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देश के नेतृत्व से वैश्विक उत्कृष्टता तक: पंजाब सरकार ने उपस्थिति संबंधी सुधारों के साथ मिशन समर्थ 2026-27 की शुरुआत की
पंजाब की शिक्षा क्रांति को अगले चरण में ले जाने के उद्देश्य से शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस और दिल्ली के पूर्व उप मुख्यमंत्री तथा ‘आप’ पंजाब प्रभारी मनीष सिसोदिया ने आज मिशन समर्थ 4.0 की शुरुआत की। यह शिक्षा में वैश्विक स्तर की उत्कृष्टता लाने वाला प्रमुख बुनियादी प्रशिक्षण कार्यक्रम है।
यह नई पहल राज्यव्यापी उपस्थिति ट्रैकिंग प्रणाली की सुविधा प्रदान करती है, जिसके तहत अभिभावकों को अपने बच्चे की उपस्थिति के बारे में रोजाना एसएमएस प्राप्त होंगे। यह वास्तविक समय की जवाबदेही और क्लासरूम में सीखने के लिए निरंतर सकारात्मक माहौल की ओर बढ़ रहे पंजाब का प्रतीक है।
इस कार्यक्रम को पंजाब की शिक्षा क्रांति में अगली बड़ी छलांग बताते हुए शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने कहा कि पंजाब, जो पहले ही परख (प्रदर्शन मूल्यांकन, समीक्षा और समग्र विकास के लिए ज्ञान विश्लेषण) सर्वेक्षण में पहले स्थान पर है, अब क्लासरूम जवाबदेही को मजबूत करके और जांचे-परखे शिक्षा अभ्यासों को अपनाकर रचनात्मक नतीजों की ओर बढ़ रहा है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने शिक्षा बजट बढ़ाकर 19,279 करोड़ रुपए कर दिया है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि फंड फाइलों में अटके रहने की बजाय क्लासरूम तक पहुंचें। इससे सरकारी स्कूलों में बुनियादी ढांचे से लेकर नतीजों तक सार्थक बदलाव आएगा।
परख राष्ट्रीय सर्वेक्षण 2024 में पंजाब के शीर्ष स्थान का हवाला देते हुए शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने बताया कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार ने मिशन समर्थ 2026-27 के हिस्से के रूप में उपस्थिति ट्रैकिंग सिस्टम की शुरुआत की है।
उन्होंने कहा, “अभिभावकों को उनके बच्चे की उपस्थिति के बारे में रोजाना एसएमएस प्राप्त होंगे और हर गैर-उपस्थिति की जानकारी भी दी जाएगी। इसका उद्देश्य नियमित उपस्थिति, सीखने की रुचि और विभिन्न गतिविधियों में बच्चे की भागीदारी बढ़ाना है। सात दिनों तक गैर-उपस्थित रहने वाले बच्चे से जिला स्तर पर अभिभावकों से संपर्क किया जाएगा, जबकि 15 दिनों से अधिक गैर-उपस्थिति पर अभिभावकों को सूबे के मुख्य दफ्तर से संपर्क करना होगा। यह सीखने की निरंतरता और बच्चों की सुरक्षा दोनों को सुनिश्चित करेगा।”
कार्यक्रम की महत्ता पर जोर देते हुए शिक्षा मंत्री ने कहा, “मिशन समर्थ ने क्लासरूम की नुहार बदल दी है। यह चरण उपस्थिति ट्रैकिंग, बेहतर निगरानी और उत्कृष्ट अभ्यासों को साझा करके शिक्षा के मानक और जवाबदेही को बढ़ाने पर केंद्रित है। हमारा लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि हर बच्चे के लिए बुनियादी शिक्षा का आधार मजबूत हो।”
अपनी सफलता की यात्रा के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा, “मैं इस जिम्मेदारी (शिक्षा मंत्री होने) के लिए आभारी हूं। पहले हर विधायक मंत्री बनना चाहता था, लेकिन शिक्षा मंत्री नहीं। पर मेरे लिए यह एक पसंदीदा काम रहा है।”
पंजाब सरकार के शिक्षा में निवेश के बारे में बताते हुए मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने कहा, “मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने 2021-22 में शिक्षा बजट 12,657 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 2026-27 में 19,279 करोड़ रुपए कर दिया, जो पंजाब के किसी भी क्षेत्र के लिए सबसे बड़ी आवंटन राशि है। यह पैसा सिर्फ कागजों में नहीं, बल्कि हर स्कूल तक पहुंच गया है। पिछली सरकारों के दौरान शिक्षकों को शौचालय की मरम्मत या झाड़ू खरीदने के लिए चंदा इकट्ठा करना पड़ता था, लेकिन अब वे कहते हैं कि ग्रांट न भेजो, हम पिछली ग्रांट भी पूरी तरह खर्च नहीं कर पाए।”
उन्होंने भगवंत मान सरकार के शासन में स्कूलों के बुनियादी ढांचे में सुधार पर और जोर देते हुए कहा कि 500 से अधिक विद्यार्थियों वाले हर सीनियर सेकेंडरी स्कूल में अब एक समर्पित कैंपस मैनेजर है, जबकि 100 से अधिक विद्यार्थियों वाले स्कूलों को सुरक्षा गार्ड और सेनिटेशन स्टाफ प्रदान किया गया है। पहले ये सुविधाएं स्कूलों में उपलब्ध नहीं थी।
शैक्षणिक सुधारों के बारे में शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने कहा कि अब विद्यार्थियों को समय पर पाठ्य-पुस्तकें पहुंच रही हैं। उन्होंने आगे कहा, “पहले शिक्षक बच्चों को फोटोकॉपी करवाकर सिलेबस पूरा करवाने के लिए मजबूर थे क्योंकि उन्हें सितंबर या अक्टूबर तक किताबें नहीं पहुंचती थीं। इस साल पंजाब सरकार ने प्राइवेट स्कूल की तरह हर बच्चे को 1 अप्रैल तक पूरी पाठ्य-पुस्तकें मुफ्त उपलब्ध कराई हैं। यह सरकार की सुचारू योजना और राजनीतिक इच्छाशक्ति के कारण ही संभव हो सका।”
मिशन समर्थ 4.0 के मुख्य उद्देश्य के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा, “यह कार्यक्रम यह सुनिश्चित करता है कि तीसरी से आठवीं कक्षा के बच्चे पढ़ने, लिखने और गणित में महारत हासिल करें।” एक उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा, “रोपड़ के गांव गरदले के 8वीं कक्षा के एक विद्यार्थी ने कहा, ‘मैं 5वीं कक्षा पास कर चुका था, लेकिन कुछ नहीं जानता था। समर्थ का बहुत धन्यवाद, अब मैं आपसे पूरे आत्मविश्वास के साथ बात कर सकता हूं।’ नतीजे अब राष्ट्रीय आंकड़ों में भी साफ दिखाई दे रहे हैं। पंजाब अब बुनियादी शिक्षा में राष्ट्रीय औसत के लिहाज से तीसरी कक्षा में 18 प्रतिशत और छठी कक्षा में 26-28 प्रतिशत से भी आगे पहुंच गया है। यही हमारा असली तमगा है।”
मंत्री हरजोत सिंह बैंस और दिल्ली के पूर्व उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने मिशन समर्थ कंपेंडियम भी जारी किया, जिसमें पंजाब के शिक्षकों द्वारा विकसित किए गए 38 जांचे-परखे क्लासरूम अभ्यासों को दस्तावेजी रूप दिया गया है ताकि इन्हें सरकारी स्कूलों तक पहुंचाकर सीखने के नतीजों में तेजी लाई जा सके और पढ़ाई में कमजोर विद्यार्थियों को अतिरिक्त सहायता देकर उन्हें आगे की कतार में लाया जा सके।
मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने कहा कि मिशन समर्थ पहले ही भारत के सबसे बड़े बुनियादी प्रशिक्षण कार्यक्रमों में से एक बन गया है, जो लगभग 12 लाख विद्यार्थियों को कवर करता है और इसमें सालाना 70,000 से अधिक शिक्षकों की भागीदारी होती है। इसकी स्तर-आधारित शिक्षण पद्धति से विद्यार्थियों को ग्रेड की बजाय उनके सीखने के स्तर के अनुसार समूहबद्ध किया जाता है, जिसके कारण पंजाब परख में शीर्ष स्थान हासिल करने में सफल हुआ है।
मनीष सिसोदिया ने कहा, “पंजाब ने साबित कर दिया है कि सरकारी स्कूल देश का नेतृत्व कर सकते हैं। परख 2024 में अव्वल होना इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है। मिशन समर्थ 4.0 के साथ राज्य यह सुनिश्चित कर रहा है कि हर बच्चा हर रोज स्कूल जाए और पूरी लगन से कुछ सीखकर आए। यह वैश्विक उत्कृष्टता की ओर एक महत्वपूर्ण कदम है।”
सुधारों के पीछे की सोच पर बात करते हुए उन्होंने कहा, “हर बच्चे को आईआईटी नहीं भेजा जा सकता, लेकिन सरकार का फर्ज यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी बच्चे की कार्यगुजारी बॉटम लाइन से नीचे न जाए। क्योंकि अगर किसी भी सिस्टम में कोई बच्चा इस लाइन से नीचे चला जाता है तो इसका अर्थ सरकार की नाकामी होगी। बच्चे आंकड़ों को नहीं, उम्मीद को दर्शाते हैं और उम्मीद को बॉटम लाइन से नीचे नहीं छोड़ा जा सकता।”
जवाबदेही की महत्ता को उजागर करते हुए मनीष सिसोदिया ने कहा, “देश भर में लोग शिक्षा मंत्रियों, प्रधानमंत्रियों और मुख्यमंत्रियों के भाषण पढ़ते हैं। लेकिन सिर्फ भाषण जिंदगियां नहीं बदलते, यह सिर्फ कामों से बदली जा सकती हैं। कामों में लगे अभिभावकों को एक साधारण संदेश मिलता है: ‘आपका बच्चा सुरक्षित रूप से स्कूल पहुंच गया है।’ यह जवाबदेही वास्तविक समय का भरोसा है और हजारों बयानों से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण है।”
इस मौके पर स्कूल शिक्षा सचिव सोनाली गिरी ने सम्मानित अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा, “हम यह सुनिश्चित करेंगे कि हर विद्यार्थी और अभिभावक सरकारी स्कूल का हिस्सा बनने पर गर्व महसूस करे। पंजाब ने नया मानदंड स्थापित किया है और मिशन समर्थ इसे और ऊंचाइयों पर ले जाएगा।”
इस अवसर पर डायरेक्टर एससीईआरटी किरण शर्मा, सेंट्रल स्क्वायर फाउंडेशन की एडवाइजरी बोर्ड सदस्य श्वेता शर्मा कुकरेजा और विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।
*सीखने की निरंतरता को मजबूत करने के लिए उपस्थिति-संबंधी सुधार*
भगवंत मान सरकार के प्रमुख कार्यक्रम मिशन समर्थ के तहत बच्चों को ग्रेड की बजाय उनके सीखने के स्तर के अनुसार शिक्षा प्रदान करने के लिए एक केंद्रित, क्लासरूम-संचालित दृष्टिकोण अपनाया जाता है, जिसमें अंतर की पहचान के लिए नियमित मूल्यांकन, गतिविधि-आधारित प्रशिक्षण और शिक्षकों के लिए निरंतर सलाह शामिल है।
परख राष्ट्रीय सर्वेक्षण 2024 में पंजाब बेहतर प्रदर्शन वाले राज्य के रूप में उभरा है, इसलिए पंजाब सरकार ने अब शिक्षा में राष्ट्रीय नेतृत्व से वैश्विक उत्कृष्टता की ओर बढ़ने के लिए मिशन समर्थ 2026-27 की शुरुआत की है।
इस चरण के अंतर्गत राज्य स्तरीय उपस्थिति ट्रैकिंग प्रणाली शुरू की गई है, जिसके तहत अभिभावकों को उनके बच्चे की उपस्थिति के बारे में रोजाना एसएमएस प्राप्त होंगे, जिसमें हर गैर-उपस्थिति की जानकारी दी जाएगी। यह प्रणाली नियमित उपस्थिति को बेहतर बनाने, सीखने की निरंतरता सुनिश्चित करने, क्लासरूम में भागीदारी बढ़ाने और स्कूल व अभिभावकों के बीच मजबूत जवाबदेही बनाने के लिए तैयार की गई है तथा यह उपस्थिति और सीखने के नतीजों के बीच संबंध को और मजबूत करेगी।
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भाजपा नेता रवनीत सिंह बिट्टू का पंजाब पुलिस अधिकारियों के साथ दुर्व्यवहार सत्ता के घमंड और सिक्योरिटी फोर्स के प्रति बेइज्ज़ती दिखाता है: बलतेज पन्नू
आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब के स्टेट मीडिया इंचार्ज बलतेज पन्नू ने धुरी में पंजाब पुलिस अधिकारियों के साथ भाजपा के केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू के व्यवहार की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि बिट्टू के व्यवहार ने शराफ़त की सारी हदें पार कर दी हैं और इससे भाजपा नेता का सिक्योरिटी फोर्स के प्रति घमंड और बेइज्ज़ती पूरी तरह से सबके सामने आ गई है।
गुरुवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पन्नू ने कहा कि रवनीत सिंह बिट्टू ने कैमरों के सामने पंजाब पुलिस अधिकारियों के साथ खुलेआम बदतमीज़ी की और अधिकारियों के लिए ‘दलाल’ जैसे अपमानजनक शब्दों का भी इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि एक केंद्रीय मंत्री का ऐसा व्यवहार पूरी तरह से बर्दाश्त के बाहर और गैर-ज़िम्मेदाराना है।
बलतेज पन्नू ने कहा कि चाहे पंजाब पुलिस हो, सेंट्रल आर्म्ड फोर्स हो या इंडियन आर्मी, हर सिक्योरिटी फोर्स इज्ज़त की हकदार है क्योंकि वे नागरिकों की सुरक्षा के लिए दिन-रात काम करते हैं। उन्होंने कहा कि राजनीतिक ड्रामा के लिए पूरी फोर्स को टारगेट करना और उनका हौसला तोड़ने की कोशिश करना बहुत खतरनाक है। सिक्योरिटी वाले लोगों की सुरक्षा के लिए अपनी जान जोखिम में डालते हैं और उनका इस तरह अपमान कभी नहीं होना चाहिए।
रवनीत सिंह बिट्टू के उस बयान पर कड़ा एतराज़ जताते हुए जिसमें उन्होंने कहा था कि जब भी चेकपॉइंट लगाए जाते हैं, पंजाबी पुलिस वालों के साथ गाली-गलौज की जाती है, पन्नू ने कहा कि यह बयान न सिर्फ़ पंजाब पुलिस का बल्कि पंजाब के लोगों का भी बहुत बड़ा अपमान है। उन्होंने आगे कहा कि पंजाब पुलिस के जवानों, खासकर युवा अधिकारियों ने जनता के साथ व्यवहार करने का तरीका बदल दिया है और लोगों की सुरक्षा के लिए प्रोफेशनल तरीके से अपनी ड्यूटी निभा रहे हैं।
रोड सेफ्टी फोर्स (एसएसएफ) के काम का ज़िक्र करते हुए बलतेज पन्नू ने कहा कि पंजाब पुलिस के जवानों की लगातार कोशिशों की वजह से आज एक्सीडेंट के शिकार लोगों को मिनटों में तुरंत मदद मिल जाती है। उन्होंने कहा कि जब भी लोगों को चोरी, हमला, एक्सीडेंट या कोई इमरजेंसी होती है, तो वे सबसे पहले पुलिस को फ़ोन करते हैं, गाली-गलौज करने के लिए नहीं। जब पुलिस चेकिंग होती है तो ईमानदार नागरिक ज़्यादा सुरक्षित महसूस करते हैं। पुलिस चेकिंग से सिर्फ़ क्रिमिनल और एंटी-सोशल एलिमेंट ही परेशान होते हैं।
बलतेज पन्नू ने विवाद शुरू होने के बाद रवनीत सिंह बिट्टू की चुप्पी पर भी सवाल उठाया और कहा कि केंद्रीय मंत्री आप नेताओं द्वारा पिछली प्रेस कॉन्फ्रेंस में उठाए गए सवालों का जवाब देने में नाकाम रहे हैं। उन्होंने कहा कि गंभीर चिंताओं का जवाब देने के बजाय, उन्होंने पर्सनल अटैक का सहारा लिया।
रवनीत सिंह बिट्टू पर और निशाना साधते हुए, बलतेज पन्नू ने 2017 में कांग्रेस सरकार के दौरान पंजाब पुलिस में डीएसपी के तौर पर बिट्टू के भाई की भर्ती का मुद्दा उठाया। उन्होंने दावा किया कि इस नियुक्ति को मुमकिन बनाने के लिए उम्र के क्राइटेरिया, एजुकेशनल क्वालिफिकेशन और भर्ती प्रक्रिया समेत कई नियम बदले गए थे। बलतेज पन्नू ने सवाल किया कि अगर रवनीत सिंह बिट्टू मानते हैं कि पंजाब पुलिस इतनी खराब है और उनका दावा है कि पंजाबी इस फोर्स से नफरत करते हैं, तो उन्होंने अपने परिवार के सदस्य को उसी डिपार्टमेंट में भर्ती कराने के लिए इतनी बड़ी हद तक क्यों गए?
पिछली सरकारों की तुलना मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की पंजाब सरकार से करते हुए बलतेज पन्नू ने कहा कि 65,000 से ज़्यादा सरकारी नौकरियां बिना किसी रिश्वत, भ्रष्टाचार या सिफारिश के पूरी तरह से मेरिट के आधार पर दी गई हैं। उन्होंने विपक्ष के नेताओं को चुनौती दी कि वे मौजूदा पंजाब सरकार के समय में भ्रष्टाचार के ज़रिए भर्ती का एक भी उदाहरण पेश करें।
बिना शर्त माफ़ी की मांग करते हुए बलतेज पन्नू ने कहा कि रवनीत सिंह बिट्टू को पूरी पंजाब पुलिस फोर्स, खासकर सब-इंस्पेक्टर और एसएसपी नवजोत कौर से माफ़ी मांगनी चाहिए, जिनके खिलाफ उन्होंने टकराव के दौरान गलत भाषा का इस्तेमाल किया था। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि पंजाब पुलिस के अधिकारी कड़ी मेहनत, पढ़ाई, कॉम्पिटिटिव परीक्षाओं और अपने परिवारों के त्याग की वजह से यह मुकाम हासिल करते हैं, न कि खास नियमों में बदलाव और राजनीतिक असर से।
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भाजपा सरकार के ‘अमृत काल’ के बड़े-बड़े दावे हुए फेल, भारत दुनिया के टॉप 15 निवेश स्थानों की लिस्ट से हुआ बाहर: हरपाल सिंह चीमा
पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने गुरुवार को कहा कि एफडीआई भरोसे के मामले में दुनिया की टॉप 15 इकॉनमी की लिस्ट से भारत का बाहर होना भाजपा की अगुवाई वाली केंद्र सरकार में निवेशकों के भरोसे के गहरे संकट को दिखाता है। ताजा एफडीआई कॉन्फिडेंस इंडेक्स रैंकिंग का हवाला देते हुए, वित्त मंत्री ने कहा कि 2016 में भारत दुनिया के टॉप 10 निवेश स्थानों में से एक था, लेकिन अब यह 2026 में टॉप 15 लिस्ट से पूरी तरह बाहर हो गया है।
विश्वव्यापी रैंकिंग का हवाला देते हुए, वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि यह घटनाक्रम भाजपा सरकार के प्रचार-आधारित दावों और भारतीय अर्थव्यवस्था की असली स्थिति के बीच बड़े अंतर को दिखाता है। ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में, उन्होंने लिखा, “भारत कभी विदेशी निवेश के लिए दुनिया के टॉप स्थानों में से एक था। 2016 में, भारत ग्लोबल एफडीआई कॉन्फिडेंस के मामले में टॉप 10 अर्थव्यवस्थाओं में से एक था। आज, भारत टॉप 15 में भी नहीं है।”
वित्त मंत्री ने कहा कि विदेशी निवेशक तेज़ी से दूसरे ऑप्शन (दूसरे देशों) की ओर देख रहे हैं क्योंकि पिछले एक दशक में भारत के इन्वेस्टमेंट माहौल में भरोसा काफी कम हो गया है। उन्होंने कहा कि निवेशकों का भरोसा कम हो रहा है। एग्रीमेंट सिर्फ़ कागज़ पर रह गए हैं, इन्वेस्टमेंट का माहौल कमज़ोर हो गया है, पॉलिसी में अनिश्चितता बढ़ रही है और ट्रेड एग्रीमेंट मज़बूती के बजाय समझौते की स्थिति में किए जा रहे हैं।
उन्होंने आगे कहा कि भाजपा सरकार ने हमेशा मतलब वाले आर्थिक सुधारों के बजाय अपनी इमेज चमकाना पसंद किया है। उन्होंने दावा किया कि ‘अमृत काल’ के सभी बड़े-बड़े दावों के बावजूद, असलियत यह है कि विदेशी निवेशक दूसरे देशों का रुख कर रहे हैं, जबकि भाजपा सरकार असली आर्थिक सुधारों के बजाय सिर्फ़ सुर्खियां बटोरने वाले प्रबंधों में लगी हुई है।
ग्लोबल टॉप 15 एफडीआई रैंकिंग से भारत का बाहर होना निवेशकों के भरोसे पर चिंतएं बढ़ीं
फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (एफडीआई) कॉन्फिडेंस रैंकिंग यह दिखाती है कि ग्लोबल निवेशक किसी देश की लंबे समय की आर्थिक स्थिरता, पॉलिसी की निरंतरता और ग्रोथ की संभावनाओं को कैसे देखते हैं। 2016 में दुनिया के टॉप 10 इन्वेस्टमेंट डेस्टिनेशन में भारत का शामिल होना उसके इकोनॉमिक भविष्य में मज़बूत ग्लोबल भरोसे का संकेत था। 2026 में टॉप 15 से इसका बाहर होना यह दिखाता है कि बड़े इंटरनेशनल निवेशकों भारत में इन्वेस्ट करने को लेकर ज़्यादा सावधान हो रहे हैं। ऐसे समय में जब यूएई, सऊदी अरब और साउथ कोरिया जैसे देश ग्लोबल कैपिटल के लिए अपनी अपील बढ़ा रहे हैं, भारत की गिरावट पॉलिसी में अनिश्चितता, कमजोर होती इंडस्ट्रियल मोमेंटम और इन्वेस्टमेंट की घोषणाओं और उनके असल में लागू होने के बीच बढ़ते अंतर की ओर इशारा करती है। अर्थशास्त्री अक्सर ऐसी गिरावट को इस बात का संकेत मानते हैं कि निवेशकों का भरोसा सिर्फ हेडलाइन वाली बातों से हटकर उन देशों की ओर जा रहा है जो ज़्यादा स्टेबल और अनुमानित आर्थिक माहौल देते हैं।
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केवल ढिल्लों के BJP प्रदेश अध्यक्ष बनने पर CM मान का तंज, सोशल मीडिया पोस्ट से साधा निशाना
पंजाब के मुख्यमंत्री Bhagwant Mann ने केवल सिंह ढिल्लों को पंजाब भाजपा का नया प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर तंज भरी पोस्ट साझा कर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है।
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अपनी पोस्ट में लिखा, “2019 और 2024 में बरनाला के लोगों द्वारा हराए गए कांग्रेस के भाजपाई नेता केवल ढिल्लों जी को BJP का प्रधान बनने पर बधाई। सुनील जाखड़ जी के साथ दिल से हमदर्दी। परमात्मा Ravneet Singh Bittu, Manpreet Singh Badal, Fatehjang Singh Bajwa, Tarun Chugh और Ashwani Sharma को यह जिल्लत सहने की ताकत दे।”
दरअसल, भारतीय जनता पार्टी ने हाल ही में वरिष्ठ नेता Kewal Singh Dhillon को पंजाब भाजपा का नया प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया है। पार्टी हाईकमान ने यह फैसला मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष Sunil Jakhar का तीन साल का कार्यकाल पूरा होने के बाद लिया है।
पार्टी सूत्रों के अनुसार भाजपा 2027 पंजाब विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए एक मजबूत और प्रभावशाली सिख चेहरे की तलाश में थी। इसी रणनीति के तहत केवल सिंह ढिल्लों के नाम पर अंतिम मुहर लगाई गई है।
सुनील जाखड़ 19 मई 2022 को भाजपा में शामिल हुए थे और जुलाई 2023 में उन्हें पंजाब भाजपा की कमान सौंपी गई थी। उन्होंने संगठन को मजबूत करने और पार्टी के विस्तार में अहम भूमिका निभाई। भाजपा में आने से पहले वह लंबे समय तक कांग्रेस में रहे और पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष, गुरदासपुर से सांसद, अबोहर से विधायक तथा पंजाब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष जैसे महत्वपूर्ण पदों पर भी रहे।
वह पंजाब के दिग्गज नेता और पूर्व लोकसभा स्पीकर Balram Jakhar के बेटे हैं। हालांकि 2024 लोकसभा चुनाव में हार के बाद उन्होंने इस्तीफे की पेशकश की थी, लेकिन पार्टी नेतृत्व ने उसे स्वीकार नहीं किया था।
अब मुख्यमंत्री भगवंत मान की इस टिप्पणी के बाद पंजाब की राजनीति में बयानबाजी और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।
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