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पंजाब में करप्शन के आरोप में विजिलेंस SSP सस्पेंड:अमृतसर में ₹55 करोड़ का टेंडर मामला; मजीठिया की अरेस्ट वाली टीम के हेड रह चुके

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पंजाब के अमृतसर में तैनात विजिलेंस के SSP लखबीर सिंह को सस्पेंड कर दिया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कंस्ट्रक्शन कंपनी के बाद किसी सीनियर IAS अफसर की शिकायत के बाद यह कार्रवाई हुई है। यह मामला 55 करोड़ के डेवलपमेंट के काम से जुड़ा बताया जा रहा है। जिसमें जांच पर सवाल उठ रहे थे। हालांकि सरकार की तरफ से अभी तक सस्पेंशन लेकर कोई औपचारिक आदेश सार्वजनिक नहीं हुए हैं।

लखबीर सिंह को इसी साल अप्रैल महीने में एसएसपी विजिलेंस लगाया गया था। खास बात ये है कि 25 जून 2025 को बिक्रम मजीठिया को गिरफ्तार करने वाली टीम के प्रमुख लखबीर सिंह ही थे। करीब 9 माह के भीतर ही उन्हें भ्रष्टाचार के आरोप में सस्पेंड कर दिया गया है।

इस बारे में विजिलेंस SSP लखबीर सिंह ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि न तो इसकी आधिकारिक पुष्टि हुई और न ही सरकार की तरफ से मुझे सस्पेंड करने का कोई आदेश जारी किया गया है। मुझे इंटरनेट और खबरों के जरिए ही मेरी सस्पेंशन का पता चला है।

अमृतसर विजिलेंस के SSP लखबीर सिंह।

अमृतसर विजिलेंस के SSP लखबीर सिंह।

वह मामला, जो SSP पर कार्रवाई से जुड़ा माना जा रहा अमृतसर के पॉश इलाके रणजीत एवेन्यू में 55 करोड़ के टेंडर को लेकर कई तरह के आरोप लगे थे। जिसमें कहा गया कि इस रकम से विकास का कोई काम नहीं हुआ। इसके उलट करोड़ों रुपए का घपला कर दिया गया। यह करोड़ों रुपया कई लोगों में बांटा गया। इसकी शिकायत सरकार तक पहुंची थी। उधर, पुलिस सोर्सेज के मुताबिक, इस मामले में एक समाजसेवी के खिलाफ भी रिपोर्ट दर्ज की गई है। इस मामले में औपचारिक जानकारी के बाद खबर अपडेट की जाएगी।

चहेतों को ठेका दिलाने से लेकर समाज सेवी की भूमिका भी संदिग्ध माना जा रहा है कि करोड़ों की लागत से सीवरेज और स्ट्रीट लाइट से जुड़ा काम कराया जाना था। इसमें चहेतों को ठेका दिलाने से लेकर समाज सेवी की भूमिका भी संदिग्ध मानी जा रही है। एक समाज सेवी संगठन की तरफ से भी इस बारे में DGP को शिकायत भेजी गई थी। करीब एक हफ्ते से इस मामले को लेकर अमृतसर में चर्चा चल रही थी लेकिन करप्शन पर इतनी बड़ी कार्रवाई के बावजूद AAP सरकार की तरफ से चुप्पी लोगों को अखर रही है।

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Punjab पुलिस के ‘युवा सांझ कार्यक्रम’ ने 2,358 भटके हुए युवाओं की Online पहचान कर उन्हें गैंगस्टरों के प्रभाव में आने से बचाया

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कम्युनिटी पुलिसिंग को अगले स्तर पर ले जाते हुए पंजाब पुलिस ने अपने ‘युवा सांझ कार्यक्रम’ के तहत भटके हुए युवाओं तक पहुंच को और तेज किया है। यह पहल ‘गैंगस्टरों पर वार’ अभियान के तहत संगठित अपराध के खिलाफ चल रही कार्रवाई के साथ-साथ एक अहम भूमिका निभा रही है। जनवरी से अब तक, कम्युनिटी अफेयर्स डिवीजन (सी.ए.डी.) की स्पेशल डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस गुरप्रीत कौर देओ के नेतृत्व में कई बैठकें आयोजित की गई हैं, जिनका उद्देश्य अधिकारियों और सामुदायिक भागीदारों को कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन के बारे में जागरूक करना है।

‘गैंगस्टरों ते वार’ के निवारक पहलू के रूप में स्थापित यह कार्यक्रम युवाओं को आतंकवाद, गन कल्चर, नशाखोरी और अन्य नकारात्मक प्रभावों से दूर रखने के लिए सकारात्मक विकल्प प्रदान करता है। पिछले चार महीनों में पांच संवाद सत्र आयोजित किए गए हैं और अगले आठ महीनों में 11 और सत्र आयोजित करने की योजना है, ताकि इसकी पहुंच का दायरा और बढ़ाया जा सके।

इस पहल के तहत पंजाब पुलिस सामुदायिक स्तर पर उन युवाओं की पहचान करती है, जो ऑनलाइन आतंकवाद, हिंसा या गैंगस्टर संस्कृति से प्रभावित हो सकते हैं। अब तक 2,358 युवाओं की पहचान सोशल मीडिया विश्लेषण के माध्यम से की गई है, जिनमें से 1,519 की प्रोफाइल राज्य स्तरीय ‘युवा सांझ सॉफ्टवेयर’ पर तैयार की गई हैं।

पंजाब के डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस गौरव यादव ने कहा, “पंजाब पुलिस एक संतुलित दो-आयामी रणनीति पर काम कर रही है—‘गैंगस्टरों ते वार’ के माध्यम से सख्त कार्रवाई और ‘युवा सांझ’ के माध्यम से लगातार संपर्क व निगरानी। मनोवैज्ञानिक प्रोफाइलिंग, संरचित काउंसलिंग और परिवार की भागीदारी इस पहल का आधार हैं। जिन मामलों में गहन हस्तक्षेप की आवश्यकता होती है, उन्हें उप-मंडल स्तर के सामुदायिक केंद्रों को भेजा जाता है ताकि निरंतर देखभाल सुनिश्चित की जा सके। हमारा उद्देश्य स्पष्ट है—अपराधी नेटवर्क को तोड़ना और युवाओं को उनसे दूर रखना।”

अब तक 1,490 युवाओं को जागरूक किया गया है, जबकि 1,109 ने काउंसलिंग सत्रों में भाग लिया है। कुल मिलाकर 1,836 युवाओं की जिला खुफिया इकाइयों द्वारा काउंसलिंग की गई है, जबकि जिला टीमों द्वारा 522 अन्य ऐसे युवाओं की पहचान की गई है।

जमीनी स्तर पर, जिला ‘युवा सांझ’ समितियों का नेतृत्व कमिश्नर ऑफ पुलिस/सीनियर सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस द्वारा नामित सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस/डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस रैंक के अधिकारी करते हैं। इन समितियों के माध्यम से सिविल सोसायटी के सदस्य, सेवानिवृत्त अधिकारी, मनोवैज्ञानिक, एनजीओ और सामुदायिक प्रतिनिधि मिलकर समन्वित कार्रवाई सुनिश्चित करते हैं।

स्पेशल डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस गुरप्रीत कौर देओ ने कहा, “जहां ‘गैंगस्टरों ते वार’ का उद्देश्य संगठित अपराध को समाप्त करना है, वहीं ‘युवा सांझ’ का उद्देश्य भटके हुए युवाओं की प्रारंभिक पहचान कर उन्हें सही मार्ग पर लाना है। हम आवश्यकता के अनुसार सख्ती या नरमी से पेश आते हैं, ताकि समय रहते हस्तक्षेप कर किसी युवा के जीवन की दिशा बदली जा सके।”

पुनर्वास की व्यवस्था सीपी/एसएसपी के नेतृत्व में जिला प्रशासन, पंजाब स्किल डेवलपमेंट मिशन और अन्य साझेदार संस्थाओं के सहयोग से की जाती है। इसमें कौशल विकास, रोजगार से जोड़ना और आवश्यकता अनुसार वित्तीय सहायता शामिल है, ताकि युवाओं को नकारात्मक प्रभावों से दूर रखकर स्थिर और खुशहाल जीवन की ओर प्रेरित किया जा सके।

फाजिल्का के एसएसपी गुरमीत सिंह ने कहा,“इस पहल ने न केवल जमीनी स्तर पर अपराध दर को कम करने में मदद की है, बल्कि राज्य के युवाओं को असामाजिक तत्वों के साथ जुड़ने से भी रोका है। यह देश में किसी भी राज्य पुलिस द्वारा शुरू की गई अपनी तरह की एक अनोखी पहल हो सकती है। पंजाब पुलिस ने युवाओं को अपने भ्रम दूर करने और वास्तविकता से रूबरू होने के लिए एक बड़ा मंच प्रदान किया है।”

उन्होंने आगे कहा,“हमारे जिले में ही हमने कानून का पालन करने वाले युवाओं का एक मजबूत समूह तैयार किया है, जो राज्य की ताकत को और मजबूत करता है।

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Politics

बेअदबी के दोषियों को बचाने वाले पुराने शासक जल्द सलाखों के पीछे होंगे: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान

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पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज घोषणा की कि पिछली सरकारों के दौरान श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी के दोषियों को बचाने वालों को जल्द ही सलाखों के पीछे भेजा जाएगा। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार ने अब ऐतिहासिक ‘जगत ज्योत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) एक्ट, 2026’ के माध्यम से श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी के दोषियों के लिए सख्त कानूनी सजा सुनिश्चित की है।

शुक्राना यात्रा के दौरान विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि यह कानून बेअदबी के खिलाफ स्थायी रोक के रूप में काम करेगा और यह सुनिश्चित करेगा कि कोई भी पंजाब की शांति और भाईचारे को भंग करने की हिम्मत न करे। कानून लागू कर मानवता की सेवा करने का अवसर मिलने पर उन्होंने परमात्मा का धन्यवाद करते हुए कहा, “मेरा रोम-रोम परमात्मा का ऋणी है कि उसने मुझे ‘जगत ज्योत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) एक्ट 2026’ लागू करने की सेवा बख्शी, जो बेअदबी के लिए सख्त सजा का प्रावधान करता है।”

उन्होंने लोगों से अपील की कि वे गांव-गांव जाकर इस कानून के बारे में जागरूकता फैलाएं और यह सुनिश्चित करें कि हर व्यक्ति को पता हो कि बेअदबी में शामिल किसी भी व्यक्ति को अब सख्त सजा का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने आगे कहा, “सजा के डर से अकाली नेता सुखबीर सिंह बादल सहित विपक्ष के कई शीर्ष नेता पहले ही भाग रहे हैं।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पुराने शासकों का बेअदबी रोकने के लिए कानून बनाने का न तो इरादा था और न ही इच्छाशक्ति, जिसके कारण उनके शासनकाल में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी की घटनाएं बार-बार हुईं। उन्होंने कहा, “पंजाब सरकार ने अब ऐसा कानून पारित किया है, जो इसे हमेशा के लिए खत्म कर देगा क्योंकि कोई भी दोबारा ऐसा घिनौना अपराध करने की हिम्मत नहीं करेगा।” अकाली नेतृत्व की निंदा करते हुए उन्होंने कहा कि उनके शासनकाल में बेअदबी की घटनाओं का विरोध कर रहे निर्दोष लोगों पर गोली चलाने के आदेश दिए गए थे।

नशों के खतरे को लेकर अकाली नेतृत्व पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “अकालियों पर पीढ़ियों की नस्लकुशी का मामला दर्ज होना चाहिए क्योंकि उन्होंने नशों के व्यापार को संरक्षण दिया, जो उनके लंबे कुशासन के दौरान फलता-फूलता रहा।” उन्होंने जोर देकर कहा कि इन नेताओं के हाथ पंजाब के युवाओं के खून से रंगे हुए हैं क्योंकि पिछली सरकारों के दौरान सरकारी संरक्षण में नशे का प्रसार हुआ और कई युवा इसकी चपेट में आए। उन्होंने कहा, “इनके गुनाह माफ नहीं किए जा सकते और पंजाब के लोग पीढ़ियों को तबाह करने वाले इन नेताओं को कभी माफ नहीं करेंगे।”

बेअदबी की घटनाओं के माध्यम से पंजाबियों की भावनाओं को आहत करने के लिए अकाली दल की निंदा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अकालियों ने गुरबाणी के नाम पर वोट मांगे और साथ ही गुरु की वाणी का अपमान किया। उन्होंने कहा कि अकाली नेता अक्सर अपने कार्यकाल के विकास का दावा करते हैं, लेकिन कोटकपूरा, बहिबल कलां और अन्य घटनाओं को जानबूझकर नजरअंदाज करते हैं, जहां बेअदबी हुई और मासूम लोगों की जानें गईं।

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आगे कहा कि अकाली नेतृत्व ने पंजाब को बेरहमी से लूटा और ऐसे माफिया को संरक्षण दिया जिसने राज्य को सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर किया। उन्होंने कहा, “अकालियों ने पंजाबियों को भावनात्मक रूप से तोड़ा और माफिया को बचाया, जिन्होंने पंजाब को बर्बाद कर दिया। अपने शासनकाल के दौरान नशे के व्यापार को बढ़ावा देना लोगों के साथ विश्वासघात के बराबर है।”

सुखबीर सिंह बादल पर कटाक्ष करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अकालियों ने जनता में अपना आधार पूरी तरह खो दिया है और अब रैलियों में भीड़ जुटाने के लिए भुगतान किए गए लोगों को बुलाया जाता है। उन्होंने कहा, “हर अकाली रैली में वही चेहरे नजर आते हैं।” उन्होंने कहा कि जो नेता कभी 25 साल तक शासन करने का दावा करते थे, उन्हें अब पंजाब के जागरूक और बहादुर लोगों ने राजनीतिक गुमनामी में धकेल दिया है। उन्होंने अकाली नेतृत्व को अवसरवादी बताते हुए कहा कि वे अपनी राजनीतिक सुविधा के अनुसार अपना रुख और विचारधारा बदलते रहते हैं।

एक उदाहरण देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बेअदबी के लिए जिम्मेदार नेता एक बार श्री अकाल तख्त साहिब में पेश हुए थे और अपनी गलतियों को सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया था, लेकिन बाद में जब यह उनके राजनीतिक हितों के अनुकूल नहीं रहा तो वे अपने बयान से मुकर गए। उन्होंने कहा, “पंजाब के लोग उनका असली चेहरा जानते हैं और समझते हैं कि उन्होंने राजनीतिक चालों के जरिए जनता को बार-बार गुमराह किया है।” उन्होंने आगे कहा कि जो नेता कभी अजेय माने जाते थे, आज उन्हें पार्टी की कमेटी बनाने के लिए पांच सदस्य भी नहीं मिल रहे।

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने लोगों को याद दिलाया कि पुराने शासकों ने गैंगस्टरों को संरक्षण दिया और नशा तस्करों को बचाया, जिससे पंजाब के युवाओं को नशे की ओर धकेला गया। उन्होंने कहा, “पंजाब के लोग इन अपराधों के लिए अकालियों को कभी माफ नहीं करेंगे और उन्हें एक और कड़ा सबक सिखाएंगे।” उन्होंने कहा कि बार-बार चुने जाने के बावजूद अकालियों ने पंजाब के साथ विश्वासघात किया और लोगों की पीठ में छुरा घोंपा। उन्होंने कहा, “उन्होंने राजनीतिक हितों के लिए धर्म का दुरुपयोग किया और लोग इसके लिए उन्हें कभी माफ नहीं करेंगे।”

इस कानून की महत्ता को रेखांकित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाब सरकार खुद को भाग्यशाली मानती है कि उसे ऐसा ऐतिहासिक कानून पारित करने का अवसर मिला। उन्होंने कहा, “श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी पंजाब में शांति, भाईचारे और सांप्रदायिक सौहार्द को भंग करने की गहरी साजिश का हिस्सा थी।” उन्होंने कहा कि यह कानून दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति के लिए मिसाल कायम करने वाली सजा सुनिश्चित करता है।

मुख्यमंत्री ने उम्मीद जताई कि यह कानून भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकेगा। उन्होंने कहा कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी हर सिख के लिए पिता के समान हैं और उनकी पवित्रता की रक्षा करना पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा कि दुनियाभर में लोग इस कानून के लागू होने पर खुशी और आभार व्यक्त कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “इस ऐतिहासिक एक्ट को पारित करने के लिए हमें शक्ति और साहस देने पर परमात्मा का धन्यवाद करने हेतु मैंने श्री आनंदपुर साहिब से यह शुक्राना यात्रा शुरू की है।” उन्होंने बताया कि 9 मई तक वे तख्त श्री केसगढ़ साहिब, श्री अकाल तख्त साहिब, दमदमा साहिब, मस्तुआणा साहिब, गुरुद्वारा दुख निवारण साहिब और श्री फतेहगढ़ साहिब में मत्था टेकेंगे।

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि इस यात्रा का एकमात्र उद्देश्य पंजाब सरकार को इस महत्वपूर्ण कानून को लागू करने योग्य बनाने के लिए परमात्मा का धन्यवाद करना है। भीषण गर्मी के बावजूद बड़ी संख्या में एकत्र हुए लोगों का धन्यवाद करते हुए उन्होंने कहा कि वे जनता की सेवा के लिए पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा, “दूसरे नेता मौसम देखकर बाहर निकलते हैं, लेकिन मैं लोगों की भलाई के लिए हमेशा उनके बीच रहता हूं।”

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AAP पंजाब ने चुनाव से पहले वोटरों को बांटने के लिए भाजपा पर डर और डराने-धमकाने की राजनीति करने का लगाया आरोप : अमन अरोड़ा

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आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब के अध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने मंगलवार को जालंधर और अमृतसर में हाल ही में हुए धमाकों के लिए विपक्षी पार्टियों द्वारा पंजाब सरकार को ज़िम्मेदार ठहराने की कोशिशों की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं का राजनीतिक फ़ायदे के लिए गलत इस्तेमाल किया जा रहा है और आरोप लगाया कि भाजपा का चुनाव से पहले डर और बांटने का इतिहास रहा है।

अरोड़ा ने कहा कि पूरे देश में एक रुझान देखा गया है जहां चुनाव से पहले वोटरों को बांटने के लिए कानून-व्यवस्था, धर्म या सुरक्षा से जुड़ी घटनाओं का सहारा लिया जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावी फ़ायदे के लिए अशांति फैलाने और समुदायों को बांटने के लिए अक्सर ऐसे तरीके अपनाए जाते हैं।

उन्होंने कहा कि पंजाब चुनाव की ओर बढ़ रहा है और मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार के लोगों के पक्ष के कामों से घबराई हुई है। इसीलिए ऐसी साज़िशें रची जा रही हैं।

उन्होंने आगे कहा कि ऐसी घटनाओं की ज़िम्मेदारी केंद्र सरकार की है, क्योंकि इंटरनेशनल बॉर्डर पर बॉर्डर सिक्योरिटी फ़ोर्स (बीएसएफ) का अधिकार क्षेत्र 15 किलोमीटर से बढ़ाकर 50 किलोमीटर कर दिया गया है। यह देखते हुए कि अमृतसर और जालंधर दोनों इस दायरे में आते हैं, अरोड़ा ने कहा कि जवाबदेही केंद्रीय एजेंसियों और केंद्र में भाजपा की सरकार की है।

अरोड़ा ने आतंकवाद की यादें ताज़ा करके पंजाब को अस्थिर करने और डर पैदा करने की कोशिशों के ख़िलाफ़ भी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि पंजाबी इन “नापाक इरादों” से वाकिफ़ हैं और बांटने वाली राजनीति का शिकार नहीं होंगे। उन्होंने कहा कि पंजाब सांप्रदायिक सद्भाव की ज़मीन है, जहाँ सबसे बुरे समय में भी नफ़रत के बीज कभी नहीं उगे। लोगों को धर्म के आधार पर बांटने की कोशिशें यहाँ कभी कामयाब नहीं होंगी।

पंजाब की एकता और धर्मनिरपेक्षता की विरासत को दोहराते हुए, अरोड़ा ने भाजपा और केंद्र सरकार से ऐसी चालों से बचने और राज्य के सामाजिक ताने-बाने का सम्मान करने की अपील की। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि पंजाब के लोग शांति और सांप्रदायिक सद्भाव को बिगाड़ने की किसी भी कोशिश के खिलाफ एकजुट रहेंगे।

पंजाब के कैबिनेट मंत्री हरभजन सिंह ईटीओ, डॉ. बलबीर सिंह और हरजोत सिंह बैंस ने भी हाल के धमाकों को लेकर भाजपा और केंद्र सरकार पर निशाना साधा और कहा कि इसके लिए केंद्रीय एजेंसियां ज़िम्मेदार हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र ने इंटरनेशनल बॉर्डर पर बीएसएफ का अधिकार क्षेत्र 15 किलोमीटर से बढ़ाकर 50 किलोमीटर कर दिया है, जिससे अमृतसर और जालंधर जैसे इलाके इसके दायरे में आ गए हैं। इसे देखते हुए, उन्होंने कहा कि सुरक्षा में किसी भी चूक की ज़िम्मेदारी सीधे केंद्र की है। मंत्रियों ने आगे कहा कि राजनीतिक फ़ायदे के लिए पंजाब की शांति को बिगाड़ने की भाजपा की कोशिशें कभी कामयाब नहीं होंगी, क्योंकि राज्य के लोग एकजुट हैं और ऐसी बांटने वाली चालों के खिलाफ़ सतर्क हैं।

पंजाब के कैबिनेट मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने राजनीतिक फ़ायदे के लिए पंजाब को अस्थिर करने की भाजपा की कोशिशों की निंदा करते हुए कहा कि राज्य “कोई ट्रॉफी नहीं बल्कि एक इमोशनल पहचान है।” अमन अरोड़ा की चिंताओं का ज़िक्र करते हुए, बैंस ने कहा कि चुनाव से पहले डर, अशांति और पोलराइज़ेशन पैदा करने के ऐसे तरीके बहुत गैर-ज़िम्मेदाराना और खतरनाक हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब की विरासत भारत की आज़ादी की लड़ाई के दौरान दिए गए बड़े बलिदानों पर बनी है और इसे सिर्फ़ चुनावी महत्वाकांक्षाओं तक सीमित नहीं रखा जा सकता। भाजपा के “बंगाल की तरह पंजाब जीतने” के दावों पर प्रतिक्रिया देते हुए, बैंस ने इन बातों को शर्मनाक और असंवेदनशील बताया और कहा कि पंजाबी अपने निजी राजनीतिक फ़ायदों के लिए अपनी एकता और शांति को कभी भी टूटने नहीं देंगे।

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