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भगवंत मान सरकार 12 ज़िलों में 21,850 शिक्षकों को नशे के ख़िलाफ़ लड़ाई और विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए करेगी प्रशिक्षित

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नशे के दुरुपयोग के ख़िलाफ़ अपनी लड़ाई को मज़बूत करने और विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम उठाते हुए, भगवंत मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार ने अपने प्रमुख नशा-विरोधी अभियान ‘युद्ध नशेआँ विरुद्ध’ के तहत पिछले सप्ताह 12 ज़िलों में शिक्षकों के लिए जागरूकता एवं क्षमता विकास कार्यक्रम शुरू किया।

इस पहल का उद्देश्य 21,850 से अधिक शिक्षकों को विद्यार्थियों में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं और नशे के दुरुपयोग के शुरुआती संकेतों की पहचान करने तथा समय रहते हस्तक्षेप करने के लिए आवश्यक क्षमता और व्यावहारिक कौशल से लैस करना है। इस अभियान की शुरुआत सोमवार को फाज़िल्का और तरनतारन से की गई, जहाँ पिछले सप्ताह 800 से अधिक शिक्षकों ने कार्यशालाओं में भाग लिया।

यह कार्यक्रम सरकार द्वारा स्कूलों में चलाए गए जागरूकता कार्यक्रमों की सफलता के बाद शुरू किया गया है। इससे पहले इस वर्ष जनवरी में नौ ज़िलों के सीनियर सेकेंडरी और हाई स्कूलों के प्रिंसिपलों तथा हेडमास्टरों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इस प्रशिक्षण में राज्य के उन सीमावर्ती ज़िलों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया था, जो नशीले पदार्थों के सेवन की समस्या के प्रति संवेदनशील हैं।

इसके अलावा, अमृतसर में एक पायलट शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें 2,800 से अधिक शिक्षकों ने भाग लिया। 75 प्रतिशत से अधिक प्रतिभागियों ने बताया कि वे स्वस्थ स्कूल वातावरण तैयार करने में योगदान देने के लिए प्रेरित हुए। इन पहलों की सफलता के आधार पर भगवंत मान सरकार ने अब प्रशिक्षण मॉड्यूल का चरणबद्ध विस्तार शुरू किया है, जिसकी शुरुआत फाज़िल्का, तरनतारन, फिरोज़पुर, गुरदासपुर, पठानकोट, श्री मुक्तसर साहिब, फ़रीदकोट, मोहाली, रोपड़, कपूरथला, लुधियाना और पटियाला से की जा रही है।

जब कोई विद्यार्थी परेशानी में होता है, तो शिक्षक अक्सर सबसे पहले इसे महसूस करते हैं, लेकिन ऐसे व्यवहार को स्वास्थ्य संबंधी समस्या समझने के बजाय अक्सर अनुशासनहीनता समझ लिया जाता है। किशोरों में बढ़ती चिंता, तनाव और नशीले पदार्थों के सेवन को देखते हुए, स्कूल-आधारित रोकथाम शुरुआती पहचान और समय पर सहायता उपलब्ध करवाने का एक व्यापक और टिकाऊ माध्यम है। शिक्षकों को जागरूक करने की यह पहल स्कूल प्रमुखों के लिए पहले चलाए गए जागरूकता कार्यक्रम पर आधारित है, जिसका उद्देश्य विद्यार्थियों के कल्याण के लिए पूरे स्कूल को शामिल करने वाली व्यवस्था विकसित करना है।

इस संबंध में पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा, “हर वह बच्चा जो नशे के अंधकार में चला जाता है, वह ऐसा बच्चा है, जिस तक हम पहले पहुँच सकते थे। हमारे शिक्षक हमारे बच्चों के साथ अधिकांश लोगों की तुलना में अधिक समय बिताते हैं; वे उन ख़ामोशियों, अनुपस्थितियों और उन बदलावों को देखते हैं, जिन्हें कोई और नहीं देख पाता। प्रशिक्षण मॉड्यूल इस तरह तैयार किया गया है कि शिक्षकों को किशोरों से जुड़े मुद्दों, उनके मानसिक स्वास्थ्य और भावनात्मक कल्याण की बेहतर समझ हो सके। शिक्षकों को नशे के दुरुपयोग से जुड़े ज़ोख़िमों के बारे में भी जागरूक किया जाएगा। यह प्रशिक्षण उन्हें आवश्यकता पड़ने पर विद्यार्थियों को सहायता प्रदान करने में सक्षम बनाएगा। वे तनाव और नशे की संवेदनशीलता के शुरुआती संकेतों को पहचानना, सज़ा देने के बजाय संवेदनशीलता के साथ प्रतिक्रिया देना और संघर्ष कर रहे विद्यार्थियों को बहुत देर होने से पहले सहायता से जोड़ना सीखेंगे। पंजाब में किसी भी बच्चे को अपनी परेशानी चुपचाप सहने के लिए मजबूर न होना पड़े और न ही उसे सामाजिक कलंक का सामना करना पड़े और ‘युद्ध नशेआँ विरुद्ध’ अभियान के तहत हम यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं कि हर ऐसे बच्चे को उचित देखभाल और सहयोग मिले।”

यह एक व्यापक अंतर-विभागीय पहल है, जिसके कार्यान्वयन को राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT), सामाजिक सुरक्षा एवं महिला एवं बाल विकास विभाग के साथ मिलकर सुनिश्चित कर रही है। नशीले पदार्थों के सेवन के ख़िलाफ़ व्यापक अभियान का नेतृत्व कर रही राज्य की डेटा इंटेलिजेंस एंड टेक्निकल सपोर्ट यूनिट (DITSU) कार्यक्रम के क्रियान्वयन में सहयोग देने के साथ-साथ प्रशिक्षण सामग्री तैयार करेगी और पूरे अभियान के दौरान गुणवत्ता सुनिश्चित करेगी। ज़िला स्तर पर नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की गई है, ताकि सभी सीनियर सेकेंडरी और हाई स्कूलों के शिक्षक इन सत्रों में भाग ले सकें और उनका लाभ उठा सकें। इन सत्रों का आयोजन नशा मुक्त भारत अभियान (NMBA) और नेशनल एक्शन प्लान फॉर ड्रग डिमांड रिडक्शन (NAPDDR) के सहयोग से किया जा रहा है।

एक दिवसीय जागरूकता-सह-क्षमता-वर्धन सत्र अगस्त 2026 से चरणबद्ध तरीके से 12 ज़िलों में 500 से अधिक बैचों में आयोजित किए जाएँगे। इन सत्रों में विशेषज्ञ प्रशिक्षक नशे के सेवन की समस्या को मानसिक और सामाजिक पहलुओं को ध्यान में रखते हुए प्रशिक्षण देंगे। यह सुनिश्चित करने के लिए कि प्रशिक्षण से मिली सीख कक्षा में भी लागू हो, प्रत्येक शिक्षक अपने विद्यार्थियों और नशे के बीच प्रहरी के रूप में भूमिका निभाने की शपथ लेगा और प्रशिक्षण के बाद के सप्ताहों में विद्यार्थियों के साथ विभिन्न गतिविधियाँ आयोजित करेगा। प्रतिभागियों की प्रतिक्रिया और एक संरचित निगरानी प्रणाली के माध्यम से कार्यक्रम की पहुँच और प्रभावशीलता पर नज़र रखी जाएगी।

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Politics

भाजपा मशीनरी पंजाब और उसके युवाओं को बदनाम करने के लिए फर्जी वीडियो फैला रही है: हरपाल सिंह चीमा

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आम आदमी पार्टी (आप) के सीनियर नेता और पंजाब के कैबिनेट मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने राजस्थान का एक वीडियो शेयर करने, उसे गलत तरीके से पंजाब से जोड़ने और राज्य और उसके युवाओं को बदनाम करने की कोशिश करने के लिए पूर्व इंडियन क्रिकेटर और राज्यसभा मेंबर हरभजन सिंह पर निराशा जताई है।

मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने इस बात पर दुख जताया कि हरभजन सिंह, जिन्हें आप ने पंजाब के हितों को रिप्रेजेंट करने और राज्य के युवाओं के लिए काम करने के लिए राज्यसभा भेजा था, अब भाजपा के कैंपेन को प्रमोट कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “हरभजन सिंह को पंजाब के युवाओं को खेल के प्रति प्रेरित करने के लिए और उनके भविष्य से जुड़े मुद्दे उठाने के लिए अपने प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करना चाहिए था, न कि गुमराह करने वाला कंटेंट शेयर करना चाहिए था जो पंजाब की छवि को ठेस पहुंचाता है।”

हरभजन सिंह के शेयर किए गए वीडियो का ज़िक्र करते हुए उन्होंने बताया, “पंजाब पुलिस ने वीडियो की जांच की और पाया कि यह असल में भाजपा शासित राजस्थान के श्री गंगानगर का है और इसका पंजाब से कोई लेना-देना नहीं है।”

हरपाल सिंह चीमा ने आगे कहा, “तथ्यों की जांच करने के बजाय, भाजपा की आईटी मशीनरी दूसरे राज्यों से वीडियो उठाकर उन्हें पंजाब की घटनाओं के तौर पर दिखा रही है ताकि हमारे राज्य और उसके युवाओं को बदनाम किया जा सके।”

पंजाब सरकार के ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ मुहिम पर ज़ोर देते हुए, कैबिनेट मंत्री ने कहा, “भाजपा, नशों के विरुद्ध लड़ाई में भगवंत मान सरकार की तरक्की को कमज़ोर करने की कोशिश कर रही है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने एक ढृड़ ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ मुहिम शुरू किया है, और सरकार ड्रग्स को खत्म करने और पंजाब के युवाओं को बेहतर मौके देने के लिए हर लेवल पर काम कर रही है।”

पंजाब में भाजपा के रिकॉर्ड की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा, “भाजपा को अपना रिकॉर्ड भी देखना चाहिए। 2007 से 2017 तक अकाली-भाजपा सरकार के 10 सालों के दौरान ड्रग्स का खतरा बढ़ गया था। इसी दौरान ‘चिट्टा’ और ‘स्मैक’ जैसे शब्द पंजाब से बड़े पैमाने पर जुड़ गए, जिसकी वजह से अनगिनत युवाओं की ज़िंदगी ड्रग्स की गिरफ़्त में आकर बर्बाद हो गई।”

खेल ढांचे पर सरकार के फोकस के बारे में बताते हुए हरपाल सिंह चीमा ने कहा, “भगवंत मान सरकार युवाओं को पॉजिटिव विकल्प देने के लिए स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर को भी मजबूत कर रही है। पंजाब में 3,000 से ज़्यादा स्पोर्ट्स स्टेडियम बनाए गए हैं, जबकि 6,000 और तैयार किए जा रहे हैं। हम स्पोर्ट्स में इन्वेस्ट कर रहे हैं क्योंकि हम चाहते हैं कि पंजाब के युवा नशों से दूर रहें और एक हेल्दी और बेहतर भविष्य की ओर बढ़ें।”

मंत्री ने कहा, “पंजाब के युवा और किसान भाजपा के प्रोपेगैंडा से गुमराह नहीं होंगे। पंजाब के लोग आप सरकार के जमीनी स्तर पर किए गए काम और भाजपा की सोशल मीडिया पर गुमराह करने वाली पोस्ट के ज़रिए राज्य को बदनाम करने की कोशिशों के बीच का अंतर समझते हैं।”

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‘लाइक’ और ‘व्यू’ पाने के लिए, राजस्थान के एक वीडियो को पंजाब का बताकर झूठ फैलाया जा रहा है: बलतेज पन्नू

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आम आदमी पार्टी (आप) के पंजाब स्टेट मीडिया इंचार्ज बलतेज पन्नू ने पूर्व क्रिकेटर और राज्यसभा मेंबर हरभजन सिंह भज्जी और दूसरे सेलिब्रिटीज़ द्वारा सोशल मीडिया पर पंजाब को बदनाम करने के लिए चलाए जा रहे कैंपेन पर तीखा हमला किया है। उन्होंने कहा कि जिस पार्टी ने भज्जी को इज्ज़त दी और राज्यसभा की कुर्सी पर बिठाया, उसी ने उनकी पीठ में छुरा घोंपा और भाजपा से मिल गई। आज ये भ्रष्ट नेता और सेलिब्रिटीज़ भाजपा के इशारों पर नाच रहे हैं और उनके परोसे गए झूठ के पुलिंदे को अनदेखा करके और उन्हें वायरल करके पंजाब, पंजाब पुलिस और सरकार की पीठ में छुरा घोंपने की गंदी साज़िश रच रहे हैं।

मंगलवार को एक कॉन्फ्रेंस के दौरान मीडिया से बात करते हुए बलतेज पन्नू ने स्पष्ट किया कि हरभजन भज्जी और सोनू सूद जैसे सेलिब्रिटीज़ जो वीडियो पंजाब का बताकर सोशल मीडिया पर शेयर कर रहे हैं, वह पंजाब का नहीं, बल्कि राजस्थान का है। बिना कोई फैक्ट जाने, सिर्फ ‘लाइक’ और ‘व्यूज़’ पाने के लिए ऐसे फर्जी वीडियो पोस्ट करके पंजाब को बदनाम किया जा रहा है।

पन्नू ने सवाल किया कि ये नेता और सेलिब्रिटी तब चुप क्यों हैं जब मुंद्रा पोर्ट (गुजरात) से हजारों किलो ड्रग्स बरामद होने और चूहों द्वारा खाए जाने की खबरें आई थीं। ड्रग्स आज एक विश्व व्यापी समस्या है, जिसके खिलाफ एफबीआई के ‘ऑपरेशन हार्ड बॉल’ जैसे ऑपरेशन भी चलाए जा रहे हैं, लेकिन पंजाब में भाजपा की चाल के तहत राज्य को टारगेट किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ मुहिम के तहत जिला, विधानसभा, शहर और गांव लेवल पर ‘विलेज डिफेंस कमेटियों’ के जरिए ग्राउंड लेवल पर ड्रग्स के खिलाफ जंग लड़ी जा रही है। बॉर्डर पर एंटी-ड्रोन सिस्टम लगाए गए हैं और आम लोग डायरेक्ट ऐप के जरिए डीजीपी और मुख्यमंत्री को जानकारी भेज रहे हैं।

पंजाब पुलिस के परफॉर्मेंस के आंकड़े शेयर करते हुए उन्होंने कहा कि 1 मार्च, 2025 से 9 अगस्त, 2026 तक पंजाब पुलिस ने 56,267 केस दर्ज किए और 75,552 आरोपियों को नामजद किया। इसके अलावा 3,575 किलोग्राम हेरोइन, 509 किलोग्राम स्मैक, 880 किलोग्राम अफीम, 43,271 किलोग्राम पोस्ता (डोडे), 95 किलोग्राम से ज़्यादा चरस बरामद किया गया और 21 करोड़ 71 लाख 267 रुपये की ड्रग मनी ज़ब्त की गई।

पन्नू ने कहा कि पंजाब में ड्रग्स का खतरा पिछली सरकारों के समय 2007 से 2017 के बीच शुरू हुआ, जिसने एक पूरी पीढ़ी को बर्बाद कर दिया। आज मान सरकार की कोशिशों से युवाओं का ध्यान खेलों की तरफ गया है। भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम के कप्तान, महिला क्रिकेट टीम की कप्तान और भारतीय हॉकी टीम के 9 खिलाड़ी पंजाब के युवा हैं। हरभजन भज्जी पर निशाना साधते हुए उन्होंने पूछा कि खुद खिलाड़ी होते हुए उन्होंने पंजाब के बच्चों को खेलों से जोड़ने में क्या योगदान दिया?

पन्नू ने पंजाब के लोगों, पुलिस और विलेज डिफेंस कमेटियों के योद्धाओं की पीठ थपथपाते हुए कहा कि सरकार और पंजाब के लोग इस मुहिम में पूरी तरह डटे हुए हैं। उन्होंने भज्जी और दूसरों द्वारा पंजाब को बदनाम करने के लिए रची जा रही ऐसी झूठी साजिशों की कड़ी निंदा की।

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मुख्यमंत्री सेहत योजना (MMSY) के तहत ₹38.90 लाख की लागत से पोस्ट-बर्न कॉन्ट्रैक्चर के 75 उपचार किए गए

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आग कुछ ही मिनटों तक जलती है, लेकिन उससे होने वाला नुकसान कहीं अधिक समय तक बना रह सकता है। गंभीर रूप से जलने वाले व्यक्ति के लिए आग की लपटों से बाहर निकलना केवल शुरुआत होती है। इसके बाद बार-बार ड्रेसिंग, विभिन्न चिकित्सा प्रक्रियाओं, सर्जरी और महीनों तक चलने वाली रिकवरी की आवश्यकता हो सकती है। मुख्यमंत्री सेहत योजना (एमएमएसवाई) के तहत पंजाब में जलने के उपचार के हालिया आंकड़े इस मुश्किल सफर को बयाँ करते हैं। योजना के तहत ₹1.39 करोड़ की लागत से जलने के 265 उपचार उपलब्ध करवाए गए हैं।

24 वर्षीय अर्जुन कुमार उस समय घायल हो गए, जब उनके घर में शॉर्ट सर्किट के कारण आग लग गई। उन्हें उपचार के लिए बठिंडा ले जाया गया, जहाँ लगभग ₹50,000 का उपचार योजना के तहत कैशलेस उपलब्ध करवाया गया। उन्होंने अपने अनुभव को याद करते हुए कहा, “सब कुछ बहुत तेज़ी से हुआ।” उपचार कैशलेस होने की जानकारी मिलने के बाद, उन्होंने कहा कि वे अस्पताल के ख़र्चों की चिंता करने के बजाय अपने स्वस्थ होने पर ध्यान केंद्रित कर सके।

राज्य स्वास्थ्य एजेंसी (एसएचए), पंजाब से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत 31 से 45 वर्ष आयु वर्ग के पुरुषों के 61 उपचार हुए, जो सभी आयु-वर्गों में सबसे अधिक हैं, इन उपचारों पर ₹31.82 लाख ख़र्च हुए। 0 से 18 वर्ष आयु वर्ग के लड़कों के 39 उपचार हुए, जबकि इसी आयु वर्ग की लड़कियों के 27 उपचार किए गए।

महिलाओं में 19 से 30 वर्ष आयु वर्ग में सबसे अधिक 26 उपचार दर्ज किए गए, जबकि 31 से 45 वर्ष आयु वर्ग की महिलाओं के 21 उपचार हुए। सरल शब्दों में कहा जाए तो उपचार करवाने वाले लाभार्थियों में बच्चों, युवाओं और कामकाजी आयु वर्ग के लोगों की बड़ी संख्या रही।

पंजाब के ये आंकड़े जलने की चोटों के लंबे समय तक रहने वाले प्रभावों को लेकर मेडिकल रिसर्च के निष्कर्षों से भी मेल खाते हैं। पब्मेड में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, पंजाब के एक तृतीयक(टर्शरी) अस्पताल में जलने से पीड़ित 892 मरीज़ों पर किए गए अध्ययन में पाया गया कि 79 प्रतिशत मरीज़ 15 से 45 वर्ष की आयु के थे। यह दर्शाता है कि जलने की घटनाएँ लोगों को उनकी कामकाजी उम्र में गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती हैं। अध्ययन में भारत में सुलभ और किफायती बर्न केयर की आवश्यकता पर भी ज़ोर दिया गया।

इस संबंध में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा, “जलने की चोट आग बुझने के साथ ख़त्म नहीं होती। कई मरीज़ों के लिए रिकवरी का अर्थ बार-बार होने वाली चिकित्सा प्रक्रियाएँ , रिहैबिलिटेशन और लंबे समय तक देखभाल होता है। हमारी प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि इन परिवारों के लिए आर्थिक कठिनाई एक और चोट न बन जाए। मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत मरीज़ों को इस चिंता के बजाय कि उपचार का ख़र्च कैसे वहन करेंगे, अपने स्वास्थ्य होने , रिकवरी और जीवन को फिर से व्यवस्थित करने पर ध्यान केंद्रित करने में सक्षम होना चाहिए।”

सबसे महत्त्वपूर्ण आंकड़ों में से एक पोस्ट-बर्न कॉन्ट्रैक्चर का है, जिसके 75 उपचार किए गए और इन पर ₹38.90 लाख ख़र्च हुए।

पोस्ट-बर्न कॉन्ट्रैक्चर जलने की चोट के बाद बनने वाले स्कार टिश्यू के सिकुड़ने के कारण हो सकता है। इससे शरीर की गतिविधियाँ सीमित हो जाती हैं और रोज़मर्रा के सामान्य काम करना भी मुश्किल हो सकता है। इस प्रकार, जलने की चोट का प्रभाव त्वचा के ठीक हो जाने के काफ़ी समय बाद तक बना रह सकता है।

अन्य उपचार प्रक्रियाओं में शरीर की कुल सतह के जले हुए हिस्से का उपचार, टिश्यू एक्सपैंडर, बिजली और रसायनों से होने वाली जलन का उपचार, एंटीबायोटिक ड्रेसिंग, स्किन फ्लैप, डिब्राइडमेंट तथा कान/नाक का रिकंस्ट्रक्शन शामिल हैं। ये केवल सौंदर्य संबंधी समस्याएँ नहीं हैं। कुछ मरीज़ों के लिए, ये उपचार उनकी गतिविधियों, कार्यक्षमता और आत्मविश्वास को फिर से हासिल करने के लिए आवश्यक होते हैं।

आंकड़ों में शामिल ज़िलों में बठिंडा में सबसे अधिक लाभार्थी दर्ज किए गए, जहाँ 57 लोगों को 63 उपचार उपलब्ध करवाए गए। यहाँ उपचार पर ₹33.51 लाख ख़र्च हुए। इसके बाद फरीदकोट में 40 लाभार्थी और पटियाला में 39 लाभार्थी दर्ज किए गए। वहीं, रूपनगर, एस.ए.एस. नगर और फतेहगढ़ साहिब में एक-एक लाभार्थी दर्ज किया गया।

डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि उपचार से संबंधित आंकड़े जलने से पीड़ित मरीज़ों, विशेषकर बच्चों, युवाओं और कामकाजी आयु वर्ग के लोगों को समय पर व्यापक उपचार उपलब्ध करवाने के महत्त्व को दर्शाते हैं, क्योंकि लाभार्थियों में इन वर्गों की उल्लेखनीय संख्या है।उन्होंने कहा, “जलने की घटना कुछ ही सेकंड में किसी व्यक्ति की ज़िंदगी बदल सकती है, लेकिन रिकवरी में अक्सर काफी अधिक समय लगता है। इसलिए जलने से पीड़ित व्यक्ति के लिए कैशलेस उपचार का अर्थ बहुत व्यावहारिक है—जब आग आख़िरकार बुझ जाती है, तो परिवार को एक और आग अर्थात् अस्पताल के बिल का सामना नहीं करना पड़ता।”

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