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Punjab में Land Pooling के खिलाफ बढ़ता गुस्सा: गांवों में AAP नेताओं का विरोध, बोर्ड लगाकर Entry Banne की चेतावनी

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पंजाब सरकार की लैंड पूलिंग पॉलिसी के खिलाफ गांवों में भारी नाराज़गी देखने को मिल रही है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि अब आम आदमी पार्टी (AAP) के नेताओं और कार्यकर्ताओं को गांवों में घुसने से मना किया जा रहा है। कई इलाकों में लोग बोर्ड लगाकर AAP नेताओं और अधिकारियों को चेतावनी दे रहे हैं – “यहां आपका स्वागत नहीं है।”

इस नीति के तहत सरकार किसानों की ज़मीन लेकर उन्हें बदले में विकसित रिहायशी और कमर्शियल प्लॉट देने की बात कर रही है। सरकार का दावा है कि इससे अवैध कॉलोनियों पर रोक लगेगी और शहरी विकास को बढ़ावा मिलेगा। लेकिन किसानों और ग्रामीणों का कहना है कि यह स्कीम उनकी ज़मीन, पहचान और संस्कृति छीनने का प्रयास है।

गांव को ही मिटा रहे हैं आप लोग”: जडोवाल के पूर्व सरपंच

लुधियाना के जोधन गांव के पूर्व सरपंच जगदेव सिंह ने कहा,
हमारे गांव की कुल ज़मीन 1,956 एकड़ है, जिसमें से 1,196 एकड़ इस स्कीम में आ गई है। सीधे शब्दों में कहें तो आप हमारे गांव को ही खत्म कर रहे हैं। ये सिर्फ ज़मीन नहीं है, ये हमारी पहचान है, हमारी विरासत है।”

उन्होंने कहा कि अब गांवों में राजनीतिक मतभेद भुलाकर सभी लोग एकजुट हो गए हैं – चाहे वो AAP, कांग्रेस या अकाली दल के समर्थक हों। सब इस स्कीम के खिलाफ हैं।

यहां तक कि AAP के कार्यकर्ता भी अब चुप हैं, उन्हें समझ नहीं आ रहा कि वो अपने ही गांववालों को क्या जवाब दें,” जगदेव सिंह ने कहा।

खेती खत्म तो पंजाब की संस्कृति खत्म”

जगदेव सिंह ने सवाल उठाया –
जब हम पंजाब की बात करते हैं तो खेत-खलिहान, भांगड़ा, गिद्धा और गुरुद्वारे याद आते हैं। अगर आप खेती की ज़मीन ही कम कर देंगे तो हमारी संस्कृति पर सीधा हमला होगा।”

बोर्ड लगाएंगे – नेताओं को एंट्री नहीं”

होशियारपुर जिले के गांव जैसे पुर हीरां और शेरगढ़ में 28 जुलाई से विरोध तेज होगा। वहां के लोगों ने तय किया है कि वे गांव के बाहर बोर्ड लगाएंगे जिन पर लिखा होगा –
“AAP नेताओं और विकास अधिकारियों का प्रवेश वर्जित है।”

भारतीय किसान यूनियन (डोआबा) के अध्यक्ष मनजीत सिंह राय, जो खुद पुर हीरां गांव के निवासी हैं, ने बताया –
मेरी पुश्तैनी 7 एकड़ ज़मीन इस स्कीम में आ गई है। पूरे गांव की लगभग 300 एकड़ ज़मीन प्रभावित हो चुकी है। अब हम किसी भी लैंड पूलिंग अवेयरनेस कैंप को अपने गांव में नहीं होने देंगे। हमारे गांव के AAP कार्यकर्ता खुद भी चुप हैं, उन्हें भी पता है कि ये योजना आम लोगों को नुकसान पहुंचा रही है।”

विरोध की लहर पूरे पंजाब में

लुधियाना, होशियारपुर, मोगा, अमृतसर, फिरोज़पुर और पटियाला जैसे जिलों के किसान अब मिलकर एक बड़ा आंदोलन खड़ा करने की तैयारी में हैं।

कई गांवों में पंचायतें पास कर सरकार से योजना वापस लेने की मांग कर चुकी हैं। लोगों का कहना है कि इस योजना को लागू करने से पहले गांववालों से सहमति नहीं ली गई और अब जब विरोध हो रहा है, तो सरकार चुप्पी साधे बैठी है।

मुख्य बातें:

  • AAP नेताओं को गांवों में एंट्री से रोका जा रहा है।
  • किसान बोले – “ये सिर्फ ज़मीन नहीं, पहचान की लड़ाई है।”
  • 28 जुलाई से कई गांवों में बोर्ड लगाकर विरोध शुरू होगा।
  • AAP के खुद के कार्यकर्ता भी गांवों में विरोध के चलते असहज महसूस कर रहे हैं।
  • पंजाब के कई जिलों में एकजुट होकर किसान आंदोलन की तैयारी में।

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नारकोटिक्स एनोनिमस पीयर-सपोर्ट प्रोग्राम ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ के तहत पंजाब के 13 ज़िलों तक फैला

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पंजाब सरकार के नशा-विरोधी अभियान के पोस्ट-ट्रीटमेंट रिहैबिलिटेशन हिस्से को और मजबूत करने के लिए, मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की अगवाई में चलाए जा रहे ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ अभियान के तहत पंजाब के 13 ज़िलों में नारकोटिक्स एनोनिमस (NA) की मीटिंग्स आयोजित की जा रही हैं।

लीडरशिप इन मेंटल हेल्थ प्रोग्राम (LMHP) फेलोज के सहयोग से, नारकोटिक्स एनोनिमस अपने हॉस्पिटल्स एंड इंस्टीट्यूशंस (H&I) सेशन के माध्यम से सरकारी डि-एडिक्शन और रिहैबिलिटेशन केंद्रों में नियमित जागरूकता और रिकवरी सत्र आयोजित कर रहा है। यह पहल इस समय श्री मुक्तसर साहिब, लुधियाना, रूपनगर, मानसा सहित 13 ज़िलों में चल रही है।

इस कार्यक्रम के तहत, नारकोटिक्स एनोनिमस मीटिंग्स रिकवरी कर रहे लोगों को ऐसा माहौल प्रदान करती हैं जहाँ वे बिना किसी आलोचना के डर के अपने अनुभव, संघर्ष और सफलता साझा कर सकते हैं। इससे यह विश्वास मजबूत होता है कि जो व्यक्ति खुद रिकवरी से गुजर चुका है, वही दूसरे व्यक्ति की सबसे बेहतर मदद कर सकता है।

नारकोटिक्स एनोनिमस एक वैश्विक फेलोशिप है जो 12-स्टेप प्रोग्राम और पीयर-लीड मीटिंग्स के माध्यम से नशा-मुक्ति में सहायता प्रदान करती है। 1953 में स्थापित यह संस्था कई देशों में कार्यरत है और इसका मूल सिद्धांत है कि साझा अनुभव और आपसी सहयोग से रिकवरी अधिक प्रभावी होती है।

श्री मुक्तसर साहिब के एक रिकवरी में आए व्यक्ति ने बताया कि ये सत्र उन्हें नशा-मुक्त बनाए रखने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने नाम न बताने की शर्त पर कहा, “आप एक हफ़्ता या एक महीना नशा-मुक्त रह सकते हैं, लेकिन लंबे समय तक नशा-मुक्त जीवन बनाए रखने के लिए एन.ए. मदद करता है क्योंकि पीयर ग्रुप के अनुभव आपकी अपनी कहानी जैसे होते हैं। अगर वे नशा छोड़ सकते हैं, तो आप क्यों नहीं? नशा छोड़ने के बाद मैं अपने एक दोस्त को भी साथ लाया, जिसे मैं रिहैबिलिटेशन केंद्र में मिला था। उसे भी यह सहायता बहुत उपयोगी लगी।”

लुधियाना डि-एडिक्शन सेंटर में इलाज करवा रहे एक मरीज जगपाल सिंह (बदला हुआ नाम) ने कहा, “नशा छोड़ चुके अन्य साथियों के अनुभव सुनने से मुझ पर गहरा प्रभाव पड़ा। इसने मेरे अंदर सकारात्मक प्रतिक्रिया पैदा की। जब मैंने अपनी कहानी साझा की तो मुझे सुझाव मिले और प्रेरणा मिली। मैं सुझाव देता हूँ कि इलाज के साथ-साथ एन.ए. मीटिंग्स नशा प्रभावित लोगों की रिकवरी में बहुत मदद कर सकती हैं।”

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसा पीयर सपोर्ट नशा-मुक्ति के दौरान आने वाली सबसे बड़ी समस्या ‘एकाकीपन’ से निपटने में काफी मददगार होता है। कार्यक्रम से जुड़े एक स्वास्थ्य अधिकारी ने कहा, “कई मरीज डि-एडिक्शन सेंटर छोड़ने के बाद अकेलापन महसूस करते हैं और फिर से नशे की ओर चले जाते हैं। एन.ए. उन्हें एक सपोर्ट नेटवर्क देता है और यह भरोसा दिलाता है कि वे इस लड़ाई में अकेले नहीं हैं।”

हाल ही में इन मीटिंग्स में भाग लेने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है और 13 ज़िलों में सरकारी सुविधाओं के भीतर नियमित सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। मानसा में जुड़े एक एच एंड आई (हॉस्पिटल्स एंड इंस्टीट्यूशंस) कोऑर्डिनेटर ने कहा कि संस्था ज़िला प्रशासन के सहयोग से मीटिंग्स आयोजित करती है।

मुक्तसर में जुड़े एक एच एंड आई (हॉस्पिटल्स एंड इंस्टीट्यूशंस) कोऑर्डिनेटर ने कहा कि संस्था ज़िला प्रशासन के सहयोग से मीटिंग्स आयोजित करती है।

उन्होंने कहा, “जब मैं पहली बार एन.ए. मीटिंग में आया तो मुझे लगा कि इस बीमारी से अकेले लड़ना मुश्किल है। इस ग्रुप ने मेरा सपोर्ट सिस्टम बनकर मुझे विश्वास दिया कि व्यक्ति नशा छोड़ सकता है। सदस्यता की एकमात्र योग्यता नशा छोड़ने की इच्छा है। सदस्यों की पहचान गोपनीय रखी जाती है, जिससे वे अपने संघर्ष और रिकवरी के बारे में खुलकर बात कर सकते हैं।

मुक्तसर ड्रग डी-एडिक्शन सेंटर में मनोचिकित्सा सामाजिक कार्यकर्ता परमिंदर सिंह ने कहा, “नारकोटिक्स एनोनिमस एक नशा प्रभावित व्यक्ति के लिए सबसे अच्छा मंच है, क्योंकि पीयर ग्रुप के सदस्य नशे की समस्या से जुड़े अनुभवों को अच्छी तरह समझते हैं और वे व्यक्ति को नशा-मुक्त जीवन की ओर ले जाने में सबसे अधिक मददगार साबित होते हैं, क्योंकि उन्होंने खुद वही कठिनाइयाँ झेली होती हैं। वास्तव में, काउंसलिंग सत्रों में भी जो मरीज खुलकर बात नहीं कर पाता, वह एन.ए. के सदस्यों के साथ आसानी से खुल जाता है।”

लुधियाना डि-एडिक्शन सेंटर की काउंसलर अमनप्रीत कौर ने कहा, “पीयर ग्रुप अपने जीवन में नशा छोड़ने के बाद आए सकारात्मक बदलावों को साझा करते हैं और यह दूसरों को उसी राह पर चलने के लिए प्रेरित करता है। शुरुआत में मीटिंग्स में उपस्थित होना आवश्यक होता है। यदि कोई व्यक्ति इन मीटिंग्स में नियमित रहता है तो वह डि-एडिक्शन के काफी करीब होता है। मीटिंग्स मिस करना अक्सर रिलेप्स (पुनः नशा शुरू होने) की शुरुआती चेतावनी हो सकती है।”

अधिकारियों ने बताया कि कई पूर्व नशा उपयोगकर्ता, जो लंबे समय से नशे से दूर हैं, अब स्वयंसेवक बनकर मेंटर के रूप में काम कर रहे हैं और जिला प्रशासन को मीटिंग्स के लिए प्रतिभागियों को एकत्र करने में मदद कर रहे हैं। विशेषज्ञों ने विश्वास जताया कि विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में एनए (NA) नेटवर्क का विस्तार नशा-विरोधी अभियान के तहत हासिल की गई उपलब्धियों को टिकाऊ बनाने के लिए अत्यंत आवश्यक है।

पंजाब नशे के खिलाफ अपनी लड़ाई को और तेज कर रहा है, और नारकोटिक्स एनोनिमस समूहों का बढ़ता नेटवर्क राज्य के प्रयासों को मजबूत कर रहा है ताकि नशा-मुक्ति केवल इलाज तक सीमित न रहे, बल्कि लोग लंबे समय तक समाज में फिर से जुड़ सकें और नशा-मुक्त जीवन जी सकें।

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CM भगवंत सिंह मान ने पी.एस.पी.सी.एल. में नियुक्त 665 युवाओं को नियुक्ति पत्र सौंपे

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पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज कहा कि पंजाब सरकारी नौकरियों के लिए पसंदीदा स्थान के रूप में उभर रहा है। यहां तक कि विदेश गए युवा भी अब सरकार की पारदर्शी और योग्यता-आधारित भर्ती नीति के माध्यम से रोजगार प्राप्त करने के लिए राज्य में वापस लौट रहे हैं। पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (पीएसपीसीएल) में नवभर्ती 665 उम्मीदवारों को नियुक्ति पत्र सौंपते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य ने मात्र साढ़े चार वर्षों में 68268 सरकारी नौकरियां प्रदान करके रिकॉर्ड बनाया है, जिससे रिश्वत या सिफारिशों से नौकरियां लेने के युग का पूरी तरह से अंत हो गया है।

मुख्यमंत्री ने विदेशों में काम करने वाले पंजाबियों से अपनी मातृभूमि वापस लौटने की अपील की और उन्हें भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार द्वारा उन्हें नियमित रोजगार के अवसर दिए जाएंगे और उन्हें पंजाब की सामाजिक-आर्थिक प्रगति में सक्रिय भागीदार बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा अपनाई गई पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया ने युवाओं का व्यवस्था में विश्वास बहाल किया है और विदेशों में गए युवा अब देश लौटने लगे हैं।

इस बारे में एक्स पर मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने लिखा, “बठिंडा में नियुक्ति पत्र वितरण समारोह में, पंजाब की प्रगति और इसके युवाओं के लिए एक उज्ज्वल भविष्य को सुरक्षित करने के उद्देश्य से कई बड़े फैसले साझा किए गए। पिछली सरकारों द्वारा अपनाए गए रिश्वतखोरी और सिफारिशों के भ्रष्ट आचरणों को पूरी तरह से समाप्त करके आपकी सरकार ने अब तक योग्यता के आधार पर युवाओं को 68268 सरकारी नौकरियां दी हैं। इस पारदर्शी भर्ती नीति के कारण, वे युवा भी जो विदेश चले गए थे, अब पंजाब वापस आ रहे हैं।”

मुख्यमंत्री ने कहा, “शिक्षा क्षेत्र में ऐतिहासिक सुधारों के कारण पंजाब आज स्कूल शिक्षा में देश के अग्रणी राज्य के रूप में उभरा है। सरकारी कर्मचारियों, विशेषकर महिला कर्मचारियों की भलाई के उद्देश्य से एक और बड़े फैसले की घोषणा की गई कि उनके परिवीक्षा काल की अवधि पूरी होने के बाद उन्हें उनके घरों के 40 किलोमीटर के दायरे में तैनात किया जाएगा ताकि वे पारिवारिक और कार्यकारी जीवन में संतुलन बनाकर रख सकें।”

पोस्ट के अंत में उन्होंने कहा, “कड़ी मेहनत, ईमानदारी और जनसेवा हमारी सरकार के मूल सिद्धांत हैं। प्रत्येक योग्य युवा को समान अवसर प्रदान करके हम एक जीवंत और समृद्ध रंगला पंजाब की सृजना की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं।”

युवाओं को नियुक्ति पत्र सौंपते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पिछली सरकारों के दौरान पक्षपातपूर्ण प्रणाली के कारण बहुत से युवा पंजाब छोड़कर विदेशों में बस गए थे, लेकिन अब इस रुझान में बदलाव आने लगा है और युवा वापस पंजाब आ रहे हैं। उन्होंने कहा, “अब चीजें बदल गई हैं। इस बदलाव का प्रमाण इस तथ्य से देखा जा सकता है कि आज यहां मौजूद एक लड़की को तीन नौकरियां मिली हैं और वह नियुक्ति पत्र प्राप्त करने वाली सफल उम्मीदवारों में से एक है। यह एक नया युग है। मैं युवाओं से अपील करता हूं कि वे विदेशों में रहने वाले अपने दोस्तों और रिश्तेदारों को पंजाब वापस बुलाएं, उन्हें नौकरियां हम देंगे।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह बहुत गर्व और संतोष की बात है कि राज्य सरकार ने पंजाब के युवाओं को लगभग 68268 सरकारी नौकरियां प्रदान की हैं। उन्होंने कहा, “पंजाब में रिश्वत और भाई-भतीजावाद का युग समाप्त हो गया है। अब पंजाब के युवा सिर्फ मेरिट और योग्यता के आधार पर सरकारी नौकरियां प्राप्त कर रहे हैं और राज्य सरकार द्वारा अपनाई गई पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया के कारण एक भी नियुक्ति को अदालत में चुनौती नहीं दी गई है।”

मुख्यमंत्री ने उम्मीद जताई कि नव-नियुक्त युवा अपने पदों का उपयोग समाज के जरूरतमंद और पिछड़े वर्गों की सेवा के लिए करेंगे। उन्होंने कहा, “नवभर्ती युवाओं को लोगों की अधिकतम भलाई सुनिश्चित करनी चाहिए ताकि समाज के हर वर्ग को इसका लाभ मिल सके। ये भर्तियां पूरी तरह से पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से की गई हैं और युवाओं ने कड़ी प्रतिस्पर्धा में परीक्षाएं पास करने के बाद नौकरियां हासिल की हैं।”

नव-नियुक्त अधिकारियों के जीवन में सफल होने की कामना करते हुए मुख्यमंत्री ने उन्हें बड़े सपने देखने और उन सपनों को साकार करने के लिए कड़ी मेहनत करते रहने की अपील की। उन्होंने कहा, “आपको सिर्फ इसलिए गर्व नहीं करना चाहिए कि आपने ये नौकरियां प्राप्त कर ली हैं। नम्र रहें और जीवन में बड़ी सफलता के लिए कड़ी मेहनत करते रहें। इन पदों को प्राप्त करने के बाद भी हमेशा जमीन से जुड़े रहें और कड़ी मेहनत करते रहें क्योंकि यही सफलता की कुंजी है। आपको इस मंच का उपयोग जीवन में बड़ी सफलता प्राप्त करने के लिए करना चाहिए और साथ ही अच्छे इंसान बनना चाहिए।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने शिक्षा को प्राथमिकता दी है और लोगों के जीवन को बदलने के लिए इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण पहल की हैं। उन्होंने आगे कहा, “कोई भी ‘मुफ्त’ मिली चीज़ या रियायत कार्ड राज्य से गरीबी अथवा अन्य सामाजिक बुराइयों को समाप्त नहीं कर सकता। शिक्षा ही वह कुंजी है, जो लोगों के जीवन स्तर को सुधारकर उन्हें इस दुष्चक्र से बाहर निकाल सकती है। इसलिए हमारी सरकार शिक्षा के स्तर को और बेहतर बनाने तथा आम लोगों को सशक्त बनाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि राज्य सरकार के सख्त प्रयासों के कारण पंजाब ने प्राथमिक और मिडिल स्कूल शिक्षा में केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली को पीछे छोड़कर पहला स्थान हासिल किया है।

उन्होंने आगे कहा, “हमारी सरकार ने प्राथमिक और मिडिल स्कूल शिक्षा को उन्नत किया, व्यवस्था को मजबूत बनाया, स्मार्ट कक्षाएं शुरू कीं और शिक्षकों को उन्नत प्रशिक्षण प्रदान किया है। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप पंजाब स्कूल शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहा है। भारत सरकार के प्रमुख संस्थानों में से एक (नेशनल इंस्टीच्यूशन फार ट्रांसफारमिंग इंडिया) आयोग द्वारा जारी आंकड़े दर्शाते हैं कि पंजाब ने प्राथमिक और मिडिल स्कूल शिक्षा में केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली को पीछे छोड़कर अग्रणी स्थान प्राप्त किया है।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले चार वर्षों से राज्य सरकार ने शिक्षक प्रशिक्षण, आधुनिक शिक्षा पद्धतियों और स्मार्ट कक्षाओं पर ध्यान केंद्रित किया है। उन्होंने आगे कहा, “पहले केरल पहले स्थान पर था, लेकिन अब पंजाब ने बड़े अंतर से पहला स्थान प्राप्त कर लिया है। भविष्य में भी ऐसे और प्रयास किए जाएंगे। शिक्षा वह प्रकाश है, जो अंधकार को दूर कर पूरे संसार को रोशन करता है और इसी कारण राज्य सरकार इस पर विशेष जोर दे रही है।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का दृढ़ विश्वास है कि आर्थिक रूप से कमजोर हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच का अधिकार है। उन्होंने आगे कहा, “हमारी सरकार शिक्षा क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए ठोस प्रयास कर रही है। हमारी पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सामान्य परिवारों के बच्चों को भी अन्य बच्चों के समान उत्कृष्टता प्राप्त करने के अवसर मिलें। शिक्षा आने वाली पीढ़ियों को सशक्त बनाने और समृद्ध पंजाब के निर्माण का सबसे मजबूत साधन है तथा हमारी सरकार इसे मजबूत करने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार के प्रयासों के कारण पंजाब बुनियादी शिक्षा, डिजिटल बुनियादी ढांचे और स्कूल सुविधाओं में देश का नेतृत्व कर रहा है। राज्य ने राज भाषा और गणित के क्षेत्र में केरल से भी अधिक अंक प्राप्त किए हैं। उन्होंने कहा, “पंजाब के 99.9 प्रतिशत स्कूलों में बिजली की सुविधा उपलब्ध है, जबकि 99 प्रतिशत स्कूलों में कंप्यूटर उपलब्ध हैं। जब मैंने पदभार संभाला था, उस समय स्कूल शिक्षा के क्षेत्र में पंजाब 27वें स्थान पर था, लेकिन आज पंजाब पहले स्थान पर पहुंच गया है।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि लोगों के टैक्स का पैसा राज्य का है और सरकार इसे जनता की भलाई के लिए समझदारी से खर्च कर रही है। उन्होंने आगे कहा, “जनता का पैसा विकास कार्यों, स्कूलों, अस्पतालों और सड़कों के माध्यम से लोगों के पास वापस पहुंच रहा है। राज्य सरकार लोगों की भलाई के लिए काम कर रही है। हमने 90 प्रतिशत घरों को मुफ्त बिजली प्रदान की है, सड़कों को बेहतर बनाया है, टोल प्लाज़ा बंद किए हैं जिससे प्रतिदिन 70 लाख रुपये की बचत हो रही है और लगातार बुनियादी ढांचे का निर्माण किया जा रहा है।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि जब वर्तमान सरकार ने पदभार संभाला था, तब सिंचाई के लिए केवल 22 प्रतिशत नहरी पानी का उपयोग किया जा रहा था, लेकिन आज यह आंकड़ा 80 प्रतिशत से अधिक हो गया है।

मुख्यमंत्री ने दोहराया कि उनकी सरकार ने पंजाब के हर कोने तक नहरी पानी पहुंचाने के लिए किसानों की सुविधा हेतु पूरे राज्य में 14,000 किलोमीटर पाइपलाइनें और खालें बनाई हैं। उन्होंने आगे कहा, “नहरों और नदियों में रिचार्ज प्वाइंट बनाए गए हैं ताकि भूजल स्तर को बढ़ाया जा सके। इसके परिणामस्वरूप जल स्तर दो से चार मीटर तक बढ़ा है। यह फैसला आने वाली पीढ़ियों के हितों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है क्योंकि पंजाब एक कृषि प्रधान राज्य है और पानी के बिना राज्य का कोई अस्तित्व नहीं है।”

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना शुरू की गई है, जिसके तहत पंजाब के सभी 65 लाख परिवारों को स्वास्थ्य कार्ड जारी किए जा रहे हैं। उन्होंने आगे कहा, “इस योजना के तहत प्रत्येक परिवार 10 लाख रुपये तक के मुफ्त इलाज का हकदार है और 30 लाख से अधिक लाभार्थी पहले ही स्वास्थ्य कार्ड प्राप्त कर चुके हैं। इस योजना के तहत लाखों लोगों ने मुफ्त इलाज का लाभ उठाया है और मैं लोगों से इन स्वास्थ्य कार्डों का अधिक से अधिक लाभ उठाने की अपील करता हूं।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “राज्य के इतिहास में पहली बार धान के सीजन के दौरान कृषि ट्यूबवेलों को आठ घंटे से अधिक निर्बाध बिजली आपूर्ति दी गई है। किसानों को अब पहली बार सिंचाई के लिए दिन के समय बिजली मिल रही है, जिससे उनके जीवन में बड़ा बदलाव आया है।”

“मांवां -धीयां सत्कार योजना” के बारे में बात करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार 1 जुलाई से इस योजना को शुरू करने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने आगे कहा, “इस योजना के तहत 18 वर्ष से अधिक आयु की प्रत्येक महिला को 1,000 रुपये तथा अनुसूचित जाति से संबंधित महिलाओं को 1,500 रुपये प्रतिमाह दिए जाएंगे।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि कई सरकारें आईं और चली गईं, लेकिन उनमें से किसी ने भी जनता की भलाई की परवाह नहीं की। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “इन पार्टियों ने आपस में मिलकर शासन किया और राज्य के भोले-भाले लोगों को लूटा। पंजाब के लोगों ने ‘झाड़ू’ (आप का चुनाव चिन्ह) को वोट दिया और इसके परिणामस्वरूप स्कूलों, अस्पतालों और अन्य क्षेत्रों में बदलाव आया।”

इससे पहले सफल उम्मीदवारों जिया गर्ग, अमनदीप सिंह पन्नू, लाभदीप सिंह, रबिंदर सिंह टक्कर, कीर्ति, पुष्पिंदर, अकालजोत सिंह, हर्ष, सुमनप्रीत सिंह, जतिंदर सिंह, जुगराज सिंह, हनी, नितीश और अन्य ने योग्यता के आधार पर नौकरियां प्रदान करने के लिए मुख्यमंत्री की सराहना की। उन्होंने इस नेक कार्य के माध्यम से उनकी किस्मत बदलने के लिए मुख्यमंत्री का धन्यवाद भी किया।

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नितिन नबीन के पंजाब दौरे के दौरान भाजपा की दलित-विरोधी मानसिकता हुई बेनकाब, पार्टी कार्यक्रम में एससी नेताओं का किया अपमान: हरपाल सिंह चीमा

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आम आदमी पार्टी (आप) के वरिष्ठ नेता और पंजाब के कैबिनेट मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने दावा किया है कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के हाल के पंजाब दौरे के दौरान भाजपा की दलित-विरोधी मानसिकता पूरी तरह बेनकाब हो गई है। भाजपा के एक हालिया कार्यक्रम का हवाला देते हुए उन्होंने खुलासा किया कि पूर्व केंद्रीय मंत्री विजय सांपला और सोम प्रकाश जैसे वरिष्ठ एससी नेताओं को दर्शकों में खड़ा रखा गया, जबकि बाकी नेता मंच पर बैठे थे, जो सीधे तौर पर घोर भेदभाव को दर्शाता है।

हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि भाजपा सिर्फ एक खास अमीर वर्ग का ही सम्मान करती है जबकि दलितों, मजदूरों और गरीबों को योजनाबद्ध तरीके से हाशिये पर धकेलकर अपमानित किया जाता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पंजाब की आबादी का लगभग 34% हिस्सा बनाने वाले अनुसूचित जाति समुदाय ने इस दृष्टिकोण को करीब से देखा है। उन्होंने कहा कि भाजपा पंजाब-विरोधी, किसान-विरोधी है और इसका दलित-विरोधी चेहरा अब सबके सामने आ गया है, और पंजाब के लोग ऐसी राजनीति का कड़ा जवाब देंगे।

आप पंजाब एससी विंग के चेयरमैन गुरप्रीत सिंह जीपी के साथ एक पत्रकार सम्मेलन को संबोधित करते हुए हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के 2024 के आंकड़ों के अनुसार, देश में अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के खिलाफ होने वाले अपराधों का लगभग 65% हिस्सा भाजपा शासित चार राज्यों उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार और राजस्थान से सामने आया है। यह दलितों की सुरक्षा करने में भाजपा सरकार की नाकामी और पिछड़े समुदायों के प्रति पार्टी के गहरे पूर्वाग्रह को दर्शाता है।

भाजपा के वरिष्ठ दलित नेताओं के साथ हुए भेदभाव को उजागर करते हुए उन्होंने खुलासा किया कि पंजाब में पार्टी के एक हालिया कार्यक्रम के दौरान, पूर्व केंद्रीय मंत्री विजय सांपला और पूर्व केंद्रीय मंत्री सोम प्रकाश जैसे वरिष्ठ एससी नेताओं को दर्शकों में खड़े होने के लिए मजबूर किया गया, जबकि उच्च नेतृत्व मंच पर विराजमान था। इस घटना ने पंजाब के लोगों के सामने भाजपा का असली चेहरा नंगा कर दिया है। जिन नेताओं ने दशकों तक पार्टी की सेवा की और अनुसूचित जाति समुदाय का प्रतिनिधित्व किया, उन्हें बुनियादी सम्मान भी नहीं दिया गया।

वरिष्ठ आप नेता ने आगे कहा कि यह घटना दलितों, मजदूरों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के प्रति भाजपा की भेदभावपूर्ण मानसिकता का स्पष्ट सबूत है। भाजपा सिर्फ एक खास और अमीर वर्ग का सम्मान करती है। मजदूरों, दलितों और गरीबों का प्रतिनिधित्व करने वालों को हाशिये पर फेंक दिया जाता है और अपमानित किया जाता है।

उन्होंने आगे कहा कि पंजाब का अनुसूचित जाति समुदाय, जो प्रदेश की आबादी का लगभग 34% है, ने इस भेदभावपूर्ण रवैये को खुद महसूस किया है। पंजाब के लोग दलित नेताओं और उन पिछड़े समाजों का अपमान करने के लिए भाजपा को कभी माफ नहीं करेंगे, जिन्होंने देश की तरक्की में बड़ा योगदान दिया है।

अपनी बात समाप्त करते हुए हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि भाजपा न सिर्फ पंजाब-विरोधी और किसान-विरोधी है, बल्कि इसका दलित-विरोधी चेहरा भी अब पूरी तरह बेनकाब हो गया है। पंजाब के लोग ऐसी बंटवारे और भेदभाव वाली राजनीति का मुंहतोड़ जवाब देंगे।

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