National
राघव चड्ढा बताएं, जनहित के मुद्दों पर मोदी सरकार के खिलाफ बोलने से क्यों डर रहे हैं? AAP का सवाल
आम आदमी पार्टी ने पंजाब से राज्यसभा सदस्य राघव चड्ढा को उपनेता पद से हटाने को समान्य कार्रवाई बताते उनके बयान पर पलटवार किया है। पार्टी ने राघव चड्ढा पूछा है कि वह देश और पार्टी से जुड़े मुद्दों पर भाजपा या मोदी सरकार के खिलाफ बोलने से क्यों डर रहे हैं? लगातार पार्टी लाइन के खिलाफ काम रहे थे। मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग के प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने और एलपीजी संकट पर सदन में बोलने से इन्कार करने समेत कई बार राघव चड्ढा ने पार्टी व्हिप का उल्लंघन किया। एक लंबे अरसे से राघव चड्ढा ने संसद में ऐसा कोई मुद्दा नहीं उठाया है, जिसमें उन्होंने मोदी सरकार से सवाल किए हों। पार्टी का कहना है कि केजरीवाल ने सबको निडरता और साहस से लड़ना सिखाया है, लेकिन राघव चड्ढा भाजपा और मोदी सरकार से सवाल करने से डर रहे हैं। ऐसे डर की राजनीति कैसे चलेगी?
भगवंत सिंह मान ने राघव चड्ढा के मुद्दे पर कहा कि यह पार्टी का फैसला है। पार्टियां इस तरह के फैसले लेती रहती हैं। संसद में अपना नेता और उपनेता बदलती रहती है। जब मैं पहली बार चुनाव जीता तो उस समय पार्टी ने डॉ. गांधी को नेता बनाया। कुछ समय बाद मैं भी पार्लियामेंट बोर्ड का नेता बना। यह पार्टी का निर्णय है। ऐसे छोटे-छोटे निर्णय होते रहते हैं। कई बार लोकसभा और राज्यसभा में सभी विपक्षी पार्टियों को एकमत में फैसला लेना होता है। जैसे सदन से वॉकआउट करना या सरकार की नीतियों का विरोध करना हो। अगर कोई व्यक्ति इन सामूहिक फैसलों का समर्थन नहीं करता है और पार्टी लाइन के विपरित जाता है तो फिर वह पार्टी के व्हिप के खिलाफ है। कोई भी पार्टी के व्हिप के खिलाफ जाएगा, तो उस पर कार्रवाई होगी।
‘‘आप’’ के वरिष्ठ नेता और सांसद संजय सिंह ने कहा कि हम लोग अरविंद केजरीवाल के सच्चे सिपाही हैं और हमने अरविंद केजरीवाल से एक ही बात सीखी है- निडरता, हिम्मत और साहस के साथ लड़ना और संघर्ष करना। लेकिन बड़े अफसोस के साथ यह कहना पड़ रहा है कि देश के तमाम मुद्दों पर जब मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रस्ताव आता है, तो राघव चड्ढा उस पर हस्ताक्षर नहीं करते हैं। पश्चिम बंगाल में लोगों के वोट के अधिकार छीने जा रहे हैं। दिल्ली में हम लोगों ने देखा कि किस तरह से चुनाव आयोग का दुरुपयोग हुआ। जब पंजाब का मुद्दा होता है, तो उस वक्त वह खामोश रहते हैं, कुछ नहीं बोलते हैं। वह प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ आवाज नहीं निकालते हैं।
संजय सिंह ने आगे कहा कि जनहित से जुड़े जो मुद्दे, देश, आम आदमी पार्टी और पार्टी के कार्यकर्ताओं से जुड़े हुए हैं, उन पर राघव चड्ढा चुप रहते हैं। गुजरात में “आप” कार्यकर्ताओं को पीटा-मारा जाता है, उस पर वह नहीं बोलते हैं। पंजाब के तमाम अधिकारों को छीनने का काम मोदी सरकार करती है, उस पर भी वह कुछ नहीं बोलते हैं। जब बहुत सारे मुद्दों पर सदन से वॉकआउट करने का मामला आता है, तो उस समय वह वॉकआउट नहीं करते हैं। ये तमाम चीजें हैं, जिसका जवाब देश और जनता राघव चड्ढा से चाहती है।
आम आदमी पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने राघव चड्ढा से कहा कि हम सब लोग अरविंद केजरीवाल के सिपाही हैं और हमने तो एक ही बात सीखी है कि ‘‘जो डर गया, समझो मर गया।’’ हम सबको तो सरकार की आंखों में आंखें डालकर जनता के मुद्दे उठाने थे। पिछले कुछ दिनों में हमने देखा है कि जो भी व्यक्ति सरकार के खिलाफ गंभीर मुद्दे उठाता है, सरकार से सवाल पूछता है और लोगों की बात करता है, सरकार एक तानाशाह की तरह उसे तमाम सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बैन कर रही है। चाहे वह एक्स हो, फेसबुक हो या यूट्यूब, हर जगह बैन किया जा रहा है। एफआईआर दर्ज कराई जा रही है। मुकदमे किए जा रहे हैं।
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि सरकार को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि कोई संसद में अपना सॉफ्ट पीआर करे। संसद में एक छोटी सी पार्टी के पास बेहद सीमित समय होता है। उसमें अगर कोई समोसों की बात उठा रहा है, तो उससे कहीं ज्यादा जरूरी है कि देश के बड़े मुद्दों को उठाया जाए। उन्होंने कहा कि पूरे देश के हर राज्य में हमने देखा है कि चुनाव से पहले सही लोगों के वोट काटे जाते हैं और फर्जी व झूठे वोट बनाकर सरकार पूरी बेईमानी से सिस्टम पर कब्जा करके चुनाव जीत रही है। पश्चिम बंगाल में भी यही हो रहा है।
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि अभी सारी विपक्षी पार्टियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर महाभियोग चलाने के लिए प्रस्ताव लाना चाहा, लेकिन आपने (राघव चड्ढा) उस पर हस्ताक्षर करने से मना कर दिया। जब भी कोई ऐसा मुद्दा आता है, जिस पर विपक्ष वॉकआउट करता है, तो आप वॉकआउट नहीं करते हैं। पिछले काफी अरसे से मैंने देखा है कि आपने सदन में ऐसा कोई भी मुद्दा नहीं उठाया, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी या भाजपा सरकार से कोई सवाल किया गया हो। ऐसे डर की राजनीति कैसे चलेगी?
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि हम लोगों को पंजाब के मुद्दे उठाने हैं। जहां से आप चुनकर आए हैं, आप उन मुद्दों को उठाने से भी घबराते हैं। अभी गुजरात में आम आदमी पार्टी के करीब 160 कार्यकर्ताओं पर झूठे मुकदमों के तहत एफआईआर दर्ज की गई, कई लोगों को गिरफ्तार किया गया, लेकिन आप उस पर भी चुप रहे। आम आदमी पार्टी के तमाम नेता जेल में थे। अरविंद केजरीवाल को बतौर मुख्यमंत्री सरकार ने एक झूठे मुकदमे में गिरफ्तार कर लिया, उस समय भी आप देश में नहीं थे और कहीं जाकर छिप गए थे।
सौरभ भारद्वाज ने आगे कहा कि मेरा मानना यह है कि देश के लिए असली मुद्दे हमें निडरता और साहस के साथ उठाने पड़ेंगे। भाजपा की आंखों में आंखें डालकर मुद्दे उठाने पड़ेंगे। वरना आपके इन सॉफ्ट मुद्दों से सरकार को कोई फर्क नहीं पड़ता। बल्कि भाजपा तो गुरुवार से आपको सोशल मीडिया पर सपोर्ट कर रही है। आप इस बारे में सोचिएगा और देखिएगा कि आप कहां से चले थे और कहां आ गए हैं। देश को किन चीजों की जरूरत है और आप कैसे बेहतर कर सकते हैं।
उधर, दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आतिशी ने राघव चड्ढा से सवाल करते हुए कहा कि वह भाजपा से इतना क्यों डरते हैं? वह भाजपा पर सवाल उठाने से क्यों डरते हैं? वह मोदी जी से सवाल पूछने से क्यों डरते हैं? आज हमारा देश एक बहुत बड़े संकट से गुजर रहा है। आज हमारे देश के लोकतंत्र और संविधान पर खतरा मंडरा रहा है। आज हमारी आंखों के सामने चुनाव आयोग का दुरुपयोग करके पश्चिम बंगाल का चुनाव चुराया जा रहा है, लेकिन वह उस पर सवाल नहीं उठा रहे हैं। वह उस पर बोलने से डर रहे हैं।
आतिशी ने कहा कि हम सबने देखा है कि किस तरह से दिल्ली में गलत तरीके से वोट काटे गए। भाजपा के कार्यकर्ताओं ने गलत तरीके से वोट बनाए और भाजपा चुनाव चुराकर ले गई। आज पश्चिम बंगाल में भी यही हो रहा है, वहां भी चुनाव आयोग का दुरुपयोग हो रहा है। लेकिन जब तृणमूल कांग्रेस और पूरा विपक्ष चुनाव आयोग के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लेकर आता है, तो राघव चड्ढा उस पर हस्ताक्षर करने से मना कर देते हैं। क्या उन्होंने एक बार भी संसद में पश्चिम बंगाल में लोकतंत्र पर हो रहे हमले पर सवाल उठाए? वोट काटने पर सवाल उठाए? गलत तरीके से बन रहे वोटों पर सवाल उठाए? उन्होंने ये सवाल क्यों नहीं उठाए? क्या वह भाजपा से डर रहे हैं? क्या वह मोदी जी से डर रहे हैं?
आतिशी ने कहा कि आज देश के आम आदमी के सामने सबसे बड़ा संकट एलपीजी गैस सिलेंडर का है। राघव चड्ढा तो बड़े आदमी हैं, राज्यसभा के सांसद हैं, हो सकता है उनको दिक्कत ना आती हो। लेकिन एक आम परिवार, एक छोटे से मकान या कच्ची कॉलोनी में रहने वाले और एक गैस सिलेंडर कनेक्शन वाले परिवार को आज अपने बच्चों के लिए खाना बनाने में भारी दिक्कत हो रही है। पिता सोच रहे हैं कि काम पर जाऊं और दिहाड़ी लेकर आऊं, या लंबी-लंबी लाइनों में खड़ा होकर गैस का सिलेंडर ले आऊं ताकि कल मेरे बच्चों के लिए लंच बन सके।
आतिशी ने कहा कि जब आम आदमी पार्टी ने पंजाब में और दिल्ली विधानसभा में सिलेंडर का सवाल उठाया, जब आम आदमी पार्टी के सांसदों ने एलपीजी सिलेंडर का मुद्दा उठाया और जब राघव चड्ढा को एलपीजी के मुद्दे पर बोलने के लिए कहा गया, तो वह चुप रह गए। क्या वह मोदी जी से डर गए हैं? आज इस देश में हर इंसान को यह तय करना होगा कि क्या वह मोदी जी के साथ है या वह संविधान और लोकतंत्र के साथ है।
आतिशी ने कहा कि मुझे याद आ रहा है कि जब अरविंद केजरीवाल गिरफ्तार हुए थे, तब हम सब सड़कों पर खड़े होकर लड़ रहे थे। पुलिस हम पर लाठियां बरसा रही थी और हमें घसीट-घसीट कर पकड़ कर ले जा रही थी। दिल्ली के अलग-अलग थानों में, कहीं नरेला में, तो कहीं बवाना में हम डिटेन किए गए थे। हम रोज सड़कों पर लड़ रहे थे और तब राघव चड्ढा लंदन में थे। उन्होंने हमें बताया था कि उनकी आंख का ऑपरेशन हो रहा है, इसलिए वह लंदन में हैं। तब मीडिया ने हमसे बहुत सवाल पूछे। बार-बार हमने मीडिया से कहा कि राघव चड्ढा डरे नहीं हैं। उनकी आंख में दिक्कत है और वह अपना ऑपरेशन करवाने गए हैं। लेकिन आज मेरे मन में भी यह सवाल आ रहा है कि जब अरविंद केजरीवाल गिरफ्तार हुए, क्या तब भी वह भाजपा से डर गए थे? क्या तब भी वह मोदी जी से डर गए थे? क्या वह डर कर लंदन भाग गए थे?
आतिशी ने आगे कहा कि हो सकता है कि राघव चड्ढा मोदी जी से डरते हों, हो सकता है कि वह जेल जाने से डरते हों। लेकिन हम अरविंद केजरीवाल के सिपाही हैं। हम ना भाजपा से डरते हैं, ना मोदी जी से डरते हैं, ना उनकी एजेंसियों से डरते हैं और ना ही जेल जाने से डरते हैं। इसलिए हम इस देश के आम आदमी की आवाज उठाते आए हैं और आगे भी उठाते रहेंगे। हम इस लोकतंत्र के लिए आवाज उठाते आए हैं और लोकतंत्र के लिए आवाज उठाते रहेंगे। मोदी जी या भाजपा से डरने से संविधान और लोकतंत्र नहीं बचेगा। आज राघव चड्ढा को यह तय करना है कि क्या वह संविधान के साथ हैं या फिर मोदी जी के साथ हैं।
वहीं, आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा ने कहा कि हम केजरीवाल के सिपाही हैं। निडरता ही हमारी पहली पहचान है। कोई मोदी से डर जाए तो देश के लिए क्या लड़ेगा? पार्टी को संसद में बोलने का थोड़ा सा समय मिलता है। उसमें या तो देश बचाने का संघर्ष कर सकते हैं या एयरपोर्ट कैंटीन में समोसे सस्ते करवाने का। गुजरात में हमारे सैंकड़ों कार्यकर्ता भाजपा की पुलिस ने गिरफ्तार कर लिए, क्या सांसद साहब सदन में कुछ बोले?
अनुराग ढांडा ने कहा कि पश्चिम बंगाल में वोट का अधिकार छीना जा रहा है। सदन में मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ प्रस्ताव आया तो भाई साहब ने साइन करने से मना कर दिया। पार्टी ने सदन से वाकआउट किया तो मोदी जी की हाज़िरी लगाने के लिए बैठे रहते हैं। पिछले कुछ सालों से तुम डर गए हो राघव। मोदी के खिलाफ बोलने से घबराते हो। देश के असली मुद्दों पर बोलने से घबराते हो। जो डर गया वो समझो मर गया।
National
अमन अरोड़ा ने शाहकोट हलके में नौकरियों के मामले में कांग्रेसी विधायक लाडी को घेरा
पंजाब विधान सभा में विपक्ष को घेरते हुए पंजाब के रोजगार सृजन, कौशल विकास और प्रशिक्षण तथा उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री श्री अमन अरोड़ा ने कहा कि राज्य सरकार ने पिछले साढ़े चार सालों में 68000 से अधिक सरकारी नौकरियां प्रदान की हैं और 1,83,837 करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित करने के साथ-साथ निजी क्षेत्र में 6,36,636 नौकरियों के अवसर पैदा किए हैं।
आज सदन में विधायक स. कुलदीप सिंह धालीवाल द्वारा रोजगार के अवसरों के बारे में पेश किए गए प्रस्ताव पर चर्चा का समापन करते हुए श्री अमन अरोड़ा ने सदन को बताया कि इस बड़े निवेश प्रवाह ने सीधे और अप्रत्यक्ष रूप से निजी क्षेत्र में 6.36 लाख से अधिक नौकरियों के अवसर पैदा किए हैं। उन्होंने जापान की प्रमुख स्टील कंपनी आइची स्टील का उदाहरण दिया, जिसने मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली राज्य सरकार की सुविधाओं और कारोबार को आसान बनाने वाली नीतियों से प्रभावित होकर अपने नियोजित निवेश को 500 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 1100 करोड़ रुपये कर दिया है।
कांग्रेस के विधायक हरदेव सिंह लाडी शेरोवालिया द्वारा उनके शाहकोट विधानसभा हलके में किसी भी व्यक्ति को सरकारी नौकरी न मिलने के आरोप पर श्री अमन अरोड़ा ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए उन्हें अपने शाहकोट हलके में सभा रखने की चुनौती दी। उन्होंने कहा, ”मैं आऊंगा और हम लोगों से पूछेंगे, क्या उन्हें नौकरियां मिली हैं। अगर मैं गलत हुआ, तो मैं मंत्री पद और विधायक के तौर पर इस्तीफा दे दूंगा। अगर मैं सही हुआ तो लाडी को इस्तीफा देना होगा।” कांग्रेसी विधायक लाडी ने यह चुनौती स्वीकार नहीं की और चर्चा छोड़कर बैठ गए।
उन्होंने जोर देकर कहा कि पंजाब सरकार ने सभी सरकारी नौकरियां बिना किसी रिश्वत या सिफारिश के केवल योग्यता के आधार पर दी हैं।
श्री अमन अरोड़ा ने कौशल विकास के लिए राज्य सरकार के रिकॉर्ड प्रयासों का हवाला देते हुए बताया कि राज्य के बजट में 75 सालों में पहली बार कौशल विकास मिशन के लिए 25 करोड़ रुपये रखे गए हैं, जो पिछले साल 10 करोड़ रुपये थे। उन्होंने दावा किया कि 22 लाख से अधिक नौजवानों को रोजगार में प्लेसमेंट कैंपों और हैंडहोल्डिंग अभ्यासों के माध्यम से सुविधा दी गई है। उन्होंने बताया कि सुनाम में हाल ही में आयोजित एक मेगा रोजगार मेले में, 61 कंपनियों ने भाग लिया और लगभग 700 नौजवानों को मौके पर ही नियुक्ति पत्र जारी किए।
रोजगार सृजन मंत्री ने आगे बताया कि राज्य सरकार द्वारा 100 करोड़ रुपये की लागत से संगरूर जिले में विश्व स्तरीय संत अतर सिंह महाराज आर्म्ड फोर्सेज प्रेपरेटरी इंस्टीट्यूट स्थापित किया जा रहा है। यह विश्व स्तर पर अपनी तरह का पहला संस्थान है, जहां सशस्त्र सेनाओं में अधिकारी स्तर के पदों के लिए वार्षिक 500 नौजवानों को प्रशिक्षण दिया जाएगा।
केंद्र सरकार के आंकड़ों का हवाला देते हुए श्री अमन अरोड़ा ने बताया कि 15-29 साल आयु वर्ग में पंजाब की बेरोजगारी दर वर्ष 2022 की 19.1 प्रतिशत से घटकर 2025 में 17 प्रतिशत हो गई है। मंत्री ने पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वेक्षण का हवाला देते हुए बताया कि अब पंजाब बेहतर रोजगार मैट्रिक्स वाले राज्यों में शामिल है।
वैश्विक स्तर का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि आजादी के समय भारत की जीडीपी चीन से थोड़ी अधिक थी। उन्होंने कहा, ”चीन ने अपने प्रत्येक व्यक्ति को काम पर लगाया और दुनिया की सबसे बड़ी फैक्ट्री बनकर उभरा। चीन निकट भविष्य में अमेरिका को पछाड़ सकता है। हमारे पास वही क्षमता है, लेकिन सही वातावरण की कमी थी। पर अब हम इसे ठीक कर रहे हैं।”
कैबिनेट मंत्री ने जोर देकर कहा कि दुनिया की कोई भी सरकार प्रत्येक नागरिक को नौकरी देने की गारंटी नहीं दे सकती। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि सरकार का असल कर्तव्य उद्योग और रोजगार के लिए अनुकूल माहौल तैयार करना होता है। उन्होंने कहा, ”हम यहां केवल आंकड़े पेश करने के लिए नहीं हैं। हम ऐसा माहौल बना रहे हैं, जहां हर नौजवान अपने पैरों पर खड़ा हो सके।”
विपक्ष द्वारा नौकरियों के बारे में व्हाइट पेपर जारी करने की मांग पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, ‘सबसे अच्छा, सस्ता और टिकाऊ व्हाइट पेपर लोगों से सीधे तौर पर पूछना है। आरटीआई दायर करो या लोगों के साथ मीटिंग करो। लोग खुद बताने देंगे कि उन्हें नौकरियां मिली हैं या नहीं।”
श्री अमन अरोड़ा ने पिछली कांग्रेस सरकार के ‘हर घर नौकरी’ वादे पर कटाक्ष करते हुए इसे पंजाब के नौजवानों के साथ ‘सबसे बड़ा धोखा’ बताया। उन्होंने जोर देकर कहा कि ‘आप’ सरकार ने बिना किसी रिश्वत के पारदर्शी तरीके से 68000 से अधिक सरकारी नौकरियां प्रदान की हैं। उन्होंने दोहराया कि सरकार का एकमात्र उद्देश्य पंजाब को ‘कारोबार करने में आसानी’ के लिए एक मॉडल राज्य बनाना और सम्मानजनक, कौशल-आधारित रोजगार पैदा करना है।
National
सियाम ने भी माना, ई-20 में ज्यादा क्लोराइड और नमी के कारण खराब हो रही गाड़ियां- केजरीवाल
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने ई-20 को लेकर सियाम की सौंपी गई रिपोर्ट को वापस कराने पर केंद्र की मोदी सरकार को आड़े हाथ लिया है। उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर कहा कि सियाम (सोसायटी ऑफ इंडिया ऑटोमोबाइल मैनुफैक्चरर्स) की एक रिपोर्ट आई है, जिसमें साफ़ लिखा है कि ई-20 में बहुत ज्यादा क्लोराइड और नमी है, जिससे आपकी गाड़ियां ख़राब हो रही हैं। मोदी सरकार ने सियाम पर दबाव डालकर वो रिपोर्ट वापस करवा दी। क्यों? जब विज्ञान और इंजीनियरिंग कह रहे हैं कि ई-20 ख़राब है, तो मोदी सरकार इसे देश पर जबरन क्यों थोप रही है?
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि ई-20 को लेकर सियाम की यह रिपोर्ट चौंकाने वाली है। सियाम ने रिसर्च की और ऑटोमोबाइल के सभी मैन्युफैक्चरर्स ने मिलकर यह पाया कि क्लोराइड और मॉइस्चर ज्यादा होने की वजह से ई-20 गाड़ियों को खराब कर रहा है। सियाम ने 28 जुलाई को मोदी सरकार को यह रिपोर्ट सौंपी थी। 4 अगस्त तक केंद्र सरकार ने सियाम पर जबरदस्ती करके वह रिपोर्ट वापस करा दी। रिपोर्ट वापस करने के बाद सियाम की तरफ से कहा गया कि शायद उनकी रिपोर्ट में कुछ गड़बड़ी है और कुछ तथ्यों को दोबारा चेक करने की जरूरत है। एक तरह से मोदी सरकार जबरदस्ती करके पूरे देश पर ई-20 थोप रही है, लेकिन क्यों?
National
RBI ने लगातार तीसरी बार रेपो रेट 5.25% पर रखा, ब्याज दरों में नहीं किया कोई बदलाव
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बुधवार को लगातार तीसरी बार अपनी प्रमुख नीतिगत ब्याज दर यानी रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया। मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने सर्वसम्मति से रेपो रेट को 5.25 फीसदी पर ही बरकरार रखने का फैसला किया। RBI के अनुसार, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, ऊर्जा कीमतों में अनिश्चितता और आपूर्ति से जुड़े जोखिमों को देखते हुए यह फैसला लिया गया है।
RBI के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि भारत अब भी दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बना हुआ है। उन्होंने कहा कि मजबूत घरेलू मांग से आर्थिक विकास को सहारा मिल रहा है और अप्रैल-जून तिमाही का प्रदर्शन RBI के अनुमान से बेहतर रहा है।
तीसरी द्विमासिक मौद्रिक नीति की घोषणा करते हुए गवर्नर ने कहा कि सेवा क्षेत्र की मजबूती से शहरी खपत में और बढ़ोतरी की उम्मीद है। हालांकि उन्होंने चेतावनी दी कि पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव, वैश्विक वित्तीय बाजारों में अस्थिरता और अल नीनो से जुड़े जोखिम अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती बने हुए हैं। उनके अनुसार, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष से प्रमुख व्यापारिक मार्ग भी प्रभावित हो रहे हैं।
संजय मल्होत्रा ने कहा कि कच्चे तेल और खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतों के कारण आने वाले महीनों में खुदरा महंगाई बढ़ सकती है। उनका अनुमान है कि तीसरी तिमाही में महंगाई अपने उच्च स्तर पर पहुंचने के बाद धीरे-धीरे कम होगी। उन्होंने कहा कि महंगाई पर सबसे अधिक असर खाद्य और ईंधन की कीमतों का है।
RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए GDP वृद्धि दर का अनुमान 6.6 फीसदी से बढ़ाकर 6.7 फीसदी कर दिया है। वहीं, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई का अनुमान 5.1 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी कर दिया गया है।
गवर्नर ने बताया कि जून से बैंकिंग प्रणाली में औसत तरलता (Liquidity) 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक बनी हुई है। उन्होंने कहा कि बैंकिंग प्रणाली में ऋण वृद्धि मजबूत बनी हुई है और पर्याप्त तरलता उपलब्ध है।
RBI ने यह भी चेतावनी दी कि वैश्विक व्यापार में सुस्ती, ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी और व्यापार नीतियों से जुड़ी अनिश्चितता भारत के चालू खाते के घाटे पर दबाव डाल सकती है।
इस बीच रुपया भी लगातार दबाव में है। डॉलर के मुकाबले रुपया 95 से 96 रुपये प्रति डॉलर के बीच कारोबार कर रहा है। महंगा कच्चा तेल, विदेशी निवेश की निकासी, बढ़ता व्यापार घाटा और मजबूत होता डॉलर रुपये पर लगातार दबाव बना रहे हैं। वर्ष 2026 में अब तक रुपया करीब 7 फीसदी कमजोर हो चुका है, जबकि ईरान के साथ तनाव शुरू होने के बाद इसमें लगभग 6 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है।
-
Religious3 years agoकब है तुलसी विवाह? इस दिन तुलसी माता का विवाह करने से मिलेगा लाभ
-
Religious3 years agoजानिए गोवर्धन पूजा का महत्व, कौनसा समय रहेगा पूजा के लिए सही
-
Religious3 years agoआखिर क्यों लिखा जाता है घर के बाहर शुभ लाभ, जानिए क्या है इन चिह्न का मतलब
-
Religious3 years agoपैरों के निशान, बनावट, रंग, साइज से पता लागए की आप कितने है भागयशाली
-
Religious3 years agoजानिए दीपावली में वाले दिन आखिर कितने जलाने चाहिए दीये ? और क्यों जलाने चाहिए दिये |
-
Chandigarh2 years agoChandigarh: Top 10 Restaurants. ये लोकप्रिय क्यों हैं ?
-
Punjab2 years agoपंजाब में अमरूद के बगीचे के मुआवजे के घोटाले में ED ने 26 स्थानों पर छापे मारे
-
Punjab2 years agoLudhiana में पुलिस स्टेशन के पास शव मिला। एक आदमी सड़क के बीच में पड़ा था; पास में कपड़ों से भरा एक बोरे भी मिला था, लेकिन उसकी पहचान नहीं हो सकी