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LPG गैस की जमाखोरी पर सख्त चेतावनी, मुख्यमंत्री भगवंत मान ने दिए कड़े निर्देश

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पंजाब के मुख्यमंत्री Bhagwant Mann ने राज्य में एलपीजी गैस की संभावित कमी और जमाखोरी को लेकर सख्त रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा है कि पंजाब में किसी भी कीमत पर एलपीजी गैस की कमी नहीं होने दी जाएगी और इस संबंध में राज्य के सभी डिप्टी कमिश्नरों को जरूरी निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि सरकार लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है और यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि हर जिले में गैस सिलेंडरों की पर्याप्त आपूर्ति बनी रहे। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि यदि कहीं भी गैस की कृत्रिम कमी पैदा करने की कोशिश की जाती है या जमाखोरी की जाती है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ तुरंत और सख्त कार्रवाई की जाए।

मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि कुछ लोग मुनाफा कमाने के लिए गैस सिलेंडरों की जमाखोरी कर उन्हें ब्लैक में बेचने की कोशिश करते हैं, जो कि पूरी तरह गैरकानूनी है। ऐसे लोगों को किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि बाजार में एलपीजी गैस की सप्लाई पर कड़ी नजर रखी जाए और जरूरत पड़ने पर जांच अभियान भी चलाया जाए।

भगवंत मान ने कहा कि पंजाब सरकार का पहला लक्ष्य आम लोगों को राहत देना और उनकी जरूरतों को पूरा करना है। इसलिए यह सुनिश्चित किया जाएगा कि राज्य के किसी भी हिस्से में लोगों को एलपीजी गैस के लिए परेशानी का सामना न करना पड़े।

मुख्यमंत्री ने जनता से भी अपील की कि अगर कहीं गैस सिलेंडर की जमाखोरी या ब्लैक में बिक्री की जानकारी मिलती है, तो इसकी सूचना तुरंत प्रशासन को दें ताकि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सके। उन्होंने कहा कि सरकार आम जनता के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और किसी भी तरह की कालाबाजारी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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National

1 मई से पंजाब में कम होंगे बिजली कट, मंत्री संजीव अरोड़ा का बड़ा ऐलान

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पंजाब में बढ़ती गर्मी और लगातार लग रहे बिजली कटों के बीच राहत भरी खबर सामने आई है। राज्य के बिजली मंत्री Sanjeev Arora ने बड़ा बयान देते हुए कहा है कि 1 मई से पूरे राज्य में बिजली सप्लाई काफी हद तक सामान्य हो जाएगी और कटौती में भारी कमी आएगी।

मंत्री ने बताया कि इस साल गर्मी समय से पहले और अधिक तीव्र होने के कारण अप्रैल महीने में ही बिजली की मांग अचानक बढ़ गई। इसी वजह से कुछ इलाकों में बिजली कट लगाने पड़े। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह समस्या सिर्फ पंजाब तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे उत्तर भारत में इस तरह का दबाव देखा जा रहा है।

संजेव अरोड़ा ने कहा कि मौजूदा हालात को देखते हुए विभाग ने ग्रिड अपग्रेडेशन और मेंटेनेंस से जुड़े कई काम फिलहाल रोक दिए हैं, ताकि लोगों को बिना रुकावट बिजली सप्लाई दी जा सके। इसके अलावा कुछ स्थानों पर गेहूं की फसल को आग से बचाने के लिए सुरक्षा के तौर पर अस्थायी कट भी लगाए गए।

उन्होंने बताया कि पंजाब में बिजली ढांचे को मजबूत बनाने के लिए करीब 6000 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। यह काम 15 मई तक पूरा करने का लक्ष्य था, लेकिन फिलहाल प्राथमिकता लगातार बिजली आपूर्ति बनाए रखने को दी जा रही है।

मंत्री ने भरोसा दिलाया कि 1 मई से बिजली की कमी में बड़ी गिरावट आएगी और लोगों को लगातार सप्लाई देने की पूरी कोशिश की जाएगी। साथ ही उन्होंने लोगों से अपील की कि वे बिजली का संयम से इस्तेमाल करें और इस दौरान सरकार का सहयोग करें, ताकि स्थिति जल्द सामान्य हो सके।

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National

Arvind Kejriwal का बड़ा ऐलान: जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की अदालत में नहीं होंगे पेश

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आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री Arvind Kejriwal ने दिल्ली हाई कोर्ट की जस्टिस Swarna Kanta Sharma को एक महत्वपूर्ण पत्र लिखकर बड़ा फैसला लिया है। अपने पत्र में केजरीवाल ने स्पष्ट किया कि वह अब न तो व्यक्तिगत रूप से और न ही अपने वकील के माध्यम से उनकी अदालत में पेश होंगे।

केजरीवाल ने पत्र में लिखा कि उन्हें इस अदालत से न्याय मिलने की उम्मीद नहीं रही। उन्होंने कहा कि यह निर्णय उन्होंने अपनी अंतरात्मा की आवाज पर लिया है और अब वह Mahatma Gandhi के सत्याग्रह के रास्ते पर चलने का फैसला कर रहे हैं। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के किसी भी फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का अधिकार सुरक्षित रखते हैं।

गौरतलब है कि दिल्ली हाई कोर्ट ने हाल ही में कथित शराब घोटाले से जुड़े मामले में केजरीवाल की जज बदलने की मांग को खारिज कर दिया था। केजरीवाल का आरोप था कि केस की सुनवाई कर रही जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा द्वारा पक्षपात किया जा रहा है और इसलिए मामले को किसी अन्य बेंच को सौंपा जाना चाहिए।

हालांकि, अदालत ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया और याचिका को खारिज कर दिया। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश की टिप्पणी के बाद यह फैसला लिया गया।

याचिका खारिज होने के बाद केजरीवाल द्वारा लिया गया यह कदम अब राजनीतिक और कानूनी हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। अब यह देखना अहम होगा कि आगे इस मामले में क्या कानूनी मोड़ आता है और क्या केजरीवाल इस मुद्दे को सुप्रीम कोर्ट तक ले जाते हैं।

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Health

Bhagwant Mann सरकार की ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ के तहत गंभीर हालत में जन्मी नवजात बच्ची के स्वस्थ होने से डॉक्टरों की चिंता उम्मीद में बदली

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नवजात की पहली किलकारी राहत लेकर आनी चाहिए, लेकिन कई बार यह सन्नाटा भी लेकर आती है। बठिंडा जिले के रामपुरा फूल स्थित अग्रवाल अस्पताल में एक बच्ची का जन्म हुआ, लेकिन उसके जीवन की जंग अभी शुरू ही हुई थी।

सिर्फ 33 सप्ताह में जन्मी रेशम सिंह और गुरमेल कौर की बेटी समय से पहले बेहद नाजुक हालत में इस दुनिया में आई। उसका वजन केवल 1.926 किलोग्राम था, जो सामान्य पूर्णकालिक जन्म वजन (लगभग 2.5 से 4 किलोग्राम) से काफी कम है। जन्म के पहले ही पल से उसे सांस लेने में कठिनाई हो रही थी। बिना चिकित्सकीय सहायता के सांस लेना संभव नहीं था। ऐसे हालात में समय गंवाने की कोई गुंजाइश नहीं थी।

डॉ. सुरिंदर अग्रवाल (एमडी पीडियाट्रिक्स), जिनके पास 24 वर्षों का अनुभव है, ने अपनी टीम के साथ तुरंत उपचार शुरू किया। बच्ची को एनआईसीयू में भर्ती किया गया, जहां मशीनें वह काम कर रही थीं, जो उसके अविकसित फेफड़े नहीं कर पा रहे थे। मॉनिटर पर हर धड़कन और हर सांस पर नजर रखी जा रही थी—हर पल अनिश्चितता और हर पल महत्वपूर्ण था।

इसके बाद 17 दिनों तक लगातार देखभाल और सही उपचार जारी रहा। नवजात को 10 दिनों तक कंटीन्यूअस पॉजिटिव एयरवे प्रेशर (CPAP) सहायता दी गई, इसके बाद 4 दिनों तक ऑक्सीजन सपोर्ट दिया गया। इस दौरान बच्ची को पीलिया हो गया, जिसका इलाज फोटोथेरेपी से किया गया। सीमित कंगारू मदर केयर के जरिए सावधानीपूर्वक पोषण दिया गया, ताकि उसकी नाजुक स्थिति प्रभावित हुए बिना उसे गर्माहट और स्थिरता मिल सके।

डॉ. अग्रवाल ने कहा, “एनआईसीयू में सुधार अचानक नहीं आता, यह धीरे-धीरे स्थिर संकेतों के साथ आता है।” धीरे-धीरे सुधार दिखना शुरू हुआ।

सांस सामान्य होने लगी। प्रतिक्रियाएं बेहतर हुईं। जो नाजुक शरीर पहले संघर्ष कर रहा था, वह दिन-ब-दिन मजबूत होने लगा। डॉ. अग्रवाल ने कहा, “कई बार बच्चे को बचाना सिर्फ इलाज पर नहीं, बल्कि सही समय पर निर्भर करता है। थोड़ी-सी देरी भी सब कुछ बदल सकती है।”

इस मामले में कोई देरी नहीं हुई। मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना के तहत परिवार को कैशलेस इलाज मिला, जिससे डॉक्टर बिना किसी आर्थिक चिंता के पूरी तरह उपचार पर ध्यान केंद्रित कर सके।

17 दिनों के इलाज के बाद बच्ची को स्थिर हालत में छुट्टी दे दी गई। अब उसका वजन 2.106 किलोग्राम है। हालांकि वह अभी भी नाजुक है, लेकिन पहले से काफी स्वस्थ है। नवजात अपने माता-पिता की गोद में जीवित, स्थिर और स्वस्थ हालत में अस्पताल से बाहर आई।

एक अन्य मामले में, होशियारपुर के मनिंदर सिंह ने अपना अनुभव साझा किया। उनकी बेटी गुरकीरत कौर, जिसका जन्म इसी वर्ष 14 अप्रैल को हुआ था, को भी जन्म के बाद नवजात देखभाल की जरूरत पड़ी। उन्होंने कहा, “अस्पताल में उसका अच्छा इलाज हुआ और पूरा खर्च मुख्यमंत्री स्वास्थ्य कार्ड के तहत कवर हो गया।”

रजिस्ट्रेशन उसी दिन पूरा हो गया और अब परिवार को हर साल 10 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य कवर मिल रहा है।

मनिंदर सिंह ने धन्यवाद देते हुए कहा, “इसलिए ‘मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना’ बहुत महत्वपूर्ण है। जो व्यक्ति अपनी रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने के लिए संघर्ष करता है, वह भी अपने बच्चे के लिए बेहतर इलाज ले सकता है। यह बहुत बड़ी बात है।”

पंजाब के एनआईसीयू में अभी भी खामोशी होती है, लेकिन अब वह डर नहीं, बल्कि उम्मीद से भरी होती है।

यह उम्मीद बिल्कुल शांत और स्थिर होती है, जिसमें मॉनिटर हर दिन और मजबूत होती किसी नन्हे दिल की धड़कन दिखाता है, और कई बार यही खामोशी और स्थिरता सब कुछ बदलने के लिए काफी होती है।

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