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महिलाओं को ₹1000 की घोषणा से विपक्ष परेशान, 2027 में फिर बनेगी AAP सरकार, CM भगवंत मान का दावा
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि महिलाओं के लिए प्रति माह 1,000 रुपये की घोषणा पर विपक्षी पार्टियों द्वारा दिखाई जा रही निराशा स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि साल 2027 में आम आदमी पार्टी (आप) की पंजाब में सत्ता वापसी का डर है. पंजाब विधानसभा को संबोधित करते हुए भगवंत सिंह मान ने जोर देकर कहा कि जहां शिरोमणि अकाली दल, भाजपा और कांग्रेस जैसी पार्टियों ने अपने चुनावी वादों को नजरअंदाज करके लोगों के साथ बार-बार धोखा किया है, वहीं ‘आप’ सरकार ने अपने मेनिफेस्टो को पवित्र दस्तावेज माना है और सिर्फ चार सालों में आम लोगों के लिए हर गारंटी पूरी की है.
‘मुख्यमंत्री मांवा-धीयां सत्कार योजना’, मुफ्त बिजली, मुफ्त बस यात्रा, 10 लाख रुपये की स्वास्थ्य योजना के तहत मुफ्त इलाज, 63,943 युवाओं की पारदर्शी भर्ती और बुनियादी ढांचे व उद्योग में बड़े निवेश जैसी पहलों का जिक्र करते हुए भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाब विकास के रास्ते पर मजबूती से आगे बढ़ रहा है और आने वाले सालों में विकास की गति और तेज होगी.
तलवंडी साबो से विधायक प्रोफेसर बलजिंदर कौर द्वारा राज्यपाल के भाषण पर पेश धन्यवाद प्रस्ताव पर बहस को समेटते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “वह समय भी था जब चुनाव मेनिफेस्टो को कोई पढ़ता तक नहीं था क्योंकि पारंपरिक पार्टियां चुनाव से कुछ दिन पहले मेनिफेस्टो जारी करके खानापूर्ति करती थीं. पारंपरिक पार्टियों के चुनाव मेनिफेस्टो में धर्म-जाति की बात होती थी, लेकिन आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने ऐतिहासिक पहल करते हुए आम लोगों के लिए बेहतर स्वास्थ्य और शिक्षा को चुनाव मेनिफेस्टो का हिस्सा बनाया. पारंपरिक पार्टियों को भी अपने चुनाव मेनिफेस्टो में स्वास्थ्य-शिक्षा के क्षेत्रों को शामिल करने के लिए मजबूर होना पड़ा, जिसके लिए वे अरविंद केजरीवाल के आभारी हैं.”
चार सालों के कार्यकाल का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वे परमात्मा के आभारी हैं जिन्होंने उन्हें राज्य की सेवा करने की शक्ति दी है. ‘मुख्यमंत्री मांवा-धीयां सत्कार योजना’ की बात करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस योजना की घोषणा के बाद राज्य में खासकर महिलाओं में खुशी की लहर चल रही है. उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत सामान्य वर्ग की 18 साल से अधिक उम्र की महिलाओं को हर महीने 1000 रुपये और एस.सी. वर्ग की महिलाओं को 1500 रुपये मिलेंगे. मुख्यमंत्री ने कहा कि आम लोगों खासकर गरीबों की जिंदगी में 1000-1500 रुपये की बहुत बड़ी अहमियत होती है. उन्होंने कहा कि सरकार की यह राशि मां-बेटियों के लिए सम्मान है. भगवंत सिंह मान ने कहा कि इस योजना से महिलाओं के चेहरों की खुशी उनके मन को सुकून देती है. उन्होंने कहा कि 13 अप्रैल से इस योजना का रजिस्ट्रेशन शुरू होगा.
पंजाब के हर परिवार के लिए पौष्टिक भोजन सुनिश्चित करने के लिए ‘मेरी रसोई’ योजना का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बहुत से परिवार अच्छा भोजन न मिलने से पोषक तत्वों से वंचित रह जाते हैं जिससे उनकी सेहत पर बुरा असर पड़ता है. उन्होंने कहा कि ‘मेरी रसोई’ योजना के तहत 40 लाख परिवारों को राशन में चीनी, दाल, सरसों का तेल, नमक मिलेगा. इस योजना के लिए 1000 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है.
चार सालों में स्वास्थ्य क्रांति के तहत किए गए प्रयासों के बारे में मुख्यमंत्री ने कहा कि 881 आम आदमी क्लीनिकों में लोगों का भरोसा बढ़ रहा है और क्लीनिकों की ओ.पी.डी. में आने वालों की संख्या 5 करोड़ से पार हो चुकी है जो अपने आप में रिकॉर्ड है. हर परिवार को मुफ्त इलाज देने के लिए ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ लागू की गई है और यह देश की पहली ऐसी योजना है जिसमें हर परिवार को 10 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज मिलेगा. उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत सरकारी और प्राइवेट 900 अस्पताल सूचीबद्ध किए गए हैं. उन्होंने कहा कि लोगों को अस्पतालों की जानकारी देने के लिए सभी आम आदमी क्लीनिकों में सूची लगाई जाएगी. मुख्यमंत्री ने कहा, “कनाडा जैसे विकसित देशों में भी इलाज के लिए स्वास्थ्य बीमा की किस्त भरनी पड़ती है लेकिन पंजाब में सारा इलाज मुफ्त दिया जा रहा है.” मुख्यमंत्री ने कहा कि लहिरागागा, संगरूर, मलेरकोटला, होशियारपुर और कपूरथला में मेडिकल कॉलेज स्थापित किए जाएंगे. उन्होंने बताया कि साल 2022 से सरकारी अस्पतालों के लिए 934 डॉक्टरों की रिकॉर्ड भर्ती की गई है. उन्होंने मुख्यमंत्री योगशाला की सफलता का भी जिक्र किया.
शिक्षा क्षेत्र में किए गए सुधारों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में बेहतर शिक्षा देने के लिए 118 स्कूल ऑफ एमिनेंस स्थापित किए जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि प्रिंसिपलों और शिक्षकों को फिनलैंड, सिंगापुर और आई.आई.एम. अहमदाबाद में ट्रेनिंग के लिए भेजा जा रहा है. साल 2022 से अब तक 13,765 शिक्षकों की भर्ती हो चुकी है. उन्होंने कहा कि सभी पंजाबियों के लिए गर्व की बात है कि नेशनल अचीवमेंट सर्वे-2024 में पंजाब ने सर्वोत्तम स्थान हासिल किया है. मुख्यमंत्री ने कहा कि आने वाला समय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (ए.आई.) का है और सरकार ए.आई. के बारे में बच्चों को जानकारी देने के लिए शिक्षकों को विश्व स्तर की ट्रेनिंग दे रही है.
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि पहली बार खेतों के लिए दिन में बिजली मिलने लगी है जिससे किसानों का जीवन ही बदल गया है. उन्होंने कहा कि किसानों को देश में सबसे ज्यादा गन्ने का भाव दिया जा रहा है और इस समय 416 रुपये प्रति क्विंटल भाव मिल रहा है. उन्होंने कहा कि मालवा की जीवनधारा समझी जाने वाली फिरोजपुर फीडर नहर का नवीनीकरण किया गया और देश की आजादी के बाद पहली बार नई मालवा नहर बनाई जा रही है. उन्होंने कहा कि युवाओं को किताबों से जोड़ने के लिए गांवों में लाइब्रेरी बनाई जा रही हैं. गांवों में 3200 खेल मैदान विकसित किए जा रहे हैं.
पारदर्शी रोजगार मुहिम का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि अब तक राज्य के युवाओं को 63,943 सरकारी नौकरियां दी गई हैं और यह सारी भर्ती बिना किसी सिफारिश और रिश्वत के की गई है. उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों में वह समय था जब आम घरों के युवा सरकारी नौकरी के लिए धक्के खाते थे क्योंकि उस समय ‘अटैची कल्चर’ चलता था जिससे धनाढ्य लोग रिश्वत देकर नौकरियां ले जाते थे. उन्होंने कहा कि लुधियाना में 3200 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित देश के दूसरे सबसे बड़े टाटा स्टील मैन्युफैक्चरिंग प्लांट का उद्घाटन 20 मार्च को किया जा रहा है जिससे सीधे तौर पर 4000 युवाओं को रोजगार मिलेगा. उन्होंने कहा कि उद्योगिक निवेश के लिए दुनिया भर के उद्योगपतियों को आकर्षित करने के लिए 13-15 मार्च तक मोहाली में पंजाब प्रोग्रेसिव इन्वेस्टमेंट सम्मेलन करवाया जा रहा है. मुख्यमंत्री ने जापान, दक्षिण कोरिया आदि देशों के औद्योगिक दौरे का भी जिक्र किया. उन्होंने बताया कि जापान की कंपनी जी.आई.सी.के. पंजाब में 1300 करोड़ रुपये का निवेश करेगी.
बिजली क्षेत्र की बात करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि 90 प्रतिशत घरों को मुफ्त बिजली दी जा रही है. उन्होंने कहा कि राज्य के लोगों पर वित्तीय बोझ कम करने के लिए कुछ दिन पहले बिजली के रेट 70 पैसे से 1.50 रुपये प्रति यूनिट तक घटाए गए हैं. उन्होंने कहा कि पहली बार सरकार ने जी.वी.के. कंपनी का प्राइवेट थर्मल प्लांट खरीदा है और इसका नाम श्री गुरु अमर दास जी के नाम पर रखा है. ‘रौशन पंजाब’ मुहिम के तहत 5000 करोड़ रुपये खर्च करके बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जा रहा है जिसमें अंडरग्राउंड तारें भी बिछाई जाएंगी. सड़क सुरक्षा फोर्स का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि एस.एस.एफ. के गठन से पंजाब में सड़क हादसों में मौत दर में 48 प्रतिशत कमी आई है.
भ्रष्टाचार के प्रति कोई लिहाज न बरतने की नीति को दोहराते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि रिश्वतखोरी पर अंकुश लगाने के लिए भ्रष्टाचार विरोधी एक्शन लाइन नंबर-95012-00200 जारी किया गया है और अब तक 1000 से अधिक गिरफ्तारियां हो चुकी हैं. पिछले साल भारी बाढ़ से हुए नुकसान की भरपाई के लिए उठाए कदमों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पीड़ित परिवारों को फसलों, घरों और पशुधन का मुआवजा दिया गया. उन्होंने बताया कि किसानों के लिए ‘जिसदा खेत, उसदी रेत’ योजना लागू की गई जिससे किसानों को बहुत फायदा हुआ. उन्होंने कहा कि बाढ़ प्रभावित किसानों को 33 करोड़ 96 लाख रुपये की लागत से 84 हजार 889 क्विंटल गेहूं का बीज मुफ्त वितरित किया गया.
भगवंत सिंह मान ने कहा कि मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना से कुछ बुजुर्गों को धार्मिक स्थानों के दर्शन पहली बार करने का मौका मिला. उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार द्वारा श्रद्धालुओं को राज्य से बाहर सिखों के दो पवित्र तख्त साहिबान तख्त श्री पटना साहिब (बिहार) और तख्त श्री हजूर साहिब (महाराष्ट्र) के दर्शन करवाए जाएंगे.
मुख्यमंत्री ने कहा कि लोगों को जमीन-जायदाद की रजिस्ट्री करवाने में आने वाली परेशानी को हमेशा के लिए दूर करने के लिए ईजी रजिस्ट्री और ईजी जमाबंदी की व्यवस्था लागू की जा चुकी है. मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में 44,920 किलोमीटर सड़कों का नवीनीकरण किया जा रहा है और इस प्रोजेक्ट पर 16,209 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं जिसमें से 14,328 करोड़ रुपये सड़कों के नवीनीकरण और 1,880 करोड़ रुपये सड़कों के 5 सालों के रख-रखाव के लिए हैं.
लोगों के लिए राहत का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि पंजाब में 19 टोल प्लाजा बंद कर दिए गए हैं जिससे आम आदमी की जेब से टोल फीस के रोजाना 64 लाख रुपये की बचत हो रही है. उन्होंने कहा कि पावन ग्रंथ ले जाने वाले वाहनों का टैक्स माफ किया गया जबकि पिछली सरकारों ने इस बारे में कभी सोचा भी नहीं.
पंजाब को अंधाधुंध लूटने के लिए अकाली दल पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब के लोगों ने अकाली नेता सुखबीर सिंह बादल के पिता प्रकाश सिंह बादल को पांच बार मुख्यमंत्री बनाया लेकिन इस परिवार ने अपना विकास तो किया लेकिन पंजाब के लिए कुछ नहीं किया जिसके लिए लोग कभी अकालियों को माफ नहीं करेंगे.
सदन से वॉकआउट करने के लिए कांग्रेस विधायकों को आड़े हाथों लेते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आपसी कलह का शिकार हुई कांग्रेस को 2027 में बहुत बुरी हार का सामना करना पड़ेगा और कांग्रेस की हालत ऐसी होगी कि पंजाब के लोगों ने सदन में विपक्षी बेंच पर बैठने के लिए एक विधायक भी नहीं जीता कर भेजना. अंत में मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब सरकार आने वाले समय में इसी समर्पित भावना, लगन और ध्यान से लोगों की सेवा करती रहेगी ताकि पंजाब को शहीदों के सपनों का पंजाब बनाया जा सके.
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AAP पंजाब ने चुनाव से पहले वोटरों को बांटने के लिए भाजपा पर डर और डराने-धमकाने की राजनीति करने का लगाया आरोप : अमन अरोड़ा
आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब के अध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने मंगलवार को जालंधर और अमृतसर में हाल ही में हुए धमाकों के लिए विपक्षी पार्टियों द्वारा पंजाब सरकार को ज़िम्मेदार ठहराने की कोशिशों की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं का राजनीतिक फ़ायदे के लिए गलत इस्तेमाल किया जा रहा है और आरोप लगाया कि भाजपा का चुनाव से पहले डर और बांटने का इतिहास रहा है।
अरोड़ा ने कहा कि पूरे देश में एक रुझान देखा गया है जहां चुनाव से पहले वोटरों को बांटने के लिए कानून-व्यवस्था, धर्म या सुरक्षा से जुड़ी घटनाओं का सहारा लिया जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावी फ़ायदे के लिए अशांति फैलाने और समुदायों को बांटने के लिए अक्सर ऐसे तरीके अपनाए जाते हैं।
उन्होंने कहा कि पंजाब चुनाव की ओर बढ़ रहा है और मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार के लोगों के पक्ष के कामों से घबराई हुई है। इसीलिए ऐसी साज़िशें रची जा रही हैं।
उन्होंने आगे कहा कि ऐसी घटनाओं की ज़िम्मेदारी केंद्र सरकार की है, क्योंकि इंटरनेशनल बॉर्डर पर बॉर्डर सिक्योरिटी फ़ोर्स (बीएसएफ) का अधिकार क्षेत्र 15 किलोमीटर से बढ़ाकर 50 किलोमीटर कर दिया गया है। यह देखते हुए कि अमृतसर और जालंधर दोनों इस दायरे में आते हैं, अरोड़ा ने कहा कि जवाबदेही केंद्रीय एजेंसियों और केंद्र में भाजपा की सरकार की है।
अरोड़ा ने आतंकवाद की यादें ताज़ा करके पंजाब को अस्थिर करने और डर पैदा करने की कोशिशों के ख़िलाफ़ भी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि पंजाबी इन “नापाक इरादों” से वाकिफ़ हैं और बांटने वाली राजनीति का शिकार नहीं होंगे। उन्होंने कहा कि पंजाब सांप्रदायिक सद्भाव की ज़मीन है, जहाँ सबसे बुरे समय में भी नफ़रत के बीज कभी नहीं उगे। लोगों को धर्म के आधार पर बांटने की कोशिशें यहाँ कभी कामयाब नहीं होंगी।
पंजाब की एकता और धर्मनिरपेक्षता की विरासत को दोहराते हुए, अरोड़ा ने भाजपा और केंद्र सरकार से ऐसी चालों से बचने और राज्य के सामाजिक ताने-बाने का सम्मान करने की अपील की। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि पंजाब के लोग शांति और सांप्रदायिक सद्भाव को बिगाड़ने की किसी भी कोशिश के खिलाफ एकजुट रहेंगे।
पंजाब के कैबिनेट मंत्री हरभजन सिंह ईटीओ, डॉ. बलबीर सिंह और हरजोत सिंह बैंस ने भी हाल के धमाकों को लेकर भाजपा और केंद्र सरकार पर निशाना साधा और कहा कि इसके लिए केंद्रीय एजेंसियां ज़िम्मेदार हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र ने इंटरनेशनल बॉर्डर पर बीएसएफ का अधिकार क्षेत्र 15 किलोमीटर से बढ़ाकर 50 किलोमीटर कर दिया है, जिससे अमृतसर और जालंधर जैसे इलाके इसके दायरे में आ गए हैं। इसे देखते हुए, उन्होंने कहा कि सुरक्षा में किसी भी चूक की ज़िम्मेदारी सीधे केंद्र की है। मंत्रियों ने आगे कहा कि राजनीतिक फ़ायदे के लिए पंजाब की शांति को बिगाड़ने की भाजपा की कोशिशें कभी कामयाब नहीं होंगी, क्योंकि राज्य के लोग एकजुट हैं और ऐसी बांटने वाली चालों के खिलाफ़ सतर्क हैं।
पंजाब के कैबिनेट मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने राजनीतिक फ़ायदे के लिए पंजाब को अस्थिर करने की भाजपा की कोशिशों की निंदा करते हुए कहा कि राज्य “कोई ट्रॉफी नहीं बल्कि एक इमोशनल पहचान है।” अमन अरोड़ा की चिंताओं का ज़िक्र करते हुए, बैंस ने कहा कि चुनाव से पहले डर, अशांति और पोलराइज़ेशन पैदा करने के ऐसे तरीके बहुत गैर-ज़िम्मेदाराना और खतरनाक हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब की विरासत भारत की आज़ादी की लड़ाई के दौरान दिए गए बड़े बलिदानों पर बनी है और इसे सिर्फ़ चुनावी महत्वाकांक्षाओं तक सीमित नहीं रखा जा सकता। भाजपा के “बंगाल की तरह पंजाब जीतने” के दावों पर प्रतिक्रिया देते हुए, बैंस ने इन बातों को शर्मनाक और असंवेदनशील बताया और कहा कि पंजाबी अपने निजी राजनीतिक फ़ायदों के लिए अपनी एकता और शांति को कभी भी टूटने नहीं देंगे।
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पंजाब में बेअदबी विरोधी कानून लागू होने के बाद मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने श्री आनंदपुर साहिब से ‘शुक्राना यात्रा’ का किया नेतृत्व
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज यहां तख्त श्री केसगढ़ साहिब में माथा टेकने के बाद पूरे उत्साह के साथ ‘शुक्राना यात्रा’ शुरू की। कैबिनेट मंत्री हरजोत सिंह बैंस की मौजूदगी में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि यह यात्रा परमात्मा का शुक्राना करने के लिए की जा रही है, जिसने उन्हें बेअदबी के मामलों में सख्त सजा की व्यवस्था करने वाला जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सतिकार (संशोधन) एक्ट 2026 लागू करके मानवता की सेवा करने का अवसर बख्शा है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “जिस पवित्र धरती पर खालसा पंथ प्रकट हुआ था, उससे ‘शुक्राना यात्रा’ शुरू हुई है। बेअदबी रोकने के लिए सख्त कानून बनाने की पवित्र जिम्मेदारी हमें बख्शने के लिए गुरु साहिब के चरणों में शुक्राना किया जा रहा है। पंजाब की शांति और ‘सर्बत्त के भला’ के लिए अरदासें जारी रहेंगी।”
पवित्र तख्त साहिब में माथा टेकते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “मेरा रोम-रोम परमात्मा का ऋणी है कि उसने मुझे जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सतिकार (संशोधन) एक्ट 2026 लागू करके मानवता की सेवा करने का अवसर बख्शा। हम भाग्यशाली हैं कि हमें इस ऐतिहासिक कानून को पास करने की जिम्मेदारी मिली, जो भविष्य में बेअदबी की घटनाओं को खत्म करने में मददगार होगा।”उन्होंने कहा कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी एक गहरी साजिश का हिस्सा थी, जिसका उद्देश्य पंजाब की शांति, भाईचारक साझ और एकता को तोड़ना था। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि यह एक्ट यह सुनिश्चित करता है कि इस अक्षम्य अपराध के दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को माफ नहीं किया जाएगा और इस घिनौने अपराध के दोषियों को अनुकरणीय सजा दी जाएगी। यह कानून निवारक के रूप में काम करेगा और भविष्य में कोई भी ऐसा गुनाह करने की हिम्मत नहीं करेगा।”
सिखों की श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के साथ आध्यात्मिक साझ पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी हर सिख के लिए पिता के समान हैं और इसकी पवित्रता की रक्षा करना हमारा कर्तव्य है। दुनिया भर के लोग इस ऐतिहासिक कदम पर खुशी प्रकट कर रहे हैं और धन्यवाद कर रहे हैं।” शुक्राना यात्रा के बारे में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि श्री आनंदपुर साहिब के बाद वे 9 मई तक तख्त श्री केसगढ़ साहिब, श्री अकाल तख्त साहिब, श्री दमदमा साहिब, मस्तुआणा साहिब, गुरुद्वारा दुख निवारण साहिब और श्री फतेहगढ़ साहिब में नतमस्तक होंगे। उन्होंने अत्यधिक गर्मी के बावजूद यहां एकत्रित हुए लोगों का धन्यवाद करते हुए कहा कि “इस यात्रा का एकमात्र मंतव्य इस महत्वपूर्ण एक्ट को पास करने के लिए ताकत और बख्शने के लिए परमात्मा का शुक्राना करना है।”
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “हम तो एक माध्यम हैं, जिसे गुरु साहिब ने यह पवित्र जिम्मेदारी निभाने के लिए चुना है। मैं इस एक्ट को पास करने वाला कोई नहीं हूं। गुरु साहिब ने खुद यह सेवा मुझसे ली है। परमात्मा ऐसी सेवा सिर्फ उन्हीं को सौंपता है, जिन्हें उसने खुद चुना होता है। मैं गुरु साहिब का एक विनम्र सेवक हूं, जिसे यह कार्य सौंपा गया है।” उन्होंने आगे कहा कि समाज के सभी वर्गों के लोग लंबे समय से बेअदबी की घटनाओं को रोकने के लिए ऐसे कानून की मांग कर रहे थे। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “इस एक्ट का एकमात्र उद्देश्य पिछली सरकारों की लापरवाही के कारण लोगों की अशांत हुई भावनाओं को शांत करना है। इस कानून के पीछे कोई भी राजनीतिक मंतव्य नहीं है।”
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि दुनिया भर के लोग इस पहल के लिए हमारा धन्यवाद करने के लिए रोजाना फोन कर रहे हैं, लेकिन उन्होंने कहा कि कुछ व्यक्ति इस एक्ट का विरोध सिर्फ इसलिए कर रहे हैं क्योंकि उनके राजनीतिक आका नाखुश हैं। उन्होंने कहा, “यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि कुछ लोग अपने निजी हितों के लिए इस पवित्र मुद्दे पर भी राजनीति कर रहे हैं क्योंकि वे जानते हैं कि उन्हें जल्दी अपने गुनाहों के नतीजे भुगतने पड़ेंगे।” लोकसभा सदस्य के रूप में अपने कार्यकाल को याद करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि उन्होंने पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन के साथ मिलकर छोटे साहिबजादों को उनके शहीदी दिवस पर श्रद्धांजलि देने के मामले की सदन में सफलतापूर्वक पैरवी की थी। उन्होंने कहा कि पूरा पंजाब उस समय को शोक के महीने के रूप में मनाता है क्योंकि छोटे साहिबजादों को जालिम शासकों ने जिंदा नींव में चिनवा दिया था। मुझसे पहले 190 से अधिक सांसदों ने पंजाब का प्रतिनिधित्व किया, लेकिन उनमें से किसी ने भी संसद में यह मुद्दा नहीं उठाया।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि छोटे साहिबजादों की शहादत आने वाली पीढ़ियों को अत्याचार, बेइंसाफी और दमन के खिलाफ जूझने के लिए प्रेरित करती रहेगी। श्री आनंदपुर साहिब के ऐतिहासिक महत्व का हवाला देते हुए उन्होंने कहा, “इस पवित्र धरती पर श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने 13 अप्रैल 1699 को खालसा पंथ प्रकट किया था, जो इतिहास को नया मोड़ देने वाली घटना थी। इसी दिन हमारी सरकार ने बेअदबी के खिलाफ ऐतिहासिक कानून पास किया है।”मुख्यमंत्री ने यह भी चेताया कि श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी के 350 साला शहीदी दिवस के अवसर पर पंजाब विधानसभा का विशेष सत्र श्री आनंदपुर साहिब में बुलाया गया। उन्होंने कहा कि इतिहास में यह पहला अवसर है, जब पंजाब विधानसभा गुरु साहिब के चरणों में नतमस्तक हुई। इस विशेष सत्र के दौरान विधानसभा ने अमृतसर, तलवंडी साबो और श्री आनंदपुर साहिब को पवित्र शहर का दर्जा देने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पास किया।”
पंजाब में सिखी के आध्यात्मिक महत्व को उजागर करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि सिखों के पांच तख्तों में से तीन – श्री अकाल तख्त साहिब (अमृतसर), श्री दमदमा साहिब (तलवंडी साबो) और तख्त श्री केसगढ़ साहिब (श्री आनंदपुर साहिब) – पंजाब में पड़ते हैं। उन्होंने कहा, “लोगों की लंबे समय से लटकती मांग को ध्यान में रखते हुए पंजाब सरकार ने इन शहरों को पवित्र शहर का दर्जा दिया है। इन शहरों के समग्र विकास के लिए कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी जाएगी और इस कार्य के लिए फंडों की कोई कमी नहीं है।”
यात्रा के दौरान कैबिनेट मंत्री हरजोत सिंह बैंस और कई अन्य हस्तियां भी मौजूद थीं।
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सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या 33 से बढ़ाकर 37 करने को कैबिनेट की मंजूरी
केंद्र सरकार ने न्यायपालिका से जुड़ा एक अहम फैसला लेते हुए भारत का सर्वोच्च न्यायालय में जजों की संख्या बढ़ाने को मंजूरी दे दी है। इस फैसले के तहत अब जजों की कुल संख्या 33 से बढ़ाकर 37 की जाएगी।
यह बढ़ोतरी करीब छह साल बाद की जा रही है। इससे पहले 2019 में जजों की संख्या 31 से बढ़ाकर 33 की गई थी। सरकार के अनुसार इस कदम का मुख्य उद्देश्य अदालत में लंबित मामलों की संख्या कम करना और न्याय प्रक्रिया को तेज करना है।
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि इस समय सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस सहित 34 जज कार्यरत हैं। नए प्रस्ताव को लागू करने के लिए संसद के आगामी सत्र में बिल पेश किया जाएगा। बिल पास होने के बाद जजों की संख्या 37 हो जाएगी।
मौजूदा समय में सुप्रीम कोर्ट में 92 हजार से अधिक मामले लंबित हैं, जिससे न्याय व्यवस्था पर काफी दबाव बना हुआ है। सरकार का मानना है कि जजों की संख्या बढ़ने से मामलों की सुनवाई में तेजी आएगी और लोगों को जल्दी न्याय मिल सकेगा।
इतिहास पर नजर डालें तो सुप्रीम कोर्ट (जजों की संख्या) अधिनियम, 1956 के तहत शुरुआत में चीफ जस्टिस के अलावा सिर्फ 10 जजों का प्रावधान था। समय के साथ मामलों की बढ़ती संख्या को देखते हुए यह संख्या कई बार बढ़ाई गई—1960 में 13, बाद में 17, 1986 में 25, 2009 में 30 और 2019 में 33 की गई थी।
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 124 के अनुसार सुप्रीम कोर्ट के जजों की संख्या संसद तय करती है और जरूरत के अनुसार इसमें बदलाव किया जा सकता है।
हालांकि, कई कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि केवल जजों की संख्या बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है। न्याय प्रणाली को प्रभावी बनाने के लिए प्रशासनिक सुधार और तकनीक का बेहतर उपयोग भी उतना ही जरूरी है।
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