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क्या मजबूरी है Jayant Chaudhary की? जो हरियाणा में हैंडपंप गाड़ने से अपने कदम पीछे खींचे

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Jayant Chaudhary ने जम्मू-कश्मीर में चुनाव लड़ने का फैसला करके कई लोगों को चौंका दिया। यह असामान्य है कि वह हरियाणा में किसी भी पद के लिए चुनाव नहीं लड़ेंगे, जबकि वह जम्मू-कश्मीर में चुनाव लड़ने के लिए तैयार हैं, जो कि बहुत दूर है। इससे यह सवाल उठने लगा है कि क्या हरियाणा में भाग न लेने के पीछे उनके पास कोई ठोस कारण था या यह उनकी पार्टी या सत्तारूढ़ पार्टी भाजपा की किसी बड़ी योजना का हिस्सा है। कई लोग उनके विकल्पों के बारे में उत्सुक हैं और इस बात से परेशान हैं कि वह हरियाणा, खासकर कुरुक्षेत्र से दूर होते जा रहे हैं। देश में हर कोई हरियाणा में हो रहे चुनावों पर करीब से नज़र रख रहा है।

सभी राजनीतिक दल चुनाव लड़ने के लिए तैयार हैं, लेकिन एक महत्वपूर्ण व्यक्ति इस लड़ाई में शामिल नहीं हो रहा है। वह व्यक्ति जयंत चौधरी हैं, जो राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी) के नेता और सरकार में मंत्री हैं। लोग हैरान हैं कि वह हरियाणा में मदद क्यों नहीं कर रहे हैं, खासकर तब जब उन्होंने वहां हैंडपंप लगाने का काम बंद कर दिया है। कुछ लोगों का मानना ​​है कि ऐसा इसलिए हो सकता है क्योंकि वह हाल ही में किसानों से कम जुड़े हैं, यही वजह हो सकती है कि वह हरियाणा में चुनाव नहीं लड़ रहे हैं।

राजनीति में हमेशा कुछ न कुछ अहम कारण होते हैं और हरियाणा चुनाव के दौरान हैंडपंप का इस्तेमाल न करना भी इसी का हिस्सा है। हमने रालोद पार्टी के नेता त्रिलोक त्यागी से बात की और उन्होंने बताया कि वे अकेले चुनाव लड़ने के बजाय भाजपा पार्टी के साथ मिलकर काम करने की योजना बना रहे हैं। भाजपा ने हरियाणा चुनाव में अकेले लड़ने का फैसला किया और रालोद ने भी इस विकल्प पर सहमति जताई। इसी तरह, जब रालोद ने जम्मू-कश्मीर में अकेले चुनाव लड़ना चाहा तो भाजपा ने उनका समर्थन किया। अब रालोद जम्मू-कश्मीर में 12 चुनावी सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए काफी मेहनत कर रही है।

जब राजनीति की बात आती है, तो फैसले वाकई बहुत मायने रखते हैं। रालोद पार्टी ने हरियाणा में चुनाव लड़ने के लिए किसी को नहीं चुना और लोग हैरान हैं कि ऐसा क्यों किया गया। हमने रालोद का नेतृत्व करने वाले राजेंद्र शर्मा से इस बारे में पूछा। उन्होंने बताया कि उनके नेता जयंत चौधरी बड़े फैसले लेने से पहले बहुत सोच-समझकर फैसला लेते हैं। यह उनके लिए एक अहम फैसला है और राजनीति में हर फैसले के पीछे कोई न कोई वजह होती है। अभी आरएलडी बीजेपी पार्टी के साथ मिलकर काम कर रही है, इसलिए उन्होंने अपने चुनाव लड़ने के बजाय बीजेपी को चुनाव जीतने पर ध्यान केंद्रित करने में मदद करने का फैसला किया। यही कारण है कि आरएलडी हरियाणा में चुनाव में भाग नहीं ले रही है और बीजेपी अकेले ही चुनाव लड़ रही है।

हरियाणा में बड़े चुनावी युद्ध के लिए हर कोई तैयार हो रहा है, लेकिन जयंत एक्शन से गायब दिख रहे हैं। हमने पुष्पेंद्र शर्मा नाम के एक रिपोर्टर से बात की, जिन्होंने बताया कि जयंत चौधरी अभी बीजेपी पार्टी के साथ बातचीत करने की मजबूत स्थिति में नहीं हैं। बीजेपी के अपने नियम हैं और अगर वे साथ मिलकर काम करते हैं तो जयंत को उनका पालन करना होगा। इसके अलावा, कई किसान और जाट (हरियाणा में लोगों का एक समूह) इस बात से नाराज़ हैं कि जयंत ने उनके आंदोलन का मज़बूती से समर्थन नहीं किया है। इस वजह से, जयंत कोई ऐसा फ़ैसला नहीं लेना चाहते जिससे राजनीति में उनके भविष्य को नुकसान पहुँचे, इसलिए उन्होंने बीजेपी के अकेले चुनाव लड़ने के फ़ैसले का समर्थन करने का फ़ैसला किया। यही वजह है कि जयंत अभी हरियाणा में चुप हैं।

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अब शादी के लिए मजबूर नहीं कर सकते माता-पिता, पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

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पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता और अपनी पसंद से विवाह करने के अधिकार को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि कोई भी माता-पिता या रिश्तेदार किसी बालिग व्यक्ति को उसकी इच्छा के विरुद्ध शादी करने के लिए मजबूर नहीं कर सकते।

जस्टिस दीपक गुप्ता ने एक एमबीए छात्रा की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि शादी करना है या नहीं, कब करनी है और किससे करनी है, यह पूरी तरह से व्यक्ति का निजी निर्णय है। यह अधिकार भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्रदत्त जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का हिस्सा है।

याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि वह नौकरी और उच्च शिक्षा के कारण स्वतंत्र रूप से रह रही है, लेकिन उसके माता-पिता, मामा और अन्य रिश्तेदार उस पर अपनी पसंद के व्यक्ति से विवाह करने का लगातार दबाव बना रहे हैं।

अदालत ने कहा कि विवाह किसी व्यक्ति के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण निजी निर्णय होता है और इस मामले में किसी भी प्रकार का बाहरी दबाव या जबरदस्ती स्वीकार नहीं की जा सकती। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि किसी भी व्यक्ति को उसकी इच्छा के खिलाफ विवाह के बंधन में नहीं बांधा जा सकता।

हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में राज्य की जिम्मेदारी है कि वह नागरिकों के जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की सुरक्षा सुनिश्चित करे।

मामले का निपटारा करते हुए अदालत ने मोहाली के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) या उनके द्वारा अधिकृत अधिकारी को छात्रा की शिकायत पर विचार करने, खतरे का आकलन करने और यदि उसकी जान या स्वतंत्रता को वास्तविक खतरा हो तो तत्काल सुरक्षा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।

इस फैसले को बालिग व्यक्तियों के अपनी पसंद से जीवनसाथी चुनने और स्वतंत्र रूप से जीवन जीने के संवैधानिक अधिकार को मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है।

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भीषण गर्मी के चलते हरियाणा में स्कूल बंद, छुट्टियों का ऐलान

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हरियाणा के स्कूली बच्चों के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। प्रदेश में पड़ रही भीषण गर्मी और लगातार बढ़ते तापमान को देखते हुए हरियाणा सरकार ने गर्मियों की छुट्टियों का ऐलान कर दिया है। मुख्यमंत्री द्वारा शिक्षा विभाग के साथ बैठक करने के बाद यह फैसला लिया गया।

अब हरियाणा के सरकारी और प्राइवेट स्कूलों में 25 मई से 30 जून तक गर्मियों की छुट्टियां रहेंगी। पहले ये छुट्टियां 1 जून से शुरू होनी थीं, लेकिन मौसम विभाग द्वारा जारी हीटवेव और लू के अलर्ट के बाद सरकार ने छुट्टियां एक सप्ताह पहले करने का निर्णय लिया है।

मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में तापमान और बढ़ सकता है तथा कई इलाकों में लू चलने की संभावना है। इसे ध्यान में रखते हुए बच्चों की सेहत और सुरक्षा के लिए यह अहम कदम उठाया गया है। शिक्षा मंत्री और शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ चर्चा के बाद मुख्यमंत्री सैनी ने छुट्टियों के फैसले को मंजूरी दी।

गौरतलब है कि इससे पहले चंडीगढ़ प्रशासन ने भी बढ़ती गर्मी को देखते हुए सरकारी और प्राइवेट स्कूलों में छुट्टियों का ऐलान किया था। अब हरियाणा सरकार ने भी इसी तरह का फैसला लेते हुए विद्यार्थियों को गर्मी से राहत दी है।

वहीं अभिभावकों ने भी सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है, क्योंकि पिछले कुछ दिनों से पड़ रही तेज गर्मी ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी थी। दोपहर के समय तेज धूप और गर्म हवाओं के कारण बच्चों की सेहत पर बुरा असर पड़ने का खतरा बढ़ गया था।

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हरियाणा CM नायब सैनी का दावा: बंगाल में भाजपा का एकतरफा माहौल, पंजाब में भी खिलेगा कमल

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भाजपा के प्रमुख स्टार प्रचारकों में शामिल हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का मानना है कि बंगाल चुनाव में पार्टी के पक्ष में एकतरफा माहौल है। दीदी जा रही हैं। जनता ने कमल खिलाने का मन बना लिया है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में किए जा रहे विकास कार्यों की चर्चा बंगाल में हर तरफ हो रही है। केंद सरकार की कल्याणकारी नीतियों को लोग पसंद कर रहे हैं। बंगाल के बाद पंजाब का नंबर है। वहां के लोगों ने भी कमल खिलाने का मन बना लिया है।

पहली बार गुरुग्राम में हुई कैबिनेट बैठक

बुधवार को हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक की अध्यक्षता करने के लिए साइबर सिटी पहुंचे मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने राजनीतिक विषयों पर किए गए सवालों के जवाब में कहा कि बंगाल का माहौल पूरी तरह बदला हुआ है। वहां की सरकार को लोगों ने पूरी तरह उखाड़ फेंकने का मन बना रखा है। जहां तक पंजाब का सवाल है तो वहां के काफी लोग उनसे मिलने आते रहते हैं।

कुछ दिन पहले भी काफी लोग मिलने पहुंचे थे। सभी वहां की सरकार से परेशान हैं। सभी चाहते हैं कि जल्द से जल्द पंजाब में कमल खिले। नारी शक्ति वंदन अधिनियम का विरोध कर विपक्ष ने देश की आधी आबादी को नाराज कर दिया है। कई देशों की जितनी आबादी नहीं है, उससे अधिक महिलाएं अपने देश में है।

इसके बाद भी उन्हें उनके अधिकारों से वंचित करने का प्रयास विपक्ष ने किया है। चुनावों में देश की जनता जवाब देगी। बंगाल या पंजाब ही नहीं बल्कि जहां पर भी चुनाव होंगे वहां महिलाएं विपक्ष को माफ नहीं करेंगी।

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