Punjab
जालंधर में आतिशी के VIDEO पर बवाल:AAP कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस विधायक का आवास घेरा
दिल्ली विधानसभा में आम आदमी पार्टी की विधायक एवं पूर्व सीएम आतिशी को लेकर सिख गुरुओं के अपमान का आरोप सामने आने के बाद सियासत गरमा गई है। इस मामले में इकबाल सिंह की शिकायत पर FIR दर्ज की गई है। जिसमें कांग्रेस विधायक परगट सिंह, सुखपाल खैरा सहित एक अन्य व्यक्ति के नाम शामिल बताए जा रहे हैं।
इस मामले के विरोध में शुक्रवार को आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस विधायक परगट सिंह के जालंधर स्थित आवास का घेराव किया। प्रदर्शन के दौरान परगट सिंह घर से बाहर आए, लेकिन पुलिस ने उन्हें आप नेताओं के पास जाने से रोक लिया।
इस दौरान मीडिया से बातचीत करते हुए परगट सिंह ने कहा कि दिल्ली विधानसभा की पूरी घटना वीडियो में मौजूद है। अगर वीडियो से कोई छेड़छाड़ हुई है तो वह भाजपा ने की है और यदि वीडियो में कोई आपत्तिजनक बयान है तो वह आम आदमी पार्टी के नेताओं द्वारा दिया गया है।

कांग्रेस विधायक और पुलिस की नोकझोंक।
पंजाब का हालात बेहद खराब
परगट सिंह ने पंजाब की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि राज्य में हालात बेहद खराब हैं, लेकिन आज तक किसी भी बड़े मामले में फोरेंसिक जांच नहीं करवाई गई। उन्होंने कहा कि दिल्ली विधानसभा के स्पीकर द्वारा जालंधर के पुलिस कमिश्नर को बुलाया जाना भी कई सवाल खड़े करता है।
सीएम मान और डीजीपी से किए सवाल
उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत मान और डीजीपी से सवाल करते हुए कहा कि बेअदबी के 4 बड़े मामलों में आज तक एक भी फाइल आगे नहीं बढ़ी। देशभर में सिखों और किसानों के खिलाफ लगातार प्रोपेगैंडा चलाया गया, लेकिन इस संबंध में दी गई उनकी शिकायतों पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।

कांग्रेस विधायक के आवास के बाहर आप कार्यकर्ता।
सरकार मीडिया को डरा कर चुप कराना चाहती
परगट सिंह ने यह भी आरोप लगाया कि एक एसएसपी की कथित ऑडियो सामने आने के बाद उसे छुट्टी पर भेज दिया गया, लेकिन उसकी भी फोरेंसिक जांच नहीं करवाई गई। उन्होंने कहा कि सरकार मीडिया को डराकर चुप करवाने की कोशिश कर रही है।
आप से खुली बहस करने को तैयार
उन्होंने आम आदमी पार्टी को खुली बहस की चुनौती देते हुए कहा कि “घर पर आकर खुली डिबेट करें, मैं किसी से डरने वाला नहीं हूं।” उन्होंने कहा कि दिल्ली के नेता पंजाब आकर राजनीति कर रहे हैं, लेकिन उन्हें यहीं रहना है और इसका जवाब भी यहीं देना पड़ेगा।

मीडिया से बात करते कांग्रेस विधायक परगट सिंह।
आप विधायकों में दम नहीं
परगट सिंह ने आरोप लगाया कि पंजाब में शायद ही कोई ऐसा जिला बचा हो जहां रोजाना कोई आपराधिक घटना न हो। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी के विधायकों में कोई दम नहीं है और मुख्यमंत्री भगवंत मान पूरी तरह विफल हो चुके हैं। इसके अलावा सबसे अंत में उन्होंने कहा कि मेरे खिलाफ चाहे 10 पर्चे दर्ज कर दो, मैं नहीं डरता। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी भाजपा की बी-टीम की तरह काम कर रही है।
Punjab
आप सांसद मालविंदर कंग ने पंजाब यूनिवर्सिटी में पंजाबी साइनबोर्ड फिर से लगाने के फैसले का किया स्वागत
आम आदमी पार्टी (आप) के सांसद मालविंदर सिंह कंग ने पंजाब यूनिवर्सिटी के अपने कैंपस में पंजाबी साइनबोर्ड और नेमप्लेट फिर से लगाने के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने इसे पंजाब की भाषाई और सांस्कृतिक विरासत को बचाने की दिशा में एक ज़रूरी कदम बताया।
कंग ने पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ में साइनबोर्ड और नेमप्लेट से पंजाबी (गुरुमुखी) हटाने पर कड़ा एतराज़ जताया था। उन्होंने इस कदम को पंजाब के इतिहास, संस्कृति और पहचान को दिखाने वाली भाषा का अपमान बताया।
इस मामले को भारत के माननीय उपराष्ट्रपति और पंजाब यूनिवर्सिटी के चांसलर, सीपी राधाकृष्णन के सामने उठाते हुए, कंग ने उनसे तुरंत दखल देने की मांग की ताकि पंजाबी को उसकी सही जगह और सम्मान मिले, खासकर एक ऐसे संस्थान में जो पंजाब के नाम और विरासत को बनाए रखता है।
इस बारे में जानकारी सांझा करते हुए, कंग ने कहा कि उन्हें पंजाब यूनिवर्सिटी के वाइस-चांसलर से एक ऑफिशियल लेटर मिला है, जिसमें कन्फर्म किया गया है कि पंजाबी साइनबोर्ड लगाने का प्रोसेस शुरू हो चुका है। लेटर के मुताबिक, यूनिवर्सिटी ने पंजाबी साइनबोर्ड के लिए ऑर्डर दे दिया है और उन्हें लगाने का काम जल्द से जल्द पूरा कर लिया जाएगा।
इस फैसले का स्वागत करते हुए, कंग ने कहा कि इससे एक मजबूत संदेस जाता है कि पंजाब के वजूद और पंजाबी भाषा की इज्ज़त को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। उन्होंने आगे कहा कि पंजाबी सिर्फ एक भाषा नहीं है, बल्कि पंजाब की रिच कल्चरल विरासत और सामूहिक पहचान की निशानी है, जिसका हर लेवल पर सम्मान किया जाना चाहिए और उसे बढ़ावा दिया जाना चाहिए।
कंग ने इस मामले पर तुरंत ध्यान देने के लिए भारत के माननीय उपराष्ट्रपति और पंजाब यूनिवर्सिटी के चांसलर, श्री सी. पी. राधाकृष्णन का धन्यवाद किया। उन्होंने यूनिवर्सिटी प्रशासन की भी तारीफ़ की कि उन्होंने सुधार के कदम उठाए और पंजाब के लोगों की चिंताओं पर पॉज़िटिव जवाब दिया।
आप सांसद ने कहा कि पंजाब से जुड़े हर संस्थान में पंजाबी के सम्मान, अहमियत और हक की हमेशा रक्षा होनी चाहिए।
Punjab
मोहाली को मिला नया मेयर, विधायक कुलवंत सिंह के बेटे सरबजीत समाना ने संभाली कमान
मोहाली नगर निगम को नया मेयर मिल गया है। मंगलवार को हुए मेयर चुनाव में आम आदमी पार्टी के नेता और विधायक कुलवंत सिंह के पुत्र सरबजीत सिंह समाना को मेयर चुना गया। वहीं आर.पी. शर्मा को सीनियर डिप्टी मेयर और हरपाल चन्नी को डिप्टी मेयर की जिम्मेदारी सौंपी गई।
चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद पंजाब आम आदमी पार्टी के अध्यक्ष अमन अरोड़ा, विधायक कुलवंत सिंह और पार्टी नेता डॉ. सन्नी आहलूवालिया ने सरबजीत समाना को बधाई दी और उनके सफल कार्यकाल की शुभकामनाएं दीं।
मेयर पद को लेकर पिछले कई दिनों से राजनीतिक चर्चाएं चल रही थीं। शुरुआत में डॉ. सन्नी आहलूवालिया को इस पद का मजबूत दावेदार माना जा रहा था। संगठन में उनकी मजबूत पकड़ और पार्टी नेतृत्व से करीबी संबंधों के चलते उनका नाम चर्चा में था, लेकिन अंतिम समय में राजनीतिक समीकरण बदले और सरबजीत समाना को उम्मीदवार बनाया गया।
बताया जा रहा है कि चुनाव से पहले विधायक कुलवंत सिंह ने पार्टी पार्षदों के साथ लगातार बैठकें कीं। नगर निगम चुनाव जीतने वाले कई पार्षद उनके करीबी सहयोगी माने जाते हैं, जिससे मेयर पद की दौड़ में उनके बेटे का पलड़ा भारी रहा।
पार्टी में एकजुटता बनाए रखने और किसी भी तरह के विवाद से बचने के लिए पंजाब आप अध्यक्ष अमन अरोड़ा खुद नगर निगम कार्यालय पहुंचे और उनकी मौजूदगी में पूरी चुनाव प्रक्रिया संपन्न हुई।
दूसरी ओर, मेयर चुनाव से पहले कांग्रेस ने चुनाव प्रक्रिया का बहिष्कार कर दिया, जबकि शिरोमणि अकाली दल के पार्षद बैठक के दौरान वॉकआउट कर गए। इसके चलते चुनावी माहौल काफी गर्म रहा।
चुनाव प्रक्रिया को शांतिपूर्ण और पारदर्शी ढंग से संपन्न कराने के लिए विशेष सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। गोपनीयता बनाए रखने के लिए सभी पार्षदों के मोबाइल फोन नगर निगम कार्यालय के बाहर जमा कराए गए और रिकॉर्ड दर्ज होने के बाद ही उन्हें बैठक कक्ष में प्रवेश दिया गया।
सरबजीत सिंह समाना के मेयर बनने के साथ ही मोहाली नगर निगम में आम आदमी पार्टी की पकड़ और मजबूत हो गई है। अब शहर के विकास कार्यों और नगर निगम की आगामी योजनाओं पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
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अकाली दल को बड़ा झटका! मनप्रीत इयाली ‘वारिस पंजाब दे’ में हुए शामिल
पंजाब की राजनीति में एक अहम घटनाक्रम सामने आया है। दाखा से शिरोमणि अकाली दल के विधायक मनप्रीत सिंह इयाली मंगलवार को औपचारिक रूप से ‘वारिस पंजाब दे’ संगठन में शामिल हो गए। उनके इस फैसले को पंजाब की पंथक राजनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।
संगठन में शामिल होने के बाद मनप्रीत सिंह इयाली ने कहा कि उन्होंने बिना किसी शर्त और पद की अपेक्षा के इस मंच का साथ चुना है। उनका उद्देश्य पंजाब की पंथक और क्षेत्रीय ताकतों को एकजुट करना तथा राज्य से जुड़े अहम मुद्दों को मजबूती से उठाना है।
इयाली ने स्पष्ट किया कि वह फिलहाल विधायक पद से इस्तीफा नहीं देंगे। उन्होंने कहा कि कानूनी और तकनीकी रूप से वह अभी भी शिरोमणि अकाली दल के विधायक हैं। उन्होंने बताया कि ‘वारिस पंजाब दे’ फिलहाल एक सामाजिक और संगठनात्मक मंच है, न कि चुनाव आयोग में पंजीकृत राजनीतिक दल, इसलिए विधायक पद छोड़ने का कोई सवाल नहीं उठता।
उन्होंने कहा कि पंजाब के कई महत्वपूर्ण मुद्दे लंबे समय से लंबित हैं, जिनमें राज्य के पानी का मुद्दा, पंजाबी भाषी क्षेत्रों का मामला, चंडीगढ़ पर पंजाब का अधिकार और अन्य क्षेत्रीय हित शामिल हैं। इन मुद्दों को नई ऊर्जा और मजबूती के साथ उठाया जाएगा।
मनप्रीत इयाली ने कहा कि पंजाब, पंजाबी पहचान और पंथक विचारधारा को मजबूत करने के लिए समान सोच रखने वाली सभी ताकतों को एक मंच पर आने की जरूरत है। उनके इस कदम के बाद पंजाब की राजनीति में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं और आने वाले समय में इसके राजनीतिक असर देखने को मिल सकते हैं।
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