Punjab
देश के नेतृत्व से वैश्विक उत्कृष्टता तक: पंजाब सरकार ने उपस्थिति संबंधी सुधारों के साथ मिशन समर्थ 2026-27 की शुरुआत की
पंजाब की शिक्षा क्रांति को अगले चरण में ले जाने के उद्देश्य से शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस और दिल्ली के पूर्व उप मुख्यमंत्री तथा ‘आप’ पंजाब प्रभारी मनीष सिसोदिया ने आज मिशन समर्थ 4.0 की शुरुआत की। यह शिक्षा में वैश्विक स्तर की उत्कृष्टता लाने वाला प्रमुख बुनियादी प्रशिक्षण कार्यक्रम है।
यह नई पहल राज्यव्यापी उपस्थिति ट्रैकिंग प्रणाली की सुविधा प्रदान करती है, जिसके तहत अभिभावकों को अपने बच्चे की उपस्थिति के बारे में रोजाना एसएमएस प्राप्त होंगे। यह वास्तविक समय की जवाबदेही और क्लासरूम में सीखने के लिए निरंतर सकारात्मक माहौल की ओर बढ़ रहे पंजाब का प्रतीक है।
इस कार्यक्रम को पंजाब की शिक्षा क्रांति में अगली बड़ी छलांग बताते हुए शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने कहा कि पंजाब, जो पहले ही परख (प्रदर्शन मूल्यांकन, समीक्षा और समग्र विकास के लिए ज्ञान विश्लेषण) सर्वेक्षण में पहले स्थान पर है, अब क्लासरूम जवाबदेही को मजबूत करके और जांचे-परखे शिक्षा अभ्यासों को अपनाकर रचनात्मक नतीजों की ओर बढ़ रहा है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने शिक्षा बजट बढ़ाकर 19,279 करोड़ रुपए कर दिया है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि फंड फाइलों में अटके रहने की बजाय क्लासरूम तक पहुंचें। इससे सरकारी स्कूलों में बुनियादी ढांचे से लेकर नतीजों तक सार्थक बदलाव आएगा।
परख राष्ट्रीय सर्वेक्षण 2024 में पंजाब के शीर्ष स्थान का हवाला देते हुए शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने बताया कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार ने मिशन समर्थ 2026-27 के हिस्से के रूप में उपस्थिति ट्रैकिंग सिस्टम की शुरुआत की है।
उन्होंने कहा, “अभिभावकों को उनके बच्चे की उपस्थिति के बारे में रोजाना एसएमएस प्राप्त होंगे और हर गैर-उपस्थिति की जानकारी भी दी जाएगी। इसका उद्देश्य नियमित उपस्थिति, सीखने की रुचि और विभिन्न गतिविधियों में बच्चे की भागीदारी बढ़ाना है। सात दिनों तक गैर-उपस्थित रहने वाले बच्चे से जिला स्तर पर अभिभावकों से संपर्क किया जाएगा, जबकि 15 दिनों से अधिक गैर-उपस्थिति पर अभिभावकों को सूबे के मुख्य दफ्तर से संपर्क करना होगा। यह सीखने की निरंतरता और बच्चों की सुरक्षा दोनों को सुनिश्चित करेगा।”
कार्यक्रम की महत्ता पर जोर देते हुए शिक्षा मंत्री ने कहा, “मिशन समर्थ ने क्लासरूम की नुहार बदल दी है। यह चरण उपस्थिति ट्रैकिंग, बेहतर निगरानी और उत्कृष्ट अभ्यासों को साझा करके शिक्षा के मानक और जवाबदेही को बढ़ाने पर केंद्रित है। हमारा लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि हर बच्चे के लिए बुनियादी शिक्षा का आधार मजबूत हो।”
अपनी सफलता की यात्रा के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा, “मैं इस जिम्मेदारी (शिक्षा मंत्री होने) के लिए आभारी हूं। पहले हर विधायक मंत्री बनना चाहता था, लेकिन शिक्षा मंत्री नहीं। पर मेरे लिए यह एक पसंदीदा काम रहा है।”
पंजाब सरकार के शिक्षा में निवेश के बारे में बताते हुए मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने कहा, “मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने 2021-22 में शिक्षा बजट 12,657 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 2026-27 में 19,279 करोड़ रुपए कर दिया, जो पंजाब के किसी भी क्षेत्र के लिए सबसे बड़ी आवंटन राशि है। यह पैसा सिर्फ कागजों में नहीं, बल्कि हर स्कूल तक पहुंच गया है। पिछली सरकारों के दौरान शिक्षकों को शौचालय की मरम्मत या झाड़ू खरीदने के लिए चंदा इकट्ठा करना पड़ता था, लेकिन अब वे कहते हैं कि ग्रांट न भेजो, हम पिछली ग्रांट भी पूरी तरह खर्च नहीं कर पाए।”
उन्होंने भगवंत मान सरकार के शासन में स्कूलों के बुनियादी ढांचे में सुधार पर और जोर देते हुए कहा कि 500 से अधिक विद्यार्थियों वाले हर सीनियर सेकेंडरी स्कूल में अब एक समर्पित कैंपस मैनेजर है, जबकि 100 से अधिक विद्यार्थियों वाले स्कूलों को सुरक्षा गार्ड और सेनिटेशन स्टाफ प्रदान किया गया है। पहले ये सुविधाएं स्कूलों में उपलब्ध नहीं थी।
शैक्षणिक सुधारों के बारे में शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने कहा कि अब विद्यार्थियों को समय पर पाठ्य-पुस्तकें पहुंच रही हैं। उन्होंने आगे कहा, “पहले शिक्षक बच्चों को फोटोकॉपी करवाकर सिलेबस पूरा करवाने के लिए मजबूर थे क्योंकि उन्हें सितंबर या अक्टूबर तक किताबें नहीं पहुंचती थीं। इस साल पंजाब सरकार ने प्राइवेट स्कूल की तरह हर बच्चे को 1 अप्रैल तक पूरी पाठ्य-पुस्तकें मुफ्त उपलब्ध कराई हैं। यह सरकार की सुचारू योजना और राजनीतिक इच्छाशक्ति के कारण ही संभव हो सका।”
मिशन समर्थ 4.0 के मुख्य उद्देश्य के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा, “यह कार्यक्रम यह सुनिश्चित करता है कि तीसरी से आठवीं कक्षा के बच्चे पढ़ने, लिखने और गणित में महारत हासिल करें।” एक उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा, “रोपड़ के गांव गरदले के 8वीं कक्षा के एक विद्यार्थी ने कहा, ‘मैं 5वीं कक्षा पास कर चुका था, लेकिन कुछ नहीं जानता था। समर्थ का बहुत धन्यवाद, अब मैं आपसे पूरे आत्मविश्वास के साथ बात कर सकता हूं।’ नतीजे अब राष्ट्रीय आंकड़ों में भी साफ दिखाई दे रहे हैं। पंजाब अब बुनियादी शिक्षा में राष्ट्रीय औसत के लिहाज से तीसरी कक्षा में 18 प्रतिशत और छठी कक्षा में 26-28 प्रतिशत से भी आगे पहुंच गया है। यही हमारा असली तमगा है।”
मंत्री हरजोत सिंह बैंस और दिल्ली के पूर्व उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने मिशन समर्थ कंपेंडियम भी जारी किया, जिसमें पंजाब के शिक्षकों द्वारा विकसित किए गए 38 जांचे-परखे क्लासरूम अभ्यासों को दस्तावेजी रूप दिया गया है ताकि इन्हें सरकारी स्कूलों तक पहुंचाकर सीखने के नतीजों में तेजी लाई जा सके और पढ़ाई में कमजोर विद्यार्थियों को अतिरिक्त सहायता देकर उन्हें आगे की कतार में लाया जा सके।
मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने कहा कि मिशन समर्थ पहले ही भारत के सबसे बड़े बुनियादी प्रशिक्षण कार्यक्रमों में से एक बन गया है, जो लगभग 12 लाख विद्यार्थियों को कवर करता है और इसमें सालाना 70,000 से अधिक शिक्षकों की भागीदारी होती है। इसकी स्तर-आधारित शिक्षण पद्धति से विद्यार्थियों को ग्रेड की बजाय उनके सीखने के स्तर के अनुसार समूहबद्ध किया जाता है, जिसके कारण पंजाब परख में शीर्ष स्थान हासिल करने में सफल हुआ है।
मनीष सिसोदिया ने कहा, “पंजाब ने साबित कर दिया है कि सरकारी स्कूल देश का नेतृत्व कर सकते हैं। परख 2024 में अव्वल होना इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है। मिशन समर्थ 4.0 के साथ राज्य यह सुनिश्चित कर रहा है कि हर बच्चा हर रोज स्कूल जाए और पूरी लगन से कुछ सीखकर आए। यह वैश्विक उत्कृष्टता की ओर एक महत्वपूर्ण कदम है।”
सुधारों के पीछे की सोच पर बात करते हुए उन्होंने कहा, “हर बच्चे को आईआईटी नहीं भेजा जा सकता, लेकिन सरकार का फर्ज यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी बच्चे की कार्यगुजारी बॉटम लाइन से नीचे न जाए। क्योंकि अगर किसी भी सिस्टम में कोई बच्चा इस लाइन से नीचे चला जाता है तो इसका अर्थ सरकार की नाकामी होगी। बच्चे आंकड़ों को नहीं, उम्मीद को दर्शाते हैं और उम्मीद को बॉटम लाइन से नीचे नहीं छोड़ा जा सकता।”
जवाबदेही की महत्ता को उजागर करते हुए मनीष सिसोदिया ने कहा, “देश भर में लोग शिक्षा मंत्रियों, प्रधानमंत्रियों और मुख्यमंत्रियों के भाषण पढ़ते हैं। लेकिन सिर्फ भाषण जिंदगियां नहीं बदलते, यह सिर्फ कामों से बदली जा सकती हैं। कामों में लगे अभिभावकों को एक साधारण संदेश मिलता है: ‘आपका बच्चा सुरक्षित रूप से स्कूल पहुंच गया है।’ यह जवाबदेही वास्तविक समय का भरोसा है और हजारों बयानों से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण है।”
इस मौके पर स्कूल शिक्षा सचिव सोनाली गिरी ने सम्मानित अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा, “हम यह सुनिश्चित करेंगे कि हर विद्यार्थी और अभिभावक सरकारी स्कूल का हिस्सा बनने पर गर्व महसूस करे। पंजाब ने नया मानदंड स्थापित किया है और मिशन समर्थ इसे और ऊंचाइयों पर ले जाएगा।”
इस अवसर पर डायरेक्टर एससीईआरटी किरण शर्मा, सेंट्रल स्क्वायर फाउंडेशन की एडवाइजरी बोर्ड सदस्य श्वेता शर्मा कुकरेजा और विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।
*सीखने की निरंतरता को मजबूत करने के लिए उपस्थिति-संबंधी सुधार*
भगवंत मान सरकार के प्रमुख कार्यक्रम मिशन समर्थ के तहत बच्चों को ग्रेड की बजाय उनके सीखने के स्तर के अनुसार शिक्षा प्रदान करने के लिए एक केंद्रित, क्लासरूम-संचालित दृष्टिकोण अपनाया जाता है, जिसमें अंतर की पहचान के लिए नियमित मूल्यांकन, गतिविधि-आधारित प्रशिक्षण और शिक्षकों के लिए निरंतर सलाह शामिल है।
परख राष्ट्रीय सर्वेक्षण 2024 में पंजाब बेहतर प्रदर्शन वाले राज्य के रूप में उभरा है, इसलिए पंजाब सरकार ने अब शिक्षा में राष्ट्रीय नेतृत्व से वैश्विक उत्कृष्टता की ओर बढ़ने के लिए मिशन समर्थ 2026-27 की शुरुआत की है।
इस चरण के अंतर्गत राज्य स्तरीय उपस्थिति ट्रैकिंग प्रणाली शुरू की गई है, जिसके तहत अभिभावकों को उनके बच्चे की उपस्थिति के बारे में रोजाना एसएमएस प्राप्त होंगे, जिसमें हर गैर-उपस्थिति की जानकारी दी जाएगी। यह प्रणाली नियमित उपस्थिति को बेहतर बनाने, सीखने की निरंतरता सुनिश्चित करने, क्लासरूम में भागीदारी बढ़ाने और स्कूल व अभिभावकों के बीच मजबूत जवाबदेही बनाने के लिए तैयार की गई है तथा यह उपस्थिति और सीखने के नतीजों के बीच संबंध को और मजबूत करेगी।
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भगवंत मान सरकार की हार्म-रिडक्शन सर्विसेज (नुकसान-न्यूनकरण सेवाएँ) पंजाब के ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ अभियान को दे रहीं मज़बूती
भगवंत मान सरकार द्वारा प्रदान की जा रही नुकसान-न्यूनकरण सेवाएँ ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ अभियान का एक महत्त्वपूर्ण घटक हैं और नशे की समस्या के ख़िलाफ़ राज्य की लड़ाई में एक महत्त्वपूर्ण स्तंभ के रूप में उभर रही हैं।
सब्सटांस यूज़ डिसॉर्डर (SUD) से पीड़ित लोग राज्य के स्वास्थ्य विभाग द्वारा संचालित 547 आउटपेशेंट ओपिओइड असिस्टेड ट्रीटमेंट (OOAT) केंद्रों और पंजाब स्टेट एड्स कंट्रोल सोसाइटी द्वारा संचालित 47 ओपिओइड सब्स्टीट्यूशन थेरेपी (OST) केंद्रों के साथ-साथ टारगेटेड इंटरवेंशन सेवाओं के माध्यम से नुकसान-न्यूनकरण सेवाओं का लाभ उठा सकते हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, नुकसान-न्यूनकरण में ऐसे कई हस्तक्षेप शामिल हैं, जिनका उद्देश्य नशीली दवाओं के सेवन से जुड़े स्वास्थ्य और सामाजिक दुष्प्रभावों को कम करना है, जिसमें एचआईवी का संक्रमण भी शामिल है। केवल नशीली दवाओं के सेवन पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय, नुकसान-न्यूनकरण दृष्टिकोण इससे जुड़े विभिन्न ज़ोख़िम कारकों की पहचान कर उन्हें दूर करने का प्रयास करता है, ताकि संभावित नुकसान को कम किया जा सके। प्रमाणों से पता चला है कि जब नुकसान-न्यूनकरण उपायों को पर्याप्त स्तर और व्यापक कवरेज के साथ लागू किया जाता है, तो वे इंजेक्शन के माध्यम से नशीली दवाओं का सेवन करने वाले लोगों में एचआईवी महामारी को रोकने, उसकी गति को धीमा करने और यहाँ तक कि उसे समाप्त करने में मदद कर सकते हैं। इन सेवाओं से हेपेटाइटिस बी और सी जैसे अन्य रक्त-जनित संक्रमणों की रोकथाम, ओवरडोज़ से होने वाली मौतों में कमी, अपराध की प्रवृत्ति को कम करने और सामाजिक बहिष्कार को दूर करने में भी मदद मिलती है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने नुकसान-न्यूनकरण को नशे की समस्या के प्रति सरकार की व्यापक रणनीति का एक आवश्यक हिस्सा बताया है। डॉ. बलबीर सिंह ने कहा, “हमें पीड़ित लोगों के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाना होगा और उन्हें उपचार के साथ-साथ सम्मानजनक पुनर्समावेशन के लिए आवश्यक कौशल भी उपलब्ध करवाने होंगे।” उन्होंने सरकार के उस दृष्टिकोण को स्पष्ट किया, जिसमें प्रभावित लोगों को कलंक के कारण उपचार से और दूर होने देने के बजाय उन्हें समाज की मुख्यधारा में वापस लाने पर ज़ोर दिया जा रहा है।
राज्य में सबसे बड़ा नुकसान-न्यूनकरण हस्तक्षेप 500 से अधिक OOAT केंद्रों के माध्यम से लागू किया जा रहा है, जहाँ मरीज़ परामर्श प्राप्त करने के साथ-साथ ओपिओइड उपयोग विकार के उपचार तथा तीव्र या दीर्घकालिक दर्द के प्रबंधन के लिए इस्तेमाल होने वाली दवाएँ सरकारी मनोचिकित्सक द्वारा जारी पर्चे के आधार पर प्राप्त कर सकते हैं। इस आउटपेशेंट उपचार रणनीति के तहत ब्यूप्रेनॉर्फिन (BPN) या ब्यूप्रेनॉर्फिन और नालोक्सोन के संयोजन की दवा दी जाती है। यह दवा नशे की लत पैदा करने वाले ओपिओइड पदार्थों के प्रभाव की नकल करती है, लेकिन लंबे समय तक इस्तेमाल के लिए भी अपेक्षाकृत अधिक सुरक्षित है।
मरीज़ निर्धारित खुराक लेने के लिए प्रतिदिन OOAT केंद्र आते हैं। निर्धारित मानदंडों को पूरा करने वाले मरीज़ों को निश्चित दिनों के लिए घर ले जाने हेतु दवा की खुराक भी दी जाती है। एम्स दिल्ली के नेशनल ड्रग डिपेंडेंस ट्रीटमेंट सेंटर (NDDTC) के प्रोफेसर डॉ. अतुल अंबेकर के अनुसार, “ओपिओइड सब्स्टीट्यूशन ट्रीटमेंट (OST) या ओपिओइड एगोनिस्ट ट्रीटमेंट के नाम से जाना जाने वाला यह उपचार ओपिओइड निर्भरता के दीर्घकालिक उपचार के लिए पहली पसंद माना जाता है।”
उपचार की प्रकृति के बारे में बताते हुए डॉ. अतुल अंबेकर ने स्पष्ट किया कि, “चूँकि इस उपचार में दी जाने वाली दवा भी नशे की लत पैदा कर सकती है, इसलिए अक्सर गलत धारणा बन जाती है कि इसमें एक नशे की जगह दूसरे नशे को लिया जा रहा है। लोगों को यह समझने की आवश्यकता है कि कई स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं में लंबे समय तक (कई वर्षों तक और संभवतः जीवनभर प्रतिदिन) दवा लेनी पड़ सकती है। केवल रोज़ाना एक गोली लेना किसी व्यक्ति को ‘नशे का आदी’ नहीं बना देता।”
इस कार्यक्रम के तहत नशीली दवाओं का सेवन करने वाले लोगों को इससे जुड़े स्वास्थ्य ज़ोख़िमों के बारे में जागरूक किया जाता है और उन्हें उपचार लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। जो लोग अब भी इंजेक्शन के ज़रिए नशीली दवाओं का सेवन करते हैं, उन्हें स्वास्थ्य टीमें सुरक्षित तरीके से इंजेक्शन लेने के बारे में परामर्श देती हैं। इसमें किसी दूसरे व्यक्ति की इस्तेमाल की हुई सिरिंज का दोबारा इस्तेमाल न करने और एचआईवी व हेपेटाइटिस जैसे संक्रमणों के ख़तरे को कम करने वाली सुरक्षित इंजेक्शन प्रक्रियाएँ अपनाने पर ज़ोर दिया जाता है।
राज्य ने उपचार के विकल्पों का भी विस्तार किया है, जिसमें विशेष रूप से लिक्विड मेथाडोन के माध्यम से ओरल सब्स्टीट्यूशन थेरेपी शामिल है। ब्यूप्रेनॉर्फिन के विकल्प के रूप में छह समर्पित मेथाडोन क्लीनिक अब फरीदकोट, लुधियाना, पटियाला, गुरदासपुर, मोहाली और जालंधर में संचालित हो रहे हैं। राज्य छह और मेथाडोन मेंटेनेंस ट्रीटमेंट केंद्र स्थापित कर रहा है, जिससे ऐसे समर्पित केंद्रों की कुल संख्या बढ़कर 12 हो जाएगी।
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा, “विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और नेशनल एड्स कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (NACO) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप लागू की जा रही मेथाडोन मेंटेनेंस थेरेपी लंबे समय से ओपिओइड निर्भरता से जूझ रहे लोगों के लिए एक प्रभावी उपचार विकल्प उपलब्ध करवाती है। यह व्यापक दृष्टिकोण उपचार के परिणामों को बेहतर बनाने और मरीज़ों को अपने परिवार तथा समाज में सफलतापूर्वक पुनः शामिल होने में मदद करेगा।”
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महिलाओं की खुशियों, सम्मान और अधिकारों को तीज के जश्न से जोड़ रही मान सरकार: डॉ. गुरप्रीत कौर मान
तीज के पावन त्योहार पर मोगा और बाघापुराना में आयोजित विशेष समारोहों में पंजाब की लोक संस्कृति, महिलाओं के उत्साह और ‘रंगले पंजाब’ की जीवंत तस्वीर देखने को मिली। मोगा की विधायक अमनदीप कौर अरोड़ा और बाघापुराना के विधायक अमृतपाल सिंह सुखानंद द्वारा आयोजित इन समारोहों में बड़ी संख्या में महिलाओं ने हिस्सा लिया और गिद्धा, बोलियों, लोक गीतों व पारंपरिक पंजाबी वेशभूषा के साथ तीज का जश्न मनाया।
दोनों समारोहों में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की धर्मपत्नी डॉ. गुरप्रीत कौर मान ने विशेष रूप से शिरकत की। इस दौरान पंजाब राज्य महिला आयोग की चेयरपर्सन राज लाली गिल और स्टेट ऑब्जर्वर पंजाब गायत्री बिश्नोई भी मौजूद रहीं।
इस अवसर पर डॉ. गुरप्रीत कौर मान ने कहा कि “तीज सिर्फ झूले, गिद्धे और बोलियों का त्योहार नहीं, बल्कि पंजाब की महिलाओं की खुशियों, आत्मसम्मान और आपसी भाईचारे का उत्सव है।” उन्होंने कहा कि पंजाब की महिलाएं अपनी मेहनत और हिम्मत से हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं और सरकार की योजनाएं उनके इस सफर को और मजबूत कर रही हैं।
डॉ. गुरप्रीत कौर मान ने कहा कि मावा-धियां योजना महिलाओं के लिए आर्थिक सहारे के साथ-साथ आत्मनिर्भरता और सम्मान का माध्यम बन रही है। उन्होंने कहा कि योजना के तहत मिलने वाली आर्थिक सहायता से महिलाएं अपनी रोजमर्रा की जरूरतें पूरी कर रही हैं और अपने छोटे-बड़े खर्चों के लिए दूसरों पर निर्भर रहने की जरूरत कम हो रही है।
उन्होंने कहा कि तीज समारोहों में महिलाओं से बातचीत के दौरान यह साफ दिखाई देता है कि मावा-धियां योजना को लेकर उनमें खासा उत्साह और खुशी है। महिलाओं ने बताया कि उनके खातों में आने वाली राशि का इस्तेमाल वे अपनी व्यक्तिगत जरूरतों, बच्चों से जुड़े खर्चों और घर-परिवार की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए कर रही हैं।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार का उद्देश्य सिर्फ योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि उनका लाभ सीधे महिलाओं तक पहुंचाना है, ताकि पंजाब की माताएं और बेटियां आर्थिक रूप से मजबूत होकर अपने फैसले खुद ले सकें।
“जब किसी मां या बेटी के हाथ में अपनी जरूरत पूरी करने के लिए अपना पैसा होता है, तो उसके आत्मविश्वास में भी फर्क दिखाई देता है। यही आर्थिक सम्मान महिलाओं के सशक्तिकरण की असली नींव है,” डॉ. गुरप्रीत कौर मान ने कहा।
मोगा में विधायक अमनदीप कौर अरोड़ा तथा बाघापुराना में विधायक अमृतपाल सिंह सुखनंद द्वारा करवाए गए इन समारोहों में महिलाओं ने पूरे उत्साह के साथ हिस्सा लिया। दोनों स्थानों पर तीज के पारंपरिक झूले, गिद्धा, बोलियां और लोक गीत आकर्षण का केंद्र रहे।
राज लाली गिल ने कहा कि पंजाब की महिलाएं अपनी संस्कृति को जीवित रखने के साथ-साथ समाज के हर क्षेत्र में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करवा रही हैं। वहीं गायत्री बिश्नोई ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम महिलाओं को एक-दूसरे से जुड़ने, अपनी बात साझा करने और अपनी सांस्कृतिक विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का अवसर देते हैं।
मोगा और बाघापुराना में हुए इन तीज समारोहों में महिलाओं की बड़ी भागीदारी ने यह संदेश दिया कि पंजाब की महिलाएं अपनी संस्कृति की वाहक होने के साथ-साथ पंजाब के सामाजिक और आर्थिक बदलाव की मजबूत ताकत भी हैं।
Politics
CM भगवंत सिंह मान ने आदर्श स्कूलों के शिक्षकों के वेतन में 120 प्रतिशत से अधिक बढ़ोतरी करने को दी मंजूरी
भगवंत सिंह मान सरकार ने आदर्श स्कूलों में सेवाएं निभा रहे शिक्षकों के सम्मान और आर्थिक सुरक्षा को सुनिश्चित करते हुए उनके वेतन में 120 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी करने को मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री के इस फैसले से लगभग 1,100 शिक्षकों को लाभ होगा, जिससे उनका मासिक वेतन लगभग 10,000 रुपये से बढ़कर 22,000 रुपये से अधिक हो जाएगा। यह फैसला सरकार की उस प्रतिबद्धता को दोहराता है कि पंजाब का भविष्य संवारने वालों को उचित लाभ, सम्मान और बनती मान्यता मिलनी चाहिए।
मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि उनकी सरकार शिक्षकों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करती रहेगी, क्योंकि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करना और प्रत्येक विद्यार्थी का भविष्य सुरक्षित करना शिक्षकों को सशक्त बनाने से शुरू होता है।
शिक्षकों के प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पिछली सरकारों ने पंजाब का भविष्य संवारने में शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका के बावजूद शिक्षक समुदाय की अनदेखी की थी। उन्होंने कहा, “शिक्षक हमारी शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ हैं। लगभग दो दशकों से ये शिक्षक कम वेतन मिलने के बावजूद समर्पण भावना के साथ सेवाएं निभा रहे हैं। हमारी सरकार ने उनके वेतन में 120 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी करके लंबे समय से चले आ रहे इस अन्याय को दूर करने का फैसला किया है।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षकों को न केवल बढ़ा हुआ वेतन मिलेगा, बल्कि केंद्रीय विद्यालय स्कूलों की तर्ज पर सुविधाएं भी प्रदान की जाएंगी, जिससे उनकी सेवा शर्तों में सुधार होगा।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में सीबीएसई से मान्यता प्राप्त इन आदर्श स्कूलों में 15,000 से अधिक विद्यार्थी शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं और राज्य सरकार विद्यार्थियों तथा शिक्षकों, दोनों के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने आगे कहा, “जब शिक्षक सुरक्षित और सम्मानित महसूस करते हैं तो विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा मिलती है। हमारी प्राथमिकता शिक्षकों के हितों की रक्षा करना है, ताकि इन स्कूलों में पढ़ने वाले प्रत्येक बच्चे का भविष्य सुरक्षित रहे।”
कर्मचारियों के कल्याण के लिए अपनी सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पिछली सरकारों ने आदर्श स्कूलों के शिक्षकों की अनदेखी की, जबकि उनकी सरकार ने उनकी हर जायज मांग को पूरा किया है। उन्होंने कहा, “हमारी सरकार समाज के हर वर्ग के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। हमने इन शिक्षकों की जायज मांगों को स्वीकार किया है और यह सुनिश्चित करना जारी रखेंगे कि वे अपनी जिम्मेदारियों को सुचारु रूप से और बिना किसी परेशानी के निभा सकें।”
बैठक के दौरान वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा, शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस, मुख्य सचिव के.ए.पी. सिन्हा, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव डॉ. रवि भगत, स्कूल शिक्षा सचिव सोनाली गिरि तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।
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