है। सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान, जिनके साथ पंजाब विधानसभा के अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवां भी मौजूद थे, ने कहा कि बादल परिवार ने प्रदेश पर लंबे समय तक शासन किया है और हमेशा प्रदेश को कमजोर करने की साजिशें रची हैं। उन्होंने कहा, “बादलों का एकमात्र एजेंडा प्रदेश और इसके लोगों के हितों से समझौता करके अपने निजी हितों को सुरक्षित करना रहा है। ये ऐसे अवसरवादी नेता हैं, जो अपने निजी और राजनीतिक हितों के अनुसार गिरगिट की तरह रंग और रुख बदलते हैं।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि लोगों ने अकालियों को चुना था लेकिन वे गद्दार साबित हुए और उन्होंने हमेशा प्रदेश और इसके लोगों की पीठ में छुरा घोंपा। भगवंत सिंह मान ने कहा, “जब पूरी किसानी अपने अधिकारों के लिए लड़ रही थी, तब अकालियों ने केंद्रीय मंत्रिमंडल में अपनी कुर्सियां बचाने के लिए मोदी सरकार के काले कृषि कानूनों का समर्थन किया था। अकालियों ने अपने राजनीतिक हितों के लिए धर्म का दुरुपयोग किया और लोग इसके लिए उन्हें कभी माफ नहीं कर सकते।”

एक और मिसाल देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इन नेताओं ने खुद को किसान बताकर लंबे समय तक लोगों को बेवकूफ बनाया है। उन्होंने कहा, “उन्हें यह स्पष्ट करना चाहिए कि कोई अन्नदाता बसों का इतना बड़ा काफिला और गुड़गांव में आलीशान होटल कैसे बना सकता है। यह सारी संपत्ति इसलिए इकट्ठी की गई है क्योंकि उन्होंने अपने राजनीतिक हितों के लिए प्रदेश और लोगों के हितों को बेच दिया।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि अकाली, पीढ़ियों के घात के लिए जिम्मेदार हैं क्योंकि नशा तस्करी को उनका संरक्षण प्राप्त थी और यह उनके लंबे कुशासन के दौरान पनपी-फूली। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन नेताओं के हाथ उन लाखों युवाओं के खून से रंगे हैं, जो नशे की भेंट चढ़ गए, जिसकी सप्लाई प्रदेश में सरकारी गाड़ियों के माध्यम से की जाती थी। उन्होंने कहा, “इन नेताओं के पाप क्षमा करने योग्य नहीं हैं और लोग इनके बुरे करतूतों की लंबी दास्तान के लिए इन्हें कभी भी माफ नहीं कर सकते। बेअदबी के जिम्मेदार लोग श्री अकाल तख्त साहिब पर पेश हुए और सार्वजनिक रूप से अपना गुनाह कबूल किया।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि जब उनकी राजनीतिक इच्छाएं पूरी नहीं हुईं तो उन्होंने यू-टर्न ले लिया। भगवंत सिंह मान ने कहा, “पूरा प्रदेश इन नेताओं का असली चेहरा जानता है, जिन्होंने हमेशा राजनीतिक हथकंडों के माध्यम से लोगों को गुमराह किया है। इन नेताओं ने गैंगस्टरों की पीठ थपथपाई और नशा तस्करों को पनाह देकर पंजाब के युवाओं की रगों में नशा घोला। लोग अकालियों को उनके पापों के लिए कभी माफ नहीं करेंगे और एक बार फिर उन्हें सबक सिखाएंगे। लोगों ने बार-बार उन्हें चुना, लेकिन उन्होंने बार-बार पंजाब और इसके लोगों के साथ विश्वासघात किया।” मुख्यमंत्री ने दोहराया कि अकालियों ने अपने राजनीतिक हितों के लिए धर्म का दुरुपयोग किया, इसलिए लोग उन्हें कभी माफ नहीं कर सकते।

उन्होंने कहा कि स्वर्गीय प्रकाश सिंह बादल ने भी सुखबीर सिंह बादल को कभी भी प्रदेश का मुखिया नहीं बनाया क्योंकि वे जानते थे कि पूर्व उपमुख्यमंत्री पंजाब को मुसीबत में डाल देंगे। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि सुखबीर सिंह बादल जमीनी हकीकतों से वाकिफ नहीं हैं क्योंकि उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी आराम-ओ-आइश और खुशहाली वाले सुरक्षित माहौल में गुजारी है।

उन्होंने कहा कि सुखबीर सिंह बादल को प्रदेश की बुनियादी भौगोलिक स्थिति का भी पता नहीं है लेकिन फिर भी वे पंजाब में राजनीतिक सत्ता पाना चाहते हैं। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “बाकी बातें तो एक तरफ रहीं, पूर्व उपमुख्यमंत्री पंजाब की बुनियादी फसलों में भी अंतर नहीं कर सकते क्योंकि वे प्रदेश के मुख्य मुद्दों से ही पूरी तरह से अनभिज्ञ हैं। दूसरी तरफ पंजाब सरकार ने प्रदेश की भलाई और लोगों की खुशहाली सुनिश्चित करने के लिए अनेकों पहलें की हैं।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह बहुत गर्व और संतुष्टि की बात है कि पंजाब सरकार ने युवाओं को 67,500 से अधिक सरकारी नौकरियां प्रदान की हैं। उन्होंने आगे कहा, “पंजाब में भ्रष्टाचार और पक्षपात का युग खत्म हो गया है। आज युवाओं को निर्धारित योग्यता के आधार पर पारदर्शी तरीके से नौकरियां मिल रही हैं। सरकार पंजाबियों की उम्मीदों पर खरी उतर रही है और प्रदेश का एक-एक पैसा इसके लोगों के विकास पर खर्च किया जा रहा है।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पहली बार कोई मुख्यमंत्री सिर्फ मंच से बोलने के बजाय खुलकर बातचीत करके आम लोगों की बातें सुन रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार सरकारी खजाने के एक-एक पैसे का इस्तेमाल लोगों की भलाई के लिए कर रही है।

उन्होंने कहा कि पंजाब के 90 प्रतिशत से अधिक घरों को मुफ्त बिजली मिल रही है और किसानों को दिन के समय बिजली मिल रही है, जो मिसाली कदम है।

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि ऐसे समय में जब देश की संपत्ति केंद्र सरकार द्वारा अपने करीबी दोस्तों को मामूली कीमतों पर सौंपी जा रही है, पंजाब सरकार ने एक निजी थर्मल प्लांट खरीदकर इसका नाम श्री गुरु अमरदास जी के नाम पर रखकर इतिहास रचा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि लोगों को व्यापक स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने के लिए पंजाब सरकार ने मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना शुरू की है, जो देश की अपनी तरह की पहली योजना है जो पंजाब के प्रत्येक निवासी परिवार को 10 लाख रुपये तक का नकद रहित चिकित्सा उपचार प्रदान करती है। उन्होंने आगे कहा, “पंजाब ऐसा व्यापक स्वास्थ्य कवरेज प्रदान करने वाला पहला भारतीय राज्य है, जिससे परिवारों पर वित्तीय बोझ कम हुआ है और मानक स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित की जा रही हैं।” मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि इस ऐतिहासिक पहल का उद्देश्य प्रदेश के सभी परिवारों को व्यापक स्वास्थ्य कवरेज प्रदान करना है और लोग इस योजना के तहत पहले ही 650 करोड़ रुपये से अधिक का मुफ्त इलाज प्राप्त कर चुके हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मांवां-धीयां सत्कार योजना के तहत, 1 जुलाई से 18 साल से अधिक उम्र की महिला लाभार्थियों को वित्तीय सहायता के बारे में उनके मोबाइल फोन पर सूचना मिलेगी। उन्होंने आगे कहा, “अन्य सभी वर्गों से संबंधित महिलाओं को 1,000 रुपये प्रति माह मिलेंगे, जबकि अनुसूचित जाति की महिलाओं को 1,500 रुपये प्रति माह मिलेंगे। यह फंड सीधे उनके बैंक खातों में ट्रांसफर किए जाएंगे और पहले से ही सामाजिक सुरक्षा पेंशन प्राप्त कर रही महिलाएं भी इस योजना का लाभ लेने की पात्र होंगी।” मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाब की 97 प्रतिशत महिलाओं को इस योजना से लाभ होने की उम्मीद है और प्रदेश सरकार ने इसके लिए बजट में 9,300 करोड़ रुपये रखे हैं।

इस योजना के व्यापक सामाजिक महत्व पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भले ही यह वित्तीय सहायता महिलाओं को अमीर नहीं बना सकती लेकिन यह उन्हें बनता सम्मान और सत्कार जरूर प्रदान करेगी। उन्होंने कहा, “महिलाएं सबसे अधिक सम्मान की हकदार हैं क्योंकि वे जीवन का आधार हैं। माताओं और बहनों के आशीर्वाद में दुनिया की हर चुनौती को पार करने की ताकत होती है।” मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि लिंग समानता को बढ़ावा देने और सामाजिक तथा आर्थिक निर्णय लेने में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता को मजबूत करना बहुत जरूरी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वे ईश्वर के बहुत आभारी हैं कि अकाल पुरख ने उन्हें जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार संशोधन अधिनियम, 2026 को लागू करने का अवसर दिया। उन्होंने कहा कि जब भी श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी की घटनाएं हुईं, लाखों लोगों के दिल दहल गए। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि ईश्वर ने उन्हें बुद्धि और बल प्रदान किया तभी वे कानूनी विशेषज्ञों के साथ उचित विचार-विमर्श के बाद यह विधेयक लाने में सक्षम हुए। उन्होंने कहा, “आप सरकार ने इस विधेयक का मसौदा बहुत सावधानीपूर्वक तैयार किया है ताकि भविष्य में कोई भी संशोधन या कमियां इसे कमजोर न कर सकें।”

मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि यह कानून समाज विरोधी तत्वों के खिलाफ बड़ी रोक के रूप में काम करेगा और यह सुनिश्चित करेगा कि भविष्य में कोई भी इस तरह का जघन्य अपराध करने की हिम्मत न करे। उन्होंने कहा कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी करना शांति, सद्भावना, भाईचारे और श्रद्धा को ढहाने की गहरी साजिश थी। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी हर सिख के पिता हैं और इनकी पवित्रता को बनाए रखना सभी का सामूहिक कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार द्वारा उठाए गए इस ऐतिहासिक कदम के लिए दुनिया भर के लोग खुश हैं और आभार व्यक्त कर रहे हैं।

इस अवसर पर पंजाब विधानसभा के अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवां और अन्य लोग भी मौजूद थे।

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पंजाब में महिलाओं को भगवंत सिंह मान सरकार की मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत सुरक्षित एवं समय पर प्रजनन स्वास्थ्य सेवाओं तक आसान पहुँच का लाभ

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स्टेट हेल्थ एजेंसी (SHA), पंजाब के आंकड़ों के अनुसार मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत किए गए मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (एमटीपी) मामलों में से 57 प्रतिशत गर्भावस्था के पहले आठ सप्ताह के भीतर किए गए। अब तक दर्ज 323 कैशलेस प्रक्रियाओं, जिनकी कुल लागत 14.86 लाख रुपये रही, में से 185 मामले शुरुआती गर्भावस्था के दौरान किए गए। यह राज्य भर के 800 से अधिक सूचीबद्ध अस्पतालों में समय पर और सुरक्षित प्रजनन स्वास्थ्य सेवाओं तक बढ़ती पहुँच को दर्शाता है।

गर्भपात का निर्णय कई व्यक्तिगत, चिकित्सकीय और सामाजिक-आर्थिक कारणों से प्रभावित होता है। मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत पहले आठ सप्ताह के भीतर किए गए एमटीपी मामलों की संख्या कुल मामलों के आधे से अधिक रही, जिससे यह योजना के अंतर्गत सबसे अधिक उपयोग की जाने वाली श्रेणी बन गई है।

ये आंकड़े ऐसे समय में सामने आए हैं जब मुख्यमंत्री भगवंत मान सरकार ने मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत गर्भसमापन (एमटीपी) सेवाओं की कैशलेस सुविधा का दायरा बढ़ाया है। अब महिलाएँ सरकारी अस्पतालों के साथ-साथ सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में भी बिना ख़र्च किए ये सेवाएँ प्राप्त कर सकती हैं, जिससे पूरे पंजाब में स्वास्थ्य सेवाओं तक उनकी पहुँच और आसान हो गई है।

आंकड़े संकेत देते हैं कि अधिकांश लाभार्थी गर्भावस्था के शुरुआती चरणों में ही गर्भपात सेवाओं का लाभ उठा रहे हैं, जब चिकित्सकीय प्रक्रियाएँ कम जटिल होती हैं और स्वास्थ्य ज़ोखिम भी कम होते हैं।

मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत पंजाब के 800 से अधिक सरकारी और सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में एमटीपी सेवाएँ कैशलेस उपलब्ध हैं। इस योजना का उद्देश्य लोगों के जेब से होने वाले ख़र्च को कम करना और समय पर प्रजनन स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच को बेहतर बनाना है।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि सूचीबद्ध स्वास्थ्य संस्थानों के हालिया विस्तार का उद्देश्य सेवाओं तक पहुँच को आसान बनाना और उपचार में होने वाली देरी को कम करना है। उन्होंने कहा, “सरकारी और सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में कैशलेस सेवाएँ उपलब्ध करवाने का उद्देश्य समय पर उपचार सुनिश्चित करना और देरी से हस्तक्षेप के कारण उत्पन्न होने वाली जटिलताओं को कम करना है।”

चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि चिकित्सकीय निगरानी में समय पर गर्भपात सेवाओं तक पहुँच स्वास्थ्य ज़ोखिमों को कम करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है। माता कौशल्या अस्पताल की सीनियर प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. रमिता अग्रवाल ने कहा कि निर्धारित गर्भकाल सीमा के भीतर चिकित्सकीय निगरानी में किया गया गर्भसमापन सुरक्षित और प्रभावी होता है।

उन्होंने कहा कि उपचार लेने में देरी अक्सर आर्थिक कठिनाइयों, जागरूकता की कमी और सामाजिक बाधाओं से जुड़ी होती है, जिसके कारण कई बार महिलाएँ असुरक्षित तरीकों या स्वयं दवा लेने का सहारा लेती हैं। उन्होंने कहा, “सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए किसी भी दवा या प्रक्रिया से पहले प्रत्येक मामले का उचित चिकित्सकीय मूल्यांकन आवश्यक है।”

डॉ. रमिता अग्रवाल ने गर्भपात करवाने के कुछ सामान्य कारण भी साझा किए:

गर्भनिरोधक साधनों का प्रभावी न होना : कंडोम, आईयूडी या अन्य गर्भनिरोधक साधनों का अपेक्षित रूप से प्रभावी न होना।

अनियोजित या अनचाहा गर्भधारण: जब महिला या दंपत्ति बच्चे के लिए तैयार न हों।

आर्थिक कारण: प्रसव और बच्चे के पालन-पोषण से जुड़े ख़र्चों को लेकर चिंताएँ ।

माँ के स्वास्थ्य संबंधी ज़ोखिम: गर्भावस्था जारी रहने से महिला के शारीरिक स्वास्थ्य पर ख़तरा होना।

भ्रूण में गंभीर असामान्यताएँ : भ्रूण में गंभीर जन्मजात या चिकित्सकीय समस्याओं का पता चलना।

व्यक्तिगत, शैक्षणिक या करियर संबंधी कारण: गर्भावस्था का पढ़ाई, नौकरी या जीवन की अन्य योजनाओं पर प्रभाव पड़ना।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सेहत योजना का विस्तार प्रजनन स्वास्थ्य सेवाओं को मज़बूत करने में कैशलेस स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है। यह आर्थिक बाधाओं को कम करके और संस्थागत स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच बढ़ाकर बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ उपलब्ध करवाने में मदद कर रहा है।

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