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संजीव अरोड़ा के घर ED की रेड पर भड़के सीएम भगवंत मान, कहा- हम डरने वाले नहीं हैं

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पंजाब के मंत्री संजीव अरोड़ा और सहयोगियों के ठिकानों पर छापेमारी पर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पहली प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा है कि हम ईडी से डरने नहीं वाले हैं. मुख्यमंत्री भगवंत मान ने प्रेस कांफ्रेंस में ED की छापेमारी पर कहा कि बीजेपी से वह कहना चाहते हैं कि 2027 के चुनाव की तैयारी करनी है तो जनता के बीच जाओ न कि ED और अन्य एजेंसियों का इस्तेमाल विरोधी नेताओं के खिलाफ करो. मान ने कहा कि आम आदमी पार्टी के नेता इससे डरने वाले नहीं हैं.

सीएम मान ने कहा कि हमारे देश को दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र कहा जाता है. यहां लोग अपनी सरकार चुनते हैं. पिछले कुछ समय से लोकतंत्र का गला घोंटा जा रहा है. जहां भाजपा की सरकारें नही है वहां केंद्र सरकार ग्रांट रोक देती है. आम आदमी पार्टी के साथ तो कुछ ज्यादा ही हो रहा है क्योंकि यह पार्टी कुछ ही समय में नेशनल पार्टी बन गई. पिछले कुछ दिनों से लोकतंत्र का गला धीरे-धीरे करके दबाया जा रहा है.

ED, सीबीआई, इलेक्शन कमीशन के माध्यम से जीत रही बीजेपी- मान

सीएम ने कहा कि आम आदमी पार्टी सबसे तेजी से आगे बढ़ने वाली पार्टी है इससे डर कर बीजेपी पहले भी हमारे नेताओं को डराने और धमकाने की कोशिश की गई. बीजेपी इलेक्शन अपने दम पर नहीं जीती ये ED, सीबीआई, इलेक्शन कमीशन के माध्यम से जीत रही है.

उन्होंने लोकतंत्र की हत्या हो रही है हम इसकी निंदा करते है. ये कारवाई सिर्फ और सिर्फ विपक्ष के नेता पर होती है  ये डेमोक्रेसी नहीं डिक्टेटरशिप है.

संजीव अरोड़ा पर छापे को लेकर आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल ने भी टिप्पणी की है. उन्होंने कहा है कि आम आदमी पार्टी के नेता के यहाँ तीन दिन में ये दूसरी ED की रेड है. केजरीवाल ने पूछा कि क्या प्रधान मंत्री जी बतायेंगे कि अभी तक “आप” नेताओं के यहाँ जो इतनी सारी अनगिनत रेड की हैं, उनमे कितना काला पैसा मिला? एक रुपया भी मिला? पूरा देश देख रहा है कि आप केवल सत्ता के लिए कितनी ओछी राजनीति कर रहे हैं.

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पंजाब के औद्योगिक विकास को गति देने और वैश्विक निवेश को आकर्षित करने के लिए CM भगवंत सिंह मान नीदरलैंड के दौरे पर

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राज्य के औद्योगिक और आर्थिक विकास को गति देने के लिए पंजाब सरकार द्वारा किए जा रहे निरंतर प्रयासों के तहत मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान फूड प्रोसेसिंग, लॉजिस्टिक्स, अलॉयज एंड स्टील्स, फार्मास्यूटिकल्स और सूचना प्रौद्योगिकी समेत प्रमुख क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने तथा निवेश आकर्षित करने के लिए आज नीदरलैंड के दौरे पर रवाना हो गए हैं।

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि हमारा विजन पूरी तरह स्पष्ट है, जो नीति स्थिरता, तेजी से फैसले लेने और निवेशकों के समय व भरोसे का सम्मान करने वाली शासन व्यवस्था प्रदान करके पंजाब को विश्व स्तर पर उद्योग के लिए प्राथमिकता वाला स्थान बनाने पर केंद्रित है।

यह दौरा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि नीदरलैंड भारत के लिए सबसे बड़े विदेशी निवेशकों में से एक है और कई डच कंपनियां पहले से ही पंजाब में अपना कारोबार चला रही हैं। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री ने इससे पहले अक्टूबर-2023 में विविधा इंडस्ट्रियल पार्क, राजपुरा में डी ह्यूस फैक्टरी का शिलान्यास किया था। इसी प्रकार आलू की फसल के लिए इंडो-डच सेंटर ऑफ एक्सीलेंस पहले ही राज्य में सफलतापूर्वक काम कर रहा है, जो पंजाब और नीदरलैंड के बीच बढ़ते सहयोग को दर्शाता है।

इस दौरे के दौरान मुख्यमंत्री राज्य के औद्योगिक विकास को और गति देने के लिए प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में रणनीतिक साझेदारी पर जोर देंगे। वे पंजाब की रणनीतिक स्थिति, एनसीआर और प्रमुख बंदरगाहों से निर्बाध संपर्क, मजबूत औद्योगिक क्लस्टर, गुणवत्तापूर्ण निर्बाध बिजली आपूर्ति, कुशल कार्यबल और प्रगतिशील नीति ढांचे को उजागर करके पंजाब को उत्तरी भारत के पसंदीदा निवेश स्थल के रूप में भी प्रस्तुत करेंगे।

मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाला प्रतिनिधिमंडल पंजाब सरकार द्वारा लागू किए गए प्रमुख प्रशासनिक और नियामक सुधारों को पेश करेगा, जिसमें 173 सरकार से कारोबार सेवाएं, ऑटो-डीम्ड मंजूरियां, पैन-आधारित व्यापारिक पहचान, पंजाब राइट टू बिजनेस एक्ट में संशोधन और फास्टट्रैक पंजाब सिंगल-विंडो सिस्टम शामिल हैं।

इस प्रतिनिधिमंडल का उद्देश्य श्रृंखलाबद्ध रोड शो, वन-टू-वन बिजनेस मीटिंग्स और बड़ी ग्लोबल कॉर्पोरेट कंपनियों व संस्थाओं के साथ चर्चाओं के माध्यम से पंजाब को यूरोपीय देशों के लिए निवेश के आकर्षक गंतव्य के रूप में प्रस्तुत करना और पंजाब में नया निवेश लाना है।

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PM मोदी का आज रात राष्ट्र के नाम संबोधन, महिला आरक्षण बिल पर रख सकते हैं बात

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PM नरेंद्र मोदी आज शनिवार रात एक बार फिर राष्ट्र के नाम संबोधन करेंगे. उनका संबोधन रात 8.30 बजे होगा. माना जा रहा है कि पीएम मोदी महिला आरक्षण बिल पर बोल सकते हैं और वह विपक्ष की ओर से सहयोग नहीं किए जाने को लेकर उस पर निशाना साध सकते हैं. इससे पहले 2 दिन चली बहस के बाद विपक्ष की ओर से विरोध में वोट डालने की वजह कल शुक्रवार को लोकसभा में महिला आरक्षण संबंधी संविधान संशोधन विधेयक पारित नहीं हो पाया था.

महिला आरक्षण को साल 2029 से लागू कराने और लोकसभा की सीटों की संख्या बढ़ाने से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक पर लंबी बहस के बाद वोटिंग के दौरान लोकसभा में खारिज होने के अगले दिन आज शनिवार को जमकर बयानबाजी का दौर रहा. विपक्ष ने इसे केंद्र सरकार की साजिश करार दिया तो वहीं भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने विपक्ष पर जमकर हमला बोला.

पक्ष-विपक्ष में बिल को लेकर घमासान

बीजेपी ने विधेयक के खारिज होने को ‘काला दिन’ बताया और कांग्रेस तथा अन्य विपक्षी दलों पर महिलाओं के साथ ‘विश्वासघात’ का आरोप लगाया. जबकि कांग्रेस और उसके कई सहयोगियों ने कहा कि 2023 में पारित महिला आरक्षण कानून को देश में तुरंत लागू किया जाना चाहिए और सरकार इस मुद्दे पर राजनीति कर रही है.

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजीजू ने कहा कि कांग्रेस और विपक्ष को पूरे देश की महिलाओं के आक्रोश का सामना करना पड़ेगा क्योंकि उन्होंने अपनी ‘विश्वसनीयता हमेशा के लिए खो दी है.’ उन्होंने कहा, “उन्हें देश की महिलाओं के आक्रोश का सामना करना पड़ेगा. कांग्रेस और उसके सहयोगियों पर एक काला दाग की तरह है, जिसे वे कभी मिटा नहीं पाएंगे. यह विधेयक महिलाओं को ऐतिहासिक प्रतिनिधित्व देने के बारे में था और इसमें किसी को कैसे आपत्ति हो सकती थी?”

महिला सशक्तिकरण को कमजोर कियाः शोभा

दूसरी ओर, केंद्रीय मंत्री शोभा करंदलाजे ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि विपक्ष के कदम ने महिला सशक्तिकरण और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व दोनों को कमजोर किया है. उन्होंने कहा, “उन्होंने अपने फैसले से दक्षिण भारत को भी नुकसान पहुंचाया, जहां सीटों में 50 फीसदी से अधिक वृद्धि हो रही थी. महिलाओं को आरक्षण मिलने जा रहा था, लेकिन उन्हें इस सुनहरे अवसर से वंचित कर दिया गया. यह सब राहुल गांधी की अगुवाई में हुआ है.”

बीजेपी सांसद बांसुरी स्वराज ने कांग्रेस और इंडिया गठबंधन पर महिलाओं को धोखा देने और अपने पिछले रुख से पीछे हटने का आरोप लगाया. वहीं विपक्षी दलों के नेताओं ने भी सरकार पर आरोप लगाया कि वह पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के विधानसभा चुनावों में राजनीतिक लाभ लेने के मकसद इस मुद्दे का इस्तेमाल कर रही है और इसके क्रियान्वयन में देरी कर रही है.

संघीय ढांचे को बदलने की साजिश को मिली मातः प्रियंका

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने केंद्र पर हमला करते हुए कहा कि यह विधेयक संघीय ढांचे को बदलने का षड्यंत्र था, इसका गिरना संविधान और विपक्षी एकजुटता की ऐतिहासिक जीत है. उन्होंने कहा कि सरकार 2023 के नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लोकसभा की वर्तमान 543 सीट के आधार पर तत्काल प्रभाव से इसे लागू कर सकती है, यदि वह ऐसा करती है तो पूरा विपक्ष इसका समर्थन करेगा. उन्होंने कहा कि कल जो हुआ, वह लोकतंत्र के लिए बहुत बड़ी जीत है, विपक्षी एकता के जरिए संघीय ढांचे को बदलने की साजिश को हराया गया.

दूसरी ओर, कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि विपक्ष महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं है, लेकिन इसे परिसीमन से जोड़ने पर आपत्ति है. उन्होंने कहा, “हम महिला आरक्षण का पूरी तरह समर्थन करते हैं और हम शुक्रवार को ही विधेयक पारित करा देते. हमारी आपत्ति महिला आरक्षण पर नहीं, बल्कि इसे परिसीमन से जोड़ने पर थी.”

समाजवादी पार्टी के नेता राम गोपाल यादव ने विधायी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा, “यह ऐतिहासिक विधेयक 2023 में ही पारित हो चुका था. फिर इसमें संशोधन लाने की क्या जरूरत थी? जब आपके पास दो-तिहाई बहुमत ही नहीं था, तो इसे लाने का क्या मतलब था? इससे साफ है कि इसके पीछे राजनीतिक मकसद था.”

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लुधियाना में मंत्री संजीव अरोड़ा के घर ED की छापेमारी खत्म, मुख्यमंत्री का केंद्र पर हमला

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जाब के कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा के आवास पर प्रवर्तन निदेशालय द्वारा की गई छापेमारी की कार्रवाई समाप्त हो गई है। इस कार्रवाई के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और विभिन्न दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।

जानकारी के अनुसार, प्रवर्तन निदेशालय की टीम शुक्रवार सुबह अचानक लुधियाना स्थित मंत्री के आवास पर पहुंची। टीम ने पहुंचते ही पूरे क्षेत्र को सुरक्षा घेरे में ले लिया और बाहरी लोगों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई। इसके बाद अधिकारियों ने घर के भीतर मौजूद दस्तावेजों और अन्य सामग्री की गहन जांच शुरू की।

ईडी की तरफ से बयान नहीं हुआ जारी

सूत्रों के मुताबिक, यह कार्रवाई कथित वित्तीय अनियमितताओं और लेन-देन से जुड़े मामलों की जांच के तहत की जा रही है। छापेमारी के दौरान कई अहम दस्तावेजों के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की भी जांच की गई। हालांकि, अभी तक प्रवर्तन निदेशालय की ओर से इस मामले में कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, जिससे जांच को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाई है।

दूसरी ओर, मंत्री संजीव अरोड़ा या उनके कार्यालय की तरफ से भी इस पूरे घटनाक्रम पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं, इस कार्रवाई को लेकर पंजाब सरकार ने कड़ा विरोध जताया है।

सीए मान लगा चुके केंद्र पर आरोप 

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार जांच एजेंसियों का इस्तेमाल कर विपक्षी नेताओं को डराने और दबाव बनाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए खतरा बताते हुए कहा कि उनकी पार्टी इस तरह की कार्रवाई से डरने वाली नहीं है।

इस घटना के बाद राज्य की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। जहां एक ओर सत्तारूढ़ दल इसे राजनीतिक दबाव की कार्रवाई बता रहा है, वहीं विपक्ष इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है। 

फिलहाल, छापेमारी समाप्त होने के बाद भी इस मामले को लेकर कई सवाल बने हुए हैं। आने वाले दिनों में जांच एजेंसियों और संबंधित पक्षों की ओर से स्थिति और स्पष्ट होने की संभावना है।

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