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CM Mann ने विश्व स्तरीय सुविधाओं से लैस 250 ग्रामीण खेल मैदानों का किया उद्घाटन; कहा, Punjab के गांवों से अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी पैदा होंगे

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पंजाब के गांवों को खेल बुनियादी ढांचे के विकास के केंद्र में रखते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान राज्य भर में 15 जुलाई तक विश्व स्तरीय सुविधाओं वाले 3,100 खेल मैदान लोगों को समर्पित करेंगे, जिनमें से आज उन्होंने 250 खेल मैदानों का उद्घाटन किया। युवाओं में नशे की समस्या को दूर करने में खेलों की भूमिका को अहम बताते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी (आप) सरकार सिर्फ बुनियादी ढांचा विकसित नहीं कर रही, बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने योग्य खिलाड़ी पैदा करने के उद्देश्य से युवाओं को मुफ्त प्रशिक्षण, पेशेवर कोच और खेल उपकरण प्रदान करके इस कदम को अधिक से अधिक बढ़ावा भी दे रही है।

खेलों में निवेश के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि खेल बजट, जो पहले 200 करोड़ रुपए से भी कम था, को बढ़ाकर उनकी सरकार ने 1,790 करोड़ कर दिया है। इसके साथ ही किला रायपुर ‘ग्रामीण ओलंपिक’ की शुरुआत के माध्यम से पंजाब की खेल विरासत को पुनर्जीवित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। पंजाब पहली बार एशियाई हॉकी चैंपियनशिप की मेजबानी करने जा रहा है। उल्लेखनीय है कि भगवंत मान सरकार सूबे को देश और पूरे विश्व के खेल नक्शे पर मजबूती से खड़ा करने का दृष्टिकोण लेकर चल रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सूबा सरकार हर गाँव के विकास को उसी खजाने से सुनिश्चित कर रही है, जिसके खाली होने का दावा पिछली सरकारें करती रही हैं।

नवनिर्मित 250 ग्रामीण खेल मैदानों का उद्घाटन करने के बाद मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि ‘आप’ सरकार सूबे के खेल माहौल को बदलने के लिए बड़े पैमाने पर प्रयास कर रही है, जिसका स्पष्ट उद्देश्य युवाओं को नशे से दूर रखना और उनकी ऊर्जा को रचनात्मक दिशा में लगाना है। उन्होंने कहा कि खेल संस्कृति को बढ़ावा देना सूबा सरकार के नशों के खिलाफ युद्ध में सबसे प्रभावशाली साधन हो सकता है। युवाओं की असीम ऊर्जा को सही दिशा में लगाने के लिए खेलों को अधिक से अधिक बढ़ावा दिया जा रहा है ताकि वे खेलों में बड़ी सफलता हासिल कर सकें। उन्होंने कहा कि जो युवा खेलों में लगे हुए हैं, उनके पास नशों की तरफ देखने का भी समय नहीं है क्योंकि उनका सारा ध्यान अपने-अपने क्षेत्रों में ऊंचाइयां हासिल करने पर केंद्रित रहता है। उन्होंने आगे कहा कि यह सूबे में से नशों के कलंक को खत्म करने और युवाओं को सामाजिक-आर्थिक विकास में बराबर का भागीदार बनाने में अधिक सहायक सिद्ध होगा।

इस पहल के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं के स्वस्थ शरीर और तंदुरुस्त दिमाग को सुनिश्चित करने के लिए पंजाब सरकार पहले चरण के तहत 1,250 करोड़ की लागत से राज्य भर में आधुनिक सुविधाओं से लैस 3,100 ग्रामीण खेल मैदान विकसित कर रही है। इनमें से 250 मैदान आज समर्पित कर दिए गए हैं और बाकी बचे सभी मैदान चरणबद्ध तरीके से 15 जुलाई तक समर्पित कर दिए जाएंगे। इसके चरणबद्ध कार्यान्वयन के बारे में अधिक जानकारी देते हुए, 250 मैदान आज समर्पित किए गए हैं और बाकी 500 मैदान 15 मई को, 250 मैदान 31 मई को, 500 मैदान 15 जून को, 1,000 मैदान 30 जून को और 600 मैदान 15 जुलाई को समर्पित किए जाएंगे।

नशा विरोधी मुहिम में इन मैदानों की भूमिका पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “ये ग्रामीण खेल मैदान ‘युद्ध नशों के विरुद्ध’ मुहिम में अहम और क्रांतिकारी भूमिका निभाएंगे। ये न सिर्फ युवाओं को नशे से दूर रहने के लिए प्रोत्साहित करेंगे, बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने के उनके सपनों को साकार करने में भी मदद करेंगे। ये मैदान उभरते खिलाड़ियों के लिए उम्मीद की किरण के रूप में काम करेंगे और पंजाब में खेल संस्कृति को पल्लवित करेंगे।”

सुविधाओं की जानकारी देते हुए उन्होंने कहा, “हर मैदान में चारदीवारी होगी, जिसके घेरे के साथ-साथ पौधे लगाए जाएंगे, छह फुट चौड़ा वॉकिंग ट्रैक होगा और सुबह व शाम के लिए फ्लड लाइट्स की सुविधा होगी। इसके अलावा वॉलीबॉल, फुटबॉल और हॉकी के लिए कोर्ट के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर लोकप्रिय खेलों के लिए अतिरिक्त कोर्ट भी होंगे।” उन्होंने आगे कहा, “सुविधाओं में 400 मीटर छह-लेन रनिंग ट्रैक, बड़ी क्षमता वाली लाइटिंग सुविधा, स्प्रिंकलर सिस्टम वाले सबमर्सिबल पंप, कंक्रीट बेंच, बच्चों के खेलने के लिए जगह, पुरुषों और महिलाओं के लिए शौचालय, व्हीलचेयर रैंप और खेल उपकरणों को रखने के लिए स्टोरेज की व्यवस्था भी होगी।”

प्रशिक्षण और सहायता के बारे में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “खेल किटें और उपकरण वितरण और युवाओं को गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण देने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सभी मैदानों के लिए फुटबॉल और वॉलीबॉल कोच नियुक्त किए जाएंगे और बच्चों को मुफ्त प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता हासिल कर सकें।” उन्होंने आगे कहा, “इन मैदानों के रखरखाव के लिए ग्रामीण खेल और तंदुरुस्ती समितियां बनाई जाएंगी।”

वित्तीय प्रतिबद्धता का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, “सूबे ने खेल बजट में ऐतिहासिक वृद्धि की है, जिसके तहत 2026-27 के लिए 1791 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं। वर्ष 2023 में पेश की गई एक नई खेल नीति युवाओं को तैयारी के लिए वित्तीय सहायता सुनिश्चित करती है, जिसमें ओलंपिक के लिए 15 लाख और एशियाई खेलों के लिए 8 लाख रुपए की सुविधा है।” उन्होंने आगे कहा, “पेरिस ओलंपिक के कांस्य पदक विजेता हॉकी खिलाड़ियों को 1-1 करोड़, एशियाई खेलों के स्वर्ण पदक विजेताओं को 1-1 करोड़ रुपए और नौ ओलंपिक पदक विजेताओं को पीसीएस और डीएसपी नौकरियां दी गई हैं।”

मुख्यमंत्री ने कहा, “‘खेडां वतन पंजाब दियां’ ने राज्य में एक मजबूत खेल संस्कृति को बढ़ावा दिया है। ये खेल युवाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करने हेतु तीन वर्षों के लिए करवाए गए, जिसमें 2024-25 के दौरान 5 लाख खिलाड़ियों ने भाग लिया और तीन वर्षों में 97.3 करोड़ खर्च किए गए।”

पारंपरिक खेलों को पुनर्जीवित करने के बारे में उन्होंने कहा, “किला रायपुर ग्रामीण खेलों ने ‘मिनी ओलंपिक’ के रूप में विश्व स्तर पर पहचान हासिल की है। पंजाब विधान सभा ने 11 जुलाई, 2025 को सर्वसम्मति से जानवरों के प्रति क्रूरता की रोकथाम (पंजाब संशोधन) अधिनियम, 2025 पारित किया, जिससे बैलगाड़ी दौड़ जैसे पारंपरिक ग्रामीण खेलों को पुनर्जीवित किया गया। वर्ष 2014 के बाद इस वर्ष ये दौड़ें एक बार फिर आकर्षण का केंद्र बनीं।”

खेलों में पंजाब के बढ़ते कद का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “यह बहुत गर्व की बात है कि पहली बार पंजाब को ‘एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी हॉकी’ के रूप में एक अंतरराष्ट्रीय आयोजन की मेजबानी करने का अवसर मिला है। मजबूत पंजाबी प्रतिनिधित्व के बावजूद, पंजाब ने अब तक कभी भी किसी बड़े हॉकी टूर्नामेंट की मेजबानी नहीं की। मैच बलबीर सिंह सीनियर हॉकी स्टेडियम और जालंधर के सुरजीत हॉकी स्टेडियम में होंगे।”

इस अवसर पर मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान गाँव के खिलाड़ियों से मिले, किटें बाँटी और वॉलीबॉल कोर्ट पर महिला खिलाड़ियों को भी हौसला अफजाई की। इस कार्यक्रम को और उत्साहजनक बनाते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने गाँव के युवा खिलाड़ियों से निकटता से बातचीत की, खेल किटें बांटी और उन्हें खेलों के प्रति उनके उत्साह और समर्पण के लिए सम्मानित किया। लोगों से प्रशंसा स्वीकार करते हुए उन्होंने वॉलीबॉल कोर्ट में महिला खिलाड़ियों के साथ वॉलीबॉल भी खेली और उन्हें विश्वास और प्रतिबद्धता के साथ खेलों को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया। भगवंत मान सरकार का ध्यान सिर्फ बुनियादी ढांचे के निर्माण पर ही नहीं है, बल्कि जमीनी स्तर पर विश्वास, समावेशिता और एक मजबूत खेल संस्कृति को बढ़ावा देने पर भी है। इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री तरुनप्रीत सिंह सौंद और अन्य भी मौजूद थे।

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देश में सबसे ज्यादा अन्याय आदिवासी समाज के साथ हुआ, सिर्फ ‘‘आप’’ लड़ रही आदिवासियों के अधिकारों की लड़ाई- केजरीवाल

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आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने विश्व आदिवासी दिवस पर देश भर के आदिवासी समाज को बधाई देते हुए कहा कि आजाद भारत में सबसे ज्यादा अन्याय आदिवासी समाज के साथ हुआ है। दूसरी सभी पार्टियों ने आदिवासी समाज के जल, जंगल और ज़मीन पर डाका डाला और उनसे छीन कर बड़ी-बड़ी कंपनियों को दे दिया। केवल आम आदमी पार्टी ही आदिवासी समाज के अधिकारों के लिए लड़ रही है। आज आदिवासी नेता चैतर वसावा एक झूठे केस में जेल में हैं, क्योंकि वे आदिवासी समाज की आवाज़ उठा रहे थे। हम सभी उनके जल्द बाहर आने के लिए प्रार्थना करते हैं।

अरविंद केजरीवाल ने एक वीडियो संदेश जारी कर आदिवासी समाज के लोगों से कहा कि पिछले 75 साल में आदिवासी समाज के साथ सबसे ज्यादा अन्याय हुआ है। 75 साल में देश ने तरक्की की, बाकी सभी समाज के लोगों ने तरक्की की, लेकिन आदिवासी समाज पीछे रह गया। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि आदिवासी समाज को जानबूझकर पीछे रखा गया। उनके जितने भी संसाधन थे, उन पर डाका डाला गया। जल, जंगल और जमीन आदिवासी समाज का पैदाइशी अधिकार है, लेकिन इन्हें समाज से छीनकर बड़ी-बड़ी कंपनियों को दे दिया गया क्योंकि बाकी पार्टियों के नेता चोर और भ्रष्टाचारी थे।

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि आम आदमी पार्टी आपके अधिकारों के लिए लड़ रही है और इसके लिए कितनी ही बार हमारे नेता जेल गए हैं। चैतर वसावा आदिवासी समाज का बेटा और भाई है। वह आदिवासी समाज को हक दिलवाने के लिए न जाने कितनी बार जेल गए हैं। ये लोग पेसा कानून तो ले आए, लेकिन उसे लागू नहीं किया। समाज और ग्राम सभा से पूछे बिना ही ये सारे निर्णय ले लेते हैं। आज चैतर वसावा जेल में है क्योंकि वह आदिवासी समाज के लिए लड़ रहा है। वह जल्दी बाहर आए, इसके लिए प्रार्थना करना।

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बेंगलुरु के 3-Star और 5-Star होटलों में बड़ी फूड सेफ्टी जांच, Expired दूध-मांस और खराब सब्जियां मिलने से मचा हड़कंप

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बेंगलुरु के बड़े और लग्जरी होटलों की रसोइयों में फूड सेफ्टी को लेकर बड़ी कार्रवाई की गई है। फूड सेफ्टी एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन और एफएसएसएआई की टीमों ने शहर के 26 होटलों में अचानक निरीक्षण किया। इस दौरान कई जगहों पर एक्सपायर्ड खाद्य सामग्री, खराब मांस और मछली, सड़ी हुई सब्जियां, फंगस लगी सब्जियां और एक्सपायर्ड बेकरी उत्पाद पाए गए।

इस कार्रवाई के लिए 30 निरीक्षण टीमें तैनात की गई थीं। अधिकारियों ने अलग-अलग खाद्य पदार्थों के 35 सैंपल लिए हैं, जिन्हें प्रयोगशाला जांच के लिए भेजा गया है। वहीं, जो खाद्य सामग्री एक्सपायर्ड या इस्तेमाल के लायक नहीं पाई गई, उसे जब्त कर नष्ट कर दिया गया।

जांच के दौरान द ललित अशोक से करीब 76 किलो मांस, 200 किलो सब्जियां और 32 लीटर एक्सपायर्ड दूध बरामद किया गया। ताज यशवंतपुर से करीब 72 किलो मांस और मछली, जबकि फोर सीजन्स होटल से लगभग 19 किलो मांस मिला। शांगरी-ला होटल से करीब 15 किलो मांस और विवांता बेंगलुरु व्हाइटफील्ड से लगभग 3 किलो एक्सपायर्ड बेकरी उत्पाद हटाए गए।

सबसे बड़ी बरामदगी में से एक रेडिसन ब्लू एट्रिया से हुई, जहां करीब 105 किलो एक्सपायर्ड खाद्य सामग्री मिली। इसमें लगभग 50 किलो चिकन, 25 किलो मांस, 23 किलो मछली और 7 किलो सब्जियां शामिल थीं। इसके अलावा कुछ होटलों की रसोई और स्टोरेज एरिया में साफ-सफाई से जुड़ी गंभीर कमियां भी सामने आईं।

अधिकारियों को कुछ सब्जियों पर फंगस मिली, जबकि कई जगह खाद्य सामग्री को सही तरीके से स्टोर नहीं किया गया था। शाकाहारी और मांसाहारी खाद्य पदार्थों को अलग-अलग रखने में भी लापरवाही सामने आई। कुछ उत्पादों पर जरूरी लेबलिंग नियमों का पालन नहीं किया गया था।

निरीक्षण के दौरान चिकन, मटन, मछली, दूध, खाना पकाने के तेल, मसाले, चीज और सॉस समेत कई खाद्य पदार्थों के सैंपल लिए गए हैं। इनकी प्रयोगशाला जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि संबंधित खाद्य पदार्थ फूड सेफ्टी मानकों पर खरे उतरते हैं या नहीं।

जहां नियमों का उल्लंघन पाया गया है, वहां होटल प्रबंधन को नोटिस जारी किए गए हैं। प्रयोगशाला रिपोर्ट और निरीक्षण के निष्कर्षों के आधार पर आगे कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

कर्नाटक के स्वास्थ्य मंत्री यूटी खादर ने कहा कि इस अभियान की शुरुआत बड़े और लग्जरी होटलों से इसलिए की गई है, ताकि यह स्पष्ट संदेश दिया जा सके कि होटल चाहे कितना भी बड़ा या महंगा हो, फूड सेफ्टी के नियम सभी के लिए समान हैं।

अब अधिकारियों की नजर उन फूड स्टोरेज और डिस्ट्रीब्यूशन सेंटरों पर भी है, जहां से होटलों और कैटरिंग संस्थानों को खाद्य सामग्री की सप्लाई होती है। बेंगलुरु में हुई इस कार्रवाई ने खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता, साफ-सफाई और सुरक्षित भंडारण को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, पूरे मामले की अंतिम तस्वीर प्रयोगशाला रिपोर्ट और आगे होने वाली कानूनी कार्रवाई के बाद ही साफ होगी।

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शहरी सहकारी बैंकों को अमित शाह की बड़ी अपील, तकनीक और पारदर्शिता पर दिया जोर

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केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने देश के शहरी सहकारी बैंकों से बदलते समय के साथ कदम मिलाकर चलने और आधुनिक तकनीक को अपनाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि आज के दौर में बैंकों के लिए तकनीकी रूप से मजबूत होना, अपने कामकाज में पारदर्शिता लाना और ग्राहकों को आधुनिक बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध कराना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के बीच शहरी सहकारी बैंकों को अपनी कार्यप्रणाली में बदलाव लाना होगा, ताकि वे प्रतिस्पर्धा के दौर में मजबूती से आगे बढ़ सकें।

मुंबई में नेशनल अर्बन कोऑपरेटिव फाइनेंस एंड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड यानी NUCFDC के नए कार्यालय के उद्घाटन के अवसर पर अमित शाह ने कहा कि बैंकों को केवल अपने विकास पर ध्यान नहीं देना चाहिए, बल्कि अपने ग्राहकों की आर्थिक तरक्की को भी प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जब बैंक से जुड़े ग्राहक आर्थिक रूप से मजबूत और खुशहाल होंगे, तो इसका सीधा फायदा बैंक के विकास को भी मिलेगा।

अमित शाह ने देश के सभी शहरी सहकारी बैंकों से एक साल के भीतर NUCFDC से जुड़ने की अपील की। उन्होंने बताया कि NUCFDC देश के शहरी सहकारी बैंकों के लिए शीर्ष संस्था और स्व-नियामक संगठन के रूप में काम करती है। RBI से मंजूरी प्राप्त यह संस्था सहकारी बैंकिंग क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए पूंजी, आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर और तरलता सहायता जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराती है।

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि देश में करीब 1,400 शहरी सहकारी बैंक हैं, जिनमें से लगभग 690 बैंक पहले ही NUCFDC के सदस्य बन चुके हैं। उन्होंने कहा कि बाकी बैंकों को भी अगले एक साल के भीतर इस संस्था से जुड़ना चाहिए, ताकि शहरी सहकारी बैंकिंग व्यवस्था को और मजबूत बनाया जा सके।

अमित शाह ने कहा कि भारत को आर्थिक रूप से मजबूत और समृद्ध बनाने के लिए देश के आम लोगों की आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि यह लक्ष्य केवल पूंजी बाजार के सहारे हासिल नहीं किया जा सकता। इसके लिए स्वरोजगार और आर्थिक अवसरों की एक मजबूत व्यवस्था विकसित करने की जरूरत है और इसमें शहरी सहकारी बैंक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

उन्होंने ‘सहकार से समृद्धि’ के विचार पर जोर देते हुए कहा कि सहकारी बैंकिंग का उद्देश्य केवल बैंकों को आर्थिक रूप से मजबूत करना नहीं होना चाहिए। इसके साथ यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि बैंक से जुड़े ग्राहकों और आम लोगों की आर्थिक स्थिति में सुधार हो। उन्होंने कहा कि ग्राहकों की प्रगति से ही बैंकों के विकास को भी मजबूती मिलेगी।

RBI और शहरी सहकारी बैंकों के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत पर जोर देते हुए अमित शाह ने कहा कि दोनों के बीच मौजूद धारणा के अंतर को दूर करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय बैंक और सहकारी बैंकों को एक-दूसरे की भूमिका, जरूरतों और चुनौतियों को बेहतर तरीके से समझना होगा। इससे बैंकिंग क्षेत्र में विश्वास और सहयोग को और मजबूत किया जा सकता है।

सहकारिता मंत्री के रूप में अपने पांच साल के अनुभव का जिक्र करते हुए अमित शाह ने कहा कि जब भी सहकारी क्षेत्र ने भरोसे के साथ RBI के सामने अपनी समस्याएं और जरूरतें रखी हैं, तब केंद्रीय बैंक की ओर से सक्रिय सहयोग मिला है। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी बेहतर समन्वय के जरिए सहकारी बैंकिंग क्षेत्र को और मजबूत किया जा सकता है।

अमित शाह ने शहरी सहकारी बैंकों से कर्मचारियों को आधुनिक तकनीक की ट्रेनिंग देने, बैंकिंग सेवाओं को डिजिटल और सुविधाजनक बनाने तथा अपने कामकाज में अधिक पारदर्शिता लाने की अपील की। उन्होंने कहा कि ग्राहकों को बेहतर और आधुनिक सेवाएं उपलब्ध कराने के साथ-साथ बैंकों को अपनी कार्यप्रणाली में भी लगातार सुधार करना होगा।

कुल मिलाकर, अमित शाह का संदेश साफ है कि तकनीक, पारदर्शिता और बेहतर ग्राहक सेवा आने वाले समय में शहरी सहकारी बैंकों की मजबूती के लिए बेहद महत्वपूर्ण होंगी। सरकार का जोर सहकारी बैंकिंग क्षेत्र को आधुनिक बनाने के साथ-साथ इसे आम लोगों की आर्थिक तरक्की का मजबूत माध्यम बनाने पर है।

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