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नेपाल में कुदरत का कहर! बाढ़ और भूस्खलन से 626 मौतें, 2,426 लोग अब भी लापता

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नेपाल में आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी है। इस प्राकृतिक आपदा में अब तक 626 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 2,426 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। लगातार बढ़ती मौतों और लापता लोगों की संख्या ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है।

नेपाल-चीन सीमा से लगे इलाकों में बाढ़ और भूस्खलन का सबसे ज्यादा असर देखने को मिला है। तेज पानी और मलबे के बहाव ने कई सड़कों, पुलों और इमारतों को नुकसान पहुंचाया है। कई इलाकों में संपर्क मार्ग टूटने के कारण राहत और बचाव दलों को प्रभावित स्थानों तक पहुंचने में भी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

चितवन जिला भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है। यहां अब तक 233 शव बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई है। बड़ी संख्या में शव मिलने के कारण उनकी पहचान करना भी प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। अधिकारियों की ओर से पहचान के लिए DNA सैंपल लिए जा रहे हैं और परिजनों की मदद से पहचान की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।

इस आपदा की चपेट में विदेशी नागरिक भी आए हैं। नेपाल के विदेश मंत्रालय की जानकारी के मुताबिक, भारत समेत कई देशों के नागरिक लापता लोगों की सूची में शामिल हैं। सरकारी आंकड़ों में भारत के 178 नागरिकों के लापता होने की जानकारी दी गई है, जिनमें से 11 के सुरक्षित मिलने की पुष्टि हुई है।

खराब मौसम ने राहत और बचाव अभियान को और चुनौतीपूर्ण बना दिया है। कई जगहों पर हेलीकॉप्टर से राहत पहुंचाने में दिक्कतें आ रही हैं। इसके बावजूद नेपाल की सेना, पुलिस और बचाव दल जमीन पर लगातार सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन चला रहे हैं। मलबे को हटाकर सड़कों को दोबारा खोलने और प्रभावित लोगों तक जरूरी सामान पहुंचाने का काम भी जारी है।

प्राकृतिक आपदा का खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है। हिमालयी क्षेत्रों में अस्थिर झीलों, भारी मलबे और कमजोर पहाड़ी ढलानों के कारण अचानक बाढ़ और भूस्खलन का खतरा बना हुआ है। ऐसे में प्रशासन की ओर से संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी जा रही है।

इस भीषण आपदा के बाद राहत एवं बचाव कार्यों को तेज करने पर जोर दिया जा रहा है। फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती लापता लोगों की तलाश, शवों की पहचान और प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाना है। प्रशासन और बचाव एजेंसियां मुश्किल हालात के बावजूद लगातार अभियान में जुटी हुई हैं।

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सिद्धू मूसेवाला का होलोग्राम कॉन्सर्ट, टोरंटो से शुरू होगा वर्ल्ड टूर; 8 देशों में होंगे शो

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दिवंगत पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला एक बार फिर अपने प्रशंसकों के रूबरू होने जा रहे हैं। सिद्धू मूसेवाला का होलोग्राम कॉन्सर्ट टूर ‘साइन्ड टू गॉड वर्ल्ड टूर’ 8 अक्टूबर 2026 को टोरंटो के स्कोटियाबैंक एरिना से शुरू होगा।

इस खास कॉन्सर्ट में 3D होलोग्राफिक तकनीक के जरिए सिद्धू मूसेवाला की स्टेज प्रेजेंस को फिर से जीवंत किया जाएगा। इस दौरान सिद्धू की मूल आवाज के साथ तालमेल बिठाते हुए होलोग्राम प्रोजेक्शन पेश किया जाएगा। इसके साथ ही सिनेमैटिक विजुअल्स और शानदार स्टेज इफेक्ट्स भी देखने को मिलेंगे, जो प्रशंसकों के लिए एक खास अनुभव होगा।

‘साइन्ड टू गॉड वर्ल्ड टूर’ के तहत भारत, पाकिस्तान, अमेरिका, कनाडा, यूके, यूएई, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड समेत 8 देशों में कॉन्सर्ट आयोजित किए जाने की उम्मीद है।

टोरंटो में होने वाला पहला शो इसलिए भी खास रहेगा क्योंकि यहां सिद्धू मूसेवाला के चर्चित गाने ‘295’ की म्यूजिक वीडियो भी रिलीज की जाएगी। इस वीडियो का सिद्धू के प्रशंसक लंबे समय से इंतजार कर रहे हैं।

सिद्धू मूसेवाला के पिता बलकौर सिंह ने बताया कि होलोग्राम शो के दौरान सिद्धू का एक नया गाना भी पेश किया जाएगा। इसके साथ ही उनकी जिंदगी से जुड़े अहम गाने ‘295’ की वीडियो भी दिखाई जाएगी।

उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक गाना या म्यूजिक वीडियो नहीं होगा, बल्कि इसमें सिद्धू की जिंदगी, उनकी सोच और अपने बारे में उनके एहसासों को भी दिखाने की कोशिश की गई है। बलकौर सिंह के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट के लिए लंबे समय से तैयारी की जा रही थी।

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नेपाल-तिब्बत सीमा पर भीषण बाढ़, 1100 से ज्यादा लोग लापता; लैंडस्लाइड ने मचाई भारी तबाही

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नेपाल-तिब्बत सीमा पर अचानक आई भीषण बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी है। इस प्राकृतिक आपदा में कई लोगों की मौत की खबर है, जबकि 1100 से ज्यादा लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। तेज पानी और मलबे के बहाव ने कई इलाकों में जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है।

बाढ़ का पानी करीब 30 फीट तक ऊपर पहुंच गया, जिसकी चपेट में कई घर, वाहन और अन्य संपत्तियां आ गईं। तेज बहाव के कारण 19 पुलों, करीब 40 किलोमीटर सड़कों और 13 हाइड्रोपावर परियोजनाओं को नुकसान पहुंचने की जानकारी है। कई जगहों पर सड़कें टूट जाने और रास्ते बंद होने से राहत एवं बचाव कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं।

शुरुआत में इस घटना को भूकंप से जोड़कर देखा जा रहा था, लेकिन अमेरिकी जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) की जानकारी के मुताबिक इससे पहले कोई बड़ा भूकंप नहीं आया था। बताया जा रहा है कि चीन की ओर ल्हेंदे नदी में पहाड़ का एक बड़ा हिस्सा अचानक खिसककर नीचे गिरा, जिससे शक्तिशाली लैंडस्लाइड हुई।

यह लैंडस्लाइड इतनी बड़ी थी कि इससे करीब 5.2 तीव्रता के भूकंप जैसा झटका महसूस किया गया। इसके बाद भारी मात्रा में पानी और मलबा भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों में पहुंच गया। अचानक पानी का स्तर बढ़ने से आसपास के क्षेत्रों में बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए।

पानी का बहाव इतना तेज था कि मलबे के साथ कई लोग और सामान करीब 150 किलोमीटर दूर चितवन तक बह गए। यहां से अब तक 33 शव बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई है। वहीं, राहत और बचाव टीमें लगातार मलबे में फंसे और लापता लोगों की तलाश में जुटी हुई हैं।

इस आपदा की चपेट में कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जा रहे कई श्रद्धालुओं के भी आने की खबर है। लापता लोगों में विदेशी नागरिकों के साथ भारतीय और NRI नागरिक भी शामिल बताए जा रहे हैं। हालांकि, खराब मौसम और कई जगहों पर रास्ते टूट जाने के कारण राहत कार्यों में मुश्किलें आ रही हैं।

फिलहाल बचाव दल प्रभावित इलाकों में लोगों की तलाश कर रहे हैं और नुकसान का आकलन किया जा रहा है। USGS की जानकारी के बाद यह बात सामने आई है कि तबाही की शुरुआत किसी बड़े भूकंप से नहीं, बल्कि पहाड़ के बड़े हिस्से के खिसकने से हुई लैंडस्लाइड से हुई थी।

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‘अमेरिका जितना टैरिफ लगाएगा, कनाडा भी उतना ही जवाब देगा’, अमेरिका के साथ टैरिफ जंग पर बोले कनाडा PM मार्क कार्नी

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अमेरिका और कनाडा के बीच बढ़ता टैरिफ विवाद अब और भी गंभीर होता नजर आ रहा है। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने अमेरिकी टैरिफ को कनाडा पर हमला करार देते हुए कहा है कि उनका देश दबाव में ऐसा कोई समझौता स्वीकार नहीं करेगा, जिससे कनाडा के हितों को नुकसान पहुंचे।

मार्क कार्नी ने कहा कि अमेरिका ने ट्रेड बातचीत के आखिरी चरण में ऐसी शर्तें रखीं, जिन्हें कनाडा के लिए स्वीकार करना संभव नहीं था। उन्होंने कहा कि अब कनाडा दूसरे देशों के साथ अपने व्यापारिक संबंध मजबूत करेगा और अमेरिका पर अपनी निर्भरता कम करने की कोशिश करेगा।

दरअसल, अमेरिका और कनाडा के अधिकारियों के बीच वॉशिंगटन डीसी में तीन दिनों तक ट्रेड डील को लेकर बातचीत चली, लेकिन कोई समझौता नहीं हो सका। इसके बाद अमेरिका ने कनाडा से आने वाले करीब 20 अरब डॉलर के सामान पर 50 फीसदी टैरिफ लगा दिया।

इसके जवाब में कनाडा ने भी अमेरिकी सामान पर जवाबी टैरिफ लगाने का ऐलान किया है, जो 8 सितंबर से लागू होने की बात कही गई है। कार्नी ने स्पष्ट किया कि अमेरिका जितना टैरिफ लगाएगा, कनाडा भी उसी तरह जवाब देगा।

कार्नी के मुताबिक, पिछले कुछ हफ्तों में दोनों देशों के बीच बातचीत में अच्छी प्रगति हुई थी, लेकिन आखिरी समय में अमेरिका की ओर से डील की शर्तें बदलने के कारण समझौता नहीं हो सका।

वहीं, अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव यानी USTR ने कहा कि कनाडा ने अमेरिका के साथ साझेदारी का एक बड़ा मौका गंवा दिया है। USTR के मुताबिक, कनाडा की नई मांगों और पहले किए गए वादों से पीछे हटने की वजह से डील फाइनल नहीं हो सकी।

USTR ने यह भी कहा कि अगर समझौता हो जाता तो एयरोस्पेस सप्लाई चेन, खनिजों पर सहयोग और गलत ट्रेड प्रैक्टिस से निपटने जैसे कई अहम मुद्दों पर दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ सकता था।

अब टैरिफ की इस जंग में दोनों देश अपने-अपने रुख पर कायम हैं। आने वाले दिनों में यह व्यापारिक तनाव और बढ़ता है या बातचीत के जरिए कोई रास्ता निकलता है, इस पर सभी की नजर रहेगी।

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