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पंजाब में अगस्त में भी मानसून रहा कमजोर, सामान्य से 39% कम बारिश; अब 2 से 4 सितंबर तक अलर्ट
पंजाब में इस साल मानसून का प्रदर्शन लगातार निराशाजनक बना हुआ है। अगस्त का महीना भी बारिश के लिहाज से प्रदेश के लिए सूखा रहा। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, अगस्त में पंजाब में सामान्य तौर पर 146.2 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन इस बार केवल 88.7 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। यानी पूरे महीने में सामान्य से करीब 39 प्रतिशत कम बारिश हुई।
जून से अगस्त तक भी पंजाब में बारिश की कमी लगातार बनी हुई है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, 1 जून से 31 अगस्त के बीच पंजाब में सामान्य 362.1 मिलीमीटर बारिश के मुकाबले केवल 230.5 मिलीमीटर बारिश हुई। इस दौरान प्रदेश में करीब 36 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई। लगातार कम बारिश के कारण खेती, मिट्टी की नमी और भूजल स्तर को लेकर भी चिंता बढ़ रही है।
31 अगस्त को भी पंजाब के ज्यादातर हिस्सों में मौसम शुष्क रहा। केवल पठानकोट में 3.5 मिलीमीटर और थीन बांध क्षेत्र में 1 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। वहीं, राज्य का औसत अधिकतम तापमान पिछले दिन के मुकाबले 0.6 डिग्री सेल्सियस कम रहा, लेकिन यह अभी भी सामान्य से 1.8 डिग्री अधिक बना हुआ है। फरीदकोट में सबसे अधिक 38.8 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया।
आज नहीं, लेकिन 2 सितंबर से बदल सकता है मौसम
1 सितंबर को पंजाब में किसी तरह की मौसम चेतावनी जारी नहीं की गई है। हालांकि, हिमाचल प्रदेश से सटे कुछ जिलों में हल्की बारिश या बूंदाबांदी होने की संभावना है।
2 सितंबर से मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है। मौसम विभाग ने पठानकोट, होशियारपुर, रूपनगर और साहिबजादा अजीत सिंह नगर में भारी बारिश को लेकर यलो अलर्ट जारी किया है।
3 सितंबर को बारिश का दायरा और बढ़ सकता है। पठानकोट, होशियारपुर, नवांशहर, मोहाली और फतेहगढ़ साहिब में भारी बारिश की चेतावनी रहेगी। वहीं, अन्य जिलों में हल्की बारिश होने के आसार हैं।
4 सितंबर को भी पठानकोट, होशियारपुर, नवांशहर, मोहाली और फतेहगढ़ साहिब में भारी बारिश की संभावना जताई गई है, जबकि बाकी जिलों में मौसम सामान्य रहने का अनुमान है।
38 डिग्री के पार पहुंचा तापमान
मौसम विभाग के 31 अगस्त के आंकड़ों के मुताबिक पंजाब में औसत अधिकतम तापमान 0.6 डिग्री सेल्सियस कम हुआ, लेकिन सामान्य से 1.8 डिग्री अधिक बना रहा। फरीदकोट 38.8 डिग्री के साथ प्रदेश का सबसे गर्म जिला रहा।
पटियाला में 35.7 डिग्री, अमृतसर में 35.5 डिग्री, चंडीगढ़ और लुधियाना में 35 डिग्री, मोहाली में 34.1 डिग्री और जालंधर में 32.6 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया।
मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में उत्तर और पूर्वी पंजाब में बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं। इससे लंबे समय से बारिश की कमी झेल रहे इलाकों को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि, मानसून के दौरान अब तक हुई भारी कमी को देखते हुए कुछ दिनों की बारिश से प्रदेश की कुल स्थिति में बड़ा बदलाव आने की संभावना कम है।
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मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत सेप्सिस और सेप्टिक शॉक के 12,467 उपचारों को ₹51.58 करोड़ की वित्तीय सहायता
शुरुआत में सामान्य लगने वाला संक्रमण, सेप्सिस और सेप्टिक शॉक में बदलने पर कुछ ही घंटों में जानलेवा हो सकता है।
पंजाब की मुख्यमंत्री सेहत योजना (एमएमएसवाई) के तहत 01 सितंबर तक सेप्सिस और सेप्टिक शॉक के 12,467 उपचार दर्ज किए गए हैं, जिन पर ₹51.58 करोड़ की राशि ख़र्च हुई है। यह आंकड़ा इस स्थिति से जुड़े चिकित्सा और वित्तीय बोझ, दोनों को दर्शाता है।
इनमें से, सीवियर सेप्सिस के 10,961 उपचारों पर ₹44.33 करोड़, जबकि सेप्टिक शॉक के 1,506 उपचारों पर ₹7.25 करोड़ ख़र्च हुए। अमेरिका के सेंटर्स फॉर डिजीस कंट्रोल एंड प्रिवेंशन(CDC) के अनुसार, सेप्सिस संक्रमण के प्रति शरीर की अत्यधिक प्रतिक्रिया है, जो तेज़ी से ऊतकों (टिश्यूज) को नुकसान, अंगों के काम करना बंद करने और मृत्यु का कारण बन सकती है। लगभग किसी भी प्रकार का संक्रमण सेप्सिस को ट्रिगर कर सकता है। फेफड़ों, यूरिनरी ट्रैक्ट, त्वचा और गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रैक्ट के संक्रमण इसके सामान्य स्रोतों में शामिल हैं।
सेप्सिस केवल एक संक्रमण नहीं है। जब संक्रमण के प्रति शरीर की प्रतिक्रिया अनियंत्रित हो जाती है, तो अंगों के कामकाज में गड़बड़ी शुरू हो सकती है। गंभीर मामलों में रक्तचाप कम होने और रक्त प्रवाह पर्याप्त न रहने की स्थिति सेप्टिक शॉक में बदल सकती है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने समय पर पहचान के महत्त्व पर ज़ोर देते हुए कहा, “सेप्सिस धीरे-धीरे अधिक गंभीर रूप ले सकता है। जब इसके कारण रक्त संचार संबंधी गंभीर समस्याएँ उत्पन्न होती हैं और महत्त्वपूर्ण अंगों तक पर्याप्त रक्त प्रवाह नहीं पहुँचता, तो मरीज़ सेप्टिक शॉक की स्थिति में पहुँच सकता है।”
सेप्टिक शॉक से पीड़ित मरीज़ों को गहन चिकित्सा देखभाल, इंट्रावेनस फ्लूइड्स, एंटीबायोटिक्स, रक्तचाप को बनाए रखने वाली दवाएँ , ऑक्सीजन या मैकेनिकल वेंटिलेशन और कुछ मामलों में काम करना बंद कर रहे अंगों के लिए सहायक उपचार की आवश्यकता पड़ सकती है। ऐसे उपचार का ख़र्च तेज़ी से बढ़ सकता है, जिससे परिवारों के लिए वित्तीय सुरक्षा विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण हो जाती है।
मुख्यमंत्री सेहत योजना पात्र परिवारों को प्रति परिवार प्रति वर्ष ₹10 लाख तक का कैशलेस स्वास्थ्य कवर प्रदान करती है, जिससे गंभीर उपचार के दौरान वित्तीय बाधा को कम करने में मदद मिलती है।
योजना के तहत सेप्सिस के आंकड़े यह दर्शाते हैं कि जब उपचार की ज़रूरत तेज़ी से बढ़ती है, तब ऐसी वित्तीय सुरक्षा परिवारों के लिए कितनी महत्त्वपूर्ण हो सकती है।
यह ख़तरा नवजात शिशुओं में विशेष रूप से गंभीर होता है। गुरु गोबिंद सिंह मेडिकल कॉलेज, फरीदकोट के बाल रोग विभाग के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. शशि कांत धीर ने कहा कि नवजात शिशु के व्यवहार में होने वाले मामूली बदलावों को भी नज़रअंदाज़ नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “नवजात शिशुओं में व्यवहार में छोटा-सा बदलाव भी एक महत्त्वपूर्ण चेतावनी संकेत हो सकता है।” उन्होंने बताया कि समय से पहले जन्मे और कम वजन वाले शिशुओं की स्थिति कुछ ही घंटों में तेज़ी से बिगड़ सकती है।
दूध पीने/पोषण लेने में कमी, असामान्य रूप से अधिक नींद आना, शरीर का ठंडा महसूस होना और साँस लेने में बदलाव नवजात शिशु में गंभीर बीमारी के संकेत हो सकते हैं और ऐसी स्थिति में तत्काल चिकित्सकीय जाँच आवश्यक है।
जब बैक्टीरियल संक्रमण की आशंका हो या इसकी पुष्टि हो जाए, तब एंटीबायोटिक्स आवश्यक होते हैं, लेकिन इनका अनुचित इस्तेमाल एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस को बढ़ावा दे सकता है। बिना चिकित्सकीय सलाह के एंटीबायोटिक्स लेना, बची हुई एंटीबायोटिक दवाओं का इस्तेमाल करना या उपचार बीच में रोक देना संक्रमण का इलाज मुश्किल बना सकता है।
सेंटर्स फॉर डिजीस कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) के अनुसार, भ्रम की स्थिति, साँस लेने में कठिनाई, अत्यधिक दर्द या बेचैनी, बुख़ार या शरीर का असामान्य रूप से कम तापमान, चिपचिपी त्वचा और तेज़ हृदय गति ऐसे चेतावनी संकेतों में शामिल हैं, जिनमें तत्काल चिकित्सकीय सहायता लेना आवश्यक है।
इसलिए सेप्सिस से निपटने के लिए दो मोर्चों पर तेज़ी से कार्रवाई ज़रूरी है—समय पर चिकित्सकीय पहचान और उपचार तथा अत्यधिक स्वास्थ्य ख़र्च से वित्तीय सुरक्षा। मुख्यमंत्री सेहत योजना के आंकड़े इस स्थिति के वित्तीय बोझ के पैमाने को दर्शाते हैं, जबकि चिकित्सकीय संदेश स्पष्ट है: संक्रमण से पीड़ित मरीज़ की स्थिति अचानक बिगड़ने पर देरी से इलाज की कीमत केवल पैसे के रूप में नहीं, बल्कि उससे भी अधिक महत्त्वपूर्ण—एक जीवन के रूप में चुकानी पड़ सकती है।
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ASAP उम्मीदवार हरमनप्रीत सिंह खोखर ईवनिंग डिपार्टमेंट प्रधान चुने गए; स्टूडेंट फ्रंट दूसरे, एबीवीपी तीसरे नंबर पर रहा
पंजाब यूनिवर्सिटी स्टूडेंट चुनाव में एसोसिएशन ऑफ़ स्टूडेंट्स फ़ॉर अल्टरनेटिव पॉलिटिक्स (एएसएपी) एक बड़ी ताकत बनकर उभरी है। इसके कैंडिडेट्स और अलायंस पार्टनर्स ने 8 में से 6 सीटों पर जीत दर्ज की है, जिसमें ईवनिंग डिपार्टमेंट में प्रधान, उप-प्रधान और जनरल सेक्रेटरी के अहम पद शामिल हैं। एएसएपी के हरमनप्रीत सिंह खोखर प्रधान चुने गए, जबकि यूएसओ-एएसएपी अलायंस के जोबनप्रीत सिंह सोही उप-प्रधान और एसओपीयू-एएसएपी अलायंस की सविताज़ कौर जनरल सेक्रेटरी बनीं, जिससे एएसएपी की लीडरशिप वाले अलायंस को एक अहम जीत मिली। स्टूडेंट फ्रंट दूसरे और एबीवीपी तीसरे स्थान पर रहा, जबकि मॉर्निंग डिपार्टमेंट प्रधान चुनाव में एएसएपी ने भी दूसरा स्थान हासिल किया।
इस नतीजे से ईवनिंग डिपार्टमेंट में एएसएपी का मज़बूत प्रदर्शन पता चलता है, जिसमें हरमनप्रीत सिंह खोखर ने प्रधान के मुकाबले में टॉप स्थान हासिल किया। स्टूडेंट फ्रंट दूसरे स्थान पर रहा, जबकि एबीवीपी प्रधान पद की रेस में तीसरे स्थान पर रही।
हरमनप्रीत सिंह खोखर की प्रधान के तौर पर जीत, जोबनप्रीत सिंह की उप-प्रधान के तौर पर जीत और सविताज़ कौर की जनरल सेक्रेटरी के तौर पर जीत ने एएसएपी के पैनल को ईवनिंग डिपार्टमेंट में प्रमुख पदों पर अहम जगह दिलाई।
यह नतीजा पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ में मॉर्निंग डिपार्टमेंट के चुनाव के नतीजों के बाद और भी अहम हो जाता है, जहाँ एएसएपी पैनल प्रधान पद के मुकाबले में एबीवीपी से हारने के बाद दूसरे नंबर पर रहा था। हालाँकि, एएसएपी ने ईवनिंग डिपार्टमेंट में ज़बरदस्त जवाब दिया, प्रधानगी चुनाव के साथ-साथ अन्य प्रमुख पदों पर शानदार जीत दर्ज की।
ईवनिंग डिपार्टमेंट में, एएसएपी पैनल के सफल उम्मीदवार थे:
- प्रधान: हरमनप्रीत सिंह खोखर — एएसएपी
- उप-प्रधान: जोबनप्रीत सिंह — यूएसओ, एएसएपी के साथ अलायंस में
- जनरल सेक्रेटरी: सविताज़ कौर — एसओपीयू, एएसएपी के साथ अलायंस में
पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ में मॉर्निंग डिपार्टमेंट के नतीजों में भी एएसएपी अलायंस ने दो महत्वपूर्ण पद जीतीं। एएसएपी के साथ अलायंस में पीयूडीएफ के अरमान भिंडर ने उप-प्रधान पद जीती, जबकि एएसएपी के साथ अलायंस में इंडिपेंडेंट के तौर पर चुनाव लड़ रहे विशाल बामल ने जॉइंट सेक्रेटरी पद जीती।
मॉर्निंग डिपार्टमेंट के नतीजे थे:
- उप-प्रधान: अरमान भिंडर — पीयूडीएफ, एएसएपी के साथ अलायंस में
- जॉइंट सेक्रेटरी: विशाल बामल — इंडिपेंडेंट, एएसएपी के साथ अलायंस में
मॉर्निंग और ईवनिंग डिपार्टमेंट चुनाव के दोनों नतीजे कैंपस राजनीति में एएसएपी की बढ़ती ऑर्गेनाइज़ेशनल प्रेजेंस को दिखाते हैं। पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ में मॉर्निंग डिपार्टमेंट में प्रधान पद के चुनाव में ऑर्गनाइज़ेशन को झटका लगा, लेकिन ईवनिंग डिपार्टमेंट में प्रधान पद के लिए हरमनप्रीत सिंह खोखर की जीत समेत अहम परफॉर्मेंस ने सपोर्ट को मज़बूत करने और मज़बूत वापसी करने की उसकी समर्था को साबित किया।
इन जीतों ने ईवनिंग डिपार्टमेंट में एएसएपी की लीडरशिप वाली मौजूदगी को और मज़बूत किया है। स्टूडेंट फ्रंट और एबीवीपी, जो प्रधान पद के चुनाव में एक के बाद एक दूसरे और तीसरे नंबर पर रहे, के परफॉर्मेंस ने भी आखिरी चुनावी नतीजे तय किए।
मुख्य पदों पर जीत और अलायंस पार्टनर्स को और पद मिलने के साथ, एएसएपी हाल के स्टूडेंट चुनाव से मज़बूत पकड़ और स्टूडेंट राजनीति में नई तेज़ी के साथ उभरा है।
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भगवंत मान सरकार अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के खिलाफ नेशनल कमीशन फॉर शेड्यूल्ड कास्ट्स के आदेशों का पालन करेगी: हरपाल सिंह चीमा
आम आदमी पार्टी के सीनियर नेता और वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने राजा वड़िंग के खिलाफ नेशनल कमीशन फॉर शेड्यूल्ड कास्ट्स (एनसीएससी) द्वारा हाल ही में जारी आदेशों के बारे में बात करते हुए कहा, उन्होंने कहा कि कोई भी कानून से ऊपर नहीं है, चाहे वह कितना भी बड़ा नेता क्यों न हो।
हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि तरनतारन उपचुनाव के दौरान पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने देश के पूर्व गृह मंत्री स्वर्गीय बूटा सिंह के रंग को लेकर बहुत ही आपत्तिजनक, जातिसूचक और भद्दी टिप्पणी की थी। यह मामला लंबे समय से लंबित था, जिस पर आज राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने कड़ा रुख अपनाते हुए राजा वड़िंग के खिलाफ आदेश जारी किए हैं।
वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि पंजाब सरकार आयोग के आदेशों का पूरी ईमानदारी और प्रतिबद्धता के साथ पालन करेगी। उन्होंने कहा कि अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के खिलाफ कानून के अनुसार जो भी कानूनी कार्रवाई की जरूरत होगी, वह बिना किसी दबाव के की जाएगी। अगर जांच और प्रक्रिया के तहत उनकी गिरफ्तारी की जरूरत हुई, तो पंजाब पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने में संकोच नहीं करेगी।
चीमा ने कड़े शब्दों में कहा कि समाज में नस्लीय भेदभाव, जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करने और दलित समुदाय का अपमान करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। ऐसी घटिया मानसिकता वाले लोगों के लिए पंजाब में कोई जगह नहीं है।
हरपाल चीमा ने कहा कि पंजाब हमारे महान गुरुओं, पीरों और संतों की पवित्र भूमि है, जिन्होंने हमेशा समानता, भाईचारे और मानवता का संदेश दिया है। कांग्रेस नेता यहां नफरत और जहर के बीज बोने की कोशिश कर रहे हैं, जिसे पंजाब के लोग और हमारी सरकार कभी स्वीकार नहीं करेगी। कानून अपना काम करेगा और दलित समुदाय का अपमान करने वालों को सजा मिलेगी।
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