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Mohali में बसेगी पंजाब की पहली एक्सपो सिटी:नोटिफिकेशन जारी, 6 महीने में होगा सोशल इम्पैक्ट सर्वे, पहला AI टावर यहीं बनेगा
पंजाब सरकार मोहाली में एयरपोर्ट के पास एक्सपो सिटी बसाएगी। यहां देश का पहला आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टावर बनेगा, जहां करीब 300 AI और टेक कंपनियां काम करेंगी। सरकार ने इस संबंध में जमीन एक्वायर करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। आवास एवं शहरी विकास विभाग ने इसके लिए 182.88 एकड़ जमीन एक्वायर करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
इसके साथ ही अब सोशल इंपेक्ट असेसमेंट (SIA) की शुरुआत होगी। यह अधिग्रहण प्रक्रिया राइट टू फेयर कंपेंसेशन एंड ट्रांसपेरेंसी इन लैंड एक्विजिशन, रिहैबिलिटेशन एंड रिसेटलमेंट एक्ट, 2013 के तहत की जा रही है। उम्मीद है कि यह प्रक्रिया जल्द पूरी होगी। सरकार की ओर से सफीपुर, लंडियाली, धरमगढ़ और रुड़का गांव शामिल किए गए हैं।
यह प्रोजेक्ट मास्टर प्लान के अनुसार प्लांड डेवलपमेंट के लिए है, जिसे एक्ट की धारा 2(1)(e) के तहत “पब्लिक पर्पस” माना गया है। इसलिए ग्राम सभा की सहमति की जरूरत नहीं है, लेकिन प्रभावित पंचायतों और जमीन मालिकों के साथ परामर्श अनिवार्य रहेगा। ऐसे में यह प्रक्रिया करीब छह महीने चलेगी।

सरकार द्वारा जारी नोटिफिकेशन की काॅपी।
एक्सपो सिटी में चार चीजों पर सुविधाएं मिलेंगी –
1. देश का पहला AI टावर बनेगा एक्सपो सिटी में भारत का पहला समर्पित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टावर बनेगा, जहां करीब 300 AI और टेक कंपनियां काम करेंगी। इससे हजारों रोजगार के अवसर पैदा होंगे और पंजाब में AI, स्टार्टअप्स और इनोवेशन को बड़ा बढ़ावा मिलेगा।
2. इंटरनेशनल स्टैंडर्ड एग्जिबिशन ग्राउंड करीब 10 एकड़ में विश्वस्तरीय प्रदर्शनी मैदान बनेगा, जहां बड़े ग्लोबल एक्सपो, कन्वेंशन, ट्रेड शो और इवेंट आयोजित हो सकेंगे। इसे दिल्ली के प्रगति मैदान जैसे मॉडल पर विकसित करने की योजना है।
3. 20 एकड़ मेगा मॉल करीब 20 एकड़ में एक बड़ा शॉपिंग मॉल और रिटेल कॉम्प्लेक्स बनाया जाएगा, जो कमर्शियल और लाइफस्टाइल हब के रूप में विकसित होगा।
4. कॉमर्शियल और बिजनेस जोन हाई FSI वाली जगह पर ऑफिस, होटल, हॉस्पिटैलिटी, रिटेल और अन्य बिजनेस सुविधाएं विकसित की जाएंगी। यह पंजाब का प्रमुख बिजनेस और इनोवेशन हब बनेगा।

मोहाली में एयरपोर्ट के पास एक्सपो सिटी स्थापित होगी।
सोशल इम्पैक्ट सर्वे में इन बातों की जांच होगी –
कितने परिवार इस प्रोजेक्ट से प्रभावित होंगे और क्या किसी को घर छोड़ना पड़ेगा।
निजी और सरकारी जमीन, मकान, बस्तियों या दूसरी संपत्तियों पर कितना असर पड़ेगा।
प्रोजेक्ट के लिए असल में कितनी जमीन जरूरी है।
अगर कहीं और जगह मिल सकती है तो उसका भी विकल्प देखा जाएगा।
समाज पर क्या असर पड़ेगा और खर्च के मुकाबले कितना फायदा होगा, इसका पूरा हिसाब लगाया जाएगा।
भूमि का ब्योरा (एकड़ में):
सफीपुर – 34.03
लंडियाली – 6.95
धरमगढ़ – 68.06
रुरका – 76.84
कुल: –182.88 एकड़

चंडीगढ़ एयरपोर्ट पर जाते लोग। फाइल फोटो
लैंड पूलिंग पॉलिसी बनाई गमाडा ने एक्सपो सिटी प्रोजेक्ट के लिए खास लैंड पूलिंग पॉलिसी लागू की है। जिन किसानों की जमीन ली जाएगी, उन्हें हर एक एकड़ के बदले 800 वर्ग गज का कमर्शियल प्लॉट, यानी एक्सपो सिटी में ही एक एससीओ दिया जाएगा। इसका मतलब यह है कि जमीन मालिकों को सीधे तौर पर एक महंगी और कमर्शियल जगह में हिस्सा मिलेगा, जिससे उन्हें अच्छा आर्थिक फायदा हो सकता है।
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7 साल बाद SAFF चैंपियन बना भारत, PM मोदी ने दी बधाई
भारतीय महिला फुटबॉल टीम ने 7 साल बाद SAFF महिला चैम्पियनशिप का खिताब अपने नाम कर लिया है। फाइनल मुकाबले में भारत ने बांग्लादेश को 3-1 से हराकर रिकॉर्ड छठी बार यह टूर्नामेंट जीता। यह मैच गोवा के मडगांव स्थित पंडित जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में खेला गया।
भारत की ओर से पियारी जाखसा, सनफिदा नोंगरूम और लिंडा कोम सेत्रो ने एक-एक गोल किया, जबकि बांग्लादेश के लिए एकमात्र गोल रितु पोर्ना ने किया। पियारी जाखसा ने 42वें मिनट में भारत को बढ़त दिलाई, लेकिन पहले हाफ के इंजरी टाइम में बांग्लादेश ने बराबरी कर ली। दूसरे हाफ में सनफिदा नोंगरूम के शानदार हेडर और 82वें मिनट में लिंडा कोम सेत्रो के गोल ने भारत की जीत सुनिश्चित कर दी।
पूरे टूर्नामेंट में भारतीय टीम का प्रदर्शन शानदार रहा। टीम ने अपने सभी चार मुकाबले जीते, 18 गोल किए और सिर्फ एक गोल ही खाया। इस जीत के साथ मौजूदा चैंपियन बांग्लादेश की लगातार तीसरी बार खिताब जीतने की उम्मीद भी टूट गई।
इस अवसर पर भारतीय टीम की अनुभवी खिलाड़ी डांगमेई ग्रेस ने अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल को अलविदा कह दिया। उन्होंने वर्ष 2012 में भारत के लिए पदार्पण किया था और 95 अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने के बाद अपने करियर का समापन एक और SAFF खिताब के साथ किया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय महिला टीम को इस ऐतिहासिक जीत पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि टीम ने पूरे टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन किया है और यह उपलब्धि देश की युवा खिलाड़ियों को फुटबॉल में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगी। प्रधानमंत्री ने टीम के उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं भी दीं।
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RBI का बड़ा फैसला! रेपो रेट 5.25% पर बरकरार, EMI में नहीं होगा इजाफा
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने पॉलिसी रेपो रेट को 5.25 फीसदी पर यथावत रखने का फैसला किया है। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने 3 से 5 जून तक चली MPC बैठक के बाद इसकी घोषणा की।
RBI के इस फैसले से होम लोन, कार लोन और अन्य रेपो रेट से जुड़े कर्जों की EMI में फिलहाल कोई बढ़ोतरी नहीं होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि रेपो रेट को स्थिर रखना कर्ज लेने वालों के लिए राहत की खबर है।
RBI गवर्नर ने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था इस समय कई चुनौतियों का सामना कर रही है। सप्लाई चेन में रुकावटें, ऊर्जा की बढ़ती कीमतें और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता का असर विकास दर और महंगाई दोनों पर पड़ सकता है।
इसके साथ ही RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की GDP वृद्धि दर के अनुमान में भी कटौती की है। पहले 6.9 फीसदी रखे गए अनुमान को घटाकर अब 6.6 फीसदी कर दिया गया है।
केंद्रीय बैंक के अनुसार चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में GDP वृद्धि दर 6.6 फीसदी, दूसरी तिमाही में 6.3 फीसदी, तीसरी तिमाही में 6.5 फीसदी और चौथी तिमाही में 6.8 फीसदी रहने का अनुमान है।
RBI ने यह भी चिंता जताई है कि इस वर्ष दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान सामान्य से कम बारिश हो सकती है। इसका असर कृषि उत्पादन और ग्रामीण क्षेत्रों में मांग तथा खपत पर पड़ सकता है।
हालांकि रेपो रेट को स्थिर रखने से आम लोगों को तत्काल राहत मिली है, लेकिन वैश्विक आर्थिक चुनौतियां और GDP वृद्धि दर के घटाए गए अनुमान आने वाले समय के लिए सतर्क रहने का संकेत दे रहे हैं।
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होर्मुज संकट के बीच तेल कंपनियों की चेतावनी, कच्चे तेल की कीमतों में आ सकता है बड़ा उछाल
दुनिया की बड़ी तेल कंपनियों और वित्तीय संस्थानों ने चेतावनी दी है कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) में जारी संकट लंबा खिंचता है तो आने वाले हफ्तों में कच्चे तेल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक स्तर पर इस्तेमाल योग्य तेल भंडार तेजी से घट रहे हैं, जिससे ऊर्जा बाजार पर दबाव बढ़ता जा रहा है।
अमेरिकी निवेश बैंक जेपी मॉर्गन की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2026 की शुरुआत में दुनिया के पास करीब 8.4 अरब बैरल तेल का भंडार था, लेकिन इसमें से केवल 0.8 अरब बैरल ही तत्काल इस्तेमाल के लिए उपलब्ध था। रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर होर्मुज मार्ग लंबे समय तक प्रभावित रहता है तो सितंबर तक कई देशों के वाणिज्यिक तेल भंडार खतरनाक स्तर तक नीचे पहुंच सकते हैं।
इस दौरान सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि तेल आपूर्ति प्रभावित होने के बावजूद अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें उम्मीद के मुताबिक नहीं बढ़ीं। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका द्वारा अतिरिक्त तेल आपूर्ति, रणनीतिक भंडारों के इस्तेमाल और अन्य स्रोतों से बाजार में आई सप्लाई के कारण कीमतों पर तुरंत असर नहीं पड़ा।
वहीं अमेरिकी तेल कंपनी शेवरॉन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी माइक वर्थ ने चेतावनी दी है कि अगले कुछ हफ्तों में तेल की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं। उन्होंने कहा कि सुरक्षा के लिए रखे गए अतिरिक्त तेल भंडार तेजी से खत्म हो रहे हैं और बाजार की संकट झेलने की क्षमता अब पहले से काफी कम हो चुकी है।
माइक वर्थ के मुताबिक जून और खासतौर पर जुलाई महीने में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि मध्य-पूर्व का संघर्ष लंबा चलता है तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा और कई देशों में आर्थिक मंदी का खतरा बढ़ सकता है।
इसी तरह संयुक्त अरब अमीरात की सरकारी तेल कंपनी ADNOC के प्रमुख सुल्तान अल-जाबेर ने कहा है कि भले ही संघर्ष खत्म हो जाए, फिर भी होर्मुज मार्ग से तेल की सामान्य आपूर्ति बहाल होने में कई महीने लग सकते हैं। उनका अनुमान है कि पूरी तरह सामान्य स्थिति 2027 से पहले लौटना मुश्किल हो सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि देश अपने रणनीतिक तेल भंडार दोबारा भरना शुरू करते हैं तो वैश्विक बाजार में मांग और बढ़ेगी, जिससे कीमतों पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा। ऐसे में आने वाले महीने वैश्विक तेल बाजार और विश्व अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
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