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Flood-Hit Areas में Punjab Government सक्रिय: 24 घंटे में Medical Camps के Treatments में 194% बढ़ोतरी

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पंजाब में आई बाढ़ के बाद अब हालात को सामान्य बनाने और लोगों की सेहत की सुरक्षा के लिए पंजाब सरकार लगातार काम कर रही है। मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में 14 सितंबर से पूरे राज्य में एक विशेष स्वास्थ्य अभियान (Special Health Campaign) चलाया जा रहा है। इस अभियान का मुख्य मकसद बाढ़ के बाद फैलने वाली बीमारियों को रोकना और प्रभावित लोगों को उनके गांव और घर तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना है।

सरकार की इस मुहिम का असर साफ दिखने लगा है। 16 सितंबर तक जहां 51,000 लोगों ने स्वास्थ्य शिविरों (medical camps) का लाभ लिया था, वहीं सिर्फ एक दिन बाद यानी 17 सितंबर को यह संख्या बढ़कर 1.5 लाख तक पहुंच गई। यह बड़ी बढ़ोतरी बताती है कि सरकार ने जमीनी स्तर पर तेज़ी से काम किया और प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाई।

2,303 गांवों में चल रहे हैं स्वास्थ्य शिविर

स्वास्थ्य विभाग की टीमें 2,303 गांवों में लगातार कैंप लगा रही हैं। इन कैंपों में

  • लोगों की जांच की जा रही है,
  • दवाइयां दी जा रही हैं,
  • और बाढ़ के पानी से फैलने वाली बीमारियों जैसे बुखार, डायरिया (दस्त), त्वचा संक्रमण आदि का इलाज किया जा रहा है।

इसके अलावा, घर-घर जाकर जांच (door-to-door visits) भी की जा रही है। जहां भी मच्छरों का लार्वा मिलता है, वहां तुरंत छिड़काव (fumigation) और सफाई का काम किया जा रहा है। मुख्यमंत्री मान ने खुद कहा, जनता की सुरक्षा हमारी पहली प्राथमिकता है। कोई भी नागरिक इलाज के बिना न रहे, यह हमारी जिम्मेदारी है।

बाढ़ के बाद क्यों ज़रूरी है यह अभियान

बाढ़ का पानी उतरने के बाद बीमारियां तेजी से फैल सकती हैं। गंदे पानी और नमी के कारण मच्छर व बैक्टीरिया बढ़ते हैं। इससे डायरिया, मलेरिया, डेंगू जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।

  • खासतौर पर गर्भवती महिलाएं, बुजुर्ग और छोटे बच्चे ज्यादा प्रभावित होते हैं।
  • इसी वजह से सरकार ने यह तय किया कि प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं सीधे गांव तक पहुंचाई जाएं और लोगों को समय पर इलाज मिले।

पशुओं की सुरक्षा पर भी फोकस

पंजाब सरकार ने इंसानों के साथ-साथ पशुओं के स्वास्थ्य को भी प्राथमिकता दी है।

  • अब तक 14,780 पशुओं का इलाज किया गया है।
  • 48,535 पशुओं को मुफ्त टीकाकरण (vaccination) दिया गया है।
  • मृत पशुओं का सुरक्षित निपटारा भी किया जा रहा है ताकि पानी और मिट्टी प्रदूषित न हो।

यह कदम इसलिए जरूरी है क्योंकि अगर पशु बीमार होते हैं या उनके शव खुले में पड़े रहते हैं, तो इससे बीमारियां तेजी से फैल सकती हैं।

सरकार की निगरानी और निर्देश

मुख्यमंत्री मान और स्वास्थ्य मंत्री बालबीर सिंह लगातार इस अभियान की मॉनिटरिंग कर रहे हैं।

  • सभी अधिकारियों को यह आदेश दिया गया है कि दवाइयों की कोई कमी न रहे,
  • स्वास्थ्य टीमें समय पर गांव-गांव पहुंचें,
  • और योजनाएं सिर्फ कागजों तक सीमित न रहकर जमीनी स्तर पर लागू हों।

सरकार ने यह भी साफ किया है कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में हर घर तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचेंगी और जहां जरूरत होगी, वहां विशेष स्वास्थ्य किट भी दी जाएगी।

अभियान से बढ़ा जनता का भरोसा

सरकार की तेज़ कार्रवाई का असर यह हुआ है कि प्रभावित परिवारों में भरोसा बढ़ा है। पहले जहां लोग इलाज और दवाइयों के लिए परेशान थे, अब उन्हें अपने गांव में ही यह सुविधाएं मिल रही हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार ने इस बार सिर्फ योजना नहीं बनाई, बल्कि उसे पूरी तरह लागू भी किया है।

पंजाब में बाढ़ राहत अभियान अब बड़े स्तर पर चल रहा है।

  • 2,303 गांवों में स्वास्थ्य टीमें सक्रिय हैं।
  • 1.5 लाख से ज्यादा लोग स्वास्थ्य शिविरों से लाभ ले चुके हैं।
  • हजारों पशुओं का इलाज और टीकाकरण हुआ है।

यह अभियान दिखाता है कि सरकार ने इंसानों और पशुओं दोनों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए समग्र योजना बनाई है। अगर यह काम इसी तरह जारी रहा, तो बाढ़ के बाद फैलने वाली बीमारियों को काफी हद तक रोका जा सकेगा और लोग जल्दी सामान्य जीवन में लौट पाएंगे।

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पेट्रोल पंपों पर ‘NO STOCK’ के बोर्ड, लंबी कतारों से मची अफरा-तफरी — अफवाहों पर सरकार की सख्त चेतावनी

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मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव, खासकर ईरान-इज़राइल तनाव को लेकर फैल रही अफवाहों ने भारत के कई राज्यों में अचानक घबराहट का माहौल पैदा कर दिया है। सोशल मीडिया पर पेट्रोल-डीजल की कमी की खबरें वायरल होने के बाद कई शहरों में लोगों ने घबराहट में बड़े पैमाने पर ईंधन खरीदना शुरू कर दिया, जिससे पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें लग गईं।

तेलंगाना, मध्य प्रदेश और गुजरात के कई शहरों में हालात ऐसे बन गए कि पेट्रोल पंपों के बाहर वाहनों की लंबी लाइनें देखने को मिलीं। खास तौर पर हैदराबाद में अफवाहों के चलते भारी भीड़ उमड़ पड़ी, जिससे ट्रैफिक जाम और लोगों के बीच बहस के मामले भी सामने आए। इसी तरह इंदौर, अहमदाबाद, सूरत और राजकोट में भी लोग बड़ी मात्रा में पेट्रोल-डीजल भरवाने के लिए पंपों पर पहुंच गए।

घबराहट में की गई इस पैनिक बाइंग के चलते कुछ जगहों पर अस्थायी रूप से स्टॉक कम हो गया, जिसके कारण कई पेट्रोल पंपों पर ‘NO STOCK’ के बोर्ड तक लगाने पड़े। हालांकि, अधिकारियों ने साफ किया है कि यह स्थिति केवल अचानक बढ़ी मांग के कारण बनी है, न कि किसी वास्तविक कमी के कारण।

सरकार और तेल कंपनियों ने स्थिति को लेकर स्पष्ट किया है कि देश में पेट्रोल और डीजल की कोई कमी नहीं है और सप्लाई पूरी तरह सामान्य रूप से जारी है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और अनावश्यक रूप से ईंधन जमा करने से बचें।

साथ ही प्रशासन ने चेतावनी दी है कि जो लोग जानबूझकर इस तरह की भ्रामक खबरें फैलाएंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और घबराने की कोई जरूरत नहीं है।

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MLA हरमीत सिंह पठानमाजरा गिरफ्तार, SSP के बड़े खुलासे — कई महीनों से फरार विधायक को मध्य प्रदेश से पकड़ा गया!

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पंजाब के सनौर विधानसभा क्षेत्र से विधायक हरमीत सिंह पठानमाजरा को आखिरकार पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। लंबे समय से फरार चल रहे विधायक को पटियाला पुलिस की टीमों ने मध्य प्रदेश के ग्वालियर के बाहरी इलाके से दबोचा। गिरफ्तारी के बाद उन्हें कड़ी सुरक्षा में पंजाब लाया गया है, जहां अब उनसे पूछताछ की जा रही है।

गिरफ्तारी के बाद पटियाला के एसएसपी ने प्रेस को संबोधित करते हुए कई अहम खुलासे किए। उन्होंने बताया कि पुलिस को मजबूत तकनीकी इनपुट (Strong Technical Input) प्राप्त हुए थे, जिनके आधार पर लगातार ट्रैकिंग और निगरानी की जा रही थी। कई राज्यों में टीमों ने छापेमारी की और आखिरकार ग्वालियर के पास उनकी लोकेशन ट्रेस कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। एसएसपी के मुताबिक आरोपी गिरफ्तारी से बचने के लिए लगातार ठिकाने बदल रहा था।

जानकारी के अनुसार, कोर्ट ने हरमीत सिंह पठानमाजरा को दिसंबर महीने में ही भगोड़ा घोषित कर दिया था। वह पिछले साल सितंबर से ही फरार चल रहे थे और उनके खिलाफ कई गंभीर मामले दर्ज हैं। पुलिस सूत्रों का कहना है कि उनकी गिरफ्तारी से जुड़े मामलों में और भी अहम जानकारियां सामने आ सकती हैं।

पुलिस अब आरोपी को अदालत में पेश कर रिमांड लेने की तैयारी कर रही है, ताकि विस्तृत पूछताछ की जा सके और यह पता लगाया जा सके कि फरारी के दौरान उसे किस-किस का सहयोग मिला। अधिकारियों का मानना है कि पूछताछ में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं, जिससे पूरे मामले की परतें खुल सकती हैं।

यह गिरफ्तारी पंजाब की राजनीति और कानून-व्यवस्था के लिहाज से एक बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है और आने वाले दिनों में इस मामले पर और भी अपडेट सामने आ सकते हैं।

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13 साल के संघर्ष के बाद हरीश राणा को मिली अंतिम विदाई — इच्छा मृत्यु के बाद अंगदान से 6 लोगों को मिलेगी नई जिंदगी

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13 वर्षों तक कोमा में जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे गाजियाबाद निवासी हरीश राणा ने आखिरकार इस दुनिया को अलविदा कह दिया। सुप्रीम कोर्ट से इच्छा मृत्यु (पैसिव यूथेनेशिया) की अनुमति मिलने के बाद 24 मार्च को दिल्ली के एम्स में उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन के बाद आज उनका अंतिम संस्कार दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट में किया गया।

सुबह करीब 9:40 बजे हरीश के छोटे भाई आशीष ने मुखाग्नि दी। इस दौरान परिवार का माहौल बेहद भावुक रहा। हरीश के पिता अशोक राणा ने नम आंखों से बेटे को अंतिम विदाई दी और लोगों से अपील करते हुए कहा, “कोई न रोए, मेरा बेटा शांति से जाए। जहां भी जन्म ले, उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” उनके शब्दों ने वहां मौजूद सभी लोगों को भावुक कर दिया।

31 वर्षीय हरीश पिछले 13 सालों से कोमा में थे। उनकी हालत को देखते हुए परिवार ने लंबे समय से इच्छा मृत्यु की अनुमति की मांग की थी। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने इस ऐतिहासिक मामले में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया की अनुमति दी थी, जो देश के लिए एक महत्वपूर्ण और संवेदनशील फैसला माना जा रहा है।

इसके बाद 14 मार्च को हरीश को गाजियाबाद स्थित उनके घर से एम्स, दिल्ली में शिफ्ट किया गया था। 16 मार्च को उनकी फीडिंग ट्यूब हटा दी गई थी, जिसके बाद उन्होंने धीरे-धीरे प्राकृतिक रूप से जीवन त्याग दिया।

डॉक्टरों के अनुसार, हरीश के परिवार ने एक सराहनीय निर्णय लेते हुए उनके अंगदान का फैसला किया। उनके फेफड़े, दोनों किडनी और कॉर्निया दान किए गए हैं, जिससे कम से कम 6 लोगों को नई जिंदगी मिलने की उम्मीद है। इस कदम की समाज में व्यापक सराहना हो रही है।

यह मामला न सिर्फ एक परिवार के दर्द और संघर्ष की कहानी है, बल्कि इच्छा मृत्यु और अंगदान जैसे संवेदनशील मुद्दों पर देशभर में नई बहस को भी जन्म दे रहा है।

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