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Tarn Taran Bypoll: 40 साल में सबसे कम मतदान, अब परिणाम तयकरेंगे 2027 की Preparation कितनी

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तरनतारन विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव के नतीजों का अब सबको बेसब्री से इंतज़ार है। यह सिर्फ एक उपचुनाव नहीं, बल्कि पंजाब की सियासत के लिए आने वाले 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी का टेस्ट माना जा रहा है। सभी बड़ी पार्टियां — आप, अकाली दल, कांग्रेस और भाजपा — इस नतीजे को अपने भविष्य की दिशा तय करने वाला इम्तिहान मान रही हैं।

40 साल बाद सबसे कम मतदान

इस बार तरनतारन में 40 साल बाद सबसे कम मतदान हुआ है।
शाम 6 बजे तक कुल 60.95% वोटिंग हुई।
अगर पिछले आंकड़ों पर नज़र डालें, तो 1985 में सिर्फ 57.5% मतदान हुआ था। उसके बाद हर चुनाव में वोटिंग इससे ज़्यादा रही। यानी इस बार मतदाताओं का उत्साह औसत ही रहा।

सालमतदान प्रतिशत
197766.2%
198067.4%
198557.5%
1992निर्विरोध विधायक घोषित
199763.8%
200262.9%
200765.7%
201277.1%
201772.2%
202266.0%
202560.95%

क्यों अहम है यह चुनाव

इस उपचुनाव की जीत सभी दलों के लिए बहुत मायने रखती है।
राजनीतिक पार्टियां इसे 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले अपने परफॉर्मेंस टेस्ट के रूप में देख रही हैं।
इस नतीजे से साफ होगा कि पिछले साढ़े तीन साल में किस दल ने अपनी ज़मीनी पकड़ मजबूत की है।

AAP की सबसे बड़ी परीक्षा

सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (AAP) के लिए यह चुनाव प्रतिष्ठा का सवाल है।
पार्टी इस जीत से यह संदेश देना चाहती है कि पंजाब में अभी भी “आप” के खिलाफ कोई बड़ी लहर नहीं है।

आप ने इस बार भी अपना पुराना विकास + पंथकफार्मूला अपनाया।
इस रणनीति को मजबूती उस वक्त मिली जब पूर्व अकाली विधायक हरमीत सिंह संधू आप में शामिल हो गए।
संधू पंथक राजनीति में जाना-पहचाना चेहरा हैं — वे 2002, 2007 और 2012 में लगातार विधायक रहे।
2017 और 2022 में वे दूसरे नंबर पर रहे थे। पिछली बार उन्हें आप के दिवंगत विधायक कश्मीर सिंह सोहल ने हराया था।
इस बार संधू आप के प्रत्याशी हैं और पार्टी ने उन्हें “विकास का चेहरा” बताकर मैदान में उतारा है।

शिअद का जवाब सुखविंदर कौर रंधावा

हरमीत संधू की आप में एंट्री से शिरोमणि अकाली दल (SAD) को झटका लगा, लेकिन पार्टी ने तुरंत पलटवार करते हुए सुखविंदर कौर रंधावा को टिकट दिया।
वह एक धर्मी फौजी की पत्नी हैं और इलाके में उनका अच्छा जनसंपर्क है।
गांवों के कई सरपंचों और पार्षदों ने खुलकर उनका समर्थन किया है।
अकाली दल इस सीट पर पंथक वोटों को अपने पक्ष में बनाए रखने की पूरी कोशिश में है।

BJP की भूमिका

भाजपा के लिए तरनतारन में खोने को कुछ नहीं, लेकिन अगर वह अच्छा प्रदर्शन करती है तो उसका सीधा असर आप के पक्ष में जा सकता है।
क्योंकि इस सीट पर पंथक वोट कई हिस्सों में बंट रहे हैं — अकाली दल, आप, वारिस पंजाब दे समर्थित उम्मीदवार मनदीप सिंह खालसा और अन्य छोटे अकाली दलों के बीच।
इस वोट बंटवारे से मुकाबला और दिलचस्प हो गया है।

कांग्रेस की वापसी की कोशिश

कांग्रेस भी इस उपचुनाव में अपनी खोई हुई ज़मीन दोबारा पाने की कोशिश कर रही है।
2017 में कांग्रेस के धर्मबीर अग्निहोत्री ने यह सीट जीती थी, लेकिन 2022 में पार्टी तीसरे स्थान पर आ गई थी।
अब कांग्रेस चाहती है कि इस नतीजे से वह फिर से मजबूती दिखा सके और 2027 की तैयारी को नई दिशा दे सके।

विकास बनाम पंथक एजेंडा

पहले इस इलाके में पंथक राजनीति हावी रहती थी, लेकिन अब लोग विकास को भी प्राथमिकता देने लगे हैं।
आप नेताओं ने अपने साढ़े तीन साल के विकास रिपोर्ट कार्ड को घर-घर पहुंचाने की कोशिश की।
वहीं, अकाली दल और कांग्रेस ने धार्मिक और सामाजिक मुद्दों पर जोर दिया।
यानी इस बार तरनतारन में मुकाबला सिर्फ पंथक नहीं, बल्कि विकास बनाम पंथक एजेंडे का भी है।

अब नतीजों का इंतज़ार

तरनतारन उपचुनाव की मतगणना 14 नवंबर को होगी।
सभी उम्मीदवारों और समर्थकों की निगाहें अब इसी दिन पर टिकी हैं।
इसका नतीजा न सिर्फ एक सीट का फैसला करेगा, बल्कि यह भी बताएगा कि पंजाब की जनता 2027 में किस दिशा में सोच रही है

तरनतारन उपचुनाव भले ही एक सीट का चुनाव हो,
लेकिन इसके नतीजे पूरे पंजाब की राजनीति को प्रभावित करेंगे।
यह तय करेगा कि साढ़े तीन साल बाद कौन सी पार्टी मैदान में कितनी तैयार है,
किसके पास जनता का भरोसा है,
और किसके लिए अब रणनीति बदलने का वक्त आ गया है।

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नशों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई, सीमा पार Drug Module का भंडाफोड़, करोड़ों की हेरोइन समेत 3 गिरफ्तार!

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पंजाब में नशों के खिलाफ चल रही सख्त मुहिम के तहत बड़ी सफलता हासिल करते हुए एएनटीएफ (ANTF) और बीएसएफ (BSF) ने संयुक्त ऑपरेशन में एक अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है। ‘युद्ध नशों के विरुद्ध’ अभियान के तहत की गई इस कार्रवाई में सीमा पार से चल रहे नेटवर्क को बेनकाब किया गया।

इस ऑपरेशन के दौरान तीन मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जिनकी पहचान जगजीत सिंह, मनप्रीत सिंह और रोशन सिंह के रूप में हुई है। तीनों आरोपी अमृतसर जिले के रहने वाले हैं। पुलिस ने इनके कब्जे से 24.5 किलोग्राम हेरोइन, करीब 21 लाख रुपये की ड्रग मनी और एक ड्रोन बरामद किया है, जिसका इस्तेमाल तस्करी के लिए किया जा रहा था।

पुलिस जांच में सामने आया है कि ये आरोपी पाकिस्तान स्थित तस्करों के सीधे संपर्क में थे और ड्रोन के जरिए नशीले पदार्थों की सप्लाई कर रहे थे। इस पूरे नेटवर्क के जरिए ड्रग्स को भारत में लाकर आगे सप्लाई किया जाता था।

इस संबंध में जानकारी देते हुए Gaurav Yadav ने बताया कि मामले की गहन जांच जारी है और आने वाले दिनों में और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब पुलिस राज्य को नशा मुक्त बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और ऐसे नेटवर्क के खिलाफ सख्त कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।

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Chandigarh

पंजाब में Universal Healthcare Model बना मिसाल, हर परिवार को बिना शर्त 10 लाख तक कैशलेस इलाज की सुविधा!

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पंजाब सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक बड़ा कदम उठाते हुए ऐसा मॉडल पेश किया है, जो देश की पारंपरिक योजनाओं से अलग और ज्यादा व्यापक माना जा रहा है। मुख्यमंत्री Bhagwant Mann के नेतृत्व में शुरू की गई मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना के तहत अब राज्य के हर परिवार को बिना किसी शर्त के 10 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है। बढ़ते इलाज के खर्च के बीच यह योजना लाखों परिवारों के लिए बड़ी राहत बनकर सामने आई है।

जहां केंद्र सरकार की Ayushman Bharat योजना सीमित पात्रता और 5 लाख रुपये तक के कवर तक ही सीमित है, वहीं पंजाब का यह मॉडल हर निवासी को कवर करता है, चाहे उसकी आय कुछ भी हो। यही कारण है कि इसे Universal Healthcare Model के तौर पर देखा जा रहा है, जिसमें इलाज का अधिकार किसी सूची या शर्त पर नहीं बल्कि जरूरत के आधार पर तय होता है।

वित्तीय दृष्टि से भी पंजाब का यह मॉडल काफी मजबूत माना जा रहा है। केंद्र सरकार जहां 140 करोड़ आबादी के लिए 9,500 करोड़ रुपये का बजट रखती है, वहीं पंजाब सरकार करीब 3 करोड़ लोगों के लिए 2,000 करोड़ रुपये खर्च कर रही है। इस हिसाब से प्रति व्यक्ति निवेश कई गुना ज्यादा है, जो राज्य सरकार की प्राथमिकताओं को साफ तौर पर दर्शाता है।

इस योजना के तहत करीब 65 लाख परिवारों को लाभ मिलने की उम्मीद है। मरीज 2,300 से अधिक इलाज पैकेजों के जरिए दिल की बीमारी, कैंसर, किडनी से जुड़ी समस्याएं, एक्सीडेंट केस और अन्य गंभीर बीमारियों का मुफ्त इलाज करवा सकते हैं। इसके लिए 900 से अधिक अस्पतालों का नेटवर्क तैयार किया गया है, जहां कैशलेस सुविधा उपलब्ध है।

योजना का एक बड़ा फायदा इसकी आसान प्रक्रिया भी है। जहां अन्य योजनाओं में पात्रता साबित करने के लिए कई दस्तावेजों की जरूरत होती है, वहीं पंजाब में लोग सिर्फ आधार कार्ड या वोटर आईडी के जरिए आसानी से रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं। इसके लिए सेवा केंद्रों और Common Service Centers के साथ-साथ ऑनलाइन आवेदन की सुविधा भी दी गई है। साथ ही, गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक करने और रजिस्ट्रेशन कराने के लिए विशेष अभियान भी चलाए जा रहे हैं।

इस योजना का असर जमीनी स्तर पर भी देखने को मिल रहा है। कई ऐसे परिवार, जो पहले इलाज के खर्च के कारण परेशान रहते थे, अब बिना किसी आर्थिक दबाव के इलाज करवा पा रहे हैं। यह मॉडल न सिर्फ स्वास्थ्य सेवाओं को आसान बना रहा है, बल्कि लोगों के जीवन स्तर को भी बेहतर करने में मदद कर रहा है।

स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि यह योजना सिर्फ एक सरकारी स्कीम नहीं, बल्कि एक सोच में बदलाव है, जहां स्वास्थ्य सेवा को अधिकार के रूप में देखा जा रहा है। उनका कहना है कि पंजाब सरकार का उद्देश्य हर व्यक्ति तक बेहतर और सस्ती स्वास्थ्य सुविधा पहुंचाना है, ताकि कोई भी व्यक्ति इलाज के अभाव में परेशान न हो।

कुल मिलाकर, पंजाब का यह यूनिवर्सल हेल्थकेयर मॉडल देश के लिए एक नई दिशा दिखाता है, जहां स्वास्थ्य सेवाएं सीमित नहीं बल्कि सभी के लिए समान रूप से उपलब्ध कराई जा रही हैं।

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O.T.S स्कीम को मिला जोरदार समर्थन: 111.16 करोड़ की वसूली, 31 मार्च के बाद सख्त कार्रवाई की चेतावनी!

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पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने बताया कि वैट बकाये के लिए शुरू की गई एकमुश्त निपटान (OTS) स्कीम को व्यापारियों का अच्छा रिस्पॉन्स मिला है। इस योजना के तहत अब तक करीब 7,845 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें कुल 298.39 करोड़ रुपये के बकाये शामिल हैं। इनमें से सरकार 111.16 करोड़ रुपये की वसूली भी कर चुकी है।

वित्त मंत्री ने कहा कि यह स्कीम पुराने टैक्स बोझ को खत्म करने और राज्य के राजस्व को बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। उन्होंने बताया कि लुधियाना, अमृतसर, जालंधर, पटियाला और रोपड़ जैसे प्रमुख जिलों से इस योजना को अच्छा समर्थन मिला है, जो यह दर्शाता है कि कारोबारियों में इसके प्रति जागरूकता बढ़ रही है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि यह राहत योजना 31 मार्च 2026 तक ही लागू है। इसके बाद सरकार सख्त रुख अपनाएगी और बकाया वसूली के लिए कानूनी कार्रवाई तेज की जाएगी। इसके लिए पहले ही करीब 8,000 संपत्तियों की पहचान कर ली गई है, जिन पर जरूरत पड़ने पर कार्रवाई की जाएगी।

वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कारोबारियों से अपील करते हुए कहा कि वे इस अंतिम मौके का लाभ उठाएं और अपने लंबित वैट बकाये का निपटान कर लें। उन्होंने कहा कि OTS स्कीम के तहत ब्याज और जुर्माने में बड़ी छूट दी जा रही है, जिससे व्यापारियों को राहत मिल रही है और वे अपने वित्तीय रिकॉर्ड को साफ कर सकते हैं।

उन्होंने चेतावनी दी कि समय सीमा खत्म होने के बाद सरकार का मौजूदा रियायती रुख समाप्त हो जाएगा और बिना किसी छूट के सख्त वसूली प्रक्रिया लागू की जाएगी। ऐसे मामलों में सामान्य कानूनी जांच और कार्रवाई की जाएगी।

वित्त मंत्री ने कहा कि इस योजना को मिला समर्थन मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में चल रही पारदर्शी और व्यापार-समर्थक नीतियों पर लोगों के भरोसे को दर्शाता है। उन्होंने बताया कि इस पहल का उद्देश्य न केवल राजस्व बढ़ाना है, बल्कि मुकदमेबाजी को कम करना और व्यापारियों को नई शुरुआत का अवसर देना भी है।

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