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आज से चारधाम यात्रा शुरू, 18.25 लाख श्रद्धालुओं ने कराया रजिस्ट्रेशन
उत्तराखंड में चारधाम यात्रा शनिवार से शुरू हो गई है. ऋषिकेश में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 10 बसों को यमुनोत्री और गंगोत्री धाम के लिए रवाना किया. 19 अप्रैल को यमुनोत्री धाम और गंगोत्री धाम के जब कपाट खुलेंगे उस वक्त ये यात्री वहां मौजूद रहेंगे. इस साल चार धाम यात्रा के लिए अब तक 18.25 लाख श्रद्धालुओं ने रजिस्ट्रेशन करवा लिया है. वहीं, पिछले साल 23 लाख श्रद्धालुओं ने रजिस्ट्रेशन करवाया था.
ऋषिकेश और हरिद्वार में गुरुवार से ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन भी शुरू हो गए है. इस साल सबसे पहले मध्यप्रदेश के शहडोल के 100 यात्रियों ने रजिस्ट्रेशन करवाया था. सभी यमुनोत्री और गंगोत्री के दर्शन करेंगे.
केदारनाथ-बद्रीनाथ मंदिर में गैर-हिंदुओं की एंट्री बैन
बद्रीनाथ और केदारनाथ मंदिर में इस बार गैर-हिंदुओं की एंट्री पर रोक रहने वाली है. सिर्फ हिंदू, सिख, जैन और बौद्ध धर्म के लोग ही बद्रीनाथ और केदारनाथ मंदिर में एंट्री दी जाएगी. अन्य धर्म के लोगों को कैसे मंदिर में एंट्री करने से रोका जाएगा, इसके लिए मंदिर समिति ने स्पष्ट निर्देश नहीं दिए हैं.
मंदिर में दोपहर में नहीं होगी विशेष पूजा
केदारनाथ मंदिर के गर्भगृह में श्रद्धालुु अब फूल और गंगाजल नहीं चढ़ा पाएंगे. मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने बताया कि विशेष पूजा दोपहर में नहीं की जाएगी. रात में 11 बजे से सुबह 4 बजे के बीच ही अब विशेष पूजा करवाई जाएगी.
54 हजार गाड़ियों के लिए 118 पार्किंग जोन
यात्रा मार्ग पर वाहन सुबह चार बजे से रात 10 बजे तक चल सकते हैं. इसके बाद उन्हें चेक पोस्ट पर रोक दिया जाएगा. यात्रा मार्ग को 16 सुपरजोन में बांटा गया है. वहां, 54 हजार गाड़ियों के लिए 118 पार्किंग जोन बनाए गए हैं. केदारनाथ में पैदल यात्रा से पहले बुजुर्ग और ब्लड प्रेशर के मरीज गौरीकुंड में जांच करवाई जा सकती है.
यात्रा मार्ग पर 48 हॉल्टिंग प्वाइंट
यात्रा मार्ग पर 48 हाल्टिंग प्वाइंट बनाए गए हैं. प्राकृतिक आपदा की स्थिति में यहां 1.18 लाख लोग रुक सकते हैं. यात्रा मार्ग पर 80 ऐसे प्वाइंट चिन्हित किए गए हैं, जहां भूस्खलन की आशंका है. यहां आपातकालीन टीमें भी तैनात की गईं हैं.
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Waiver on Russian Oil Imports: रूसी तेल पर अमेरिका ने एक महीने की छूट बढ़ाई, जानें क्या है नया आदेश
कुछ दिन पहले तक अमेरिका साफ कह रहा था कि वह रूस से तेल खरीद पर दी गई छूट को आगे नहीं बढ़ाएगा, लेकिन अब अचानक फैसला बदल गया है। अमेरिका ने रूस से पेट्रोलियम उत्पादों की खरीद पर दी गई छूट को एक महीने के लिए बढ़ा दिया है।
क्या है अमेरिकी वित्त मंत्रालय का नया आदेश?
अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने शुक्रवार देर रात एक नया आदेश (जनरल लाइसेंस संख्या 134B) जारी किया है। इस आदेश के मुताबिक, रूसी तेल पर लगे प्रतिबंधों से मिली छूट अब 16 मई 2026 तक लागू रहेगी। हालांकि, इसमें एक छोटी सी शर्त है, यह छूट केवल उसी तेल पर मिलेगी जो 17 अप्रैल या उससे पहले ही समुद्र में जहाजों पर लद चुका था।
इससे पहले, अमेरिका ने भारत समेत कई देशों को मार्च में विशेष छूट दी थी, जिसकी समयसीमा 11 अप्रैल को खत्म हो गई थी। अब इस नई मोहलत से उन देशों को राहत मिलेगी जिनके जहाज अभी रास्ते में हैं।
नया नियम क्या कहता है?
अमेरिकी वित्त मंत्रालय के आदेश के मुताबिक, अब जनरल लाइसेंस 134A की जगह 134B लागू किया गया है। पुराना लाइसेंस 11 अप्रैल को खत्म हो गया था, जबकि नया लाइसेंस 17 अप्रैल 2026 से प्रभावी हो चुका है और 16 मई तक मान्य रहेगा।
किन पर लागू नहीं होगी यह छूट?
अमेरिका ने साफ कर दिया है कि यह राहत हर किसी के लिए नहीं है। ईरान, उत्तर कोरिया, क्यूबा या यूक्रेन के कुछ हिस्सों से जुड़े किसी भी व्यक्ति या संस्था के साथ होने वाले लेनदेन इस छूट के दायरे में नहीं आएंगे। यानि कुछ देशों और संस्थाओं पर पाबंदियां पहले की तरह जारी रहेंगी।
स्कॉट बेसेंट के बयान के बाद आया यू-टर्न
इस पूरी कहानी में सबसे बड़ा ट्विस्ट बुधवार को आया था। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने साफ तौर पर कहा था कि अमेरिका अब रूसी या ईरानी तेल पर किसी भी तरह की छूट की अवधि को आगे नहीं बढ़ाएगा। उनके इस सख्त बयान के बाद कयास लगाए जा रहे थे कि अब तेल की सप्लाई कम होगी और दाम आसमान छुएंगे। लेकिन शुक्रवार रात आते-आते अमेरिकी सरकार ने नया लाइसेंस जारी कर सबको सरप्राइज दे दिया।
ईरान-इजरायल तनाव और तेल का खेल
अमेरिका के इस फैसले के पीछे की सबसे बड़ी वजह मिडिल-ईस्ट में चल रहा तनाव है। ईरान और इजरायल के बीच युद्ध जैसी स्थिति बनने के बाद से ही कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने लगी थीं। अगर अमेरिका रूसी तेल को बाजार में आने से पूरी तरह रोक देता, तो सप्लाई चेन ठप हो सकती थी।
आंकड़ों की मानें तो पिछली छूट की वजह से रूस का करीब 14 करोड़ बैरल तेल ग्लोबल मार्केट तक पहुंच सका। अगर यह तेल बाजार में नहीं आता, तो दुनिया के कई देशों में पेट्रोल-डीजल के दाम बेकाबू हो सकते थे। इसी खतरे को भांपते हुए अमेरिका ने फिलहाल एक महीने का ब्रीथिंग स्पेस दिया है।
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पंजाब में मंत्री संजीव अरोड़ा के घर ईडी की रेड पर AAP राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा ने BJP पर उठाए सवाल
आम आदमी पार्टी ने पंजाब में लगातार हो रही प्रवर्तन निदेशालय की छापेमारियों को लेकर केंद्र की भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा ने कहा कि पिछले तीन दिनों में पंजाब में AAP के दो वरिष्ठ नेताओं पर ED की रेड होना यह साफ दिखाता है कि यह कोई कानूनी कार्रवाई नहीं, बल्कि चुनाव से पहले रची गई राजनीतिक साजिश है। जो दिखाता है कि बीजेपी सत्ता हथियाने के लिए हर सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग करती है।
अनुराग ढांडा ने कहा कि राज्यसभा सांसद अशोक मित्तल और कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा के घरों पर लगातार कार्रवाई यह साबित करती है कि भाजपा सरकार एजेंसियों को अपने राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर ये कार्रवाई सच में भ्रष्टाचार के खिलाफ है, तो अब तक आप नेताओं पर हुई सैकड़ों ED और CBI रेड में आखिर कितना पैसा बरामद हुआ?
उन्होंने कहा कि तथ्य यह है कि अब तक किसी भी बड़े मामले में कोई ठोस बरामदगी नहीं हुई है। अधिकांश मामलों में अदालतों में जाकर केस बिना सबूतों के ढह जाते हैं। इसके बावजूद लगातार रेड करना यह दिखाता है कि मकसद न्याय नहीं, बल्कि विपक्ष को डराना और बदनाम करना है। और जनता के बीच भय पैदा करना है।
अनुराग ढांडा ने कहा कि देश की जनता का पैसा इन एजेंसियों पर खर्च होता है, अधिकारियों की सैलरी, ऑपरेशन, जांच सब का खर्च टैक्स पेयर्स से लिया जाता है. लेकिन इसका इस्तेमाल जनता के हित में नहीं, बल्कि भाजपा के राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाने में किया जा रहा है।
उन्होंने तीखा कटाक्ष करते हुए कहा कि भाजपा की हालत पंजाब में इतनी कमजोर है कि उनके पास 117 सीटों पर लड़ने के लिए मजबूत उम्मीदवार तक नहीं हैं। इसी कमी को छुपाने के लिए वे ED और CBI के जरिए विपक्ष को दबाने की कोशिश कर रहे हैं।
अनुराग ढांडा ने कहा कि यह पैटर्न अब साफ हो चुका है, जहां चुनाव आते हैं, वहां सबसे पहले ED और CBI पहुंचती हैं। दिल्ली, झारखंड, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल- हर जगह यही स्क्रिप्ट दोहराई गई है। अब पंजाब को भी उसी प्रयोगशाला में बदलने की कोशिश हो रही है।
उन्होंने कहा कि अगर यही लोकतंत्र है, तो फिर तानाशाही किसे कहते हैं? आज हालात यह हैं कि सरकार अपने विरोधियों को खत्म करने के लिए जांच एजेंसियों का खुला दुरुपयोग कर रही है और जवाबदेही से पूरी तरह बच रही है।
अनुराग ढांडा ने कहा कि पंजाब वीरों और संघर्ष करने वाली जनता की धरती है। यहां डराने और दबाने की राजनीति कभी सफल नहीं हुई और आगे भी नहीं होगी। उन्होंने चेतावनी दी कि जितना ज्यादा दमन होगा, उतनी ही मजबूती से जनता जवाब देगी।
उन्होंने अंत में कहा कि यह लड़ाई अब सिर्फ आम आदमी पार्टी की नहीं रही, बल्कि लोकतंत्र बनाम तानाशाही की लड़ाई बन चुकी है। पंजाब की जनता आने वाले चुनाव में भाजपा को इसका करारा जवाब देगी और साफ संदेश देगी कि एजेंसियों के दम पर राजनीति नहीं चलती।
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CM भगवंत सिंह मान की अगुवाई में मंत्रीमंडल द्वारा दरियाओं, चोओं और सेम नालों से गाद निकालने के लिए हरी झंडी
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की अगुवाई में पंजाब मंत्रीमंडल ने जनहितैषी नीति को मंजूरी दे दी है। इसके तहत जमीन मालिकों को अपनी लागत पर दरियाओं, चोओं और नालों से गाद निकालने की इजाजत दे दी गई है। इस नीति के अंतर्गत दरियाओं, चोओं और नालों से निकाली गई सामग्री को मुफ्त इस्तेमाल करने का अधिकार भी दिया गया है। इसका उद्देश्य मॉनसून से पहले बाढ़ की तैयारियों में तेजी लाना और महत्वपूर्ण हिस्सों में दरियाओं के प्रवाह को बेहतर बनाना है।
यह प्रगटावा करते हुये मुख्यमंत्री दफ्तर ने कहा, ‘‘मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की अगुवाई में पंजाब कैबिनेट ने सतलुज, ब्यास और सिसवां दरियाओं समेत दरियाओं/चोओं/सेम नालों की सफाई के लिए जमीन मालिकों को अनुमति देने का बड़ा जनहितैषी फैसला लिया है। यह फैसला मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की अध्यक्षता में हुई मंत्री परिषद की बैठक में लिया गया।’’
जमीन मालिकों को अपनी लागत पर दरियाओं, चोओं और नालों को साफ करने तथा खुदाई की गई सामग्री का मुफ्त इस्तेमाल करने की अनुमति दी गई है।
मंत्रीमंडल ने संबंधित जमीन मालिकों को सतलुज, ब्यास और सिसवां समेत दरियाओं/चोओं/नालों से गाद निकालने और खुदाई की गई सामग्री को मुफ्त में अपनी लागत पर इस्तेमाल करने की नीति को मंजूरी दे दी है। प्रवक्ता ने आगे कहा कि यह पहल महत्वपूर्ण जगहों पर तेजी से गाद हटाने, दरियाओं/चोओं के प्रवाह की क्षमता बढ़ाने और बाढ़ के जोखिम को कम करने में मदद करेगी, जिससे सार्वजनिक और निजी संपत्ति की सुरक्षा होगी।
पंजाब सरकार ने 9 महत्वपूर्ण जगहों की पहचान की है जहां आगामी मॉनसून सीजन को देखते हुए पानी के सुचारू प्रवाह को सुनिश्चित करने के लिए गाद निकालने की जरूरत है। यदि इन जगहों पर गाद निकालने की प्रक्रिया शुरू नहीं की गई तो इससे गाद जमा हो सकती है, दरियाओं/चोओं के प्रवाह की क्षमता घट सकती है और आने वाले मॉनसून के दौरान बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है। इसके अलावा खुदाई की गई सामग्री का प्रयोग जारी नहीं रखा जा सकता।
मॉनसून सीजन 2026-27 से पहले समय पर गाद निकालने को सुनिश्चित करने और संवेदनशील जगहों को हल करने के लिए संबंधित जमीन मालिकों को अपनी लागत पर गाद निकालने की अनुमति देने का फैसला किया गया है, जिसमें खुदाई की गई सामग्री का अपने इस्तेमाल के लिए मुफ्त उपयोग किया जाएगा। यह संभावित बाढ़ के खतरों और संबंधित देनदारियों को कम करते हुए गाद निकालने के कामों को तेजी से पूरा करने में मदद करेगा।
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की अगुवाई वाली कैबिनेट ने ग्राम पंचायतों के सरपंचों/जिला परिषदों और पंचायत समितियों के चेयरमैन/वाइस चेयरमैन के पदों के लिए पंजाब आरक्षण के नियम-6 में संशोधन को मंजूरी दे दी है।
एक अन्य महत्वपूर्ण फैसले में मंत्रीमंडल ने ग्राम पंचायतों के सरपंचों और पंचायत समितियों के चेयरमैन तथा वाइस चेयरमैन के लिए पंजाब आरक्षण के नियम-6 और जिला परिषदों के नियम-1994 में संशोधन को भी मंजूरी दे दी है, जिसका उद्देश्य विभिन्न श्रेणियों में प्रतिनिधित्व को तर्कसंगत बनाना है।
इस कदम का उद्देश्य अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जाति की महिलाओं, महिलाओं और जनरल श्रेणी के आरक्षण के लिए हर श्रेणी में प्रतिनिधित्व को उचित बनाना है। इसमें कहा गया है कि यदि राज्य में जिला परिषदों की कुल संख्या का 10 प्रतिशत या इससे अधिक प्रभावित होता है तो अनुसूचित जाति, अनुसूचित जाति की महिलाएं, महिलाएं और जनरल श्रेणियों के रोटेशन के लिए रोस्टर नए सिरे से तैयार किया जाएगा।
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