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Amit Shah की मोगा रैली से पहले, मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने पंजाब भाजपा नेताओं से पूछा: क्या आप पंजाब के हक की मांग करेंगे या चुप रहेंगे?
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 14 मार्च को मोगा में की राजनीतिक रैली से पहले, पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने भाजपा की केंद्र सरकार से कई तीखे सवाल पूछे और पंजाब से अपील की रैली के दौरान भाजपा नेता अमित शाह से साफ जवाब मांगें।
मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि केंद्र की भाजपा सरकार पिछले कई सालों से पंजाब के साथ लगातार भेदभाव कर रही है और उसके साथ सौतेली माँ जैसा बर्ताव कर रही है। उन्होंने कहा कि पंजाब में आप सरकार के चार साल होने के बावजूद, केंद्र ने बार-बार जायज़ फंड रोके हैं और राज्य की आर्थिकता को कमज़ोर करने की कोशिश की है। मंत्री चीमा ने कहा कि आज़ादी की लड़ाई से लेकर देश का पेट भरने तक, पंजाब हमेशा चट्टान की तरह देश के साथ खड़ा रहा है। पंजाबियों ने भारत की आज़ादी के लिए बहुत कुर्बानियां दीं और हरित क्रांति के बाद देश की खाद्य सुरक्षा में बहुत बड़ा योगदान दिया। लेकिन आज, भाजपा की केंद्र सरकार जानबूझकर पंजाब को नज़रअंदाज़ कर रही है।
पंजाब के मंत्री ने कहा कि पंजाब के किसानों के बड़े विरोध प्रदर्शन के बाद तीन कृषि कानूनों को रद्द करने के बाद, भाजपा लीडरशिप में पंजाब के प्रति रंजिश पैदा हो गई है और तब से वे राज्य को आर्थिक रूप से कमज़ोर करने की कोशिश कर रहे हैं।
हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि केंद्र ने रूरल डेवलपमेंट फंड (आडीएफ) समेत कई स्कीमों के तहत पंजाब के हज़ारों करोड़ रुपये रोक रखे हैं।
उन्होंने याद दिलाया कि 2022 में केंद्र सरकार ने इस बात पर एतराज़ जताया था कि आरडीएफ के पैसे का गलत इस्तेमाल हो रहा है। उन्होंने आगे कहा कि पंजाब सरकार ने तुरंत कानून में बदलाव करके यह पक्का किया कि आरडीएफ फंडों का इस्तेमाल सिर्फ़ ग्रामीण मंडियों और खेती से जुड़ी गांव की सड़कों के लिए ही किया जाएगा। इसके बावजूद, केंद्र पंजाब का बकाया रोके हुए है।
हरपाल सिंह चीमा ने बताया कि उन्होंने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ मीटिंग में बार-बार ये बातें उठाई हैं और ग्रामीण विकास निधि, नेशनल हेल्थ मिशन, प्रधानमंत्री आवास योजना और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत पंजाब के बकाया फंड जारी करने की मांग की है। लेकिन, केंद्र ने किसी न किसी बहाने पेमेंट में लगातार देरी की है।
उन्होंने आगे कहा कि भाजपा की केंद्र सरकार ने पानी के संसाधनों पर पंजाब के हक को भी कमज़ोर करने की कोशिश की है। एसवाईएल नहर के मुद्दे और भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड (बीबीएमबी) से जुड़े झगड़ों का ज़िक्र करते हुए हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि केंद्र ने बार-बार पानी में पंजाब का सही हिस्सा कम करने की कोशिश की है। चीमा ने कहा कि पंजाब ने हरियाणा समेत पड़ोसी राज्यों से किए अपने वादे हमेशा पूरे किए हैं, लेकिन भाजपा की केंद्र सरकार ऐसे फैसले ले रही है जो पंजाब के अधिकारों के लिए खतरा हैं। पंजाब अपने जायज़ दावों से कभी समझौता नहीं करेगा।
एक और चिंता ज़ाहिर करते हुए, हरपाल सिंह चीमा ने सवाल किया कि क्या खेती में प्रस्तावित भारत-अमेरिका ट्रेड एग्रीमेंट भारतीय किसानों को नुकसान पहुंचाएगा। अमेरिकी कृषि मंत्री की उस टिप्पणी का ज़िक्र करते हुए जिसमें कहा गया था कि भारतीय बाज़ार तक पहुँच से अमेरिकी किसानों को फ़ायदा होगा, उन्होंने कहा कि अगर अमेरिकी किसान भारतीय बाज़ार तक पहुँच बनाकर तरक्की करते हैं, तो क्या इसका मतलब है कि पंजाब के किसानों को नुकसान होगा? इस देश के लोग जवाब के हक़दार हैं।
हरपाल सिंह चीमा ने यह भी कहा कि ऐसा लगता है कि मोदी सरकार बाहरी दबाव को भारतीय किसानों और व्यापारियों पर असर डालने वाले आर्थिक फ़ैसले लेने दे रही है, जिससे लाखों लोगों की रोज़ी-रोटी खतरे में पड़ सकती है।
उन्होंने सुनील जाखड़, रवनीत सिंह बिट्टू और अश्वनी शर्मा समेत पंजाब भाजपा नेताओं से अपील की कि वे हिम्मत दिखाएँ और रैली के दौरान सीधे अमित शाह के सामने पंजाब की चिंताएं उठाएं। हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि अगर उन्हें सच में पंजाब की परवाह है, तो उन्हें अमित शाह से सभी बकाया फ़ंड, आरडीएफ बकाया, नेशनल हेल्थ मिशन फ़ंड, प्रधानमंत्री आवास योजना और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के पैसे के साथ-साथ जीएसटी लागू होने के बाद पंजाब को हुए आर्थिक नुकसान का मुआवज़ा माँगना चाहिए।
उन्होंने यह भी मांग की कि केंद्र पंजाब के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित 1,600 करोड़ रुपये के बाढ़ राहत पैकेज को जारी करे और भयानक बाढ़ के बाद पंजाब सरकार द्वारा अनुमानित 20,000 करोड़ रुपये के नुकसान के मुआवजे के लिए समय सीमा स्पष्ट करे।
हरपाल सिंह चीमा ने आगे सवाल किया कि केंद्र ने पाकिस्तान के साथ पंजाब की 550 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा को मजबूत करने के लिए पर्याप्त वित्तीय सहायता क्यों नहीं दी, जो सीमा पार से नशा तस्करी और अन्य अवैध गतिविधियों को रोकने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
मंत्री ने ग्रामीण रोजगार योजनाओं में किए गए बदलावों की भी आलोचना की, जिससे गरीब और दलित परिवार प्रभावित हुए हैं। उन्होंने कहा कि मनरेगा के तहत लगभग 70 प्रतिशत श्रमिक अनुसूचित जाति के परिवारों से हैं और मांग की कि इस योजना का मूल ढांचा बहाल किया जाए ताकि कमजोर परिवारों की रोजी-रोटी न छिन जाए। मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि पंजाब के लोग बहुत करीब से देख रहे हैं। कल की रैली नारे या राजनीतिक नाटक के बारे में नहीं होनी चाहिए। भाजपा नेतृत्व को पंजाब के जायज सवालों का जवाब देना चाहिए और राज्य को मिलने वाले फंड को तुरंत जारी करना सुनिश्चित करना चाहिए।
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गुरुग्राम में किसने खरीदा ₹271 करोड़ का देश का सबसे महंगा पेंटहाउस!
भारत के लग्जरी रियल एस्टेट बाजार में गुरुग्राम ने एक बड़ी उपलब्धि दर्ज की है। डीएलएफ के सुपर-लग्जरी प्रोजेक्ट ‘द डहलियास’ में करीब ₹271 करोड़ का पेंटहाउस बिकने की खबर सामने आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस महंगी प्रॉपर्टी को कारोबारी मानव सरदाना ने खरीदा है, जो ‘इंपीरियल ऑटो’ से जुड़े रहे हैं। इस डील ने गुरुग्राम की प्रीमियम रियल एस्टेट मार्केट में नई चर्चा छेड़ दी है।
‘द डहलियास’ को डीएलएफ का सबसे महत्वाकांक्षी सुपर-लग्जरी प्रोजेक्ट बताया जा रहा है। यह प्रोजेक्ट 29 मंजिलों वाले 8 टावरों में फैला है, जिसमें कुल 420 अपार्टमेंट्स हैं। इसकी कुल प्रोजेक्ट वैल्यू करीब ₹40,000 करोड़ से अधिक बताई जा रही है। प्रोजेक्ट को खास तौर पर बेहद हाई-नेट-वर्थ ग्राहकों को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, ₹271 करोड़ में खरीदे गए इस पेंटहाउस का सुपर एरिया करीब 17,200 वर्ग फीट है, जबकि इसका कारपेट एरिया लगभग 10,500 वर्ग फीट बताया गया है। इस हिसाब से सुपर एरिया के आधार पर इसकी कीमत करीब ₹1.58 लाख प्रति वर्ग फीट और कारपेट एरिया के हिसाब से लगभग ₹2.6 लाख प्रति वर्ग फीट बैठती है।
इतनी बड़ी कीमत के साथ यह सौदा भारत के सबसे महंगे आवासीय संपत्ति लेनदेन में शामिल हो गया है। खास बात यह है कि कारपेट एरिया के हिसाब से कीमत गुरुग्राम को देश के सबसे महंगे रिहायशी बाजारों में शामिल मुंबई की प्रीमियम लोकेशनों के काफी करीब ले आती है।
मुंबई के वर्ली और अन्य प्रमुख इलाकों में भी लग्जरी घरों की कीमतें कई बार ₹2 लाख प्रति वर्ग फीट से ऊपर पहुंच जाती हैं। ऐसे में गुरुग्राम में ₹2.6 लाख प्रति वर्ग फीट के करीब की यह डील शहर में बढ़ती लग्जरी हाउसिंग डिमांड और प्रीमियम प्रॉपर्टी की कीमतों को दर्शाती है।
गुरुग्राम पिछले कुछ वर्षों में देश के प्रमुख लग्जरी रियल एस्टेट बाजारों में तेजी से उभरा है। बड़े कॉरपोरेट हाउस, उद्योगपति और हाई-नेट-वर्थ खरीदार यहां बड़े आकार के अपार्टमेंट, पेंटहाउस और अल्ट्रा-लक्जरी घरों में निवेश कर रहे हैं। ₹271 करोड़ की यह डील इस बात का संकेत मानी जा रही है कि गुरुग्राम में प्रीमियम प्रॉपर्टी का बाजार अब देश के सबसे महंगे रियल एस्टेट बाजारों को टक्कर देने लगा है।
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देश में सबसे ज्यादा अन्याय आदिवासी समाज के साथ हुआ, सिर्फ ‘‘आप’’ लड़ रही आदिवासियों के अधिकारों की लड़ाई- केजरीवाल
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने विश्व आदिवासी दिवस पर देश भर के आदिवासी समाज को बधाई देते हुए कहा कि आजाद भारत में सबसे ज्यादा अन्याय आदिवासी समाज के साथ हुआ है। दूसरी सभी पार्टियों ने आदिवासी समाज के जल, जंगल और ज़मीन पर डाका डाला और उनसे छीन कर बड़ी-बड़ी कंपनियों को दे दिया। केवल आम आदमी पार्टी ही आदिवासी समाज के अधिकारों के लिए लड़ रही है। आज आदिवासी नेता चैतर वसावा एक झूठे केस में जेल में हैं, क्योंकि वे आदिवासी समाज की आवाज़ उठा रहे थे। हम सभी उनके जल्द बाहर आने के लिए प्रार्थना करते हैं।
अरविंद केजरीवाल ने एक वीडियो संदेश जारी कर आदिवासी समाज के लोगों से कहा कि पिछले 75 साल में आदिवासी समाज के साथ सबसे ज्यादा अन्याय हुआ है। 75 साल में देश ने तरक्की की, बाकी सभी समाज के लोगों ने तरक्की की, लेकिन आदिवासी समाज पीछे रह गया। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि आदिवासी समाज को जानबूझकर पीछे रखा गया। उनके जितने भी संसाधन थे, उन पर डाका डाला गया। जल, जंगल और जमीन आदिवासी समाज का पैदाइशी अधिकार है, लेकिन इन्हें समाज से छीनकर बड़ी-बड़ी कंपनियों को दे दिया गया क्योंकि बाकी पार्टियों के नेता चोर और भ्रष्टाचारी थे।
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि आम आदमी पार्टी आपके अधिकारों के लिए लड़ रही है और इसके लिए कितनी ही बार हमारे नेता जेल गए हैं। चैतर वसावा आदिवासी समाज का बेटा और भाई है। वह आदिवासी समाज को हक दिलवाने के लिए न जाने कितनी बार जेल गए हैं। ये लोग पेसा कानून तो ले आए, लेकिन उसे लागू नहीं किया। समाज और ग्राम सभा से पूछे बिना ही ये सारे निर्णय ले लेते हैं। आज चैतर वसावा जेल में है क्योंकि वह आदिवासी समाज के लिए लड़ रहा है। वह जल्दी बाहर आए, इसके लिए प्रार्थना करना।
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बेंगलुरु के 3-Star और 5-Star होटलों में बड़ी फूड सेफ्टी जांच, Expired दूध-मांस और खराब सब्जियां मिलने से मचा हड़कंप
बेंगलुरु के बड़े और लग्जरी होटलों की रसोइयों में फूड सेफ्टी को लेकर बड़ी कार्रवाई की गई है। फूड सेफ्टी एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन और एफएसएसएआई की टीमों ने शहर के 26 होटलों में अचानक निरीक्षण किया। इस दौरान कई जगहों पर एक्सपायर्ड खाद्य सामग्री, खराब मांस और मछली, सड़ी हुई सब्जियां, फंगस लगी सब्जियां और एक्सपायर्ड बेकरी उत्पाद पाए गए।
इस कार्रवाई के लिए 30 निरीक्षण टीमें तैनात की गई थीं। अधिकारियों ने अलग-अलग खाद्य पदार्थों के 35 सैंपल लिए हैं, जिन्हें प्रयोगशाला जांच के लिए भेजा गया है। वहीं, जो खाद्य सामग्री एक्सपायर्ड या इस्तेमाल के लायक नहीं पाई गई, उसे जब्त कर नष्ट कर दिया गया।
जांच के दौरान द ललित अशोक से करीब 76 किलो मांस, 200 किलो सब्जियां और 32 लीटर एक्सपायर्ड दूध बरामद किया गया। ताज यशवंतपुर से करीब 72 किलो मांस और मछली, जबकि फोर सीजन्स होटल से लगभग 19 किलो मांस मिला। शांगरी-ला होटल से करीब 15 किलो मांस और विवांता बेंगलुरु व्हाइटफील्ड से लगभग 3 किलो एक्सपायर्ड बेकरी उत्पाद हटाए गए।
सबसे बड़ी बरामदगी में से एक रेडिसन ब्लू एट्रिया से हुई, जहां करीब 105 किलो एक्सपायर्ड खाद्य सामग्री मिली। इसमें लगभग 50 किलो चिकन, 25 किलो मांस, 23 किलो मछली और 7 किलो सब्जियां शामिल थीं। इसके अलावा कुछ होटलों की रसोई और स्टोरेज एरिया में साफ-सफाई से जुड़ी गंभीर कमियां भी सामने आईं।
अधिकारियों को कुछ सब्जियों पर फंगस मिली, जबकि कई जगह खाद्य सामग्री को सही तरीके से स्टोर नहीं किया गया था। शाकाहारी और मांसाहारी खाद्य पदार्थों को अलग-अलग रखने में भी लापरवाही सामने आई। कुछ उत्पादों पर जरूरी लेबलिंग नियमों का पालन नहीं किया गया था।
निरीक्षण के दौरान चिकन, मटन, मछली, दूध, खाना पकाने के तेल, मसाले, चीज और सॉस समेत कई खाद्य पदार्थों के सैंपल लिए गए हैं। इनकी प्रयोगशाला जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि संबंधित खाद्य पदार्थ फूड सेफ्टी मानकों पर खरे उतरते हैं या नहीं।
जहां नियमों का उल्लंघन पाया गया है, वहां होटल प्रबंधन को नोटिस जारी किए गए हैं। प्रयोगशाला रिपोर्ट और निरीक्षण के निष्कर्षों के आधार पर आगे कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
कर्नाटक के स्वास्थ्य मंत्री यूटी खादर ने कहा कि इस अभियान की शुरुआत बड़े और लग्जरी होटलों से इसलिए की गई है, ताकि यह स्पष्ट संदेश दिया जा सके कि होटल चाहे कितना भी बड़ा या महंगा हो, फूड सेफ्टी के नियम सभी के लिए समान हैं।
अब अधिकारियों की नजर उन फूड स्टोरेज और डिस्ट्रीब्यूशन सेंटरों पर भी है, जहां से होटलों और कैटरिंग संस्थानों को खाद्य सामग्री की सप्लाई होती है। बेंगलुरु में हुई इस कार्रवाई ने खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता, साफ-सफाई और सुरक्षित भंडारण को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, पूरे मामले की अंतिम तस्वीर प्रयोगशाला रिपोर्ट और आगे होने वाली कानूनी कार्रवाई के बाद ही साफ होगी।
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