Politics
Kejriwal और Bhagwant Mann ने की Ludhiana West में जनसभा – बोले, “Sanjeev Arora को जिताइए, हम बनाएंगे Cabinet Minister”
आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने मंगलवार को लुधियाना पश्चिम विधानसभा क्षेत्र में एक विशाल जनसभा को संबोधित किया। जनसभा वार्ड नंबर 57 के पिंड सुनेत में आयोजित की गई, जहां भारी संख्या में लोग शामिल हुए। इस दौरान दोनों नेताओं ने आप उम्मीदवार संजीव अरोड़ा के लिए समर्थन मांगा और उन्हें जीत दिलाने की अपील की।
जनसभा में आप पंजाब के प्रभारी मनीष सिसोदिया, कई कैबिनेट मंत्री, विधायक और पार्टी पदाधिकारी भी मौजूद रहे। मंच से जनता को संबोधित करते हुए केजरीवाल ने कहा, “अगर आप चाहते हैं कि आपके इलाके का हर काम हो, तो सिर्फ आप का विधायक ही यह सुनिश्चित कर सकता है। दूसरे पार्टी को वोट दोगे तो आपके काम रुक जाएंगे।”
केजरीवाल ने बताया कि वह और सीएम मान कुछ महीने पहले लुधियाना के एक गांव में गए थे, जहां रजिस्ट्री की समस्या सामने आई थी। उन्होंने कहा, “मैंने संजीव अरोड़ा को यह जिम्मेदारी दी और उन्होंने दो महीने में 70% से ज्यादा रजिस्ट्रियों का काम पूरा करवा दिया। बाकी 30% भी अरोड़ा के विधायक बनते ही एक महीने में हो जाएंगी।”
अरविंद केजरीवाल ने यह भी वादा किया कि अगर संजीव अरोड़ा चुनाव जीतते हैं, तो उन्हें पंजाब सरकार में कैबिनेट मंत्री बनाया जाएगा। उन्होंने कहा, “मंत्री के पास फंड और पावर होती है, जिसका इस्तेमाल वह लुधियाना पश्चिम के विकास के लिए करेंगे।”

“अहंकारी और भ्रष्ट नेताओं को वोट न दें” – भगवंत मान
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने जनसभा में कहा कि उनकी सरकार ने पहले दिन से ही काम शुरू कर दिया था। उन्होंने बताया कि अब तक 54,154 युवाओं को सरकारी नौकरी दी जा चुकी है, और यह नौकरियां योग्यता के आधार पर दी गई हैं, न कि सिफारिश से।

मान ने कहा, “संजीव अरोड़ा ने पिंड सुनेत और आसपास के इलाकों में कई काम किए हैं, जिनमें रजिस्ट्री का हल निकालना सबसे बड़ा उदाहरण है। इसके अलावा वह एक बीमार बच्चे के इलाज के लिए दिल्ली में ₹16 करोड़ रुपये जुटाने में भी आगे आए थे।”
भगवंत मान ने जनता से अपील करते हुए कहा, “आपको सोच समझकर वोट देना चाहिए। उन लोगों को वोट मत दीजिए जो घमंडी हैं, जनता से दूर रहते हैं और जिनके मन में भ्रष्टाचार भरा है। वोट उन्हें दीजिए जो आपके बच्चों और आपके भविष्य की चिंता करते हैं।”
सरकारी स्कूलों और मोहल्ला क्लीनिक का किया जिक्र
सीएम मान ने कहा कि अब पंजाब के सरकारी स्कूल पहले से बेहतर रिजल्ट दे रहे हैं। मोहल्ला क्लीनिक भी लोगों की सेहत का ध्यान रख रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब कारोबार करने वालों को भी भ्रष्टाचार से राहत मिली है और प्रशासन पहले से ज्यादा पारदर्शी हुआ है।
उन्होंने नशे के खिलाफ चल रहे अभियान, नहरी पानी के बेहतर इस्तेमाल, कोयला खदानों को दोबारा शुरू करने और हरियाणा से पानी विवाद पर राज्य के हक की लड़ाई का भी ज़िक्र किया।

19 जून को करें वोट – ‘रंगला पंजाब’ बनाने का वादा
जनसभा के अंत में मुख्यमंत्री मान और केजरीवाल दोनों ने जनता से 19 जून को आप के उम्मीदवार संजीव अरोड़ा को वोट देने की अपील की। उन्होंने वादा किया कि जीत के बाद अरोड़ा को कैबिनेट मंत्री बनाकर लुधियाना पश्चिम में तेज़ी से विकास करवाया जाएगा।
मान ने कहा, “आपका भरोसा ही बदलाव की सबसे बड़ी ताकत है। हम सब मिलकर पंजाब को फिर से रंगला पंजाब बनाएंगे।”
मुख्य बातें:
- केजरीवाल बोले – “संजीव अरोड़ा को जिताइए, हम उन्हें मंत्री बनाएंगे”
- भगवंत मान ने बताया – अब नौकरियां सिफारिश से नहीं, योग्यता से मिलती हैं
- जनसभा में भारी भीड़, जनता से ‘आप’ के लिए अपील
- 19 जून को वोटिंग, विकास और बदलाव के लिए संजीव अरोड़ा को दें वोट
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प्रतीक यादव की मौत ने फिर खोले समाजवादी पार्टी के पारिवारिक राजनीति वाले ज़ख्म
प्रतीक यादव की मौत ने एक बार फिर उत्तर प्रदेश की राजनीति और समाजवादी पार्टी के अंदरूनी पारिवारिक विवादों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक लखनऊ में 38 साल की उम्र में प्रतीक यादव का निधन हो गया। हालांकि वे सीधे तौर पर सक्रिय राजनीति में नहीं थे, लेकिन उनकी पहचान एक बिजनेसमैन, फिटनेस प्रेमी और लग्जरी लाइफस्टाइल वाले व्यक्ति के रूप में थी।
प्रतीक यादव की पहचान सिर्फ एक कारोबारी तक सीमित नहीं रही, बल्कि वे मुलायम सिंह यादव के दूसरे परिवार से जुड़े होने के कारण हमेशा राजनीतिक चर्चाओं में बने रहे। उनकी मां साधना गुप्ता थीं, जिनके साथ मुलायम सिंह का रिश्ता लंबे समय तक सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया। इसी वजह से यादव परिवार के भीतर “पहला परिवार” और “दूसरा परिवार” की चर्चा कई वर्षों तक चलती रही।
समाजवादी पार्टी की कहानी भी यहां सिर्फ एक राजनीतिक पार्टी की नहीं रह जाती, बल्कि एक पारिवारिक सत्ता संघर्ष की कहानी बन जाती है। 1992 में मुलायम सिंह यादव ने समाजवादी पार्टी की स्थापना की थी। उस समय मंडल राजनीति, पिछड़ी जातियों का उभार और बाबरी मस्जिद विवाद ने उत्तर प्रदेश की राजनीति को नया रूप दिया था। मुलायम सिंह ने खुद को पिछड़े वर्गों के नेता और मुस्लिम समुदाय के रक्षक के रूप में पेश किया। “MY Formula” यानी Muslim और Yadav समीकरण ने कई सालों तक पार्टी को मजबूती दी।
लेकिन समय के साथ पार्टी का नियंत्रण एक परिवार के इर्द-गिर्द केंद्रित हो गया। अखिलेश यादव, शिवपाल सिंह यादव, रामगोपाल यादव और अन्य पारिवारिक सदस्य पार्टी के प्रमुख चेहरे बनते गए। विरोधियों ने यहीं से आरोप लगाना शुरू किया कि समाजवादी पार्टी एक वैचारिक पार्टी के बजाय पारिवारिक कंपनी बन गई है, जहां पद और टिकट पारिवारिक समीकरणों के आधार पर तय होते हैं।
2016-17 में यह पारिवारिक संघर्ष खुलकर सामने आ गया। एक तरफ अखिलेश यादव और रामगोपाल यादव थे, जबकि दूसरी तरफ मुलायम सिंह, शिवपाल यादव और अमर सिंह का गुट माना जाता था। यह टकराव सिर्फ टिकट बंटवारे या पदों तक सीमित नहीं था, बल्कि इसे पुरानी और नई राजनीति के बीच की लड़ाई के रूप में भी देखा गया। अखिलेश यादव खुद को विकास और आधुनिक राजनीति का चेहरा बताने की कोशिश कर रहे थे, जबकि पुराना गुट पारंपरिक जातीय और संगठन आधारित राजनीति को महत्व दे रहा था।
इस पूरे विवाद में अमर सिंह की भूमिका भी काफी चर्चा में रही। अखिलेश समर्थकों का दावा था कि अमर सिंह परिवारिक विवाद को और बढ़ा रहे हैं और मुलायम सिंह पर प्रभाव डाल रहे हैं। उस समय यह भी कहा गया कि समाजवादी पार्टी का रणनीतिक नियंत्रण परिवार के बाहर के कुछ प्रभावशाली चेहरों के हाथों में जा रहा है।
भारतीय राजनीति में यह बहुत कम देखने को मिलता है कि एक सक्रिय पिता से बेटा पार्टी का नियंत्रण अपने हाथ में ले ले। लेकिन समाजवादी पार्टी में यह दृश्य भी देखने को मिला। पहले अखिलेश यादव को हटाने की कोशिश हुई, फिर अखिलेश गुट ने विरोध किया और आखिरकार चुनाव आयोग ने अखिलेश गुट को ही असली समाजवादी पार्टी माना। इस राजनीतिक लड़ाई को एक पारिवारिक त्रासदी के रूप में भी देखा गया।
समाजवादी पार्टी पर “गुंडा राज” के आरोप भी लंबे समय से लगते रहे हैं। विरोधियों का दावा रहा कि पार्टी के कुछ कार्यकालों में कानून-व्यवस्था कमजोर रही और बाहुबली तत्वों को राजनीतिक संरक्षण मिला। बीजेपी ने इस नैरेटिव को खासतौर पर शहरी और मध्यम वर्ग के वोटरों के बीच प्रभावी ढंग से उठाया।
इस बीच अपर्णा यादव का बीजेपी में जाना भी समाजवादी पार्टी के लिए बड़ा प्रतीकात्मक झटका माना गया। क्योंकि अपर्णा यादव मुलायम परिवार का हिस्सा थीं और उनके बीजेपी में जाने को “यादव परिवार में दरार” के रूप में पेश किया गया। प्रतीक यादव, जो अपर्णा के पति थे, इसी कारण फिर राजनीतिक चर्चा का हिस्सा बने।
आज अखिलेश यादव समाजवादी पार्टी का सबसे बड़ा चेहरा हैं। वे PDA यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक गठजोड़ की राजनीति को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं और युवाओं व शहरी वोटरों को जोड़ना चाहते हैं। लेकिन सवाल अब भी कायम है कि क्या समाजवादी पार्टी एक वैचारिक पार्टी है या फिर एक पारिवारिक सत्ता संरचना।
प्रतीक यादव की मौत ने एक बार फिर यह बहस जिंदा कर दी है कि यादव परिवार की अंदरूनी राजनीति ने समाजवादी पार्टी की दिशा पर कितना बड़ा असर डाला। वे खुद कभी बड़े राजनीतिक नेता नहीं रहे, लेकिन उनकी मौत ने मुलायम सिंह के दूसरे परिवार, अखिलेश से संबंधों और समाजवादी पार्टी के पारिवारिक समीकरणों को फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
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8 साल बाद चीन दौरे पर जाएंगे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप
Donald Trump जल्द ही Beijing दौरे पर जाने वाले हैं, जहां उनकी मुलाकात चीनी राष्ट्रपति Xi Jinping से 14 और 15 मई को होने वाली है। इस हाई-प्रोफाइल बैठक से पहले ट्रंप के बयानों में बड़ा बदलाव देखने को मिला है।
जो ट्रंप पहले चीन के खिलाफ सख्त रुख अपनाते रहे हैं, वही अब शी जिनपिंग की खुलकर तारीफ करते नजर आए। उन्होंने कहा कि शी जिनपिंग के साथ उनके निजी संबंध काफी मजबूत हैं और वे एक “शानदार इंसान” हैं। दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के नेताओं की यह मुलाकात वैश्विक राजनीति और व्यापार के लिहाज से बेहद अहम मानी जा रही है।
ट्रंप ने अपने बयान में अंतरराष्ट्रीय तनाव, खासकर ईरान और तेल सप्लाई से जुड़े मुद्दों पर भी चीन की भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि चीन अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा Strait of Hormuz के जरिए हासिल करता है, लेकिन इसके बावजूद उसने कभी अमेरिका को सीधी चुनौती देने की कोशिश नहीं की।
इस दौरान ट्रंप ने चीन को एक दिलचस्प सुझाव भी दिया। उन्होंने कहा कि चीन को ऊर्जा सुरक्षा के लिए सिर्फ मध्य-पूर्व पर निर्भर नहीं रहना चाहिए, बल्कि अमेरिका के Texas और Alaska जैसे इलाकों में मौजूद ऊर्जा संसाधनों की ओर भी ध्यान देना चाहिए। ट्रंप के मुताबिक अलास्का एशियाई देशों के काफी करीब है और भविष्य में चीन के लिए बड़ा ऊर्जा केंद्र बन सकता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप का यह नरम रुख सिर्फ तारीफ तक सीमित नहीं है, बल्कि बीजिंग वार्ता से पहले एक रणनीतिक कदम भी हो सकता है। एक तरफ अमेरिका और चीन के बीच ट्रेड वॉर और टैरिफ को लेकर तनाव बना हुआ है, वहीं दूसरी तरफ ट्रंप सकारात्मक माहौल तैयार करने की कोशिश कर रहे हैं।
अब पूरी दुनिया की नजर बीजिंग में होने वाली इस अहम बैठक पर टिकी हुई है, जहां व्यापार, ऊर्जा, ताइवान और वैश्विक सुरक्षा जैसे मुद्दों पर बड़े फैसले हो सकते हैं।
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बेअदबी के दोषियों को बचाने वाले पुराने शासक जल्द सलाखों के पीछे होंगे: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज घोषणा की कि पिछली सरकारों के दौरान श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी के दोषियों को बचाने वालों को जल्द ही सलाखों के पीछे भेजा जाएगा। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार ने अब ऐतिहासिक ‘जगत ज्योत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) एक्ट, 2026’ के माध्यम से श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी के दोषियों के लिए सख्त कानूनी सजा सुनिश्चित की है।
शुक्राना यात्रा के दौरान विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि यह कानून बेअदबी के खिलाफ स्थायी रोक के रूप में काम करेगा और यह सुनिश्चित करेगा कि कोई भी पंजाब की शांति और भाईचारे को भंग करने की हिम्मत न करे। कानून लागू कर मानवता की सेवा करने का अवसर मिलने पर उन्होंने परमात्मा का धन्यवाद करते हुए कहा, “मेरा रोम-रोम परमात्मा का ऋणी है कि उसने मुझे ‘जगत ज्योत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) एक्ट 2026’ लागू करने की सेवा बख्शी, जो बेअदबी के लिए सख्त सजा का प्रावधान करता है।”
उन्होंने लोगों से अपील की कि वे गांव-गांव जाकर इस कानून के बारे में जागरूकता फैलाएं और यह सुनिश्चित करें कि हर व्यक्ति को पता हो कि बेअदबी में शामिल किसी भी व्यक्ति को अब सख्त सजा का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने आगे कहा, “सजा के डर से अकाली नेता सुखबीर सिंह बादल सहित विपक्ष के कई शीर्ष नेता पहले ही भाग रहे हैं।”
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पुराने शासकों का बेअदबी रोकने के लिए कानून बनाने का न तो इरादा था और न ही इच्छाशक्ति, जिसके कारण उनके शासनकाल में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी की घटनाएं बार-बार हुईं। उन्होंने कहा, “पंजाब सरकार ने अब ऐसा कानून पारित किया है, जो इसे हमेशा के लिए खत्म कर देगा क्योंकि कोई भी दोबारा ऐसा घिनौना अपराध करने की हिम्मत नहीं करेगा।” अकाली नेतृत्व की निंदा करते हुए उन्होंने कहा कि उनके शासनकाल में बेअदबी की घटनाओं का विरोध कर रहे निर्दोष लोगों पर गोली चलाने के आदेश दिए गए थे।
नशों के खतरे को लेकर अकाली नेतृत्व पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “अकालियों पर पीढ़ियों की नस्लकुशी का मामला दर्ज होना चाहिए क्योंकि उन्होंने नशों के व्यापार को संरक्षण दिया, जो उनके लंबे कुशासन के दौरान फलता-फूलता रहा।” उन्होंने जोर देकर कहा कि इन नेताओं के हाथ पंजाब के युवाओं के खून से रंगे हुए हैं क्योंकि पिछली सरकारों के दौरान सरकारी संरक्षण में नशे का प्रसार हुआ और कई युवा इसकी चपेट में आए। उन्होंने कहा, “इनके गुनाह माफ नहीं किए जा सकते और पंजाब के लोग पीढ़ियों को तबाह करने वाले इन नेताओं को कभी माफ नहीं करेंगे।”
बेअदबी की घटनाओं के माध्यम से पंजाबियों की भावनाओं को आहत करने के लिए अकाली दल की निंदा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अकालियों ने गुरबाणी के नाम पर वोट मांगे और साथ ही गुरु की वाणी का अपमान किया। उन्होंने कहा कि अकाली नेता अक्सर अपने कार्यकाल के विकास का दावा करते हैं, लेकिन कोटकपूरा, बहिबल कलां और अन्य घटनाओं को जानबूझकर नजरअंदाज करते हैं, जहां बेअदबी हुई और मासूम लोगों की जानें गईं।
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आगे कहा कि अकाली नेतृत्व ने पंजाब को बेरहमी से लूटा और ऐसे माफिया को संरक्षण दिया जिसने राज्य को सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर किया। उन्होंने कहा, “अकालियों ने पंजाबियों को भावनात्मक रूप से तोड़ा और माफिया को बचाया, जिन्होंने पंजाब को बर्बाद कर दिया। अपने शासनकाल के दौरान नशे के व्यापार को बढ़ावा देना लोगों के साथ विश्वासघात के बराबर है।”
सुखबीर सिंह बादल पर कटाक्ष करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अकालियों ने जनता में अपना आधार पूरी तरह खो दिया है और अब रैलियों में भीड़ जुटाने के लिए भुगतान किए गए लोगों को बुलाया जाता है। उन्होंने कहा, “हर अकाली रैली में वही चेहरे नजर आते हैं।” उन्होंने कहा कि जो नेता कभी 25 साल तक शासन करने का दावा करते थे, उन्हें अब पंजाब के जागरूक और बहादुर लोगों ने राजनीतिक गुमनामी में धकेल दिया है। उन्होंने अकाली नेतृत्व को अवसरवादी बताते हुए कहा कि वे अपनी राजनीतिक सुविधा के अनुसार अपना रुख और विचारधारा बदलते रहते हैं।
एक उदाहरण देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बेअदबी के लिए जिम्मेदार नेता एक बार श्री अकाल तख्त साहिब में पेश हुए थे और अपनी गलतियों को सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया था, लेकिन बाद में जब यह उनके राजनीतिक हितों के अनुकूल नहीं रहा तो वे अपने बयान से मुकर गए। उन्होंने कहा, “पंजाब के लोग उनका असली चेहरा जानते हैं और समझते हैं कि उन्होंने राजनीतिक चालों के जरिए जनता को बार-बार गुमराह किया है।” उन्होंने आगे कहा कि जो नेता कभी अजेय माने जाते थे, आज उन्हें पार्टी की कमेटी बनाने के लिए पांच सदस्य भी नहीं मिल रहे।
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने लोगों को याद दिलाया कि पुराने शासकों ने गैंगस्टरों को संरक्षण दिया और नशा तस्करों को बचाया, जिससे पंजाब के युवाओं को नशे की ओर धकेला गया। उन्होंने कहा, “पंजाब के लोग इन अपराधों के लिए अकालियों को कभी माफ नहीं करेंगे और उन्हें एक और कड़ा सबक सिखाएंगे।” उन्होंने कहा कि बार-बार चुने जाने के बावजूद अकालियों ने पंजाब के साथ विश्वासघात किया और लोगों की पीठ में छुरा घोंपा। उन्होंने कहा, “उन्होंने राजनीतिक हितों के लिए धर्म का दुरुपयोग किया और लोग इसके लिए उन्हें कभी माफ नहीं करेंगे।”
इस कानून की महत्ता को रेखांकित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाब सरकार खुद को भाग्यशाली मानती है कि उसे ऐसा ऐतिहासिक कानून पारित करने का अवसर मिला। उन्होंने कहा, “श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी पंजाब में शांति, भाईचारे और सांप्रदायिक सौहार्द को भंग करने की गहरी साजिश का हिस्सा थी।” उन्होंने कहा कि यह कानून दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति के लिए मिसाल कायम करने वाली सजा सुनिश्चित करता है।
मुख्यमंत्री ने उम्मीद जताई कि यह कानून भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकेगा। उन्होंने कहा कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी हर सिख के लिए पिता के समान हैं और उनकी पवित्रता की रक्षा करना पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि दुनियाभर में लोग इस कानून के लागू होने पर खुशी और आभार व्यक्त कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “इस ऐतिहासिक एक्ट को पारित करने के लिए हमें शक्ति और साहस देने पर परमात्मा का धन्यवाद करने हेतु मैंने श्री आनंदपुर साहिब से यह शुक्राना यात्रा शुरू की है।” उन्होंने बताया कि 9 मई तक वे तख्त श्री केसगढ़ साहिब, श्री अकाल तख्त साहिब, दमदमा साहिब, मस्तुआणा साहिब, गुरुद्वारा दुख निवारण साहिब और श्री फतेहगढ़ साहिब में मत्था टेकेंगे।
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि इस यात्रा का एकमात्र उद्देश्य पंजाब सरकार को इस महत्वपूर्ण कानून को लागू करने योग्य बनाने के लिए परमात्मा का धन्यवाद करना है। भीषण गर्मी के बावजूद बड़ी संख्या में एकत्र हुए लोगों का धन्यवाद करते हुए उन्होंने कहा कि वे जनता की सेवा के लिए पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा, “दूसरे नेता मौसम देखकर बाहर निकलते हैं, लेकिन मैं लोगों की भलाई के लिए हमेशा उनके बीच रहता हूं।”
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