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हम पंजाब को देश का अग्रणी शिक्षा केंद्र बनाएंगे, हमारे बच्चों को कनाडा या ऑस्ट्रेलिया की ओर देखने की जरूरत नहीं रहेगी: CM भगवंत सिंह मान

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पंजाब के शिक्षा ढांचे में क्रांतिकारी बदलाव लाने के चार साल बाद भगवंत मान सरकार अब बड़े लक्ष्य पर नजर टिकाए बैठी है। इस लक्ष्य के तहत पंजाब को देश का अग्रणी शिक्षा केंद्र बनाना और इस पुरानी धारणा को बदलना है कि बेहतर शिक्षा सिर्फ विदेशों में ही मिल सकती है।

राष्ट्रीय शिक्षा रैंकिंग में केरल को पछाड़कर पंजाब द्वारा बड़ी छलांग, बोर्ड टॉपरों में लड़कियों के बढ़ते दबदबे और जेईई मेन में सरकारी स्कूलों के 359 विद्यार्थियों की सफलता का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि राज्य की ‘शिक्षा क्रांति’ के जमीनी स्तर पर सार्थक नतीजे सामने आने शुरू हो गए हैं।

आज यहां टैगोर थिएटर में ‘सितारे ज़मीन पर’ कार्यक्रम के दौरान 8वीं, 10वीं और 12वीं कक्षा में सभी जिलों से पहले तीन स्थान हासिल करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। इस दौरान संबोधन करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाब के सरकारी स्कूल अब पहचान के लिए संघर्ष नहीं कर रहे, बल्कि देश भर में उत्कृष्टता, आत्मविश्वास और अवसरों के नए मानदंड स्थापित कर रहे हैं।

इस कार्यक्रम की कुछ झलकियां ‘एक्स’ पर साझा करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने लिखा, “आज चंडीगढ़ में ‘सितारे ज़मीन पर’ कार्यक्रम के दौरान पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड की 8वीं, 10वीं और 12वीं कक्षा के होनहार टॉपरों को सम्मानित

करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। इस मौके पर मैंने शिक्षा विभाग को विशेष हिदायतें जारी कीं कि जन्म तिथि के आधार पर रैंक तय करने की बजाय बराबर अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को संयुक्त रूप से पहला स्थान दिया जाए। आज आपकी सरकार के सुहृदय प्रयासों से पंजाब के सरकारी स्कूल शिक्षा के क्षेत्र में केरल को भी पछाड़ रहे हैं।”

मुख्यमंत्री ने पोस्ट के अंत में कहा, “विद्यार्थियों के लिए मेरा संदेश साफ और स्पष्ट है कि जीवन में आप चाहे कितने भी सफल हो जाओ, हमेशा जमीन से जुड़े रहो। अपने अध्यापकों और माता-पिता का हमेशा सम्मान करो, क्योंकि एक विजेता को भी मेडल लेने के लिए झुकना पड़ता है। आपके सभी के उज्ज्वल और सफल भविष्य के लिए मेरी दिल से शुभकामनाएं।”

पंजाब भर के जिलों के शानदार प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित करने के लिए आयोजित ‘सितारे ज़मीन पर’ समागम के दौरान सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि राज्य की ‘शिक्षा क्रांति’ ने सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की इच्छाओं को बदल दिया है और उनके लिए अवसरों के नए रास्ते खोले हैं।

विद्यार्थियों को उनकी शानदार उपलब्धियों के लिए बधाई देते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “मैं उन सभी विद्यार्थियों को बधाई देता हूं जिन्होंने अपनी मेहनत और लगन से अपने माता-पिता, अध्यापकों और समाज का नाम रोशन किया है। अतीत में ऐसे समागम कभी नहीं आयोजित किए गए क्योंकि पिछली सरकारों ने शिक्षा, खासकर सरकारी स्कूलों की ओर कभी ध्यान नहीं दिया। पहले इन स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थी अक्सर परीक्षाओं में मुकाबला करने से हिचकते और असुरक्षित महसूस करते थे, लेकिन आज वे पूरे आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहे हैं और अपनी योग्यता साबित कर रहे हैं।”

शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए पंजाब सरकार के प्रयासों पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “हमारे अध्यापकों को विशेष प्रशिक्षण के लिए विदेश भेजा जा रहा है जहां वे आधुनिक शिक्षण प्रणालियां सीखते हैं। वापस आने के बाद वे इस ज्ञान को विद्यार्थियों और साथी अध्यापकों के साथ साझा करते हैं, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि शिक्षा का विश्व स्तरीय मानक पंजाब के कोने-कोने के क्लासरूम तक पहुंचे। यह नवीनतम पहल शिक्षा प्रणाली को पुनर्जीवित कर रही है और गुणात्मक बदलाव ला रही है जिसका सीधा फायदा विद्यार्थियों को हो रहा है। ये अध्यापक बदलाव के दूत के रूप में काम कर रहे हैं और पंजाब में शिक्षा क्रांति को मजबूत कर रहे हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “यह पहल अध्यापकों की निपुणता को निखारती है और उन्हें आधुनिक विधियों से लैस करती है ताकि विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों और अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों के लिए तैयार किया जा सके। नतीजे आज दिखाई दे रहे हैं क्योंकि पंजाब के विद्यार्थी विभिन्न क्षेत्रों में शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं और अपने परिवारों का नाम रोशन कर रहे हैं। मौजूदा युग हुनर का है, हमारी सरकार युवाओं को हुनर प्रशिक्षण प्रदान करने पर विशेष जोर दे रही है।”

विद्यार्थियों को जमीन से जुड़े रहने और मेहनत करते रहने के लिए प्रेरित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “तुम्हें जीवन में ग्रास-रूट्स (जमीन से जुड़ने) बनने की कोशिश करनी चाहिए न कि पैराशूट बनने की। ग्रास-रूट्स मेहनत और दृढ़ इरादे से जमीन से उठते हैं और दुनिया को जीतने के लिए आगे बढ़ते हैं। ऐसे मेहनती व्यक्तियों के लिए असीम अवसर होते हैं। दूसरी ओर पैराशूट वाले आसमान से नीचे उतरते हैं और उनका देर-सवेर गिरना तय होता है। तुम्हारा ध्यान हमेशा बुलंदी छूने पर होना चाहिए और हमारी सरकार तुम्हारे सपनों को साकार करने में हर संभव सहायता प्रदान करेगी।”

हवाई जहाज से तुलना करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “जिस तरह एक रनवे हवाई जहाज को सुचारू रूप से उड़ान भरने में सक्षम बनाता है, पंजाब सरकार विद्यार्थियों को ऐसे अवसरों के लिए तैयार कर रही है ताकि उनके सपनों को साकार करने में मदद मिले। हमारे युवाओं के विचारों को उड़ान भरने के लिए पंख देने की हर कोशिश की जा रही है और इस नेक कार्य में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी जा रही है। मैं हर युवा से अपील करता हूं कि मेहनत और लगन से अलग पहचान बनाएं क्योंकि तुम जो कुछ हासिल कर सकते हो उसकी कोई सीमा नहीं है।”

सफलता के बावजूद विद्यार्थियों को नम्र रहने की अपील करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “तुम्हें अपनी उपलब्धियों से कभी भी घमंडी नहीं होना चाहिए। आत्मविश्वास और सकारात्मक रहना जरूरी गुण हैं, लेकिन घमंड कभी भी सफलता के साथ नहीं आना चाहिए। नम्रता, मेहनत और दृढ़ता निरंतर सफलता की असली कुंजियां हैं और ये मूल्य हमेशा तुम्हारे सफर का मार्गदर्शन करती रहें।”

पंजाब की शानदार विरासत का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पंजाब न सिर्फ देश को अनाज देता है बल्कि देश की खड़गभुजा भी है। पंजाब के लोग अपनी बहादुरी, मेहनत और उद्यमी भावना के लिए पूरी दुनिया में जाने जाते हैं। इस पवित्र धरती का एक-एक इंच महान गुरुओं, संतों, पीरों-पैगंबरों और शहीदों की महान विरासत को समर्पित है जिन्होंने हमें बेइंसाफी, जुल्म और जबर के विरुद्ध खड़े होने की शिक्षा दी। पंजाब की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और नर्म मेहमाननवाजी को विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त है।”

उन्होंने आगे जोड़ा, “पंजाबी स्वभाव से ही अग्रणी रहने के गुण के मालिक हैं और उन्होंने हमेशा हर क्षेत्र में बुलंदी हासिल की है। यह बहुत गर्व की बात है कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम में पंजाबियों ने अग्रणी भूमिका निभाई और देश के लिए बेमिसाल कुर्बानियां दी।”

सभा को संबोधित करते हुए शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने कहा, “जब मैंने पद संभाला था तो पंजाब में लगभग चार लाख बच्चे फर्श पर बैठकर पढ़ रहे थे। आज पंजाब सरकार के प्रयासों से एक भी बच्चा फर्श पर बैठकर पढ़ने के लिए मजबूर नहीं है। पंजाब अब शिक्षा क्षेत्र से संबंधित लगभग हर राष्ट्रीय रिपोर्ट में शीर्ष स्थान हासिल कर रहा है।”

दिल्ली के पूर्व उप मुख्यमंत्री और पंजाब प्रभारी मनीष सिसोदिया ने देश की परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधारों की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “देश में पुरानी परीक्षा प्रणाली को बदलना चाहिए। नीट जैसी परीक्षाओं के लीक होने जैसी घटनाएं लाखों विद्यार्थियों के भविष्य को बर्बाद कर रही हैं। 19वीं सदी की सिस्टम पर भरोसा करने की बजाय परीक्षाएं विद्यार्थियों की समग्र योग्यता और क्षमताओं का मूल्यांकन करने वाली होनी चाहिए, न कि तीन घंटे की परीक्षा तक सीमित।”

मनीष सिसोदिया ने आगे कहा, “परीक्षा प्रणाली को 21वीं सदी के विद्यार्थियों की जरूरतों और योग्यताओं के मुताबिक ढाला जाना चाहिए ताकि उनकी समग्र व्यक्तित्व और क्षमता का विकास हो सके। इस बदलाव के लिए हमें शिक्षा को प्राथमिकता देने वाली और शिक्षा में निवेश करने वाली सरकारें चुननी चाहिए।”

इस मौके पर विद्यार्थियों ने विचार साझा किए कि पंजाब की ‘शिक्षा क्रांति’ उनके स्कूलों, विश्वास और ख्वाहिशों को कैसे नया रूप दे रही है।

इस समागम में भाग लेने वाले विद्यार्थियों ने शिक्षा को मजबूत करने के लिए पंजाब सरकार के प्रयासों की भरपूर प्रशंसा की। फरीदकोट जिले के जैतो से हरलीन शर्मा ने विद्यार्थियों को लगातार उत्साहित करने और उन्हें उत्कृष्टता हासिल करने के लिए हौसला अफजाई करने के लिए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान का धन्यवाद किया। श्री मुक्तसर साहिब जिले के सरकारी स्कूल रुपाणा के विद्यार्थी निखिल पांडे ने अपने अध्यापकों को समर्पित एक कविता पेश की और सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों को बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने के लिए प्रेरित करने के लिए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान का धन्यवाद किया।

लुधियाना से सुहानी चौहान ने कहा कि पंजाब सरकार की शिक्षा पहलकदमियों ने सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों के विश्वास को मजबूत किया है और उन्होंने विद्यार्थियों को सार्वजनिक प्लेटफॉर्म पर बोलने और विचार रखने के लिए उत्साहित करने के लिए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की सराहना की। ज़ीरा के एक सरकारी स्कूल की ग्यारहवीं कक्षा की विद्यार्थी अनमोलप्रीत कौर ने कहा कि पंजाब सरकार ने लड़कियों के लिए आवागमन की सुविधाएं प्रदान करके शिक्षा को अधिक सुलभ बनाया है। उन्होंने अपने स्कूल में एक लिफ्ट की स्थापना पर भी प्रकाश डाला और साझा किया कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने विद्यार्थियों को भरोसा दिलाया है कि वे जल्द ही स्कूल का दौरा करेंगे।

भगवंत मान सरकार की शिक्षा क्रांति ने शानदार नतीजे दिए

पंजाब की शिक्षा क्रांति ने पूरे राज्य में शानदार नतीजे देना शुरू कर दिए हैं। नीति आयोग के स्कूल शिक्षा मूल्यांकन में, पंजाब के सरकारी स्कूलों ने पारंपरिक रूप से बेहतर प्रदर्शन वाले कई राज्यों को पछाड़कर देश भर में शीर्ष स्थान प्राप्त किया है। इस साल स्कूल ऑफ एमिनेंस और अन्य सरकारी स्कूलों के 359 विद्यार्थियों ने जेईई मेन के लिए क्वालीफाई किया है, जबकि सरकार ने जेईई और नीट जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए मुफ्त कोचिंग देने के लिए कोचिंग संस्था ‘फिजिक्स वाला’ के साथ भी भागीदारी की है।

भगवंत मान सरकार ने लगभग 19,000 सरकारी स्कूलों में माता-पिता-शिक्षक मिलनी पहल शुरू की है, जिसने विद्यार्थियों के विकास पर ध्यान केंद्रित करने के लिए लगभग 25 लाख माता-पिता और 1.8 लाख से अधिक स्कूल स्टाफ को मिलनियों का मौका दिया। अन्य प्रमुख सुधारों में फिनलैंड और सिंगापुर में शिक्षकों के लिए विदेशी प्रशिक्षण कार्यक्रम, विद्यार्थियों के लिए आवागमन सुविधाएं और पंजाब के बच्चों को विश्व स्तरीय शिक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से स्कूल ऑफ एमिनेंस का विस्तार शामिल है।

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आर्मी पब्लिक स्कूलों में पंजाबी की पढ़ाई जारी रहेगी, संस्कृत लागू करने का फैसला वापस

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आर्मी पब्लिक स्कूलों में पंजाबी भाषा की पढ़ाई पहले की तरह जारी रहेगी। आर्मी वेलफेयर एजुकेशन सोसाइटी (AWES), जालंधर ने अपने उस पहले के फैसले को वापस ले लिया है, जिसमें स्कूलों में संस्कृत को अनिवार्य रूप से लागू करने की बात कही गई थी। अब छठी से आठवीं कक्षा तक के विद्यार्थी पहले की तरह अपनी मातृभाषा पंजाबी की पढ़ाई जारी रख सकेंगे।

इस फैसले का स्वागत करते हुए पंजाब चेतना मंच के अध्यक्ष डॉ. लखविंदर सिंह जौहल, महासचिव सतनाम सिंह मानक और संगठन सचिव प्रिंसिपल गुरमीत सिंह पलाही ने कहा कि नए नियमों के तहत छठी से आठवीं कक्षा के विद्यार्थियों को पंजाबी या संस्कृत में से किसी एक भाषा का चयन करने की स्वतंत्रता होगी। इसके साथ ही वे अंग्रेजी और हिंदी से जुड़े निर्धारित विषयों का भी चयन कर सकेंगे। उन्होंने बताया कि नौवीं कक्षा में अंग्रेजी, हिंदी और संस्कृत के विकल्प उपलब्ध रहेंगे, जबकि दसवीं कक्षा की व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

डॉ. जौहल ने पंजाबी भाषा को बचाने के लिए चलाए गए अभियान का समर्थन करने वाले सामाजिक संगठनों, बुद्धिजीवियों, विद्यार्थियों और अभिभावकों का धन्यवाद किया। उन्होंने भारत सरकार के राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व अध्यक्ष तरलोचन सिंह और राज्यसभा सदस्य संत बलबीर सिंह सीचेवाल का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए कहा कि केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को लिखे गए उनके पत्र ने इस मामले के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

इसके अलावा पंजाबी भाषा से जुड़े विभिन्न संगठनों और सामाजिक संस्थाओं ने भी लगातार इस मुद्दे को उठाया। कानूनी और सामाजिक स्तर पर किए गए प्रयासों के साथ-साथ केंद्रीय पंजाबी लेखक संघ के नेतृत्व में चंडीगढ़ में प्रदर्शन भी किए गए। पंजाब चेतना मंच ने पंजाब के मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री को भी पत्र लिखकर स्कूलों में पंजाबी भाषा को बनाए रखने की मांग की थी। अब इस फैसले को पंजाबी भाषा के संरक्षण और उसके अधिकारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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श्री गुरु हरिकृष्ण साहिब जी के प्रकाश पर्व पर श्री हरिमंदिर साहिब में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब

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श्री गुरु हरिकृष्ण साहिब जी के पावन प्रकाश पर्व के अवसर पर सचखंड श्री हरिमंदिर साहिब में श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत वातावरण देखने को मिल रहा है। पंजाब ही नहीं, बल्कि देश के विभिन्न राज्यों और विदेशों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु माथा टेकने के लिए पहुंच रहे हैं। श्रद्धालुओं ने पवित्र सरोवर में स्नान कर गुरबाणी कीर्तन का आनंद लिया और गुरु घर का आशीर्वाद प्राप्त किया।

श्री हरिमंदिर साहिब के मैनेजर गुरिंदर सिंह देवीदासपुरा ने समस्त संगत को प्रकाश पर्व की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि श्री गुरु हरिकृष्ण साहिब जी ने बहुत कम आयु में ही मानवता की सेवा, दया, विनम्रता और परोपकार का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि गुरु साहिब की शिक्षाएं आज भी पूरी मानवता को सेवा, प्रेम और करुणा का संदेश देती हैं। उन्होंने संगत से गुरु साहिब के उपदेशों को अपने जीवन में अपनाने और जरूरतमंदों की सेवा के लिए सदैव आगे आने की अपील की।

प्रकाश पर्व के विशेष अवसर पर रात्रि के समय सचखंड श्री हरिमंदिर साहिब में विशेष रोशनी और आतिशबाजी का आयोजन किया जाएगा। रोशनी से जगमगाता श्री हरिमंदिर साहिब श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगा और इस पावन पर्व की रौनक को और भी भव्य बना देगा।

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नीति आयोग की रैंकिंग में पंजाब ने केरल को पछाड़ा; शिक्षा मंत्री ने विधानसभा में चार सालों का रिपोर्ट कार्ड पेश किया

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प्रदेश में शिक्षा में ऐतिहासिक बदलाव का दावा करते हुए पंजाब के शिक्षा मंत्री स. हरजोत सिंह बैंस ने आज कहा कि पंजाब ने केरल को पछाड़कर ‘नीति आयोग स्कूल एजुकेशन क्वालिटी इंडेक्स 2026’ में शीर्ष स्थान हासिल किया है। जहां वर्ष 2022 में 8,000 स्कूलों में चारदीवारी नहीं थी और लगभग 4 लाख विद्यार्थी ताटों (चटाइयों) पर बैठकर पढ़ने को मजबूर थे, वहीं आज पंजाब के सरकारी स्कूलों के 882 विद्यार्थियों ने नीट परीक्षा पास की है और पंजाब पहली से 12वीं कक्षा तक ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ को मुख्य विषय के रूप में शुरू करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। यह वह बदलाव है जिसका वादा आप की अगुवाई वाली पंजाब सरकार ने किया था।

विधायक प्रो. जसवंत सिंह गज्जनमाजरा द्वारा लाए गए शिक्षा संबंधी प्रस्ताव पर बहस में भाग लेते हुए, स्कूल शिक्षा मंत्री स. हरजोत सिंह बैंस ने जुलाई 2022 में पदभार संभालने के समय स्कूलों की खराब स्थिति को याद करवाया।

बुनियादी ढांचे के प्रारंभिक सर्वेक्षण के नतीजों के बारे में बताते हुए स. बैंस ने कहा कि 8,000 से अधिक स्कूलों में चारदीवारी नहीं थी, 3,200 में उपयोग योग्य बाथरूम नहीं थे और लगभग 4 लाख बच्चे जमीन पर बैठने को मजबूर थे। पाठ्यपुस्तकें अक्टूबर-नवंबर में स्कूलों तक पहुंचती थीं, जिससे शैक्षणिक सत्र के कई महीने बर्बाद हो जाते थे।

किसी भी सरकारी शिक्षक से इसकी पुष्टि करने की चुनौती देते हुए उन्होंने आगे कहा, “अब वही पाठ्यपुस्तकें 15 फरवरी तक जिला मुख्यालयों तक पहुंच जाती हैं और 31 मार्च तक वितरित कर दी जाती हैं।”

अपने शासन मॉडल के बारे में बताते हुए स. बैंस ने कहा कि उन्होंने पंजाब के हर जिले के 2,000 से अधिक सरकारी स्कूलों का निजी तौर पर दौरा किया है, जिनमें सीमावर्ती स्कूल, जीरो-लाइन से सटे गांव और दूर-दराज के क्षेत्र शामिल हैं।

उन्होंने सदन को बताया कि सरकार का प्रमुख ‘मिशन समरथ’ भारत के सबसे बड़े बुनियादी शिक्षा कार्यक्रमों में से एक के रूप में उभरा है। इसके लेवल बेस्ड टीचिंग मॉडल के तहत, हर बच्चे को अच्छी तरह पढ़ना, लिखना और गणित सिखाना सुनिश्चित करने के लिए विद्यार्थियों को ग्रेड के बजाय उनकी सीखने की क्षमता के अनुसार समूहों में बांटा जाता है।

स. हरजोत बैंस ने कहा, “जब मैंने सितंबर-अक्टूबर 2022 में स्कूलों का दौरा किया, तो मैंने 8वीं कक्षा के ऐसे विद्यार्थी भी देखे जो सामान्य वाक्य भी नहीं लिख सकते थे। कुछ विद्यार्थी सामान्य जोड़ और घटाव नहीं कर सकते थे। हमने इन विद्यार्थियों की पहचान की और इन्हें तीसरी कक्षा के सिलेबस के स्तर से पढ़ाया। आज वे बहुत सुधार कर रहे हैं।” उन्होंने आगे बताया कि इस कार्यक्रम के तहत अब सालाना लगभग 12 लाख विद्यार्थियों और 70,000 से अधिक शिक्षकों को कवर किया जाता है।

सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों के प्रदर्शन में हुए सुधार के बारे में स. हरजोत बैंस ने सदन को बताया कि पंजाब के सरकारी स्कूलों से नीट-यू.जी. परीक्षा पास करने वालों की संख्या वर्ष 2021 में मात्र 80 से बढ़कर वर्ष 2026 में 882 हो गई है। उन्होंने कहा कि ये नतीजे ‘पंजाब अकादमिक कोचिंग फॉर एक्सीलेंस’ (पेस) पहल का स्पष्ट परिणाम हैं।

उन्होंने आगे कहा, “पंजाब सरकार की शिक्षा क्रांति ने विद्यार्थियों के लिए उम्मीद की नई किरण जगाई है।” स. बैंस ने आगे कहा कि मजीठा में सरकारी स्कूलों के छह विद्यार्थियों और दीनानगर में 17 विद्यार्थियों ने नीट परीक्षा पास की है। ये कोई प्राइवेट कोचिंग के आंकड़े नहीं, बल्कि हमारे सरकारी स्कूलों की महत्वपूर्ण उपलब्धियां हैं।

उन्होंने एक साधारण परिवार से संबंधित लड़की हरनूरप्रीत कौर का विशेष जिक्र किया, जिसने अपनी श्रेणी में ऑल इंडिया रैंक 3140 हासिल की, जो आज के सरकारी स्कूलों की काबिलियत को दर्शाता है।

विपक्ष पर निशाना साधते हुए उन्होंने पलटवार किया, “अगर आप चाहते हैं तो मुझे व्यक्तिगत तौर पर निशाना बनाएं। सरकारी स्कूलों को क्यों निशाना बना रहे हो? कुछ नकारात्मक सोच वाले लोगों द्वारा गढ़े गए झूठे प्रचार ने लोगों को पहले ही सरकारी स्कूलों से दूर कर दिया है।”

सरकारी स्कूलों में घटती दाखिला दर से संबंधित सवालों का जवाब देते हुए स. बैंस ने कहा कि यह रुझान सिर्फ पंजाब तक ही सीमित नहीं था, बल्कि कोविड के बाद देश भर में देखा गया है।

उन्होंने आगे कहा, “ऑल इंडिया आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों के दाखिले की संख्या 1.76 करोड़ तक घटी है। कोविड के दौरान, सरकारी स्कूलों में दाखिला वास्तव में बढ़ा था। परंतु उसके बाद, हर जगह यह संख्या घटी है।”

उदाहरण देते हुए स. बैंस ने कहा कि बिहार में 2.49 करोड़ विद्यार्थी थे, जो पहले घटकर 2.13 करोड़ रह गए और इस साल यह और घटकर 1.95 करोड़ रहने का अनुमान है। इसी तरह उत्तर प्रदेश में, यह संख्या पहले 4.44 करोड़ से घटकर 4.16 करोड़ हो गई है, जो इस साल 4.1 करोड़ रहने का अनुमान है। इसके अलावा महाराष्ट्र में यह संख्या 2.32 करोड़ से घटकर 2.13 करोड़ रह गई।

स. बैंस ने कहा, “उन्होंने भारत सरकार की 2023 में शुरू की गई अपार आई.डी. पहल का भी हवाला दिया। ‘अब हर विद्यार्थी के पास एक अनोखी आई.डी. है। पहले एक बच्चा छह स्कूलों में दाखिल होता था परंतु किसी में भी नहीं पढ़ रहा था। इसी कारण अब ये आंकड़े सही हो रहे हैं।’”

शिक्षा मंत्री ने विस्तार से बताया कि 19,125 सरकारी स्कूलों में 2,638 करोड़ रुपये के बुनियादी ढांचे के काम किए गए हैं। इस साल विश्व बैंक से और सुधारों के लिए 1,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त मंजूरी ली गई है।

स. हरजोत बैंस ने कई ‘स्कूल ऑफ एमिनेंस’ की सूची दी, जिनका पूरी तरह कायाकल्प किया गया है। उन्होंने लुधियाना के शहीद सुखदेव थापर के नाम पर बने स्कूल ऑफ एमिनेंस का हवाला दिया, जिसके बारे में उन्होंने कहा कि कभी इसे पूरी तरह उपेक्षित कर दिया गया था। उन्होंने कहा, “आज इस स्कूल को विश्व स्तरीय बनाने के लिए 18 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इस साल स्कूल के 17 विद्यार्थी नीट परीक्षा भी पास कर चुके हैं।”

उन्होंने आगे कहा कि भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार सरकारी स्कूलों को आखिरी विकल्प से पहली पसंद में बदल रही है। हम यहीं नहीं रुक रहे। हम हर साल और ऊंचे लक्ष्य निर्धारित कर रहे हैं।

स. बैंस ने कहा, “शिक्षकों को अब सरकारी स्कूल चलाने के लिए फंड मांगने की जरूरत नहीं। हमने स्कूलों के लिए आवश्यक फंड मुहैया करवाए हैं, पिछली सरकारों की तरह नहीं जब शिक्षकों को फंड मांगने जाना पड़ता था। अपमान का दौर अब खत्म हो गया है।”

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