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Punjab के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने राष्ट्रपति से की मुलाकात, ‘पंजाब के गद्दार’ राज्यसभा सदस्यों की सदस्यता रद्द करने की मांग की
पंजाब में दल-बदल की लड़ाई को पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान आज सर्वोच्च संवैधानिक पद तक ले गए और राष्ट्रपति से मिले। उन्होंने ‘पंजाब के गद्दार’ (दल-बदल करने वाले) राज्यसभा सदस्यों की सदस्यता तुरंत रद्द करने की मांग की। पार्टी की एकजुटता का प्रदर्शन करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान पंजाब के विधायकों के साथ दिल्ली पहुंचे और राष्ट्रपति भवन में हस्ताक्षरित ज्ञापन सौंपा, जिसमें कहा गया कि पंजाब में केवल दो विधायक होने के बावजूद भाजपा के राज्यसभा सदस्यों की संख्या में नाटकीय वृद्धि लोकतांत्रिक आदेश का स्पष्ट उल्लंघन दर्शाती है।
सात सांसदों को ‘इलेक्टेड नहीं, बल्कि सेलेक्टेड’ बताते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने उनके दल-बदल को पंजाब के साथ विश्वासघात करार दिया। उन्होंने इन सदस्यों को इस्तीफा देने और नया जनादेश लेने की चुनौती दी और चेतावनी दी कि न तो केंद्रीय एजेंसियां और न ही राजनीतिक ताकत गलत कामों को बचा सकेंगी। उन्होंने घोषणा की कि ‘ऑपरेशन लोटस’ जैसे प्रयास पंजाब में कभी सफल नहीं होंगे क्योंकि पंजाब कभी भी विश्वासघात बर्दाश्त नहीं करता।
अपने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर बैठक के कुछ अंश साझा करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “आज दिल्ली में माननीय राष्ट्रपति के सामने हमने देश में हो रहे ‘लोकतंत्र के कत्ल’ के खिलाफ अपनी आवाज मजबूती से उठाई। राजनीतिक दलों को असंवैधानिक तरीके से तोड़ना और भाजपा की ‘वॉशिंग मशीन’ में दागी नेताओं को साफ करने के लिए ईडी और सीबीआई जैसी केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग हमारे लोकतांत्रिक ढांचे पर सीधा हमला है।”
उन्होंने पोस्ट में लिखा कि हमने यह बिल्कुल स्पष्ट कर दिया है कि ‘ऑपरेशन लोटस’ की घिनौनी चालें पंजाब में कभी सफल नहीं होंगी। हमारे विधायक लाखों पंजाबियों की आवाज हैं और पंजाब के लोग कभी भी विश्वासघात बर्दाश्त नहीं करेंगे। ‘आपका जन सेवक’ होने के नाते, मैं हर पंजाबी को विश्वास दिलाता हूं कि हम लोगों के जनादेश की रक्षा और संवैधानिक मूल्यों को बनाए रखने के लिए अपने अंतिम सांस तक लड़ेंगे।”
राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “राज्यसभा के सात सदस्यों के दल-बदल से लोकतंत्र का कत्ल हुआ है। यह असंवैधानिक है क्योंकि या तो पूरी पार्टी को प्रस्ताव पास करना चाहिए था, लेकिन इन सात सांसदों ने असंवैधानिक तरीके से अपनी निष्ठा बदल ली, जिससे लोकतंत्र का मजाक उड़ाया गया।” उन्होंने आगे कहा, “भाजपा के पास दो विधायक हैं लेकिन सात राज्यसभा सांसद हैं, जो संविधान का मजाक है। इन सांसदों को उस नई पार्टी में शामिल होने से पहले इस्तीफा दे देना चाहिए था, जिसकी वे पहले निंदा करते थे।”
व्यवस्था में सुधार की मांग उठाते हुए मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा, “संविधान में संशोधन किया जाना चाहिए ताकि सांसद को वापस बुलाने का प्रावधान किया जा सके, जैसा कि राघव चड्ढा मांग करते रहे थे ताकि इन सांसदों को देशद्रोह के लिए सजा दी जा सके।”
उन्होंने जोर देकर कहा, “पंजाबी इस तरह पीठ में छुरा मारना बर्दाश्त नहीं करते और उन्हें प्रदेश के लोग सजा देंगे। ये नेता अब उलझे हुए हैं, जिसके कारण वे बेतुके बयान दे रहे हैं।” उन्होंने आगे कहा, “भाजपा में शामिल होने का मतलब यह नहीं है कि इन नेताओं को बुरे कामों के लिए दोषी नहीं ठहराया जा सकता। चाहे उनके पापों के बारे में बाद में रिपोर्ट आएं, लेकिन भविष्य में भी उनके खिलाफ कार्रवाई होगी।”
जवाबदेही के बारे में दृढ़ रुख अपनाते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “भाजपा की ढाल उन्हें दूसरे राज्यों में कानून के जाल से तो बचा सकती है, लेकिन पंजाब में नहीं। इन नेताओं को पंजाबियों को धमकाने से बाज आना चाहिए क्योंकि पंजाबी उन्हें उनकी असली स्थिति दिखा देंगे।” उन्होंने आगे कहा, “लोगों के प्रतिनिधियों द्वारा चुने गए इन नेताओं को पंजाब के लोगों की पीठ में छुरा मारने के लिए सदन से बर्खास्त कर देना चाहिए।” उन्होंने टिप्पणी की, “भाजपा केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग करके देश के संविधान का उल्लंघन कर रही है। यह विडंबना है कि उसी अशोक मित्तल को भाजपा ने जेड प्लस सुरक्षा प्रदान की, जिसके ठिकानों पर कुछ दिन पहले ईडी ने छापे मारे थे।”
दल-बदल के हालात के बारे में उन्होंने कहा, “यह भाजपा की बांह मरोड़ने वाली रणनीति है। राघव चड्ढा, जो कहा करता था कि भाजपा बिना डिटर्जेंट वाली वॉशिंग मशीन है, जहां राजनीतिक नेताओं के पाप धोए जाते हैं, अब उसी पार्टी से हाथ मिला रहा है।” उन्होंने आगे कहा, “राघव चड्ढा भगवा पार्टी में शामिल होकर बेतुकी बातें करने लगा है। उसे भाजपा में शामिल होने से पहले इस्तीफा दे देना चाहिए था।” उन्होंने यह भी कहा, “मैं संकट की इस घड़ी में पार्टी के साथ एकजुटता दिखाने के लिए विधायकों का धन्यवाद करता हूं। मैं इस शक्ति प्रदर्शन के लिए निजी तौर पर इन विधायकों का ऋणी हूं।”
भाजपा की पंजाब के प्रति पहुंच पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “भाजपा को कभी भी पांच दरियाओं की इस धरती से जीतने का सपना नहीं देखना चाहिए। प्रदेश के लोग भाजपा के संदिग्ध चरित्र से अच्छी तरह वाकिफ हैं और वे इसे सबक जरूर सिखाएंगे।” उन्होंने आगे कहा, “भले ही भाजपा कुछ राज्यों में मिली जीत से उत्साहित है, जहां तक पंजाब का सवाल है, प्रदेश और उसके लोगों के प्रति उसके अन्याय और सौतेले व्यवहार की कहानी बहुत लंबी है।” उन्होंने कहा, “भाजपा पंजाब को पंजाब यूनिवर्सिटी, झाकी, चंडीगढ़, भाखड़ा बांध और हर दूसरे वैध अधिकार से वंचित करना चाहती है।”
वित्तीय चिंताओं के संबंध में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “इन लोगों ने पंजाब के विकास को खतरे में डालने के लिए प्रदेश के वैध फंड रोक दिए हैं।” उन्होंने आगे कहा, “हवाई किले बनाने के बजाय भाजपा नेतृत्व को यह भूल जाना चाहिए कि वह कभी पंजाब में सत्ता संभालेगा। पंजाब और पंजाबियों के खिलाफ किए गए गुनाह माफ नहीं किए जा सकते।” उन्होंने टिप्पणी की, “भाजपा किस मुंह से पंजाब आएगी, जब उसके नेताओं ने कभी प्रदेश और उसके लोगों के मुद्दे नहीं उठाए ? पंजाब के बहादुर और समझदार लोग भाजपा के बुरे कामों को कभी नहीं भूलेंगे और उसे उचित सबक सिखाएंगे।”
राजनीतिक वास्तविकता की पहचान कराते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “भाजपा के पास इस समय प्रदेश में दो विधायक हैं, लेकिन जिस तरह से वह शेखी बघार रहे हैं, इससे उनकी सीटें शून्य हो सकती हैं।” उन्होंने आगे कहा, “पंजाबी ऐसी तानाशाही चालों के आगे नहीं झुकते और हमेशा उन विभाजनकारी ताकतों को उचित सबक सिखाते हैं, जो पंजाब पर बलपूर्वक राज करना चाहती हैं।” उन्होंने कहा, “जब से प्रदेश सरकार ने बेअदबी के खिलाफ सख्त कानून बनाया है, भाजपा परेशान है क्योंकि वह पंजाब में अपने विभाजनकारी एजेंडे को आगे नहीं बढ़ा पाएगी।”
सरकार का रुख दोहराते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पंजाब में बार-बार नकारने के बावजूद भाजपा ने डराने-धमकाने, लालच देने और दल-बदल के प्रयासों के माध्यम से भ्रष्टाचार मुक्त सरकार को कमजोर करने की कोशिशें करके प्रदेश के प्रति दुश्मनी वाला रवैया अपनाया है।” उन्होंने जोर देकर कहा, “आप अपनी ताकत आम लोगों से प्राप्त करती है और एक सैद्धांतिक दृष्टिकोण से जुड़ी हुई है। ऐसी घिनौनी चालें लोकतंत्र में राजनीतिक जीत सुनिश्चित नहीं कर सकतीं। पंजाबी उन्हें उचित सबक सिखाएंगे।”
दिल्ली रवाना होने से पहले मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने एक्स पर कहा, “पंजाब के अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए हमारा संघर्ष निरंतर जारी है। आज, सभी ‘आप’ विधायकों के साथ हम पंजाब के महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार-विमर्श करने और राष्ट्रपति के सामने प्रदेश की मजबूत आवाज पेश करने के लिए निकले हैं। आपका जन सेवक होने के नाते हमारी सरकार पंजाब की खुशहाली सुनिश्चित करने और समाज के हर वर्ग के अधिकारों की रक्षा के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।”
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अंडरग्राउंड बिजली सप्लाई से बिजली के खंभे लगाने के मौके पर होने वाली सियासत भी खत्म हो जाएगी – CM भगवंत सिंह मान
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने पंजाब को देश का पहला खंभा-मुक्त गांवों वाला राज्य बनाने के लिए आज अपने पैतृक गांव सतौज में बिजली की तारों को अंडरग्राउंड (जमीनदोज) करने के प्रोजेक्ट का शिलान्यास करके अपनी तरह की अनूठी और ऐतिहासिक पहल की शुरुआत की।
किसानों और गांवों के लोगों को बड़ी राहत देते हुए भगवंत मान सरकार ने फसलों में आग लगने की घटनाओं और जानलेवा हादसों को रोकने तथा ऊपर से गुजरने वाली तारों (ओवरहेड लाइनों) के कारण बार-बार होने वाले बिजली कटौती को खत्म करने के लिए बिजली की तारों को जमीनदोज करना शुरू कर दिया है, जिससे गांवों को खतरनाक खंभों और उलझी हुई तारों के जाल से मुक्ति मिलेगी।
इस पायलट प्रोजेक्ट के तहत सतौज में 384 बिजली के खंभे हटा दिए जाएंगे और सड़कों को खोदे बिना जमीनदोज केबलें बिछाई जाएंगी। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने इस प्रोजेक्ट को आधुनिक बुनियादी ढांचे, निर्विघ्न बिजली सप्लाई और सुरक्षित गांवों पर आधारित “रोशन पंजाब” की शुरुआत बताया।
‘सतौज मॉडल’ को पूरे देश के लिए मिसाल बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आम आदमी पार्टी (आप) की सरकार ने पंजाब के किसानों से गांवों को तार-मुक्त करने का अपना वादा पूरा किया है। उन्होंने कहा कि जमीनदोज बिजली सप्लाई से गांवों में बिजली के खंभे लगाने को लेकर होने वाली सियासत भी खत्म हो जाएगी।
इस मौके पर सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “आज पंजाब के गांवों के लिए ऐतिहासिक दिन है क्योंकि गांवों को बिजली की तारों के जाल और अनावश्यक खंभों से मुक्त करने का व्यापक प्रोजेक्ट यहीं से शुरू किया जा रहा है। इस पायलट प्रोजेक्ट के तहत सतौज में बिजली की ऊपर से गुजरने वाली तारों को करीब 8 करोड़ रुपए की लागत से जमीनदोज किया जाएगा। यह देश का पहला ऐसा प्रोजेक्ट है और इस पहल से पंजाब पूरे देश के लिए मॉडल प्रोजेक्ट के रूप में उभरेगा।”
प्रोजेक्ट के तकनीकी विवरण के बारे में जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने बताया, “इस प्रोजेक्ट के तहत 7 किलोमीटर हाई टेंशन (एच.टी.) लाइनें, 9.5 किलोमीटर लो टेंशन (एल.टी.) लाइनें और 800 उपभोक्ताओं के घरों को जोड़ने वाली 41 किलोमीटर सर्विस केबल जमीनदोज बिछाई जाएगी। सतौज के 66 के.वी. ग्रिड से गांव से जुड़े तीन 11 के.वी. फीडर और इससे जुड़े 28 ट्रांसफार्मरों की सारी हाई टेंशन लाइनें जमीनदोज हो जाएंगी। इसके बाद 28 ट्रांसफार्मरों से मीटर बॉक्सों तक की सारी लो टेंशन लाइनें भी जमीनदोज की जाएंगी।”
मुख्यमंत्री ने आगे कहा, “मीटर बॉक्सों को सारे घरों से जोड़ने वाली केबलों को भी जमीनदोज किया जाएगा, जिससे 384 अनावश्यक बिजली के खंभे हटा दिए जाएंगे। इस प्रोजेक्ट की खासियत यह है कि जमीनदोज केबलें बिछाने के लिए सड़कें खोदने की जरूरत नहीं पड़ेगी क्योंकि जमीनदोज पाइप डालने के लिए ट्रेंचलेस (बिना खुदाई) ड्रिलिंग मशीनों का इस्तेमाल किया जाएगा। ये पाइप जमीन से तीन फुट नीचे बिछाए जाएंगे, जो आम लोगों के लिए वरदान साबित होंगे।”
बिजली की ऊपरी तारों के खतरों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “बिजली के खंभों और ऊपरी तारों से पशुओं और लोगों खासकर बच्चों को करंट लगने का खतरा बना रहता है। ट्रैक्टर, कंबाइन और अन्य वाहनों के ऊपरी तारों से संपर्क में आने पर अक्सर हादसे होते हैं। इसी तरह फसलों में आग लगने की घटनाओं से किसानों को भारी नुकसान होता है। बारिश, तूफान और तेज हवाओं से खंभे और तारें टूट जाती हैं, जिससे बिजली सप्लाई प्रभावित होती है और पावर कॉर्पोरेशन को वित्तीय नुकसान होता है।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि खंभों और तारों का जाल गांवों की सुंदरता को भी प्रभावित करता है।
इस प्रोजेक्ट को लोगों के लिए हर पहलू से फायदेमंद बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हाई टेंशन और लो टेंशन लाइनों के जमीनदोज होने से बिजली की लीकेज खत्म हो जाएगी, जिससे ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन का घाटा कम होगा। गांवों को निर्विघ्न बिजली सप्लाई मिलेगी, जमीनदोज तारों से हादसों में कमी आएगी, बिजली की तारों से फसलों में आग लगने की घटनाएं रुकेंगी और बारिश व तेज हवाएं अब बिजली सप्लाई में बाधा नहीं डाल सकेंगी। अनावश्यक खंभों और उलझी तारों को हटाने से गांवों की सुंदरता और बेहतर हो जाएगी।
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि इस प्रोजेक्ट को पंजाब के इतिहास में मील का पत्थर माना जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा, “यह प्रोजेक्ट मेरी जन्मभूमि से शुरू किया जा रहा है और आज का दिन पंजाब के इतिहास में सुनहरे अक्षरों में लिखा जाएगा। इस गांव से पंजाब सरकार ने ऐसा प्रोजेक्ट शुरू किया है, जिसके बारे में देश के किसी अन्य राज्य ने अभी तक सोचा भी नहीं है। यह प्रोजेक्ट इसलिए संभव हो पाया क्योंकि आज मेरा सपना साकार हो रहा है। इस प्रोजेक्ट का सपना बहुत साल पहले देखा गया था।”
मुख्यमंत्री ने आगे कहा, “आज की यह पहल सीधे तौर पर आम लोगों की जिंदगी से जुड़ी हुई है। आने वाले दिनों में ये बिजली के खंभे इतिहास बन जाएंगे।”
अपने गांव की दुखद घटना को याद करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान भावुक हो गए। उन्होंने कहा, “इस गांव के तीन नौजवानों की कंबाइन मशीन के साथ बिजली का करंट लगने से जान चली गई थी। वे अपने परिवारों के इकलौते कमाऊ सदस्य थे। यह प्रोजेक्ट उन नौजवानों को श्रद्धांजलि है क्योंकि भविष्य में ऐसी दुखद घटनाएं कभी नहीं होनी चाहिए।”
इस पहल को देश के लिए बदलाव का मॉडल बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “गांवों और शहरों के लोगों को बड़ी राहत देने के लिए पूरे देश में ‘सतौज मॉडल’ जाना जाएगा।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि दुनिया मंगल ग्रह पर कॉलोनियां बसाने की बातें कर रही है, जबकि हमारे लोग अभी भी गलियों-नालियों के मुद्दों में उलझे हुए थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब सरकार ने राज्य में डिजिटल क्रांति की शुरुआत की है। आर.टी.ओ. सेवाओं को डिजिटलाइज किया गया है और सरल भाषा में ‘ईजी रजिस्ट्री’ (ईजी रजिस्ट्री) प्रणाली लागू की गई है।
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आगे कहा, “पहले रजिस्ट्री के दस्तावेज जटिल भाषा में तैयार किए जाते थे, जो आम लोगों की समझ में नहीं आते थे, जिस कारण उन्हें दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते थे। लेकिन अब लोग अपने जिले की किसी भी तहसील से अपनी रजिस्ट्री करवा सकते हैं।”
पंजाब सरकार के बेअदबी विरोधी कानून का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पंजाब सरकार ने बेअदबी के खिलाफ सख्त कानून बनाया है, जिसमें उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान है, ताकि भविष्य में कोई भी श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी करने की हिम्मत न कर सके। अकाल पुरख ने मुझे ‘जागत ज्योति श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) एक्ट-2026’ के माध्यम से मानवता की सेवा करने का मौका बख्शा है, जिसमें बेअदबी के लिए सख्त सजा का प्रावधान है।”
मुख्यमंत्री ने आगे कहा, “पिछली सरकारों के पास बेअदबी को रोकने के लिए कानून बनाने की न तो नियत थी और न ही इच्छाशक्ति, जिस कारण उनके शासनकाल में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी आम बात बन गई थी। लेकिन पंजाब सरकार द्वारा पास किया गया यह एक्ट इसे पूरी तरह खत्म कर देगा क्योंकि कोई भी इस न अक्षम्य अपराध को करने की हिम्मत नहीं करेगा।”
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आगे कहा, “पंजाब सरकार श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की पवित्रता और सम्मान के लिए तथा बेअदबी की घटनाओं में शामिल किसी भी व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह वचनबद्ध है। सरकार सिख मूल्यों और लोगों की भावनाओं के प्रति प्रतिबद्ध है। इस धरती ने वह दौर देखा है जिसने समूची सिख संगत के दिलों को अंदर तक झकझोर दिया था। पंजाब सरकार ने अब यह कानून बनाया है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों। केवल कुछ चुनिंदा लोग, जो खुद को ही पंथ समझते हैं, इसका विरोध कर रहे हैं क्योंकि उनके हाथ बेअदबी की घटनाओं से रंगे हुए हैं।”
पंजाब सरकार की स्वास्थ्य सुविधा पहलों पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ शुरू की गई है, जिसके तहत पंजाब के सभी 65 लाख परिवारों को स्वास्थ्य कार्ड जारी किए जा रहे हैं। हर परिवार 10 लाख रुपए तक के मुफ्त इलाज का हकदार है। 30 लाख से ज्यादा लाभार्थियों को स्वास्थ्य कार्ड मिल चुके हैं, जबकि 1.65 लाख लोग इस योजना के तहत मुफ्त इलाज करवा चुके हैं। मैं लोगों से अपील करता हूं कि वे इन कार्डों का अधिक से अधिक लाभ उठाएं।”
मुख्यमंत्री ने आगे कहा, “पंजाब सरकार ने ‘मावां धीयां सत्कार योजना’ शुरू की है, जिसके तहत हर महिला को 1,000 रुपए प्रति माह और अनुसूचित जाति वर्ग की महिलाओं को 1,500 रुपए प्रति माह सम्मान राशि दी जाएगी। सम्मान राशि सीधे बैंक खातों में ट्रांसफर की जाएगी और सामाजिक सुरक्षा पेंशन प्राप्त कर रही महिलाएं भी इसके योग्य होंगी। पंजाब की लगभग 97 प्रतिशत महिलाओं को इस योजना का लाभ मिलने की उम्मीद है, जिसके लिए पंजाब सरकार ने बजट में 9,300 करोड़ रुपए रखे हैं।”
इस मौके पर कैबिनेट मंत्री हरपाल सिंह चीमा और तरुणप्रीत सिंह सौंध सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे।
एक्स पर कुछ अंश साझा करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “सपनों के ‘रोशन पंजाब’ बनाने की ओर एक और ऐतिहासिक कदम बढ़ाते हुए आज गांव सतौज में बिजली की तारों को जमीनदोज करने के अत्याधुनिक प्रोजेक्ट की शुरुआत की गई है। यह पहल न केवल गांवों और शहरों की सुंदरता को निखारेगी, बल्कि शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों को बिजली कटौती तथा तूफान और तेज हवाओं के दौरान होने वाले हादसों से भी पूरी सुरक्षा प्रदान करेगी।”
“इस प्रोजेक्ट के साथ घरों, व्यापारिक प्रतिष्ठानों और खेतों को निर्विघ्न और सुरक्षित बिजली सप्लाई मिलेगी, जिससे हर नागरिक के जीवन स्तर में सुधार होगा। यह पहल पंजाब को सही मायनों में ‘रंगला पंजाब’ बनाने की दूरदर्शी सोच का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जहां हर स्तर पर पारदर्शिता और उच्च गुणवत्ता वाले काम को सुनिश्चित किया जा रहा है। ‘आप’ सरकार आपकी सेवा में और पंजाब की तरक्की के लिए पूरी लगन के साथ दिन-रात काम कर रही है।”
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भाजपा में जाने से इन्कार करने पर संजीव अरोड़ा के बाद अब “आप” गोवा सह प्रभारी दीपक सिंगला गिरफ्तार – केजरीवाल
गोवा में आम आदमी पार्टी के सह प्रभारी दीपक सिंगला की गिरफ्तारी पर भाजपा के खिलाफ तीखा हमला बोला है। “आप” के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि दीपक सिंगला को इसलिए गिरफ्तार नहीं किया कि उसने कोई ग़लत काम किया है। बल्कि इसलिए गिरफ़्तार किया है क्योंकि वो बीजेपी के ख़िलाफ़ काम कर रहा था और उसने बीजेपी में शामिल होने से मना कर दिया। दीपक सिंगला बहादुर है और देश के लिए लड़ रहा है। अरविंद केजरीवाल ने संजीव अरोड़ा को लेकर कहा कि संजीव अरोड़ा बहुत बहादुर और देशभक्त हैं। पूरे पंजाब को उन पर गर्व है।
उधर, “आप” गोवा प्रभारी और दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आतिशी ने कहा कि आज हमारे देश में नीट का पेपर लीक हो रहा है, पेट्रोल-डीज़ल और सीएनजी के दाम रोज़ बढ़ रहे हैं, रुपया डॉलर के सामने गिरता जा रहा। लेकिन मोदी जी को सिर्फ़ एक काम है – विपक्ष के नेताओं पर झूठे केस लगाना और उन्हें गिरफ़्तार करना। सोमवार को ईडी ने “आप” नेता दीपक सिंगला को गिरफ्तार किया है। क्योंकि वो गोवा में बीजेपी के ख़िलाफ़ लड़ने वाला एक संगठन तैयार कर रहे थे। मेरा मोदी जी से कहना है कि आप चाहे हमारी पार्टी के कितने भी नेताओं को गिरफ़्तार करो, हम देश के हित के लिए काम करते रहेंगे।
आम आदमी पार्टी की वरिष्ठ नेता और गोवा प्रभारी आतिशी ने केंद्रीय जांच एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही भाजपा की मोदी सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पूरे देश ने देखा कि बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा ने ईडी का इस्तेमाल तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ किया था। चुनाव लड़ाने वाली एजेंसी ‘आई पैक’ में काम करने वाले लोगों को जेल भेज दिया गया और चुनाव से ठीक पहले तृणमूल कांग्रेस का सारा डाटा ईडी के माध्यम से चुरा लिया गया। जैसे ही चुनाव खत्म हुआ, वैसे ही उन सभी लोगों को जेल से रिहा कर दिया गया।
आतिशी ने कहा कि बंगाल के बाद भाजपा का अगला हमला पंजाब पर शुरू हुआ, जहां आम आदमी पार्टी के नेताओं पर ताबड़तोड़ छापे मारे गए। जो नेता दबाव में आकर भाजपा में शामिल हो गए, उन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। लेकिन संजीव अरोड़ा जैसे नेता, जिन्होंने भाजपा में जाने से साफ मना कर दिया, उन्हें जेल भेज दिया गया।
इसके बाद आतिशी ने कहा कि पंजाब के बाद अब अगला नंबर गोवा का आ गया है। भाजपा ऐसा इसलिए कर रही है क्योंकि वह अच्छी तरह जानती है कि गोवा में भाजपा सरकार से लोग नफरत करते हैं। भाजपा इस बात से डर गई है कि फरवरी में होने वाले गोवा विधानसभा चुनाव में यहां के लोग उन्हें सत्ता से बाहर फेंकने वाले हैं। आम आदमी पार्टी की बढ़ती लोकप्रियता से घबराकर ही आज आम आदमी पार्टी के गोवा सह-प्रभारी दीपक सिंगला के घर पर ईडी की छापेमारी की जा रही है।
आतिशी ने आगे कहा कि यहां गोवा में सिर्फ बड़े नेताओं पर ही नहीं, बल्कि कई आम कार्यकर्ताओं के घरों पर भी छापेमारी चल रही है। एक आम कार्यकर्ता या संगठन के प्रभारी पर यह छापेमारी सिर्फ और सिर्फ उनका चुनावी डाटा चुराने के लिए की जा रही है। ठीक वैसे ही, जैसे ईडी ने बंगाल में टीएमसी के साथ किया था। सारा डाटा चुराकर भाजपा को सौंप दिया, वही खेल आज गोवा में दोहराया जा रहा है।
अंत में आतिशी ने भाजपा को चेतावनी देते हुए कहा कि मैं भाजपा को साफ बता देना चाहती हूं कि आम आदमी पार्टी तुम्हारी उनसे या ईडी से डरने वाली नहीं है। गोवा के लोग सब देख रहे हैं कि किस तरह भाजपा ने बीते 15 सालों में गोवा की हालत बदतर कर दी है और यहां के लोगों को परेशान किया है। अब ईडी की ये फर्जी छापेमारी भी गोवा में भाजपा को करारी हार से नहीं बचा सकती।
“आप” के वरिष्ठ नेता और पंजाब प्रभारी मनीष सिसोदिया ने एक्स पर कहा कि ईडी सीबीआई और चुनाव आयोग जैसी संस्थाओं को अपने पर्सनल गुंडों की तरह इस्तेमाल करके मोदी जी विपक्ष के नेताओं को चुनाव जीतने से रोक सकते हैं। लेकिन देश की अर्थव्यव्स्था को, रुपए की गिरती इज्जत को नहीं संभाल सकते।
सौरभ भारद्वाज ने एक्स पर कह कि सोमवार को आम आदमी पार्टी के गोवा सह-प्रभारी दीपक सिंगला के घर पर ईडी ने दिल्ली और गोवा में कई स्थानों पर छापेमारी की। ईडी, सीबीआई, एसीबी आदि द्वारा “आप” नेताओं को लगातार परेशान किया जा रहा है।
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प्रतीक यादव की मौत ने फिर खोले समाजवादी पार्टी के पारिवारिक राजनीति वाले ज़ख्म
प्रतीक यादव की मौत ने एक बार फिर उत्तर प्रदेश की राजनीति और समाजवादी पार्टी के अंदरूनी पारिवारिक विवादों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक लखनऊ में 38 साल की उम्र में प्रतीक यादव का निधन हो गया। हालांकि वे सीधे तौर पर सक्रिय राजनीति में नहीं थे, लेकिन उनकी पहचान एक बिजनेसमैन, फिटनेस प्रेमी और लग्जरी लाइफस्टाइल वाले व्यक्ति के रूप में थी।
प्रतीक यादव की पहचान सिर्फ एक कारोबारी तक सीमित नहीं रही, बल्कि वे मुलायम सिंह यादव के दूसरे परिवार से जुड़े होने के कारण हमेशा राजनीतिक चर्चाओं में बने रहे। उनकी मां साधना गुप्ता थीं, जिनके साथ मुलायम सिंह का रिश्ता लंबे समय तक सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया। इसी वजह से यादव परिवार के भीतर “पहला परिवार” और “दूसरा परिवार” की चर्चा कई वर्षों तक चलती रही।
समाजवादी पार्टी की कहानी भी यहां सिर्फ एक राजनीतिक पार्टी की नहीं रह जाती, बल्कि एक पारिवारिक सत्ता संघर्ष की कहानी बन जाती है। 1992 में मुलायम सिंह यादव ने समाजवादी पार्टी की स्थापना की थी। उस समय मंडल राजनीति, पिछड़ी जातियों का उभार और बाबरी मस्जिद विवाद ने उत्तर प्रदेश की राजनीति को नया रूप दिया था। मुलायम सिंह ने खुद को पिछड़े वर्गों के नेता और मुस्लिम समुदाय के रक्षक के रूप में पेश किया। “MY Formula” यानी Muslim और Yadav समीकरण ने कई सालों तक पार्टी को मजबूती दी।
लेकिन समय के साथ पार्टी का नियंत्रण एक परिवार के इर्द-गिर्द केंद्रित हो गया। अखिलेश यादव, शिवपाल सिंह यादव, रामगोपाल यादव और अन्य पारिवारिक सदस्य पार्टी के प्रमुख चेहरे बनते गए। विरोधियों ने यहीं से आरोप लगाना शुरू किया कि समाजवादी पार्टी एक वैचारिक पार्टी के बजाय पारिवारिक कंपनी बन गई है, जहां पद और टिकट पारिवारिक समीकरणों के आधार पर तय होते हैं।
2016-17 में यह पारिवारिक संघर्ष खुलकर सामने आ गया। एक तरफ अखिलेश यादव और रामगोपाल यादव थे, जबकि दूसरी तरफ मुलायम सिंह, शिवपाल यादव और अमर सिंह का गुट माना जाता था। यह टकराव सिर्फ टिकट बंटवारे या पदों तक सीमित नहीं था, बल्कि इसे पुरानी और नई राजनीति के बीच की लड़ाई के रूप में भी देखा गया। अखिलेश यादव खुद को विकास और आधुनिक राजनीति का चेहरा बताने की कोशिश कर रहे थे, जबकि पुराना गुट पारंपरिक जातीय और संगठन आधारित राजनीति को महत्व दे रहा था।
इस पूरे विवाद में अमर सिंह की भूमिका भी काफी चर्चा में रही। अखिलेश समर्थकों का दावा था कि अमर सिंह परिवारिक विवाद को और बढ़ा रहे हैं और मुलायम सिंह पर प्रभाव डाल रहे हैं। उस समय यह भी कहा गया कि समाजवादी पार्टी का रणनीतिक नियंत्रण परिवार के बाहर के कुछ प्रभावशाली चेहरों के हाथों में जा रहा है।
भारतीय राजनीति में यह बहुत कम देखने को मिलता है कि एक सक्रिय पिता से बेटा पार्टी का नियंत्रण अपने हाथ में ले ले। लेकिन समाजवादी पार्टी में यह दृश्य भी देखने को मिला। पहले अखिलेश यादव को हटाने की कोशिश हुई, फिर अखिलेश गुट ने विरोध किया और आखिरकार चुनाव आयोग ने अखिलेश गुट को ही असली समाजवादी पार्टी माना। इस राजनीतिक लड़ाई को एक पारिवारिक त्रासदी के रूप में भी देखा गया।
समाजवादी पार्टी पर “गुंडा राज” के आरोप भी लंबे समय से लगते रहे हैं। विरोधियों का दावा रहा कि पार्टी के कुछ कार्यकालों में कानून-व्यवस्था कमजोर रही और बाहुबली तत्वों को राजनीतिक संरक्षण मिला। बीजेपी ने इस नैरेटिव को खासतौर पर शहरी और मध्यम वर्ग के वोटरों के बीच प्रभावी ढंग से उठाया।
इस बीच अपर्णा यादव का बीजेपी में जाना भी समाजवादी पार्टी के लिए बड़ा प्रतीकात्मक झटका माना गया। क्योंकि अपर्णा यादव मुलायम परिवार का हिस्सा थीं और उनके बीजेपी में जाने को “यादव परिवार में दरार” के रूप में पेश किया गया। प्रतीक यादव, जो अपर्णा के पति थे, इसी कारण फिर राजनीतिक चर्चा का हिस्सा बने।
आज अखिलेश यादव समाजवादी पार्टी का सबसे बड़ा चेहरा हैं। वे PDA यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक गठजोड़ की राजनीति को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं और युवाओं व शहरी वोटरों को जोड़ना चाहते हैं। लेकिन सवाल अब भी कायम है कि क्या समाजवादी पार्टी एक वैचारिक पार्टी है या फिर एक पारिवारिक सत्ता संरचना।
प्रतीक यादव की मौत ने एक बार फिर यह बहस जिंदा कर दी है कि यादव परिवार की अंदरूनी राजनीति ने समाजवादी पार्टी की दिशा पर कितना बड़ा असर डाला। वे खुद कभी बड़े राजनीतिक नेता नहीं रहे, लेकिन उनकी मौत ने मुलायम सिंह के दूसरे परिवार, अखिलेश से संबंधों और समाजवादी पार्टी के पारिवारिक समीकरणों को फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
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