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स्वतंत्रता के बाद पंजाब को गैर-कानूनी तरीके से अपनी राजधानी से वंचित रखा गया है; चंडीगढ़ हमारा है और रहेगा – CM भगवंत सिंह मान
गणतंत्र दिवस पर होशियारपुर में राष्ट्रीय तिरंगा लहराते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने इस अवसर पर पंजाब के संवैधानिक अधिकारों की जोरदार पुष्टि करते हुए अपनी सरकार के शासन रिकॉर्ड का विस्तारपूर्वक विवरण दिया। भारत के स्वतंत्रता संग्राम में पंजाब की बेमिसाल कुर्बानियों और देश के अन्नदाता व खड़गभुजा के रूप में इसकी निरंतर भूमिका को याद करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आजादी के बाद राज्य को इसकी राजधानी और अलग हाई कोर्ट से गैरकानूनी तरीके से वंचित रखा गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि चंडीगढ़, पंजाब यूनिवर्सिटी और इसके पानी के अधिकारों पर पंजाब के दावे को कमजोर करने की कोशिशें सफल नहीं होंगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि पंजाब अपने हितों की रक्षा के लिए हर रोज कानूनी और संवैधानिक कार्रवाई करता रहेगा।
शासन को विरासत और विश्वास से जोड़ते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने श्री गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी दिवस की ऐतिहासिक यादगार, श्री अमृतसर साहिब, श्री आनंदपुर साहिब और तलवंडी साबो को पवित्र शहर का दर्जा दिया है। उन्होंने घोषणा की कि श्री गुरु रविदास जी का 650वां प्रकाश पर्व इस साल 1 से 20 फरवरी, 2027 तक राज्य स्तरीय कार्यक्रमों के माध्यम से मनाया जाएगा।
शासन की दिशा को उजागर करते हुए मुख्यमंत्री ने ‘युद्ध नशे के विरुद्ध’ और ‘गैंगस्टरों पर वार’ के तहत नशों, गैंगस्टरों और नारको-ड्रोन के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई, 10 लाख रुपए तक की सार्वव्यापी स्वास्थ्य सुविधा, रिश्वत के बिना 63,000 से अधिक सरकारी नौकरियां प्रदान करना और सड़क सुरक्षा फोर्स के माध्यम से सड़क हादसों में मौतों में तेजी से कमी आई है। उन्होंने मनरेगा में अनुसूचित जाति और बेजमीन परिवारों को प्रभावित करने वाले बदलावों पर भी चिंता जताई, 1.5 लाख करोड़ रुपए के रिकॉर्ड निवेश का हवाला दिया, जिससे 5.2 लाख नौकरियां पैदा हुईं और 13 से 15 मार्च तक पंजाब निवेश सम्मेलन की घोषणा की।
सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “देश और इसके लोगों के प्रति अथाह योगदान के बावजूद पंजाब के पास अपनी राजधानी नहीं है। आजादी के बाद पंजाब को गैर-कानूनी तौर पर इससे वंचित रखा गया है। स्थिति को और बिगाड़ने के लिए राज्य को इसकी राजधानी, पंजाब यूनिवर्सिटी, पानी और अन्य अधिकारों से वंचित करने के लिए रोजाना साजिशें रची जा रही हैं। यह कभी नहीं होने दिया जाएगा। चंडीगढ़, पंजाब का अभिन्न अंग था, है और हमेशा रहेगा और राज्य सरकार अपनी राजधानी वापस लेने के लिए हर संभव प्रयास करेगी।”
अलग हाई कोर्ट न होने पर गुस्सा जाहिर करते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि पंजाब के पास अपना हाई कोर्ट नहीं है, जबकि उत्तर-पूर्व के छोटे राज्यों की अपनी राजधानियां हैं। उन्होंने कहा, “अपनी हाई कोर्ट की अनुपस्थिति में पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में मामलों की बड़ी संख्या के कारण पंजाबियों को बहुत परेशानियां झेलनी पड़ती हैं।”
देश भर के सभी पंजाबियों और नागरिकों को हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान अपनी जानें कुर्बान करने वाले हजारों देश भक्तों को श्रद्धांजलि अर्पित की।
थल सेना, जल सेना और वायु सेना के बहादुर सैनिकों को सलाम करते हुए मुख्यमंत्री ने देश की प्रभुसत्ता, एकता और अखंडता की रक्षा में उनकी शानदार भूमिका को याद किया। उन्होंने कहा, “1950 में इस दिन, देश का संविधान लागू हुआ था। यह सभी भारतीयों के लिए बहुत खास दिन है। यह बहुत गर्व और संतुष्टि की बात है कि हम दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के गौरवशाली नागरिक हैं।”
इस पवित्र अवसर पर मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने भारतीय संविधान के निर्माता बाबा साहिब डॉ. भीम राव अंबेडकर के संविधान बनाने में दिए गए अनमोल योगदान को श्रद्धा के फूल अर्पित किए। उन्होंने कहा कि पंजाबी इस बात पर गर्व करते हैं कि स्वतंत्रता संग्राम में सबसे अधिक कुर्बानियां पंजाबी योद्धाओं ने दी। उन्होंने कहा, “हर पंजाबी को जुल्म और बेइंसाफी के खिलाफ डटकर खड़े होने की प्रेरणा हमारे महान गुरुओं की शिक्षाओं से मिली है।”
ऐतिहासिक लहरों को याद करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि कूका लहर, बब्बर अकाली लहर, गदर लहर, कामागाटा मारू दुखांत और पगड़ी संभाल जट्टा जैसी आजादी की लहरों का नेतृत्व पंजाबियों ने किया। उन्होंने कहा कि बाबा महाराज सिंह, बाबा राम सिंह, शहीद भगत सिंह, शहीद सुखदेव, लाला लाजपत राय, शहीद ऊधम सिंह, शहीद करतार सिंह सराभा, मदन लाल ढींगरा, दीवान सिंह कालेपानी और सैकड़ों अन्य राष्ट्र नायकों ने भारत की आजादी के लिए अपनी जानें कुर्बान की।
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाबियों ने देश की तरक्की में मिसाली योगदान दिया है और देश की रक्षा तथा इसे अनाज उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने में हमेशा अग्रणी रहे हैं।
किसानों की भूमिका का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब के किसान देश के अन्नदाता हैं, जिनकी कड़ी मेहनत यह सुनिश्चित करती है कि कोई भी भूखा न सोए। “पंजाब, देश के अनाज भंडार में 60 प्रतिशत से अधिक योगदान देता है।” उन्होंने कहा पिछले साल के तबाहीपूर्ण बाढ़ों के दौरान भी पंजाब के किसानों ने केंद्रीय पूल में 156 लाख मीट्रिक टन धान का योगदान दिया। पंजाब के किसानों और सैनिकों के योगदान के कारण राज्य को “देश का अन्नदाता और खड़गभुजा” कहा जाता है।
बाढ़ों के बाद राज्य को फिर पैरों पर खड़ा करने में मददगार बनने वालों के शुक्रगुजार होते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि वे इन योद्धाओं को सिजदा करते हैं जिन्होंने भयानक बाढ़ों के बावजूद पंजाब का जन-जीवन फिर लीक पर डाल दिया। उन्होंने कहा, “प्राकृतिक आपदा के बावजूद राज्य कुछ घंटों में फिर अपने पैरों पर खड़ा हो गया।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि देश की खातिर पंजाब ने अपने कीमती प्राकृतिक संसाधनों उपजाऊ मिट्टी और जल संसाधनों को कुर्बान कर दिया। उन्होंने कहा कि महान कुर्बानियों के बावजूद पंजाब लगातार बेइंसाफी और भेदभाव का सामना कर रहा है और राज्य को अपने हक लेने के लिए कानूनी, विधायी और प्रशासकीय स्तर पर लड़ाई लड़नी पड़ रही है।
पंजाब के साथ सौतेली मां वाला सलूक होने का जिक्र करते हुए भगवंत सिंह मान ने कहा कि इसके हकों को छीनने के लिए साजिशें रची जा रही हैं। उन्होंने कहा, “बी.बी.एम.बी. और पानी पर पंजाब के कानूनी हकों पर छापा मारने की बुरी चालें चली गई थी, लेकिन राज्य सरकार ने इसे सफल नहीं होने दिया।”
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) में बदलाव पर चिंता जताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र ने इस योजना का ढांचा ही बदल दिया है और इससे अनुसूचित जाति वर्ग के मजदूरों, महिलाओं और बेजमीन परिवारों से रोजी-रोटी छीन ली जाएगी। उन्होंने कहा, “देश में अनुसूचित जाति की आबादी का सबसे अधिक अनुपात पंजाब में है। यह नया कानून अनुसूचित जाति भाईचारे के लिए बुरा साबित होगा।”
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि वर्तमान में पंजाब में 19.85 लाख परिवार मनरेगा कामगारों के रूप में रजिस्टर्ड हैं, जिनमें से 12.65 लाख अनुसूचित जाति भाईचारे से संबंधित हैं। उन्होंने कहा, “राज्य सरकार कानून और अदालतों के माध्यम से केंद्र के खिलाफ यह जंग लड़ रही है।”
उन्होंने यह भी कहा कि संविधान में केंद्र-राज्य अधिकार स्पष्ट रूप से परिभाषित होने के बावजूद केंद्र ने ग्रामीण विकास के लिए ग्रामीण विकास फंड (आर.डी.एफ.) रोक दिए हैं।
पंजाब के दृढ़ इरादे को दोहराते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “पंजाब को केंद्र से अपने अधिकार प्राप्त करने के लिए हर रोज लड़ाई लड़नी पड़ती है। मैं यह स्पष्ट कर देता हूं कि पंजाबी कभी नहीं झुके हैं, और न ही वे भविष्य में कभी झुकेंगे।”
फूट डालने वाली ताकतों को चेतावनी देते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाबियों को बांटने के लिए झूठा प्रचार किया जा रहा है, लेकिन राज्य सरकार ऐसे मनसूबों को कभी सफल नहीं होने देगी। उन्होंने गैंगस्टरों और उनके हमदर्दों को सख्त चेतावनी दी कि वे जुर्म का रास्ता छोड़ दें या नतीजे भुगतने के लिए तैयार रहें। “गैंगस्टरों पर वार” अभियान का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि गैंगस्टरों के खिलाफ कार्रवाई जारी है और इन्हें शह देने वालों को भी बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि कानून तोड़ने वालों के प्रति कोई लिहाज नहीं बरता जाएगा। उन्होंने कहा कि हर कीमत पर राज्य में शांति, एकता और भाईचारे की साझेदारी कायम रखी जाएगी।
पिछले तकरीबन चार सालों में पंजाब सरकार द्वारा किए गए उपायों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब सरकार शहीदों के सपनों को साकार करने वाला शासन प्रदान करने के लिए वचनबद्ध है। उन्होंने कहा कि ‘युद्ध नशे के विरुद्ध’ के तहत नशों के खिलाफ जंग शुरू की गई है, जिसके तहत नशों की सप्लाई चेन तोड़ी गई, तस्करों को जेलों में डाला गया, उनकी जायदादें ढाही गईं और पीड़ितों का इलाज और पुनर्वास किया गया। उन्होंने कहा, “532 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा पर एंटी-ड्रोन तकनीक स्थापित की गई है। अब तक 498 ड्रोन गतिविधियों का पता लगाया गया है और 256 ड्रोन जब्त किए गए हैं।”
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि ‘युद्ध नशे के विरुद्ध’ का दूसरा चरण शुरू हो गया है और नागरिक 98991-00002 पर मिस्ड कॉल देकर इसमें शामिल हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि गांव और वार्ड स्तर की सुरक्षा समितियां बनाई गई हैं, नशों से मुक्त हुए लोगों को सूरमे के रूप में सम्मानित किया जा रहा है, पुनर्वास के लिए हुनर प्रशिक्षण दिया जा रहा है और 3,083 ग्रामीण खेल मैदान विकसित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं को नशों से दूर रखने के लिए ‘खेडां वतन पंजाब दियां’ करवाई गईं जिनमें तीन-तीन पीढ़ियां हिस्सा ले रही हैं।
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि नौंवे पातशाह श्री गुरु तेग बहादुर जी का 350वां शहादत दिवस का ऐतिहासिक मौका राज्य भर में श्रद्धा व सम्मान के साथ मनाया गया। उन्होंने कहा कि श्री आनंदपुर साहिब में भाई जैता जी स्मारक के निर्माण पर 20 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सिखों के तीन पावन तख्त साहिबान वाले शहरों श्री अमृतसर साहिब, श्री आनंदपुर साहिब और तलवंडी साबो को पवित्र शहर घोषित किया गया, जबकि मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना श्रद्धालुओं को धार्मिक स्थानों के मुफ्त दर्शन करवा रही है।
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आगे घोषणा की कि 1 फरवरी को श्री गुरु रविदास जी का 650वां प्रकाश पर्व व्यापक स्तर पर मनाया जाएगा, जिसमें इस साल 1 फरवरी से कार्यक्रम और समागम करवाए जाएंगे और ये कार्यक्रम साल 2027 तक निरंतर जारी रहेंगे, जिससे गुरु रविदास जी की महान विरासत और यादगार को यकीनी बनाया जा सकेगा।
स्वास्थ्य सुधारों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना सभी 65 लाख परिवारों के लिए 10 लाख रुपए तक का नकद रहित इलाज प्रदान करती है। उन्होंने कहा, “इस योजना के तहत आय की शर्तें हटा दी गई हैं। सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों को भी शामिल किया गया है। पंजाब सभी नागरिकों को मुफ्त स्वास्थ्य सुविधा प्रदान करने वाला पहला राज्य बन गया है।”
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि 881 आम आदमी क्लीनिक रोजाना मुफ्त इलाज प्रदान कर रहे हैं और यह संख्या जल्द ही 1,000 तक पहुंच जाएगी।
रोजगार के संबंध में, उन्होंने कहा कि 63,027 सरकारी नौकरियां पारदर्शी तरीके से रिश्वत या सिफारिश के बिना दी गई हैं। उन्होंने कहा कि 90 प्रतिशत घरों को मुफ्त बिजली मिल रही है और पंजाब के इतिहास में पहली बार, धान के सीजन के दौरान खेतों के ट्यूबवेलों को दिन में आठ घंटे से अधिक निर्विघ्न बिजली सप्लाई की जा रही है, जिससे किसान दोनों समय खेतों में जाने की बजाय घर बैठकर परिवार के साथ खाना खा सकते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 6,900 किलोमीटर लंबे 18,349 रजबाहों को फिर सुरजीत किया गया, आजादी के बाद बन रही पहली नहर, ‘मालवा नहर’ पर 2,300 करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं।
शिक्षा के बारे में मुख्यमंत्री ने कहा कि 118 स्कूल ऑफ एमिनेंस स्थापित किए गए हैं, शिक्षकों को फिनलैंड, सिंगापुर और अहमदाबाद में प्रशिक्षण के लिए भेजा गया है, विद्यार्थियों के लिए बस सेवाओं से 10,000 से अधिक लड़कियों को लाभ पहुंच रहा है, पंजाब ने केरल को पछाड़कर नेशनल अचीवमेंट सर्वे में शीर्ष स्थान हासिल किया है और सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों ने बड़ी संख्या में जेईई और नीट की परीक्षा पास की है।
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि साल 2022 से अब तक 1.50 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव हासिल हुए हैं, जिससे रोजगार के 5.2 लाख अवसर पैदा हुए हैं। उन्होंने घोषणा की कि पंजाब प्रगतिशील निवेश सम्मेलन 13 से 15 मार्च तक मोहाली में होगा जिसमें विश्व भर से उद्योगपति हिस्सा लेंगे।
उन्होंने कहा कि पंजाब किसानों को देश में गन्ने की सबसे अधिक कीमत 416 रुपये प्रति क्विंटल देता है, पराली जलाने की घटनाओं में 53 प्रतिशत की कमी आई है, और 21 टोल प्लाजा बंद करने से लोगों की रोजाना 67.7 लाख रुपये की बचत हो रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब सरकार ड्यूटी के दौरान जान गंवाने वाले रक्षा जवानों के परिवारों को 1 करोड़ रुपए और ड्यूटी के दौरान जान गंवाने वाले पुलिस कर्मचारियों के परिवारों को 2 करोड़ रुपए का मान भत्ता प्रदान करती है।
सड़क सुरक्षा फोर्स के बारे में जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह देश में अपनी तरह की अनोखी पहल है। उन्होंने कहा कि पिछले साल फरवरी में इसकी शुरुआत के बाद, सड़क हादसों में होने वाली मौतों में 48 प्रतिशत से अधिक की कमी आई है। यह फोर्स 4,200 किलोमीटर हाईवे पर तैनात है जो ट्रैफिक व्यवस्था को सुचारू बनाती है।
उन्होंने कहा कि गांवों के छप्पड़ों की सफाई की जा रही है, लाइब्रेरी बनाई गई हैं, 49,000 किलोमीटर ग्रामीण सड़कों को अपग्रेड किया जा रहा है, युवाओं को मिनी बसों के 1,600 परमिट जारी किए गए हैं, ईजी रजिस्ट्री शुरू की गई है। उन्होंने कहा कि श्री गुरु रविदास जी को समर्पित खुरालगढ़ में 148 करोड़ रुपए की यादगार बनाई जा रही है।
होशियारपुर जिले की प्रशंसा करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि यह पंजाब का सबसे अधिक पढ़ा-लिखा जिला है, लिंग अनुपात में सबसे ऊपर है, एथलेटिक्स और फुटबॉल में इसका बड़ा योगदान है। इस जिले के कस्बे माहिलपुर को विश्व स्तर पर फुटबॉल की नर्सरी के रूप में जाना जाता है। उन्होंने कहा कि होशियारपुर में मेडिकल कॉलेज पर काम जल्दी शुरू हो जाएगा और फरवरी में होने वाले ‘नेचर फेस्ट’ के लिए पोस्टर जारी किया।
इस दौरान मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने परेड का निरीक्षण किया, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों को देखा और गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान प्राप्तियों हासिल करने वालों को सम्मानित किया।
इससे पहले मुख्यमंत्री ने परेड कमांडर धीरेंद्र वर्मा आई.पी.एस. और सहायक परेड कमांडर रमनप्रीत सिंह गिल के नेतृत्व वाली परेड का निरीक्षण किया और पंजाब पुलिस, पंजाब होमगार्ड्स, पैसको, एन.सी.सी., बॉय स्काउट्स, पुलिस कैडेट्स, गर्ल गाइड्स और पंजाब पुलिस ब्रास बैंड की टुकड़ियों से सलामी ली।
पी.ए.पी. जालंधर टीम द्वारा टेंट पेगिंग और भांगड़ा, गिद्दा, समूह डांस, पी.टी. शो और स्कूली विद्यार्थियों द्वारा समूह गायन सहित रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम भी पेश किया गया।
मुख्यमंत्री ने स्वतंत्रता सेनानियों और उनके परिजनों का सम्मान किया, दिव्यांगजन व्यक्तियों को ट्राइसाइकिल और जरूरतमंद महिलाओं को सिलाई मशीनें वितरित की। इस मौके पर राज्य और जिला प्रशासन के विकास को दर्शाती झांकियां भी प्रदर्शित की गईं।
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान समाज में शानदार योगदान देने वाले विभिन्न क्षेत्रों की व्यक्तियों और अन्य अधिकारियों को भी सम्मानित किया।
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‘बेअदबी’ पार्टी (अकाली दल) अपनी प्रतिष्ठा खो चुकी है, अब वह राजनीति में वापसी के लिए भाजपा से समझौता करने की कोशिश कर रही है: बलतेज पन्नू
आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब के मीडिया इंचार्ज बलतेज पन्नू ने शनिवार को कहा कि बेअदबी पार्टी (अकाली दल) और उसके प्रधान सुखबीर सिंह बादल ने राजनीतिक फायदे के लिए बार-बार अपने राजनीतिक स्टैंड से समझौता किया है और अब वे भाजपा से समझौता करने की कोशिश कर रहे हैं।
सुखबीर बादल पर निशाना साधते हुए आप पंजाब के मीडिया इंचार्ज बलतेज पन्नू ने कहा, “आज सुखबीर सिंह बादल कह रहे हैं कि वह केंद्र की भाजपा सरकार द्वारा लाए जा रहे कुछ बिलों से पूरी तरह सहमत हैं। लेकिन पंजाब के लोगों को अच्छी तरह याद है कि जब कृषि कानून लाए गए थे, तो पूरा बादल परिवार उन कानूनों के पक्ष में वीडियो बनाता हुआ नजर आया था।”
बलतेज पन्नू ने कहा कि बड़े स्तर पर लोगों के गुस्से का सामना करने के बाद ही बादलों ने अपना रुख बदला और खुद को किसानों का हमदर्द दिखाने की कोशिश में कृषि कानूनों के खिलाफ बोलना शुरू कर दिया।
अकाली दल की मौजूदा राजनीतिक स्थिति पर निशाना साधते हुए आप पंजाब के मीडिया इंचार्ज ने कहा, “‘बेअदबी’ अकाली दल पंजाब के लोगों के दिलों से पूरी तरह गायब हो चुका है। अब वह भाजपा के साथ समझौता करके अपनी राजनीति को फिर से ज़िंदा करने की हर मुमकिन कोशिश कर रहा है।”
सुखबीर बादल के भाजपा में शामिल होने वाले नेताओं के बारे में पहले दिए गए बयान को याद करते हुए बलतेज पन्नू ने कहा, “मैं सुखबीर सिंह बादल को उनकी ही बातें याद दिलाना चाहता हूं। उन्होंने कहा था कि जो लोग भाजपा में शामिल हो रहे हैं, उन्हें अपना डीएनए टेस्ट करवाना चाहिए। मैं यह नहीं कह रहा हूं कि किसी को अपना डीएनए टेस्ट करवाना चाहिए, लेकिन जब सुखबीर बादल ने खुद यह बयान दिया, तो आज इसका जिक्र करना बनता है।”
उन्होंने कहा कि बादल परिवार के बार-बार लिए गए यू-टर्न ने अकाली दल की राजनीति का असली चेहरा सामने ला दिया है। उन्होंने कहा कि पंजाब के लोग उन लोगों के बीच साफ फर्क समझ सकते हैं जो अपने उसूलों पर अड़े रहते हैं और जो राजनीतिक सुविधा के हिसाब से अपना रुख बदलते हैं।
बलतेज पन्नू ने दावा किया कि पंजाब के लोग पहले ही अकाली दल की राजनीति को नकार चुके हैं और भाजपा के साथ राजनीतिक समझौता करने की उसकी नई कोशिशों से गुमराह नहीं होंगे।
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मुक्तसर की तियां में पहुंचीं डॉ. गुरप्रीत कौर मान, महिलाओं ने चुनाव की तारीख पूछनी शुरू कर दी
मुक्तसर विधानसभा में आज पंजाबी संस्कृति और महिलाओं के उत्साह से सराबोर तियां का विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें मुख्यमंत्री भगवंत मान जी की धर्मपत्नी डॉ. गुरप्रीत कौर मान ने शिरकत की। कार्यक्रम में मुक्तसर की बड़ी संख्या में माताओं और बहनों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कार्यक्रम के दौरान डॉ. गुरप्रीत कौर मान ने महिलाओं से बातचीत की और उनके अनुभव जाने। बातचीत में मावा दीया योजना को लेकर महिलाओं में खासा उत्साह देखने को मिला। महिलाओं ने बताया कि उनके खातों में ₹4,500 और ₹3,000 की राशि पहुंचने से उन्हें काफी राहत और खुशी मिली है।
महिलाओं के साथ बातचीत के दौरान सरकार की योजनाओं को लेकर उनका उत्साह इतना स्पष्ट था कि बात सिर्फ योजना के लाभ तक सीमित नहीं रही—महिलाएं चुनाव की तारीख और अगला चुनाव कब होगा, यह पूछने लगीं।
माहौल ऐसा था कि मान साहब से ज्यादा अब पंजाब की इन माताओं-बहनों को चुनाव की जल्दी दिखाई दी, क्योंकि उनका कहना था कि वे जल्द से जल्द चुनाव चाहती हैं, ताकि उन्हें एक बार फिर भगवंत मान जी को अपना समर्थन देकर पंजाब का मुख्यमंत्री बनाने और उनकी सरकार को दोबारा सत्ता में लाने का मौका मिले।
मुक्तसर की तियां में आज पंजाबी संस्कृति और महिलाओं की खुशियों के साथ-साथ महिलाओं के मन की राजनीतिक इच्छा भी खुलकर सामने आई—उन्हें अब चुनाव का इंतजार है।
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‘गैंगस्टरां ते वार’ ने ख़ुफ़िया-आधारित पुलिसिंग की प्रभावशीलता सिद्ध की; गैंगस्टरों के लिए कहीं भी सुरक्षित ठिकाना नहीं : DGP गौरव यादव
पंजाब पुलिस का प्रमुख एंटी-गैंगस्टर अभियान ‘गैंगस्टरां ते वार’ संगठित अपराध के विरुद्ध राज्य में चलाए जा रहे सबसे व्यापक और निरंतर अभियानों में से एक के रूप में उभरते हुए अपने 200 दिन पूरे कर चुका है। इस अभियान के दौरान पुलिस ने पूरे पंजाब में 1,09,087 छापेमारियाँ कीं, 1,532 घोषित अपराधियों (प्रोक्लेम्ड ऑफेंडर्स) को गिरफ़्तार किया, 58,212 अपराधियों एवं उनके सहयोगियों के विरुद्ध कार्रवाई की, भारी मात्रा में अवैध हथियार और मादक पदार्थ बरामद किए तथा संगठित आपराधिक गिरोहों के नेटवर्क को बड़ा झटका दिया।
मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली सरकार के मार्गदर्शन में शुरू किया गया ‘गैंगस्टरां ते वार’ एक ख़ुफ़िया सूचना-आधारित अभियान है, जिसका उद्देश्य लक्षित कार्रवाई, अंतरराज्यीय एवं अंतरराष्ट्रीय समन्वय, वित्तीय जाँच तथा तकनीक-आधारित पुलिसिंग के माध्यम से संगठित अपराध गिरोहों का पूरी तरह सफाया करना है।
इस अवसर पर, डायरेक्टर जनरल ऑफ़ पुलिस (डीजीपी) गौरव यादव ने कहा कि यह अभियान अब बहुआयामी कार्रवाई का रूप ले चुका है, जो केवल गैंगस्टरों ही नहीं, बल्कि संगठित अपराध को बढ़ावा देने वाले पूरे तंत्र को भी निशाना बना रहा है। उन्होंने कहा, “‘गैंगस्टरां ते वार’ के पहले 200 दिनों ने निरंतर और ख़ुफ़िया-आधारित पुलिसिंग की प्रभावशीलता को सिद्ध किया है। हमारी रणनीति केवल गिरफ़्तारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि संगठित अपराध को सक्षम बनाने वाले पूरे नेटवर्क—सहयोगियों, वित्तीय स्रोतों, रसद व्यवस्था, संचार माध्यमों और विदेशों में मौजूद संपर्कों—को ध्वस्त करने पर केंद्रित है। पंजाब पुलिस यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि देश के भीतर या बाहर कहीं भी संचालित होने वाले गैंगस्टरों के लिए कोई सुरक्षित ठिकाना न बचे।”
इन 200 दिनों के दौरान 1,532 घोषित अपराधियों (पीओ) को गिरफ़्तार किया गया, जबकि 58,212 व्यक्तियों के विरुद्ध कार्रवाई की गई, जिनमें 853 गैंगस्टर एवं उनके सहयोगी तथा 57,359 वांछित अपराधी शामिल हैं।
निवारक पुलिसिंग के तहत 28,201 व्यक्तियों को हिरासत में लिया गया, जिनमें 577 गैंगस्टर एवं उनके सहयोगी तथा 27,624 वांछित अपराधी शामिल थे; वहीं 18,514 व्यक्तियों का वेरिफिकेशन कर उन्हें बाद में रिहा किया गया, जिनमें 1,529 गैंगस्टर एवं उनके सहयोगी तथा 16,985 वांछित अपराधी शामिल थे। कुल मिलाकर अभियान के दौरान 1,04,927 व्यक्ति अभियान के दौरान पुलिस कार्रवाई के दायरे में आए जिनमें 2,959 गैंगस्टर एवं उनके सहयोगी तथा 1,01,968 वांछित अपराधी शामिल हैं।
गिरफ़्तारियों के अतिरिक्त अभियान का मुख्य उद्देश्य संगठित गिरोहों की हथियारों, मादक पदार्थों, वित्तीय संसाधनों और रसद व्यवस्था तक पहुँच को समाप्त कर उनकी अपराध करने की क्षमता को कमज़ोर करना भी रहा।
इस अभियान ने संगठित अपराध गिरोहों की मारक क्षमता को भी बड़ा झटका दिया।अभियान के दौरान पंजाब पुलिस ने 990 अवैध हथियार, 242 धारदार हथियार, 2,739 कारतूस, 315 मैगज़ीन, 2.5 किलोग्राम विस्फोटक और 15 हैंड ग्रेनेड बरामद किए, जिससे आपराधिक गिरोहों की मारक क्षमता को गंभीर रूप से कमज़ोर किया गया।
साथ ही, पंजाब पुलिस ने संगठित अपराध और नशा तस्करी के गठजोड़ के विरुद्ध कार्रवाई तेज़ करते हुए 774.38 किलोग्राम हेरोइन, 480.23 किलोग्राम अफीम, 7,266.26 किलोग्राम पोस्त भूसी तथा 26,91,455 नशीली गोलियाँ बरामद कीं। पुलिस ने 1,73,41,965 रुपये की ड्रग मनी, 1,80,54,446 रुपये नकद तथा 413.85 ग्राम सोना भी ज़ब्त किया, जिससे संगठित अपराध और मादक पदार्थों के कारोबार को वित्तीय सहायता देने वाले स्रोतों पर प्रभावी प्रहार हुआ।
एंटी-गैंगस्टर टास्क फोर्स (एजीटीएफ) के एडिशनल डायरेक्टर जनरल ऑफ़ पुलिस प्रमोद बान ने कहा कि अब अभियान का मुख्य उद्देश्य केवल अपराधियों की गिरफ़्तारी नहीं, बल्कि संगठित अपराध के पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करना है। उन्होंने कहा, “आज का संगठित अपराध वित्तीय नेटवर्क, डिजिटल संचार और विदेशों में बैठे संचालकों के माध्यम से संचालित होता है। इसी कारण हमारी जाँच में फील्ड ऑपरेशन के साथ-साथ वित्तीय ट्रैकिंग, डिजिटल इंटेलिजेंस तथा केंद्रीय एजेंसियों के साथ घनिष्ठ समन्वय शामिल है। इसी रणनीति के कारण पंजाब पुलिस रंगदारी गिरोहों का पर्दाफाश करने, विदेशों में बैठे संचालकों की पहचान करने तथा वांछित अपराधियों के निर्वासन (डीपोर्टेशन) और प्रत्यर्पण (एक्सट्राडिशन) की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में सफल रही है। साथ ही यह अभियान युवाओं को यह संदेश भी देता है कि गैंगस्टर संस्कृति का तथाकथित आकर्षण केवल एक भ्रम है, जिसका अंत अपराध और विनाश में होता है।”
अभियान को पड़ोसी राज्यों तथा केंद्रीय जाँच एवं ख़ुफ़िया एजेंसियों के साथ नियमित समन्वय का भी भरपूर सहयोग मिला, जिससे सूचनाओं के तुरंत आदान-प्रदान और संगठित अपराध के विरुद्ध संयुक्त अभियानों को गति मिली।
अभियान की प्रमुख उपलब्धियों में से एक फरार गैंगस्टर भुवनेश चोपड़ा उर्फ आशीष चोपड़ा, पुत्र हीरा लाल, निवासी मकान नंबर 15, अंदरूनी दिल्ली गेट, फिरोज़पुर, को मध्य एशिया से तथा गैंगस्टर जोबनजीत सिंह उर्फ जोबन बिल्ला को जकार्ता (इंडोनेशिया) से सफलतापूर्वक भारत वापस लाना रहा। एंटी-गैंगस्टर टास्क फोर्स (एजीटीएफ) ने ओएफटीईसी पंजाब तथा केंद्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित कर इस अभियान को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। इससे यह सिद्ध हुआ कि पंजाब पुलिस अब राष्ट्रीय सीमाओं से परे जाकर भी वांछित अपराधियों को कानून के कटघरे में लाने में सक्षम है।
गैंगस्टरों एवं उनके सहयोगियों के विरुद्ध कार्रवाई के अतिरिक्त अभियान के दौरान 64,402.77 लीटर अवैध शराब, 34,840 बोतलें तथा 926 पेटियाँ बरामद कर नष्ट की गईं। इसके अलावा अपराधिक गतिविधियों में इस्तेमाल किए जा रहे 4,978 मोबाइल फोन, 1,781 वाहन और 61 ड्रोन भी ज़ब्त किए गए। इन कार्रवाइयों ने आपराधिक ढाँचे को कमज़ोर करने, संगठित अपराध के नेटवर्क को बाधित करने और पूरे पंजाब में सार्वजनिक सुरक्षा को और अधिक सुदृढ़ करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।
एंटी-गैंगस्टर टास्क फोर्स (एजीटीएफ) ने नागरिकों की भागीदारी बढ़ाने के लिए 93946-93946 नंबर पर एक समर्पित टिपलाइन भी शुरू की है, जिसके माध्यम से लोग वांछित अपराधियों, गैंगस्टरों और उनसे संबंधित आपराधिक गतिविधियों की जानकारी गोपनीय और गुमनाम रूप से साझा कर सकते हैं। इस पहल के ज़रिए लोग अपनी पहचान उजागर होने के डर के बिना गोपनीय रूप से महत्त्वपूर्ण जानकारी साझा कर सकते हैं, जिससे एजीटीएफ को गैंगस्टरों और अन्य अपराधियों का जल्द पता लगाकर उन्हें गिरफ़्तार करने में मदद मिलेगी।
जनसहभागिता को और सशक्त बनाने के उद्देश्य से एजीटीएफ ने एक इनाम नीति भी लागू की है, जिसके तहत वांछित गैंगस्टरों और अपराधियों के विरुद्ध कार्रवाई में सहायक विश्वसनीय सूचना देने वालों को नकद पुरस्कार दिया जाएगा तथा उनकी पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। इस पहल से पंजाब में संगठित अपराध के विरुद्ध ख़ुफ़िया-आधारित अभियानों को और अधिक मज़बूती मिलने की उम्मीद है।
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