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पंजाब सरकार दुनिया भर के आरोपियों को ट्रैक करके वापस लाने के लिए गृह मंत्रालय और विदेश मंत्रालय के साथ तालमेल कर रही है: CM भगवंत सिंह मान

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भगवंत मान सरकार ने अपराध के विरुद्ध एक स्पष्ट और बेमिसाल संदेश दिया है। सरकार ने कमल कौर मर्डर केस के मुख्य आरोपी अमृतपाल सिंह महिरों को यूएई से वापस लाकर अपनी पहुंच और दृढ़ इरादे का सबूत दिया है। इसके साथ ही, विदेश से चल रहे गैंगस्टर नेटवर्क्स पर शिकंजा कस दिया गया है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि ये गैंगस्टर उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में शूटरों को फंड मुहैया करवा रहे हैं। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि पंजाब में ऐसे कई करिंदों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका हैं और आप सरकार दुनिया भर से अपराधियों को ट्रैक करने और उन्हें वापस लाने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय और विदेश मंत्रालय के साथ लगातार तालमेल कर रही है।

मीडियाकर्मियों से बात करते हुए, मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाब सरकार पंजाब में वॉन्टेड गैंगस्टरों और अपराधियों को वापस लाने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय और विदेश मंत्रालय के साथ लगातार संपर्क में है। उन्होंने कहा कि इन लगातार कोशिशों का नतीजा मिल रहा है और कई मुख्य अपराधियों को पहले ही वापस लाया जा चुका है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि पंजाब में कानून-व्यवस्था की स्थिति बिल्कुल सामान्य है और ‘वॉर ऑन गैंगस्टर्स’ कैंपेन अपराध को रोकने में अहम भूमिका निभा रहा है।

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि जितने भी गैंगस्टरों के बारे में हमें जो भी जानकारी मिलती है, वे पंजाब के नहीं हैं, बल्कि विदेश से अपना नेटवर्क चला रहे हैं। कुछ लोग हथियार सप्लाई कर रहे हैं, जबकि उत्तर प्रदेश और बिहार में शूटरों को पैसे दिए जा रहे हैं; ऐसे कई शूटर गिरफ्तार भी किए गए हैं।

तालमेल वाली कार्रवाई के बारे में बताते हुए मुख्यमंत्री मान ने कहा कि जब हमें ऐसी जानकारी मिलती है, तो हम तुरंत गृह मंत्रालय और विदेश मंत्रालय से संपर्क करते हैं और हम उनमें से कई लोगों को वापस लाने में सफल रहे हैं। कुछ दुबई से कुछ पुर्तगाल से, कुछ इंग्लैंड, अमेरिका या कनाडा से आ रहे हैं। उन्होंने इन आपराधिक नेटवर्क के दुनिया भर में फैलने और उनके खिलाफ सरकार की सख्त कार्रवाई के बारे में विस्तार से बताया।

पंजाब की पहचान और सरकार प्रतिबद्धता को दोहराते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब एक शांतिप्रिय राज्य है। यह ‘सरबत दा भला’ चाहने वाले लोगों की धरती है और हम सभी की भलाई के लिए लगातार काम कर रहे हैं।

इस बीच, आप पंजाब के महासचिव बलतेज पन्नू ने कमल कौर मर्डर केस के मुख्य आरोपी अमृतपाल सिंह महिरो की गिरफ्तारी का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि संयुक्त अरब अमीरात से उसकी वापसी मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली सरकार के कानून-व्यवस्था बनाए रखने के पक्के वादे को दिखाती है।

बलतेज पन्नू ने कहा कि सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर कमल कौर की पिछले साल जून में बठिंडा में हत्या कर दी गई थी और तब से पंजाब पुलिस लगातार आरोपियों का पीछा कर रही थी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री मान के नेतृत्व में सरकार ने अपराध के खिलाफ ‘ज़ीरो टॉलरेंस’ पॉलिसी अपनाई है,  जिसके कारण आरोपियों को ट्रैक करके इंसाफ के कटघरे में लाया गया।

उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि अगर कोई सोचता है कि वह पंजाब में अपराध करके किसी दूसरे राज्य या देश में छिपकर बच सकता है, तो वह बहुत बड़ी गलतफहमी में है। बलतेज पन्नू ने दावा किया कि वह कहीं भी जाए, उसे ढूंढकर वापस लाया जाएगा।

सरकार की मज़बूत इच्छाशक्ति को दोहराते हुए उन्होंने कहा कि कानून हाथ में लेने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और ऐसे अपराधियों को दुनिया के किसी भी कोने से वापस लाया जाएगा और कानून के मुताबिक कड़ी सज़ा दी जाएगी।

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पंजाब सरकार के फसल अवशेष प्रबंधन प्रयासों को मिली बड़ी सफलता: पराली जलाने की घटनाओं में 94 प्रतिशत कमी पर मिला राष्ट्रीय स्तर का पुरस्कार

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पंजाब ने पर्यावरण के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। राज्य को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान दिया गया है। यह सम्मान पराली प्रबंधन में सुधार के लिए मिला है। सरकार ने इसे ऐतिहासिक कदम बताया है। Gurmeet Singh Khudian ने इसकी जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि पूरे राज्य के लिए गर्व की बात है।

क्या पराली जलाने की घटनाएं घटीं?

राज्य में पराली जलाने के मामलों में तेज गिरावट दर्ज की गई है। आंकड़ों के अनुसार इसमें लगभग 94 प्रतिशत कमी आई है। पहले यह समस्या बहुत बड़ी थी। हर साल हजारों घटनाएं सामने आती थीं। अब यह संख्या काफी कम हो गई है। यह बदलाव साफ तौर पर दिखाई दे रहा है। इसे बड़ी सफलता माना जा रहा है।

क्या किसानों ने बदली अपनी सोच?

इस बदलाव में किसानों की भूमिका सबसे अहम रही है। उन्होंने पराली जलाने की पुरानी आदत छोड़ी है। अब मशीनों का इस्तेमाल बढ़ाया गया है। इससे खेती का तरीका बदल रहा है। किसानों ने जिम्मेदारी दिखाई है। यह सोच में बड़ा बदलाव है। इसी वजह से यह सफलता संभव हो पाई है।

क्या सरकार ने दिया मजबूत साथ?

राज्य सरकार ने भी इस दिशा में लगातार काम किया है। Bhagwant Mann की अगुवाई में योजनाएं बनाई गईं। किसानों को आर्थिक सहायता दी गई। मशीनों पर भारी सब्सिडी दी गई। इससे किसानों को विकल्प मिला। यह कदम असरदार साबित हुआ। सरकार और किसान दोनों साथ आए।

क्या मशीनों का इस्तेमाल बढ़ा तेजी से?

फसली अवशेष प्रबंधन के लिए मशीनों की संख्या बढ़ी है। राज्य ने इसके लिए बड़ा बजट तय किया है। सैकड़ों करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। हजारों मशीनें खरीदी जा चुकी हैं। इससे खेतों में पराली प्रबंधन आसान हुआ है। किसान अब तकनीक का उपयोग कर रहे हैं। यह बदलाव लंबे समय तक असर डालेगा।

क्या पर्यावरण पर पड़ा सकारात्मक असर?


पराली जलाने में कमी से पर्यावरण को फायदा हुआ है। हवा की गुणवत्ता में सुधार आया है। मिट्टी की सेहत भी बेहतर हुई है। प्रदूषण का स्तर घटा है। लोगों को राहत मिली है। यह बदलाव केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है। इसका असर जमीन पर दिख रहा है।

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पंजाब से 155 लाख मीट्रिक टन अनाज की लिफ्टिंग के लिए केंद्र चलाएगा विशेष ट्रेनें, CM मान की बैठक रही सफल

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पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने नई दिल्ली में केंद्रीय खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रह्लाद जोशी से मुलाकात की। मुलाकात के दौरान उन्होंने राज्य के किसानों और मंडियों के लिए कई महत्वपूर्ण राहत उपाय सुनिश्चित किए। इस दौरान केंद्र ने पंजाब में पड़े 155 लाख मीट्रिक टन अनाज की लिफ्टिंग के लिए विशेष रेल गाड़ियां चलाने पर सहमति दे दी, जिससे रबी मंडीकरण सीजन से पहले राज्य में अनाज भंडारण संबंधी गंभीर संकट से निपटने में मदद मिलेगी।

इस हस्तक्षेप के साथ-साथ मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने पंजाब पर बोझ बने संरचनात्मक मुद्दों के समाधान पर जोर दिया, जिसमें उच्च नकद ऋण ब्याज दरें, ग्रामीण विकास फंड के तहत लंबित 9,000 करोड़ रुपए, ओलावृष्टि से प्रभावित फसलों के लिए मुआवजा और आढ़तियों की लंबे समय से लंबित मांगें शामिल हैं। केंद्रीय मंत्री ने इन मुद्दों पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी और लंबित मुद्दों के समाधान के लिए सचिव स्तरीय व्यवस्था बनाने सहित ठोस कदम उठाने का भरोसा दिया।

एक्स हैंडल पर बैठक की जानकारी साझा करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा: “आज दिल्ली में मैंने केंद्रीय खाद्य मंत्री प्रह्लाद जोशी जी के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। इस दौरान हमने आढ़तियों की मांगों सहित पंजाब से संबंधित विभिन्न प्रमुख मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की।”

मुख्यमंत्री ने आगे लिखा: “बैठक के दौरान केंद्र के सामने महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए गए, जिसमें पंजाब में पड़े 155 लाख मीट्रिक टन गेहूं और चावल की तुरंत लिफ्टिंग तथा आरडीएफ के तहत बकाया 9,000 करोड़ रुपए की तुरंत अदायगी के मुद्दे शामिल थे। इसके साथ ही, नकद ऋण सीमा के तहत राज्यों पर लगाई गई उच्च ब्याज दरों को कम करने और आढ़तियों की केंद्र से संबंधित मांगों पर प्राथमिकता के आधार पर विचार करने की मांग की गई। इसके अलावा, मंडी मजदूरों के ईपीएफ से संबंधित मुद्दों को तुरंत हल करने की अपील की गई और असामयिक बारिश के कारण हुए नुकसान के लिए किसानों को उचित मुआवजा देने की मांग भी की गई।”

उन्होंने आगे लिखा, “मुझे बेहद खुशी हो रही है कि केंद्रीय मंत्री जी ने इन सभी मुद्दों पर बेहद सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। हम पंजाब के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।”

फसलों के भंडारण संबंधी भारी कमी पर बात करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “राज्य के कवरड गोदामों में 180.88 लाख मीट्रिक टन अनाज (151.20 लाख मीट्रिक टन चावल और 29.67 लाख मीट्रिक टन गेहूं) पहले से ही स्टोर किया गया है, जबकि कुल उपलब्ध कवरड भंडारण क्षमता लगभग 183 लाख मीट्रिक टन (173 लाख मीट्रिक टन कवरड गोदाम + 10 लाख मीट्रिक टन गेहूं साइलो) है। नतीजतन, चावलों के लिए केवल 0.50 लाख मीट्रिक टन कवरड स्पेस और गेहूं के लिए 1.75 लाख मीट्रिक टन साइलो स्पेस उपलब्ध है।”

उन्होंने कहा, “राज्य में 1 अप्रैल, 2026 से रबी मंडीकरण सीजन (आरएमएस) 2026-27 शुरू हो गया है, जिसमें संभावित रूप से 130-132 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीद की जाएगी।”

मौजूदा स्टॉक के बोझ को उजागर करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले साल के 38 लाख मीट्रिक टन गेहूं के स्टॉक में से लगभग 8.71 लाख मीट्रिक टन स्टॉक पहले ही राज्य में सीएपी या खुली स्टोरेज में पड़ा है, जिससे वैज्ञानिक तरीके से भंडारण क्षमता की कमी हो गई है और लगभग 40 लाख मीट्रिक टन गेहूं को कम अनुकूल परिस्थितियों में स्टोर करना पड़ेगा।

अनाज की धीमी उठाई का मुद्दा उठाते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि हमारी सरकार लगातार गेहूं और चावल की राज्य से उठाई की मांग करती रही है ताकि चावल की खरीद और स्टोरेज के लिए जरूरी भंडारण क्षमता बनाई जा सके। हालांकि पिछले कई महीनों से राज्य से गेहूं और चावल की औसत उठाई प्रति माह केवल 5 लाख मीट्रिक टन रही है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि हर महीने कम से कम 12 लाख मीट्रिक टन गेहूं और चावल की उठाई की जाए या वैकल्पिक रूप से, विशेष रूप से पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के दौरान आम लोगों को पेश मुश्किलों को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (पीएमजीकेएवाई) के तहत अनाज का वितरण बढ़ाने जैसे प्रबंध किए जाएं, जैसा कोविड-19 महामारी के दौरान किया गया था। उन्होंने आगे कहा कि इससे रबी मंडीकरण सीजन 2026-27 के दौरान सुचारू खरीद कार्य सुनिश्चित होंगे और खरीफ मंडीकरण सीजन 2025-26 के लिए धान की मिलिंग को तेज किया जा सकेगा।

एक अन्य मुद्दा उठाते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि खरीद के लिए फंडों का प्रबंधन भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा अधिकृत स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के नेतृत्व वाले बैंकों के एक समूह द्वारा किया जाता है। उन्होंने आगे कहा कि भारतीय स्टेट बैंक जो ब्याज दर वसूल रहा है, वह भारतीय खाद्य निगम पर लागू रिकवरी दर से 0.5 प्रतिशत अधिक है और मासिक मिश्रित आधार पर ब्याज लगा रहा है।

उन्होंने आगे कहा कि हालांकि भारत सरकार द्वारा हर सीजन के लिए जारी की गई अस्थायी लागत शीटों में राज्य को फूड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (एफसीआई) की ब्याज दर पर केवल साधारण ब्याज की अनुमति है। नतीजतन पंजाब राज्य को हर सीजन में लगभग 500 करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है, जिससे बचा जा सकता है।

उन्होंने आगे कहा कि हमने यह मुद्दा केंद्रीय वित्त मंत्री के पास भी उठाया है। तीसरा मुद्दा ग्रामीण विकास फंड से संबंधित है। हमने बार-बार कहा है कि हमारी मंडियों तक जाने वाली सड़कों के निर्माण की जरूरत है और हमने विधानसभा में एक बिल भी पास किया है जिसमें कहा गया है कि यह पैसा केवल मंडियों की मरम्मत, मंडियों के आधुनिकीकरण और मंडियों की सड़कों को बेहतर बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। हालांकि कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व वाली पिछली सरकार ने इन फंडों का दुरुपयोग किया, जिसके कारण यह पैसा रोका गया है।

उन्होंने आगे कहा कि हम इस मुद्दे पर पहले ही सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुके हैं और मामला फिलहाल विचाराधीन है। मुकदमेबाजी को लंबा खींचने की बजाय केंद्र सरकार को पंजाब के जायज बकाए जारी कर देने चाहिए। यह पंजाब का हिस्सा है और पंजाब का हक है और हम केवल वही मांग रहे हैं जो हमारा जायज हक है।

उन्होंने आगे कहा कि यदि केंद्र के बजट में कोई रुकावट है तो फंड किस्तों में या किसी भी तरीके से जो उचित समझा जाए, जारी किए जा सकते हैं। लेकिन यह राशि अब 9000 करोड़ तक पहुंच गई है, जिसे अभी भी जारी नहीं किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि हमने इस मुद्दे को भी जोरदार तरीके से उठाया है और हमें भरोसा दिया गया है कि आने वाले दिनों में इस संबंध में कोई व्यवस्था बनाने के लिए सचिव स्तर पर बैठक बुलाई जाएगी, जिसके माध्यम से यह फंड जारी होना शुरू हो जाएंगे।

उन्होंने अपील की, “पंजाब को भारतीय खाद्य निगम की ब्याज दर के बजाय, भारतीय स्टेट बैंक द्वारा नकद ऋण सीमा (सीसीएल) पर लगाए जाने वाले ब्याज दर के अनुसार मासिक मिश्रित आधार पर ब्याज लेने की अनुमति दी जाए।”

आढ़तियों के मुद्दे पर बोलते हुए उन्होंने कहा, “मुख्य मुद्दा यह है कि आढ़ती 2.5 प्रतिशत कमीशन की मांग कर रहे हैं, जबकि भारत सरकार ने अपना कमीशन मौजूदा दरों पर निर्धारित किया है।”

आढ़तियों के कमीशन के मुद्दे पर विचार करते हुए भगवंत सिंह मान ने कहा, “भारत सरकार के खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग (डीएफपीडी) ने आढ़तियों (कमीशन एजेंट) के कमीशन को खरीफ मार्केटिंग सीजन (केएमएस) 2020-21 के लिए धान के लिए 45.88 रुपए प्रति क्विंटल और रबी मार्केटिंग सीजन (आरएमएस) 2021-22 के लिए गेहूं के लिए 46.00 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया था।”

उन्होंने आगे कहा, “उस समय से हर साल धान और गेहूं दोनों के लिए एक समान निर्धारित कमीशन जारी रखा गया है, जिसके कारण आढ़ती असंतुष्ट हैं और राज्य सरकार आढ़तियों का कमीशन बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार को लगातार लिख रही है।”

मुख्यमंत्री ने आगे कहा, “भारत सरकार के खाद्य मंत्रालय ने गेहूं के लिए 4.75 रुपये प्रति क्विंटल (46 रुपए से 50.75 रुपए) और धान के लिए 4.73 रुपये प्रति क्विंटल (45.88 रुपए से 50.61 रुपए) के कमीशन में मामूली बढ़ोतरी की है, जो आरएमएस 2026-27 से लागू होगी।” उन्होंने आगे कहा, “आढ़तियों द्वारा इस मामूली बढ़ोतरी को स्वीकार नहीं किया गया है और मांग की गई है कि पंजाब कृषि उत्पाद बाजार अधिनियम, 1961 और इसके अंतर्गत बनाए गए नियमों के अनुसार, आढ़तियों का कमीशन एमएसपी के 2.5 प्रतिशत पर निर्धारित किया जाए।”

उन्होंने अपील की, “भारत सरकार को डीएफपीडी के माध्यम से आढ़तियों के कमीशन में इस मामूली बढ़ोतरी की समीक्षा करनी चाहिए और पंजाब कृषि उपज बाजार अधिनियम, 1961 के अनुसार एमएसपी के 2.5 प्रतिशत की दर से कमीशन को मंजूरी दी जानी चाहिए।”

एक अन्य चिंता को उजागर करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पिछले कई सालों से, भारतीय खाद्य निगम ईपीएफ से संबंधित मुद्दों के कारण हर सीजन में खरीदी जाने वाली फसलों के लिए भुगतान किए जाने वाले मंडी लेबर चार्ज का 30 प्रतिशत अपने पास रख रहा है।” उन्होंने आगे कहा, “इसके परिणामस्वरूप, आढ़तियों से संबंधित लगभग 50 करोड़ रुपए की राशि एफसीआई के पास पड़ी है, जिससे उनका वित्तीय बोझ और बढ़ गया है।”

मुख्यमंत्री ने कहा, “राज्य की एजेंसियां आढ़तियों से अंडरटेकिंग या हलफिया बयान प्राप्त करने के बाद उन्हें भुगतान कर रही हैं, जिसमें कहा गया है कि यदि ईपीएफ अधिकारियों द्वारा कोई देनदारी निर्धारित की जाती है, तो आढ़ती इसे पूरा करेंगे।” उन्होंने जोर देकर कहा, “इसलिए ईपीएफ के हिसाब से लेबर चार्ज का 30 प्रतिशत अपने पास रखना किसी भी तरह उचित नहीं है।” केंद्रीय मंत्री से अपील की कि वे एफसीआई को राज्य एजेंसियों की तरह हलफिया बयान लेकर भुगतान जारी करने के निर्देश दें।

राष्ट्रीय खाद्य खरीद प्रणाली में पंजाब की प्रमुख भूमिका को दोहराते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आगे कहा कि निर्बाध खरीद सुनिश्चित करने, किसानों के हितों की रक्षा करने और राज्य पर अतिरिक्त वित्तीय दबाव बढ़ने से रोकने के लिए केंद्र द्वारा इन मुद्दों पर समय पर हस्तक्षेप करने की जरूरत है।

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Campaign Against Gangsters: चेहरे बेनकाब, इनाम घोषित, अब पंजाब में हर गली में तलाशे जाएंगे ‘मोस्ट वॉन्टेड’

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पंजाब में अपराध के खिलाफ जंग अब खुली चुनौती में बदल चुकी है। गैंगवार, रंगदारी, टारगेट किलिंग और नशा तस्करी के जाल में उलझे राज्य में अब सरकार ने ऐसा दांव चला है, जिससे अपराधियों की नींद उड़ना तय है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में सरकार ने पहली बार ‘पोस्टर वॉर’ छेड़ते हुए कुख्यात गैंगस्टरों और इनामी बदमाशों के नाम, चेहरे और इनाम राशि को सार्वजनिक कर दिया है।

मान सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि अब अपराधियों के लिए कोई कोना सुरक्षित नहीं रहेगा। पंजाब ने बीते कुछ वर्षों में गैंगवार, टारगेट किलिंग, रंगदारी और नशा तस्करी जैसे संगठित अपराधों का दबाव झेला है, जहां कई अपराधी विदेशों में बैठकर नेटवर्क चला रहे हैं और स्थानीय गुर्गों के जरिए वारदातों को अंजाम दिला रहे हैं। सरकार ने पहली बार इतने बड़े स्तर पर ‘वॉन्टेड’ पोस्टर जारी करते हुए नामचीन गैंगस्टरों और इनामी बदमाशों के चेहरे, नाम और उन पर घोषित इनाम राशि को सार्वजनिक कर दिया है।

इस पहल के जरिए सरकार ने साफ संकेत दिया है कि अब अपराधियों के लिए कोई ‘सेफ जोन’ नहीं बचेगा। उनकी पहचान अब छिपी नहीं रहेगी और आम जनता भी उन्हें पहचानकर कानून के शिकंजे तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाएगी। खास बात यह है कि इस पूरे अभियान को ‘आपकी जानकारी, हमारी कार्रवाई’ जैसे स्पष्ट संदेश के साथ जोड़ा गया है, जिससे जनता को सीधे इस लड़ाई का भागीदार बनाया गया है।

टॉप वॉन्टेड: 10 लाख के इनामी चेहरे

सरकार द्वारा जारी पोस्टर में कई कुख्यात अपराधियों पर 10-10 लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया है। इनमें संदीप सिंह उर्फ सन्नी, लखविंदर सिंह, हरविंदर सिंह उर्फ भोलू, सतनाम सिंह, बलविंदर सिंह डोनी, परविंदर सिंह और गौरव पंडित शामिल हैं। ये सभी आरोपी हत्या, फिरौती, गैंगवार, अवैध हथियार सप्लाई और संगठित अपराध जैसी गंभीर वारदातों में वांछित हैं। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार इनका नेटवर्क कई जिलों और पड़ोसी राज्यों तक फैला हुआ है।

5 लाख के इनामी: गैंग नेटवर्क की रीढ़

पोस्टर में कई ऐसे अपराधियों को भी शामिल किया गया है, जिन पर 5 लाख रुपये का इनाम रखा गया है। इनमें सर्वण सिंह, रोहित गोयल, गुरविंदर सिंह (इंजीनियर), गुरदेव सिंह, अमित कुमार, अमरजीत सिंह, मनप्रीत सिंह, जोगिंदर सिंह, बलजीत सिंह, सुमित कुमार, गुरप्रीत सिंह, जसबीर सिंह, रविंदर सिंह और हर्ष कुमार शामिल हैं। इन अपराधियों पर लूट, हत्या की साजिश, नशा तस्करी, रंगदारी वसूली और गैंग ऑपरेशन चलाने के आरोप हैं। पुलिस का मानना है कि यही लोग बड़े गैंगस्टर नेटवर्क को जमीन पर ऑपरेट करते हैं।

पुलिस का क्राइम सिंडिकेट पर फोकस

पंजाब में पिछले कुछ वर्षों में गैंगवार, रंगदारी और शूटआउट की घटनाओं में बढ़ोतरी देखी गई है। जांच एजेंसियों के मुताबिक, ये गैंग सोशल मीडिया और विदेशों में बैठे सरगनाओं के जरिए संचालित हो रहे हैं। सरकार की यह पहल इन नेटवर्क्स की कमर तोड़ने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। जब अपराधियों के चेहरे और नाम सार्वजनिक होंगे, तो उनके लिए कहीं भी छिपना मुश्किल हो जाएगा।

सूचना देने वालों की सुरक्षा सबसे ऊपर

सरकार ने साफ किया है कि जो भी व्यक्ति इन अपराधियों के बारे में जानकारी देगा, उसकी पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। इसके लिए विशेष हेल्पलाइन नंबर 93946-93946 जारी किया गया है। सूचना देने वाले को तय इनाम राशि दी जाएगी। नाम और पहचान किसी भी स्तर पर उजागर नहीं की जाएगी। पुलिस और खुफिया एजेंसियां तुरंत एक्शन लेंगी।

जनता बनी पुलिस की ‘इंटेलिजेंस’

इस अभियान का सबसे अहम पहलू यह है कि अब आम नागरिक भी अपराध नियंत्रण का हिस्सा बन गया है। सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे डरें नहीं और आगे आकर सूचना दें। सरकार ने इस मुहिम के जरिये बदमाशों को दो-टूक कहा है कि वे या तो सरेंडर करें या फिर उन पर सीधी कार्रवाई होगी। पुलिस को भी निर्देश दिए गए हैं कि इन वॉन्टेड अपराधियों के खिलाफ अभियान तेज किया जाए और जल्द से जल्द गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाए।

इसलिए अहम है यह कदम

  • पहली बार इतने बड़े स्तर पर वॉन्टेड लिस्ट सार्वजनिक
  • इनामी राशि के साथ फोटो जारी कर दबाव बढ़ाया गया
  • जनता की भागीदारी से इंटेलिजेंस नेटवर्क मजबूत होगा
  • गैंगस्टर इकोसिस्टम को जड़ से खत्म करने की कोशिश
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