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सरकार के महिला वित्तीय सहायता के ऐलान से खुशी की लहर; Punjab में महिलाओं ने जागो निकालकर मनाई खुशी
पंजाब सरकार की ओर से राज्य की माताओं, बेटियों और बहनों को वित्तीय सहायता देने के ऐतिहासिक ऐलान के बाद पूरे पंजाब में खुशी की लहर दौड़ गई है। इस ऐलान ने पंजाब की लाखों महिलाओं के चेहरों पर मुस्कुराहट ला दी है। पंजाब के विभिन्न शहरों, कस्बों और गांवों में महिलाओं ने पंजाबी संस्कृति की समृद्ध परंपरा के अनुसार जागो निकालकर अपनी खुशी का बड़े पैमाने पर इज़हार किया। महिलाओं ने ढोल की थाप पर नाच-गाकर और बोलियां गाकर इस फ़ैसले का जोरदार स्वागत किया।
महिलाओं ने आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान का दिल से धन्यवाद करते हुए कहा कि यह योजना पंजाब की महिलाओं के लिए बेहद मददगार साबित होगी। महिलाओं ने खुशी भरे अंदाज़ में कहा, “इंतज़ार हुआ खत्म, अरविंद केजरीवाल और मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान का यह तोहफ़ा देने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद।” महिलाओं ने कहा कि यह पहली बार है जब किसी सरकार ने सचमुच महिलाओं के हक में इतना बड़ा और ठोस कदम उठाया है। इस योजना के तहत जनरल श्रेणी की महिलाओं को 1,000 रुपये प्रतिमाह और अनुसूचित जाति की महिलाओं को 1,500 रुपये प्रतिमाह दिए जाएंगे। खास बात यह है कि यह राशि सीधे तौर पर लाभार्थी महिलाओं के बैंक खातों में ट्रांसफर की जाएगी, ताकि पूरी पारदर्शिता बनी रहे और हर महिला को बिना किसी बिचौलिए के सीधा लाभ मिल सके। इससे भ्रष्टाचार की संभावना पूरी तरह खत्म हो जाएगी।
पंजाब की महिलाओं का कहना है कि यह वित्तीय सहायता उनके घरेलू खर्चों में बड़ी राहत देगी। खासतौर पर गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों की महिलाओं ने कहा कि यह राशि उनकी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में बहुत काम आएगी। कई महिलाओं ने कहा कि इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे अपनी छोटी-छोटी जरूरतों के लिए किसी पर निर्भर नहीं रहेंगी। यह योजना महिलाओं को आर्थिक रूप से मज़बूत बनाने और उन्हें समाज में सम्मानजनक स्थान दिलाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगी।
पंजाब भर में महिलाओं द्वारा जागो निकालकर खुशी का इज़हार करना इस बात का स्पष्ट सबूत है कि अरविंद केजरीवाल और मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की अगुवाई वाली पंजाब सरकार का यह फ़ैसला आम महिलाओं की उम्मीदों और जरूरतों से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है। यह योजना न सिर्फ़ महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण का साधन है, बल्कि यह पंजाब सरकार की जन-पक्षीय सोच और महिलाओं के प्रति समर्पण की भी झलक है। पंजाब की महिलाओं के चेहरों पर आई खुशी यह बताती है कि सरकार का यह कदम सही दिशा में है और आने वाले समय में इसके और भी सकारात्मक नतीजे सामने आएंगे।
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170 दिन के बाद जेल से रिहा होंगे सोनम वांगचुक, सरकार ने हिरासत रद्द करने का लिया फैसला
केंद्र सरकार ने शनिवार को लद्दाख के प्रसिद्ध जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की NSA के तहत हिरासत को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है। यह फैसला लगभग 6 महीने की हिरासत के बाद लिया गया है, जो लद्दाख में तनाव कम करने और बातचीत बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। बता दें कि वांगचुक को सितंबर 2025 में लेह में हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद हिरासत में ले लिया गया था। उनकी रिहाई को लेकर उस समय कई विपक्षी दलों ने आवाज उठाई थी।
वांगचुक की तत्काल रिहाई का आदेश
गृह मंत्रालय ने NSA की शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए सोनम वांगचुक को बिना किसी शर्त के तुरंत रिहा करने का आदेश दिया है। वांगचुक को पिछले साल 26 सितंबर 2025 को लेह के जिला मजिस्ट्रेट के आदेश पर NSA के तहत हिरासत में लिया गया था। यह कार्रवाई 24 सितंबर 2025 को लेह में हुई हिंसक प्रदर्शनों के बाद की गई थी, जिसमें 4 लोगों की मौत हो गई थी और कई घायल हुए थे। ये प्रदर्शन लद्दाख को राज्य का दर्जा, छठी अनुसूची में शामिल करने, भूमि अधिकारों, नौकरियों और संवैधानिक सुरक्षा की मांग को लेकर हो रहे थे।
वांगचुकी की रिहाई पर जारी हुआ बयान
गृह मंत्रालय ने कहा है कि सरकार लद्दाख में शांति, स्थिरता और आपसी विश्वास का माहौल बनाने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि सभी पक्षों के साथ सार्थक और रचनात्मक बातचीत हो सके। बयान में कहा गया, ‘इस उद्देश्य को आगे बढ़ाने के लिए और विचार-विमर्श के बाद, सरकार ने NSA के तहत उपलब्ध शक्तियों का प्रयोग करते हुए श्री सोनम वांगचुक की हिरासत को तत्काल प्रभाव से रद्द करने का फैसला किया है।’ मंत्रालय ने यह भी दोहराया कि वांगचुक ने NSA के तहत अधिकतम हिरासत अवधि का लगभग आधा समय पहले ही पूरा कर लिया था।
हाई पावर्ड कमिटी और आगे की बातचीत
सरकार ने लद्दाख के लिए ‘सभी जरूरी सुरक्षा उपाय’ देने का वादा दोहराया है। अधिकारियों ने उम्मीद जताई कि वांगचुक की रिहाई से बातचीत फिर से तेज होगी। पहले से गठित हाई पावर्ड कमिटी में केंद्रीय मंत्री और स्थानीय नेता शामिल हैं, जो मांगों पर चर्चा कर रही है। हालांकि, कार्यकर्ताओं ने इसमें देरी की शिकायत की थी। अब उम्मीद है कि लद्दाख के मुद्दों जैसे 33 प्रतिशत स्थानीय नौकरी आरक्षण, विकास और सांस्कृतिक संरक्षण पर सकारात्मक प्रगति होगी। यह फैसला 2019 में लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाने के बाद से चली आ रही मांगों और आंदोलनों के बीच आया है, जहां लेह एपेक्स बॉडी जैसे संगठन सक्रिय रहे हैं।
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अमित शाह की रैली से पहले अमन अरोड़ा के सवाल, बोले-1600 करोड़ की राहत राशि का हिसाब दें केंद्र
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मोगा में होने वाली रैली से पहले पंजाब सरकार के मंत्री अमन अरोड़ा ने केंद्र सरकार पर कई सवाल उठाए। चंडीगढ़ में आयोजित संवाददाता बैठक में उन्होंने कहा कि पंजाब से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर केंद्र को स्पष्ट जवाब देना चाहिए। अमन अरोड़ा ने सबसे पहले ग्रामीण विकास निधि की राशि का मुद्दा उठाया।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने इस मद में पंजाब के करोड़ों रुपये रोक रखे हैं। इसके कारण राज्य के विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र को यह स्पष्ट करना चाहिए कि यह राशि कब जारी की जाएगी। मंत्री ने पिछले वर्ष आई बाढ़ का जिक्र करते हुए कहा कि उस आपदा से पंजाब को भारी नुकसान हुआ था।
उस समय प्रधानमंत्री ने राज्य के लिए सोलह सौ करोड़ रुपये की राहत राशि देने की घोषणा की थी। लेकिन अभी तक उस राशि में से एक भी रुपया पंजाब को नहीं मिला है।
अमित शाह बताएं, वे 1600 करोड़ का चेक लाए हैं
अमन अरोड़ा ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जब पंजाब आए हैं तो उन्हें यह बताना चाहिए कि क्या वह सोलह सौ करोड़ रुपये का चेक लेकर आए हैं। उन्होंने कहा कि यदि वह राशि लेकर आए हैं तो उसे मुख्यमंत्री भगवंत मान को सौंपा जाए, और यदि नहीं लाए तो अपनी रैली में जनता को इसका कारण बताया जाए।
मंत्री ने भारत और अमेरिका के बीच हुए समझौते पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यह समझौता नहीं बल्कि एकतरफा आदेश जैसा प्रतीत होता है, जिससे किसानों और व्यापारियों को नुकसान हो सकता है। उन्होंने पूछा कि सरकार ने इस समझौते के सामने झुकने का निर्णय क्यों लिया।
अमन अरोड़ा ने यह भी कहा कि पड़ोसी राज्यों को कर में छूट देने से पंजाब को आर्थिक नुकसान हुआ है। उनके अनुसार इस विषय पर भी केंद्र सरकार को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
दूसरे राज्यों से आ रहे नशे पर भी उठाया सवाल
नशे के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार राज्य में नशे के खिलाफ लगातार अभियान चला रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई बार नशे की खेप दूसरे राज्यों से आती है। इसलिए इसे रोकने के लिए केंद्र सरकार को भी सख्त कदम उठाने चाहिए।
मंत्री ने रोजगार योजना को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि करीब बीस वर्षों से चल रही इस योजना में बदलाव से लाखों लोगों के सामने बेरोजगारी का खतरा पैदा हो सकता है। उन्होंने केंद्र से पूछा कि आखिर इस तरह का निर्णय किस मजबूरी में लिया गया।
गैस किल्लत पर केंद्र को घेरा
अमन अरोड़ा ने गैस संकट का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि गलत विदेश और घरेलू नीतियों के कारण देश में गैस की किल्लत की स्थिति बनी हुई है। उन्होंने बरनाला की एक घटना का जिक्र करते हुए कहा कि गैस सिलेंडर लेने के लिए लगी लंबी लाइन में खड़े एक व्यक्ति की मौत हो गई।
उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति पहले भी नोटबंदी के समय देखने को मिली थी, जब लोग लंबी लाइनों में खड़े रहने को मजबूर हुए थे। अरोड़ा ने कहा कि इन सभी मुद्दों पर केंद्र सरकार को जनता के सामने स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
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चंडीगढ़-मोहाली समेत 19 ठिकानों पर ED की रेड: IDFC बैंक घोटाला, 90 बैंक खाते फ्रीज
हरियाणा सरकार, चंडीगढ़ नगर निगम और अन्य सरकारी खातों से जुड़े करीब 597 करोड़ रुपए के IDFC फर्स्ट बैंक घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। ED की चंडीगढ़ जोनल ऑफिस टीम ने 12 मार्च को चंडीगढ़, मोहाली, पंचकूला, गुरुग्राम और बेंगलुरु में 19 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की।
जांच में सामने आया है कि सरकारी धन को बैंक में फिक्स्ड डिपॉजिट के रूप में रखने की बजाय आरोपियों ने बिना अनुमति के इन पैसों को अलग-अलग खातों और फर्जी कंपनियों में ट्रांसफर कर दिया।
बैंक के पूर्व कर्मचारियों पर आरोप
इस मामले में IDFC फर्स्ट बैंक के पूर्व कर्मचारी रिभव ऋषि और अभय कुमार के ठिकानों के अलावा उनके परिवार के सदस्यों, कई शेल कंपनियों और कारोबारियों के यहां भी तलाशी ली गई। जिन कंपनियों की जांच की गई उनमें स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स, कैपको फिनटेक सर्विसेज, मां वैभव लक्ष्मी इंटीरियर्स और एसआरआर प्लानिंग गुरुस प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं।
इसके अलावा सॉवन ज्वैलर्स समेत कुछ ज्वैलर्स और रियल एस्टेट कारोबारी विक्रम वाधवा से जुड़ी कंपनियों की भी जांच की गई।
सोना खरीद के नाम पर घुमाया गया पैसा
जांच में पता चला कि आरोपियों ने पहले स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स नाम की शेल कंपनी बनाई और सरकारी धन को उसमें ट्रांसफर किया। इसके बाद इस पैसे को ज्वैलर्स के बैंक खातों के जरिए घुमाया गया और फर्जी बिल बनाकर सोना खरीदने का दिखावा किया गया।
ED के मुताबिक यह घोटाला पिछले करीब एक साल से चल रहा था और इसमें बैंक के पूर्व कर्मचारियों की मदद ली गई। रिभव ऋषि ने जून 2025 में बैंक से इस्तीफा दे दिया था।
होटल कारोबारी और बिल्डर की भी जांच
जांच में यह भी सामने आया कि मोहाली के होटल कारोबारी और रियल एस्टेट डेवलपर विक्रम वाधवा के खातों में भी इस घोटाले का पैसा पहुंचा। बाद में यह रकम प्रिज्मा रेजिडेंसी LLP, किनस्पायर रियल्टी LLP और मार्टेल बिल्डवेल LLP जैसी कंपनियों में ट्रांसफर की गई।
छापेमारी के दौरान विक्रम वाधवा नहीं मिला और वह फिलहाल फरार बताया जा रहा है।
90 से ज्यादा बैंक खाते फ्रीज
ईडी की टीम ने छापेमारी के दौरान 90 से ज्यादा बैंक खातों को फ्रीज कर दिया है। साथ ही डिजिटल और दस्तावेजी सबूत भी जब्त किए गए हैं। ईडी के अनुसार इस मामले की जांच अभी जारी है और आने वाले समय में और खुलासे हो सकते हैं।
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