Punjab
Punjab सरकार को हाईकोर्ट की चेतावनी: भाखड़ा बांध के संचालन में बाधा न डालें, जल प्रवाह सुनिश्चित करें।
Punjab एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने भाखड़ा नांगल बांध के संचालन में Punjab सरकार और उसके पुलिस बल के हस्तक्षेप पर रोक लगाते हुए स्पष्ट किया है कि यह कार्य भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) के अधिकार क्षेत्र में आता है। मुख्य न्यायाधीश शील नागू और न्यायमूर्ति सुमित गोयल की खंडपीठ ने बीबीएमबी की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश जारी किया।
बीबीएमबी ने आरोप लगाया था कि हरियाणा और अन्य राज्यों को 8,500 क्यूसेक पानी छोड़ने के निर्देश के बाद Punjab पुलिस के जवानों ने जबरन बांध संचालन पर नियंत्रण कर लिया था। इस पर न्यायालय ने Punjab सरकार और उसके पुलिस बल को निर्देश दिया कि वे बांध के संचालन में हस्तक्षेप न करें।
यह आदेश बांध की सुरक्षा और संचालन की जिम्मेदारी सुनिश्चित करने के लिए दिया गया है, जो बीबीएमबी के अधीन आता है। भाखड़ा नांगल बांध सतलुज नदी पर स्थित है और इसका प्रबंधन बीबीएमबी द्वारा किया जाता है, जो Punjab , हरियाणा, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली और चंडीगढ़ को जल और विद्युत आपूर्ति करता है।
इस निर्णय से यह स्पष्ट होता है कि बांध के संचालन में किसी भी राज्य सरकार या उसके बलों का हस्तक्षेप अस्वीकार्य है और यह बीबीएमबी के अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन है।
बीबीएमबी के परिचालन में हस्तक्षेप न करें: हाईकोर्ट
अदालत ने कहा, “Punjab राज्य और पुलिस कर्मियों सहित इसके किसी भी अधिकारी को बीबीएमबी द्वारा प्रबंधित भाखड़ा नांगल बांध और लोहंद नियंत्रण कक्ष जल विनियमन कार्यालयों के दिन-प्रतिदिन के कामकाज, संचालन और नियमन में हस्तक्षेप करने से रोका जाता है।”
बेंच ने Punjab प्रशासन के कथित आचरण पर गंभीर चिंता व्यक्त की और स्थिति की तुलना शत्रु देशों के खिलाफ की गई कार्रवाई से की। सुनवाई के दौरान बेंच ने टिप्पणी की, “हम अपने शत्रु देश के साथ ऐसा कर रहे हैं। हमें अपने राज्यों के भीतर ऐसा नहीं करना चाहिए।”
अपने लिखित आदेश में न्यायालय ने कहा कि भाखड़ा बांध स्थल पर Punjab पुलिस की मौजूदगी बीबीएमबी के नियमित कामकाज में बाधा उत्पन्न करती है। समाचार रिपोर्ट के अनुसार न्यायालय ने स्पष्ट किया कि पंजाब सुरक्षा उद्देश्यों के लिए सुरक्षा तैनात कर सकता है, लेकिन उसने कहा कि ऐसी तैनाती से बीबीएमबी के काम में बाधा नहीं आनी चाहिए।
अदालत ने कहा, “अगर बीबीएमबी का यह आरोप सही है, तो बीबीएमबी के प्रबंधन और कामकाज में हस्तक्षेप करने के लिए पुलिस बल की तैनाती की सराहना नहीं की जा सकती।” अदालत ने कहा, “Punjab पुलिस हमेशा भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड और उसके कर्मियों को पर्याप्त सुरक्षा प्रदान करने के लिए स्वतंत्र है, लेकिन बीबीएमबी के दिन-प्रतिदिन के कामकाज में हस्तक्षेप नहीं कर सकती।”
Punjab को जल मुक्ति योजना लागू करने का निर्देश
पीठ ने Punjab सरकार को पिछले सप्ताह केंद्रीय गृह सचिव की अध्यक्षता में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में लिए गए निर्णय को लागू करने का निर्देश दिया। इस निर्णय में हरियाणा और राजस्थान की तत्काल आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए बीबीएमबी द्वारा प्रबंधित जलाशयों से अतिरिक्त 4,500 क्यूसेक पानी छोड़ने का निर्णय शामिल था।
आदेश में कहा गया है, “पंजाब राज्य को भारत सरकार के गृह सचिव की अध्यक्षता में 2 मई को आयोजित बैठक के निर्णय का पालन करने का निर्देश दिया जाता है।”
न्यायालय ने विवादों के लिए कानूनी उपाय की ओर इशारा किया
उच्च न्यायालय ने इस बात पर जोर दिया कि यदि Punjab बीबीएमबी द्वारा लिए गए किसी निर्णय से असहमत है, तो उसे बीबीएमबी नियमों के प्रावधानों के तहत केंद्र सरकार से संपर्क करना चाहिए। न्यायाधीशों ने कहा कि Punjab सरकार ने अभी तक ऐसा कोई प्रतिनिधित्व नहीं किया है।
अदालत ने कहा, “उपर्युक्त चर्चा और कानून के परिप्रेक्ष्य में, जो स्पष्ट रूप से जल विवाद को सुलझाने के लिए असहमत राज्यों को केंद्र सरकार के समक्ष अपना पक्ष रखने के लिए वैकल्पिक वैधानिक उपाय उपलब्ध कराता है, पंजाब राज्य को पूरी निष्पक्षता के साथ केंद्र सरकार के समक्ष अपना पक्ष रखना चाहिए था। Punjab राज्य द्वारा ऐसा कोई पक्ष नहीं रखा गया है।”
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, अदालत ने कहा कि अब प्रस्तुत किए गए किसी भी ऐसे अभ्यावेदन पर केंद्र द्वारा शीघ्रता से निपटा जाना चाहिए।
इस बीच, अदालत ने कहा कि केंद्र सरकार बांध स्थल पर अर्धसैनिक बलों की तैनाती के बीबीएमबी के प्रस्ताव का मूल्यांकन कर सकती है ताकि निर्बाध परिचालन सुनिश्चित किया जा सके और भविष्य में व्यवधान को रोका जा सके।
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नीति आयोग की रैंकिंग में पंजाब ने केरल को पछाड़ा; शिक्षा मंत्री ने विधानसभा में चार सालों का रिपोर्ट कार्ड पेश किया
प्रदेश में शिक्षा में ऐतिहासिक बदलाव का दावा करते हुए पंजाब के शिक्षा मंत्री स. हरजोत सिंह बैंस ने आज कहा कि पंजाब ने केरल को पछाड़कर ‘नीति आयोग स्कूल एजुकेशन क्वालिटी इंडेक्स 2026’ में शीर्ष स्थान हासिल किया है। जहां वर्ष 2022 में 8,000 स्कूलों में चारदीवारी नहीं थी और लगभग 4 लाख विद्यार्थी ताटों (चटाइयों) पर बैठकर पढ़ने को मजबूर थे, वहीं आज पंजाब के सरकारी स्कूलों के 882 विद्यार्थियों ने नीट परीक्षा पास की है और पंजाब पहली से 12वीं कक्षा तक ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ को मुख्य विषय के रूप में शुरू करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। यह वह बदलाव है जिसका वादा आप की अगुवाई वाली पंजाब सरकार ने किया था।
विधायक प्रो. जसवंत सिंह गज्जनमाजरा द्वारा लाए गए शिक्षा संबंधी प्रस्ताव पर बहस में भाग लेते हुए, स्कूल शिक्षा मंत्री स. हरजोत सिंह बैंस ने जुलाई 2022 में पदभार संभालने के समय स्कूलों की खराब स्थिति को याद करवाया।
बुनियादी ढांचे के प्रारंभिक सर्वेक्षण के नतीजों के बारे में बताते हुए स. बैंस ने कहा कि 8,000 से अधिक स्कूलों में चारदीवारी नहीं थी, 3,200 में उपयोग योग्य बाथरूम नहीं थे और लगभग 4 लाख बच्चे जमीन पर बैठने को मजबूर थे। पाठ्यपुस्तकें अक्टूबर-नवंबर में स्कूलों तक पहुंचती थीं, जिससे शैक्षणिक सत्र के कई महीने बर्बाद हो जाते थे।
किसी भी सरकारी शिक्षक से इसकी पुष्टि करने की चुनौती देते हुए उन्होंने आगे कहा, “अब वही पाठ्यपुस्तकें 15 फरवरी तक जिला मुख्यालयों तक पहुंच जाती हैं और 31 मार्च तक वितरित कर दी जाती हैं।”
अपने शासन मॉडल के बारे में बताते हुए स. बैंस ने कहा कि उन्होंने पंजाब के हर जिले के 2,000 से अधिक सरकारी स्कूलों का निजी तौर पर दौरा किया है, जिनमें सीमावर्ती स्कूल, जीरो-लाइन से सटे गांव और दूर-दराज के क्षेत्र शामिल हैं।
उन्होंने सदन को बताया कि सरकार का प्रमुख ‘मिशन समरथ’ भारत के सबसे बड़े बुनियादी शिक्षा कार्यक्रमों में से एक के रूप में उभरा है। इसके लेवल बेस्ड टीचिंग मॉडल के तहत, हर बच्चे को अच्छी तरह पढ़ना, लिखना और गणित सिखाना सुनिश्चित करने के लिए विद्यार्थियों को ग्रेड के बजाय उनकी सीखने की क्षमता के अनुसार समूहों में बांटा जाता है।
स. हरजोत बैंस ने कहा, “जब मैंने सितंबर-अक्टूबर 2022 में स्कूलों का दौरा किया, तो मैंने 8वीं कक्षा के ऐसे विद्यार्थी भी देखे जो सामान्य वाक्य भी नहीं लिख सकते थे। कुछ विद्यार्थी सामान्य जोड़ और घटाव नहीं कर सकते थे। हमने इन विद्यार्थियों की पहचान की और इन्हें तीसरी कक्षा के सिलेबस के स्तर से पढ़ाया। आज वे बहुत सुधार कर रहे हैं।” उन्होंने आगे बताया कि इस कार्यक्रम के तहत अब सालाना लगभग 12 लाख विद्यार्थियों और 70,000 से अधिक शिक्षकों को कवर किया जाता है।
सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों के प्रदर्शन में हुए सुधार के बारे में स. हरजोत बैंस ने सदन को बताया कि पंजाब के सरकारी स्कूलों से नीट-यू.जी. परीक्षा पास करने वालों की संख्या वर्ष 2021 में मात्र 80 से बढ़कर वर्ष 2026 में 882 हो गई है। उन्होंने कहा कि ये नतीजे ‘पंजाब अकादमिक कोचिंग फॉर एक्सीलेंस’ (पेस) पहल का स्पष्ट परिणाम हैं।
उन्होंने आगे कहा, “पंजाब सरकार की शिक्षा क्रांति ने विद्यार्थियों के लिए उम्मीद की नई किरण जगाई है।” स. बैंस ने आगे कहा कि मजीठा में सरकारी स्कूलों के छह विद्यार्थियों और दीनानगर में 17 विद्यार्थियों ने नीट परीक्षा पास की है। ये कोई प्राइवेट कोचिंग के आंकड़े नहीं, बल्कि हमारे सरकारी स्कूलों की महत्वपूर्ण उपलब्धियां हैं।
उन्होंने एक साधारण परिवार से संबंधित लड़की हरनूरप्रीत कौर का विशेष जिक्र किया, जिसने अपनी श्रेणी में ऑल इंडिया रैंक 3140 हासिल की, जो आज के सरकारी स्कूलों की काबिलियत को दर्शाता है।
विपक्ष पर निशाना साधते हुए उन्होंने पलटवार किया, “अगर आप चाहते हैं तो मुझे व्यक्तिगत तौर पर निशाना बनाएं। सरकारी स्कूलों को क्यों निशाना बना रहे हो? कुछ नकारात्मक सोच वाले लोगों द्वारा गढ़े गए झूठे प्रचार ने लोगों को पहले ही सरकारी स्कूलों से दूर कर दिया है।”
सरकारी स्कूलों में घटती दाखिला दर से संबंधित सवालों का जवाब देते हुए स. बैंस ने कहा कि यह रुझान सिर्फ पंजाब तक ही सीमित नहीं था, बल्कि कोविड के बाद देश भर में देखा गया है।
उन्होंने आगे कहा, “ऑल इंडिया आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों के दाखिले की संख्या 1.76 करोड़ तक घटी है। कोविड के दौरान, सरकारी स्कूलों में दाखिला वास्तव में बढ़ा था। परंतु उसके बाद, हर जगह यह संख्या घटी है।”
उदाहरण देते हुए स. बैंस ने कहा कि बिहार में 2.49 करोड़ विद्यार्थी थे, जो पहले घटकर 2.13 करोड़ रह गए और इस साल यह और घटकर 1.95 करोड़ रहने का अनुमान है। इसी तरह उत्तर प्रदेश में, यह संख्या पहले 4.44 करोड़ से घटकर 4.16 करोड़ हो गई है, जो इस साल 4.1 करोड़ रहने का अनुमान है। इसके अलावा महाराष्ट्र में यह संख्या 2.32 करोड़ से घटकर 2.13 करोड़ रह गई।
स. बैंस ने कहा, “उन्होंने भारत सरकार की 2023 में शुरू की गई अपार आई.डी. पहल का भी हवाला दिया। ‘अब हर विद्यार्थी के पास एक अनोखी आई.डी. है। पहले एक बच्चा छह स्कूलों में दाखिल होता था परंतु किसी में भी नहीं पढ़ रहा था। इसी कारण अब ये आंकड़े सही हो रहे हैं।’”
शिक्षा मंत्री ने विस्तार से बताया कि 19,125 सरकारी स्कूलों में 2,638 करोड़ रुपये के बुनियादी ढांचे के काम किए गए हैं। इस साल विश्व बैंक से और सुधारों के लिए 1,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त मंजूरी ली गई है।
स. हरजोत बैंस ने कई ‘स्कूल ऑफ एमिनेंस’ की सूची दी, जिनका पूरी तरह कायाकल्प किया गया है। उन्होंने लुधियाना के शहीद सुखदेव थापर के नाम पर बने स्कूल ऑफ एमिनेंस का हवाला दिया, जिसके बारे में उन्होंने कहा कि कभी इसे पूरी तरह उपेक्षित कर दिया गया था। उन्होंने कहा, “आज इस स्कूल को विश्व स्तरीय बनाने के लिए 18 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इस साल स्कूल के 17 विद्यार्थी नीट परीक्षा भी पास कर चुके हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार सरकारी स्कूलों को आखिरी विकल्प से पहली पसंद में बदल रही है। हम यहीं नहीं रुक रहे। हम हर साल और ऊंचे लक्ष्य निर्धारित कर रहे हैं।
स. बैंस ने कहा, “शिक्षकों को अब सरकारी स्कूल चलाने के लिए फंड मांगने की जरूरत नहीं। हमने स्कूलों के लिए आवश्यक फंड मुहैया करवाए हैं, पिछली सरकारों की तरह नहीं जब शिक्षकों को फंड मांगने जाना पड़ता था। अपमान का दौर अब खत्म हो गया है।”
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केजरीवाल की मोदी सरकार को चुनौती, E-20 पर कोई रिसर्च रिपोर्ट है तो सार्वजनिक करे
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल मोदी सरकार से ई-20 लागू करने से पहले की कोई वैज्ञानिक रिसर्च रिपोर्ट है तो उसे सार्वजनिक करने की चुनौती दी है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने ई-20 बिना वैज्ञानिक अध्ययन के ही लागू किया, अब वैसे ही ये लोग ई-50 भी लागू कर देंगे। इसके खिलाफ आवाज उठाने वाले को धमका कर चुप करा दिया जा रहा है। इसकी असल वजह ये है कि मोदी जी ट्रम्प के दबाव में हैं और इसी कारण तमाम वैज्ञानिक सबूतों के खिलाफ जाकर जबरदस्ती देश पर एथेनॉल थोप रहे हैं। मोदी जी ने कभी साइंस, इंजीनियरिंग या रिसर्च का सम्मान नहीं किया। वे सिर्फ अपना हिडन एजेंडा पूरा करते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार डीजल में भी मिलावट करने वाली है। इसलिए लोग अभी कुछ वर्ष पेट्रोल और डीजल की नई गाड़ियां खरीदने से बचें।
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि ई-20 से आगे पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण बढ़ाने का अभी कोई निर्णय नहीं लिया गया है। भविष्य में यदि कभी ऐसा प्रस्ताव आता भी है, तो वह व्यापक वैज्ञानिक अध्ययन, तकनीकी परीक्षण और वाहन निर्माताओं, ऑयल मार्केटिंग कंपनियों तथा अन्य हितधारकों से परामर्श के बाद ही होगा। ई-20 कोई जल्दबाज़ी में लिया गया फैसला नहीं है। भारत का एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम दो दशकों से अधिक समय से चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ा है। ई-20 लागू करने से पहले व्यापक परीक्षण और सभी संबंधित पक्षों से सलाह-मशविरा किया गया।
अरविंद केजरीवाल ने भाजपा नेता अमित मालवीय पर पलटवार करते हुए कहा कि आप ख़ुद ही कह रहे हैं कि ई-20 से आगे पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण बढ़ाने का “अभी” कोई निर्णय नहीं लिया गया है। आप माहौल ठंडा होने का इंतज़ार कर रहे हैं। जैसे ही माहौल ठंडा होगा, आप उसे लागू कर देंगे। मुझे खुशी है कि आपने स्वीकार किया कि निर्णय “अभी” नहीं लिया गया।
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि जैसे ई-20 बिना किसी वैज्ञानिक अध्ययन के लागू किया गया, किसी की नहीं सुनी गई, धमकियां देकर सबको चुप करवा दिया गया, वैसे ही आप ई-50 भी लागू कर देंगे। यही आपका काम करने का स्टाइल है। आप कहां विज्ञान, साइंस और इंजीनियरिंग को मानते हैं। अगर आपने ई-20 लागू करने के पहले कोई अध्ययन करवाया है तो उनकी रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं करते? छुपा क्यो रहे हैं?
अरविंद केजरीवाल ने एक्स पर कहा कि मोदी सरकार का क्या प्लान है? पता चल रहा है कि पेट्रोल में 50 फीसद से ज्यादा की मिलावट करेंगे। अभी बस माहौल शांत होने का इंतज़ार कर रहे हैं। पहले आपकी ई-0 और ई-10 गाड़ियों में ज़बरदस्ती ई-20 पेट्रोल डालकर कबाड़ा किया। आज अगर आप ई-20 नई गाड़ी खरीदते हैं तो सरकार कुछ दिन बाद उसमे ज़बरदस्ती ई-50 पेट्रोल डालकर उसका कबाड़ा कर देगी। उन्होंने कहा कि सरकार जल्द ही डीजल में भी मिलावट करने वाली है। इसलिए अभी कुछ वर्ष आप पेट्रोल और डीजल की नई गाड़ियां खरीदने से बचें।
एक अन्य पोस्ट में अरविंद केजरीवाल ने कहा कि सरकार ने सियाम को अपनी रिपोर्ट वापस लेने के लिए मजबूर किया। यह मोदी जी का टिपिकल गुंडागर्दी वाला स्टाइल है। मोदी जी ने कभी साइंस, इंजीनियरिंग या रिसर्च का सम्मान नहीं किया, वे केवल अपना हिडन एजेंडा पूरा करते हैं। मोदी जी अमेरिका से एथेनॉल खरीदने के लिए ट्रंप के दबाव में हैं। उस दबाव को बर्दाश्त न कर पाने की वजह से वे तमाम वैज्ञानिक सबूतों के खिलाफ जाकर पूरे देश पर जबरदस्ती एथेनॉल थोप रहे हैं।
मोदी सरकार एविएशन टर्बाइन फ्यूल में भी इथेनॉल मिलाने की बना रही योजना- केजरीवाल
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि सूत्रों से पता चला है कि मोदी सरकार एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) में भी एथेनॉल मिलाने की योजना बना रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे उड़ानों की सुरक्षा को गंभीर खतरा हो सकता है।
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मोदी सरकार के दबाव में पेपर लीक और E-20 के खिलाफ उठ रही आवाज को दबा रहा मेटा- केजरीवाल
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने मेटा इंडिया की ओर से उनके इंस्टाग्राम अकाउंट को भारत में सीमित करने पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार के दबाव में मेटा पेपर लीक और ई-20 पेट्रोल के खिलाफ उठ रही हर आवाज को दबा रहा है। मेरी तरह ही मोदी सरकार के खिलाफ बोलने वाले बहुत सारे लोगों के अकाउंट को सीमित कर दिया गया है। उन्होंने देश भर के लोगों से अपील करते हुए कहा कि जिनका अकाउंट सीमित किया गया है, वे मुझे डीएम करें या कमेंट में लिखकर भेजे, ताकि हम सब मिलकर मेटा और इंस्टाग्राम पर दबाव डाल सकें कि वह ऐसी बदमाशी न करें और मोदी जी के सामने इस तरह से घुटने न टेकें।
अरविंद केजरीवाल ने एक्स पर एक वीडियो जारी कर कहा कि इंस्टाग्राम वालों ने मुझे नोटिस भेजा है कि मेरे अकाउंट को भारत में सप्रेस और सीमित कर दिया गया है। मैंने वहां फोन करके पता करने की कोशिश की कि ऐसा क्यों किया गया, लेकिन किसी ने कुछ नहीं बताया। मैंने पूछा कि इसे कैसे ठीक कराएं, लेकिन किसी ने कुछ नहीं बताया। मैंने ईमेल भेजा, लेकिन उसका भी कोई जवाब नहीं दिया गया।
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि अगर ये लोग मेरे साथ ऐसा कर रहे हैं, तो आम लोगों के साथ पता नहीं क्या कर रहे होंगे। जैसे ही मैंने इस बात को उठाया, बहुत सारे लोगों के मैसेज और फोन आ रहे हैं कि उनका अकाउंट भी सप्रेस कर दिया गया है। पता चला है कि केंद्र सरकार मेटा और इंस्टाग्राम पर दबाव डाल रही है कि जो भी मोदी जी के खिलाफ कुछ बोले, जो एथेनॉल पर कुछ बोले या जो पेपर लीक पर कुछ बोले, उनके अकाउंट को सप्रेस कर दिया जाए।
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि मेरी सब लोगों से गुजारिश है कि अगर किसी का अकाउंट भी इस तरह से सप्रेस किया जा रहा है या ऐसा लग रहा है, तो मुझे डीएम करके या कमेंट में लिखकर भेजें। मैं एक साथ मिलकर लोगों के मुद्दे को भी उठाऊंगा। सब एक साथ मिलकर मेटा और इंस्टाग्राम को फोर्स करेंगे कि वे इस तरह की बदमाशी न करें और मोदी जी के सामने इस तरह से घुटने न टेकें।
अरविंद केजरीवाल ने एक्स पर मेटा और मेटा इंडिया को टैग करते हुए पूछा कि आपने मेरा अकाउंट क्यों रिस्ट्रिक्ट कर दिया है? भारत स्थित मेटा के दफ्तर में मौखिक पूछताछ से पता चला है कि मेरा अकाउंट भारत में रिस्ट्रिक्ट कर दिया गया है और भारत में उपलब्ध नहीं है। आखिर ऐसा क्यों किया गया है? मेटा के दफ्तर में कोई भी इसका कारण नहीं बता रहा है और न ही कोई यह बता रहा है कि यह रिस्ट्रिक्शन कैसे हटाया जा सकता है। भेजे गए सभी ईमेल का रूटीन एकनॉलेजमेंट के अलावा कोई जवाब नहीं मिला है। यह बहुत ही खराब सर्विस है। उन्होंने मेटा से कहा कि मेटा, हमारे प्रधानमंत्री के सामने इतना न झुके, वरना वे भारत में मेटा को केवल अपना ही अकाउंट चलाने की अनुमति देंगे।
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