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पंजाब में 26 मई को सरकारी छुट्टी घोषित, नोटिफिकेशन जारी
पंजाब में 26 मई को होने जा रहे नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायत चुनावों को लेकर पंजाब सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। चुनाव प्रक्रिया को शांतिपूर्ण और सुचारु ढंग से संपन्न कराने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने 26 मई को सरकारी छुट्टी घोषित की है।
पंजाब सरकार के पर्सोनल विभाग द्वारा जारी नोटिफिकेशन के अनुसार यह अवकाश राज्य के सभी सरकारी कार्यालयों, बोर्डों, निगमों और शैक्षणिक संस्थानों में लागू रहेगा। इसके अलावा चंडीगढ़ स्थित पंजाब सरकार के कार्यालयों और संस्थानों में भी यह छुट्टी प्रभावी होगी।
सरकार का कहना है कि यह निर्णय लोगों को अधिक से अधिक संख्या में मतदान के लिए प्रेरित करने और उन्हें अपने मताधिकार का प्रयोग करने का अवसर देने के लिए लिया गया है। यह अवकाश नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट, 1881 के तहत घोषित किया गया है।
इस संबंध में पंजाब के मुख्य सचिव के.ए.पी. सिन्हा द्वारा आधिकारिक आदेश जारी कर दिए गए हैं। सरकार ने प्रदेशवासियों से अपील की है कि वे लोकतंत्र के इस महत्वपूर्ण पर्व में बढ़-चढ़कर भाग लें और अपने वोट का अवश्य इस्तेमाल करें।
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पंजाब को जल्द मिल सकता है नया स्थायी DGP, तीन नामों पर चर्चा
पंजाब के नए स्थायी डीजीपी की नियुक्ति को लेकर लंबे समय से चल रहा इंतजार अब जल्द खत्म हो सकता है। सूत्रों के मुताबिक, राज्य को नया स्थायी पुलिस प्रमुख मिलने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है और इस संबंध में जल्द ही आधिकारिक घोषणा होने की संभावना है।
जानकारी के अनुसार, नए डीजीपी की नियुक्ति के लिए तीन वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के नामों का पैनल तैयार किया गया है। इस पैनल में मौजूदा कार्यवाहक डीजीपी गौरव यादव, वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी सरस्वती चौहान और हरप्रीत सिंह सिद्धू के नाम शामिल बताए जा रहे हैं।
इससे पहले पंजाब सरकार ने नियमों के अनुसार वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के नामों का पैनल संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) को भेजा था। यूपीएससी योग्य अधिकारियों के नामों की सिफारिश करता है, जिसके बाद राज्य सरकार उनमें से एक अधिकारी को स्थायी डीजीपी नियुक्त करती है।
फिलहाल पंजाब पुलिस की कमान कार्यवाहक डीजीपी गौरव यादव के हाथों में है। हालांकि, पंजाब को पिछले कई वर्षों से स्थायी डीजीपी नहीं मिला है, जिसके चलते इस पद को लेकर लगातार चर्चा होती रही है।
अब उम्मीद जताई जा रही है कि यूपीएससी की ओर से अनुशंसित पैनल में शामिल किसी एक अधिकारी के नाम को मंजूरी देकर पंजाब सरकार जल्द ही नए स्थायी डीजीपी की नियुक्ति का ऐलान कर सकती है।
हालांकि, सरकार की ओर से अभी तक किसी एक नाम की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। अंतिम मंजूरी और सरकारी अधिसूचना जारी होने के बाद ही पंजाब के नए स्थायी डीजीपी के नाम पर आधिकारिक मुहर लगेगी।
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भगवंत मान सरकार ने जसवंत सिंह खालड़ा मर्डर केस के दोषियों की समय से पहले रिहाई से जुड़ी किसी भी फाइल पर साइन नहीं किया- बलतेज पन्नू
आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब के स्टेट मीडिया इंचार्ज बलतेज पन्नू ने विरोधियों पर हमला बोलते हुए कहा कि स्वर्गीय जसवंत सिंह खालड़ा केस के मुख्य आरोपी पूर्व डीएसपी जसपाल सिंह की माफी और समय से पहले रिहाई के बारे में सोशल मीडिया और कुछ कथित तौर पर जिम्मेदार मीडिया हाउस द्वारा फैलाई जा रही खबरें पूरी तरह से झूठी, मनगढ़ंत और पंजाब की मान सरकार को बदनाम करने की गहरी साजिश है।
गुरुवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए बलतेज पन्नू ने साफ किया कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने ऐसी किसी फाइल पर साइन नहीं किए हैं और न ही पंजाब सरकार के लेवल पर ऐसी किसी फाइल पर कोई प्रोसेस हुआ है। यह पूरा मामला सीधे तौर पर केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन है, जिसमें राज्य सरकार का कोई रोल नहीं है। यह अकाली दल (बादल) और उनके सोशल मीडिया सेल हैं जो अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन और पिछले पापों को छिपाने के लिए साफ झूठ फैला रहे हैं।
बलतेज पन्नू ने मीडिया के सामने तथ्य और आंकड़े पेश करते हुए साफ किया कि पूरे केस की जांच सेंट्रल एजेंसी सीबीआई ने की थी। नए कानूनी प्रोविज़न (सेक्शन 477 बीएनएसएस / 435 सीआरपीसी) के तहत, सीबीआई केस में किसी भी आरोपी की समय से पहले रिहाई पर फैसला लेने का अधिकार राज्य सरकार के पास नहीं है।
उन्होंने कहा कि आरोपी जसपाल सिंह ने खुद 2017 में समय से पहले रिहाई के लिए सेंट्रल गृह मंत्रालयमें अप्लाई किया था, जिसे एमएचए और 2018 में उस समय के राज्यपाल ने रद्द कर दिया था। इसके बाद 2019 और फिर 2023 में यह मामला पूरी तरह से केंद्र सरकार लेवल पर ही चलता रहा।
पन्नू ने सवाल किया कि जब गृह मंत्रालय से पंजाब सरकार को ऐसी कोई फाइल आई नहीं, तो मुख्यमंत्री मान साहिब के हस्ताक्षर होने और फाइल राज्यपाल के ऑफिस में लंबित होने का दावा कैसे किया जा सकता है? ये ओल्ड स्कूल राजनीति करने वाले लोग, जिन्हें न तो गूगल चलाना आता है और न ही एआई या चैटजीपीटी जैसे आधुनिक टूल्स की जानकारी है, केवल सनसनी फैलाने के लिए झूठा प्रचार कर रहे हैं।
शिरोमणि अकाली दल (बादल) को ‘अकाली दल बेअदबी’ का नाम देते हुए पन्नू ने उसके दोहरे चरित्र पर बड़ा हमला बोला। सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही बीबी परमजीत कौर खालड़ा के हालिया बयान का ज़िक्र करते हुए, उन्होंने कहा कि आज अकाली दल का असली चेहरा जनता के सामने आ गया है।
बीबी खालड़ा ने खुद साफ़ किया हैं कि 1996 में उनके पूरे परिवार और ह्यूमन राइट्स विंग ने बादल दल की इस उम्मीद में मदद की थी कि सरकार सत्ता में आने पर वे शहीद जसवंत सिंह खालड़ा को ढूंढने और दोषियों को सज़ा दिलाने में मदद करेंगे। लेकिन 1997 में, जैसे ही सरकार बनी, प्रकाश सिंह बादल ने मदद करने के बजाय बीबी खालड़ा को जवाब दिया कि ‘बीबा जी, जो चेयरमैनशिप लेनी है, ले लो और अपने बच्चों को पाल लो, अब इस मामले में क्या रखा है।’ पन्नू ने कहा कि सच कमीशन बनाने और दोषियों को सज़ा दिलाने का वादा करने वाले बादलों ने सरकार आते ही उन हत्यारे अफ़सरों को ऊँचे पदों से नवाज़ा।
बलतेज पन्नू ने कहा कि हाल ही में ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज़ हुई फिल्म ‘सतलुज’ को किस तरह कुछ ही घंटों में भाजपा की केंद्र सरकार ने हटवाया, उससे साफ़ है कि कांग्रेस, अकाली दल और भाजपा मिलकर उस काले दौर की सच्चाई को दबाना चाहते हैं। लेकिन आज की जागरूक पीढ़ी सब जानती है। अकाली दल अपनी नाकामी और धोखे को छिपाने के लिए सुबह-सुबह सोशल मीडिया पर जो झूठ का पुलिंदा फैलाता है, वह अब नहीं चलेगा।
पन्नू ने बिना जांच-पड़ताल किए यह फेक न्यूज़ छापने वाले मीडिया हाउस को भी आड़े हाथों लिया और चेतावनी दी कि गलत फैक्ट्स पर आधारित खबरें कानून के दायरे में आती हैं। एक ज़िम्मेदार पार्टी प्रतिनिधि के तौर पर उन्होंने पंजाब सरकार से अपील की है कि ऐसी अफवाहें फैलाने और झूठी खबरें छापने वालों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि पंजाब के अमन-चैन और सरकार की पार्दशिता को नुकसान पहुंचाने वाले तत्वों को कड़ा सबक मिल सके।
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पंजाब की वोटर लिस्ट से किसी भी असली वोटर का नाम नहीं हटाया जाना चाहिए, आप के कार्यकर्ता हर नागरिक की मदद के लिए तैयार हैं: अमन अरोड़ा
आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब के प्रधान और कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने गुरुवार को पंजाब के लोगों से अपील की कि वे भारत के चुनाव आयोग द्वारा किए जा रहे वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें। उन्होंने कहा कि हर योग्य वोटर को अपना वेरिफिकेशन प्रक्रिया पूरा करना चाहिए ताकि यह पक्का हो सके कि उनके वोटिंग अधिकार सुरक्षित रहें और उन्हें पंजाब सरकार की अलग-अलग भलाई की योजनाओं का फायदा मिलता रहे।
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में, आप पंजाब के प्रधान अमन अरोड़ा ने कहा कि एसआईआर अभ्यास एक पूरी वेरिफिकेशन प्रक्रिया है जिसका मकसद वोटर रोल को अपडेट करना है। उन्होंने पंजाब के हर वोटर से अपील की कि वे प्रशासन के साथ सहयोग करें और तय तारीख से पहले ज़रूरी फॉर्मैलिटी पूरी करें।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की लीडरशिप वाली पंजाब सरकार द्वारा शुरू की गई लगभग हर भलाई की योजना लाभपात्री की राज्य के रजिस्टर्ड वोटर के तौर पर पहचान से जुड़ी है। उन्होंने कहा, “चाहे वह ‘माँ बेटी सत्कार योजना’ हो, 10 लाख रुपये की हेल्थ इंश्योरेंस स्कीम हो, राशन/खाने से जुड़े भलाई के प्रोग्राम हों या अलग-अलग पेंशन स्कीम हों, इन सभी का फायदा पंजाब के उन योग्य निवासियों को मिलता है जिनकी पहचान सही तरीके से वेरिफाई हो चुकी है।”
अमन अरोड़ा ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने भी लोगों से अपील की थी कि वे पक्का करें कि उनका नाम वोटर लिस्ट में रहे। उन्होंने कहा, “भगवंत मान सरकार ने पिछले साढ़े चार सालों में कई लोगों के भले के लिए योजनाएं शुरू की हैं। हम चाहते हैं कि हर सही फायदा उठाने वाले को बिना किसी रुकावट के ये फायदे मिलते रहें। इसलिए, यह बहुत ज़रूरी है कि हर असली वोटर वेरिफिकेशन प्रक्रिया पूरा करे और अपना वोट सुरक्षित करे।”
इस सुधार प्रक्रिया पर चिंता जताते हुए, अमन अरोड़ा ने कहा कि भाजपा ने पहले भी दूसरे राज्यों में राजनीतिक फायदे के लिए ऐसे तरीकों का गलत इस्तेमाल किया है। उन्होंने साफ किया कि आप नहीं चाहती कि पंजाब में एक भी असली वोटर अपना वोट देने का हक खोए।
उन्होंने सभी नागरिकों से अपील की कि वे इस काम को सिर्फ वोटर वेरिफिकेशन प्रक्रिया के तौर पर न देखें, बल्कि इसे पंजाब सरकार की तरफ से दी जा रही भलाई की योजनाओं और पब्लिक सर्विस तक उनकी लगातार पहुंच पक्की करने के लिए एक ज़रूरी कदम समझें।
अमन अरोड़ा ने आगे बताया कि आप ने लोगों को वेरिफिकेशन प्रक्रिया पूरा करने में मदद करने के लिए पूरे पंजाब में बूथ लेवल एजेंट (बीएलए-1 और बीएलए-2) तैनात किए हैं। उन्होंने कहा, “आप के कार्यकर्ता बूथ लेवल पर वोटरों की किसी भी डॉक्यूमेंट्री या प्रक्रिया से जुड़ी ज़रूरतों में मदद करने के लिए मौजूद हैं, ताकि कोई भी असली वोट न कट जाए।”
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