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‘ युद्ध नशों के विरुद्ध’ की तर्ज पर गैंगस्टरों के खिलाफ जंग छेड़ी जाएगी। Punjab से सभी गैंगस्टरों और उनके नेटवर्क का होगा सफाया: अरविंद केजरीवाल
एक मजबूत राजनीतिक संदेश देते हुए ‘आप’ के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने नव-निर्वाचित जिला परिषद और ब्लॉक समिति सदस्यों से मुलाकात की और जोर देकर कहा कि पंजाब डर, गुंडागर्दी और धांधली वाली चुनावी राजनीति के युग से निर्णायक रूप से बाहर आ चुका है। उन्होंने साथ ही यह घोषणा की कि आम आदमी पार्टी (आप) सरकार अब ‘युद्ध नशों के विरुद्ध’ की तर्ज पर गैंगस्टरों के खिलाफ बड़े स्तर पर जंग शुरू करेगी।
पंचायत चुनावों में ‘आप’ की 70 प्रतिशत से अधिक सीटों पर शानदार जीत को साफ-सुथरी राजनीति और ईमानदार शासन के पक्ष में जनादेश बताते हुए ‘आप’ प्रमुख ने कहा कि पंजाब ने अपने इतिहास में स्थानीय इकाइयों के चुनाव सबसे अधिक पारदर्शिता के साथ होते देखे हैं, जिनमें एक भी वोट नहीं बदला गया। वहीं मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने जोर देकर कहा कि जन-हितैषी शासन ने पारंपरिक पार्टियों को अपने घोषणा-पत्र दोबारा लिखने के लिए मजबूर कर दिया है।
– ‘श्री अकाल तख्त साहिब के समक्ष एक विनम्र सिख के रूप में पेश होऊंगा और अकाल तख्त का आदेश सर्वोपरि है: भगवंत सिंह मान
श्री अकाल तख्त साहिब से जुड़े मुद्दे पर भगवंत सिंह मान ने कहा कि वे सभी सबूतों के साथ तख्त साहिब के समक्ष अवश्य पेश होंगे और अनुरोध किया कि पूरी कार्यवाही का सभी चैनलों पर सीधा प्रसारण किया जाए। उन्होंने कहा, “मैं वहां मुख्यमंत्री के रूप में नहीं, बल्कि एक विनम्र सिख के रूप में पेश होऊंगा। श्री अकाल तख्त साहिब हर सिख के लिए पवित्र है और हमारे समुदाय का सबसे पवित्र स्थान है। भले ही उस दिन देश के राष्ट्रपति गुरु नानक देव विश्वविद्यालय, अमृतसर का दौरा करेंगे, फिर भी मैं श्री अकाल तख्त साहिब के समक्ष अपनी उपस्थिति सुनिश्चित करूंगा।”
उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि उनके लिए श्री अकाल तख्त साहिब सर्वोपरि हैं और वहां से प्राप्त किसी भी आदेश का सच्चे दिल से पालन किया जाएगा। भगवंत सिंह मान ने कहा, “श्री अकाल तख्त साहिब का आदेश मेरे और मेरे परिवार के लिए हमेशा सर्वोच्च था, है और रहेगा। यह एक अत्यंत सम्माननीय स्थान है, जहां से सिखों को शाश्वत शांति और शक्ति मिलती है।”
लुधियाना में चुने हुए प्रतिनिधियों के एकत्रित सम्मेलन को संबोधित करते हुए ‘आप’ के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा, “सबसे पहले, मैं आप सभी को बधाई देता हूं, जो इतनी बड़ी संख्या में जिला परिषदों और ब्लॉक समितियों के सदस्य चुने गए हैं। आज आपको खुशी होनी चाहिए क्योंकि लोगों ने आपको एक नई जिम्मेदारी सौंपी है। यह बहुत गर्व की बात है कि इन चुनावों में ‘आप’ ने कुल सीटों में से 70 प्रतिशत से अधिक पर जीत हासिल की है। ये आपकी पार्टी की सीटें हैं।”
बीते समय को याद करते हुए ‘आप’ प्रमुख ने कहा कि पारंपरिक रूप से सत्ताधारी पार्टी द्वारा पंचायत चुनाव शक्ति और धांधली के माध्यम से जीते जाते थे। उन्होंने कहा, “2013 में पंचायत चुनाव सरकार बनने के एक साल बाद हुए थे। 2017 में भी सरकार बनने के एक साल बाद 2018 में चुनाव हुए। इसके बावजूद बड़े स्तर पर बूथ कैप्चरिंग, गुंडागर्दी और जबरदस्ती हुई और उसी तरह जीत दर्ज की गई।”
वर्तमान समय से तुलना करते हुए अरविंद केजरीवाल ने कहा, “आज हमारी सरकार के चार साल पूरे होने के बाद ब्लॉक समितियों और जिला परिषदों के चुनाव हुए और बिल्कुल भी जबरदस्ती नहीं की गई। नतीजे देखिए—600 से अधिक सीटें ऐसी हैं, जहां उम्मीदवार 100 से कम वोटों से जीते। इनमें से 350 से अधिक सीटें विपक्ष ने जीती हैं। कई सीटें ऐसी हैं, जहां कांग्रेस या अकाली दल के उम्मीदवार सिर्फ एक वोट से जीते हैं। क्या आपने कभी सुना है कि सत्ताधारी पार्टी का कोई उम्मीदवार एक वोट से हार गया हो?”
उन्होंने आगे कहा कि अगर ‘आप’ सत्ता का दुरुपयोग करना चाहती तो यह बहुत आसान था। “अगर हम जबरदस्ती करना चाहते तो सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट (एस.डी.एम.) को बुलाकर अपने उम्मीदवार को निर्वाचित घोषित कर सकते थे। एक वोट को इधर-उधर करना कोई मुश्किल काम नहीं है, लेकिन हमने ऐसा नहीं किया। हम इस उद्देश्य से राजनीति में नहीं आए हैं। ‘आप’ जबरदस्ती, भ्रष्टाचार या गुंडागर्दी करने के लिए नहीं बनी है। अगर यही लक्ष्य होता तो हमारे और कांग्रेस, भाजपा या अकाली दल में क्या फर्क रह जाता। हम राजनीति बदलने, उसे साफ करने और जबरदस्ती व गुंडागर्दी को खत्म करने के लिए आए हैं।”
पंजाब में गहरी जड़ें जमा चुकी समस्याओं पर बोलते हुए ‘आप’ प्रमुख ने कहा, “वे पूरे पंजाब में नशा फैलाते हैं। नशा कौन बेचता है? चाहे कोई भी पार्टी हो, उनके चाचा, भाई, दामाद नशा बेच रहे हैं, अपराध में शामिल हैं और गैंग चला रहे हैं। वे खुलेआम गैंगस्टरों को टिकट देते हैं। हम ऐसा करने नहीं आए। हम इस सिस्टम को साफ करने आए हैं। हमने अपनी जान दांव पर लगा दी है, सब कुछ कुर्बान कर दिया है। उन्होंने मेरे खिलाफ आवाज उठाने पर मुझे जेल भेज दिया। उन्हें लगा कि अरविंद केजरीवाल बोलना बंद कर देगा, लेकिन मैं बाहर आया और और भी ऊंची आवाज में गरजा।”
उन्होंने कहा कि पंजाब में चुनाव पूरी तरह साफ-सुथरे ढंग से हुए। “एक भी वोट नहीं बदला गया। चार साल के शासन के बाद पंजाब को चलाने की बड़ी चुनौतियों के बावजूद लोगों ने हमें वोट दिया। जब हमने सत्ता संभाली, तब पैसा नहीं था और पंजाब कर्ज में डूबा हुआ था। उन्होंने सब कुछ लूट लिया था। पहले समय पर वेतन नहीं मिलता था। हमारे शासन में एक भी महीना ऐसा नहीं गया, जब वेतन में देरी हुई हो। सभी को समय पर वेतन मिल रहा है। हम ईमानदारी से सरकार चला रहे हैं, एक-एक पैसा बचा रहे हैं और परिणाम दे रहे हैं।”
अरविंद केजरीवाल ने अपनी उपलब्धियां गिनाते हुए कहा, “बड़े काम हो रहे हैं। बिजली मुफ्त हो गई है। पहले चुनावों के दौरान जहां भी मैं जाता था, लोग बिजली के बिल लेकर बैठते थे और कहते थे कि उनका छोटा सा घर है, एक पंखा है, फिर भी 10 हजार रुपये के बिल आ गए। आज लोगों को जीरो बिजली बिल मिल रहे हैं। अगर यह चमत्कार नहीं है तो और क्या है—पुराने बिल माफ कर दिए गए हैं।”
उन्होंने कहा कि चुनावी जनादेश प्रदर्शन को दर्शाता है। “चार साल सत्ता में रहने के बाद अगर हम 38 प्रतिशत वोट हिस्सेदारी के साथ 70 प्रतिशत से अधिक सीटें जीतते हैं, तो वह 38 प्रतिशत वोट हमारे काम के लिए है, न कि जबरदस्ती या भ्रष्टाचार के लिए। यह ईमानदारी और शालीनता के लिए वोट है। हमारी पार्टी नेक लोगों की पार्टी है।”
नव-निर्वाचित प्रतिनिधियों को भविष्य के लिए अहम बताते हुए अरविंद केजरीवाल ने कहा, “अब आपकी जिम्मेदारी है कि अगली चुनावों में इस 38 प्रतिशत वोट हिस्सेदारी को 45 प्रतिशत तक ले जाएं। 45 प्रतिशत से कम स्वीकार्य नहीं है। आपको गांव-गांव जाना चाहिए, लोगों से हाथ जोड़कर मिलना चाहिए। अहंकार ने अकाली दल और कांग्रेस को तबाह कर दिया। अगर आप अहंकारी बन गए तो हमारे साथ भी यही होगा। लोगों के घरों में जाएं, उनकी खुशियों और दुखों में साथ दें, सिर्फ सरकारी मामलों में ही नहीं बल्कि निजी कठिनाइयों में भी—लोगों के भाई, उनके बेटे बनें।”
‘आप’ प्रमुख ने आम नागरिकों के प्रति पार्टी की प्रतिबद्धता पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “आप वह पार्टी है जो आम लोगों को टिकट देती है। यह वह पार्टी है जहां एक आम आदमी मुख्यमंत्री बनता है। भगवंत सिंह मान के पिता राजनीतिज्ञ नहीं थे, उनके रिश्तेदारों में भी कोई राजनीति में नहीं था, फिर भी वे मुख्यमंत्री बने। मेरे परिवार में भी कोई राजनीतिज्ञ नहीं था, फिर भी मैं मुख्यमंत्री बना। आप में से 90 प्रतिशत से अधिक ऐसे परिवारों से आते हैं जिनका कोई राजनीतिक पृष्ठभूमि नहीं है। अगर आप अच्छा काम करते हैं तो सिर्फ अपने काम के आधार पर विधायक और मंत्री बन सकते हैं।”
ढिलाई के खिलाफ स्पष्ट चेतावनी देते हुए ‘आप’ के राष्ट्रीय संयोजक ने जोर देकर कहा, “यह न सोचो कि दिल्ली में बैठे अरविंद केजरीवाल को नहीं पता कि पंजाब में क्या हो रहा है। हम जानते हैं कि कौन काम कर रहा है और कौन नहीं। आपको किसी की चापलूसी करने या दिल्ली आने या भगवंत सिंह मान से मिलने की जरूरत नहीं है। जिस व्यक्ति को लोग प्यार करते हैं, जिसके काम की वे प्रशंसा करते हैं, अरविंद केजरीवाल उसके घर जाकर उसे टिकट देंगे। आपको टिकट मांगने की जरूरत नहीं है।”
उन्होंने स्वार्थ से ऊपर उठकर सेवा की अपील करते हुए कहा, “लोगों की सेवा करो। परमात्मा ने आपको यह मौका दिया है और बहुत कम लोगों को ऐसा मौका मिलता है। यह मौके सिर्फ ‘आप’ में ही होते हैं। अन्य पार्टियां गैंगस्टरों या उनके रिश्तेदारों को टिकटें देती हैं। हमने कभी अपने बच्चों या रिश्तेदारों को टिकटें नहीं दीं। सिर्फ उन्हें ही टिकटें मिलती हैं, जो लोगों की सेवा करते हैं।”
2017 से पहले के माहौल के बारे में बात करते हुए अरविंद केजरीवाल ने कहा, “अकाली दल और कांग्रेस के शासन दौरान पंजाब डर के माहौल में रहता था। झूठे मामले आम थे। लोग डरे हुए थे। हमने उस माहौल को खत्म कर दिया। झूठे केस और गुंडागर्दी का संस्कृति खत्म हो गया है। पहले, अखबार दलित भाईचारे के खिलाफ बेरहमी की रिपोर्टों से भरे रहते थे। आज हमने ऐसी घटनाओं को सफलतापूर्वक रोका है। आज कोई भी सरकार से नहीं डरता क्योंकि लोग जानते हैं कि सरकार उनकी सेवा करने के लिए है।”
नशों के खिलाफ लड़ाई के बारे में ‘आप’ के राष्ट्रीय संयोजक ने कहा कि पंजाब में नशों के खिलाफ चल रही जंग ‘आप’ सरकार की राजनीतिक इच्छाशक्ति और हिम्मत का नतीजा है। उन्होंने जोर देकर कहा, “लोग पूछते हैं कि यह नशा विरोधी मुहिम कहां से आई है। पंजाब में नशे किसने फैलाए। नशे पिछली सरकारों के समय फैले और उनके चाचे और रिश्तेदार नशे बेचते थे। उनका एक सबसे बड़ा नेता आज जेल में बैठा है। पहले न तो पुलिस और न ही प्रशासन के पास उसे छूने की हिम्मत थी। जब हमने कहा कि उसे जेल भेजा जाना चाहिए तो सिर्फ ‘आप’ सरकार थी, जिसके पास ऐसा करने का इरादा था क्योंकि हमने फैसला किया था कि पंजाब के नौजवानों को नशों से मुक्त किया जाना चाहिए।”
उन्होंने कहा कि सरकार ने नशा तस्करों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है। उन्होंने कहा, “हिम्मत से, हमने बड़े नशा तस्करों को जेल भेजा है। 28,000 से ज्यादा मामले दर्ज किए गए हैं और 400 से ज्यादा नशा तस्कर इस समय सलाखों के पीछे हैं। सरकार ने अब ‘युद्ध नशेयां विरुद्ध’ का दूसरा चरण शुरू किया है। कल से हर गांव और हर घर में जाओ और लोगों को स्पष्ट रूप से बताओ कि अगर वे इन पार्टियों को दोबारा वोट देते हैं तो पंजाब में नशे वापस आ जाएंगे और इस बार ये राज्य को पूरी तरह तबाह कर देंगे। गलती से भी इन पार्टियों को वोट न दो।”
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि पंजाब को नशे के संकट से निकालना बहुत मुश्किल रहा है। उन्होंने कहा, “बहुत हिम्मत और मेहनत से हम पंजाब को नशों से बाहर निकाल रहे हैं। घर-घर जाकर लोगों को समझाओ कि अगर ये लोग सत्ता में वापस आते हैं तो 10,000 रुपये के बिजली बिल वापस आ जाएंगे। हमने बहुत मुश्किल से पंजाब की वित्तीय स्थिति को ठीक किया है। हमने राज्य के बजट का प्रबंधन किया है और लोगों को सुविधाएं प्रदान कर रहे हैं।”
लोक कल्याण का जिक्र करते हुए अरविंद केजरीवाल ने कहा, “दिल्ली में मैंने मुफ्त स्वास्थ्य देखभाल प्रदान करने के लिए मोहल्ला क्लीनिक बनाए। अब वहां भाजपा सरकार सत्ता में आ गई है और वे एक-एक करके मोहल्ला क्लीनिकों को बंद कर रहे हैं। आपने यह अखबारों में पढ़ा होगा। अगर उन्हें सत्ता में लाया गया तो वे सारे मोहल्ला क्लीनिक बंद कर देंगे। अगर उन्हें सत्ता में लाया गया तो वे उन स्कूलों को बंद कर देंगे, जिनकी हम इतनी मेहनत से मरम्मत कर रहे हैं।”
रोजगार पैदा करने के बारे में प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा, “आज पंजाब में नौकरियां दी जा रही हैं। पहले एक भी सरकारी नौकरी रिश्वत या सिफारिशों के बिना नहीं मिलती थी। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने 60,000 नौकरियां दी हैं। मुझे एक ऐसा व्यक्ति दिखाओ, जो कहता है कि उसने रिश्वत देकर नौकरी प्राप्त की है। मुझे एक ऐसा व्यक्ति दिखाओ, जो कहता है कि उसे सिफारिश से नौकरी मिली है। आज गरीब किसानों और मजदूरों के बच्चों को सिर्फ योग्यता के आधार पर सरकारी नौकरियां मिल रही हैं। उन्हें पुलिस और प्रशासन में भर्ती किया जा रहा है। पहली बार, लोगों को ईमानदारी से नौकरियां मिल रही हैं।”
उन्होंने याद किया कि पहले विरोध प्रदर्शन कितने आम हो गए थे। उन्होंने कहा, “पहले, जब मैं और भगवंत सिंह मान पंजाब का दौरा करते थे तो हम हर जगह शिक्षकों और कर्मचारियों को पानी की टंकियों पर बैठे देखते थे। शिक्षकों को क्लास-रूम में होना चाहिए। आज, आपको एक भी कर्मचारी पानी की टंकी पर बैठा नहीं मिलेगा। हमने सभी की मांगें पूरी की हैं।”
बुनियादी ढांचे के विकास के बारे में बोलते हुए, अरविंद केजरीवाल ने कहा, “आज बन रही सड़कों को देखो। हर गांव में शानदार सड़कें बनाई जा रही हैं। लगभग 19,000 किलोमीटर गांवों की सड़कें बनाई जा रही हैं। पंजाब की कुल 64,000 किलोमीटर सड़कों में से, 42,000 किलोमीटर इस समय निर्माणाधीन हैं। गांवों और शहरों में सारी सड़कें छह महीनों के अंदर पूरी हो जाएंगी। आप खुद देखोगे।”
उन्होंने तीर्थ यात्रा पहल के बारे में भी बात की। उन्होंने कहा, “हमने तीर्थ यात्राएं शुरू की हैं। हर गांव से एक या दो बसें तीर्थ यात्रा के लिए जा रही हैं। बसें दरबार साहिब, दुर्गियाना मंदिर और वाघा बॉर्डर की ओर जा रही हैं।”
कानून व्यवस्था के बारे में ‘आप’ प्रमुख ने कहा कि नशों के बाद सरकार गैंगस्टरों के खिलाफ बड़ी मुहिम शुरू करेगी। उन्होंने कहा, “जैसे हमने नशों के खिलाफ जंग शुरू की थी, उसी तरह हम गैंगस्टरों के खिलाफ भी जंग शुरू करेंगे। पंजाब में सारे गैंगस्टरों और उनके नेटवर्क का खात्मा किया जाएगा। हम उन्हें नहीं बख्शेंगे।”
नव निर्वाचित प्रतिनिधियों को जिम्मेदारी संभालने का आह्वान करते हुए अरविंद केजरीवाल ने कहा, “आज आप सभी से मिलकर बहुत अच्छा लगा। जैसे मैंने पहले कहा था, हमारा सिर्फ एक ही लक्ष्य है। हमारे पास जो 38 प्रतिशत वोट शेयर है, उसे 45 प्रतिशत तक ले जाना चाहिए। यह जिम्मेदारी अब आपके कंधों पर है। लोगों ने आपको मौका दिया है। आप में से बहुत से पहली बार राजनीति में आए हैं। परमात्मा ने आपको यह मौका दिया है।”
अरविंद केजरीवाल ने सख्त चेतावनी देते हुए कहा, “अगर आप अहंकारी हो जाते हो, अगर आप पैसा कमाने पर ध्यान केंद्रित करना शुरू कर देते हो या भ्रष्टाचार में शामिल हो जाते हो तो आपका राजनीतिक जीवन हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा। लेकिन अगर आप खुद को सेवा के लिए समर्पित कर देते हो, तो परमात्मा आपको बहुत दूर ले जाएगा। यह संभव है कि मान साहिब के बाद, पंजाब का अगला मुख्यमंत्री आज इसी हॉल में बैठा हो।”
इस दौरान पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि ‘आप’ के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल की दूरदर्शी सोच और गतिशीलता ने पारंपरिक राजनीतिक पार्टियों को अपने चुनावी घोषणा-पत्रों को दोबारा लिखने और अपनी प्राथमिकताओं पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर किया है। उन्होंने कहा, “अरविंद केजरीवाल के कारण इस देश की राजनीति बदल गई है। शिक्षा, स्वास्थ्य और बिजली सिर्फ ‘आप’ के कारण राजनीतिक चर्चा के केंद्र में आए हैं। इससे पहले किसी भी राजनीतिक पार्टी ने कभी इन क्षेत्रों की चिंता नहीं की, भले ही ये आम आदमी के लिए सबसे ज्यादा मायने रखते हैं।”
नव निर्वाचित प्रतिनिधियों को बधाई देते हुए भगवंत सिंह मान ने कहा कि उन्होंने लोगों से सीधा संबंध बनाकर ये चुनाव जीते हैं, उन्होंने कहा कि स्थानीय निकायों के चुनाव विधानसभा या संसदीय चुनावों से कहीं ज्यादा चुनौतीपूर्ण होते हैं। उन्होंने कहा, “आप लोगों में काम करके विजेता बनकर उभरे हो। इस जीत का उपयोग राजनीति में नई ऊंचाइयों को छूने के लिए किया जाना चाहिए। मुझे विश्वास है कि आप में से बहुत से भविष्य में विधानसभा चुनाव लड़ेंगे।” उन्होंने कहा, “यह दूसरी पार्टियों के बिलकुल उलट है, जहां परिवारवाद की राजनीति भारी होती है और टिकटें परिवारों में ही बांटी जाती हैं।”
अकाली दल पर निशाना साधते हुए भगवंत सिंह मान ने टिप्पणी की कि पार्टी श्री मुक्तसर साहिब में होने वाली माघी कॉन्फ्रेंस के लिए स्पीकर ढूंढने के लिए संघर्ष कर रही है। उन्होंने कहा, “उनके पास लोगों को संबोधित करने के लिए कोई नेता नहीं बचा है।” उन्होंने कहा कि हाल ही में हुए चुनाव स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से करवाए गए। “यही कारण है कि कई सीटों पर जीत का अंतर बहुत कम था। लोग ‘आप’ की लोक-पक्षीय नीतियों के कारण बड़ी संख्या में शामिल हो रहे हैं, जबकि कई पार्टियां उम्मीदवार भी नहीं ढूंढ पा रही हैं क्योंकि जनता उनकी विभाजनकारी राजनीति से तंग आ चुकी है।”
उन्होंने कहा कि तीखे मुकाबले के दौरान लोगों के लिए आवाज बुलंद करना और जीतना वाकई प्रशंसनीय है। उन्होंने कहा, “कांग्रेस और अकालियों का कोई एजेंडा नहीं है। वे सिर्फ सत्ता में वापस आने की अपनी बारी की प्रतीक्षा कर रहे हैं लेकिन उनके सपने कभी पूरे नहीं होंगे क्योंकि लोग पंजाब और जन कल्याण के खिलाफ उनकी संदिग्ध भूमिका से पूरी तरह वाकिफ हैं।”
इकट्ठ को संबोधित करते हुए वरिष्ठ ‘आप’ नेता और पंजाब प्रभारी मनीष सिसोदिया ने कहा कि नव निर्वाचित सदस्यों को लोगों ने बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। उन्होंने कहा, “यह जनादेश पंजाब सरकार की जन हितैषी और विकास-मुखी नीतियों में लोगों के विश्वास को दर्शाता है।”
मनीष सिसोदिया ने कहा कि जिला परिषद और ब्लॉक समिति सदस्यों ने ‘युद्ध नशेयां विरुद्ध’ मुहिम के दूसरे चरण में उत्साह से हिस्सा लिया था, जिससे इसने बड़ी सफलता हासिल की। उन्होंने कहा, “पंजाब की आत्मा इसके गांवों में बसती है और मुझे विश्वास है कि आप गांवों के विकास और खुशहाली को सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास करोगे।”
पूरी सरकारी सहायता का भरोसा देते हुए मनीष सिसोदिया ने कहा कि ग्रामीण विकास के लिए फंडों की कोई कमी नहीं आने दी जाएगी। उन्होंने कहा, “पंजाब सरकार आपके साथ मजबूती से खड़ी रहेगी। मैं आपको पंचायतों के साथ तालमेल करके काम करने की सलाह देता हूं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सारे परिवारों के स्वास्थ्य कार्ड बिना किसी देरी के तैयार किए जाएं।”
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AAP पंजाब ने चुनाव से पहले वोटरों को बांटने के लिए भाजपा पर डर और डराने-धमकाने की राजनीति करने का लगाया आरोप : अमन अरोड़ा
आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब के अध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने मंगलवार को जालंधर और अमृतसर में हाल ही में हुए धमाकों के लिए विपक्षी पार्टियों द्वारा पंजाब सरकार को ज़िम्मेदार ठहराने की कोशिशों की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं का राजनीतिक फ़ायदे के लिए गलत इस्तेमाल किया जा रहा है और आरोप लगाया कि भाजपा का चुनाव से पहले डर और बांटने का इतिहास रहा है।
अरोड़ा ने कहा कि पूरे देश में एक रुझान देखा गया है जहां चुनाव से पहले वोटरों को बांटने के लिए कानून-व्यवस्था, धर्म या सुरक्षा से जुड़ी घटनाओं का सहारा लिया जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावी फ़ायदे के लिए अशांति फैलाने और समुदायों को बांटने के लिए अक्सर ऐसे तरीके अपनाए जाते हैं।
उन्होंने कहा कि पंजाब चुनाव की ओर बढ़ रहा है और मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार के लोगों के पक्ष के कामों से घबराई हुई है। इसीलिए ऐसी साज़िशें रची जा रही हैं।
उन्होंने आगे कहा कि ऐसी घटनाओं की ज़िम्मेदारी केंद्र सरकार की है, क्योंकि इंटरनेशनल बॉर्डर पर बॉर्डर सिक्योरिटी फ़ोर्स (बीएसएफ) का अधिकार क्षेत्र 15 किलोमीटर से बढ़ाकर 50 किलोमीटर कर दिया गया है। यह देखते हुए कि अमृतसर और जालंधर दोनों इस दायरे में आते हैं, अरोड़ा ने कहा कि जवाबदेही केंद्रीय एजेंसियों और केंद्र में भाजपा की सरकार की है।
अरोड़ा ने आतंकवाद की यादें ताज़ा करके पंजाब को अस्थिर करने और डर पैदा करने की कोशिशों के ख़िलाफ़ भी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि पंजाबी इन “नापाक इरादों” से वाकिफ़ हैं और बांटने वाली राजनीति का शिकार नहीं होंगे। उन्होंने कहा कि पंजाब सांप्रदायिक सद्भाव की ज़मीन है, जहाँ सबसे बुरे समय में भी नफ़रत के बीज कभी नहीं उगे। लोगों को धर्म के आधार पर बांटने की कोशिशें यहाँ कभी कामयाब नहीं होंगी।
पंजाब की एकता और धर्मनिरपेक्षता की विरासत को दोहराते हुए, अरोड़ा ने भाजपा और केंद्र सरकार से ऐसी चालों से बचने और राज्य के सामाजिक ताने-बाने का सम्मान करने की अपील की। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि पंजाब के लोग शांति और सांप्रदायिक सद्भाव को बिगाड़ने की किसी भी कोशिश के खिलाफ एकजुट रहेंगे।
पंजाब के कैबिनेट मंत्री हरभजन सिंह ईटीओ, डॉ. बलबीर सिंह और हरजोत सिंह बैंस ने भी हाल के धमाकों को लेकर भाजपा और केंद्र सरकार पर निशाना साधा और कहा कि इसके लिए केंद्रीय एजेंसियां ज़िम्मेदार हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र ने इंटरनेशनल बॉर्डर पर बीएसएफ का अधिकार क्षेत्र 15 किलोमीटर से बढ़ाकर 50 किलोमीटर कर दिया है, जिससे अमृतसर और जालंधर जैसे इलाके इसके दायरे में आ गए हैं। इसे देखते हुए, उन्होंने कहा कि सुरक्षा में किसी भी चूक की ज़िम्मेदारी सीधे केंद्र की है। मंत्रियों ने आगे कहा कि राजनीतिक फ़ायदे के लिए पंजाब की शांति को बिगाड़ने की भाजपा की कोशिशें कभी कामयाब नहीं होंगी, क्योंकि राज्य के लोग एकजुट हैं और ऐसी बांटने वाली चालों के खिलाफ़ सतर्क हैं।
पंजाब के कैबिनेट मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने राजनीतिक फ़ायदे के लिए पंजाब को अस्थिर करने की भाजपा की कोशिशों की निंदा करते हुए कहा कि राज्य “कोई ट्रॉफी नहीं बल्कि एक इमोशनल पहचान है।” अमन अरोड़ा की चिंताओं का ज़िक्र करते हुए, बैंस ने कहा कि चुनाव से पहले डर, अशांति और पोलराइज़ेशन पैदा करने के ऐसे तरीके बहुत गैर-ज़िम्मेदाराना और खतरनाक हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब की विरासत भारत की आज़ादी की लड़ाई के दौरान दिए गए बड़े बलिदानों पर बनी है और इसे सिर्फ़ चुनावी महत्वाकांक्षाओं तक सीमित नहीं रखा जा सकता। भाजपा के “बंगाल की तरह पंजाब जीतने” के दावों पर प्रतिक्रिया देते हुए, बैंस ने इन बातों को शर्मनाक और असंवेदनशील बताया और कहा कि पंजाबी अपने निजी राजनीतिक फ़ायदों के लिए अपनी एकता और शांति को कभी भी टूटने नहीं देंगे।
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पंजाब में बेअदबी विरोधी कानून लागू होने के बाद मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने श्री आनंदपुर साहिब से ‘शुक्राना यात्रा’ का किया नेतृत्व
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज यहां तख्त श्री केसगढ़ साहिब में माथा टेकने के बाद पूरे उत्साह के साथ ‘शुक्राना यात्रा’ शुरू की। कैबिनेट मंत्री हरजोत सिंह बैंस की मौजूदगी में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि यह यात्रा परमात्मा का शुक्राना करने के लिए की जा रही है, जिसने उन्हें बेअदबी के मामलों में सख्त सजा की व्यवस्था करने वाला जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सतिकार (संशोधन) एक्ट 2026 लागू करके मानवता की सेवा करने का अवसर बख्शा है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “जिस पवित्र धरती पर खालसा पंथ प्रकट हुआ था, उससे ‘शुक्राना यात्रा’ शुरू हुई है। बेअदबी रोकने के लिए सख्त कानून बनाने की पवित्र जिम्मेदारी हमें बख्शने के लिए गुरु साहिब के चरणों में शुक्राना किया जा रहा है। पंजाब की शांति और ‘सर्बत्त के भला’ के लिए अरदासें जारी रहेंगी।”
पवित्र तख्त साहिब में माथा टेकते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “मेरा रोम-रोम परमात्मा का ऋणी है कि उसने मुझे जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सतिकार (संशोधन) एक्ट 2026 लागू करके मानवता की सेवा करने का अवसर बख्शा। हम भाग्यशाली हैं कि हमें इस ऐतिहासिक कानून को पास करने की जिम्मेदारी मिली, जो भविष्य में बेअदबी की घटनाओं को खत्म करने में मददगार होगा।”उन्होंने कहा कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी एक गहरी साजिश का हिस्सा थी, जिसका उद्देश्य पंजाब की शांति, भाईचारक साझ और एकता को तोड़ना था। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि यह एक्ट यह सुनिश्चित करता है कि इस अक्षम्य अपराध के दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को माफ नहीं किया जाएगा और इस घिनौने अपराध के दोषियों को अनुकरणीय सजा दी जाएगी। यह कानून निवारक के रूप में काम करेगा और भविष्य में कोई भी ऐसा गुनाह करने की हिम्मत नहीं करेगा।”
सिखों की श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के साथ आध्यात्मिक साझ पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी हर सिख के लिए पिता के समान हैं और इसकी पवित्रता की रक्षा करना हमारा कर्तव्य है। दुनिया भर के लोग इस ऐतिहासिक कदम पर खुशी प्रकट कर रहे हैं और धन्यवाद कर रहे हैं।” शुक्राना यात्रा के बारे में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि श्री आनंदपुर साहिब के बाद वे 9 मई तक तख्त श्री केसगढ़ साहिब, श्री अकाल तख्त साहिब, श्री दमदमा साहिब, मस्तुआणा साहिब, गुरुद्वारा दुख निवारण साहिब और श्री फतेहगढ़ साहिब में नतमस्तक होंगे। उन्होंने अत्यधिक गर्मी के बावजूद यहां एकत्रित हुए लोगों का धन्यवाद करते हुए कहा कि “इस यात्रा का एकमात्र मंतव्य इस महत्वपूर्ण एक्ट को पास करने के लिए ताकत और बख्शने के लिए परमात्मा का शुक्राना करना है।”
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “हम तो एक माध्यम हैं, जिसे गुरु साहिब ने यह पवित्र जिम्मेदारी निभाने के लिए चुना है। मैं इस एक्ट को पास करने वाला कोई नहीं हूं। गुरु साहिब ने खुद यह सेवा मुझसे ली है। परमात्मा ऐसी सेवा सिर्फ उन्हीं को सौंपता है, जिन्हें उसने खुद चुना होता है। मैं गुरु साहिब का एक विनम्र सेवक हूं, जिसे यह कार्य सौंपा गया है।” उन्होंने आगे कहा कि समाज के सभी वर्गों के लोग लंबे समय से बेअदबी की घटनाओं को रोकने के लिए ऐसे कानून की मांग कर रहे थे। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “इस एक्ट का एकमात्र उद्देश्य पिछली सरकारों की लापरवाही के कारण लोगों की अशांत हुई भावनाओं को शांत करना है। इस कानून के पीछे कोई भी राजनीतिक मंतव्य नहीं है।”
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि दुनिया भर के लोग इस पहल के लिए हमारा धन्यवाद करने के लिए रोजाना फोन कर रहे हैं, लेकिन उन्होंने कहा कि कुछ व्यक्ति इस एक्ट का विरोध सिर्फ इसलिए कर रहे हैं क्योंकि उनके राजनीतिक आका नाखुश हैं। उन्होंने कहा, “यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि कुछ लोग अपने निजी हितों के लिए इस पवित्र मुद्दे पर भी राजनीति कर रहे हैं क्योंकि वे जानते हैं कि उन्हें जल्दी अपने गुनाहों के नतीजे भुगतने पड़ेंगे।” लोकसभा सदस्य के रूप में अपने कार्यकाल को याद करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि उन्होंने पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन के साथ मिलकर छोटे साहिबजादों को उनके शहीदी दिवस पर श्रद्धांजलि देने के मामले की सदन में सफलतापूर्वक पैरवी की थी। उन्होंने कहा कि पूरा पंजाब उस समय को शोक के महीने के रूप में मनाता है क्योंकि छोटे साहिबजादों को जालिम शासकों ने जिंदा नींव में चिनवा दिया था। मुझसे पहले 190 से अधिक सांसदों ने पंजाब का प्रतिनिधित्व किया, लेकिन उनमें से किसी ने भी संसद में यह मुद्दा नहीं उठाया।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि छोटे साहिबजादों की शहादत आने वाली पीढ़ियों को अत्याचार, बेइंसाफी और दमन के खिलाफ जूझने के लिए प्रेरित करती रहेगी। श्री आनंदपुर साहिब के ऐतिहासिक महत्व का हवाला देते हुए उन्होंने कहा, “इस पवित्र धरती पर श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने 13 अप्रैल 1699 को खालसा पंथ प्रकट किया था, जो इतिहास को नया मोड़ देने वाली घटना थी। इसी दिन हमारी सरकार ने बेअदबी के खिलाफ ऐतिहासिक कानून पास किया है।”मुख्यमंत्री ने यह भी चेताया कि श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी के 350 साला शहीदी दिवस के अवसर पर पंजाब विधानसभा का विशेष सत्र श्री आनंदपुर साहिब में बुलाया गया। उन्होंने कहा कि इतिहास में यह पहला अवसर है, जब पंजाब विधानसभा गुरु साहिब के चरणों में नतमस्तक हुई। इस विशेष सत्र के दौरान विधानसभा ने अमृतसर, तलवंडी साबो और श्री आनंदपुर साहिब को पवित्र शहर का दर्जा देने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पास किया।”
पंजाब में सिखी के आध्यात्मिक महत्व को उजागर करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि सिखों के पांच तख्तों में से तीन – श्री अकाल तख्त साहिब (अमृतसर), श्री दमदमा साहिब (तलवंडी साबो) और तख्त श्री केसगढ़ साहिब (श्री आनंदपुर साहिब) – पंजाब में पड़ते हैं। उन्होंने कहा, “लोगों की लंबे समय से लटकती मांग को ध्यान में रखते हुए पंजाब सरकार ने इन शहरों को पवित्र शहर का दर्जा दिया है। इन शहरों के समग्र विकास के लिए कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी जाएगी और इस कार्य के लिए फंडों की कोई कमी नहीं है।”
यात्रा के दौरान कैबिनेट मंत्री हरजोत सिंह बैंस और कई अन्य हस्तियां भी मौजूद थीं।
National
सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या 33 से बढ़ाकर 37 करने को कैबिनेट की मंजूरी
केंद्र सरकार ने न्यायपालिका से जुड़ा एक अहम फैसला लेते हुए भारत का सर्वोच्च न्यायालय में जजों की संख्या बढ़ाने को मंजूरी दे दी है। इस फैसले के तहत अब जजों की कुल संख्या 33 से बढ़ाकर 37 की जाएगी।
यह बढ़ोतरी करीब छह साल बाद की जा रही है। इससे पहले 2019 में जजों की संख्या 31 से बढ़ाकर 33 की गई थी। सरकार के अनुसार इस कदम का मुख्य उद्देश्य अदालत में लंबित मामलों की संख्या कम करना और न्याय प्रक्रिया को तेज करना है।
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि इस समय सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस सहित 34 जज कार्यरत हैं। नए प्रस्ताव को लागू करने के लिए संसद के आगामी सत्र में बिल पेश किया जाएगा। बिल पास होने के बाद जजों की संख्या 37 हो जाएगी।
मौजूदा समय में सुप्रीम कोर्ट में 92 हजार से अधिक मामले लंबित हैं, जिससे न्याय व्यवस्था पर काफी दबाव बना हुआ है। सरकार का मानना है कि जजों की संख्या बढ़ने से मामलों की सुनवाई में तेजी आएगी और लोगों को जल्दी न्याय मिल सकेगा।
इतिहास पर नजर डालें तो सुप्रीम कोर्ट (जजों की संख्या) अधिनियम, 1956 के तहत शुरुआत में चीफ जस्टिस के अलावा सिर्फ 10 जजों का प्रावधान था। समय के साथ मामलों की बढ़ती संख्या को देखते हुए यह संख्या कई बार बढ़ाई गई—1960 में 13, बाद में 17, 1986 में 25, 2009 में 30 और 2019 में 33 की गई थी।
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 124 के अनुसार सुप्रीम कोर्ट के जजों की संख्या संसद तय करती है और जरूरत के अनुसार इसमें बदलाव किया जा सकता है।
हालांकि, कई कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि केवल जजों की संख्या बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है। न्याय प्रणाली को प्रभावी बनाने के लिए प्रशासनिक सुधार और तकनीक का बेहतर उपयोग भी उतना ही जरूरी है।
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