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पंजाब का आबकारी राजस्व लक्ष्य को पार करते हुए 11,782 करोड़ रुपये तक पहुँचा; चार वर्षों में वसूली लगभग दोगुनी: हरपाल सिंह चीमा
पंजाब के वित्त, योजना, आबकारी एवं कर मंत्री एडवोकेट हरपाल सिंह चीमा ने आज यहाँ घोषणा की कि आबकारी एवं कर विभाग ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए ठोस आबकारी नीति उपायों और कुशल प्रशासनिक कार्यप्रणाली के परिणामस्वरूप राजस्व संग्रह में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर हासिल किया है। उन्होंने बताया कि 11,200 करोड़ रुपये के संशोधित आबकारी राजस्व लक्ष्य के मुकाबले विभाग ने 31 मार्च, 2026 तक सफलतापूर्वक 11,782 करोड़ रुपये एकत्र किए, जो लक्ष्य से 582 करोड़ रुपये अधिक हैं।
व्यापक वित्तीय उपलब्धियों को साझा करते हुए वित्त मंत्री ने इस सफलता का श्रेय सीधे तौर पर राज्य सरकार के सक्रिय शासन और व्यापार-हितैषी नीतियों को दिया। इस ऐतिहासिक उपलब्धि को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा, “विशेष रूप से, पिछले चार वर्षों में आबकारी राजस्व लगभग दोगुना हो गया है, जो 6,254.84 करोड़ रुपये से बढ़कर 11,782 करोड़ रुपये तक पहुँच गया है, और वर्ष 2026-27 के लिए 12,800 करोड़ रुपये का नया लक्ष्य निर्धारित किया गया है। यह उपलब्धि पारदर्शिता और नियमों के अनुपालन को सुनिश्चित करते हुए राजस्व अधिकतम करने के प्रति विभाग की दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाती है।”
आगामी वित्तीय वर्ष की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए वित्त मंत्री ने रणनीतिक वित्तीय लक्ष्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए आबकारी नीति 10,520 करोड़ रुपये के अनुमानित लाइसेंस शुल्क लक्ष्य के साथ तैयार की गई है, जबकि वर्ष 2025-26 में यह 9,877 करोड़ रुपये था। यह उल्लेखनीय है कि राज्य के सभी 207 खुदरा शराब समूह वर्ष 2026-27 के लिए आवंटित किए जा चुके हैं, जो राज्य सरकार की आबकारी नीति में लाइसेंसधारकों के विश्वास को दर्शाता है। आबकारी नीति 2026-27 को समग्र रूप से उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिली है, जिसने राज्य के खजाने में राजस्व के निरंतर प्रवाह को बनाए रखने के साथ-साथ शराब व्यापार में स्थिरता सुनिश्चित की है।”
राज्य के राजस्व स्रोतों में लगातार हो रही वृद्धि पर चर्चा करते हुए वित्त मंत्री ने मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार की भविष्य की रणनीतियों पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “भविष्य की ओर देखते हुए, आबकारी विभाग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 12,800 करोड़ रुपये का महत्वाकांक्षी कुल राजस्व लक्ष्य निर्धारित किया है। पंजाब सरकार राजस्व संग्रह और नियामक दक्षता के बीच संतुलन बनाए रखते हुए, मजबूत प्रवर्तन, बेहतर अनुपालन प्रणालियों और रणनीतिक नीतिगत हस्तक्षेपों के माध्यम से इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए पूरी तरह आश्वस्त है।”
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अरविंद केजरीवाल और सीएम भगवंत मान ‘एक शाम भगवान शिव के नाम’ कार्यक्रमों में श्रद्धालुओं के साथ होंगे शामिल
सैर-सपाटा और सांस्कृतिक मामले विभाग के सलाहकार दीपक बाली ने सोमवार को आध्यात्मिक मूल्यों को प्रोत्साहित करने और पंजाब की समृद्ध धार्मिक तथा सांस्कृतिक विरासत को श्रद्धा के साथ मनाने के लिए अमृतसर, गुरदासपुर और बटाला में ‘एक शाम भगवान शिव के नाम’ शीर्षक के तहत तीन शानदार धार्मिक समारोहों के आयोजन की घोषणा की।
सनातन सेवा समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष विजय कुमार शर्मा के साथ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए बाली ने कहा कि मानव जीवन और समाज को गढ़ने में धर्म और आध्यात्मिकता महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब वेदों, रामायण, उपनिषदों, महाभारत, पुराणों और श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी से जुड़ी एक पवित्र धरती है और इस समृद्ध विरासत को संभालना तथा आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना मौजूदा पीढ़ी की जिम्मेदारी है।
बाली ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार सभी समुदायों की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को प्रोत्साहित करने और मनाने के लिए सकारात्मक प्रयास कर रही है। उन्होंने श्री गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी दिवस के सफल राज्य स्तरीय समारोहों और श्री गुरु रविदास जी के 650वें प्रकाश पर्व को समर्पित चल रहे समारोहों का विशेष रूप से जिक्र किया।
उन्होंने आगे कहा कि सरकार ने सनातन परंपराओं के प्रचार के लिए भी कई पहल की हैं। पहली बार पंजाब सरकार द्वारा हिंदू नव वर्ष (नव संवत्सर) मनाया गया। हाल ही में जालंधर में करवाए गए एक शानदार श्रद्धा भरपूर समारोह ‘एक शाम भगवान शिव के नाम’ को श्रद्धालुओं की ओर से भरपूर प्रतिक्रिया मिली, जहां उपस्थिति उम्मीदों से कहीं अधिक रही।
बाली ने यह भी जानकारी दी कि प्रदेश की तीर्थ यात्रा योजना के तहत तीन नए तीर्थ सर्किट जोड़े गए हैं, जिनमें खाटू श्याम सालासर, मथुरा-वृंदावन और हरिद्वार-ऋषिकेश शामिल हैं, जिससे अधिक श्रद्धालुओं को महत्वपूर्ण धार्मिक स्थानों के दर्शन करने की सुविधा मिलेगी। आगामी समारोहों की घोषणा करते हुए बाली ने बताया कि ‘एक शाम भगवान शिव के नाम’ कार्यक्रम 27 जून को रणजीत एवेन्यू ग्राउंड अमृतसर, 28 जून को सरकारी कॉलेज गुरदासपुर और 29 जून को एस.एल. बावा स्कूल ग्राउंड बटाला में करवाया जाएगा।
उन्होंने बताया कि भगवान शिव को समर्पित अपने भक्ति गीतों के लिए देशभर में जाने जाने वाले प्रसिद्ध भजन गायक हंसराज रघुवंशी इन तीनों समारोहों में अपनी प्रस्तुति देंगे। यह कार्यक्रम श्रद्धालुओं को एक आध्यात्मिक माहौल में लीन होने और भगवान शिव की आराधना करने का सुनहरा मौका प्रदान करेंगे। बाली ने आगे बताया कि ‘आप’ के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान भी इन समारोहों में श्रद्धालुओं के रूप में शिरकत करेंगे और इस आध्यात्मिक सभा का हिस्सा बनेंगे।
इस मौके पर बोलते हुए विजय कुमार शर्मा ने पंजाब में सनातन परंपराओं को बढ़ावा देने और मनाने के लिए मान सरकार द्वारा किए जा रहे लगातार प्रयासों के लिए धन्यवाद किया। उन्होंने धार्मिक मूल्यों को संभालने और लोगों, खासकर युवा पीढ़ी को अपनी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने के उद्देश्य से की गई सरकार की पहलों की सराहना की। उन्होंने अमृतसर, गुरदासपुर, बटाला और आसपास के इलाकों के लोगों से अपील की कि वे इन धार्मिक समारोहों में उत्साह से हिस्सा लें और इन्हें शानदार तरीके से सफल बनाएं।
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पंजाब सरकार का बड़ा फैसला, निजी स्कूलों की मनमानी पर लगेगी लगाम; 5% से अधिक फीस वृद्धि पर रोक
पंजाब सरकार ने निजी स्कूलों द्वारा की जा रही मनमानी फीस वृद्धि पर रोक लगाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में एक महत्वपूर्ण अध्यादेश को मंजूरी दी गई, जिसके तहत अब राज्य के निजी स्कूल हर साल 5 प्रतिशत से अधिक फीस नहीं बढ़ा सकेंगे।
कैबिनेट बैठक के बाद वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने बताया कि सरकार का उद्देश्य अभिभावकों को अनावश्यक आर्थिक बोझ से राहत देना और शिक्षा क्षेत्र में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि नए नियमों के लागू होने के बाद फीस वृद्धि को नियंत्रित किया जाएगा और निजी स्कूलों की मनमानी पर अंकुश लगेगा।
शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने कहा कि सरकार अभिभावकों के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने जानकारी दी कि जिन निजी स्कूलों ने पिछले तीन वर्षों के दौरान 15 प्रतिशत से अधिक फीस बढ़ाई है, उनसे वसूली गई अतिरिक्त राशि अभिभावकों को वापस करवाई जाएगी।
सरकार ने नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का भी प्रावधान किया है। नए नियमों के तहत प्राथमिक स्कूलों पर 50 हजार रुपये तक, हाई स्कूलों पर 2 लाख रुपये तक और वरिष्ठ माध्यमिक स्कूलों पर 5 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा।
पंजाब सरकार का कहना है कि यह फैसला लाखों अभिभावकों को राहत देने वाला साबित होगा। साथ ही शिक्षा क्षेत्र में जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ेगी तथा शिक्षा को व्यवसाय बनाने की प्रवृत्ति पर भी रोक लगेगी।
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पहली जुलाई को हर महिला के खाते में डाली जाएगी तीन महीने की ‘मांवां-धीयां सत्कार राशि’: CM भगवंत सिंह मान
महिला आर्थिक सशक्तिकरण की ओर ऐतिहासिक कदम बढ़ाते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने घोषणा की कि ‘मांवां-धीयां सत्कार योजना’ के लिए उलटी गिनती शुरू हो चुकी है और पहली जुलाई को महिलाओं के बैंक खातों में सीधे तीन महीने की सम्मान राशि की पहली किस्त जमा कर दी जाएगी। इस योजना के तहत अनुसूचित जाति की माओं-बहनों को ₹4,500 मिलेंगे, जबकि बाकी सभी श्रेणियों की महिलाओं को ₹3,000 दिए जाएंगे।
फतेहगढ़ साहिब हलके के गांव चनारथल कलां में विभिन्न विकास कार्यों का उद्घाटन करने के बाद ‘लोक मिलनी’ कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि यह पहल महिलाओं के सम्मान, वित्तीय सुरक्षा और सामाजिक सशक्तिकरण सुनिश्चित करने के लिए ‘आप’ सरकार की प्रतिबद्धता दर्शाती है। उन्होंने आगे कहा कि जब तक पंजाब में ‘आप’ सरकार रहेगी, यह सहायता बिना किसी रुकावट के जारी रहेगी।
फतेहगढ़ साहिब में ‘लोक मिलनी’ को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “नौ दिन बाद पहली जुलाई को 18 साल से अधिक उम्र की महिला लाभार्थियों के मोबाइल फोन पर उनके खातों में वित्तीय सहायता जमा होने के नोटिफिकेशन प्राप्त होंगे। जनरल श्रेणी से संबंधित महिलाओं को ₹1,000 प्रति माह, जबकि अनुसूचित जाति की महिलाओं को ₹1,500 प्रति माह मिलेंगे। यह पैसा बिना किसी मध्यस्थ के सीधे बैंक खातों में ट्रांसफर किया जाएगा। जो महिलाएं पहले से ही सामाजिक सुरक्षा पेंशन ले रही हैं, वे भी इस योजना के पात्र होंगी। पंजाब की लगभग 97 प्रतिशत महिलाओं को इस पहल का लाभ मिलने की उम्मीद है और पंजाब सरकार ने इसके लिए ₹9,300 करोड़ का बजट प्रावधान किया है।”
मुख्यमंत्री ने कहा, “यह वित्तीय सहायता शायद महिलाओं को अमीर न बनाए, लेकिन यह निश्चित रूप से उन्हें सम्मान, स्वाभिमान और आत्म-विश्वास देगी। महिलाएं सबसे अधिक सम्मान की हकदार हैं क्योंकि वे स्वयं जीवन की स्रोत हैं। माताओं-बहनों के आशीर्वाद दुनिया की हर चुनौती को पार करने में मदद करते हैं। घरेलू दर्जे को सुधारने, लिंग समानता को बढ़ावा देने और सामाजिक तथा आर्थिक फैसले लेने में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाने के लिए महिलाओं की वित्तीय स्वायत्तता को मजबूत करना बहुत जरूरी है। जब महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त होती हैं तो परिवार खुशहाल होते हैं और समाज आगे बढ़ता है।”
एक अन्य मुद्दे पर बोलते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “भारत चुनाव आयोग द्वारा चल रही एस.आई.आर. प्रक्रिया के दौरान पंजाब सरकार किसी भी असली वोट को काटने नहीं देगी। मैं लोगों को सचेत करना चाहता हूं कि भाजपा वैध वोटों को काटने के लिए एस.आई.आर. प्रक्रिया का दुरुपयोग करने की कोशिश कर सकती है, जैसा कि चुनाव वाले अन्य राज्यों में हुआ है। हालांकि, हम पूरी तरह से सतर्क हैं और भगवा पार्टी के नापाक इरादों को सफल नहीं होने देंगे। पंजाब के हर असली मतदाता की रक्षा की जाएगी।”
मुख्यमंत्री ने कहा, “मुझसे पहले के मुख्यमंत्री कभी भी आम लोगों से नहीं मिले। वे तापमान चेक करने के बाद ही अपने आलीशान घरों से बाहर आते थे। दूसरी तरफ मैं 24 घंटे लोगों के लिए मौजूद रहता हूं। जनता की सेवा मेरे लिए कोई कभी-कभी की जाने वाली गतिविधि नहीं है, यह मेरी जिम्मेदारी है।”
पिछली सरकारों पर तंज कसते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “इन नेताओं ने अपने सरकारी पदों का दुरुपयोग करके अथाह संपत्ति इकट्ठी की और बड़े-बड़े महल बनाए। उनकी आलीशान रिहायशों की दीवारें ऊंची थीं और उनके दरवाजे आम लोगों के लिए बंद रहते थे। वे जनता की पहुंच से दूर रहे और आखिरकार लोगों ने उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया। जब नेता लोगों की बात सुनना बंद कर देते हैं तो लोग भी आखिरकार उन नेताओं को सुनना बंद कर देते हैं।”
“पंजाब के लोगों ने उन लोगों को बार-बार नकारा है, जिन्होंने उन्हें बारी-बारी से लूटा। इन नेताओं ने आम लोगों को लंबे समय तक मूर्ख बनाया, लेकिन पंजाबी अब इतने अकलमंद हो गए हैं कि वे ऐसे लोगों के भ्रमित करने वाले प्रचार से प्रभावित नहीं होते। इन हौव्वे से भरे सियासतदानों ने हमेशा पंजाब के लोगों को हल्के में लिया, जिसकी वजह से अंत में उन्हें इसकी राजनीतिक कीमत चुकानी पड़ी। आज ये नेता निराशा की स्थिति में हैं क्योंकि लोग उन्हें कोई साथ नहीं दे रहे।” मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि ऐसे नेताओं का पूरा एजेंडा शुरू से ही लोगों की भलाई की बजाय अपने परिवारों के हितों के लिए रहा है।
पिछली सरकारों के नेताओं पर शाब्दिक हमला जारी रखते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “ये नेता पहाड़ों के कॉन्वेंट स्कूलों में पढ़े हैं, जो जमीनी हकीकतों से पूरी तरह अनजान हैं। ये नेता अपने पैसों, जायदादों और यहां तक कि अपनी बसों से भी अनजान रहे हैं। अपने शासनकाल के दौरान इन्होंने सूबे भर के सफल उद्यमों में गैर-कानूनी तरीके से हिस्सेदारी हासिल करके लोगों का शोषण किया। ऐसे कामों ने ही पंजाब को पीछे धकेल दिया। इन नेताओं ने सूबे को बर्बाद कर दिया और इनके हाथ नौजवानों के खून से रंगे हुए हैं।”
अपनी सरकार के बारे में बात करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “यह बहुत गर्व और संतुष्टि की बात है कि पंजाब का विकास फिर से पटरी पर आ गया है। पंजाब सरकार हर आते दिन अपनी विकास की गति को तेज कर रही है। उन्होंने कहा कि हमने लगभग सत्तर सालों के खालीपन को पाटा है और रंगला पंजाब बनाने के लिए ठोस प्रयास कर रहे हैं।”
“आप सरकार शायद देश की पहली ऐसी सरकार है जो जनता के घोषणापत्र को सही मायनों में लागू कर रही है। लोगों द्वारा उठाई गई हर वास्तविक और जायज़ मांग को पूरा किया जा रहा है। उन्होंने आगे कहा कि हम केवल चुनाव जीतने के लिए वादे नहीं करते, बल्कि जिम्मेदारी मिलने के बाद उन्हें पूरा भी करते हैं।
शिरोमणि अकाली दल के नेतृत्व पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “सुखबीर सिंह बादल पंजाब की जमीनी हकीकतों से कोसों दूर हैं, क्योंकि उन्होंने अपना पूरा जीवन ऐशो-आराम और सुविधाओं के वातावरण में बिताया है। वे पंजाब में सत्ता हासिल करने के लिए तो उतावले हैं, लेकिन उन्हें राज्य की मूलभूत भौगोलिक स्थिति तक की जानकारी नहीं है।”
उन्होंने कहा कि यदि यह बात भी छोड़ दी जाए, तो पूर्व उपमुख्यमंत्री पंजाब में उगाई जाने वाली सामान्य फसलों के बीच का अंतर भी नहीं बता सकते। उन्हें आम लोगों से जुड़े मुद्दों की बहुत कम समझ है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “जो व्यक्ति पंजाब को समझता ही नहीं, वह अपने नेतृत्व में राज्य को आखिर कैसे चला सकता है?”
मुख्यमंत्री ने आगे कहा, “इन नेताओं द्वारा किए गए पाप क्षमा योग्य नहीं हैं। पंजाब के लोग इनके कुकर्मों के लिए इन्हें कभी माफ नहीं करेंगे। इन नेताओं ने पंजाब के सीने पर जो घाव दिए हैं, वे आज भी लोगों के मन में ताज़ा हैं।” उन्होंने कहा, “ये अवसरवादी नेता हैं, जो अपनी सुविधा और राजनीतिक हितों के अनुसार गिरगिट की तरह रंग और रुख बदल लेते हैं। इन्होंने पंजाब में गैंगस्टरों को संरक्षण दिया और नशा तस्करों को बचाकर युवाओं की नसों में नशा भरने का काम किया। पंजाब के लोग इसे कभी नहीं भूलेंगे।” मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “अकाली नेतृत्व एक बार फिर पंजाब के लोगों को गुमराह करने के लिए हवाई किले बना रहा है। हालांकि, पंजाब के लोग ऐसे भ्रामक प्रचार से प्रभावित नहीं होंगे। लोग अकालियों को उनके पापों के लिए कभी माफ नहीं करेंगे और एक बार फिर उन्हें उचित सबक सिखाएंगे।”
जगत ज्योत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार संशोधन अधिनियम, 2026 का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “मैं परमात्मा का आभारी हूं, जिसने मुझे यह ऐतिहासिक कानून लागू करने का अवसर दिया। पिछली सरकारों के दौरान जब भी श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी की घटनाएं हुईं, तब दुनिया भर में करोड़ों श्रद्धालुओं और सिख समुदाय की भावनाओं को गहरी ठेस पहुंची।”
उन्होंने कहा, “सर्वशक्तिमान परमात्मा ने मुझे कानूनी विशेषज्ञों से व्यापक विचार-विमर्श के बाद यह विधेयक लाने की समझ और शक्ति प्रदान की। हमने इस कानून का मसौदा पूरी सावधानी और गहराई से तैयार किया है ताकि भविष्य में कोई संशोधन या कानूनी खामी इसे कमजोर न कर सके। यह कानून समाज विरोधी तत्वों के खिलाफ एक मजबूत निवारक के रूप में काम करेगा और यह सुनिश्चित करेगा कि भविष्य में कोई भी ऐसा घृणित अपराध करने का साहस न कर सके।”
उन्होंने कहा, “वर्षों से लोग यह कहकर सजा से बचते रहे हैं कि वे मानसिक रूप से अस्वस्थ हैं या मानसिक बीमारी से पीड़ित हैं। ऐसी दलीलों का अक्सर जवाबदेही से बचने के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है और अपराधी खुलेआम घूमते रहे। हमने कानून बनाते समय इस मुद्दे को गंभीरता से ध्यान में रखा है।”
ऐसे दावों पर सवाल उठाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “यदि कोई वास्तव में मानसिक रूप से बीमार है, तो वह केवल श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी को ही क्यों निशाना बनाता है? वह रेल इंजन के नीचे क्यों नहीं आ जाता या बिजली की तारों को क्यों नहीं पकड़ता? सच्चाई यह है कि ऐसी अनेक घटनाएं जानबूझकर और सुनियोजित ढंग से की गई थीं।”
मुख्यमंत्री ने कहा, “इसीलिए हमने कानून में यह प्रावधान शामिल किया है कि यदि किसी व्यक्ति को चिकित्सकीय रूप से मानसिक रोगी घोषित किया गया हो, तो उसके माता-पिता, अभिभावक या देखभाल करने वाले भी आपराधिक आरोपों का सामना करेंगे। सजा से बचने की कोशिश करने वाले किसी भी व्यक्ति के लिए कोई ढील नहीं होगी।” अकाली नेतृत्व पर एक और हमला करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “जब वे सत्ता में थे, तब उन्होंने कभी भी ऐसा कानून बनाने के प्रति ईमानदारी नहीं दिखाई। सच्चाई यह है कि उनके इरादे ही गलत थे। उनके कार्यकाल में बेअदबी की घटनाएं हुईं और वे न्याय दिलाने में पूरी तरह विफल रहे। उन्होंने ऐसी घटनाओं को इसलिए होने दिया क्योंकि वे उनसे राजनीतिक लाभ प्राप्त करना चाहते थे।”
मुख्यमंत्री ने आगे कहा, “उन्होंने श्री अकाल तख्त साहिब के समक्ष अपनी गलतियां स्वीकार कीं, लेकिन बाद में सार्वजनिक रूप से उनसे मुकर गए। जो लोग तख्त के सामने झूठ बोल सकते हैं, वे किसी के भी वफादार नहीं हो सकते। लोगों को ऐसे नेताओं से सावधान रहना चाहिए जिनका एकमात्र उद्देश्य सत्ता हासिल करना और राज्य को लूटना है।” मुख्यमंत्री ने कहा, “अकालियों ने अपने निजी हितों के लिए धर्म का दुरुपयोग किया। जत्थेदारों की नियुक्तियां अकालियों की पसंद और प्रभाव से की जाती हैं, इसलिए उनमें से कई राजनीति में सक्रिय हैं। इन लोगों के पास पंजाब के लिए कोई एजेंडा नहीं है। उनका एकमात्र उद्देश्य किसी भी तरह मुझे बदनाम करना है। हालांकि, लोग उनके वास्तविक चरित्र को जानते हैं और उनकी ऐसी नाटकबाजियों से कभी प्रभावित नहीं होंगे।”
कांग्रेस पर हमला करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “कांग्रेस पार्टी अपनी अंतिम सांसें गिन रही है और जल्द ही अप्रासंगिक हो जाएगी, क्योंकि उसके पास पंजाब के लिए न कोई दृष्टिकोण है और न ही भविष्य के लिए कोई रोडमैप। उसका एकमात्र उद्देश्य सत्ता हासिल करना और राज्य की संपत्ति को लूटना है, लेकिन उसका यह सपना कभी पूरा नहीं होगा।” उन्होंने कहा, “कांग्रेस गुटबाजी की शिकार है। वह अपने ही आंतरिक संघर्षों के कारण समाप्त हो रही है। विडंबना यह है कि जो वरिष्ठ कांग्रेसी नेता इन झगड़ालू गुटों को एकजुट करने के लिए पंजाब आते हैं, उन्हें उन नेताओं के नामों का सही उच्चारण तक नहीं आता, जिनमें वे समझौता कराने की कोशिश कर रहे होते हैं। आज पार्टी की यही स्थिति है।”
राज्य सरकार की जनकल्याणकारी पहलों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “सरकारी खजाने का एक-एक पैसा लोगों के कल्याण पर खर्च किया जा रहा है। पंजाब के 90 प्रतिशत से अधिक घरों को मुफ्त बिजली मिल रही है। किसानों को दिन के समय बिजली आपूर्ति दी जा रही है, जो पहले कभी नहीं हुई।” मुख्यमंत्री ने कहा, “एक ऐसे समय में जब देशभर में सार्वजनिक संपत्तियों को केंद्र सरकार द्वारा चुनिंदा कॉर्पोरेट घरानों को बेहद कम कीमतों पर सौंपा जा रहा है, पंजाब सरकार ने एक निजी थर्मल प्लांट खरीदकर और उसका नाम श्री गुरु अमरदास जी के नाम पर रखकर इतिहास रचा है। यह सार्वजनिक संपत्तियों की रक्षा और लोगों की सेवा के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।”
स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधारों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “पंजाब सरकार ने मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना शुरू की है, जो देश में अपनी तरह की पहली योजना है। इसके तहत पंजाब के प्रत्येक निवासी परिवार को 10 लाख रुपये तक का कैशलेस चिकित्सा उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है।” मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “यह अत्यंत गर्व और संतोष की बात है कि पंजाब भारत का पहला राज्य बन गया है जिसने इतनी व्यापक स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान की है। इस ऐतिहासिक पहल ने परिवारों पर आर्थिक बोझ को काफी कम किया है और सभी के लिए गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित की हैं। इस योजना का उद्देश्य पंजाब के प्रत्येक परिवार को सार्वभौमिक स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान करना है और अब तक लोग इस योजना के तहत 650 करोड़ रुपये से अधिक का मुफ्त इलाज प्राप्त कर चुके हैं।”
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